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Money invest in the name of software in gov.hospital ,Bhopal

Government hospitals of Bhopal spent about Rs 6 crore in the name of their own software citing the convenience of patients

13.07.2022
शहर के सरकारी अस्पताल मुफ्त की कोई भी चीज पसंद नहीं करते। यही वजह है कि अस्पतालों का कामकाज निर्धारित करने के लिए केन्द्र के मुफ्त के पोर्टल का उपयोग नहीं करना चाहते। शहर के सरकारी अस्पतालों ने मरीजों की सुविधा का हवाला देकर खुद के सॉफ्टवेयर के नाम पर करीब 6 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। हमीदिया से लेकर एम्स और अन्य सरकारी अस्पतालों ने राशि तो खर्च कर दी, लेकिन अपने स्तर पर जो पोर्टल तैयार कराए वे फिलहाल तो काम नहीं कर रहे।

हमीदिया अस्पताल: खर्च किए 2.5 करोड़ रुपए:
हमीदिया में तीन साल पहले हेल्थ इंफॉर्मेशन एंड मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया था। दावे हुए थे कि पूरे काम ऑनलाइन होंगे। यही नहीं इस सॉफ्टवेयर को सरकारी एजेंसी 25 लाख में तैयार कर रही थी, लेकिन प्रबंधन ने निजी एजेंसी को 2.5 करोड़ रुपए दे दिए। इसके बावजूद अब तक सॉफ्टवेयर तैयार नहीं है।

एम्स:फर्जीवाड़ा ऐसा कि हो गई जांच
एम्स भोपाल में भी सॉफ्टवेयर के निर्माण के दौरान फर्जीवाड़ा हुआ। एम्स प्रबंधन ने अपने सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए सरकारी एजेंसी को 86 लाख रुपए जारी किए, लेकिन चार साल तक सॉफ्टवेयर का निर्माण नहीं हो पाया। इसके बाद एम्स मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने निजी एजेंसी को सॉफ्टवेयर का ठेका दे दिया।

अन्य अस्पतालों में भी खुद के सॉफ्टवेयर फेल:
जेपी अस्पताल में भी सॉफ्टवेयर तैयार किए गए। उस दौरान यह प्रचारित किया गया कि प्रदेश का पहला अस्पताल जहां मिलेगी कतारों से आजादी, लेकिन स्थिति अब भी वैसी ही है। वहीं गैस राहत विभाग के सभी अस्पतालों और बीएमएचआरसी में भी सॉफ्टवेयर तैयार किए गए, जो अब तक अधूरे ही हैं।

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MCD,hospitals buildings damage in delhi

The dilapidated buildings of MCD hospitals in Delhi will be investigated, committee constituted

12.07.2022
दिल्ली नगर निगम के अस्पतालों का बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार पिछले कुछ महीनों से सुर्खियां बना हुआ है। इस बीच दिल्ली की एकीकृत नगर निगम के द्वारा अपने अंतर्गत आने वाले सभी अस्पतालों की जो इमारतों है उनकी जांच के मद्देनजर एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई। यह पूरी कमेटी अगले एक महीने में जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।बता दें कि बीते दिनों निगम के सबसे बड़े मेटरनिटी अस्पताल कस्तूरबा में ऊपरी मंजिल के पिछले हिस्से का छज्जा गिर जाने की वजह से बड़ा विवाद हुआ था।इस घटना से पहले भी इस तरह के हादसे निगम के अस्पतालों में होते रहे हैं, चाहे निगम के अंतर्गत आने वाला राजन बाबू टीबी अस्पताल हो या फिर हिंदू राव अस्पताल या फिर मेटरनिटी अस्पताल कस्तूरबा अस्पताल तीनों ही अस्पतालों में लगातार एक के बाद एक खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के बदहाल हालत को लेकर खबर सामने आ रही हैं। हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते कुछ महीनों में लगभग तीन बार कस्तूरबा अस्पताल में छज्जे नीचे गिरने की खबर अखबारों की सुर्खियां बन चुकी हैं।जिसे देखते हुए निगम के विशेष अधिकारी और कमिश्नर के द्वारा विशेष कमेटी का गठन कर एमसीडी के सभी अस्पतालों की इमारतों की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।

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Smart patking in jaipuria hospital

Facility in government hospital for the first time, smart parking in Jaipuria, 600 vehicles can be parked simultaneously

11.07.2022
राजधानी में पहली बार किसी सरकारी अस्पताल में स्मार्ट पार्किंग बनाई गई है। जयपुरिया में 12.41 करोड़ से 1150 स्क्वायर फीट में बनाई गई पार्किंग में एक साथ 600 वाहन (160 कार और 435 दो पहिया) खड़े हो सकेंगे। एंट्री करते ही डिस्प्ले बोर्ड से पता चल जाएगा कि पार्किंग के लिए जगह है या नहीं? साथ ही, आग लगने पर ऑटोमेटिक सेंसर आग पर काबू पा लेगा। पार्किंग स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बनाई गई है। निगम ने पार्किंग बीओटी (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर) मॉडल के तहत तैयार की है। जल्द ही इसे लाेगाें के लिए खोल दिया जाएगा। ग्राउंड फ्लाेर पर मेडिकल दुकानें भी बनाई जाएंगी।

