Doctors gave a new life to patient

10.08.2022

27 साल की उम्र ही क्या होती है। अगर फैक्ट्री में काम करने वाले वर्कर का हाथ बुरी तरह से कुचल उठे तो सोचिए, वो मंजर कैसा रहा होगा। घटना नवंबर 2019 की है। सुबह के 5 बज रहे थे और यूपी के सहारनपुर के रहने वाले जख्मी युवक को अस्पताल में भर्ती किया जाता है। उसका बायां हाथ (फोरआर्म) हाइड्रोलिक प्रेशिंग मशीन से पूरी तरह से क्रश हो गया था। फोरआर्म का मतलब अग्रभुजा यानी हाथ की कोहनी से आगे का हिस्सा पूरी तरह से जख्मी था। पूरे तीन साल तक कई स्तर की सर्जरी करने वाले एम्स दिल्ली (Aiims Delhi) के डॉक्टरों ने आखिरकार कमाल कर दिया। उस मरीज के लिए यह चमत्कार से कम नहीं है। इसके साथ ही एम्स देश का पहला अस्पताल बन गया, जहां एक मरीज के लिए सफलतापूर्वक नया फोरआर्म ही तैयार कर दिया गया।

बस एक राहत की बात थी
डॉक्टर बताते हैं कि उस दिन जब फैक्ट्री वर्कर अस्पताल आया था तो कोहनी के जोड़ से चोट 5 सेमी दूर तक थी। कलाई की तरफ स्किन, सॉफ्ट टिशूज, नर्व्स, मशल्स और हड्डी चोटिल हुई थी, बाकी हाथ को उतना नुकसान नहीं पहुंचा था। फैक्ट्री में बड़ी-बड़ी मशीनों को हैंडल करने में हाथ का ही इस्तेमाल होता है और ऐसे में काफी जोखिम होता है। इस केस में डॉक्टरों ने तीन स्टेज में आगे बढ़ने का फैसला किया। राहत की बात यह थी कि युवक की हथेली अब भी सामान्य स्थिति में थी और अपना फंक्शन कर रही थी।

डॉक्टरों ने बनाया प्लान
डॉ. मनीष सिंघल की अगुआई वाली प्लास्टिक सर्जरी की टीम ने मरीज की स्थिति का गंभीरता से आकलन किया। साफ हो चुका था कि यह बहुत ही जटिल केस है। हाथ जख्मी नहीं है और आगे के हिस्से यानी फोरआर्म में काफी चोट है जिससे अलग तरह की समस्या पैदा हो जाती है और ऐसे केस में हाथ का रीअटैचमेंट संभव नहीं होगा क्योंकि आगे का हाथ तो बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका था।

6 घंटे का टाइम कीमती होता है
प्लास्टिक, पुनर्निर्माण और बर्न सर्जरी डिपार्टमेंट के प्रमुख सिंघल ने कहा, ‘ऐसे मामलों में सर्जरी तभी संभव हो पाती है जब मरीज को दुर्घटना के 6 घंटे के भीतर अस्पताल लाया गया हो। किस्मत से, इस मरीज को इस समय के भीतर लाया गया था।’इस केस में आमतौर पर दो विकल्प बनते थे, मरीज को प्रोस्थेटिक हाथ दिया जाए या हाथ के क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर फंक्शन कर रही हथेली को हाथ से अटैच किया जाए। लेकिन बाद वाले विकल्प में हाथ की लंबाई घट सकती थी। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने फोरआर्म को फिर से बनाने का फैसला किया और उसके साथ हथेली को जोड़ा जाना था।

पहला स्टेप
चोटिल हाथ से हथेली को जल्द से जल्द अलग करना था और क्रश हो चुके हिस्से को अलग। ऐसे में कोहनी की चोट की फिर से सिलाई की गई।

दूसरा स्टेप
अब हथेली को शरीर के दूसरे हिस्से से अटैच करना था। डॉक्टरों ने टखने के करीब बाएं पैर से इसे अटैच कर दिया। देखने और समझने में यह अजीब बात थी लेकिन डॉक्टरों के ऐसा करने के पीछे वजह चिकित्सकीय थी।

