Posts

Investigation service stopped in pmch

HIV and Hepatitis investigation stopped for one year due to lack of kit in PMCH of Patna

05.08.2022

पीएमसीएच को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। एक छत के नीचे अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो रही है। लेकिन, ये भविष्य की बात है। फिलहाल हालत यह है कि राज्य के इस सबसे बड़े अस्पताल के क्लिनिकल पैथोलॉजी विभाग में करीब एक साल से एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी की जांच बंद है। जांच बंद होने का कारण किट खत्म होना बताया जा रहा है।इसकी लिखित जानकारी देने के बावजूद अबतक इन तीनों जांच के लिए किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। क्लिनिकल पैथोलॉजी विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 275, जबकि सेंट्रल इमरजेंसी में 250 से 300 मरीज जांच कराने आते हैं। यानी प्रतिदिन 500 से अधिक मरीजाें की जांच की जरूरत होती है। चिकित्सकों की मानें तो इनमें 100 से अधिक मरीज एचआईवी और हेपेटाइटिस की जांच कराने वाले हाेते हैं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आईएस ठाकुर ने बताया कि किट के लिए बीएमएसआईसीएल को लिखा जा चुका है। दवा या किट बीएमएसआईएल ही उपलब्ध कराता है। वहां से नहीं मिलने पर सोचा जाएगा। बगैर टेंडर किए लोकल परचेज नहीं कर सकते हैं।

प्राइवेट में लग रहे ~400
फिलहाल जांच कराने के लिए प्राइवेट में गरीब मरीजों को पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक इन तीनों जांच (पैकेज) के लिए मरीजाें को करीब 400 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

blood buisness

The accountant of Patna’s Niveda Hospital Blood Center is still absconding.

29.07.2022
बच्चों का खून निकालकर बेचने की जांच जारी है। ड्रग कंट्रोलर विभाग की टीम ने गुरुवार को गोविंद मित्र रोड में ब्लड बैग बेचने वालों के यहां जांच की, ताकि पता चले कि आरोपी संतोष और निवेदा ब्लड सेंटर को किसने इसकी सप्लाई की थी। विभाग के एडीसी विश्वजीत दास गुप्ता ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में खेल ब्लड बैग का ही है।
जिस बैच और टैग नंबर का ब्लड बैग आरोपी संतोष और निवेदा के ब्लड सेंटर में मिला है, उसी का मिलान किया जा रहा है। यहां दो-तीन ही ब्लड बैग की सप्लाई करने वाले हैं।इन सभी के यहां बैच नंबर का मिलान किया जा रहा है। एडीसी ने बताया कि निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर का एकाउंटेंट भी अभी तक फरार है। उसकी तलाश हो रही है। उससे पूछताछ में पता चलेगा कि खून के खरीद फरोख्त में पेमेंट किसे और कैसे किया गया।

बिना अनुमति दूसरे राज्यों से भी मंगाते थे ब्लड
एडीसी के मुताबिक जांच से पता चला कि यह ब्लड बैंक दूसरे राज्य से भी खून मंगाता था। कोलकाता के अलावा और कहां-कहां से खून मंगाते थे और कहां सप्लाई करते थे, इसकी जांच की जा रही है। एक ब्लड सेंटर से खून मंगाने की जानकारी मिली है।दूसरे राज्य से खून मंगाने के लिए एनबीटीसी या एसबीटीसी से अनुमति लेनी पड़ती है। लेकिन कोलकाता के ब्लड सेंटर से खून मंगाने के लिए अनुमति भी नहीं ली गई। ये लोग बगैर अनुमति के ही कोलकाता के ब्लड बैंक से खून मंगाते थे। खून कहां से आया और किसको चढ़ाया गया, इसका भी रिकार्ड नहीं मिला है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

SCUFFLE WITH MEDICAL SUPERINTENDENT

Outsourced employees scuffle with medical superintendent in Patna

29.07.2022
उनके ओपीडी क्लिनिक में भी तोड़फोड़ की। मामले को संभालने के लिए पुलिस भी बुलाना पड़ी। इस बाबत शास्त्रीनगर थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसकी लिखित सूचना डाॅ. मंडल ने निदेशक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा को दी। उन्होंने तुरंत सभी विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई। बैठक में निर्णय लिया गया कि सीसीटीवी फुटेज में उपद्रव करते जो भी आउटसोर्स कर्मी दिखेंगे उन एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही इन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। आउटसोर्स एजेंसी को भी चेतावनी दी गई है। इस घटना के दौरान ओपीडी में अफरातफरी का माहौल व्याप्त हो गया था। हंगामा देख मरीज और उनके परिजन भी आतंकित हो गए थे। कुछ मरीज तो डर से बगैर दिखाए और जांच कराए ही चले गए।