1 लाख ली. का टैंक, स्प्रिंकलर से आग बुझाई जा सकेगी

आग लगने पर स्प्रिंकलर से बुझाई जाएगी। इसमें जगह-जगह सेंसर लगाए गए हैं। पार्किंग की छत पर 1 लाख लीटर पानी का टैंक है। जैसे ही पार्किंग में आग या धुंआ उठता है तो ये सेंसर एक्टिव हो जाएंगे। सायरन बजना शुरू हो जाएगा। दूसरी ओर, पार्किंग शुरू होने से सड़कों पर जाम नहीं लगेगा। शुरूआत में पार्किंग 25 साल के लिए दी जाएगी। जयपुरिया के अधीक्षक डॉ. महेश मंगल का कहना है कि अस्पताल में स्मार्ट पार्किंग बन कर तैयार हाे गई है। जल्द ही इसे लाेगाें के लिए शुरू की जाएगी।

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Dengue cases increases in jaipur

Dengue cases cross three hundred in government and private hospitals of Jaipur

04.07.2022
मानसून की दस्तक के साथ ही मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी में मच्छर काटने, दूषित पानी और खाद्य पदार्थों के सेवन से बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक ओपीडी में आ रहे 30 से 40 फीसदी मरीज डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू, स्क्रब टायफस, डायरिया, फूड पॉइजनिंग, चिकनगुनिया, वायरल समेत कई मौसमी बीमारियों से ग्रस्त होकर आ रहे हैं। इनमें पीलिया, तेज बुखार, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, खांसी, निमोनिया, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में दिक्कत समेत कई लक्षण मिल रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि समय से यदि इन बीमारियों की रोकथाम और उपचार न किया जाए तो हालात बिगड़ सकते हैं। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों की बात करें तो जिले में अब तक डेंगू के मरीज 300 पार हो गए हैं। इससे ग्रस्त चार लोगों की मौत भी हो चुकी है। जिले में सर्वाधिक डेंगू के मरीज परकोटे में 37 मिले हैं।

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Paramedical exams were be held by new service rules in raj.

Rajasthan government has made preparations to make service rules for ten types of paramedical courses, recruitment to these posts through examination soon

04.07.2022
ऑपरेशन थिएटर, कैथ लैब, डायलिसिस, ब्लड बैंक जैसे पैरामेडिकल कोर्सेज कर रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने दस तरह के पैरामेडिकल कोर्सेज के सेवा नियम बनाने की तैयारी कर ली है। इससे अब इन कोर्स को करने के बाद विद्यार्थियों की सरकारी नौकरी लग सकेंगे। केबिनेट से मुहर लगना बाकी है।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की मंशा के बाद चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने भी कवायद तेज कर दी है। मौजूदा स्थिति में मेडिकल लैब टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर, ईसीजी टेक्नीशियन और ऑफ्थेल्मिक टेक्नीशियन के ही सेवा नियम बने हुए हैं। हालांकि राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल ने सरकार को 10 तरह के पैरामेडिकल कोर्स के लिए सेवा नियम बनाने के प्रस्ताव भेजा है। इधर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल लैब टेक्नीशियन के 900 और असिस्टेंट रेडियोग्राफर के 800 पदों पर भर्ती कराने के लिए कर्मचारी चयन बोर्ड को अभ्यर्थना भेजी है।

यह है,10 पैरामेडिकल कोर्स
ओटी टेक्नीशियन, कैथ लैब, डायलिसिस टेक्नीशियन, ब्लड बैंक, एंडोस्कोपी टेक्नीशियन आर्थोपेडिक टेक्नोलोजी, ईईजी टेक्नीशियन, इमरजेंसी एंड ट्रोमा केयर टेक्नीशियन, परफ्यूजन टेक्नी. ऑडियोमीट्रिक टेक्नीशियन।राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल की ओर से प्रदेश में 11 तरह के कोर्स संचालित करती है। इनमें हर साल 7 हजार 500 सीटों पर प्रवेश दिया जाता है। मौजूदा स्थिति में पैरामेडिकल काउंसिल में पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या करीबन दस हजार है। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय भी पैरामेडिकल में डिग्री कोर्सेज करा रही है। निदेशक (अराजपत्रित) सुरेश नवल का कहना है कि कुछ पैरामेडिकल कोर्सेज के सेवा नियम बनाने का प्रोसेस चल रहा है। जिससे कोर्स कर रहे छात्रों को फायदा मिल सकेगा।

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CMHO qualification changed in rajasthan

Rajasthan government has changed the qualifications and parameters for the post of Chief Medical Health Officer (CMHO), based on the new rules, 21 out of 34 CMHOs do not have the qualifications for the post, hence their removal is decided.