प्लास्टिक और बर्न्स सर्जरी विभाग के डॉ. राजा तिवारी ने बताया कि हम हथेली की संवेदनशीलता को बरकरार रखना चाहते थे इसीलिए इसे पैर से जोड़ा गया। अगर इसे शरीर के किसी दूसरे हिस्से से जोड़ा गया होता तो सेंसेशन खत्म हो सकता था। जब हाथ को वापस अपनी जगह लाया गया तो हमने बाएं पैर की उसी नर्व्स को भी लिया था। यही नहीं, हथेली को अस्थायी तरीके से अटैच करने के लिए पैर की हड्डियों का पता लगाना आसान था। डॉ. तिवारी ने कहा कि हमने पैर को चुना क्योंकि उसमें अतिरिक्त नसें, रक्त वाहिकाएं और मांसपेशियां होती हैं।

आगे की चुनौती
अब नया फोरआर्म बनाने के लिए डॉक्टरों ने पैरों से दो टिशू यूनिट निकाला। पहला हिस्सा घुटने के नीचे वाले हिस्से से लिया गया और दूसरा जांघ के पास से निकाला गया। आखिर में पैर में लगाई गई हथेली को अलग कर नए फोरआर्म के आगे जोड़ना था जिससे तंत्रिका तंत्र की मरम्मत या कहिए ऑपरेशन पूरा होता।सर्जरी टीम में शामिल डॉ. शिवांगी साहा ने बताया कि धमनियां, नसें और मांसपेशी को हड्डी से जोड़ने वाले ऊतक होते हैं जो अंगुलियों को मांसपेशियों से कनेक्ट करते हैं। हाथों का मूवमेंट करने के लिहाज से कमांड और कंट्रोल करने में ब्रेन के लिए कोई समस्या नहीं थी। बस इतना जरूर है कि मांसपेशी की ताकत कम हो जाती है।आज की तारीख में मरीज चाबी का इस्तेमाल कर सकता है, कुछ उठा सकता है, पानी की बोतल ले सकता है और कोहनी की ताकत भी अच्छी है। वह अपने बाएं हाथ से बड़ी चीजें भी पकड़ सकता है। वह अपनी अंगुलियों और अंगूठे के बीच में पेन पकड़ सकता है और पास की मांसपेशियों की मदद से लिख सकता है।सिंघल ने बताया कि महामारी के दौरान फॉलोअप कर पाना एक और बड़ी चुनौती रहा। हमने लॉकडाउन के दौरान एक टेली-रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम भी किया। प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट से डॉ. शशांक चौहान और डॉ. सुवशीष दाश और ऑर्थोपेडिक व एनेस्थीशिया विभागों से डॉ. समर्थ मित्तल और डॉ. सुलगना भी टीम में शामिल थे। फिजियोथेरेपी का भी एक बड़ा रोल था जिसे डॉ. मीसा ने लीड किया था।

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kayakalp award for hospital in bhopal

भोपाल मिंटो हॉल में आयोजित कायाकल्प अवॉर्ड फंक्शन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान , स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ,एसीएस सुलेमान एवं स्वास्थ्य आयुक्त के समक्ष जिला अस्पताल रायसेन को लगातार तीसरे साल कायाकल्प सांत्वना पुरस्कार प्राप्त हुआ। जिसे जिला अस्पताल के सिविल सर्जन एके शर्मा एवं आरएमओ डॉ विनोद परमार ने प्राप्त किया l अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को उत्तम बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके फल स्वरुप लगातार तीसरे साल कायाकल्प अवॉर्ड सांत्वना पुरस्कार के रूप में प्राप्त हुआ है। इस पुरस्कार में 300000 की राशि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर काम करने के लिए दिए हैं। इसमें से 25% अस्पताल में कायाकल्प के संदर्भ में अच्छा काम करने वाले स्टाफ को वितरित किया जाएगा lहर साल कायाकल्प अभियान के तहत जिला अस्पताल का मूल्यांकन तीन स्तर में किया जाता है सर्वप्रथम इंटरनल एसेसमेंट किया जाता है इंटरनल एसेसमेंट मैं 70% आने के बाद पियर एसेसमेंट होता है पियर असेसमेंट में 70% आने के बाद राज्य स्तरीय एसेसमेंट किया जाता है तथा राज्य स्तर में 70% अंक प्राप्त करने के पश्चात पुरस्कार वितरण किया जाता है। लगभग साढे 450 बिंदुओं पर जिला अस्पताल की गुणवत्ता एवं कार्य विधि कायाकल्प अभियान के तहत हर साल जांची जाती है।

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Gwalior treatment negligence case

