Heart transplant works stops in SMS hospital ,jaipur

28.06.2022
राज्य सरकार ऑर्गन डोनेट को बढ़ावा देने के लिए कई तरीके से प्रयास कर रही है, मगर इसके लिए फंड की कमी पूरी नहीं कर पा रही है। प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में दो साल से फंड की कमी की वजह से हार्ट ट्रांसप्लांट का काम बंद पड़ा है। इसके चलते अस्पताल में प्रदेश के गरीब लोगों के हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहे हैं। वहीं अस्पताल में आने वाले ब्रेनडेड लोगों के हार्ट सहित अन्य ऑर्गन निजी अस्पतालों में भेजे जा रहे हैं। निजी अस्पतालों में हार्ट ट्रांसप्लांट के 25 लाख रुपए तक लग रहे हैं। दूसरी तरफ एसएमएस अस्पताल में करीब 10 लाख रुपए तक का ही खर्च आता है, यह राशि भी सरकार वहन करती है।एसएमएस अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए 24 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन करा रखा है। ये लोग दो साल से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अस्पताल में आने वाले ब्रेनडेड मरीजों के ऑर्गन और जांच में मैच होने के बाद भी फंड की कमी की वजह से ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को मजबूरन निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। दो साल में एसएमएस अस्पताल से पांच लोग ब्रेनडेड हो चुके हैं।

पांच माह में तीन ट्रांसप्लांट, लेकिन पिछले दो साल में एक भी नहीं
एसएमएस अस्पताल में जनवरी 2020 में पहला हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ था। इसके बाद इसी साल मार्च और मई में ट्रांसप्लांट हुए, फिर कोरोना आ गया। पहले तो कोरोना की वजह से ट्रांसप्लांट नहीं हुए। अब कोरोना कम हुआ तो अस्पताल प्रशासन फंड नहीं मिलने की वजह बताकर ट्रांसप्लांट नहीं कर रहा है। पहला हार्ट ट्रांसप्लांट 8 साल पहले 6 घंटे में हुआ था।प्रदेश में सबसे पहले हार्ट ट्रांसप्लांट की शुरुआत 8 साल पहले महात्मा गांधी अस्पताल में हुई। अस्पताल में पहला ट्रांसप्लांट 2 अगस्त 2015 में हुआ। इसमें ब्रेनडेड और रिसीवर दोनों एक ही अस्पताल में मौजूद थे। ट्रांसप्लांट अस्पताल के डॉ. चिश्ती और उनकी टीम ने राजू नाम के ब्रेनडेड मरीज का हार्ट सूरजभान में ट्रांसप्लांट किया था। ट्रांसप्लांट में 12 डॉक्टर सहित 24 लोगों की की टीम लगी थी। ऑपरेशन में करीब 6 घंटे लगे थे।

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद आठ लोग जी रहे हैं नॉर्मल जिंदगी
राजधानी में आठ साल में दो निजी और एक सरकारी अस्पताल को मिलाकर 10 हार्ट ट्रांसप्लांट हुए हैं। इसमें से आठ लोग नॉर्मल जिंदगी जी रहे हैं। दो लोगों की मौत हो चुकी है। दो से एक की मौत कोविड की वजह से हुई है। सबसे अधिक हार्ट ट्रांसप्लांट ईएचसीसी अस्पताल में 6 हुए हैं। एसएमएस अस्पताल में तीन और महात्मा गांधी अस्पताल में एक हुआ है।फंड की कमी की वजह से अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं अटके हुए हैं। मरीज के ब्लड ग्रुप सहित अन्य जांचें मैच नहीं होने की वजह से ट्रांसप्लांट नहीं हो रहे होंगे, -डॉ. विनय मल्होत्रा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल

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Jp,hospital bhopal formed a committee for investigation of lady death