27.06.2022
राज्य सरकार ने पिछले दिनाें जिलों में सबसे बड़े हेल्थ ऑफिसर यानी सीएमएचओ (चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर) पद की योग्यता व मापदंडों में बदलाव किया है। अब नए नियमों के आधार पर 34 में से 21 सीएमएचओ के पास पद की योग्यता नहीं है। इसलिए इनका हटना तय है।सरकार ने नए सीएमएचओ लगाने के लिए पूल बना दिया है, जिसमें पूरे प्रदेश से 89 डॉक्टर शामिल किए हैं। नियमों की वजह से कई साल से एक ही जगह लगे जयपुर प्रथम सीएमएचओं डाॅ. नराेत्तम शर्मा, जाेधपुर के डाॅ. बलवंत मंडा, झुंझुनूं के छाेटेलाल गुर्जर, पाली के डाॅ. रामपाल मिर्धा और नागाैर सीएमएचओ डाॅ. मेहराम महिया काे पद से हटना पड़ेगाइन जिलाें में शाॅर्ट लिस्ट किए गए 89 डाॅक्टराें में से नियुक्ति की जाएगी। सूत्राें के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने सरकार की फ्लैगशिप याेजनाओं काे गति देने के लिए सीएमएचओं पद की याेग्यता निर्धारित की है, ताकि अयाेग्य डाॅक्टर इस महत्वपूर्ण पद काे नहीं संभाल सके।इसके लिए विभाग ने 15 मार्च काे परिपत्र जारी करते हुए 31 मार्च तक सीएमएचओ पद के याेग्य डाॅक्टराें से आवेदन मांगे थे। अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी काे सीएमएचओं पद के लिए पूल बनाने का जिम्मा साैंपा था। पिछले दिनाें हुई मीटिंग में कमेटी ने सिर्फ 89 डाॅक्टराें काे ही पात्र माना है। पूल में 21 जिलाें के सीएमएचओ के नाम नहीं हैं। ऐसे में इन्हें पद से हटाया जाएगा।स्वास्थ्य विभाग ने जाे पूल बनाया है, उसमें सीकर के 5 डाॅक्टर हैं। डाॅ. विष्णुदयाल मीना फिलहाल प्रतापगढ़ सीएमएचओं, जबकि डाॅ. सीपी ओला सीकर डिप्टी सीएमएचओं हैं। जयपुर द्वितीय में एडिशनल सीएमएचओं डाॅ. निर्मल जैन हैं।सांभर सीएचसी पर कार्यरत डाॅ. अनिल कुमार और जाेधपुर की सालावास सीएचसी पर नियुक्ति डाॅ. मदनलाल कटारिया मूलत: सीकर जिले के हैं और सीएमएचओं के पूल में शामिल किए हैं।

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New scheme medicep approved in kerala

Kerala Chief Minister Pinarayi Vijayan government has approved comprehensive medical insurance for government employees, pensioners and their dependents from July 1 under the new scheme ‘Medicep’ at a monthly premium of just Rs 500.

25.06.2022
केरल में सरकारी कर्मियों, पेंशनभोगियों एवं उनके आश्रितों को अब सरकार की नई योजना ‘मेडिसेप’ के तहत महज 500 रुपये के मासिक प्रीमियम पर समग्र मेडिकल बीमा मिलने वाला है। राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन सरकार ने एक जुलाई से ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के माध्यम से इस बहुप्रतीक्षित ‘कैशलेस’ मेडिकल सहायता को लागू करने की मंजूरी दी है।
अवर मुख्य सचिव (वित्त) राजेश कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार सरकारी कर्मियों, पेंशनभोगियों/ परिवार पेंशनभोगियों एवं उनके परिवारों के पात्र सदस्यों के अलावा सरकारी विश्वविद्यालयों के कर्मी और पेंशनभोगी, मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, मुख्य सचेतक, विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष आदि के सीधे नियुक्त किए गए निजी स्टाफ भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

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Arbitrary recovery from Ayushman card holders in Bhopal and recovery of huge amount from the government by telling fake patients to be admitted

15.06.2022
आयुष्मान कार्ड धारकों से मनमानी वसूली व फर्जी मरीजों को भर्ती बताकर सरकार से मोटी रकम वसूलने की शिकायतों के बाद मंगलवार को स्टेट हेल्थ काउंसिल की 22 टीमों ने शहर के 47 अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। ये सभी अस्पताल आयुष्मान भारत निरामयम से इम्पैनल्ड हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार इनमें से 12 अस्पतालों में गड़बड़ियां मिली हैं, जिसके आधार पर इन्हें आयुष्मान योजना से बाहर किया जाएगा।खजूरीकलां रोड पर कृष्णा नगर स्थित वैष्णो मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में गत 31 मई को फर्जी मरीजों के नाम पर आयुष्मान योजना के तहत सरकार से पैसे लेने का मामला उजागर हुआ था। इसके बाद काउंसिल के कॉल सेंटर पर कई लोगों ने शिकायत दर्ज कराई कि उनसे भी आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पतालों में जमकर लूट हुई।आयुष्मान भारत योजना मप्र के सीईओ अनुराग चौधरी ने बताया कि इन शिकायतों के मद्देनजर मंगलवार को भोपाल के 47 अस्पतालों में 22 टीमें भेजी गईं। योजना से जुड़े अस्पतालों का रिकॉर्ड चैक किया गया। वहां भर्ती आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों से पूछताछ की गई। साथ ही स्टेट हेल्थ काउंसिल के पोर्टल पर अस्पताल द्वारा दर्ज किए गए मरीजों और वास्तविक भर्ती मरीजों की संख्या का मिलान किया गया।

Now it is necessary to have Jan Aadhaar for free treatment in government hospitals of Rajasthan.