समझाने निकले ताे उन्हीं पर टूट पड़े
डॉ. मंडल ने बताया कि आउटसोर्स एजेंसी के कुछ कर्मचारी अविनाश झा की अगुवाई में घूम-घूमकर आउटसोर्स कर्मचारियों को काम बंद करने के लिए प्रेरित कर रहे थे। मरीजों को भी ओपीडी से भगा रहे थे। वे उस वक्त कमरा नंबर 20 में मरीज देख रहे थे।

शोर सुनकर वे बाहर निकले और उन्हें समझाने की कोशिश की। कहा कि उनकी सारी मांगें निदेशक की अध्यक्षता में सुनी जाएंगी। लेकिन ये लोग नहीं माने और अधीक्षक के साथ ही धक्कामुक्की करने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने घेरे में लेकर उन्हें ओपीडी क्लिनिक में बंद कर दिया।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Blood buisness in patna

Red blood black business in Patna; page of entry register of blood center of niveda hospital missing

27.07.2022
बच्चों का खून निकालकर बेचने के मामले में ड्रग कंट्रोलर विभाग की टीम ने कंकड़बाग स्थित निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर से बरामद कागजात की जांच शुरू की है। अस्पताल के चेयरमैन ने मंगलवार को एक दिन का बाकी कागजात और ब्लड सेंटर के प्रभारी को बुलाने के लिए एक दिन का समय लिया है।यानी बुधवार को फिर टीम जांच करने के लिए निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर जाएगी। अस्पताल से जो कागजात मिले हैं फिलहाल उसकी जांच की जा रही है। ब्लड सेंटर से छह रजिस्टर मिले हैं। ब्लड इंट्री रजिस्टर के पेज भी बीच-बीच में फाड़कर हटाए गए हैं। रजिस्टर देखकर लगता है कि पेज हाल ही में फाड़ा गया है। इसकी पुष्टि ड्रग कंट्रोलर ने की है।

जिसके नाम से लाइसेंस वह नालंदा पीएचसी में पोस्टेड

बताया गया कि ब्लड सेंटर का लाइसेंस जिस डॉक्टर के नाम से है वह नालंदा में पीएचसी में पोस्टेड हैं। सोमवार को उन्हें कई बार फोन करके बुलाया गया पर वे मौजूद नहीं हो सके। अस्पताल के चेयरमैन ने उन्हें बुधवार को बुलाने की बात कही है। बताया गया कि अमूमन कोई बड़ी घटना पर दूसरे राज्यों से खून मंगाया जाता है।पर निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर कोलकाता के लाइफ केयर फाउंडेशन नामक ब्लड सेंटर से रेगुलर खून मंगाता था। सिर्फ 22 दिन के अंदर कोलकाता के ब्लड सेंटर से 533 यूनिट खून बैग समेत मंगाया गया है। इस बाबत अस्पताल ने कोलकाता के ब्लड सेंटर से करार भी किए हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि खून खरीदकर मंगाने का रिकार्ड तो है पर किसको दिया गया है इसका कोई रिकार्ड नहीं है।

खून को लेकर रिकार्ड ठीक से मेंटेन नहीं किया गया
सोमवार को जब निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर में ड्रग विभाग की पहुंची तो सभी स्टाफ और प्रभारी गायब थे। वैसे आरोपी संतोष कुमार के घर के फ्रिज से 45 यूनिट खून बरामद किया गया था। वहीं से निवेदा अस्पताल के रैपर और लेटर पैड बरामद हुआ था।सोमवार को ड्रग इंस्पेक्टरों को जांच के दौरान पता चला कि निवेदा अस्पताल के ब्लड बैंक में खून का लेन-देन का रिकार्ड ठीक से मेनटेन नहीं किया गया है। हालांकि बैंक में जितने भी इससे संबंधित कागजात की कॉपी ली गई है। निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर ने कोलकाता के एक ब्लड सेंटर से एक जुलाई से 22 जुलाई तक 533 यूनिट खून मंगाया गया है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Blood buisness in patna

Adulterated blood being sold in Patna: 300ml fake blood from 200ml plasma expander, no benefit or harm after transfusion

26.07.2022
पटना में स्मैकियों से ब्लड लेने के मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है। आशंका है कि मिलावट करके एक डोनर के खून से तीन यूनिट ब्लड तैयार किया गया। फ्रीज में सब्जी के साथ मिले 44 यूनिट ब्लड की जांच की जा रही है। जांच के लिए 5 एक्सपर्ट की टीम लगाई गई है। संक्रमण के साथ मिलावट की जांच के लिए सैंपल लैब भेजा जाएगा।

