Chaos in bhopal memorial hospital

10.08.2022
गैस पीड़ितों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्थापित किए गए भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में गैस पीड़ित मरीजों को दवाइयां ही नहीं मिल रही हैं। जिन मरीजों का डायलिसिस किया जाता है उनको भी जरूरी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में मरीज बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। कई मरीज आर्थिक तंगी के कारण दवाएं नहीं खरीद पा रहे हैं, ऐसे में उनका इलाज ही नहीं हो पा रहा है।आलम यह है कि यहां हररोज 15 से 20 मरीजों के डायलिसिस किए जाते हैं। लेकिन, डायलिसिस के बाद लगने वाले जरूरी इंजेक्शन और दवा ही नहीं मिल पाती है। भोपाल ग्रुप फोर इंफोर्मेशन एंड एक्शन संस्था की रचना ढींगरा ने इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन और निगरानी समिति के साथ ही इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के जिम्मेदारों को अवगत भी कराया है, लेकिन मरीजों को कोई राहत नहीं मिली है।

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Corona infection in Alwar

08.08.2022
जिले में काेराेना संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है। शनिवार काे अकबरपुर सीएचसी का डाॅक्टर और सीआईएसएफ सेंटर अनंतपुरा के जवान सहित 89 नए पाॅजिटिव मिले। 24 घंटे में पिछले 3 महीने में काेराेना पाॅजिटिव मरीजाें की यह सबसे बड़ी संख्या है।चिकित्सा विभाग के अनुसार बहराेड़ ब्लाॅक में सर्वाधिक 29, अलवर शहर व तिजारा में 8-8, मालाखेड़ा, लक्ष्मणगढ़ व रामगढ़ में 7-7, काेटकासिम, भिवाड़ी, राजगढ़ व नीमराना में 4-4, रैणी में 3, खेड़ली में 2, शाहजहांपुर व मुंडावर में 1-1 पाॅजिटिव मिले हैं।जिले में अब एक्टिव केस बढ़कर करीब 225 हाे गए हैं। चिकित्सा विभाग के अनुसार अलवर शहर में पुलिस लाइन, कालाकुआं, जाट काॅलाेनी दाे साै फुट राेड, लाजपत नगर, नाथकी बगीची, मालाखेड़ा में सीरावास, अहमदपुर, पलखड़ी, कालीखाेल, काेटकासिम, भाेजराजका की ढाणी, मकडावा, जमालपुर, बहराेड़, बर्डाेद, अजमेरीपुर, ढिस, कांकरा, नांगल खाेडिया, डूमराेली, गाेलावास, भिटेडा, रामगढ़, सैंथली,मिलकपुर,अकलीमपुर, लक्ष्मणगढ़ में बड़ाैदामेव, दीनार, बसई सैदावत, कफनवाड़ा,हिगाेटा, सैमला खुर्द, तिलवाड़, राजगढ़ में शिंभूबास, राजपुरबड़ा, टहला, खेड़ली में हाजीपुर, मेठाना, रैणी में पाटन, बीलेटा व माेराेदकलां, नीमराना में चाैबारा, सक्तपुरा,शाहजहांपुर में जाैनायचा कलां, मुंडावर में भीखावास, तिजारा ब्लाॅक में काराेली, खिजूरीवास, करनकुंज, नंदरामपुर, निंबाहेडी, शाहबाद, टपूकड़ा व गंधाेला चाैपानकी, भिवाड़ी में भिवाड़ी गांव व मिलकपुर में पाॅजिटिव केस मिले हैं। एक सीकरी भरतपुर और एक काेटपूतली का केस पाॅजिटिव मिला है।

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hospitals noc negligence in bhopal