10.06.2022
राज्य भर में 1 मई से शुरू हुए एमएमएनएनआरएस के तहत सरकारी अस्पतालों में मुफ्त ओपीडी और आईपीडी सुविधाओं सहित मुफ्त सुविधाओं का लाभ उठाने के इच्छुक मरीजों को अपने साथ अपना जन आधार कार्ड रखना होगा। अब तक राज्य के अस्पताल मरीजों के पंजीकरण के लिए आधार कार्ड की मांग कर रहे थे। राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर पृथ्वी राज ने बताया है कि जन आधार कार्ड के जरिए राज्य सरकार रोगों का रिकॉर्ड रखेगी। इसके अलावा मुफ्त स्वास्थ्य योजना का लाभ ले रहे सभी मरीजों के इलाज और उनके डायग्नोस्टिक टेस्ट का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा। जन आधार के जरिए उन मरीजों के बारे में भी पता चल सकेगा जो चिरंजीवी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम, मुफ्त दवा योजना, मुफ्ता जांच योजना समेत अन्य विभिन्न योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।एक खास बात यह भी है कि जिन लोगों के पास जन आधार कार्ड नहीं है उनके लिए भी स्वास्थ्य विभाग ने अलग से इंतजाम किया है। अगर ऐसे मरीज खुद अस्पताल में जन आधार कार्ड के लिए रजिस्टर कराते हैं तो उन्हें मेडिकल सुपरीटेन्डेंट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी इलाज में छूट प्रदान कर सकते हैं।

राजस्थान : गैर सेवारत पीजी स्टूडेंट्स लगा रहे सरकार और आमजन को चूना

राजस्थान : गैर सेवारत पीजी स्टूडेंट्स लगा रहे सरकार और आमजन को चूना

पी.जी कोर्स मे अनिवार्य सरकारी सेवा के बांड की हो रही अवहेलना
राजस्थान सरकार गैर सरकारी चिकित्सकों को मुफ्त में पीजी करवाती है, ऊपर से तनख्वाह(stipend) और देती हैं, बदले में केवल इतना चाहती हैं कि ये चिकित्सक कोर्स पूरा करने के बाद पांच साल तक प्रदेश में ही आवश्यक रूप से सेवा दें, इसकी गारंटी के रूप में वो एडमिशन देते समय प्रत्येक चिकित्सक से 25 लाख का बांड भरवाती है, या तो पांच साल सेवा दो या फिर 25 लाख जमा करवाओ, तभी ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स वापस मिलेंगे । लेकिन हो क्या रहा है कि ना तो ये चिकित्सक सेवा दे रहे हैं और ना ही 25 लाख जमा करवाए हैं, बस आराम से गायब हो गए हैं । उदाहरण के तौर पर देखें तो चार साल पहले राज्य सरकार ने मेडिकल की पीजी सीटों में एडमिशन के वक्त सरकारी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अनिवार्य सरकारी सेवा के पच्चीस लाख के अनुबंध पत्र (बांड) भरवाए  (सम्बंधित कागजात संलग्न हैं)।
पिछले साल पूरे राज्य से सरकारी मेडिकल कॉलेज से सैंकड़ों डॉक्टर पीजी करके चले गए लेकिन सरकार एक पीजी डिग्री धारी डॉक्टर से बांड भरवाने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों को तीन साल की अनिवार्य सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं दे पाई। सर्विस बॉन्ड के साथ पीजी डॉक्टर्स का एक बैच पास आऊट हो चूका है, तथा प्रिंसिपल एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बाॅन्ड तथा शपथ पत्र की पालना करवाये बगैर औरीजिनल डिग्री प्रमाण पत्र दे दिये, इस मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ।
बॉन्ड की पालना कराने में चिकित्सा शिक्षा विभाग कोई खास रूचि नहीं दिखा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज मे सस्ती दरों पर चिकित्सा शिक्षा लेने वाले डॉक्टर्स ना तो आमजन की सरकारी अस्पतालों में सेवा कर रहे हैं और ना ही बॉन्ड की राशि जमा करवा रहे हैं। जिससे सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है। सरकार को उक्त बांड की राशि प्रिंसिपल अथवा चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से वसूलनी चाहिए या आमजन को सेवाएं दिलानी चाहिए।
चूंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास पीजी पास आऊट की लिस्ट रहती है। अगर चिकित्सा शिक्षा विभाग समय रहते, स्वास्थ्य भवन को सूची उपलब्ध करवा देता है। तो स्वास्थ्य भवन पद्स्थापन कर सकता है। परंतु गत वर्ष स्वास्थ्य भवन को फ्रैशर्स के पद्स्थापन बाबत कोई सूची नहीं पहुंचाई गयी थी। जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बाॅन्ड की सख्त पालना हो रही है। लेकिन दूसरे प्रदेशों से चिकित्सक राजस्थान में पीजी करके राजस्थान की आम जनता को सेवाएं दिए बगैर लौट जाते हैं, और ना ही सरकारी खाते में 25 लाख रुपये जमा करवाते हैं, यानी सरकार को लग रही है डबल चपत।
इनमें से कुछ चिकित्सक सेवा देना भी चाहते हैं तो सरकार उन्हें ले नहीं रही, राजस्थान के सरकारी कॉलेजों से पीजी करने वाले चिकित्सकों ने मांग की है कि उक्त अनुबंध की पालना होनी चाहिए उससे जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और आमजन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं सरकारी अस्पतालों के माध्यम से मिलेगी। जून के प्रथम सप्ताह में करीब 250 ऐसे चिकित्सक अपना कोर्स पूर्ण कर रहे हैं, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन्हें सेवा का मौका देती है या फिर ये 25 लाख का चूना लगाकर मजबूरन होंगें फरार।