28.06.2022
राजधानी भोपाल के जयप्रकाश अस्पताल में रविवार को गर्भवती महिला की मौत हो गई। महिला के गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई थी। परिजन का आरोप है कि डॉक्टरों की अनदेखी और समय से सिजेरियन न कराने के चलते गर्भवती की मौत हुई है। महिला की मौत के बाद करीब एक घंटे तक अस्पताल में हंगामा हुआ। अब अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने सोमवार को जेपी अस्पताल में छह डॉक्टरों सहित 19 लोगों के बयान लिए। कमेटी की जांच में प्रसव के लिए भर्ती हुई गर्भवती की डिलेवरी कराने में हुई देरी और स्टाफ की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। हालांकि जांच रिपोर्ट के बारे में बताने से जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ.राकेश श्रीवास्तव बच रहे हैं। श्रीवास्तव का कहना है कि जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य आयुक्त डॉ.सुदाम खाडे़ को भेज दी है।
महिला को 1 दिन पहले भर्ती किया गया था|चंचल (27) पत्नी अनिल की पहली डिलेवरी होनी थी। उसे प्रसव पीड़ा के चलते जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतक के पति अनिल ने बताया कि यह हमारा पहला बच्चा था। सब कुछ ठीक चल रहा था। सभी तरह की जांच समय पर करवाई गई थी। शनिवार को पत्नी को दर्द उठा तो उसे लेकर जेपी अस्पताल आ गया। डॉ. श्रद्धा अग्रवाल ने कहा कि सब कुछ ठीक है, दवाइयां दे दी हैं। जब पूरा एक दिन गुजर गया और पत्नी को प्रसव नहीं हुआ तो कई बार डॉक्टरों के पास गया। बताया कि उसे दर्द ज्यादा हो रहा है, आप लोगों को यदि ऑपरेशन करना हो तो जल्दी कीजिए, लेकिन डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया। पत्नी की मौत लापरवाही के कारण हुई है।
अस्पताल में हुआ जमकर हंगामा
महिला की मौत की सूचना मिलने के बाद उसका पति अनिल बेहोश हो गया। उसकी हालत बिगड़ती देख परिजन ने हंगामा शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक अस्पताल में हंगामा मचा रहा। मौके पर पहुंची पुलिस से मृतक महिला के परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। अब आज जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।

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Fire breaks out in children’s hospital,Ahmedabad

27.06.2022
गुजरात के अहमदाबाद शहर में पांच मंजिला एक वाणिज्यिक परिसर की चौथी मंजिल पर स्थित बच्चों के अस्पताल में शनिवार को आग लग गई। हालांकि, समय रहते 13 नवजात बच्चों सहित 75 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने शनिवार को बताया कि परिमल गार्डन चौराहे के पास स्थित देव कॉम्प्लेक्स में दोपहर बाद आग लगने की सूचना मिली। अधिकारी ने बताया कि इमारत में हादसे के समय अस्पताल में 13 नवजात बच्चे और उनके माता-पिता सहित करीब 75 लोग इमारत में थे जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।अहमदाबाद अग्नि और आपात सेवा (एएफईएस)के प्रभागीय अग्निशमन अधिकारी ओम जडेजा ने बताया, ‘‘हमे अपराह्न करीब डेढ़ बजे इमारत की चौथी मंजिल पर अस्पताल के विपरीत दिशा में मौजूद अकाउंट फर्म के सर्वर कक्ष में आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद आग बुझाने की 20 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया।’’उन्होंने बताया कि चौथे तल पर मौजूद अस्पताल से 13 नवजात बच्चों, जिनमें से तीन अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती थे, उनके माता-पिता सहित कम से 75 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।जडेजा ने बताया कि लोगों को सीढ़ी की मदद से बाहर निकाला गया और सभी मरीजों को एंबुलेंस के जरिये नजदीकी अस्पतालों में स्थनांतरित किया गया है।उन्होंने बताया कि इमारत में मौजूद बच्चों के अस्पताल में करीब चार चिकित्सा देखभाल सुविधा है और एक हड्डी रोग इकाई है जो ठीक उस स्थान के सामने है जहां पर आग लगी थी।अधिकारी ने बताया कि बच्चों के अस्पताल में आग नहीं लगी थी लेकिन धुंआ होने की वजह से वहां पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया था।अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान संपन्न् हो गया है और कुछ घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है।