राजधानी भोपाल में 400 से ज्यादा छोटे-बड़े हॉस्पिटल हैं। इनमें से टेम्प्रेरी NOC करीब 225 के पास है। बाकी के पास प्रोविजनल NOC है। चूंकि, आगजनी की 90% घटनाएं शॉर्ट सर्किट से होती हैं, इसलिए अब फायर के साथ इलेक्ट्रिक सेफ्टी भी देखी जाएगी। वहीं, हॉस्पिटलों ने प्रोविजनल के बाद टेम्प्रेरी NOC क्यों नहीं ली, इसका भी नगर निगम सर्वे करेगा। टीमें हकीकत जाने के लिए मैदान में उतरेंगी।जबलपुर के हॉस्पिटल में हुई आगजनी की घटना ने फायर सेफ्टी की पोल खोल दी है। ऐसा ही एक हादसा भोपाल में भी पिछले साल हो चुका है, जब प्रदेश के सबसे बड़े हमीदिया हॉस्पिटल के चिल्ड्रन वार्ड में आग लगी थी और कई नवजात जिंदा जल गए थे। जबलपुर हादसे के बाद भोपाल में एक बार फिर हॉस्पिटलों में आग से निपटने के इंतजामों पर फोकस किया जाने लगा है। इसके चलते राजधानी के सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों में फायर ऑडिट किया जाएगा, ताकि हकीकत सामने आ सके। इसे लेकर बुधवार को अपर आयुक्त कमलेंद्र सिंह परिहार ने फायर ऑफिसरों की मीटिंग ली और हॉस्पिटलों की जांच करने के निर्देश दिए।

फायर के साथ इलेक्ट्रिक सेफ्टी का भी ऑडिट
शहर में हर रोज एवरेज 5 से 6 आगजनी की घटनाएं होती हैं। गर्मी में आंकड़ा 200% तक बढ़ जाता है। इनमें से 90% हादसे शॉर्ट सर्किट की वजह से होते हैं। यही कारण है कि अब हॉस्पिटलों में फायर के साथ इलेक्ट्रिक सेफ्टी पर भी ध्यान दिया जाएगा।नगर निगम के अपर आयुक्त कमलेंद्र सिंह परिहार ने बताया, इसी साल मार्च, अप्रैल-मई में चार टीमों ने साढ़े 3 सौ बिल्डिंग का निरीक्षण किया था। इनमें कई में खामियां पाई गई थीं। इस पर निगम ने नोटिस भी दिए थे। इन बिल्डिंगों में हॉस्पिटल भी शामिल थे। अब फिर से टीमें अलर्ट होगी और अपने-अपने एरिये के हॉस्पिटल में जाकर फायर और इलेक्ट्रिक सेफ्टी देखेगी।

जब नई बिल्डिंग बनाई जाती है तो उसके लिए प्रोविजनल एनओसी ली जाती है। यह एनओसी निगम देता है। एक साल के भीतर टेम्प्रेरी एनओसी निगम देता है। यह तब देता है जब निगम सारे पैमानों की जांच कर लेता है। प्रोविजनल एनओसी नक्शे पर दी जाती है। बिल्डिंग परमिशन, मालिकाना हक समेत अन्य जरूरी दस्तावेजों के आधार पर दी जाती है।

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bhopal 1st dental microscope

अब मुंह की बीमारियों की जांच करने के लिए अंदाजे का इलाज नहीं बल्कि सटीक जांच के बाद उपचार और सर्जरी हो सकेगी। हमीदिया अस्पताल में प्रदेश का पहला डेंटेस्ट्री माइक्रो ​​​​​स्कोप शुरु किया गया है। ​​​​​​​जीएमसी के दंत रोग विभाग के एचओडी डॉ. अनुज भार्गव ने बताया कि आमतौर पर डॉक्टर अपनी आंखों से मुंह के अंदर देखकर इलाज करते हैं जहां तक जैसा दिखता है उसी के आधार पर इलाज किया जाता है। लेकिन मुंह के अंदरूनी कई ऐसे भाग होते हैं जहां आंखों से नहीं देखा जा सकता। उन हिस्सों की जांच में ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप कारगर साबित होगा। प्रदेश में हमीदिया ऐसा अस्पताल है जहां दंत रोग विभाग में इस मशीन से जांच और उपचार होगा। डीन डॉ.अरविंद राय के विशेष प्रयासों से हमीदिया अस्पताल के दंत रोग विभाग को यह मशीन मिली है।
16 गुना तक जूम कर देख पाएंगे मुंह के अंदरडॉक्टर भार्गव ने बताया कि आमतौर पर 0.2 तक मुंह के अंदर देखा जा सकता है। लेकिन ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप के जरिए जूमिंग कैपेसिटी 16 गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे में मुंह के अंदर के हिस्से को बारीकी से देखा जा सकता है।

