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Dr. YS Sachan death case

Dr. YS Sachan death case: Ban on summoning many officers including former DGP to court

10.08.2022
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पूर्व उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) डॉ वाईएस सचान की जेल में संदिग्ध परिस्थिति में मौत के मामले में विशेष अदालत के सात जुलाई, 2022 के आदेश पर रोक लगाते हुए पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कर्मवीर सिंह, तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) विजय कुमार गुप्ता और अन्य को बड़ी राहत दी है।उच्‍च न्‍यायालय ने डॉ. सचान की जेल में मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत द्वारा बतौर अभियुक्त तलब किए गए तत्कालीन डीजीपी कर्मवीर सिंह, तत्कालीन अपर डीजीपी विजय कुमार गुप्ता एवं तत्कालीन जेलर भीमसेन मुकुंद के खिलाफ गत सात जुलाई को जारी तलबी आदेश पर रोक लगा दी है।अदालत ने डॉ. सचान की पत्नी मालती सचान को नोटिस जारी कर उनको इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, सीबीआई के सात जुलाई के आदेश पर अंतरिम रोक केवल याचिकाकर्ताओं के लिए रहेगी।न्यायमूर्ति ए के श्रीवास्तव की पीठ ने उपरोक्त तीनों पूर्व अधिकारियों की ओर से अलग-अलग दाखिल याचिकाओं पर यह आदेश दिया। आदेश सोमवार को जारी किया गया। पीठ ने अपने आदेश में सीबीआई के अधिवक्ता अनुराग कुमार सिंह की दलील को आधार बनाया, जिसमें उन्होंने कहा था सीबीआई ने मामले की बारीकी से जांच की थी और डॉ. सचान की मृत्यु को आत्महत्या पाए जाने के बाद ही क्लोजर रिपोर्ट लगाई गई थी।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मामले में सीबीआई जांच कर चुकी थी और डॉ. सचान की मृत्यु को आत्महत्या पाते हुए क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की गई थी। यह भी दलील दी गई कि सरकारी अधिकारी होने के कारण याचिकाकर्ताओं को तलब किए जाने से पूर्व शासन से संस्तुति प्राप्त करना अनिवार्य था।उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सचान कथित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में मुख्य आरोपी थे। यह घोटाला स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत करने के मद में जारी करोड़ों रुपये का गबन से संबंधित है। डॉ. सचान एनआरएचएम घोटाला मामले में न्यायिक हिरासत में थे और 22 जून 2011 को लखनऊ जेल में संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मौत हो गई थी।यहां की एक अदालत ने पूर्व डीजीपी सिंह, तत्कालीन एडीजी गुप्ता, तत्कालीन लखनऊ जेल के जेलर भीम सेन मुकुंद को एक दशक पहले जेल में डॉ.सचान को मारने की साजिश रचने के आरोप में मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया था।उनकी मौत के सिलसिले में 26 जून, 2011 को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ थाना गोसाईगंज में प्राथमिकी दर्ज हुई थी. इसके बाद डॉ सचान की मौत की न्यायिक जांच शुरू हुई। 11 जुलाई 2011 को न्यायिक जांच रिपोर्ट में डॉ सचान की मौत को हत्या करार दिया गया। 14 जुलाई, 2011 को उच्‍च न्‍यायालय ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।27 सितंबर, 2012 को सीबीआई ने जांच के बाद डॉ सचान की मौत को आत्महत्या करार देते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल किया।डॉ.सचान की पत्नी मालती सचान ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दी. सीबीआई की विशेष अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए सीबीआई को अतिरिक्त कार्रवाई का आदेश दिया. नौ अगस्त, 2017 को सीबीआई ने फिर से अंतिम रिपोर्ट दाखिल किया। 19 नवंबर, 2019 को सीबीआई अदालत ने इसे भी खारिज कर दिया और मालती सचान की अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज किया।मालती सचान ने अदालत में न्यायिक जांच रिपोर्ट के अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल एक्सपर्ट ओपिनियन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों के बयान के साथ ही सीबीआई द्वारा दर्ज बयानों का भी हवाला दिया। सात जुलाई 2022 को सीबीआई अदालत ने डॉ सचान की मृत्यु को हत्या का मामला मानते हुए, तत्कालीन डीजीपी सिंह, तत्कालीन एडीजीपी गुप्ता एवं लखनऊ जोन के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुबेश कुमार सिंह समेत लखनऊ जेल के तत्कालीन जेलर बीएस मुकुंद, डिप्टी जेलर सुनील कुमार सिंह, प्रधान बंदीरक्षक बाबू राम दूबे और बंदीरक्षक फहींद्र सिंह को हाजिर होने का आदेश दिया था।