Rajasthan : DACP promotion chaos

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सरकारी डॉक्टरों पर बाबूराज…

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Money invest in the name of software in gov.hospital ,Bhopal

Government hospitals of Bhopal spent about Rs 6 crore in the name of their own software citing the convenience of patients

13.07.2022
शहर के सरकारी अस्पताल मुफ्त की कोई भी चीज पसंद नहीं करते। यही वजह है कि अस्पतालों का कामकाज निर्धारित करने के लिए केन्द्र के मुफ्त के पोर्टल का उपयोग नहीं करना चाहते। शहर के सरकारी अस्पतालों ने मरीजों की सुविधा का हवाला देकर खुद के सॉफ्टवेयर के नाम पर करीब 6 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। हमीदिया से लेकर एम्स और अन्य सरकारी अस्पतालों ने राशि तो खर्च कर दी, लेकिन अपने स्तर पर जो पोर्टल तैयार कराए वे फिलहाल तो काम नहीं कर रहे।

हमीदिया अस्पताल: खर्च किए 2.5 करोड़ रुपए:
हमीदिया में तीन साल पहले हेल्थ इंफॉर्मेशन एंड मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया था। दावे हुए थे कि पूरे काम ऑनलाइन होंगे। यही नहीं इस सॉफ्टवेयर को सरकारी एजेंसी 25 लाख में तैयार कर रही थी, लेकिन प्रबंधन ने निजी एजेंसी को 2.5 करोड़ रुपए दे दिए। इसके बावजूद अब तक सॉफ्टवेयर तैयार नहीं है।

एम्स:फर्जीवाड़ा ऐसा कि हो गई जांच
एम्स भोपाल में भी सॉफ्टवेयर के निर्माण के दौरान फर्जीवाड़ा हुआ। एम्स प्रबंधन ने अपने सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए सरकारी एजेंसी को 86 लाख रुपए जारी किए, लेकिन चार साल तक सॉफ्टवेयर का निर्माण नहीं हो पाया। इसके बाद एम्स मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने निजी एजेंसी को सॉफ्टवेयर का ठेका दे दिया।

अन्य अस्पतालों में भी खुद के सॉफ्टवेयर फेल:
जेपी अस्पताल में भी सॉफ्टवेयर तैयार किए गए। उस दौरान यह प्रचारित किया गया कि प्रदेश का पहला अस्पताल जहां मिलेगी कतारों से आजादी, लेकिन स्थिति अब भी वैसी ही है। वहीं गैस राहत विभाग के सभी अस्पतालों और बीएमएचआरसी में भी सॉफ्टवेयर तैयार किए गए, जो अब तक अधूरे ही हैं।

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MCD,hospitals buildings damage in delhi

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12.07.2022
दिल्ली नगर निगम के अस्पतालों का बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार पिछले कुछ महीनों से सुर्खियां बना हुआ है। इस बीच दिल्ली की एकीकृत नगर निगम के द्वारा अपने अंतर्गत आने वाले सभी अस्पतालों की जो इमारतों है उनकी जांच के मद्देनजर एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई। यह पूरी कमेटी अगले एक महीने में जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।बता दें कि बीते दिनों निगम के सबसे बड़े मेटरनिटी अस्पताल कस्तूरबा में ऊपरी मंजिल के पिछले हिस्से का छज्जा गिर जाने की वजह से बड़ा विवाद हुआ था।इस घटना से पहले भी इस तरह के हादसे निगम के अस्पतालों में होते रहे हैं, चाहे निगम के अंतर्गत आने वाला राजन बाबू टीबी अस्पताल हो या फिर हिंदू राव अस्पताल या फिर मेटरनिटी अस्पताल कस्तूरबा अस्पताल तीनों ही अस्पतालों में लगातार एक के बाद एक खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के बदहाल हालत को लेकर खबर सामने आ रही हैं। हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते कुछ महीनों में लगभग तीन बार कस्तूरबा अस्पताल में छज्जे नीचे गिरने की खबर अखबारों की सुर्खियां बन चुकी हैं।जिसे देखते हुए निगम के विशेष अधिकारी और कमिश्नर के द्वारा विशेष कमेटी का गठन कर एमसीडी के सभी अस्पतालों की इमारतों की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।

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Smart patking in jaipuria hospital

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11.07.2022
राजधानी में पहली बार किसी सरकारी अस्पताल में स्मार्ट पार्किंग बनाई गई है। जयपुरिया में 12.41 करोड़ से 1150 स्क्वायर फीट में बनाई गई पार्किंग में एक साथ 600 वाहन (160 कार और 435 दो पहिया) खड़े हो सकेंगे। एंट्री करते ही डिस्प्ले बोर्ड से पता चल जाएगा कि पार्किंग के लिए जगह है या नहीं? साथ ही, आग लगने पर ऑटोमेटिक सेंसर आग पर काबू पा लेगा। पार्किंग स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बनाई गई है। निगम ने पार्किंग बीओटी (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर) मॉडल के तहत तैयार की है। जल्द ही इसे लाेगाें के लिए खोल दिया जाएगा। ग्राउंड फ्लाेर पर मेडिकल दुकानें भी बनाई जाएंगी।