इन मामलों में मिलेगी मदद

रूट कैनाल, दांतों की भराई, रेस्टोरेशन में मदद मिलेगी
एक्सीडेंट में बिगडे चेहरे के अंदरूनी हिस्सों की जांच आसानी से हो सकेगी
मुंह, होंठ के टांके लगाने में आसानी से देख सकेंगे
मुंह के कैंसर की जांच में मदद मिलेगी।

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Uproar in doctors meeting

राजधानी भोपाल में जुटे प्रदेश के सरकारी डॉक्टरों की बैठक में विवाद हो गया है। भोपाल के मानस भवन में मप्र मेडिकल ऑफीसर्स एसोसिएशन की साधारण सभा की बैठक में शामिल होने के लिए प्रदेश भर के डॉक्टरों को बुलाया गया था। लेकिन यहां बैठक में एसोसिएशन की राज्य इकाई के चुनाव की चर्चा शुरू हो गई। डॉक्टरों ने अलग- अलग गुटों के साथ अध्यक्ष बनने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी। बैठक में अचानक चुनाव की तैयारी को देख डॉक्टर भड़क गए। बैठक के दौरान जमकर नारेबाजी हुई। अधिवेशन में दो हजार से ज्यादा डॉक्टर भोपाल पहुंचे हैं।

मंच से बोले डॉक्टर- हमें दमदार नेतृत्व चाहिए डरपोक नहीं

भोपाल के मानस भवन में आयोजित मप्र मेडकिल ऑफीसर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अधिवेशन में मंच पर डॉक्टरों ने जमकर भड़ास निकाली। अलग-अलग जिलों से आए डॉक्टरों ने मंच से कहा हमें ऐसी लीडरशिप नहीं चाहिए जो संकट के समय डॉक्टरों का साथ छोड़कर राजनेताओं और अफसरों के दबाव में हमें ही दबाकर राजीनामा कराने लगे। दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों के लिए डटे रहने वाले डॉक्टर के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार की घटनाएं हों या प्रशासन के मनमाने गलत आदेश। हमें आदेश मानने के लिए सहमत करने के बजाए दमदारी से सरकार और प्रशासन के सामने रखने का साहस करने वाला डॉक्टर हमारी लीडरशिप करें।

विभाग की मनमानी से नौकरी छोड़ रहे डॉक्टर

दमोह से आए डॉक्टर दिवाकर पटेल ने कहा कि हमारी एमपीएमए की जनरल बॉडी की मीटिंग के लिए बुलाया गया था। रही है। डॉक्टरों की कई समस्याएं हैं। अभी स्वास्थ्य विभाग पूर्व से कार्यरत डॉक्टरों को छोड़कर अपने जान-पहचान वाले नए डॉक्टरों को डायरेक्ट क्लास वन डॉक्टर बनाने के लिए 25 प्रतिशत सीधी भर्ती से उन्हें नौकरी में लाने का प्रयास कर रहा है। जबकि वर्तमान में कई विशेषज्ञ चिकित्सक प्रदेश भर में कार्यरत हैं। इन क्लास 2 मेडिकल ऑफीसर्स को प्रमोट किया जाए तो वे विशेषज्ञ के तौर पर काम कर सकते हैं। ऐसे ही कई मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं। इससे डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़कर जा रहे हैं। इससे मरीजों का नुकसान हो रहा है।

बुलाया अधिवेशन में कराने लगे चुनाव

डॉ.दिवाकर पटेल ने कहा कि आज की जनरल बॉडी मीटिंग की पूर्व नियोजित प्रक्रिया में चुनाव का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन यहां अचानक चुनाव की बात आने लगी। असंवैधानिक तरीके से चुनाव कराने की कोशिश हो रही है। इसका हम लोग विरोध कर रहे हैं। हम नहीं चाहते कि ऐसे लोग एसोसिएशन में पदों पर बिठाए जाएं जिनके नाम पहले से तय किए गए हों। चुनाव संवैधानिक तरीके से पूरी प्रक्रिया के साथ होने चाहिए।

