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Eight central pay commission

Government denies a claim made regarding the Eighth Central Pay Commission

केंद्र सरकार ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर किए गए एक दावे से इनकार किया है जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय कर्मियों व पेंशनरों के वेतन, भत्तों व पेंशन के संशोधन के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन नहीं होगा. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव अभी तक सामने नहीं आया है. चौधरी ने एक सवाल का जवाब में ये बातें कही हैं. सवाल पूछा गया था कि क्या यह सच है कि सरकार केंद्रीय कर्मियों व पेंशनरों के वेतन, भत्तों व पेंशन को रिवाइज करने के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन नहीं करेगी?

इसलिए खड़ा हुआ था सवाल
चौधरी ने राज्यसभा को जानकारी दी कि सातवें वेतन आयोग के चेयरमैन ने सिफारिश की थी कि दस साल के लंबे समय का इंतजार किए बिना भी एक अवधि में पे मैट्रिक्स का रिव्यू किया जा सकता है. मंत्री ने कहा कि पे मैट्रिक्स को रिव्यू किया जा सकता है और Aykroyd formula के आधार पर इसे रिवाइज किया जा सकता है. इस फॉर्मूले में आम आदमी के इस्तेमाल में आने वाली चीजों के भाव में बदलाव को विचार में लिया जाता है जिसे शिमला की लेबर ब्यूरो समय-समय पर रिव्यू करती है. सातवें वेतन आयोग ने सुझाव दिया था कि मैट्रिक्स को समय-समय पर बिना वेतन आयोग का इंतजार किए संशोधित करने के लिए इस फॉर्मूले को आधार बनाया जाना चाहिए।

डीए/डीआर को लेकर मंत्री ने कही ये बात
सरकार से डीए/डीआर को लेकर भी एक सवाल पूछा गया था कि ऊंची थोक महंगाई दर के चलते क्या महंगाई भत्ता (डीयरनेस अलाउंस) और महंगाई राहत (डीयरनेस रिलीफ) को बढ़ाया जाएगा? इस पर चौधरी ने जवाब दिया कि इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि डीए/डीआर ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रिलयल वर्कर्स (AICPI-IW) डेटा के आधार पर तय होता है. यह डेटा शिमला की लेबर ब्यूरो उपलब्ध कराती है. केंद्रीय कर्मी और पेंशनर्स डीए/डीआर दरों में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं.

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Medical college will reopen

This government medical college will reopen, 100 students will get admission

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने केरल के इडुक्की जिले के सरकारी मेडिकल कॉलेज को दोबारा खोलने और 100 छात्रों को दाखिला देने की अनुमति दे दी है। दक्षिणी राज्य लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। राज्य सरकार कई वर्षों से इसकी मांग कर रही थी। सरकार ने कहा कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं जल्द से जल्द पूरी की जाएंगी और इस साल तक ही कक्षाएं शुरू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।इडुक्की मेडिकल कॉलेज ने पिछली कांग्रेस-यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार के समय अपना संचालन शुरू किया था, लेकिन वर्ष 2016 में तत्कालीन भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की मान्यता खो दी थी, क्योंकि इसमें आवश्यक संख्या में बिस्तर सहित कई पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं।स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि वाम लोकतांत्रित मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने बाद में वहां के सभी छात्रों को अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थानांतरित कर दिया था, ताकि उनकी पढ़ाई जारी रहे।सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकार सामूहिक प्रयास और उचित योजना के माध्यम से कॉलेज की मान्यता फिर से हासिल करने में कामयाब रही। जॉर्ज ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की है, पर्याप्त कर्मचारी नियुक्त किए हैं और नए भवन का निर्माण पूरा करने के बाद आईपी (इन-पेशेंट) सेवाएं शुरू की हैं।मंत्री ने कहा, ”यह एक बड़ी उपलब्धि है कि 100 छात्रों को दाखिला देने की अनुमति मिल गई है। पहले केवल 50 (छात्रों के दाखिले) की अनुमति थी।”उन्होंने बताया कि सरकार की योजना आने वाले दिनों में मेडिकल कॉलेज में और उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

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Incentive of ayushman yojna

Ruckus in Indore hospitals over incentives given to government hospitals under Ayushman Yojana