1 लाख ली. का टैंक, स्प्रिंकलर से आग बुझाई जा सकेगी

आग लगने पर स्प्रिंकलर से बुझाई जाएगी। इसमें जगह-जगह सेंसर लगाए गए हैं। पार्किंग की छत पर 1 लाख लीटर पानी का टैंक है। जैसे ही पार्किंग में आग या धुंआ उठता है तो ये सेंसर एक्टिव हो जाएंगे। सायरन बजना शुरू हो जाएगा। दूसरी ओर, पार्किंग शुरू होने से सड़कों पर जाम नहीं लगेगा। शुरूआत में पार्किंग 25 साल के लिए दी जाएगी। जयपुरिया के अधीक्षक डॉ. महेश मंगल का कहना है कि अस्पताल में स्मार्ट पार्किंग बन कर तैयार हाे गई है। जल्द ही इसे लाेगाें के लिए शुरू की जाएगी।

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Dengue cases increases in jaipur

Dengue cases cross three hundred in government and private hospitals of Jaipur

04.07.2022
मानसून की दस्तक के साथ ही मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी में मच्छर काटने, दूषित पानी और खाद्य पदार्थों के सेवन से बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक ओपीडी में आ रहे 30 से 40 फीसदी मरीज डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू, स्क्रब टायफस, डायरिया, फूड पॉइजनिंग, चिकनगुनिया, वायरल समेत कई मौसमी बीमारियों से ग्रस्त होकर आ रहे हैं। इनमें पीलिया, तेज बुखार, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, खांसी, निमोनिया, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में दिक्कत समेत कई लक्षण मिल रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि समय से यदि इन बीमारियों की रोकथाम और उपचार न किया जाए तो हालात बिगड़ सकते हैं। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों की बात करें तो जिले में अब तक डेंगू के मरीज 300 पार हो गए हैं। इससे ग्रस्त चार लोगों की मौत भी हो चुकी है। जिले में सर्वाधिक डेंगू के मरीज परकोटे में 37 मिले हैं।

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Paramedical exams were be held by new service rules in raj.

Rajasthan government has made preparations to make service rules for ten types of paramedical courses, recruitment to these posts through examination soon

04.07.2022
ऑपरेशन थिएटर, कैथ लैब, डायलिसिस, ब्लड बैंक जैसे पैरामेडिकल कोर्सेज कर रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने दस तरह के पैरामेडिकल कोर्सेज के सेवा नियम बनाने की तैयारी कर ली है। इससे अब इन कोर्स को करने के बाद विद्यार्थियों की सरकारी नौकरी लग सकेंगे। केबिनेट से मुहर लगना बाकी है।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की मंशा के बाद चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने भी कवायद तेज कर दी है। मौजूदा स्थिति में मेडिकल लैब टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर, ईसीजी टेक्नीशियन और ऑफ्थेल्मिक टेक्नीशियन के ही सेवा नियम बने हुए हैं। हालांकि राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल ने सरकार को 10 तरह के पैरामेडिकल कोर्स के लिए सेवा नियम बनाने के प्रस्ताव भेजा है। इधर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल लैब टेक्नीशियन के 900 और असिस्टेंट रेडियोग्राफर के 800 पदों पर भर्ती कराने के लिए कर्मचारी चयन बोर्ड को अभ्यर्थना भेजी है।

यह है,10 पैरामेडिकल कोर्स
ओटी टेक्नीशियन, कैथ लैब, डायलिसिस टेक्नीशियन, ब्लड बैंक, एंडोस्कोपी टेक्नीशियन आर्थोपेडिक टेक्नोलोजी, ईईजी टेक्नीशियन, इमरजेंसी एंड ट्रोमा केयर टेक्नीशियन, परफ्यूजन टेक्नी. ऑडियोमीट्रिक टेक्नीशियन।राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल की ओर से प्रदेश में 11 तरह के कोर्स संचालित करती है। इनमें हर साल 7 हजार 500 सीटों पर प्रवेश दिया जाता है। मौजूदा स्थिति में पैरामेडिकल काउंसिल में पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या करीबन दस हजार है। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय भी पैरामेडिकल में डिग्री कोर्सेज करा रही है। निदेशक (अराजपत्रित) सुरेश नवल का कहना है कि कुछ पैरामेडिकल कोर्सेज के सेवा नियम बनाने का प्रोसेस चल रहा है। जिससे कोर्स कर रहे छात्रों को फायदा मिल सकेगा।

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CMHO qualification changed in rajasthan

Rajasthan government has changed the qualifications and parameters for the post of Chief Medical Health Officer (CMHO), based on the new rules, 21 out of 34 CMHOs do not have the qualifications for the post, hence their removal is decided.

