doctor got notice even after proper duty

मंगलवार को आदर्श नगर, केकड़ी निवासी भंवरलाल जैन की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन ने शाम 5 बजकर 11 मिनट पर मृत्यु घोषित करते हुए पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए पुलिस और संबंधित चिकित्सक को 5.15 बजे सूचना भिजवा दी। सूचना पर तुरंत सदर थाना पुलिस के हैड कान्स्टेबल सम्पतराज मीणा एवं मेडिकल जूरिस्ट डॉ. रोहित मीणा अस्पताल पहुंच गए। पुलिस के क्षेत्राधिकार का मामला उलझा होने के कारण डॉ. रोहित मीणा को पंचनामा नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पुलिस से पंचनामा मिलने के बाद ही शुरु की जा सकती है। आख़िरकार जब तक पंचनामा प्राप्त हुआ तब तक सूर्यास्त हो चुका था। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करना नियम विरुद्ध है। हालाँकि केन्द्र सरकार ने सुसज्जित अस्पतालों में रात्रिकालीन पोस्टमॉर्टेम की अनुमति दी है लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया है। जब चिकित्सक ने नियमानुसार पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया तो परिजन भड़क गए और डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया। परिजनों उनका कहना था कि सूर्यास्त में काफी समय शेष था, इसके बावजूद चिकित्सक ने जान बूझकर देरी की। सूचना पर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. गणपतराज पुरी भी अस्पताल पहुंच गए तथा चिकित्सक से अँधेरे में पोस्टमार्टम करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सूर्यास्त का हवाला देते हुए पोस्टमार्टम से इंकार कर दिया। इस दौरान चिकित्सकों व परिजन के मध्य नोकझोक भी हुई। इस संबंध में मृतक भंवरलाल जैन के पुत्र अभिषेक जैन ने उपखण्ड अधिकारी विकास पंचोली को ज्ञापन सौंप कर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की । इधर क्षेत्राधिकार के मामले में पुलिस का कहना रहा कि कोहड़ा के समीप हादसे की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस अस्पताल पहुंच गई तथा आवश्यक कार्रवाई शुरु कर दी थी लेकिन बाद में पता चला कि हादसा केकड़ी शहर थाना पुलिस के इलाके में हुआ है। इसके बाद शहर थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची तब तक सूर्यास्त हो गया।परिजनों ने हंगामा किया और पीएमओ को शिकायत दी जिस पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए अस्पताल प्रशासन ने संबंधित चिकित्सक को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए है। वहीं संबंधित चिकित्सक ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

जिम्मेदारों का कहना है :

सड़क हादसे में मृत भंवरलाल जैन के पुत्र अभिषेक जैन ने ज्ञापन दिया है। इस संबंध में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। विकास पंचोली, उपखण्ड अधिकारी, केकड़ी 

आमजन से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता रखनी पड़ती है। सूचना मिलने पर मैं खुद अस्पताल गया था तथा परिजन से बात भी की थी। पुलिस कार्रवाई के कारण देरी हुई तथा सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम नहीं हो सकता है, ये दोनों बात सही है। लेकिन चिकित्सक का बातचीत करने का तरीका सही नहीं था। नोटिस देकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए है। डॉ. गणपतराज पुरी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, राजकीय जिला चिकित्सालय, केकड़ी 

सड़क हादसे में मृत्यु की सूचना मिलते ही तुरंत अस्पताल पहुंच गया था। उस समय सूर्यास्त नहीं हुआ था। लेकिन पुलिस के क्षेत्राधिकार का मामला अटका होने के कारण काफी देर तक उन्हें पंचनामा नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पुलिस से पंचनामा मिलने के बाद ही शुरु की जा सकती है। आख़िरकार जब तक पंचनामा प्राप्त हुआ तब तक सूर्यास्त हो चुका था। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करना नियम विरुद्ध है। वैसे भी सरकार ने उनकी नियुक्ति पोस्टमार्टम के लिए ही की है, ऐसे में पोस्टमार्टम के लिए मना करने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। दबाव में आकर नियम विरुद्ध कार्य करना सही नहीं है तथा भविष्य में भी वे किसी के दबाव में आकर नियमों के विपरित कार्य नहीं करेंगे। डॉ. रोहित मीणा, मेडिको लीगल ऑफिसर, राजकीय जिला चिकित्सालय, केकड़ी