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Pregnant women died in jp hospital,bhopal

27.06.2022

राजधानी भोपाल के जयप्रकाश अस्पताल में रविवार को गर्भवती महिला की मौत हो गई। महिला के गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई थी। परिजन का आरोप है कि डॉक्टरों की अनदेखी और समय से सिजेरियन न कराने के चलते गर्भवती की मौत हुई है। महिला की मौत के बाद करीब एक घंटे तक अस्पताल में हंगामा हुआ। अब अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी बनाई है। यह कमेटी आज अपनी रिपोर्ट देगी।चंचल (27) पत्नी अनिल की पहली डिलेवरी होनी थी। उसे प्रसव पीड़ा के चलते जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतक के पति अनिल ने बताया कि यह हमारा पहला बच्चा था। सब कुछ ठीक चल रहा था। सभी तरह की जांच समय पर करवाई गई थी। शनिवार को पत्नी को दर्द उठा तो उसे लेकर जेपी अस्पताल आ गया। डॉ. श्रद्धा अग्रवाल ने कहा कि सब कुछ ठीक है, दवाइयां दे दी हैं। जब पूरा एक दिन गुजर गया और पत्नी को प्रसव नहीं हुआ तो कई बार डॉक्टरों के पास गया। बताया कि उसे दर्द ज्यादा हो रहा है, आप लोगों को यदि ऑपरेशन करना हो तो जल्दी कीजिए, लेकिन डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया। पत्नी की मौत लापरवाही के कारण हुई है।महिला की मौत की सूचना मिलने के बाद उसका पति अनिल बेहोश हो गया। उसकी हालत बिगड़ती देख परिजन ने हंगामा शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक अस्पताल में हंगामा मचा रहा। मौके पर पहुंची पुलिस से मृतक महिला के परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। अब आज जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।
आशंका: जहर फैलने से हुई मौत
चंचल की मौत की खबर जैसे ही अस्पताल प्रबंधन को मिली तत्काल सभी अधिकारी आ गए। प्रथम दृष्टया यह कयास लगाए जा रहे हैं कि चंचल के पेट में ही बच्चे की मौत हो गई थी, जिसका जहर फैलने से बाद में चंचल की भी मौत हो गई। यदि शनिवार को ही आपरेशन किया जाता तो गर्भवती की जान बचाई जा सकती थी।

वहीं डॉ. राकेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन जेपी अस्पताल ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है। 24 घंटे में इस कमेटी को जांच करके रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार कार्रवाई करेंगे।

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Reduce the no. of cancer patients in sms hospital

27.06.2022

भले ही देश में कैंसर तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन आंकड़ाें की मानें तो राजस्थान में कैंसर पिछले सालों की तुलना में आधा रह गया है। वर्ष 2015 में 290 बच्चों में कैंसर था वहीं 2021 में संख्या 137 रह गई। इसके पीछे कोविड बड़ा कारण रहा है, क्योंकि इस दौरान रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुए। इधर, आंकड़ोें के उलट सिर्फ एसएमएस में एक साल में 4400 से अधिक बच्चे कैंसर का इलाज ले चुके हैं।यह कारण है:सरकार: 2015 में 290 बच्चों व 2021 में 137 बच्चों में कैंसर सच : एक साल में ही सिर्फ एसएमएस में 4400 का इलाजआंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते।
कोरोनाकाल में रजिस्ट्रेशन कम होने से राजस्थान में कैंसर के मरीजों की संख्या आधी हुई
कितने केस
वर्ष फिमेल बच्चियां मेल बच्चे कुल
2015 97 193 290
2016 101 176 277
2017 105 200 305
2018 67 177 244
2019 107 194 301
2020 59 131 190
2021 42 95 137

वर्ष 2020 और 2021 में कुल 327 बच्चों के इलाज का दावा किया जा रहा है, लेकिन एसएमएस के आंकड़े बताते हैं कि 2021 में ही चार हजार से अधिक बच्चे इलाज ले चुके।