10.08.2022
ग्वालियर की 3 साल की मासूम बच्ची गार्गी की मौत के 9 साल बाद कोर्ट का फैसला आया है, जिसमें उपभोक्ता फोरम इंदौर ने ग्वालियर के मेहरा अस्पताल और मैस्कॉट अस्पताल पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है। हालांकि इसके लिए मासूम के पिता ने थाने से लेकर उपभोक्ता फोरम कोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ी। अस्पताल में निमोनिया से पीड़ित बच्ची को आईवी फ्लूड दिया जाता रहा। साथ ही ट्रीटमेंट शीट से भी छेड़छाड़ की गई थी।
मासूम को निमोनिया होने पर उसके पिता ने इलाज के लिए उसे ग्वालियर के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि बच्ची को बचाने के लिए वे उसे जिस अस्पताल में लेकर जा रहे हैं, वहां से वह लौटकर नहीं आएगी। दो प्राइवेट अस्पतालों के बिना डिग्री वाले डॉक्टर, ICU के अनट्रेंड स्टॉफ की लापरवाही से माता-पिता ने अपनी मासूम बच्ची को हमेशा के लिए खो दिया।

1 घंटे के भीतर 500ml नॉर्मल सलाइन की बोतल चढ़ाई

घटना 25 जनवरी 2013 की है। तीन साल की बेटी के पिता मनोज उपाध्याय ग्वालियर में एडवोकेट हैं। शहर के थाटीपुर चौहान प्याऊ में उनका निवास है। उन्होंने अपनी बेटी गार्गी को मेहरा बाल चिकित्सालय अनुपम नगर में भर्ती कराया। यहां के डॉक्टर डीडी शर्मा ने यहां से रेफर कर दिया। गार्गी को निमोनिया की शिकायत थी। मेहरा बाल चिकित्सालय में डॉक्टर आरके मेहरा अस्पताल के संचालक थे। डॉ. अंशुल मेहरा बच्चों के डॉक्टर थे। डॉ. अंशुल मेहरा खुद को एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए की एमडी डिग्री होना बताते हुए ग्वालियर में मरीजों के साथ धोखाधड़ी करते थे। बेबी गार्गी का इलाज भी एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए बताते हुए किया। गार्गी को निमोनिया होते हुए भी मेहरा हॉस्पिटल में 1 घंटे के भीतर 500ml नॉर्मल सलाइन की बोतल चढ़ा दी गई और तबीयत बिगड़ने पर भी आईवी फ्लूड दिया जाता रहा। इससे बेबी गार्गी के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा। डॉ. अंशुल मेहरा ने बच्ची को भर्ती कराने के 3 घंटे बाद वेंटिलेटर की आवश्यकता बताते हुए मैस्कॉट हॉस्पिटल रेफर कर दिया था।

बिना डिग्री के एमडी पीडियाट्रिशियन कर रहे थे इलाज
गार्गी के पिता एडवोकेट मनोज उपाध्याय ने मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में मैस्कॉट के डॉ. अंशुल मेहरा की एमडी पीडियाट्रिशियन की डिग्री पर सवाल करते हुए शिकायत की थी। इस पर डॉ. अंशुल मेहरा ने मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल भोपाल के समक्ष माफी मांगी थी। साथ ही कहा था कि वह एमडी पीडियाट्रिशियन नहीं है और भविष्य में उक्त डिग्री का उल्लेख अपने नाम के आगे नहीं करेंगे।

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Fire at Jabalpur hospital

10.08.2022
जबलपुर के न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल के शिशु वॉर्ड के करीब आग लग गई। हालांकि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन एक बार फिर मध्यप्रदेश में फायर एनओसी और फायर सेफ्टी को लेकर बहस तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में 40 बच्चे भर्ती थे, जब उसके करीब शॉर्ट सर्किट हुआ. जिसके चलते वार्ड में धुआं फैल गया और लाइट चली गई।गौरतलब है कि पिछले डेढ़ साल में प्रदेश के छह अस्पतालों में आगजनी से 23 लोगों की मौत हुई है। बता दें कि अस्पताल खोलने या नवीनीकरण के लिए 12 दस्तावेज मांगे जाते हैं। इसमें 11 तो जरूरी हैं लेकिन फायर एनओसी नहीं। सिर्फ फायर एनओसी के लिए आवेदन की पावती के आधार पर पिछले 2 साल में राज्य में 200 से ज्यादा नए अस्पतालों को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि सरकार की तरफ से अकेले जबलपुर में फायर एनओसी नहीं होने तथा अन्य कमियां पाये जाने पर अब तक 24 अस्पतालों के पंजीयन निरस्त किये जा चुके हैं।नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने पूरे मामले पर कहा है कि फायर एनओसी नगर निगम देता है फिर हेल्थ डिपार्टमेंट लाइसेंस देता है। फायर एनओसी का पालन संबंधित लोगों ने किया है या नहीं ये देखना चाहिये, ये दोनों तरफ से लापरवाही होती है। इसलिये इस तरह की घटना होती है। इसमें सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है।

