Movement of doctors and public health workers org. in dhanbad

एसएनएमएमसीएच के ओपीडी परिसर में शनिवार काे जिले की सहियाएं धरने पर बैठ प्रदर्शन किया। करीब एक हजार से अधिक की संख्या में जुटी सहियाओं ने मेडिकल काॅलेज में चिकित्सक व सहिया के बीच हुए विवाद पर आक्राेश जताया। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सहियाओं ने मेडिकल काॅलेज व अस्पताल में सुविधाएं देने व सम्मान की मांग की। सहियाओं के प्रदर्शन के दाैरान अस्पताल का ओपीडी भी बाधित रहा।हालांकि अस्पताल प्रबंधन की ओर से सहियाओं की मांगें पूरी करने की घाेषणा के बाद प्रदर्शन समाप्त हाे गया। सहियाओं का नेतृत्व कर रहे झारखंड राज्य चिकित्सक एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन के संजुत सहाय ने कहा कि सहियाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हें भी अन्य कर्मचारियाें की तरह ही सम्मान मिलना ही चाहिए।

19 की घटना के बाद सहियाओं का भड़का आक्राेश

एसएनएमएमसीएच में 19 जुलाई काे करमाटांड़ की सहिया उर्मिला प्रसव के लिए एक स्थानीय महिला काे लेकर आई थी। इसी क्रम में स्त्री एवं प्रसव राेग विभाग की डाॅ मधुमिता व सहिया के बीच विवाद हाे गया। सहिया ने चिकित्सक पर दुर्व्यवहार करने का आराेप लगाया। मरीज के परिजनाें के साथ भी धक्का-मुक्की करने की बात कहीं। मामले में सीएस ने अस्पताल अधीक्षक से जांच कर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। इधर, अस्पताल अधीक्षक की ओर से मामले में चिकित्सक काे शाे-काॅज किया गया।

आश्वासन मिलने के बाद मामले का पटाक्षेप
जन स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन के संजुत सहाय ने बताया कि अस्पताल अधीक्षक ने सहियाओं की सभी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया। कहा कि हमारा उद्देश्य चिकित्सक व सहिया विवाद काे खत्म कराना व स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ सहियाओं काे सम्मान दिलाना है।

सहियाओं की ये मुख्य मांगें

अस्पताल में सहियाओं के लिए रेस्ट रूम की व्यवस्था
सहियाओं के लिए अस्पताल में अगल से बाथरूम हाे
प्रबंधन की ओर से सहियाओं काे सम्मान देने का आदेश
सहियाओं के लिए अस्पताल में हेल्प डेस्क की व्यवस्था
प्रसव के बाद डिस्चार्ज पेपर के साथ जन्म प्रमाण पत्र मिले

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Lady doctor suicide in indore.

25.07.2022
इंदौर में एमवाय अस्पताल की एक जूनियर डॉक्टर ने जिंदगी से हारकर सुसाइड कर लिया। वह तीन साल से एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप भी कर रही थी। मौके से सुसाइड नोट मिला है। इसमें उसने जिंदगी से हारने की बात लिखी है। साथ ही आई लव यू मम्पी-पापा भी लिखा है। दोस्तों के मुताबिक वह कई दिनों से डिप्रेशन में थी। वह मूल रूप से जबलपुर के नजदीक लखनादौन (सिवनी) की रहने वाली थी।TI तहजीब काजी के मुताबिक एमवाय अस्पताल से सूचना मिली थी कि डॉ. अपूर्वा पुत्री सुदर्शन गुलानी को बेसुध हालत में उनके साथी रविवार सुबह सवा नौ बजे के लगभग एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। अपूर्वा जावरा कंपाउड स्थित जेडी गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। वह मूल रूप से सिवनी के आजाद वार्ड नंबर दो राम मंदिर के पास की रहने वाली थी।