खून में थोड़ी सी चूक से जान को खतरा

एक्सपर्ट का कहना है कि ब्लड में लाल रक्त कणिका (RBC), श्वेत रक्त कणिका (WBC) और प्लेटलेट्स अहम होता है। RBC आक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाने का काम करती है और कार्बन डाइ आक्साइड को शरीर से श्वसन अंगों तक ले जाने का काम करती है। इनकी कमी से खून की कमी यानी ‘एनीमिया’ होता है। इसी तरह से प्लाज्मा भी शरीर में काफी आवश्यक होता है। एक्सपर्ट का कहना है कि इन तीनों के इनबैलेंस से ही इंसान की सेहत पर बड़ा असर पड़ता है। इससे मौत का भी खतरा बढ़ जाता है।

प्लाज्मा एक्सपेंडर से तैयार होता है खून

एक्सपर्ट बताते हैं कि खून को लेकर देश में कई बड़े खुलासे हुए हैं। नकली खून बनाने से लेकर कई काले कारोबार सामने आए हैं। इसमें सबसे अधिक मामला प्लाज्मा एक्सपेंडर से खून बनाने का है। यह काफी आसानी से तैयार हो जाता है और इसमें कोई खतरा भी नहीं होता है। औषधि विभाग के एक्सपर्ट यशवंत कुमार झा बताते हैं कि प्लाज्मा एक्सपेंडर से खून बनाया जाता है, यह खून नहीं होता है। रंग तो खून जैसा ही होता है लेकिन इसमें हीमोग्लोबिन नहीं होता है।

यूपी और राजस्थान के कनेक्शन की पड़ताल

खून के कारोबार में राजस्थान और यूपी का भी कनेक्शन खंगाला जा रहा है। उत्तर प्रदेश के साथ राजस्थान में भी खून के कारोबार का खुलासा हो चुका है। बताया जा रहा है कि राजस्थान से खून के कारोबारियों का नेटवर्क जुड़ा है। पटना में खून के खेल की कड़ी कहां से जुड़ी है, इसके लिए जांच टीम काम कर रही है। टीम में 5 अलग-अलग एरिया के औषधि निरीक्षकों को शामिल किया गया है। प्रशासन का कहना है कि 7 दिन में पूरा खेल उजागर हो जाएगा।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

AIIMS,patna success rate in the treatment of corona is better.

Research published in British Journal and JAMA revealed, Patna AIIMS’s success rate in the treatment of corona is better than major hospitals in America

25.07.2022
पटना एम्स के चिकित्सकों ने कोरोना की पहली लहर में भर्ती मरीजों और इलाज के तरीके को लेकर रिसर्च किया है। रिसर्च में यह सामने आया है कि पटना एम्स ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए जो एसओपी तैयार किया था, वह अमेरिका और इटली जैसे विकसित देशों के प्रमुख अस्पतालों के बराबर था। इसका सुखद परिणाम यह रहा कि हमारे डाॅक्टर ज्यादतर कोरोना मरीजों को स्वस्थ करने में सफल रहे।पहली लहर में इलाज के लिए पटना एम्स में 4102 संक्रमित भर्ती हुए थे। इसमें 3268 ठीक हुए। यानी, 79.66 फीसदी। दूसरी ओर, अमेरिका में हुए रिसर्च में खुलासा हुआ है कि न्यूयाॅर्क के प्रमुख अस्पतालों में पहली लहर में भर्ती 5700 मरीजों में 21% की अस्पताल में मौत हई। पटना एम्स का रिसर्च ब्रिटिश मेडिकल जर्नल और अमेरिका में हुआ रिसर्च जामा में प्रकाशित हुआ है।
आठ से 14 दिन में ठीक होकर घर जा रहे थे संक्रमितपटना एम्स में मरीजों के स्वस्थ होने में औसतन 08 से 14 दिन का समय लग रहा था। भर्ती होने के आठवें दिन मरीज की मौत हो रही थी। एक बड़ा खुलासा हुआ कि गंभीर मरीज जिनको रेमडेसीविर लगा उनमें 5.4, प्लाज्मा थेरेपी लेने वालों में 7.76% या फिर टोसलीमुजैब लेने वालों की 6.3 गुना मौतें अधिक हुईं। मृतकों में अिधकतर बीपी और किडनी के मरीज थे।