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Doctors pray to god before surgery

डॉक्टर भी कठिन परिस्थितियों और मुश्किल वक्त में ईश्वर को याद करते हैं। इसका अंदाजा हाल ही में वायरल इस वीडियो को देखकर लगाया जा सकता है, जिसमें डॉक्टर्स और नर्सेस की टीम को ऑपरेशन से पहले प्रार्थना करते हुए देखा जा रहा है।हमारे देश में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन धरती के ये भगवान भी उस परमपिता और अदृष्य शक्ति पर भरोसा करते हैं, जो इस संसार को चला रही है।भले ही साइंस कितनी ही आगे निकल जाए, लेकिन कोई भी ‘दैवीय शक्ति’ को नकार नहीं सकता। इसका अंदाजा वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर लगाया जा सकता है।डॉक्टर भी कठिन परिस्थितियों और मुश्किल वक्त में ईश्वर को याद करते हैं। ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें डॉक्टर्स और नर्सेस की टीम को ऑपरेशन से पहले प्रार्थना करते हुए देखा जा सकता है।

VIDEO HERE

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NMC investigate from Dolo company

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने आयकर विभाग से उन डॉक्टरों का ब्योरा मांगा है, जिन्होंने डोलो 650 बनाने वाली माइक्रो लैब्स सहित छह दवा कंपनियों से कथित तौर पर मुफ्त गिफ्ट लिए. आयकर विभाग के प्रशासनिक निकाय केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जुलाई में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली डोलो-650 टैबलेट के निर्माताओं पर गलत चिजों में लिप्त होने और चिकित्सा पेशेवरों एवं डॉक्टरों को इसके उत्पादों को बढ़ावा देने के बदले में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के मुफ्त उपहार वितरित करने का आरोप लगाया था. बता दें कि आयकर विभाग ने छह जुलाई को बेंगलुरु स्थित माइक्रो लैब्स लिमिटेड के खिलाफ नौ राज्यों में 36 परिसरों पर छापेमारी की थी.एनएमसी ने गत तीन अगस्त को एक पत्र में, सीबीडीटी के अध्यक्ष नितिन गुप्ता से शामिल डॉक्टरों के नाम, पंजीकरण संख्या और पते भेजने का अनुरोध किया था ताकि उन विवरणों को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों को भेजा जा सके. एनएमसी के नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड (ईएमआरबी) के सदस्य डॉ. योगेंद्र मलिक ने पत्र में समय-समय पर संशोधित भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 की धारा 6.8 की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो दवा कंपनियों और संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र उद्योग के साथ डॉक्टरों के संबंधों में आचार संहिता निर्धारित करता है।उन्होंने कहा कि यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि पहली बार, पंजीकृत चिकित्सक द्वारा पेशेवर कदाचार के संबंध में किसी भी शिकायत का निस्तारण संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद द्वारा किया जाना है. मलिक ने कहा कि मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड (ईएमआरबी), राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग पंजीकृत चिकित्सकों के जीवन में नैतिकता लाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी कदाचार को बर्दाश्त नहीं करेगा

