Facilities increases in sms hospital,Jaipur

04.07.2022
कोविड काल के दौरान राज्य के हर आम और खास के लिए सबसे बड़ी जरूरत में शामिल रहे एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ.सुधीर भंडारी सोमवार को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (मेडिकल यूनिवर्सिटी) के कुलपति पद की कमान संभालेंगे। डॉ.भंडारी कोविड प्रबंधन में सरकार का प्रमुख चेहरा रहे हैं। राज्य सरकार की हर नीति और कार्यप्रणाली में उनकी मुख्य भूमिका रही।सवाई मानसिंह अस्पताल में 1100 बैड क्षमता के 24 मंजिला और महिला चिकित्सालय में नव स्वीकृत 500 बैड के आईपीडी टावर सहित, हृदय, न्यूरोसाइंस, नैत्र, टोपिकल मेडिसिन संस्थान सहित स्टेट आफ आर्ट सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल को उनकी उपलब्धियों में माना जा रहा है।विशेष बातचीत में उन्होंने दावा किया कि अब आरयूएचएस अस्पताल को एक साल में मल्टी स्पेशियलिटी के रूप में विकसित करना उनका उदृदेश्य है।

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Covid in patna

29.06.2022
राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 885 तो पटना में एक्टिव मरीजों की संख्या 534 हो गई है। राज्य की पॉजिटिविटी रेट 0.106 फीसदी तो पटना की पॉजिटिविटी रेट 1.38 फीसदी हो गई है। राज्य में 24 घंटे दौरान 98 मरीज स्वस्थ हुए हैं। राज्य में कुल 131812 सैंपल की जांच हुई है। राज्य की रिकवरी रेट 98.421 फीसदी है। वहीं आईजीआईएमएस में सर्जरी विभाग के चार, आई के एक, पीएसएम विभाग के एक डॉक्टर संक्रमित हुए हैं। एनएमसीएच के एक डॉक्टर और दो स्टाफ संक्रमित हुए हैं।बेऊर के 37 कैदी संक्रमित: पटना के अब हर इलाके में मरीज मिलने लगे हैं। बेउर जेल में मंगलवार को भी 37 कैदी संक्रमित मिले हैं। सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह का कहना है कि कैदी सभी एसिम्टोमेटिक हैं। किसी स्थिति ऐसी नहीं है कि उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाए।

कब कितने मरीज मिले

तारीख राज्य पटना
28 जून 211 124
27 जून 133 80
26 जून 142 56
25 जून 155 61
24 जून 152 85
23 जून 116 57
22 जून 126 83
21 जून 63 39
20 जून 35 15
19 जून 55 37
18 जून 69 26
17 जून 72 40
16 जून 40 20
15 जून 43 25

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Corona returning in madhya pradesh

28.06.2022
मध्यप्रदेश में कोरोना लौट रहा है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 74 नए मरीज मिले हैं। जून के 27 दिन में आंकड़ा बढ़कर 1463 हो गया। जबलपुर में 10 दिन के अंदर दो मरीज की मौत हो गई। इन 27 दिनों में 5 मरीज दम तोड़ चुके हैं। अप्रैल और मई में एक-एक मरीज की मौत हुई थी। रविवार को प्रदेश में 6236 सैंपल की जांच की गई। इनमें 1.18% लोग पॉजिटिव मिले हैं। भोपाल में संक्रमण दर प्रदेशभर में सबसे ज्यादा है, दूसरे नंबर पर इंदौर है।जनवरी में आई कोरोना की थर्ड वेव के बाद सिर्फ अप्रैल के महीने में सुकून रहा, लेकिन इसके बाद से लगातार कोरोना के संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। जनवरी में 1,79,656 नए मरीज मिले थे और 51 संक्रमितों की मौत हुई थी। फरवरी में 65,448 मरीज मिले और 105 संक्रमितों ने दम तोड़ दिया। मार्च में 1,945 संक्रमित मिले और 5 मौतें हुईं। अप्रैल में सबसे कम मात्र 354 केस मिले और एक की मौत हुई। मई में 1127 मामले सामने आए और एक मरीज ने दम तोड़ दिया था। लेकिन इस महीने में लगातार मामले बढ़ रहे हैं। महीने के 27 दिनों में 1463 संक्रमित मिल चुके हैं और पांच मरीजों की मौत हुई है।