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Suicide in aiims,bhopal

भोपाल एम्स में MBBS की स्टूडेंट ने रविवार देर शाम गर्ल्स हॉस्टल की तीसरी मंजिल से कूदकर सुसाइड कर लिया। मारिया मथाई नाम की यह छात्रा एम्स में सेकंड ईयर की स्टूडेंट थी। छात्रा के आधार कार्ड के मुताबिक मारिया एर्नाकुलम (केरल) की रहने वाली थी। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। बागसेवनिया थाना टीआई के अनुसार देर शाम करीब 6:30 बजे छात्रा ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाई है। फिलहाल घटनास्थल से सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। शव को पीएम हाउस में रखवा दिया गया है। फिलहाल कारणों का भी पता नहीं चल सका है। मामले की जांच की जा रही है।

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Poor conditions of hospital

हमीदिया अस्पताल में सर्जरी के लिए आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ने वाली है। अभी मरीजों को औसतन 10 दिन तक सर्जरी के लिए इंतजार करना पड़ता है, लेकिन अब यह इंतजार 15 से 20 दिन तक का होगा। क्योंकि, अस्पताल प्रशासन ने 1 अगस्त से हमीदिया की 2 और सुल्तानिया अस्पताल की 1 ओटी को बंद करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन शुक्रवार से ही यहां की 2 ओटी बंद कर दी गई हैं।ओटी बंद करने की वजह एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के 3 कंसल्टेंट को हमीदिया की नई ट्रामा इमरजेंसी यूनिट में शिफ्ट करना है। एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की ओर से विभागों को जारी किए गए ओटी अलॉटमेंट लेटर में इसका उल्लेख है। अभी हमीदिया में 11 और सुल्तानिया अस्पताल में 3 ओटी चलती हैं।यहां मरीजों की सर्जरी करने से पहले एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट उनको बेहोशी की दवा देते हैं। यहां अभी 21 कंसल्टेंट तैनात हैं। ये रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी करते हैं। इनमें से 3 कंसल्टेंट ट्रामा इमरजेंसी यूनिट में शिफ्ट किए गए हैं। इस कारण 3 ओटी को बंद किया जा रहा है। हमीदिया में रोज 25 लोगों की सर्जरी होती हैं।

जिम्मेदारों के गोलमोल जवाब

जब जिम्मेदारों से बात की तो उन्होंने इसे नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग का हिस्सा बताया। यदि यह सही भी है तो शिफ्टिंग तो 1-1 करके होनी है, पर शुक्रवार को एक साथ ओटी 1 व 6 बंद कर दी गईं। फिर जिम्मेदारों ने कहा कि कि केस नहीं होने से ओटी बंद रहेगी।ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग के लिए बंद किया जाना है, लेकिन इसके लिए पूरा प्लान बनाया गया है। एक-एक करके ओटी बंद करेंगे। 3 ओटी एक साथ बंद नहीं होंगी। हमारी कोशिश है कि मरीजों को परेशानी ना हो। ऐसा क्यों हुआ है, बात करनी पड़ेगी। -डॉ. आशीष गोहिया, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

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Vaccination camp in bhopal

27.06.2022
कोरोना वैक्सीन का प्रीकॉशन डोज लगवाने के लिए बुधवार को महाअभियान का आयोजन किया जा रहा है। महाअभियान के तहत राजधानी के 75 से भी अधिक अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं के साथ ही नगर निगम के 85 वार्ड कार्यालय में भी नि:शुल्क प्रीकॉशन डोज लगाए जाएंगे। वह सभी हितग्राही जिन्हें दूसरा डोज लगे छह महीने हो गए हैं, उनको प्रीकॉशन डोज अनिवार्य रूप से लगवाना चाहिए।हितग्राही कोविन पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग करके या फिर सीधे वैक्सीनेशन साइट पर पहुंचकर भी प्रीकॉशन डोज लगवा सकते हैं। 18 वर्ष से अधिक उम्र के हितग्राहियों को कोवीशील्ड और 15 साल अधिक उम्र के युवाओं को को-वैक्सीन का प्रीकॉशन डोज लगाया जाएगा।जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चिह्नित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उपस्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लीनिक के साथ ही एम्स, बीएचईएल में भी नि:शुल्क प्रीकॉशन डोज लगाए जाएंगे।