पिता जबलपुर में वकील
अपूर्वा के पिता जबलपुर में वकील हैं। इसके साथ ही वह खेती किसानी का काम करते हैं। छोटा भाई भी कॉलेज की पढ़ाई के साथ परिवार के काम में हाथ बंटाता है। उसके हॉस्टल के कमरे से एनेस्थिसिया व अन्य ड्रग के इंजेक्शन मिले हैं। संभवत: ओवर डोज के चलते उसकी मौत हुई है।

8 बजे ड्यूटी पर पहुंचना था कॉल रिसीव नहीं किया
पुलिस को मिली जानकारी में सामने आया है कि 8 बजे अपूर्वा की इमरजेंसी में ड्यूटी थी। लेकिन वह ड्यूटी पर नहीं पहुंची थी। इसके चलते उसके साथी उसे लगातार कॉल कर रहे थे। पर वह रिसीव नहीं कर रही थी। काफी देर हो जाने पर साथी हॉस्टल में पहुंचे। यहां अपूर्वा बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी।

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Staff not available in chhattisgarh hospital

23.07.2022
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में कलेक्टर ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया तो 11 डॉक्टर गायब मिले। इसके अलावा 16 मेडिकल स्टाफ भी ड्यूटी पर नहीं थे। जिसके बाद इन सब को नोटिस जारी किया गया है। इनसे अब नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। कहा गया है कि यदि नोटिस का उचित जवाब नहीं दिया जाता है तो इन पर कार्रवाई होगी।जिले के कलेक्टर राहुल देव ने अचानक जिला अस्पताल के निरीक्षण पर पहुंचे थे। यहां पहुंचने पर पता चला कि कई स्टाफ ड्यूटी पर नहीं हैं। उसके अलावा कई डॉक्टर भी नहीं थे। इस पर कलेक्टर राहुल देव ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद उन्होंने CMHO को निर्देश दिए कि इन सब को नोटिस जारी किया जाए। यदि जवाब उचित नही मिले तो सबके खिलाफ कार्रवाई की जाए। कलेक्टर के निर्देश के बाद ही इन्हें नोटिस जारी किया गया था।ये डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिलेड्यूटी के समय कार्य में अनुपस्थित डॉक्टरों एवं मेडिकल स्टाफ में डाॅ. के. एस. कंवर पैथोलॉजी विशेषज्ञ, डाॅ. देवेश खाण्डे नेत्र रोग विशेषज्ञ, डाॅ. अभिषेक सिंह एवं डाॅ. श्रेयांस पारख अस्थिरोग विशेषज्ञ, डाॅ. कविता प्रसाद, डाॅ सौम्या गौरहा, डाॅ. आकांक्षा बघेल, डाॅ. नेहा राजपूत एवं डाॅ. दिनेश साहू चिकित्सा अधिकारी। वहीं प्रतिमा रानी गेंदले रिकॉर्ड किपर, दिलीप बसंत, श्वेता सोनी नर्स,अनिता शुक्ला, प्रहलाद सिंह ठाकुर, अनिल मरकांडेय ऑडियोलॉजिस्ट समेत 16 स्टाफ भी ड्यूटी के वक्त का मौजूद नहीं थे।

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EDBX facility not started in sms

23.07.2022
एसएमएस अस्पताल में मरीजों का भार कम करने के लिए सात मंजिल की बनी सुपर स्पेशिएलिटी ब्लॉक में चार महीने बाद भी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ को ईपीबीएक्स की सुविधा नहीं मिली है। इससे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ का काम प्रभावित हो रहा है। इन्हें छोटे से छोटे मैसेज के लिए संबंधित वार्ड और आईसीयू में जाना पड़ रहा है। संपर्क के लिए दूसरी व्यवस्था मोबाइल की है, लेकिन सुपर स्पेशिएलिटी ब्लॉक में मोबाइल नेटवर्क बहुत ही कम मिलता है।इस वजह से वार्ड और आईसीयू में संपर्क करने का दूसरा विकल्प भी फेल साबित हो रहा है। ऐसे में ब्लॉक में पीबीएक्स नहीं होने की वजह से मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। एक से दूसरे वार्डों और आईसीयू में बार-बार जाने में समय बर्बाद हो रहा है। 200 करोड़ की लागत से बने ब्लॉक में 350 बेड है। इसमें 120 करोड केंद्र और 80 करोड़ रुपए राज्य सरकार ने दिए हैं।