इस महीने हर हफ्ते इतने मरीज

जिला पहला सप्ताह दूसरा सप्ताह तीसरा सप्ताह चौथा सप्ताह
इंदौर 59 121 161 138
भोपाल 38 98 134 104
ग्वालियर 12 14 21 15
जबलपुर 4 28 36 36
मप्र 218 385 466 394

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Thalassemia medicine is not available in sms hospital,Jaipur

28.06.2022
एक तरफ सरकार ब्लड की कमी से होने वाली बीमारियों थैलेसीमिया, हिमोफीलिया और सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों को इलाज की निशुल्क सुविधा देने का दावे कर रही है, वहीं एसएमएस जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर समेत कोटा मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया बीमारी से जूझ रहे मरीज ‘केल्फर-500’ नामक दवा के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।इसे डेफ्रीप्रोन के नाम से भी जाना जाता है। आयरन की मात्रा बढ़ने पर नियंत्रण करने वाली केल्फर-500 दवा ही जीवन बचाने का सहारा है। दवा समय पर नहीं लेने पर शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने पर हर समय मरीज को जान को खतरा रहता है। इधर, आरएमएससीएल के अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल लोकल स्तर पर खरीद कर मरीजों को उपलब्ध करा सकते हैं।

आयरन की मात्रा को कम करने में मददगार
डॉक्टरों के अनुसार जीवनरक्षक दवा को आयरन चिलेटिंग के नाम से भी जानते हैं। यह शरीर में आयरन की मात्रा को कम करती है। थैलेसीमिया मरीजों को खून चढ़ाने के बाद उनके शरीर में आयरन की मात्रा अधिक हो जाती है। जिससे किडनी, लिवर और हार्ट जाम होने से फेल्योर होने की अधिक आशंका रहती है।

सवाई मानसिंह अस्पताल में थैलेसीमिया के रोज 15 से 20 मरीज
15 से 20 मरीज केल्फर-500 दवा की जरूरत वाले एसएमएस अस्पताल में रोजाना।
1000 के पार हुई प्रदेश भर में थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित मरीजों की।
70 से ज्यादा मरीज अकेले जयपुर में।

मरीजों ने बयां किए अपने दर्द
वैशाली नगर निवासी रजत, मालवीय नगर के राहुल, दिल्ली रोड निवासी मितुल और भूमि का कहना है कि एसएमएस समेत अन्य अस्पतालों में पहले तो दवा नहीं मिलती। फिर खून चढ़ाने के लिए की जाने वाली औपचारिकता के चलते हाथ-पांव फूलने लगते है। रजिस्ट्रेशन से लेकर खून चढ़ाने तक प्राेसीजर में 3 से 4 घंटे लग जाते हैं।

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Poor condition of health sub-centres

28.06.2022
कोरोना की तीन लहरों के दौरान शहरी अस्पतालों में बेड के लिए जो हाय तौबा मची, उसे देखते हुए यहां के ग्रामीण अस्पतालों को दुरुस्त करने की योजना बनी थी। तीसरी लहर को बीते भी छह माह से अधिक गुजर गए, पर हमारे ग्रामीण अस्पताल अब भी बीमार ही हैं। इनकी व्यवस्था इतनी लचर है कि पहले इनका इलाज करना होगा, तब ये मरीजों के इलाज के लायक बन पाएंगे।पटना में वर्तमान में 67 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 स्वास्थ्य उप केंद्र हैं। भास्कर पड़ताल में जो बातें सामने आईं, उसके अनुसार 113 में से 70 से अधिक स्वास्थ्य उप केंद्र अभी भी बदहाल हैं, जहां खटाल, भूसा घर या अन्य प्रकार के अतिक्रमण हैं। 67 में से 50 से अधिक अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों के भवन में अच्छे हो गए हैं, लेकन इनमें से 40 से अधिक में डॉक्टर नहीं आते।15 के करीब ऐसे हैं, जहां न डॉक्टर आते हैं और ना ही नर्स। दैनिक भास्कर के 12 रिपोर्टर ने पांच दिनों तक लगातार पटना के गावों में समय गुजारकर वहां मौजूद अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप केंद्रों का हाल जाना। स्थिति कमोबेश वही नजर आई, जो कोरोना काल के पहले थी।