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Car Accident: Death of 7 medical students including son of BJP MLA

महाराष्ट्र में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात वर्धा-यवतमाल मार्ग पर एक वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक मेडिकल कॉलेज के सात छात्रों की मौत हो गई। मृतक वर्धा जिले के सवांगी इलाके के एक मेडिकल कॉलेज के छात्र थे।

मृतकों की पहचान गोंदिया जिले के तिरोरा निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा विधायक विजय रहांगदाले के बेटे अविष्कार और देश के विभिन्न हिस्सों के  अन्य छात्रों के रूप में हुई है। छह की पहचान नीरज चौहान (प्रथम वर्ष एमबीबीएस), नितेश सिंह (2015 इंटर्न एमबीबीएस), विवेक नंदन (2018, एमबीबीएस फाइनल), प्रत्यूष सिंह (2017 एमबीबीएस), शुभम जायसवाल (2017 एमबीबीएस), और पवन शक्ति (2020 एमबीबीएस) के रूप में की गई।

मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंसी के लिए जरुरी है एक वर्ष की सेवा

जयपुर (राज.) अक्टूबर 2019

जनवरी 2019 से पूर्व में मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंसी करने हेतु मिनिमम एक साल की सेवा की बाध्यता थी लेकिन जनवरी में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विशेषज्ञ चिकित्सकों को राहत दी थी कि कभी भी सीनियर रेजीडेंसी हेतु एनओसी के लिए आवेदन कर सकते हैं, इसके बाद अत्यधिक संख्या में चिकित्सक एनओसी के लिए आवेदन करने लगे, चूँकि चिकित्सा शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की मिनिमम अहर्ता एक साल की सीनियर रेजीडेंसी है |

चिकित्सा शिक्षा विभाग में सेवा देना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुकाबले आसान है और इसे ज्यादा प्रोफेशनल माना जाता रहा है, इसी कारण चिकित्सकों का रुझान एक साल की सीनियर रेजीडेंसी की तरफ बढ़ने लगा और वे एनओसी के लिए भाग दौड़ करने लगे, बताया जाता है कि जल्दी और पुख्ता एनओसी दिलवाने के रैकेट भी विभाग में पनप गए थे, चिकित्सा विभाग चाहता है कि सेवारत चिकित्सक विभाग से यूँही पलायन न करें, कुछ सेवा तो दें, इसीलिये एक साल तक की सेवा करने के नियम को वापस लाया गया है, इससे सेवारत चिकित्सकों को एक साल सेवा देनी होगी जिससे ग्रामीण जनता को अधिक विशेषज्ञ सेवाएँ मिलेंगी 🙂

आदेश संलग्न है –

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

डेफर और शेष चिकित्सकों को डी.ए.सी.पी. का अंतिम मौका

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने डी.ए.सी.पी. में डेफर रहे चिकित्सकों को सम्बंधित दस्तावेज जमा करवाने के लिए एक और मौका दिया है (आदेश संलग्न) । सभी चिकित्सक सम्भव हो तो 04-10-2019 तक दस्तावेज भिजवा दें । डेफर वालों के अलावा जिनकी डी.ए.सी.पी. अप्रेल 2019 में होनी थी और बकाया चल रही है वे भी दस्तावेज जमा करावें ।

दस्तावेज –

  1. प्रार्थना पत्र – निदेशक (फोर्मेट संलग्न)
  2. अचल संपत्ति विवरण (ऑनलाइन पोर्टल राजकाज से)
  3. संतान सम्बंधित सूचना (50 रुपये के स्टाम्प पर नोटेरी)
  4. नियमित सेवा का प्रमाण पत्र (डीडीओ/उच्च अधिकारी से प्रमाणीकरण) – फोर्मेट संलग्न

भेजने का माध्यम (कोई एक) –

  1. अतिरिक्त निदेशक (राजपत्रित), कमरा नं – 16, स्वास्थ्य भवन
  2. रजिस्टर्ड डाक से Director (Public Health) Directorate of Medical & Health Services, Swasthya Bhawan, Tilak Marg, Jaipur –Rajasthan 302005
  3. ई-मेल से rajdpcgaz@gmail.com सबसे आसान तरीका, स्कैन करें और मेल करें ।

🙂

जानें, डी.ए.सी.पी. के बाद कितनी हो जायेगी चिकित्सा अधिकारी की सेलरी ?