28.07.2022
आयुष्मान योजना के तहत सरकारी अस्पतालों को केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले इंसेंटिव के बंटवारे को लेकर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में बवाल मच गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग मनमाने ढंग से नियम बदल कर डॉक्टर्स की उपेक्षा कर बाबूिगरी कर रहे फार्मासिस्ट और नोडल अधिकारी को जमकर उपकृत कर रहा है।योजना में एमजीएम मेडिकल कॉलेज को अब तक 26 करोड़ रुपए मिले हैं। इनमें 13 करोड़ यानी 50% राशि संसाधन पर खर्च होगी। शेष 13 करोड़ का इंसेंटिव देंगे। डॉक्टर्स को तीन साल में बमुश्किल लाख-सवा लाख मिले हैं। वह भी किश्तों में दिए गए।इसके विपरीत नोडल अधिकारी डॉ. यामिनी गुप्ता को प्रति सर्जरी हुए भुगतान के अलावा 26 लाख तथा फार्मासिस्ट रामेश्वर चंदेल, कृष्णा नरवरिया, विपिन वालुस्कर व संजय उपाध्याय का 5-7 लाख रुपए का इंसेटिव बना है। इस बंदरबांट से नाराज 12 डॉक्टर्स ने डीन को चिट्‌ठी लिखकर राशि लेने से ही इंकार कर दिया है।

पैसों का बंटवारा ऐसे समझे

आयुष्मान योजना में एंजियोप्लास्टी का 72 हजार का पैकेज तय है। इनमें से 60% यानी 43 हजार 200 केंद्र सरकार सरकारी अस्पताल को देती है। इसका आधा 21 हजार 600 इंसेटिव व इतना ही इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रहेंगे।

डॉक्टर्स बोले, कुछ को बिना काम दिए लाखों

इंसेंटिव की बंदरबांट को लेकर डॉक्टर्स का कहना है कि जो पैसा दे रहे हैं, उसका असमान वितरण हो रहा है। किसी एक व्यक्ति को सैलेरी से ज्यादा इंसेंटिव दिया है। कुछ नॉन टेक्निकल व नॉन-मेडिको लाेगों को बड़ी राशि दे रहे हैं। कुछ लोगों को कई गुना अधिक राशि मिल रही है, जबकि वे कोई अतिरिक्त काम नहीं कर रहे हैं।

सीधी बात- डॉ. संजय दीक्षित, डीन एमजीएम

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Tranfer in health department of rajasthan

Kumbh of transfers in Rajasthan, transfers are being done continuously in Health Department

28.07.2022

राजस्थान में 2 साल के कोविड काल के बाद इस बार हैल्थ डिपार्टमेंट में तबादलों को लेकर बड़ा फेरबदल चल रहा है। चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा ने सबसे पहले डेपुटेशन और सेटिंग से शहरों में जमे डॉक्टरों पर हमला किया था और उनको तुरंत अपनी मूल पोस्टिंग वाले स्थानों पर भेजने के आदेश दिए थे। लेकिन अब भी सैकड़ों डॉक्टर-कर्मचारी डेपुटेशन और अपनी पसंदीदा जगह जमे हैं। दूसरी तरफ पिछले 15 दिन में 2400 डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ इधर-उधर किए गए।लिहाजा वर्किंग डे के अनुसार 11 दिन में औसतन 217 प्रतिदिन ट्रांसफर किए गए। इनमें 610 डॉक्टर और 1780 नर्सिंग और पैरा मेडिकल स्टाफ हैं। अब भी तबादलों का कुंभ चल रहा है। माना जा रहा है कि सीजन में 10 हजार से ज्यादा स्टाफ इधर-उधर होगा।27 लिस्ट डॉक्टरों व विशेषज्ञों की
15 दिन में 610 डॉक्टरों की 27 बार ट्रांसफर लिस्ट निकाली गई। यानी रोज करीब 3 लिस्ट जारी की गई। इनमें मेडिकल ऑफिसर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर, वरिष्ठ और कनिष्ठ विशेषज्ञ, अस्थि रोग से लेकर डेंटिस्ट आदि चिकित्सक शामिल हैं।चौमूं से सीधे जैसलमेर-बाड़मेर : तबादला सूचियों में सबसे चर्चित तबादले चौमूं के 7 डॉक्टरों के रहे। डाॅ. बीएल यादव, डाॅ. रवि कुमावत, डॉ. जयंत जैन, डाॅ. ज्योति यादव, डाॅ. सुरेश जांगिड़, डाॅ. मुखराम देवंदा और डाॅ. ज्योति शर्मा के तबादले सीएचसी चौमूं से जैसलमेर और बाड़मेर जिले की विभिन्न सीएचसी और पीएचसी में कर दिए गए हैं

मांगी सरप्लस की सूची
हैल्थ डायरेक्टरेट ने 33 जिलों के लिए आदेश जारी किया है कि सभी सीएमएचओ और उनके अधीन अफसर 29 जुलाई तक अपने-अपने जिले में जितने भी अराजपत्रित कर्मचारी सरप्लस हैं, उनकी पूरी डिटेल मुख्यालय को भेजें। माना जा रहा है कि मंत्री ने सभी अस्पतालों को डॉक्टर स्टाफ मुहैया कराने का आदेश निकलवाया है।

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Compulsion of government service reduced in medical colleges in raj.