ये भी अस्पताल…इसके बेड में अपना बेड जोड़ बनाया बेडरूम
बिक्रम में किराये पर चल रहे तरीपर एपीएचसी में कोरोना काल के बाद से कोई भी स्वास्थ्यकर्मी झांकने तक नहीं आया है। कोरोना काल के दौरान मंगाई गई दवाएं एक्सपायर हो गई हैं। अस्पताल में एक बेड है, जिसका इस्तेमाल ग्रामीण अभी सोने के लिए करते हैं।भी डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ की कमी है। नए डॉक्टर की बहाली होने वाली है। एपीएचसी में इनकी संख्या बढ़ाई जानी है। उप केंद्र पर भी ट्रेंड मैनपावर को रखा गया है, जिन्हें ओपीडी के समय के अनुसार सेंटर खोलना है। अगर कहीं से समय पर सेंटर नहीं खुलने की शिकायत प्राप्त होती है, तो कार्रवाई की जाएगी।

-डाॅ विभा कुमारी सिंह, सिविल सर्जन

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Corona infection in Bihar

27.06.2022
बिहार में कोरोना जांच अभियान के तहत राज्य में 142 नये कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान की गई। इनमें पटना में सर्वाधिक 56 नये संक्रमित मिले। औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, बक्सर, कैमूर, मुंगेर, नवादा, समस्तीपुर में 1-1, अरवल, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, किशनगंज, लखीसराय, सारण, सीवान व सुपौल में 2-2 नए संक्रमित मिले। वहीं,भागलपुर में 10, गया में 5, मधुबनी में 5, मुजफ्फरपुर में 9, रोहतास में 6, सहरसा में 5, सीतामढ़ी में 8, वैशाली में 4 और पश्चिमी चंपारण में 6 नए कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान की गई। राज्य में पिछले 24 घंटे में 1,31,812 सैंपल की कोरोना जांच की गई। कोरोना संक्रमण दर 0.10 प्रतिशत दर्ज की गयी। एक दिन पूर्व राज्य में 1,29,174 सैंपल की जांच में 155 नए संक्रमित मिले थे और संक्रमण दर 0.12 प्रतिशत थी।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में राज्य में 87 संक्रमित मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो गए और राज्य में संक्रमितों के स्वस्थ होने की दर 98.44 प्रतिशत रही। इस दौरान किसी भी संक्रमित मरीज की मौत नहीं हुई। वर्तमान में कोरोना के 693 सक्रिय मरीज इलाजरत हैं। राज्य में अबतक 8,32,059 संक्रमितों की पहचान की जा चुकी है जबकि इनमें से 8,19,108 संक्रमित स्वस्थ हो चुके हैं। अबतक कोरोना संक्रमित 12,257 मरीजों की मौत हो चुकी है।

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Reduce the no. of cancer patients in sms hospital

