keeping records of running with nike run club app for android and ios users

अगर आप लगातार जोश के साथ दौड़ना चाहते हैं तो सबसे आसान तरीका है मोबाइल एप काम में लेना, सबसे अच्छी एप है “Nike Run Club” 🙂

इसमें आप अपने किलोमीटर और समय माप सकते हैं, डेली टारगेट सेट कर सकते हैं, अपने दोस्तों को भी जोड़ सकते हैं एवं आपस में एक दूसरे का रनिंग स्टेटस देख सकते हैं, चैलेंज दे सकते हैं और साथ ही म्यूजिक का मजा भी ले सकते हैं |

Official Nike App page – https://www.nike.com/in/en_gb/c/nike-plus/running-app-gps

App Menu

Set goal

See all activity

Achievements

Place among friends

Accept and create challenges

Click activity and feed it

इस एप से कोच से ट्रेनिंग भी ली जा सकती है जिसमें तरह तरह के प्लान मुफ्त उपलब्ध हैं | दोस्तों को चियर्स और वोइस मैसेज भी भेजे जा सकते हैं, जब वे रन करते हैं |

ध्यान रखने योग्य बातें –

  • रन स्टार्ट करें और अंत में इसे स्टॉप करना ना भूलें, वरना रन आपके खाते में एड नहीं होगी, स्टॉप करने के लिए पॉज करने के बाद स्टॉप के बटन को दबाकर रखें |
  • अगर आपने ऑटो पॉज सेट कर रखा है तो मेनुअली पॉज बिल्कुल ना करें |
  • रन स्टार्ट करने से पहले ही स्योर हो लें की जीपीएस ओन रखना है या ऑफ़, रन के बीच में ओन ऑफ करने से एप हैंग हो सकती है |
  • चैलेंज असेप्ट करने के बाद ही उसमें रन जुड़ेंगी |
  • सेटिंग से Friends Tagging – Allow करने से आपके दोस्त आपको टैग कर पाएंगे |
  • प्रोफाइल पिक्चर अवश्य लगावें |

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सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों को सरकार देगी इनाम

सड़क दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने में दुर्घटना के समय वहां उपस्थित व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, अगर वे समय पर पीड़ित को अस्पताल पहुंचा दें तो उसकी जान बचने के आसार बढ़ जाते हैं, एवं नुकसान भी कम होता है | लेकिन भूतकाल में सहायता करने वालों से ही उलटे सवाल किये जाने लगे, क़ानूनी प्रक्रिया में उलझाया जाने लगा तो लोग आपातकाल में सहायता देने से कतराने लगे |
इसके बचाव हेतु सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार ने दुर्घटना पीड़ितों कि मदद करने वाले नेक आदमियों (Good Samaritan) को प्रोत्साहित करने के लिए उनसे अस्पताल प्रशासन और पुलिस द्वारा अनावश्यक सवाल पूछे जाने से रोकने कि व्यवस्था की है, मदद करने वाले को पुलिस के लफड़ों में नहीं उलझना पड़ेगा, ना ही कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ेंगे |

साथ ही अस्पताल प्रशासन की तरफ से उस नेक बन्दे को “गुड सेमेरिटन प्रोत्साहन पत्र” एक सर्टिफिकेट के रूप में जारी किया जायेगा |

प्रोत्साहन पत्र

इसके साथ ही कई अन्य अच्छी व्यवस्थाएं भी की हैं जिनकी जानकारी संलग्न है –

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गुटखा गोगो की दर्दनाक अमर कहानी

गुटखा गोगो जी कैंसर से चल बसे

श्रृद्धांजलि (RIP) 😞

शहर भर का दुःख समेटकर, असीम पीड़ा के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि क्राइम-मास्टर गोगो के लाडले पुत्र ‘गुटखा गोगो’ का, वर्षों तक दबाकर गुटखे चबाने, बीड़ी फूंकने और शराब सेवन के बाद कैंसर से कल की सर्द रात में देहांत हो गया है |
ये अपने पीछे गुटखा चबाता, सिगरेट फूंकता और बिलखता परिवार छोड़ कर गए हैं 😏

उनके कहे अंतिम शब्द “गुटखा-बीड़ी-सिगरेट का उपयोग ना करें, गुटखा गोगो नहीं बनें” !

बिलखते पिता : काश मैंने समय रहते बेटे की आदतों को सुधारा होता

#GutkhaGoGo #SBCC #नशा_मुक्त_राजस्थान

Full story of fictional character Gutkha GoGo is given below…
Poster series –

Click here to add your own text

अगर आप गुटखा बीड़ी सिगरेट जैसे किसी भी नशे का इस्तेमाल करते हैं और इस से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यह आसान विधि अपनावें –

This is a work of fiction. Names, characters and incidents are products of the author’s imagination and used in a fictitious manner. Any resemblance to actual persons, living or dead, or actual events is purely coincidental. If anyone feel distressed with any content please mail us, we will remove that in next 24 Hours. Images source is Google.