नहीं है एक्स्ट्रा बेड की व्यवस्था
नई बिल्डिंग में बेड उपलब्ध होने पर ही मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा, क्योंकि आईएमएचएस के सॉफ्टवेयर में एक्स्ट्रा बेड लगाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। एक्स्ट्रा बेड लगा भी दिया जाता है तो सॉफ्टवेयर नहीं लेगा। ऐसे में मरीजों के हिसाब से बेड कम पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ डॉक्टर मरीजों की परेशानी के हिसाब से भर्ती तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वार्ड में बेड नहीं मिल रहा है। बेड के लिए दो दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। बेड नहीं मिलने की वजह से मरीजों को बैंच पर गुजारनी पड़ रही है।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज की ओर से बजट जारी करने के बाद टेंडर किया जाएगा। कॉलेज स्तर पर ईपीबीएक्स लगाने की प्रक्रिया चल रही है। -डॉ विनय मल्होत्रा, अधीक्षक, एसएमएस

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study of thrombin injection

23.07.2022
एसएमएस हॉस्पिटल के डॉक्टर्स के रिसर्च से अब दुनियाभर में लिवर सिरोसिस बीमारी का इलाज होगा। प्रदेश में लिवर सिरोसिस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए थ्रोम्बिन जीवनरक्षक इंजेक्शन साबित हो रहा है। इसके इस्तेमाल से मरीजों में खून की उल्टी रोकने में मदद मिली रही है, वहीं फेफड़े व दिल की नसों में किसी तरह से ब्लॉक यानी एंबोलिज्म भी देखने को नहीं मिला। शोध यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ द लीवर (ईएएसएल) में प्रकाशित हो चुका है।यह खुलासा एसएमएस अस्पताल के गेस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट विभाग के डॉ. अशोक झाझड़िया व उनकी टीम की ओर से किए गए अध्ययन में हुआ है। थ्रोम्बिन इंजेक्शन के मरीजों पर किए गए अध्ययन में किसी तरह का साइड इफेक्ट भी देखने को नहीं मिला। एसएमएस अस्पताल में आने वाले 50 मरीजों पर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई)नई दिल्ली की ओर से अनुमति मिलने के बाद ही थ्रोम्बिन इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया।

सुपर ग्लू के इस्तेमाल से फेफड़े व नसों में जम जाता है खून का थक्का, थोम्ब्रिन से नहीं
मौजूदा स्थिति में लिवर सिरोसिस बीमारी यानी खून की उल्टी रोकने के लिए एंडोस्कोपी मशीन के जरिए सुपर ग्लू इंजेक्शन लगाया जाता है। मरीजों में सुपर ग्लू का उपयोग करने पर फेफड़े व दिल की नसों में खून का थक्का जमा देता था, जिसे मेडिकल भाषा में एंबोलिज्म कहा जाता है। थ्रोम्बिन इंजेक्शन संबंधित नस को ही ब्लॉक करने से मरीज को फायदा मिलता है।

एक बार थ्रोम्बिन इंजेक्शन लगाने पर बार-बार नहीं लगाना पड़ता, जबकि ग्लू को बार-बार लगाना पड़ता है। ऐसे में मरीज को बार-बार एंडोस्कोपी और वापस इंजेक्शन नहीं लगाना होता है। ग्लू लगाने से नसें फूल जाती थी, जबकि थ्रोम्बिन में नस फटने का खतरा नहीं रहता है।

एसएमएस में रोज 50 से 60 मरीज
एसएमएस अस्पताल के आउटडोर में लिवर सिरोसिस के रोजाना 50 से 60 मरीज आते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान जा सकती है। इसके उपयोग से देश में अब हर साल 10 लाख मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।