27.06.2022

भले ही देश में कैंसर तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन आंकड़ाें की मानें तो राजस्थान में कैंसर पिछले सालों की तुलना में आधा रह गया है। वर्ष 2015 में 290 बच्चों में कैंसर था वहीं 2021 में संख्या 137 रह गई। इसके पीछे कोविड बड़ा कारण रहा है, क्योंकि इस दौरान रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुए। इधर, आंकड़ोें के उलट सिर्फ एसएमएस में एक साल में 4400 से अधिक बच्चे कैंसर का इलाज ले चुके हैं।यह कारण है:सरकार: 2015 में 290 बच्चों व 2021 में 137 बच्चों में कैंसर सच : एक साल में ही सिर्फ एसएमएस में 4400 का इलाजआंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते।
कोरोनाकाल में रजिस्ट्रेशन कम होने से राजस्थान में कैंसर के मरीजों की संख्या आधी हुई
कितने केस
वर्ष फिमेल बच्चियां मेल बच्चे कुल
2015 97 193 290
2016 101 176 277
2017 105 200 305
2018 67 177 244
2019 107 194 301
2020 59 131 190
2021 42 95 137

वर्ष 2020 और 2021 में कुल 327 बच्चों के इलाज का दावा किया जा रहा है, लेकिन एसएमएस के आंकड़े बताते हैं कि 2021 में ही चार हजार से अधिक बच्चे इलाज ले चुके।

केस 1 सवाईमाधोपुर निवासी आठ साल का रिदम। 8 महीने पहले तबीयत खराब हुई जांच में ब्लड कैंसर निकला। पिता विजय सेन ने दो महीने पहले एसएमएस में भर्ती कराया और इलाज जारी है। उनका कहना है कि करीब ड़ेढ महीने से अस्पताल में ही हैं। एक बहन है जो हर दिन इसका इंतजार करती है। इलाज पर तो खर्च नहीं हो रहा लेकिन पेट भरने, रहने के लिए पैसे तो चाहिए।

केस 2 सवाईमाधोपुर निवासी आठ साल का रिदम। 8 महीने पहले तबीयत खराब हुई जांच में ब्लड कैंसर निकला। पिता विजय सेन ने दो महीने पहले एसएमएस में भर्ती कराया और इलाज जारी है। उनका कहना है कि करीब ड़ेढ महीने से अस्पताल में ही हैं। एक बहन है जो हर दिन इसका इंतजार करती है। इलाज पर तो खर्च नहीं हो रहा लेकिन पेट भरने, रहने के लिए पैसे तो चाहिए। आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते

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Corona in delhi

24.06.2022
दिल्ली में गुरुवार को पिछले 24 घंटों में कोविड के मामलों में दो गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले दिन दर्ज किए गए 928 के मुकाबले 1,934 थी, लेकिन कोई ताजा मौत नहीं हुई। सरकारी स्वास्थ्य बुलेटिन जारी कर इसकी जानकारी दी गई। इस बीच, कोविड पॉजिटिविटी दर 8.10 प्रतिशत हो गई है, जबकि सक्रिय मामलों की संख्या भी थोड़ी बढ़कर 5,755 हो गई है।पिछले 24 घंटों में 1,233 मरीजों के ठीक होने के साथ, ठीक होने वालों की कुल संख्या 18,95,397 हो गई है। होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या बढ़कर 3,564 हो गई है। नए कोविड मामलों के साथ, मामलों की कुल संख्या 19,27,394 हो गयी है, जबकि मरने वालों की संख्या 26,242 है। शहर में कोविड कंटेनमेंट जोन की संख्या 309 है।कुल 23,879 नए टेस्टों में से- 17,549 आरटी-पीसीआर और 6,330 रैपिड एंटीजन – पिछले 24 घंटों में किए गए। इसी के साथ टेस्टों की कुल संख्या 3,89,43,157 हो गई है, जबकि 26,121 टीके लगाए गए – जिसमें 1,890 पहली खुराक, 5,135 दूसरी खुराक, और 19,096 एहतियात खुराक दिये गये। स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, अब तक टीकाकरण किए गए कुल लाभार्थियों की संख्या 3,47,58,218 है।

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Timing of opd in jp hospital ,Bhopal