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Corona infection in Alwar

08.08.2022
जिले में काेराेना संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है। शनिवार काे अकबरपुर सीएचसी का डाॅक्टर और सीआईएसएफ सेंटर अनंतपुरा के जवान सहित 89 नए पाॅजिटिव मिले। 24 घंटे में पिछले 3 महीने में काेराेना पाॅजिटिव मरीजाें की यह सबसे बड़ी संख्या है।चिकित्सा विभाग के अनुसार बहराेड़ ब्लाॅक में सर्वाधिक 29, अलवर शहर व तिजारा में 8-8, मालाखेड़ा, लक्ष्मणगढ़ व रामगढ़ में 7-7, काेटकासिम, भिवाड़ी, राजगढ़ व नीमराना में 4-4, रैणी में 3, खेड़ली में 2, शाहजहांपुर व मुंडावर में 1-1 पाॅजिटिव मिले हैं।जिले में अब एक्टिव केस बढ़कर करीब 225 हाे गए हैं। चिकित्सा विभाग के अनुसार अलवर शहर में पुलिस लाइन, कालाकुआं, जाट काॅलाेनी दाे साै फुट राेड, लाजपत नगर, नाथकी बगीची, मालाखेड़ा में सीरावास, अहमदपुर, पलखड़ी, कालीखाेल, काेटकासिम, भाेजराजका की ढाणी, मकडावा, जमालपुर, बहराेड़, बर्डाेद, अजमेरीपुर, ढिस, कांकरा, नांगल खाेडिया, डूमराेली, गाेलावास, भिटेडा, रामगढ़, सैंथली,मिलकपुर,अकलीमपुर, लक्ष्मणगढ़ में बड़ाैदामेव, दीनार, बसई सैदावत, कफनवाड़ा,हिगाेटा, सैमला खुर्द, तिलवाड़, राजगढ़ में शिंभूबास, राजपुरबड़ा, टहला, खेड़ली में हाजीपुर, मेठाना, रैणी में पाटन, बीलेटा व माेराेदकलां, नीमराना में चाैबारा, सक्तपुरा,शाहजहांपुर में जाैनायचा कलां, मुंडावर में भीखावास, तिजारा ब्लाॅक में काराेली, खिजूरीवास, करनकुंज, नंदरामपुर, निंबाहेडी, शाहबाद, टपूकड़ा व गंधाेला चाैपानकी, भिवाड़ी में भिवाड़ी गांव व मिलकपुर में पाॅजिटिव केस मिले हैं। एक सीकरी भरतपुर और एक काेटपूतली का केस पाॅजिटिव मिला है।

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1000 crore doctor freebies scam

जिन डॉक्टरों के नाम कथित तौर पर माइक्रो लैब्स में हाल ही में आयकर छापे में सामने आए हैं, उन्हें राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है, जिसने आईटी विभाग को अपने स्वयं के शुरू करने के लिए शामिल डॉक्टरों के नामों का खुलासा करने के लिए कहा है। मामले की जांच कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि इन डॉक्टरों ने कथित तौर पर प्रसिद्ध डोलो 650 ब्रांड के निर्माता से यात्रा व्यय, अनुलाभ और 1000 करोड़ रुपये की राशि सहित मुफ्त उपहार लिए हैं।आयकर विभाग ने कथित कर चोरी के सिलसिले में लोकप्रिय दवा डोलो-650 निर्माता माइक्रो लैब्स लिमिटेड के कार्यालयों पर छापेमारी की थी।बाद में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने व्यापक रूप से प्रसिद्ध डोलो-650 दवा टैबलेट के निर्माताओं पर “अनैतिक प्रथाओं” में लिप्त होने और उत्पादों को बढ़ावा देने के बदले डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों को लगभग 1,000 करोड़ रुपये के मुफ्त उपहार वितरित करने का आरोप लगाया था। दवा समूह द्वारा किया गया।”खोज अभियान के दौरान, दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के रूप में पर्याप्त आपत्तिजनक सबूत मिले हैं और जब्त किए गए हैं … सबूतों की प्रारंभिक एकत्रीकरण से पता चला है कि समूह अपने खाते की किताबों में नामे कर रहा है जो अस्वीकार्य है आईटी विभाग ने कहा था, ‘बिक्री और पदोन्नति’ मद के तहत चिकित्सा पेशेवरों को मुफ्त वितरण के कारण खर्च।सीबीडीटी ने आरोप लगाया था कि इन “मुफ्त में यात्रा व्यय, अनुलाभ और उपहार आदि शामिल हैं जो डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों को ‘प्रचार और प्रचार’, ‘सेमिनार और संगोष्ठी’, ‘चिकित्सा सलाह’ आदि के तहत समूह के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए हैं।”इसमें कहा गया है, “सबूत बताते हैं कि समूह ने अपने उत्पादों/ब्रांडों को बढ़ावा देने के लिए अनैतिक व्यवहार अपनाया है। इस तरह के मुफ्त उपहारों की मात्रा लगभग 1,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।”उसी के बाद, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) और फार्मास्युटिकल विभाग ने मामले की जांच के लिए शीर्ष चिकित्सा नियामक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के तहत आचार समिति को काम सौंपा है।अब एनएमसी, शीर्ष चिकित्सा शिक्षा नियामक निकाय ने कथित तौर पर संबंधित डॉक्टरों का साक्षात्कार करने का फैसला किया है, जिनके नाम रिश्वत या अनैतिक प्रथा को स्थापित करने के लिए सामने आए हैं, न्यूज 18 कहते हैं। साक्षात्कार प्रक्रिया के पूरा होने के बाद, आयोग प्रस्तुत करेगा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को रिपोर्ट,यदि डॉक्टर दोषी पाए जाते हैं, तो वे अपना चिकित्सा प्रमाणन और अभ्यास करने का अधिकार भी खो सकते हैं।