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First sport Injury center in bhopal’s hamidia hospital

21.07.2022
सालों पहले चर्चित सचिन तेंदुलकर की कोहनी की टेनिस एल्बो चोट या फिर एथलेटिक्स में ग्रोइन इंजरी हो। खिलाडिय़ों को इन चोट के बाद कॅरियर पर भी खतरा मंडराने लगता है। ऐसे में खिलाड़ी इन चोटों से जल्दी उबरने के लिए विदेशों के स्पोर्ट्स एंजरी सेंटर क रुख करते हैं। लेकिन अब खिलाडिय़ों को विदेश जाने की जरूरत नहीं है, राजधानी के हमीदिया अस्पताल में भी खिलाडिय़ों को इन चोटों से उबारा जाएगा। दरअसल, हमीदिया अस्पताल में प्रदेश का पहला स्पोर्ट एंजरी सेंटर का निर्माण किया जाना है। हालांकि इसकी कवायद बीते एक साल से चल रही है, लेकिन सोमवार को इस सेंटर के लिए जीएमसी प्रबंधन ने दो पीजी सीटों के लिए आवेदन किया। पीजी सीट मिलने के बाद यहां स्पोर्ट्स मेडिसिन कोर्स भी शुरू हो जाएगा। मालूम हो कि देश में स्पोर्ट्स एंजरी सेंटर की कमी के चलते भारत सरकार ने भोपाल सहित देशभर में पांच सेंटरों को मंजूरी दी है।

यह मिलेंगी सुविधाएं

30 बेड का वार्ड : सेंटर में 30 बेड का वार्ड बनाया जाएगा। इसमें कुछ बेड गंभीर मरीजों के लिए रखे जाएंगे। सभी बेड में मॉनिटर व अन्य जरूरी सुविधाएं रहेंगी।

फि जियोथैरेपी और किचन : फिजियोथैरेपी के लिए विशेष यूनिट होगी जो चोट को उबारने के लिए सबसे जरूरी है। खिलाडिय़ों के लिए विशेष डाइट प्लान तैयार किया जाएगा।

पीजी कोर्स : एमडी स्पोर्ट्स मेडिसिन में पीजी डिग्री कोर्स शुरू किया जाएगा। इसमें दो सीटें होंगी। इस कोर्स के लिए मप्र मेडिकल यूनिवर्सिटी की मान्यता मिल गई है।

भारत सरकार ने स्पोर्ट एंजरी सेंटर के लिए राशि दी है। देश में सिर्फ दो स्पोर्ट एंजरी सेंटर हैं। इसके लिए पीजी सीट के लिए भी आवेदन किया गया है। – डॉ. आशीष गोहिया, अधीक्षक हमीदिया अस्पताल

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ ऑर्थोपेडिक्स में होगा सेंटर : जानकारी के मुताबिक इस सेंटर को टीबी अस्पताल में बनने वाले प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ ऑर्थोपेडिक्स में बनाया जाएगा। यह सेंटर हमीदिया अस्पताल में हड्डी रोग विभाग के अधीन काम करेगा।

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free treatment in Janaadhar card raj.

21.07.2022
जन आधार नहीं है तो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में न नि:शुल्क इलाज मिलेगा और न ही पैसे से। इससे राइट टू हेल्थ की मंशा पर ही सवाल उठ रहे हैं।बिना जन आधार के अस्पताल पहुंच रहे मरीजों से पहले शपथ पत्र लिया जा रहा है कि वे कार्ड बनवाएंगे, नहीं बनवाने पर भविष्य में नि:शुल्क इलाज से इनकार किया जा रहा है। यहां तक कि ओपीडी की पर्ची भी इस कार्ड के बिना नहीं काटी जा रही। कार्ड नहीं होने पर सशुल्क पर्ची कटवाने का विकल्प भी अभी तक शुरू नहीं किया गया है।इस कार्ड की अनिवार्यता का सर्वाधिक नुकसान वंचित और अति गरीब वर्ग को हो रहा है। वहीं, अन्य राज्यों से आकर रह रहे प्रवासी मजदूरों, शरणार्थियों और बेघरों के पास न तो यह कार्ड है और न ही उनके लिए इसे बनवाना आसान है।