After PG and superspeciality courses from medical colleges in Rajasthan, the compulsion of government service reduced

27.06.2022
प्रदेश के मेडिकल काॅलेजों से पीजी व सुपरस्पेशिलिटी काेर्स के बाद पांच साल की सरकारी सेवा की बाध्यता घटाकर दाे साल कर दी गई है। अगले दाे माह में नीट पीजी की काउंसलिंग हाेनी है, ऐसे में स्टूडेंट्स काे मेडिकल काॅलेज के चयन में इसका लाभ मिलेगा।
इससे प्रदेश के कई स्टूडेंट्स दूसरे प्रदेशाें से पीजी कर रहे थे।
दूसरे प्रदेशाें के कम स्टूडेंट्स ही राजस्थान के कॉलेज चुनते थे। अब अनिवार्य राजकीय सेवा की अवधि 2 साल होने से राजस्थान में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी क्याेंकि प्रदेश के स्टूडेंट्स यहां रुकेंगे। हालांकि करार सिर्फ 2 साल का हाेने पर सरकारी अस्पतालाें में डाॅक्टराें की कमी हाे सकती है। राजस्थान में पीजी की करीब 1300 सीटें हैं। नए नियम के बाद नीट-पीजी में होड़ बढ़ेगी लेकिन डाॅक्टर मिलने की उम्मीद कम ही है।

सवाल: क्या डॉक्टर सेवा जारी रखेंगे?
एमबीबीएस में 4 साल के बाद 3 साल पीजी करने में लगते हैं। सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में 3-5 साल और लगते हैं। ऐसे में कई मेडिकाॅज सरकारी सेवा पूरी करने की बजाय निजी क्षेत्र में जा रहे थे। अब वे दाे साल बाद इसे जारी रखेंगे, इसमें संशय है।सरकारी सेवा अवधि 2 साल करने का आदेश।

प्रतिस्पर्धा: सितंबर में काउंसलिंग, स्टूडेंट्स ज्यादा होंगे
असम में 10 साल की राजकीय सेवा अनिवार्य है। राजस्थान व आंध्र में 5 साल व बिहार, झारखंड, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल में 3 साल है। पहले इन राज्यों के स्टूडेंट्स राजस्थान कम आ रहे थे। उलटे राजस्थान से पीजी के लिए बाहर जा रहे थे। अब राजस्थानी छात्र यहीं रुकेंगे, दूसरे प्रदेशाें से स्टूडेंट राजस्थान आएंगे। ऐसे में इस बार सितंबर में हाेने वाली नीट पीजी की काउंसलिंग में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी।

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Bombay high court gr provision

Bombay HC stays GR provisions of 2012 banning private practice by government doctors

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 जुलाई को सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर द्वारा दायर एक याचिका को स्वीकार कर लिया, और एक विज्ञापन-अंतरिम आदेश में अगस्त 2012 के महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी, जिसमें सरकारी सेवा में डॉक्टरों को निजी तौर पर सक्रिय करने और अनिवार्य रूप से गैर को स्वीकार करने से रोक दिया गया था। -इसके बजाय अभ्यास भत्ता (एनपीए) और किसी भी उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुणे जिले के भोर तालुका में एक उप-जिला अस्पताल में एक चिकित्सा अधिकारी डॉ एएस राठौड़ ने पिछले महीने 2012 जीआर को चुनौती देने के लिए याचिका दायर की, जो डॉक्टरों को एक सार्वजनिक अस्पताल से अपने गैर-ड्यूटी घंटों में निजी प्रैक्टिस करने से रोकता है।
याचिकाकर्ता के वकील विनोद सांगविकर ने सरकारी सेवा में डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस के बदले एनपीए लेने या वास्तव में निजी क्लीनिक या अस्पतालों में प्रैक्टिस करने के विकल्प की कमी को चुनौती दी। एचसी से डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस के बदले एनपीए स्वीकार करने या सरकारी सेवा में निजी प्रैक्टिस करने का विकल्प देने का आदेश मांगा। सरकारी वकील एनसी वालिम्बे ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। याचिका में कहा गया है कि जीआर को संशोधित करने की आवश्यकता है अन्यथा यह याचिकाकर्ता के साथ “पेटेंट अन्याय” का कारण बनता है। इसने कहा कि 1972 से 2012 अगस्त तक जब जीआर “निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध” लाने के लिए जारी किया गया था, तब महाराष्ट्र में डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस की अनुमति थी।