60+ की अधिक मौतें हुईं
पटना एम्स में मरीज का एवरेज उम्र 55 साल थी। अधिकांश मरीज 51 साल से 60 साल के थे। सबसे अधिक 263 मौत 61 साल से 70 साल की उम्र के मरीजों की हुई। यानी 23 फीसदी 60 साल से अधिक उम्र के मरीजों की मौत हुई। पुरुषों के मुकाबले महिलाएं इस दौरान कम संक्रमित हुई। इनका रेसियो 2.7:1 था।
एम्स ने शानदार काम किया
पटना एम्स की रिसर्च टीम में शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. लोकेश तिवारी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सीएम सिंह, पूर्व निदेशक डॉ. पीके सिंह के अलावा विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल थे। इस बाबत एम्स के निदेशक डॉ. जीके पाल ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पटना एम्स ने शानदार काम किया।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

3 People died in aiims patna

All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), Patna 3 people died, 460 new cases were reported in the last 24 hours

16.07.2022
बिहार में कोरोना ने भयानक रूप ले लिया है। पटना के एम्स में कोरोना से कल 3 लोगों की मौत हो जाने से हड़कंप मच गया है। मरने वालों में सुपौल की महिला रंभा देवी जिसकी उम्र 60 साल थी, मुजफ्फरपुर के राजेश कुमार साह 30 और एक नव निहाल अहद जिसकी उम्र मात्र 3 महीने की थी, मौत हो गई।बिहार में पिछले 24 घंटों में 460 नए मामले सामने आए हैं। वही कल 497 नए मामलें आए थें। पटना जिले में सब से ज्यादा एक्टिव मरीज हैं। पटना में आज एक्टिव मरीजों की संख्या 202 है। वही कल पटना में 178 नए मामलें सामने आए थें।रोज मिलने वाले नए संक्रमित की संख्या कम होने का नाम नही ले रही है। बिहार में एक्टिव मरीजों की संख्या रोज बढ़ रही है। 7 दिन पहले एक्टिव मरीजों की संख्या 1957 थी। आज एक्टिव मरीजों की संख्या 2640 है। 7 दिनों में एक्टिव मरीजों की संख्या मे बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। जो की परेशानी बढ़ा रहा है।आपको बता दें कि बिहार में विगत 24 घंटों में 1,06,607 लोगों की जांच हुई है। अब तक कुल 8,23,285 मरीज ठीक हुए हैं। वर्तमान में बिहार में कोविड के कुल एक्टिव मरीजों की संख्या 2640 है। बिहार में कोरोना मरीजों का रिकवरी प्रतिशत 98.22 है।

*पूरे बिहार में पिछले 7 दिनों का आंकड़ा

15.07.2022

पटना 202, अररिया और सुपौल मे 22, 22, भागलपुर और मुजफ्फरपुर मे 20,20 समेत पुरे बिहार मे 460 मरीज। कुल एक्टिव मरीज 2640

14.07.2022

पटना 178, मुजफ्फरपुर 50, खगड़िया 28, भागलपुर 25 समेत पुरे बिहार मे 497 मरीज। कुल एक्टिव मरीज 2596

13.04.2022

पटना 219, भागलपुर 89, बांका 38, गया 23 समेत पुरे बिहार में 565 मरीज। कुल एक्टिव मरीज 2510

12.07.2022

पटना 192, भागलपुर 41, खगड़िया 22, सारण 15 समेत पूरे बिहार में 436 मरीज। कुल एक्टिव मरीज 2344

11.07.2022

पटना 167, बांका 45, गया 21, भागलपुर 19 समेत पूरे बिहार 344 मरीज। कुल एक्टिव मरीज 2270

10.07.2022

पटना 167, भागलपुर 38, गया 45 और मुजफ्फरपुर मे 11 समेत पूरे बिहार मे 421 मरीज। कुल एक्टिव मरीज 2103

09.07.2022

पटना 220, भागलपुर 40, सहरसा 15 और मुजफ्फरपुर मे 14 समेत पूरे बिहार 408 मरीज। कुल एक्टिव मरीज 1957

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Now pmch college patna free examination of seasonal diseases

Patna Medical College Hospital (PMCH) will have the facility of free treatment: With Corona, now the facility of free examination of seasonal diseases including dengue, malaria and chickenpox.