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Medical tourism grow in india

India is leaving the world behind in medical tourism, made it to the top 10 countries

भारत के कई टूरिज्म प्लेस के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत मेडिकल टूरज्म के मामले में दुनिया के 10 स्थानों में शामिल हो गया है। इलाज के लिहाज से आज भारत को बिल्कुल सही जगह माना जा रहा है।देश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन मंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय चिकित्सा और कल्याण पर्यटन बोर्ड का गठन किया है। इसके अलावा पर्यटन मंत्रालय अपनी जारी गतिविधियों के तहत देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों और प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए ‘अतुल्य भारत’ ब्रांड-लाइन के तहत विदेशों के महत्वपूर्ण व संभावित बाजारों में वैश्विक प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑनलाइन मीडिया कैंपेन चलाता है‌।मेडिकल टूरिज्म को लेकर मंत्रालय के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नियमित रूप से डिजिटल पोस्ट भी किए जाते हैं।

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Doctor committed suicide in indore

Doctor committed suicide in Indore

08.08.2022
इंदौर में बड़वाह (खरगोन) के सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी। वह शनिवार को पत्नी और 13 महीने की बेटी के साथ इंदौर आए थे। रविवार सुबह पत्नी ने उन्हें फंदे पर लटके देखा और अपने पिता को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।पुलिस के मुताबिक अभी कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। यह जानकारी सामने आई है कि खुदकुशी करने वाले डॉक्टर का इंदौर के रिहेब सेंटर में तीन माह तक इलाज चला था। उन्हें सोमवार को दोबारा रिहेब सेंटर ले जाने की तैयारी थी। लेकिन वे जाने को तैयार नहीं थे।

पत्नी ने देखा सबसे पहले

इंदौर के द्वारकापुरी TI सतीश द्विवेदी के मुताबिक घटना ग्रेटर वैशाली की है। यहां डॉक्टर अनिल सोलंकी (35) पुत्र स्व. बाबूसिंह सोलंकी निवासी बड़वानी ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी। पत्नी नंदिनी ने उन्हें सुबह फंदे पर लटके देखा था। डॉ. अनिल की 2019 में शादी हुई थी। उनकी 13 माह की बेटी भी है। साला भी पेशे से डॉक्टर है ओर ससुर रिटायर्ड फूड ऑफिसर है। पत्नी नंदिनी से सुबह पति को फंदे पर लटके देखा। जिसके बाद पिता माधव सिंह को जानकारी दी।

रिहेब सेंटर में चला था उपचार

पुलिस के मुताबिक डॉ. अनिल ने इंदौर के एक रिहेब सेंटर में उपचार कराया था। उनके पिता की काफी समय पहले मौत हो चुकी है। छोटा भाई भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पुलिस पूरे मामले में जांच कर रही है। पहले पुलिस द्वारा इनकी पोस्टिंग बड़वानी बताई जाती रही, लेकिन बाद में परिवार ने पुलिस को स्पष्ट किया कि वे खरगोन जिले के बड़वाह के सरकारी अस्पताल में पदस्थ थे।

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Blood crisis in sms hospital,Jaipur