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

आंध्रप्रदेश : डॉक्टर और परिवार की सुसाइड का चौंकाने वाला राज खुला

04.09.2019

पिछले सप्ताह ईस्ट गोदावरी जिले में ओर्थपेडीक सर्जन डॉ. रामाकृष्णम राजू, उनकी पत्नी और बेटे की सामूहिक आत्महत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है । डॉ. राजू एक फ्रॉड गैंग के लपेटे में आ गए थे जो क्लेम करती थी कि उनके पास जादुई चावल हैं जो कि पैसा डबल कर देते हैं, इसके लिए डॉ. राजू ने जानकारों से साढ़े पांच करोड़ रुपये मोटे ब्याज पर ले लिए, लेकिन जल्द ही उन्हें अपने साथ हुए धोके का पता लगा तो वे सदमा सह नहीं पाए और सपरिवार आइवी अनेस्थेटिक ड्रग लेकर सुसाइड कर ली ।
पुलिस ने गैंग के एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया है ।

News source Times of India !

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

कितनी सेलरी बढ़ेगी DACP में प्रमोशन के बाद ? चौंक जायेंगे आप जानकर !

राज्य सरकार चिकित्सकों को Dynamic Assured Career Progression (DACP) के तहत समयबद्ध पदोन्नति देती हैं, छठे पे कमीशन में यह पदोन्नति 5400, 6600,7600 etc. pay grade के रूप में दी जाती थी लेकिन सातवें पे कमीशन में यह pay band levels के रूप में दी जाती है |
एक Government Doctor की DACP के बाद उसकी बेसिक पे कितनी हो जायेगी ? यह एक सामान्य सवाल है !
आप भी जानिये कि प्रमोशन बाद कितनी होगी बेसिक और कुछ वृद्धि क्या होगी ? हालाँकि छठे पे कमिशन के मुकाबले सातवें में प्रमोशन में ठेंगा ही मिलता है, जानकर चौंक जायेंगे आप |

DACP Promotion illustration ;

Suppose Basic Pay on 1 April 2018 is – 69000 /-

One bonus promotional increment – 69000 to 71100 /-
Pay Band level shifting from L-14 (5400) to L-16 (6600)

Basic pay shifting : Just NEXT to promotional Basic pay – Next to 71100 is 71400 /-
Basic after DACP – 71400 /-

Gains

Raised basic = 71400-69000 = 2400/-
Dearness Allowance (Approx. @10%) = 240/-
NPA (If availing @ 20%) = 480/-
HRA (If availing @ 8%) = 192 /-
Gross gain = 2400+240+480+192 = 3312 /-
Net gain (Deduct income tax @ 30%, NPS @ 10%) = 3312-40% = 1987 /- per month

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Rajasthan : DACP promotion chaos

सरकारी डॉक्टरों पर बाबूराज पड़ रहा भारी ।

सबसे ज्यादा अगर सिस्टम फेलियर है तो वो है, राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में । चिकित्सकों को नियमानुसार समयबद्ध पदोन्नति मिलती है लेकिन उस नियत समय पर वो पदोन्नति दी ही नहीं जाती है । सरकार और विभाग चाहता है कि चिकित्सक अपना काम 24×7 निष्ठा से करें, साथ ही सभी विभागीय लक्ष्यों को भी पूर्ण करें, लेकिन बात जब खुद विभाग की जिम्मेदारी की आती है तो वो फिसड्डी साबित होता है, किसी का प्रोबेशन समय पूरा नहीं होता, किसी का फिक्सेशन नहीं होता, किसी को एनओसी नहीं मिलती तो किसी को कुछ और समयबद्ध नहीं मिलता । हर चीज को डिले करके चिकित्सक को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है ताकि वो अंततः मजबूर होकर, बाबूराज के आगे घुटने टेक दे और फिर चढ़ावा चढ़ावे । चिकित्सक का यह हाल कर दिया जाता है कि वो खुद आहत होकर मजबूरन बाबुओं के आगे नतमस्तक हो जाता है । इन बाबुओं को बड़े अधिकारियों की शह और प्राप्त है, कुछ सयाने तो यह कहते हैं कि अधिकारी भी इस बाबूराज के आगे आहत हैं, कमजोर हैं ।