24.06.2022
जेपी अस्पताल की ओपीडी की टाइमिंग में एक बार फिर बदलाव होने जा रहा है। नई टाइमिंग के तहत ओपीडी सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक चलेगी। यही नहीं, शाम को 5 से 6 बजे तक डॉक्टरों का वार्डों में राउंड होगा। इसके बाद शाम 6 से 7 बजे तक डॉक्टर ओपीडी में रहेंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने जेपी अस्पताल के अलावा प्रदेश के कुछ अन्य अस्पतालों की भी स्टडी की है। इसमें पता चला कि मौजूदा टाइमिंग में दोपहर बाद मरीज पहुंच ही नहीं रहे हैं। इसे देखते हुए टाइमिंग बदलाव के प्रस्ताव को जैसे ही मंजूरी मिलेगी, नई व्यवस्था शुरू की जाएगी।

तीन साल पहले भी विभाग ने ओपीडी टाइम में बदलाव किया था। अभी हालात यह हैं कि सोमवार को ओपीडी में कुल 1156 मरीज पहुंचे। दोपहर बाद 3 से 4 बजे के बीच तो महज 30 मरीज ही आए थे। ऐसे में इस दौरान अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों का कोई उपयोग ही नहीं हो पा रहा है।

शाम के वक्त भी 6 से 7 बजे तक रहेगी ओपीडी
ओपीडी की टाइमिंग में किए जा रहे बदलाव से खासकर शाम के वक्त एक घंटे वार्डों के राउंड की व्यवस्था होने से डॉक्टर मरीजों को देखने पहुचेंगे। इसके बाद एक घंटे की ओपीडी रहेगी। मौजूदा व्यवस्था में शाम को राउंड नहीं होता है। ऐसे में डॉक्टर मरीज को एक बार देखने के बाद सीधे 24 घंटे बाद ही पहुंचता है।
टाइमिंग बदलने से मरीजों को ही होगा फायदा

ये सही है कि दोपहर के बाद के वक्त में गिने चुने मरीज ही आते हैं। टाइमिंग बदलने से अस्पताल में भर्ती मरीजों को ये फायदा होगा कि डॉक्टर उनको दो बार देखने आएंगे।

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Filth in atmosphere of chc phulera

23.06.2022
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अस्पताल में बीमार लोगों का इलाज होता है। वहां साफ सफाई और स्वच्छ वातावरण लोगों को मिलता है जिससे कि बीमार दवाओं और स्वच्छ वातावरण में जल्दी स्वस्थ हों पर नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इससे ठीक उलटा देखने को मिल रहा है।आलम यह है कि मरीजों के भर्ती वार्ड के पास ही कचरे और गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। इसके चलते वार्ड में भर्ती मरीज और उनके परिजनों को पास में पड़े कचरे और गंदगी से आने वाली बदबू के कारण वार्ड में बैठना दूभर हो रहा है। अस्पताल से निकलने वाला कचरा और गंदगी वार्ड के पास हफ्तों तक पड़ी रहती है। इस कारण मरीजों और उनके परिजनों को अन्य संक्रामक बीमारियों का भी खतरा बना रहता है। वहीं अस्पताल से निकलने वाले कचरे और गंदगी को फेंकने के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्वयं ही व्यवस्था करनी होती है। यह भी ध्यान रखा जाता है कि अस्पताल के संक्रमित कचरे और गंदगी को अस्पताल परिसर में ही गड्ढा खोदकर उसमें डाला जाता है और उसे नष्ट किया जाता है, लेकिन लगता है नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मेदार अस्पताल से निकलने वाले कचरे और गंदगी को अस्पताल परिसर में वार्ड के पास खुले में फेंककर अस्पताल में आने वाले मरीजों और परिजनों को अन्य संक्रामक बीमारियों की गिरफ्त में लाना चाहते हैं। जब तेज धूप पड़ती है और यह कचरा सूख जाता है, वार्ड के पास लगे कचरे और गंदगी के ढेर से तेज हवा में कचरा वार्ड में भी पहुंच जाता है जो कि मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है।

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