Blood crisis in Jaipur’s Sawai Mansingh Hospital

ब्लड बैंक खाली होने लगे हैं। निजी ब्लड बैंकों का बहुतायत में खुलना, ब्लड डोनेशन शिविरों में कई ब्लड बैंक को बुला लेना और ब्लड डोनेट नहीं करने सहित कई कारणों के चलते हालात इस स्थिति में पहुंच चुके हैं कि एसएमएस जैसे सरकारी ब्लड बैंक में एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप है ही नहीं। ओ-निगेटिव महज दो यूनिट, एबी-पॉजिटिव 09, ए-निगेटिव 10 और बी-निगेटिव केवल 09 यूनिट ही बचा है। ब्लड बैंक में यह स्टोर बुधवार दोपहर 12 बजे तक था। ये ब्लड ग्रुप इमरजेंसी के लिए बचा कर रखे हैं और कॉमन सर्जरी या जरूरतमंद को मना किया जा रहा था। ब्लड की कमी को लेकर विशेष रिपाेर्ट।डोनेशन-सप्लाई में 12 हजार यूनिट से अधिक का फर्कअकेले एसएमएस में डोनेट और सप्लाई में 12 हजार यूनिट तक का फर्क है। एक जनवरी से 31 जुलाई तक महज 26,394 यूनिट ब्लड डोनेट हुआ, जबकि 38,960 यूनिट सप्लाई किया गया। यह सप्लाई अधिक ऐसे हो सकी कि एक यूनिट ब्लड से तीन-चार कंपोनेंट बनते हैं।

डिमांड बढ़ने से बढ़ी चिंता
छोटे-छाेटे ब्लड बैंक खोलने की वजह से परेशानी हुई है। कोशिश कर रहे हैं कि सभी जगह से ब्लड यहां पहुंचे। निशुल्क ब्लड की भी डिमांड बढ़ने से चिंता बनी हुई है। -डॉ. अमित शर्मा, इंचार्ज, ब्लड बैंक, एसएमएस।

कमी की बड़ी वजह ये

बिना किन्हीं प्लान के जिलेवार निजी छोटे-छोटे ब्लड बैंक खाेल दिए गए। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में ब्लड बंद हो गया।
ब्लड बैंक की ओर से प्रलोभन (हेलमेट व अन्य) दिया जाता है और आर्गेनाइजर को 50 प्रतिशत तक नि:शुल्क ब्लड देने के लिए कहा जाता है। नतीजतन शिविरों का ब्लड निजी बैंक में जाता है और वहां से बेचा जाता है।
मई-जून-जुलाई में स्कूल-कॉलेज की छुट्टियां होती हैं तो तुलनात्मक रूप से कम कैंप लगते हैं और ब्लड की कमी हो जाती है।
कोई भी कैंप लगाता है तो कई ब्लड बैंक को बुला लेता है, नतीजतन एक बैंक के हिस्से में 15-25 यूनिट ही ब्लड आता है।6 घंटे बाद प्लाज्मा और आरबीसी ही मिलते हैं किसी भी ब्लड का छह घंटे में ब्लड बैंक तक पहुंचना जरूरी होता है। ऐसा इसलिए कि समयावधि में पहुंचने से पीआरबीसी, एफएफपी, आरडीपी, एसडीपी, क्रायो, पेरसिपिटेट कंपोनेंट को काम में ले सकते हैं। छह घंटे बाद प्लाज्मा और आरबीसी ही मिलते हैं।इन मरीजों के लिए बड़ी जरूरत, इसलिए मांग बढ़ी थैलीसीमिया के सभी मरीजाें, कैंसर पेशेंट सहित कई बीमारियाें के लिए बिना डोनर के ब्लड दिया जाता है। एसएमएस में रोजाना थैलीसीमिया के 40 बच्चों को, कैंसर और छोटी बच्चियों को 10 से 12, एक्सीडेंट केसेज में 20-25 यूनिट ब्लड दिया जाता है।

एसएमएस में ये बचा है अलग-अलग ब्लड ग्रुप
ए-पॉजिटिव36
बी-पॉजिटिव48
ओ-पॉजिटिव57
एबी-पॉजिटिव09
ओ-निगेटिव02
एबी-निगेटिव00
बी-निगेटिव09
ए-निगेटिव10

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Improving health system in village

Now if you want to become a doctor then you have to do it in the village first.

मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले हर छात्र को अब ग्रामीण क्षेत्र में तीन साल के लिए पांच-पांच परिवार को गोद लेना होगा। इस अवधि में प्रत्येक छात्र परिवार सदस्यों से जान पहचान बढ़ाते हुए उनके घर के डॉक्टर बनेंगे। परिवार के सदस्यों की बीमारी को जानने के साथ ही कारणों का पता लगाते हुए उसकी रिपोर्ट तैयार करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर उस गांव की स्थिति, पर्यावरण, पानी व अन्य कारणों से होने वाली बीमारियों को पता लग पाएगा।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने इस संबंध में गाइडलाइन जारी करते हुए समस्त मेडिकल कॉलेजों को पालना के आदेश दिए। आदेश की पालना में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने अभी बडग़ांव पंचायत समिति क्षेत्र चुनिंदा गांव का दौरा किया। अब ये छात्र ब्लॉक सीएमएचओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व आशा सहयोगिनियों के माध्यम से पांच-पांच परिवार गोद लेंगे।ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की पहुंच बढ़ाने व मेडिकल छात्रों को फील्ड की जानकारी के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना को एनएमसी ने परिवार गोद कार्यक्रम का नाम दिया है। इस प्रोग्राम के तहत छात्रों को कॉलेज में किताबी ज्ञान ,अस्पताल में मरीजों कीे सेवा के साथ ही फील्ड का नॉलेज मिलेगा। वे गोद लिए परिवार के व्यवहार, बीमारियों, रहन-सहन एवं व्यवहार से जुड़े मुद्दों के बारे में जान पाएंगें।

यूं शुरू की योजना
– ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी
– चिकित्सकों का मरीजों के प्रति व्यवहार सुधार
– ग्रामीण क्षेत्र में होने वाली बीमारी से समय पर पता लगाना
– काउंसलिंग कर परिवार को समय पर इलाज करवाना
– ग्रामीण परिवारों से संपर्क बढ़ाना
– गांव व गोद लिए परिवार जरूरतों को समझना
– भविष्य में चिकित्सकों को गांवों में तैनाती के लिए भी तैयार करना।

इस कारण महत्वपूर्ण है योजना
– अधिकांश आबादी गांवों में रहती है उसके बावजूद डॉक्टर शहरी क्षेत्रों में हैं, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगोंं की बीमारियों के कारणों को पता नहीं चल पाता। इस महत्ती योजना से लाभ होगा।
– वर्तमान में कम्युनिटी मेडिसिन पाठ्यक्रम के डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रेनिंग लेनी होती है, लेकिन इस कार्यक्रम में अब परिवार को गोद लेना होगा, जिससे बीमारी व कुरीतियों को पता चल पाएगा।
एनएमसी की यह महत्ती योजना है इससे भावी पीढ़ी के नए चिकित्सकों को फील्ड का नॉलेज होगा। ग्रामीणों का चिकित्सकों के प्रति विश्वास बढ़ेगा और वे खुलकर पीड़ा बता सकेंगे, ताकि उस क्षेत्र की स्थिति व बीमारियों का पता लग सकेगा।

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fear of monkeypox in indore

Panicked woman reached clinic after having monkeypox-like symptoms in Indore

भारत में दस्तक दे चुके मंकीपॉक्स को लेकर लोग डरे हुए हैं। भय का अंदाजा इंदौर के इस केस से लगाया जा सकता है। बुधवार को एक महिला मंकीपॉक्स जैसे लक्षण होने पर निजी क्लिनिक पहुंची। वो डरी-सहमी बोली कि मुझे मंकीपॉक्स जैसे लक्षण हैं। महिला की यह बात सुन हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग तक इसका मैसेज पहुंचाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम महिला के घर पहुंची। सैंपल लेने के बाद उसे आइसोलेट कर दिया गया है। सैंपल नागपुर या जयपुर लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक महिला आइसोलेशन में रहेगी।इधर, CMHO डॉ. बी.एस. सेत्या का कहना है कि इंदौर में मंकीपॉक्स का एक भी कन्फर्म केस नहीं आया है। वे खुद महिला से मिलकर आए हैं। मंकीपॉक्स की बात निराधार है। 55 साल की महिला डायबिटीज की मरीज है। उसे ऐसा रिएक्शन होता रहता है। इसके पहले भी अप्रैल महीने में रिएक्शन हुआ था। उसके परिवार से मिलकर चर्चा भी की है। निजी क्लिनिक में पहुंचने के बाद सभी को लग रहा था कि महिला में मंकीपॉक्स के लक्षण है। महिला भी लक्षण को लेकर डरी हुई है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।

क्या है मंकीपॉक्स?