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Advantage of rghs scheme

Government employees will be able to take advantage of Rajasthan Government Health Scheme (RGHS)

20.07.2022
अब राज्य के सरकारी कर्मचारी व अधिकारियों को आरजीएचएस में प्राइवेट फार्मा पर मिलने वाली दवा उसी स्थिति में मिल सकेगी, जबकि सरकारी अस्पताल के मुख्यमंत्री निशुल्क दवा केंद्र की एनओसी होगी। सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब राज्य के कर्मचारी संगठन लामबंद होने लगे हैं।राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि के तहत राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना की परियोजना निदेशक शिप्रा विक्रम की ओर से सभी ऑथराइज्ड फार्मा स्टोर्स को इस तरह का आदेश निकाला गया है।इसमें कहा गया है कि जो भी कर्मचारी यदि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाता है तो उसी अस्पताल की मुख्यमंत्री निशुल्क दवा केंद्र से ही वह पहले दवा लेगा। यदि वहां नहीं मिलती है और उसकी अनुपलब्धता की एनओसी दी जाती है तो उसी एनओसी के होने पर ही आरजीएचएस के तहत फार्मा स्टोर दवा दे सकेंगे। जबकि अधिकृत प्राइवेट अस्पतालों के लिए या सरकारी डॉक्टर को घर पर दिखाने के संबंध में ऐसा कोई आदेश नहीं निकाला गया है।

फैसले के विरोध में कर्मचारी संगठन,प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) सहित अन्य संगठनों ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि यह कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के साथ धोखा है। सरकार बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए कर्मचारियों के वेतन से आरपीएमएफ के नाम पर मोटी रकम की वसूली कर रही है, इसके बाद भी यदि कर्मचारियों को आम जनता की तरह चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, तो कर्मचारियों के वेतन से की जा रही आरपीएमएफ कटौती का क्या औचित्य है? राठौड़ ने कहा कि यदि सरकार ने आदेश वापस नहीं लिया तो प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।

घर पर देखने वाले डॉक्टर्स और निजी अस्पतालों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार के फैसले के बाद अब सरकारी अस्पतालों में दवा की दुकानों पर लगने वाली कतार से बचने के लिए कर्मचारी वहां न जाकर या तो सरकारी डॉक्टर को फीस देकर घर पर दिखाएगा या सरकार की ओर से अधिकृत प्राइवेट अस्पताल में जाएगा। राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेश पारीक का कहना है कि ऐसा करके सरकार अप्रत्यक्ष रूप से प्राइवेट हॉस्पिटल्स को फायदा पहुंचाना चाहती है। यही नहीं, इस व्यवस्था से सरकारी डॉक्टर की निजी प्रेक्टिस को भी बढ़ावा मिलेगा।

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Incresed the stipend of doctors

Rajasthan government increased the salary of resident doctors of Rajasthan and increased the stipend of intern doctors

राजस्थान सरकार ने राजस्थान में कार्य रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन में वृद्धि की और साथ ही साथ इंटर्न के लिए मौजूदा दर को संशोधित करने के लिए मंजूरी दी है। MBBS/BDS स्टूडेंट्स के लिए इंटर्न का वजीफा 7000 प्रतिमाह से बढ़ाकर 14000 प्रतिमा किया जाएगा। राजस्थान सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की दरें डीए में भी बढ़ोतरी की जाएगी

New doc 31-May-2021 1.13 pm

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Government started prepration to deal with monkeypox diseases

After getting the first case of monkeypox in Kerala, the government started preparations to deal with this infectious disease, testing will be done in 15 labs of the country

16.07.2022
केरल में मंकीपॉक्स का पहला केस मिलने के बाद सरकार ने इस संक्रामक बीमारी से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। बीमारी का पता लगाने के लिए पुणे के आइसीएमआर-एनआइवी (राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान) देशभर में 15 लैब को परीक्षण का प्रशिक्षण दे चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को मंकीपॉक्स के प्रबंधन के लिए गाइडलाइन जारी की। इसके मुताबिक विदेश यात्राओं के दौरान लोगों को बीमार लोगों के निकट संपर्क से बचना चाहिए। मृत या जीवित जंगली जानवरों के संपर्क में आने से भी बचने की सलाह दी गई है। गाइडलाइन में संदिग्धों की टेस्टिंग और स्क्रीनिंग पर विशेष जोर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने केरल के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सहयोग के लिए उच्च स्तरीय टीम केरल भेजी है।इसमें राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) डॉ. आरएमएल अस्पताल, नई दिल्ली के विशेषज्ञ और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। मंकीपॉक्स वायरल जूनोटिक बीमारी है। इसमें बुखार के साथ शरीर पर रेशेज आते हैं। इसके लक्षण चेचक के समान होते हैं।