सरकार ने चिकित्सकों को हर वर्ष की एक अप्रैल को समयबद्ध पदोन्नति देने का नियम बनाया था, जिसकी पालना में करीब 1500 चिकित्सकों की पदोन्नति 1 अप्रैल 2018 को होनी थी लेकिन बाबूराज के कारण नहीं हुई, 1 अप्रैल 2019 को कुछ लोग और जुड़ गए लेकिन पदोन्नति नहीं दी गयी, यानी करीब 1700 चिकित्सकों की पदोन्नति बकाया हो गयी ।

पूर्व में DPC की पदोन्नति के लिए चिकित्सकों को प्रत्येक वर्ष का वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (APR/ACR) एवं अचल संपत्ति विवरण (IPR) जमा करवाना होता था, लेकिन वर्तमान DACP बिना ACR/IPR के ही समयबद्ध तरीके से की जाती है, साथ ही, इस ACR और IPR का निदेशालय में कोई धणी-धोरी नहीं है, चिकित्सक अपना अपना रेकॉर्ड समय से भेज भी दें तो यह रास्ते मे पता नहीं कहाँ कहाँ अटक जाता है, और इस अनुभाग में पहुंच भी जाये तो दांयी से बांयी टेबल पर नहीं आता, वहां भी कमियां निकाल कर पटक दिया जाता है, भोग की आस में । चिकित्सक तो ये सोचकर आराम से बैठे होते हैं कि उनका रेकॉर्ड तो पहुंच गया है, और 1 अप्रैल को उनकी पदोन्नति हो जाएगी, उन्हें क्या पता कि किस बिल और भोलाराम के जीव में अटक रखा है उनका रिकॉर्ड ।

मई माह में डीओपी द्वारा पदोन्नति किये जाने वाले चिकित्सकों का रिकॉर्ड मांगे जाने पर निदेशालय के बाबूराज द्वारा आधा अधूरा रिकॉर्ड पकड़ा दिया जाता है, कायदे से रिकॉर्ड देने से पहले आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं कि किसका कौनसा रेकॉर्ड बकाया है ताकि वो अपना अटका रिकॉर्ड निकलवा सके और कुछ बकाया हो तो जमा करवा सके । लेकिन बिना सूचित किये ही अधकचरे को आगे भिजवाया गया और 15 जून को जारी हुई लिस्ट में 1700 में से करीब 600 की ही पदोन्नति की गई, इसमें भी सीनियरिटी का ध्यान नहीं रखा गया है, साथ ही क्लीनिकल ब्रांच वालों को भी एसएमओ बना दिया गया है और फार्माकोलॉजी एवं कम्युनिटी मेडिसिन के एक डॉक्टर को एसएमओ तो उसी ब्रांच के दूसरे को जेएस बना दिया गया है, चार ACR वाले का नाम है लेकिन सैंकड़ों ऐसों का नाम नहीं है जिनकी पूरी 6 जमा थी, यानी भयंकर गफलत हुई है जिससे राज्य के हजार चिकित्सक तनाव में हैं ।

देखना दिलचस्प होगा कि अब बाकी छोड़े गए चिकित्सकों की लिस्ट 1 अप्रैल 2020 के बाद आएगी या पहले ?

पहले तभी आ सकती है जब इस बाबूराज का विरोध हो वो भी सक्षम स्तर पर । हालांकि सेवारत चिकित्सक संघ का मुख्य मुद्दा DACP रहा है लेकिन 2011 की DACP के बारे में उनकी पिछले 2 सालों से जो चुप्पी है वो भी कई सवाल खड़े करती है । करीब एक महीने से गलियारों में चर्चा थी कि केवल 600 की ही DACP हो रही है लेकिन किसी चिकित्सक के भी जूं नहीं रेंगी, जो कि चिंतनीय है । अब डेफर हो चुके चिकित्सकों के लिए इस बाबूराज से पार पाना आसान नहीं होगा । बाबुओं ने फर्जी विसंगतियों से भरी लिस्ट ही सचिवालय भेज दी और वहां से लिस्ट जारी भी हो गई, इससे सचिवालय के अधिकारियों की भी हो रही है किरकिरी, अब देखना यह है कि निदेशालय के अधिकारी तो इनका कुछ बिगाड़ नहीं पाए तो सचिवालय के अधिकारी भी कमतर साबित होते हैं या बाबूराज को रोक पाते हैं ?