27.06.2022
राज्य सरकार ने पिछले दिनाें जिलों में सबसे बड़े हेल्थ ऑफिसर यानी सीएमएचओ (चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर) पद की योग्यता व मापदंडों में बदलाव किया है। अब नए नियमों के आधार पर 34 में से 21 सीएमएचओ के पास पद की योग्यता नहीं है। इसलिए इनका हटना तय है।सरकार ने नए सीएमएचओ लगाने के लिए पूल बना दिया है, जिसमें पूरे प्रदेश से 89 डॉक्टर शामिल किए हैं। नियमों की वजह से कई साल से एक ही जगह लगे जयपुर प्रथम सीएमएचओं डाॅ. नराेत्तम शर्मा, जाेधपुर के डाॅ. बलवंत मंडा, झुंझुनूं के छाेटेलाल गुर्जर, पाली के डाॅ. रामपाल मिर्धा और नागाैर सीएमएचओ डाॅ. मेहराम महिया काे पद से हटना पड़ेगाइन जिलाें में शाॅर्ट लिस्ट किए गए 89 डाॅक्टराें में से नियुक्ति की जाएगी। सूत्राें के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने सरकार की फ्लैगशिप याेजनाओं काे गति देने के लिए सीएमएचओं पद की याेग्यता निर्धारित की है, ताकि अयाेग्य डाॅक्टर इस महत्वपूर्ण पद काे नहीं संभाल सके।इसके लिए विभाग ने 15 मार्च काे परिपत्र जारी करते हुए 31 मार्च तक सीएमएचओ पद के याेग्य डाॅक्टराें से आवेदन मांगे थे। अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी काे सीएमएचओं पद के लिए पूल बनाने का जिम्मा साैंपा था। पिछले दिनाें हुई मीटिंग में कमेटी ने सिर्फ 89 डाॅक्टराें काे ही पात्र माना है। पूल में 21 जिलाें के सीएमएचओ के नाम नहीं हैं। ऐसे में इन्हें पद से हटाया जाएगा।स्वास्थ्य विभाग ने जाे पूल बनाया है, उसमें सीकर के 5 डाॅक्टर हैं। डाॅ. विष्णुदयाल मीना फिलहाल प्रतापगढ़ सीएमएचओं, जबकि डाॅ. सीपी ओला सीकर डिप्टी सीएमएचओं हैं। जयपुर द्वितीय में एडिशनल सीएमएचओं डाॅ. निर्मल जैन हैं।सांभर सीएचसी पर कार्यरत डाॅ. अनिल कुमार और जाेधपुर की सालावास सीएचसी पर नियुक्ति डाॅ. मदनलाल कटारिया मूलत: सीकर जिले के हैं और सीएमएचओं के पूल में शामिल किए हैं।

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New scheme medicep approved in kerala

Kerala Chief Minister Pinarayi Vijayan government has approved comprehensive medical insurance for government employees, pensioners and their dependents from July 1 under the new scheme ‘Medicep’ at a monthly premium of just Rs 500.

25.06.2022
केरल में सरकारी कर्मियों, पेंशनभोगियों एवं उनके आश्रितों को अब सरकार की नई योजना ‘मेडिसेप’ के तहत महज 500 रुपये के मासिक प्रीमियम पर समग्र मेडिकल बीमा मिलने वाला है। राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन सरकार ने एक जुलाई से ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के माध्यम से इस बहुप्रतीक्षित ‘कैशलेस’ मेडिकल सहायता को लागू करने की मंजूरी दी है।
अवर मुख्य सचिव (वित्त) राजेश कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार सरकारी कर्मियों, पेंशनभोगियों/ परिवार पेंशनभोगियों एवं उनके परिवारों के पात्र सदस्यों के अलावा सरकारी विश्वविद्यालयों के कर्मी और पेंशनभोगी, मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, मुख्य सचेतक, विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष आदि के सीधे नियुक्त किए गए निजी स्टाफ भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

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Arbitrary recovery from Ayushman card holders in Bhopal and recovery of huge amount from the government by telling fake patients to be admitted

15.06.2022
आयुष्मान कार्ड धारकों से मनमानी वसूली व फर्जी मरीजों को भर्ती बताकर सरकार से मोटी रकम वसूलने की शिकायतों के बाद मंगलवार को स्टेट हेल्थ काउंसिल की 22 टीमों ने शहर के 47 अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। ये सभी अस्पताल आयुष्मान भारत निरामयम से इम्पैनल्ड हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार इनमें से 12 अस्पतालों में गड़बड़ियां मिली हैं, जिसके आधार पर इन्हें आयुष्मान योजना से बाहर किया जाएगा।खजूरीकलां रोड पर कृष्णा नगर स्थित वैष्णो मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में गत 31 मई को फर्जी मरीजों के नाम पर आयुष्मान योजना के तहत सरकार से पैसे लेने का मामला उजागर हुआ था। इसके बाद काउंसिल के कॉल सेंटर पर कई लोगों ने शिकायत दर्ज कराई कि उनसे भी आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पतालों में जमकर लूट हुई।आयुष्मान भारत योजना मप्र के सीईओ अनुराग चौधरी ने बताया कि इन शिकायतों के मद्देनजर मंगलवार को भोपाल के 47 अस्पतालों में 22 टीमें भेजी गईं। योजना से जुड़े अस्पतालों का रिकॉर्ड चैक किया गया। वहां भर्ती आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों से पूछताछ की गई। साथ ही स्टेट हेल्थ काउंसिल के पोर्टल पर अस्पताल द्वारा दर्ज किए गए मरीजों और वास्तविक भर्ती मरीजों की संख्या का मिलान किया गया।

Now it is necessary to have Jan Aadhaar for free treatment in government hospitals of Rajasthan.