यह है गाइडलाइन
विदेश से आए लोग बीमार लोगों के साथ निकट संपर्क में न आएं। खासकर त्वचा और जननांग में घाव वाले लोगों से दूर रहें।

बंदर, चूहे, छछुंदर, वानर प्रजाति के अन्य जीवों से दूर रहें।

मृत या जीवित जंगली जानवरों और अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचें।

जंगली जीवों का मांस न खाएं। अफ्रीका के जंगली जानवरों से बने क्रीम-पाउडर का इस्तेमाल न करें।

बीमार लोगों की सामग्री (कपड़े, बिस्तर आदि) के संपर्क में न आएं।

देश में आगमन के हर पॉइंट पर संदिग्धों की जांच की जाए।
अस्पतालों में मेडिकल तय प्रोटोकॉल के तहत इलाज और क्लिनिकल मैनेजमेंट हो।सभी संदिग्ध मामलों की टेस्टिंग और स्क्रीनिंग एंट्री पॉइंट्स और कम्युनिटी में की जाएगी।

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Construction of medical college in banswara very slow

Declared three years ago in Banswara, the pace of construction work of Government Medical College is very slow, all limits of delay have been crossed

15.07.2022
तीन साल पहले घोषित सरकारी मेडिकल कॉॅलेज के भवन निर्माण कार्य की गति मंथर होने से वागड़ की धरा बांसवाड़ा में वर्ष 2023 में मेडिकल पढ़ाई का सपना धुंधलाता जा रहा है। नौ माह पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों कॉलेज भवन का शिलान्सास होने के बावजूद स्थानीय सरकार एजेंसी निर्माण कार्य के प्रति गंभीरता नहीं दिखा पा रही है। लेट लतीफी के हाल से निर्माण कार्य की गति पटरी से ही उतरती नजर आ रही है।प्रदेश में दस नए मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषणा करीब तीन साल पहले केन्द्र सरकार ने की थी, इनमें बांसवाड़ा को भी शामिल किया गया। जिले में कॉलेज खुलने की घोषणा से युवाओं की घर में ही रह कर मेडिकल की पढ़ाई करने की उम्मीद बलवती हुई। लेकिन घोषणा के करीब तीन साल होने के बावजूद कॉलेज भवन दस फीसदी भी बन कर खड़ा नहीं हो सका।तय समय पर कॉलेज का शैक्षणिक सत्र शुरू होने की उम्मीद उस वक्त और धुंधला गई, जब राज्य सरकार ने दस जिले में इसी साल मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई शुरू करने के लिए चार जिलों का चयन प्राथमिकता से करते हुए बांसवाड़ा का नाम बिसरा दिया।

डेढ़ साल का लगेगा समय
बांसवाड़ा में निर्माण का जिम्मा केन्द्र सरकार के उपक्रम होस्पिटल सर्विसेज कंस्लटेंसी कारर्पोशन (एचएससीसी संभाले हुए है। यहां कॉलेज भवन में एकेडमिक ब्लॉक और पहले बैच में सौ विद्या र्थियों के लिए हॉस्टल का काम शुरू हुआ है। एजेंसी का मानना है कि 325 करोड़ की लागत के बनने वाले कॉलेज भवन के लिए पहले फेज में 144 करोड़ के काम ही हो सकेंगे। इसमें भी करीब डेढ़ साल का समय लगेगा, ऐसे में अगले साल अकादमिक सत्र शुरू होना अधर में ही है।

यूं रही ढिलाई
केन्द्र सरकार ने प्रदेश में बांसवाड़ा व चित्तौड़गढ़ समेत दस जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले जाने के घोषणा 14 अक्टूबर 2019 को की थी, निर्माण का जिम्मा एचएससीसी को सौंपा, लेकिन एचएससीसी की ढिलाई को देखते हुए राज्य सरकार ने चित्तौड़गढ़, श्रीगंगानगर, धौलपुर व सिरोही मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य आरएसआरडीसी को सौंप दिया। चित्तौड़गढ़ में आरएसआरडीसी ने सक्रियता दिखाई और 9 मई 2021 में काम भी शुरू कर दिया। लेकिन एचएससीसी के जिम्मे बांसवाड़ा होने से यहां काम ही अटक गया।

वही एचएससीसी के अधीन कुछेक कॉलेज के निर्माण कार्य की तो प्रथम चरण की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी।

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