Poor condition of sub-health centers in Patna

28.06.2022
कोरोना की तीन लहरों के दौरान शहरी अस्पतालों में बेड के लिए जो हाय तौबा मची, उसे देखते हुए यहां के ग्रामीण अस्पतालों को दुरुस्त करने की योजना बनी थी। तीसरी लहर को बीते भी छह माह से अधिक गुजर गए, पर हमारे ग्रामीण अस्पताल अब भी बीमार ही हैं। इनकी व्यवस्था इतनी लचर है कि पहले इनका इलाज करना होगा, तब ये मरीजों के इलाज के लायक बन पाएंगे।पटना में वर्तमान में 67 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 स्वास्थ्य उप केंद्र हैं। भास्कर पड़ताल में जो बातें सामने आईं, उसके अनुसार 113 में से 70 से अधिक स्वास्थ्य उप केंद्र अभी भी बदहाल हैं, जहां खटाल, भूसा घर या अन्य प्रकार के अतिक्रमण हैं। 67 में से 50 से अधिक अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों के भवन में अच्छे हो गए हैं, लेकन इनमें से 40 से अधिक में डॉक्टर नहीं आते।15 के करीब ऐसे हैं, जहां न डॉक्टर आते हैं और ना ही नर्स। दैनिक भास्कर के 12 रिपोर्टर ने पांच दिनों तक लगातार पटना के गावों में समय गुजारकर वहां मौजूद अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप केंद्रों का हाल जाना। स्थिति कमोबेश वही नजर आई, जो कोरोना काल के पहले थी।

ये भी अस्पताल…इसके बेड में अपना बेड जोड़ बनाया बेडरूम
बिक्रम में किराये पर चल रहे तरीपर एपीएचसी में कोरोना काल के बाद से कोई भी स्वास्थ्यकर्मी झांकने तक नहीं आया है। कोरोना काल के दौरान मंगाई गई दवाएं एक्सपायर हो गई हैं। अस्पताल में एक बेड है, जिसका इस्तेमाल ग्रामीण अभी सोने के लिए करते हैं।भी डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ की कमी है। नए डॉक्टर की बहाली होने वाली है। एपीएचसी में इनकी संख्या बढ़ाई जानी है। उप केंद्र पर भी ट्रेंड मैनपावर को रखा गया है, जिन्हें ओपीडी के समय के अनुसार सेंटर खोलना है। अगर कहीं से समय पर सेंटर नहीं खुलने की शिकायत प्राप्त होती है, तो कार्रवाई की जाएगी।

-डाॅ विभा कुमारी सिंह, सिविल सर्जन

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