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PPP medical colleges in mp

06.08.2022
चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने मध्यप्रदेश में पीपीपी मॉडल आधारित चिकित्सा महाविद्यालय शुरू करने समीक्षा बैठक की। समीक्षा में प्रथम चरण में प्रदेश के 5 जिलों में पीपीपी मॉडल आधारित चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना करने का निर्णय लिया। इसमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, बालाघाट एवं कटनी में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज शुरू करने का निर्णय लिया।

निजी निवेशकों को भूमि लीज़ पर उपलब्ध करायेगी राज्य सरकार
राज्य सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिये निजी निवेशक को 99 वर्ष (60 वर्ष + 39 वर्ष) की लीज पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त निजी निवेशक को 300 बिस्तरीय अस्पताल भवन भी राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।
EWS मरीजों को मिलेगा निःशुल्क उपचार
पीपीपी मॉडल आधारित अस्पतालों में आयुष्मान मरीजों के साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी निःशुल्क उपचार मिल सकेगा। वहीं गैर आयुष्मान मरीजों को बाजार दर पर उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना नीति अनुसार राज्य सरकार के वर्तमान में संचालित मेडिकल कॉलेज को ट्रेनिंग हॉस्पिटल के रूप में परिवर्तित कर 100 एमबीबीएस सीट के प्रवेश के लिये पीपीपी आधारित मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री मोहम्मद सुलेमान, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री निशांत वरवड़े सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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Valve repalacement of 104 year old

06.08.2022
जयपुर में 104 साल के मरीज का हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट किया है। जयपुर स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में हुए इलाज के बाद मरीज अब पूरी तरह ठीक है। उसे हॉस्पिटल से छुट्‌टी दे दी है। हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का दावा है कि ये पूरे भारत में पहला केस होगा जब इतनी बड़ी उम्र के किसी मरीज का वॉल्व रिप्लेसमेंट किया गया है।
हॉस्पिटल के स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज डायरेक्टर डॉ. अमित चौरसिया ने बताया देश में ये अब तक के सबसे अधिक उम्र के मरीज में बिना सर्जरी के हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट प्रोसीजर टावी (ट्रांस कैथेटर एओर्टिक वॉल्व इंप्लांटेशन) हुआ है। इससे पहले भारत में 92 वर्ष तक के मरीज का टावी तकनीक से सफल केस रिपोर्ट किया गया है।
छाती में दर्द की शिकायत पर पहुंचे थे हॉस्पिटल
डॉ. चौरसिया ने बताया कि मरीज नानकराम को छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके बाद वे हॉस्पिटल आए थे। 2डी ईको जांच में उनके हार्ट के एओर्टिक वॉल्व में सिकुड़न देखी गई थी, तभी उन्हें वॉल्व रिप्लेसमेंट की सलाह दी गई थी। उनका एंजियोग्राम भी किया गया जिसमें सामान्य ब्लॉकेज थे। ऐसे में यह स्पष्ट हो गया कि एओर्टिक स्टेनोसिस के कारण ही उन्हें छाती में दर्द हो रहा था। काफी ज्यादा उम्र होने के कारण सर्जरी से वॉल्व रिप्लेसमेंट संभव नहीं था, इसीलिए टावी तकनीक से उनका वॉल्व बदला गया। सिर्फ डेढ़ घंटे में ही पूरा प्रोसीजर हो गया और उन्होंने अगले दिन चलना-फिरना शुरू भी कर दिया।

क्या होता है टावी प्रक्रिया?
डॉ. ने बताया कि ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लाटेंशन (टावी) एक प्रकार की नॉन सर्जिकल प्रोसेस है। इस प्रक्रिया में मरीज को बिना बेहोश किए और बिना चीरा लगाए रोगी की पैर की नस (फेमोरल आर्टरी) से हृदय तक पहुंच कर सिकुड़े हुए वॉल्व को बैलून से फूलाकर नया वॉल्व लगाया जाता है। इस ऑपरेशन में टिशु वॉल्व लगाया जाता है। यह एक तरह से एंजियोप्लास्टी की तरह ही होता है।

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