10.06.2022
राज्य भर में 1 मई से शुरू हुए एमएमएनएनआरएस के तहत सरकारी अस्पतालों में मुफ्त ओपीडी और आईपीडी सुविधाओं सहित मुफ्त सुविधाओं का लाभ उठाने के इच्छुक मरीजों को अपने साथ अपना जन आधार कार्ड रखना होगा। अब तक राज्य के अस्पताल मरीजों के पंजीकरण के लिए आधार कार्ड की मांग कर रहे थे। राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर पृथ्वी राज ने बताया है कि जन आधार कार्ड के जरिए राज्य सरकार रोगों का रिकॉर्ड रखेगी। इसके अलावा मुफ्त स्वास्थ्य योजना का लाभ ले रहे सभी मरीजों के इलाज और उनके डायग्नोस्टिक टेस्ट का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा। जन आधार के जरिए उन मरीजों के बारे में भी पता चल सकेगा जो चिरंजीवी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम, मुफ्त दवा योजना, मुफ्ता जांच योजना समेत अन्य विभिन्न योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।एक खास बात यह भी है कि जिन लोगों के पास जन आधार कार्ड नहीं है उनके लिए भी स्वास्थ्य विभाग ने अलग से इंतजाम किया है। अगर ऐसे मरीज खुद अस्पताल में जन आधार कार्ड के लिए रजिस्टर कराते हैं तो उन्हें मेडिकल सुपरीटेन्डेंट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी इलाज में छूट प्रदान कर सकते हैं।

राजस्थान : गैर सेवारत पीजी स्टूडेंट्स लगा रहे सरकार और आमजन को चूना

राजस्थान : गैर सेवारत पीजी स्टूडेंट्स लगा रहे सरकार और आमजन को चूना

पी.जी कोर्स मे अनिवार्य सरकारी सेवा के बांड की हो रही अवहेलना
राजस्थान सरकार गैर सरकारी चिकित्सकों को मुफ्त में पीजी करवाती है, ऊपर से तनख्वाह(stipend) और देती हैं, बदले में केवल इतना चाहती हैं कि ये चिकित्सक कोर्स पूरा करने के बाद पांच साल तक प्रदेश में ही आवश्यक रूप से सेवा दें, इसकी गारंटी के रूप में वो एडमिशन देते समय प्रत्येक चिकित्सक से 25 लाख का बांड भरवाती है, या तो पांच साल सेवा दो या फिर 25 लाख जमा करवाओ, तभी ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स वापस मिलेंगे । लेकिन हो क्या रहा है कि ना तो ये चिकित्सक सेवा दे रहे हैं और ना ही 25 लाख जमा करवाए हैं, बस आराम से गायब हो गए हैं । उदाहरण के तौर पर देखें तो चार साल पहले राज्य सरकार ने मेडिकल की पीजी सीटों में एडमिशन के वक्त सरकारी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अनिवार्य सरकारी सेवा के पच्चीस लाख के अनुबंध पत्र (बांड) भरवाए  (सम्बंधित कागजात संलग्न हैं)।
पिछले साल पूरे राज्य से सरकारी मेडिकल कॉलेज से सैंकड़ों डॉक्टर पीजी करके चले गए लेकिन सरकार एक पीजी डिग्री धारी डॉक्टर से बांड भरवाने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों को तीन साल की अनिवार्य सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं दे पाई। सर्विस बॉन्ड के साथ पीजी डॉक्टर्स का एक बैच पास आऊट हो चूका है, तथा प्रिंसिपल एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बाॅन्ड तथा शपथ पत्र की पालना करवाये बगैर औरीजिनल डिग्री प्रमाण पत्र दे दिये, इस मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ।
बॉन्ड की पालना कराने में चिकित्सा शिक्षा विभाग कोई खास रूचि नहीं दिखा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज मे सस्ती दरों पर चिकित्सा शिक्षा लेने वाले डॉक्टर्स ना तो आमजन की सरकारी अस्पतालों में सेवा कर रहे हैं और ना ही बॉन्ड की राशि जमा करवा रहे हैं। जिससे सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है। सरकार को उक्त बांड की राशि प्रिंसिपल अथवा चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से वसूलनी चाहिए या आमजन को सेवाएं दिलानी चाहिए।
चूंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास पीजी पास आऊट की लिस्ट रहती है। अगर चिकित्सा शिक्षा विभाग समय रहते, स्वास्थ्य भवन को सूची उपलब्ध करवा देता है। तो स्वास्थ्य भवन पद्स्थापन कर सकता है। परंतु गत वर्ष स्वास्थ्य भवन को फ्रैशर्स के पद्स्थापन बाबत कोई सूची नहीं पहुंचाई गयी थी। जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बाॅन्ड की सख्त पालना हो रही है। लेकिन दूसरे प्रदेशों से चिकित्सक राजस्थान में पीजी करके राजस्थान की आम जनता को सेवाएं दिए बगैर लौट जाते हैं, और ना ही सरकारी खाते में 25 लाख रुपये जमा करवाते हैं, यानी सरकार को लग रही है डबल चपत।
इनमें से कुछ चिकित्सक सेवा देना भी चाहते हैं तो सरकार उन्हें ले नहीं रही, राजस्थान के सरकारी कॉलेजों से पीजी करने वाले चिकित्सकों ने मांग की है कि उक्त अनुबंध की पालना होनी चाहिए उससे जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और आमजन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं सरकारी अस्पतालों के माध्यम से मिलेगी। जून के प्रथम सप्ताह में करीब 250 ऐसे चिकित्सक अपना कोर्स पूर्ण कर रहे हैं, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन्हें सेवा का मौका देती है या फिर ये 25 लाख का चूना लगाकर मजबूरन होंगें फरार।

Rajasthan : DACP promotion chaos

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सरकारी डॉक्टरों पर बाबूराज…

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