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What are ten threats to global health in 2019 ?

List below –

दुनिया में बहुत से हैल्थ चेलेन्जेज हैं, इन सभी से निपटने के लिए WHO ने अपना तेरहवां पंचवर्षीय General Programme of Work (2019-23) जारी किया है जो कि मुख्य तौर पर तीन बातों पर फोकस करेगा –

  1. एक बिलियन लोगों को युनिवर्सल हेल्थ कवरेज देना
  2. एक बिलियन लोगों को हेल्थ एमरजेंसीज से बचाना
  3. एक बिलियन लोग अच्छी हेल्थ से जी पावें

इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कई प्रकार की हेल्थ थ्रेट्स से निपटना जरुरी है |

2019 में जो सबसे बड़ी हेल्थ थ्रेट्स हैं वो ये हैं जिनसे निपटना ही होगा –

List of ten who threats 2019
Air pollution and climate change
Noncommunicable diseases
Global influenza pandemic
Fragile and vulnerable settings
Antimicrobial resistance
Ebola and other high-threat pathogens
Weak primary health care
Vaccine hesitancy
Dengue
HIV

Source and detailed information – WHO

Iron-Sucrose training material

State iron sucrose workshop/training for Medical Officers orientation.
(Kushal Mangal Karyakaram)

Publisher – SIHFW, Jaipur
Partners – National Health Mission, Dept. of Health & Family Welfare and jhpiego.

  1. Training manual
  2. Training agenda
  3. Knowledge assessment of participants
  4. Anaemia overview
  5. Management of Anaemia
  6. Case studies
  7. Administrative issues
  8. Learners Feedback

जीका वैक्सीन बनाने में क्या हैं दिक्कतें ?

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) ने प्रायोरिटी जताई की जीका के खिलाफ वैक्सीन बनाने की मुहीम चलाई जानी चाहिए, काफी प्रयास वैज्ञानिकों की तरफ से हुए पर कोई बड़ा परिणाम निकल कर नहीं आया |
वैक्सीन निर्माण में शुरूआती दिक्कत यह आई कि जीका वायरस की जो एंटीबाडी बनती हैं वो जीका से बचाने में तो ठीक हैं लेकिन उसी व्यक्ति को डेंगू हो जाने पर हालात भयंकर बिगड़ जाते हैं, इसे एंटीबाडी डिपेंडेंट एन्हेंसमेंट (ADE) कहा जाता है | “साइंटिफिक रिपोर्ट्स” जर्नल में छपी, नेब्रास्का-लिंकन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के अनुसार ऐसी जीका वैक्सीन बनाई तो जा सकती है जो बिना एंटीबाडी बनाये ही, जीका से बचाव करे, इस पर खोज जारी है |
केयु ल्युवेन रेगा इंस्टिट्यूट, बेल्जियम ने एक और सीढ़ी चढ़ते हुए ऐसी वैक्सीन तो बना ली है जो अजन्मे बच्चों को माइक्रोसिफेली होने से बचा सके, इसका सफलतापूर्वक परीक्षण गर्भवती चुहिया में किया जा चूका है | इन वैज्ञानिकों का कहना है की यह वैक्सीन येलो फीवर की तर्ज पर बनाई गयी है जो कि उसी मच्छर से ट्रांसमिट होता है, इन्होने वैक्सीन में येलो फीवर के कोड को जीका के कोड से बदलने की तकनीक पर काम किया |

उक्त दोनों संस्थाओं की रिसर्च शुरूआती संभावनाओं को दर्शाती है, लेकिन अभी जीका की वैक्सीन का बन पाना आसान नहीं |

Source – IE

जीका क्या है ? क्या हैं लक्षण और बचाव ? जानिये सब कुछ –

CDC advisory – अमेरिकी लोग राजस्थान, गुजरात जाने से बचें

अमेरिका की सेंटर्स फॉर डिजीज कण्ट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने गर्भवती महिलाओं के लिए अडवाइजरी जारी की है की वे भारत के राजस्थान और गुजरात प्रान्तों में ना जावें जहाँ हाल ही में जीका वायरस का अटैक हुआ है | हाल ही में अक्टूबर नवम्बर में राजस्थान में 159 जिका के कन्फर्म केस मिले थे | कुछ केस गुजरात बिहार मध्यप्रदेश से भी रिपोर्ट हुए थे |
नया साल इन स्टेट्स में टूरिज्म का पीक सीजन है और यही जीका के लिए सबसे बढ़िया मौसम है, इस आदेश से राजस्थान का चिकित्सा विभाग और पर्यटन विभाग सकते में है |

CDC alert classification –

  1. level 1 – usual precautions
  2. level 2 – enhanced protection
  3. level 3 – non-essential travel

इस अलर्ट को लेवल 2 में रखा गया है |

Advisory source CDC – https://wwwnc.cdc.gov/travel/notices/alert/zika-india

राजस्थान जीका आउटब्रेक और जिका के बारे में जानकारी यहाँ से लें –

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सीडीसी एडवाइजरी पर स्पष्टीकरण दिया है –
(बैठक में चेयर पर्सन श्री रोहित कुमार सिंह और डॉ. समित शर्मा )

Who is emergency patient ?