सरकार का तर्क
जनआधार की अनिवार्यता से मुख्यमंत्री नि:शुल्क निरोगी राजस्थान योजना अधिक प्रभावी रहेगी

इससे मरीज को दिए जाने वाले इलाज व जांच का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा

रेकॉर्ड के साथ बीमारियों का विश्लेषण किया जा सकेगा

किसी परिस्थिति में जन आधार नहीं है तो इलाज से पहले सहमति पत्र देना होगा कि वह भविष्य में यह कार्ड बनवाएगा, नहीं बनवा पाया तो भविष्य में इलाज मुश्किल।

उठ रहे सवाल
यह स्वास्थ्य समानता के सिद्धांत और भारत के संविधान में प्रत्येक नागरिक को दिए गए जीवन के अधिकार के खिलाफ है।

अधिकांश वंचित समुदाय के लोग बीमार होने पर घरेलू उपचार या झोलाछाप के पास जाते हैं। इनके पास यह कार्ड नहीं होता।

कार्ड वाले मरीज भी आपात स्थिति में यह कार्ड साथ नहीं ले जा पाते।

पहचान पत्र खो जाना और नष्ट हो जाना, ग्रामीण क्षेत्रों में आम बात है। ऐसे में उनके लिए मुफ्त इलाज मुश्किल हो रहा है।

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Delhi safdarjung hospital negligence

20.07.2022
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है। महिला दर्द से चिल्ला रही थी, लेकिन उसे फौरन एडमिट नहीं किया गया। इस वजह से महिला ने सफदरजंग अस्पताल परिसर के अंदर मौजूद सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इससे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आ गई है।परिजनों के मुताबिक, रविवार रात दिल्ली में रह रही एक महिला को प्रसव पीड़ा हुई। महिला दर्द से चिल्ला रही थी। उसके परिजन उसे तुरंत सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही देखिए कि उसे फौरन एडमिट नहीं किया गया। इस वजह से मजबूरन महिला को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इसका एक वीडियो सामने आया है।वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला के आसपास अन्य महिलाओं ने घेरा बना दिया है। महिला की वहीं डिलवरी भी हो गई। वीडियो में अस्पताल प्रशासन की सिक्योरिटी गार्ड्स भी नजर आ रही है। एक अन्य महिला ने आरोप लगाया कि रात से ही ये लोग अस्पताल में मौजूद थे, लेकिन डाक्टरों ने एडमिट करने से इनकार कर दिया। डाक्टरों ने कहा कि महिला को पेन नहीं हुआ। सुबह अस्पताल परिसर में महिला ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चा ठीक बताया जा रहा है।वीडियो में देख जा सकता है कि अस्पताल की नर्स पैदा हुए बच्चे को एडमिट करने के लिए लेकर जा रही है।

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Doctors are not like the Gwalior district hospital

20.07.2022
स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से ऑफिसों के साथ दूसरे कामों में लगे डॉक्टरों को अब अस्पतालों में भेजने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में अभी हाल ही में आए स्वास्थ्य आयुक्त ने भी साफ कह दिया था कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को अस्पतालों में भेजा जाए। इसके बाद शहर के पांच डॉक्टरों को जिला अस्पताल भेजने की तैयारी हो गई थी। इसके लिए सिविल अस्पताल में डॉक्टरों को भेजने के लिए आदेश जारी हुए हैं। लेकिन मजे की बात यह है कि आदेश के बाद भी डॉक्टर जिला अस्पताल में नहीं पहुंचे है। इसके चलते जिला अस्पताल में गायनिक सहित कई अन्य विभाग में कामकाज प्रभावित होने लगा है। इन डॉक्टरों के न आने से अब सिविल सर्जन भी डॉक्टरों को नोटिस देने जा रहे हैं।