केस 1 सवाईमाधोपुर निवासी आठ साल का रिदम। 8 महीने पहले तबीयत खराब हुई जांच में ब्लड कैंसर निकला। पिता विजय सेन ने दो महीने पहले एसएमएस में भर्ती कराया और इलाज जारी है। उनका कहना है कि करीब ड़ेढ महीने से अस्पताल में ही हैं। एक बहन है जो हर दिन इसका इंतजार करती है। इलाज पर तो खर्च नहीं हो रहा लेकिन पेट भरने, रहने के लिए पैसे तो चाहिए।

केस 2 सवाईमाधोपुर निवासी आठ साल का रिदम। 8 महीने पहले तबीयत खराब हुई जांच में ब्लड कैंसर निकला। पिता विजय सेन ने दो महीने पहले एसएमएस में भर्ती कराया और इलाज जारी है। उनका कहना है कि करीब ड़ेढ महीने से अस्पताल में ही हैं। एक बहन है जो हर दिन इसका इंतजार करती है। इलाज पर तो खर्च नहीं हो रहा लेकिन पेट भरने, रहने के लिए पैसे तो चाहिए। आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते

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National typodont workshop in patna

25.06.2022
इंडियन ऑर्थोडॉन्टिक सोसाइटी के द्वारा आज तीन दिवसीय राष्ट्रीय टाइपोडॉन्ट कार्यशाला का पटना में शुभारम्भ किया गया। बुद्धा इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल साइंस का ऑर्थोडॉन्टिक्स विभाग पटना में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस मौक़े पर कई बड़े डॉक्टरों ने शिरकत की। इस मौक़े पर डॉ.उज्जल चटर्जी ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में नई तकनीक सीखना वास्तव में महत्वपूर्ण है। एलाइनर ऑर्थोडॉन्टिक्स का स्पष्ट भविष्य है। वहीं आईओएस के अध्यक्ष डॉ. कृष्ण चलसानी ने आयोजकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि छात्र किसी भी समाज की रीढ़ होते हैं और यह बहुत अच्छा है कि आईओएस उनके लिए सीखने की कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन कर रहा है।आईओएस सचिव श्रीदेवी पद्मनाभन ने बताया कि बुद्ध की भूमि पर उनकी यह पहली यात्रा है। इस तरह के संगठनों का होना वास्तव में उत्साहजनक है। हालांकि इतने कम समय में सब कुछ सीखना मुश्किल है। इस आयोजन से छात्रों को बहुत कुछ मिलेगा, जिसका उपयोग वह अपने भविष्य के संवारने में कर सकते हैं। आईओएस के उपाध्यक्ष डॉ. सरबजीत सिंह ने कहा कि हम वास्तव में इस संगठन की सराहना करते हैं। आशा करते हैं कि यह छात्रों के लिए एक अच्छा अनुभव होगा। कार्यशाला में देश भर के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शन में आमंत्रित वक्ताओं और आईओएस के सदस्यों को वायर बेंडिंग तकनीकों के लिए प्रशिक्षित किया गया । इसके साथ ही दंत चिकित्सा और ऑर्थोडोंटिक्स के उपकरणों को भी अच्छी तरह से व्यवस्थित किया गया था।

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Suicide in jalore district hospital

25.06.2022
जिला अस्पताल में सेवारत जीएनएम निर्मला बिश्नोई (28) ने शुक्रवार को पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घर में मौजूद पति ने पुलिस को सूचना दी। पीहर पक्ष की ओर से उसके पति सास-ससुर और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम करवाकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। कोतवाली एसएचओ राजेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि नर्स सिरोही में अकेली रहती थी और उसका पति दो दिन पहले ही सिरोही पहुंचा था। पति के साथ गुरुवार को मृतका का विवाद भी हुआ था जिसके बाद शुक्रवार को उसने यह कदम उठा लिया। निर्मला जालोर के चितलवाना निवासी पाबू राम की बेटी थी जिसकी शादी जालोर के ओमप्रकाश विश्नोई से हुई थी।