Medical and Non medical teachers conflict – Explained MCI

मेडिकल कॉलेजों में नोन क्लिनिकल विषयों में कितने प्रतिशत टीचर्स हो सकते हैं नॉन मेडिकल फील्ड से ?

Anatomy, Physiology, Pharmacology & Microbiology : Non-medical teachers may be appointed to the extent of 30% of the total numbers of the posts in the department.

In the Biochemistry department : Non-medical teachers may be appointed to the extent of 50% of the total numbers of the posts in the department.

* Such candidates after appointment as Assistant Professor may be promoted to higher teaching post, subject to the condition that they possess the Ph.D. degree in the subject.

MCI order attached below –

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

राजस्थान : गैर सेवारत पीजी स्टूडेंट्स लगा रहे सरकार और आमजन को चूना

पी.जी कोर्स मे अनिवार्य सरकारी सेवा के बांड की हो रही अवहेलना
राजस्थान सरकार गैर सरकारी चिकित्सकों को मुफ्त में पीजी करवाती है, ऊपर से तनख्वाह(stipend) और देती हैं, बदले में केवल इतना चाहती हैं कि ये चिकित्सक कोर्स पूरा करने के बाद पांच साल तक प्रदेश में ही आवश्यक रूप से सेवा दें, इसकी गारंटी के रूप में वो एडमिशन देते समय प्रत्येक चिकित्सक से 25 लाख का बांड भरवाती है, या तो पांच साल सेवा दो या फिर 25 लाख जमा करवाओ, तभी ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स वापस मिलेंगे । लेकिन हो क्या रहा है कि ना तो ये चिकित्सक सेवा दे रहे हैं और ना ही 25 लाख जमा करवाए हैं, बस आराम से गायब हो गए हैं । उदाहरण के तौर पर देखें तो चार साल पहले राज्य सरकार ने मेडिकल की पीजी सीटों में एडमिशन के वक्त सरकारी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अनिवार्य सरकारी सेवा के पच्चीस लाख के अनुबंध पत्र (बांड) भरवाए  (सम्बंधित कागजात संलग्न हैं)।
पिछले साल पूरे राज्य से सरकारी मेडिकल कॉलेज से सैंकड़ों डॉक्टर पीजी करके चले गए लेकिन सरकार एक पीजी डिग्री धारी डॉक्टर से बांड भरवाने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों को तीन साल की अनिवार्य सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं दे पाई। सर्विस बॉन्ड के साथ पीजी डॉक्टर्स का एक बैच पास आऊट हो चूका है, तथा प्रिंसिपल एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बाॅन्ड तथा शपथ पत्र की पालना करवाये बगैर औरीजिनल डिग्री प्रमाण पत्र दे दिये, इस मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ।
बॉन्ड की पालना कराने में चिकित्सा शिक्षा विभाग कोई खास रूचि नहीं दिखा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज मे सस्ती दरों पर चिकित्सा शिक्षा लेने वाले डॉक्टर्स ना तो आमजन की सरकारी अस्पतालों में सेवा कर रहे हैं और ना ही बॉन्ड की राशि जमा करवा रहे हैं। जिससे सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है। सरकार को उक्त बांड की राशि प्रिंसिपल अथवा चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से वसूलनी चाहिए या आमजन को सेवाएं दिलानी चाहिए।
चूंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास पीजी पास आऊट की लिस्ट रहती है। अगर चिकित्सा शिक्षा विभाग समय रहते, स्वास्थ्य भवन को सूची उपलब्ध करवा देता है। तो स्वास्थ्य भवन पद्स्थापन कर सकता है। परंतु गत वर्ष स्वास्थ्य भवन को फ्रैशर्स के पद्स्थापन बाबत कोई सूची नहीं पहुंचाई गयी थी। जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बाॅन्ड की सख्त पालना हो रही है। लेकिन दूसरे प्रदेशों से चिकित्सक राजस्थान में पीजी करके राजस्थान की आम जनता को सेवाएं दिए बगैर लौट जाते हैं, और ना ही सरकारी खाते में 25 लाख रुपये जमा करवाते हैं, यानी सरकार को लग रही है डबल चपत।
इनमें से कुछ चिकित्सक सेवा देना भी चाहते हैं तो सरकार उन्हें ले नहीं रही, राजस्थान के सरकारी कॉलेजों से पीजी करने वाले चिकित्सकों ने मांग की है कि उक्त अनुबंध की पालना होनी चाहिए उससे जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और आमजन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं सरकारी अस्पतालों के माध्यम से मिलेगी। जून के प्रथम सप्ताह में करीब 250 ऐसे चिकित्सक अपना कोर्स पूर्ण कर रहे हैं, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन्हें सेवा का मौका देती है या फिर ये 25 लाख का चूना लगाकर मजबूरन होंगें फरार।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