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CMHO, bhopal issued health advisory

26.07.2022
केरल के बाद दिल्ली में भी मंकीपॉक्स का मरीज मिलने के बाद सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी ने शहर के अस्पताल अधीक्षकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। साथ ही लोगों से भी घरों में साफ-सफाई रखने और सावधानी बरतने को कहा है। बताया गया है कि मंकीपॉक्स से संक्रमित रोगी को बुखार, रेश और लिम्फ नोड्स में सूजन पाई जाती है। मंकीपॉक्स के लक्षण 2 से 4 सप्ताह में खत्म हो जाते हैं। गंभीर मामलों में मृत्युदर 1 से 10 प्रतिशत है।मंकीपॉक्स का वायरस जानवराें से इंसान में और इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। वायरस कटी स्किन, आंख, नाक और मुंह के माध्यम से शरीर में जाता है। संक्रमित जानवराें के काटने, खरोंचने, शरीर के तरल पदार्थ, घाव और संक्रमित बिस्तर से मनुष्य में यह वायरस जा सकता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर चकत्ते दिखते हैं। संदिग्ध मरीजाें के सैंपल जांच के लिए एनआईवी लैब पुणे भेजे जा

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Now QR code is for complaint in hamidia hospital,bhopal

26.07.2022
राजधानी में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार को शहर में 40 नए कोरोना मरीज मिले, जबकि 30 मरीज ही स्वस्थ हुए। ऐसे में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 300 पहुंच गई है। चिंता की बात यह भी है कि सोमवार को प्रदेश के 22 शहरों में कोरोना के 227 नए मरीज मिले हैं।इनमें से छह शहरों में नए मरीजों की संख्या 10 या उससे अधिक रही है। सबसे ज्यादा 85 मरीज इंदौर में मिले हैं। जबकि, जबलपुर में 28, होशंगाबाद में 14, सीहोर में 11 और ग्वालियर में 10 मरीज मिले हैं। इनके अलावा रायसेन और बालाघाट में 5-5, उज्जैन, खरगौन और नरसिंहपुर में 4-4 मरीज मिले हैं। जबलपुर में एक मरीज की इलाज के दौरान मौत भी हुई है। प्रदेश में अब एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 1589 पर पहुंच गई है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दर 3.1 प्रतिशत दर्ज की गई।हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा या मिलने में मुश्किल आ रही हो या फिर खाने की क्वालिटी खराब हो। ऐसी किसी भी तरह की परेशानी होने पर मरीज और उनके परिजन स्मार्टफोन से क्यूआर कोड स्कैन कर शिकायत कर सकेंगे। इसके लिए अस्पताल के सभी वार्डों में क्यूआर कोड लगाए जाएंगे।

अस्पताल प्रबंधन 15 अगस्त तक यह सुविधा शुरू करने की तैयारी में है। दरअसल, अस्पताल के वार्डों की नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग शुरू हो गई है। ये बिल्डिंग 14 मंजिला भी है। अस्पताल के पूरी तरह से शिफ्ट होने के बाद मरीजों को परेशानी न आए, इसको ध्यान में रखते हुए ये तैयारी की जा रही है। ताकि, मरीज और उनके परिजनों को भटकना नहीं पड़े।

ऑनलाइन और ऑफलाइन काम करेगी हेल्पलाइन

मरीज स्मार्टफोन से क्यूआर कोड स्कैन करके पेशेंट आईडी नंबर दर्ज करके शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों की निगरानी के लिए तैनात टीम पेशेंट के पास जाकर समस्या सुनेगी और मदद करेगी। मरीज फोन नंबर से ऑफलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। शिकायत पर अधिकतम 12 घंटे में एक्शन होगा।

हर महीने शिकायतों का होगा रिव्यू…

ऑनलाइन सिस्टम पर मिलने वाली शिकायतों का हर महीने रिव्यू होगा। देखा जाएगा कि किस डिपार्टमेंट में, किस तरह की शिकायतें बार-बार आ रही हैं। उन्हें तात्कालिक सुधारा जाएगा। स्थाई समाधान भी किया जाएगा।

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