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Viral infection after rain in bhopal

25.06.2022
बारिश की शुरुआत और मौसम के उतार-चढ़ाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। आलम यह है कि इन दिनों रोज शहर के निजी और सरकारी अस्पतालों में 400 से ज्यादा मरीज वायरल इंफेक्शन के पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर गले और पेट में दर्द के साथ ही दस्त से पीड़ित होते हैं।यही कारण है कि अस्पतालों की ओपीडी में भी 10 से 15% तक इजाफा हो गया है। अगर बात जेपी और हमीदिया अस्पताल की करें तो इन्हीं दो अस्पतालों में रोज 100 से 120 के बीच वायरस इंफेक्शन के मरीज पहुंचते हैं।

अस्पतालों में मरीजों की ज्यादा तादाद

डाॅक्टरों की मानें तो जून और जुलाई में वायरल इंफेक्शन होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मरीजों की तादाद हर बार से ज्यादा है। इसकी भी वजह साफ है, पिछले एक हफ्ते में ही मौसम का मिजाज बार-बार बदलता रहा है। कभी तापमान नीचे गिर जाता है तो ठंडक हो जाती है तो कभी बढ़ने से गर्मी हो जाती है। यही वजह है कि मौसम में जल्दी-जल्दी हो रहे बदलाव के कारण भी यह स्थिति बन रही है।
सामान्य एंटीबायोटिक से 4 से 5 दिन में ही हो रहे ठीक
जेपी अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि अभी वायरल इंफेक्शन के जो मरीज सामने आ रहे हैं, उनके मामलों में एक बात अच्छी है कि उन्हें सामान्य एंटीबायोटिक जैसी दवाइयों से पूरी तरह आराम मिल रहा है। मरीजों को ठीक होने में 4 से 5 दिन का वक्त ही लग रहा है।
डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव, मेडिसिन विशेषज्ञ, जेपी अस्पताल ने कहायह सही है कि वर्तमान में वायरल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। मरीज गला और पेट दर्द की शिकायत लेकर आ रहे हैं। राहत यह है कि कोई गंभीर नहीं हो रहे हैं।

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Robot assisted surgery in raipur