सैकड़ों चिकित्सक बेरोजगार, नहीं निकलेगी कोई भर्ती

राजस्थान में एक जमाना था जब हजार चिकित्सकों कि भर्ती परीक्षा होती तो पांच सौ चिकित्सक परीक्षा देने आते थे, फिर पदस्थापन के बाद करीब चार सौ लोग उस जगह पर जाने का मन बनाते थे, जगह पर जाने के बाद वहां के हालातों से जूझने के बाद करीब सौ लोग भाग खड़े होते थे और तीन सौ चिकित्सक ही सेवा देते थे, उस समय पैसा भी कम मिलता था, समय के साथ सेलरी बढ़ी जो कि आज के दिन नियुक्ति के प्रथम माह में 56100/- है, प्रोबेशन भी एक साल का है उसके बाद स्थाई हो जाने पर सेलरी काफी बढ़ जाती है, साथ ही सेवारत चिकित्सकों को सेवाकाल के अनुसार उच्च शिक्षा (पीजी) में नीट परीक्षा के प्राप्तांकों पर 10-20-30% बोनस अंकों की व्यवस्था भी है, यानी नौकरी अच्छी है |

पिछले कुछ सालों में इसी कारण भर्तियों में भीड़ बढ़ गयी और चयन मुश्किल होने लगा, पदस्थापन में भी दिक्कतें आने लगी, आज के दिन राजस्थान में हालात ये हैं कि चिकित्सा अधिकारीयों के स्वीकृत पद 6200 हैं और प्रदेश में कार्यरत चिकित्सा अधिकारीयों की संख्या 7500 है, ये अतिरिक्त चिकित्सक UTB (Urgent Temporary Basis) वाले हैं, देखें तो हालात ये हैं कि आगामी कई वर्षों तक राजस्थान सरकार को चिकित्सा अधिकारीयों की कोई भी भर्ती नहीं निकालनी है |

बहुत से नए चिकित्सक MBBS करने के उपरांत इंतजार कर रहे हैं कि कब सरकारी सेवा की राह खुले और वे सेवा में आवें लेकिन राह कठिन है |

विकल्प –

  1. स्वीकृत चिकित्सा अधिकारीयों के पद 6200 से बढाकर 10000 किये जावें एवं भर्ती निकाली जावे |
  2. करीब 1500 चिकित्सा अधिकारीयों की पदोन्नति वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के पद पर होनी करीब एक साल से बकाया है, अगर इनकी पदोन्नति हो जाए तो ये MO के 1500 पद खाली हो जायेंगे और भर्ती की राह खुलेगी, लेकिन सरकार पदोन्नति करने में असफल रही है, कारण पता नहीं |
  3. UTB पर कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी ज्वाइन की जा सकती है लेकिन वो रिक्त पदों पर ज्वाइन करवाते हैं, जिनकी संख्या भी काफी कम है |

देखना दिलचस्प रहेगा कि कम चिकित्सकों का रोना रोने वाली सरकार हजारों बेरोजगार चिकित्सकों को कैसे रोजगार देती है और प्रदेश कि ग्रामीण जनता को चिकित्सा व्यवस्थाएं मुहैया करवाती है |

⇓ Share this post on Whatsapp & Facebook  ⇓