बहुत बार इस स्थिति का सामना करना पड़ता है कि मरीज इमरजेंसी में माना जाए या नही ? क्योंकि कई सामान्य मरीज भी इमरजेंसी विभाग या ओपीडी के अलावा समय में आ जाते हैं जो कि ऑन ड्यूटी स्टाफ को परेशानी में डालता है ।

तो क्या है इमरजेंसी और कौन है इमरजेंसी मरीज ?

इमरजेंसी – A medical emergency is an injury or illness that is acute and poses an immediate risk to a person’s life or long-term health and it’s extremely important to attend to these patients immediately.

इमरजेंसी मरीज – Whenever a person feels unwell than this is emergency for his perspective and doctors have to attend him.

यानी कोई कभी भी किसी भी स्थिति में आये, वो इमरजेंसी है । (उसके लिए) सो मरीज को देखें, इलाज करें, तनाव मुक्त रहें 🙂

21 साल बाद बदलेगा MBBS का सिलेबस, जानें मुख्य बदलाव

21 साल बाद मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने निर्धारित किया है की MBBS के सिलेबस को बदला जाए और इसमें कुछ महत्वपूर्ण अंगों का समावेश किया जावे, जैसे की डॉक्टर-मरीज सम्बन्ध, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक शिक्षा आदि |
बदले हुए सिलेबस को वर्ष 2019 से लागु किया जाना प्रस्तावित है |

मुख्य बदलाव –

एथिक्स (नैतिकता) – चिकित्सकीय नैतिकता, जानकारी गुप्त रखना, संवेदनशीलता

कम्युनिकेशन (वार्तालाप) – मरीजों और परिजनों से प्रभावी बातचीत, फसाद से बचना

मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) – तनाव, खीज, अवसाद के प्रभावित लोगों से समन्वय और इनकी पहचान, सलाह

पब्लिक हैल्थ (जन स्वास्थ्य) – ग्रामीण स्वास्थ्य, बचाव एवं सामाजिक स्वास्थ्य, संचारी-असंचारी रोग

ऑर्गन डोनेशन (अंगदान) – जानकारी और जनजागरूकता, भ्रामक जानकारियों की रोकथाम, फायदे

उपरोक्त सभी विषय नए हैं और इनका ज्ञान नए चिकित्सकों को होना अति आवश्यक है 🙂

दुनिया में लौट रहा है मीजल्स, और कारण है शर्मिंदा करने वाला

World Health Organization (WHO) और US Centers for Disease Control and Prevention (CDC) की ताजा रिपोर्ट में यह खतरनाक स्थिति सामने आई है, पिछले वर्ष के मुकाबले दुनिया में इस वर्ष में 30% मीजल्स के केसेज में बढ़ोतरी हुई है जो की अत्यंत चिंता का विषय है ।
इन केसों के वृद्धि का जो मोटा कारण सामने आया है वो है मीजल्स टीकाकरण पूर्ण नहीं होना, मीजल्स की रोकथाम हेतु 95% वैक्सीन कवरेज आवश्यक होता है जो की पिछले वर्ष में 85% से भी कम रहा और इसकी बदौलत दुनिया में करीब 67 लाख मीजल्स केस मिले जिनमें से एक लाख दस हजार मरीजों को जान गंवानी पड़ी ।
मीजल्स को टीकाकरण से पूर्ण रूप से रोका जा सकता है लेकिन इस से लाखों मौतें होना टीकाकरण कार्यक्रम की नाकामी (Gaps) को दर्शाता है, जगह जगह मीजल्स आउटब्रेक होना गंभीर विषय है ।
वर्षों की मेहनत और प्रयासों से मीजल्स कंट्रोल में काफी अच्छी स्थिति में पहुँच गए थे, वर्ष 2000 के बाद मीजल्स केसेज और डैथ में 80% की गिरावट आ गयी थी, कुछ देशों ने तो इसे पूर्ण रूप से एलिमिनेट भी कर दिया था लेकिन ऐसी स्थिति में यह रिपोर्ट टीकाकरण पर गंभीर सवाल खड़े करती है, अगर मजबूती से सुधार नहीं किये गए तो इस स्थिति से निपट पाना आसान नहीं होगा ।