24.06.2022
रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल द्वारा सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल की गई है। हॉस्पिटल रोबोट असिस्टेड सर्जरी का शुभारंभ करने जा रहा है। चिकित्सा विज्ञान में अब तक इसे सबसे अत्याधुनिक सर्जरी माना गया है। ये तकनीक केवल छत्तीसगढ़ ही नही बल्कि सारे मध्यभारत में पहली ऐसी तकनीक होगी जहां एक्स्पर्ट किसी रोबोट के माध्यम से सर्जरी करेंगे इसकी ख़ासियत यह होगी कि प्रिसीज़न के साथ-साथ इसमें मरीज़ को कम से कम चीरा लगेगा, घाव बहुत कम होगा, रक्त स्त्राव भी ना के बराबर रहेगा, फलस्वरूप रिकवरी बहुत जल्द होगी।देश के जाने-माने लेपेरोस्कोपिक सर्जन, डॉ. संदीप दवे ने मध्यभारत की अनेक प्रथम उपलब्धियों एवं नव-प्रवर्तनों के अनन्तर अब एक नये अध्याय, रोबोटिक सर्जरी का प्रारंभ करने के साथ प्रदेश में एक नई क्रांति लाने का प्रयास किया है। इसके श्रेय के पीछे उनका विगत 30 वर्षों का गहन अनुभव एवं शल्यक्रिया की परिष्कृत दक्षता को जाता है। रोबोटिक सर्जरी, मिनीमली इन्वेसिव सर्जरी जिसमें बिना किसी चीर-फाड़ के दूरबीन के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है का ही एक उन्नत एवं परिष्कृत प्रकार है जिसमें ऑपरेशन किये जाने वाले भाग का एक त्रियामी तथा अवर्धित प्रतिबिम्ब कैमरे के माध्यम से मॉनीटर पर दिखाई देता है। रोबोटिक सर्जरी का प्रमुख लाभ यह है कि सर्जन जब अपने हाथों से आेपन सर्जरी अथवा लेपेरोस्कोपिक सर्जरी करता है तो सर्जरी के औजार शरीर के कुछ विशेष स्थानों एवं गहराई तक पहुंचाने में अनेक कठिनाईयां तथा जटिलतायें उत्पन्न होने की आशंका रहती है जबकि रोबोटिक सर्जरी सर्जन बिना किसी थकान के अधिक परिशुद्धता के साथ सर्जरी की संपूर्ण प्रक्रिया संपन्न कर लेते है। दो वर्ष पूर्व के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में 2500, यूरोप में 500, जापान में 200, दक्षिण कोरिया में 100 और भारत में मात्र 50 रोबोटिक सर्जरी की मशीनें कार्यरत थी। सर्जिकल रोबोट एक सेल्फ पॉवर्ड, स्वतः संचालित तथा कम्प्यूटर द्वारा नियंत्रित एक मशीन होती है। इसकी चार भुजाएं होती है जिसमें सर्जरी के औज़ार एवं कैमरा फिट रहते हैं। कम्प्यूटर में सर्जन स्वय अपने द्वारा की जाने वाली विशिष्ट सर्जरी का संपूर्ण प्रोग्रामिंग बनाकर लगा देते हैं तथा रोबोट सर्जन के आदेशों का पालन ठीक उसी प्रकार करता रहता है जैसे एक सेवक मालिक का इसलिए सर्जन और रोबोट के संबंध को मास्टर स्लेव रिलेशनशीप कहा जाता है। स्मरण रहे कि रोबोट स्वंय कोई निर्णय नहीं लेता बल्कि वह सर्जन द्वारा दिये जाने वाले आदेशों का पालन ही करता है।4th जनरेशन रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी सिस्टम, छत्तीसगढ़ के साथ ही मध्यभारत की भी पहली अत्याधुनिक टेक्नालाॅजी होगी। रामकृष्ण केयर हाॅस्पिटल का लक्ष्य, अत्याधुनिक टेक्नालाॅजी के साथ, छत्तीसगढ़ व आस-पास के अंचल की जनता को उचित खर्च पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी के माध्यम से मरीजों को अत्याधुनिक टेक्नालाॅजी के साथ ही स्पेशलिस्ट लेप्रोस्कोपिक सर्जन्स डॉ. संदीप दवे, डॉ. जव्वाद नकवी, डॉ. सिद्धार्थ तामस्कर एवं डॉ. विक्रम शर्मा की टीम के अनुभव द्वारा और भी बेहतर केयर मिलेगी

रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी सिस्टम की शुरूआत पर रामकृष्ण केयर हाॅस्पिटल के मैनेजिंग एवं मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे के साथ निलेश गुप्ता, एवीपी ऑपरेशन भी उपस्थित थे। डॉ. दवे ने कहा कि रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी अपनी अत्याधुनिक टेक्नोलाॅजी व चिकित्सा सुविधाओं के कारण पूरी दुनिया में, लोकप्रिय हो चुकी है, और रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत छत्तीसगढ़ व पूरे मध्यभारत के लिये समाज के सभी वर्गों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है। रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी से मरीजों को होने वाले फायदों में कम समय का हाॅस्पिटलाइजेशन रहता है। इसलिए बाहर से आने वाले मरीजाें को समय और पैसे की बचत होती है। ऑपरेशन के लिए बड़े चीरे नहीं लगाये जाते है, बल्कि छोटे-छोटे छेद किये जाते है जिससे सर्जरी के बाद घाव के कम निशान पड़ते हैं और कम दर्द होता है। लेजर गाइडेंस के कारण ऑपरेशन सटीक और सुरक्षित होता है। संक्रमण का न्यूनतम खतरा होता है। छोटे छेदों के कारण कम रक्तस्त्राव व जल्दी रिकवरी हाेती है। रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी की खासियत यह है कि, यह सर्जन को, ऑपरेशन किये जाते समय, 3डी एच.डी. विजन के द्वारा शरीर के अंदर के ऑर्गन्स की स्पष्ट स्थिति बतलाती है, जिससे सर्जरी में आसानी होती है। रोबोटिक सर्जरी में, कोलोरेक्टल सर्जरी-कोलन व रेक्टम की एसोफेगल कैंसर, एसोफेगेक्टॉमी, गाइनेकोलाॅजिकल कैंसर-सर्वाइकल कैंसर, ओवेरियन कैंसर, यूटेराइन कैंसर तथा पेट की सभी प्रकार की सर्जरी, छोटी एवं बड़ी आंत के कैंसर की सर्जरी, प्रोस्टेट सर्जरी, बैरियाट्रिक/मोटापे की सर्जरी, बच्चेदानी के कैंसर की सर्जरी, थोरेसिक (छाती एवं फेफड़ा) की सर्जरी आदि की सटीक व सुरक्षित सर्जरी की जाती है। यह तकनीक रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के सर्जन्स को सजरी में सफल परिणाम दिलानें में सहायक रहेगी । दक्षता एवं अनुभव का फायदा देने में रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल सबसे आगे है। मध्यभारत व छत्तीसगढ़ की जनता को यह सुविधा अब रायपुर मे ही उपलब्ध हो रही है, अब मरीजो को ऐसी सर्जरी के लिए महानगरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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PMCH, purchase register dissappearance case