13.07.2022
कोरोना का संक्रमण शहर में लगातार बढ़ रहा है। साथ ही साथ मौसमी बीमारियां भी दस्तक देने लगी हैं। इसलिए मौसमी बीमारियों की भी जांच पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी विभाग शुरू की गई है। इनमें कोरोना के अलावा डेंगू, मेनिनजाइटिस, जापानी इंसेफ्लाइटिस, मलेरिया, चिकनपॉक्स आदि की भी जांच शुरू कर दी गई है।डेंगू जांच कराने के लिए मरीज भी आने लगे हैं। अस्पताल के अनुसार माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एक सप्ताह के दौरान अभी कोई मरीज पॉजिटिव नहीं मिला है। हालांकि प्राइवेट क्लिनिक दावा कर रहे हैं जांच में डेंगू के मामले शुरू हो गए हैं। अभी एक-दो मरीज ही पॉजिटिव मिले हैं। बताया जा रहा है कि बारिश के बाद होने वाले जलजमाव में डेंगू के मच्छर उत्पन्न होंगे तब डेंगू का प्रकोप दिखने लगेगा।

जरूरत और मांग के अनुसार सुविधा बहाल की जाएगी

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. आईएस ठाकुर के मुताबिक भर्ती होने वाले डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ेगी या फिर विभाग से इस तरह का कोई निर्देश आएगा तो अलग वार्ड की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल अभी कोई मरीज आता है तो उसकी व्यवस्था की जाएगी। अभी अलग वार्ड बनाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया। जरूरत और मांग के अनुसार सुविधा बहाल की जाएगी।

प्लेटलेट्स भी जरूरत के अनुसार तैयार किया जाएगा। क्योंकि डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है। ब्लड बैंक को भी जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स तैयार करना होगा। उसकी भी व्यवस्था है। डॉक्टरों ने बताया कि डेंगू के मच्छर साफ जमा पानी में पनपते हैं। इसलिए घर या आसपास में यदि पानी जमा हो तो उसे साफ कर दें। वरीय फिजिशियन डॉ. राजीव रंजन और डॉ. बीके चौधरी का कहना है कि बुखार और शरीर में तेज दर्द होने की शिकायत लेकर मरीज आ रहे हैं।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Corona in patna

192 new corona patients found in Patna after six days

13.07.2022
कोरोना का संक्रमण राज्य के विभिन्न जिलों और पटना में थमने का नाम नहीं ले रहा है। साथ ही साथ मौत भी हो रही है। सोमवार को भी पटना एम्स और पीएमसीएच में एक महिला की मौत हुई है। एम्स में समस्तीपुर के रहने वाले एक 55 वर्षीय कोरोना संक्रमित अशोक कुमार सिंह की मौत हुई है। श्री सिंह कोरोना से ही पीड़ित थे।इसकी पुष्टि एम्स में कोरोना के नोडल ऑफिसर संजीव कुमार ने की। पटना एम्स में मंगलवार को चार नए कोरोना संक्रमित भर्ती हुए हैं। एम्स में अभी 17 मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं पीएमसीएच में भी दरभंगा की रहने वाली 48 साल की कमला देवी की मौत हुई है। कमला देवी को मंगलवार को ही भर्ती कराया गया था।पीएमसीएच में हुई जांच में 23 सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसमें दो डॉक्टर समेत 23 लोग संक्रमित मिले हैं। इसमें पीएमसीएच और आईजीआईसी के डॉक्टर, मरीज और स्टाफ शामिल हैं। राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 2344 और पटना 1312 हो गई है। ­ मंगलवार को 154 दिन बाद राज्य में कोरोना के 436 और पटना में छह दिन बाद 192नए मरीज मिले हैं। इससे पहले पांच फरवरी को राज्य में कोरोना के 442 मरीज और पटना में 9 जुलाई को 220 मरीज मिले थे।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Corona cases increases in patna

The number of Corona patients receiving daily increased three times in 15 days, 167 new cases in Patna

11.07.2022
राज्य में कोरोना डराने वाली स्थिति में पहुंच गया है। रविवार को राज्य में 421 मरीज मिले। इससे पहले 8 जुलाई को सबसे अधिक 422 मरीज मिले थे। पटना में 167 मरीज मिले। राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 2103 और पटना में 1169 हो गई है। पिछले 15 दिनों में राज्य और राजधानी दोनों में एक्टिव मरीजों की संख्या में तीन गुनी से अधिक हो गई है। 15 दिन पहले 25 जून को राज्य में जहां मात्र 638 एक्टिव मरीज थे, वहीं पटना में एक्टिव मरीजों की संख्या 387 थी। इन 15 दिनों में प्रतिदिन मिलने वाले करोना मरीजों की संख्या में भी लगभग तीन गुनी वृद्धि हुई है। 25 जून को राज्य में जहां 116 मरीज मिले थे, वहीं पटना में 57 मरीज मिले थे।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