अभी हाल ही में जिला अस्पताल से तीन गायनिक के डॉक्टरों के ट्रांसफर हुए हैं। इसमें से तीनों डॉक्टर जिला अस्पताल से जा चुके हैं। इसके चलते यहां पर कोई भी डॉक्टर नहीं आया है। अब यहां हालात यह विशेषज्ञ डॉक्टरों के न आने से इलाज में परेशानी आने लगी है। वहीं दो अन्य डॉक्टर यहां से चले गए हैं। इस प्रकार पांच डॉक्टर अभी हाल ही में जा चुके हैं।

नोटिस दिया जाएगा
जिन डॉक्टरों को जिला अस्पताल में आना था। वह अभी नहीं आए है। इसके लिए इन सभी को नोटिस दिया जाएगा। वहीं कारण पूछा जाएगा कि क्यों नहीं ज्वॉइन किया।

डॉ. राजेश शर्मा, सिविल सर्जन

*इन डॉक्टरों को आना है

डॉ. बिन्दु सिंघल, जिला कुष्ट अधिकारी

डॉ. सीमा जायसवाल, जिला क्षय अधिकारी

डॉ. स्वाति अग्रवाल, लक्ष्मीगंज प्रसूति गृह

डॉ. अर्चना गुप्ता,सिविल डिस्पेसरी माधौगंज

डॉ. पायल निगोतिया, सिविल डिस्पेंसरी लधेड़ी

यह पांच डॉक्टर अस्पताल से गए
डॉ. गीता अहिरवार गायनिक

डॉ. राती गुप्ता गायनिक

डॉ. अनुपमा मिश्रा गायनिक

डॉ. हरिसिंह कुशवाह आई विशेषज्ञ

डॉ. विनोद दोनेरिया एमबीबीएस

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500 rupees demanding in ajmer gov. women’s hospital

19.07.2022
राजकीय महिला (जनाना) अस्पताल में लेबर रूम के बाहर 500 रुपए का ’नजराना’ वसूलकर परिजन को नवजात सौंपने का मामला सामने आया है। परिजन की ओर से संभागीय को शिकायत देने के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरों से घटना की पुष्टि के बाद चार ठेका कर्मियों को हटा दिया। एक नर्सिंग कर्मचारी को नोटिस जारी किया गया है।जनाना अस्पताल में सोमवार को आरएमआरएस की बैठक हुई। बैठक में मौजूद संभागीय आयुक्त बी.एल. मेहरा, जिला कलक्टर अंशदीप को नसीराबाद निवासी मोहम्मद वसीम ने ज्ञापन सौंप कर अस्पताल में 500 रुपए लेने के बाद ही नवजात बच्चे को देने की शिकायत की। उसने बताया कि 11 जुलाई से अभी तक वह साढ़े तीन हजार रुपए दे चुका है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यहां जन्म के बाद बच्चा परिजन को देने, उसे नहलाने, कपड़े बदलने के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं। उसका कहना था कि अस्पताल में मौजूद उसकी सास ने जैसे तैसे रुपयों का जुगाड़ कर अस्पताल कर्मचारी को दिए। तब उसे बच्चा सौँपा गया। नवजात की नानी जुबैदा ने बताया कि 16 जुलाई को उसकी बेटी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। इसका आरोप है कि यहां परिजन से जबरन रुपए लिए जा रहे हैं। संभागीय आयुक्त मेहरा के निर्देश पर अस्पताल प्रशासन ने सीसीटीवी से जांच करवा कर आरोपियों को चिन्हित कर कार्रवाई की।
इन चार को हटाया
अस्पताल प्रशासन के अनुसार ठेकाकर्मी अंजली, मीरां, बंटी एवं लोकेश को हटा दिया है।

थमाया नोटिस
नर्सिंग अधीक्षक उषा मकवाना के अनुसार लेबर रूम में कार्यरत कम्पाउंडर (नर्सिंग कर्मचारी) शिवराज चंदेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उससे घटना को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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