24.06.2022
पीएमसीएच के सर्जरी डिपार्टमेंट के स्टोर से वित्तीय वर्ष 20-21 के क्रय रजिस्टर के गायब होने का मामले में पुलिस अब आरोपियाें से पूछताछ की तैयारी में जुट गई है। पुलिस ने कुछ कागजातों को खंगाला है। उसके आधार पर आरोपियाें शल्य भंडार के चिकित्सा पदाधिकारी, तत्कालीन भंडारपाल हेमंत कुमार और फार्मासिस्ट शिवेंद्र प्रसाद को एक-दो दिनों में नोटिस भेजगी। उन्हें पुलिस के समक्ष हाजिर होना होगा। पुलिस आरोपों के बाबत उनका पक्ष जानेगी। पुलिस ने वर्तमान भंडारपाल महेश प्रसाद से पूछताछ की है। महेश से कुछ और कागजात मांगे गए हैं। सभी कागजात का पुलिस मिलान कर रही है।इन आराेपियाें के साथ ही अन्य अनियमतताओं में लिप्त कर्मचारियाें काे अन्यत्र पदस्थापित करने के लिए अधीक्षक ने इसी साल जनवरी में स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा था। लेकिन, पांच महीना बाद भी ये पीएमसीएच में जमे हुए हैं। जिन लोगों को पीएमसीएच से हटाने का आग्रह किया गया था, उनमें रोकड़पाल अजय उप्पल के साथ ही क्रय रजिस्टर गायब हाेने के आराेपी शिवेंद्र कुमार और हेमंत कुमार भी शामिल हैं। अधीक्षक द्वारा विभाग को लिखे गए पत्र के मुताबिक अजय उप्पल के कार्यकाल के दौरान वेंटीलेटर के लिए 35 लाख का भुगतान अधीक्षक के बगैर आदेश के कर दिया गया था। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को भी दी गई थी।

अधीक्षक के बयान पर केस दर्ज
ताजा मामला यह है कि सर्जरी स्टोर के भंडारपाल महेश प्रसाद ने पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. इंदु शेखर ठाकुर को एक पत्र लिखा। उस पत्र में लिखा कि वित्तीय वर्ष 20-21 का क्रय रजिस्टर गायब है। उन्हें पूर्ण प्रभार नहीं सौंपा गया है। उन्होंने चिकित्सा पदाधिकारी, तत्कालीन भंडारपाल और फार्मासिस्ट पर आरोप लगाया है कि इन लोगाें ने जानबूझकर क्रय रजिस्टर गायब कर दिया है। उसी पत्र के आधार पर अधीक्षक के लिखित आवेदन पर पीरबहोर थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

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