यह बीमारी मंकीपॉक्स नाम के वायरस की वजह से होती है। मंकीपॉक्स भी स्मॉलपॉक्स (चेचक) परिवार के वायरसों का ही हिस्सा है। हालांकि, इसके लक्षण स्मॉलपॉक्स की तरह गंभीर नहीं, बल्कि हल्के होते हैं। मंकीपॉक्स बहुत कम मामलों में ही घातक होता है। यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि इसका चिकनपॉक्स से लेना-देना नहीं है।

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Impact of doctors transfer

After the transfer of doctors in Chomu, the system collapsed

03.08.2022

चौमूं उपखंड इलाके में करीब 1 सप्ताह पहले एक साथ 18 डॉक्टरों का ट्रांसफर हुआ था। इनमें चौमूं सरकारी अस्पताल के भी डॉक्टर शामिल हैं। नए डॉक्टर नहीं लगाने से अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का आलम है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चौमूं के सरकारी अस्पताल में मंगलवार को दवा वितरण केंद्र, ओपीडी सेंटर सहित डॉक्टर कक्ष के बाहर भी मरीजों की भीड़ देखने को मिली। वहीं, कांग्रेस पदाधिकारी डॉक्टरों के ट्रांसफर रद्द कराने की मांग को लेकर चिकित्सा मंत्री के जयपुर आवास के बाहर धरने पर बैठ गए।अस्पताल में दवाई लेने पहुंचे मरीज सोहन लाल और मनीष यादव ने बताया कि करीब 1 घंटे से भी ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक ना तो डॉक्टर को दिखाने के लिए नंबर आया और ना ही दवाई लेने में और अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने के कारण सब मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं, अस्पताल में करीब 900 से 1000 के बीच ओपीडी चल रहा है। बारिश के कारण मौसमी बीमारियों का भी प्रकोप बढ़ गया है। इस बीच अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम पसरा हुआ है।

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Post of senior resident

Application for appointment to the post of Senior Resident in Chittorgarh

निदेशालय राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी जयपुर के आदेश के अनुसरण में निम्नलिखित विशेषताओं में राजकीय मेडिकल, कॉलेज चित्तौड़गढ़ के लिए सीनियर रेजिडेंट के पद पर अस्थाई/आवश्यक आधार पर नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किए जाते हैं।

OFFICIAL NOTIFICATION

CamScanner 07-30-2022 17.46.12

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Monkeypox in rajasthan

two suspected cases of monkey pox in rajasthan

02.08.2022

राजस्थान में मंकी पॉक्स के दो संदिग्ध केस सामने आए हैं। दोनों को जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। उनके शरीर पर दाने नजर आ रहे हैं। एक अजमेर के किशनगढ़ और दूसरा भरतपुर जिले का रहने वाला है। सोमवार को भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आज आएगी।RUHS के अधीक्षक डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि एक 20 साल का युवक किशनगढ़ से रविवार देर रात रेफर होकर आया था। वह बेंगलुरु में पढ़ाई करता है। उसे बुखार आने व शरीर पर दाने दिखने के बाद संदिग्ध मानते हुए जयपुर रेफर किया गया। सतर्कता बरतते हुए मरीज को आइसोलेट किया है। उसके सैंपल मंकी पॉक्स की जांच के लिए SMS मेडिकल कॉलेज भिजवाए है। मरीज की अभी कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया रिपोर्ट आने के बाद ही कंफर्म होगा कि मंकी पॉक्स का वायरस है या चिकन पॉक्स। ऐसे में हमने सामान्य ट्रीटमेंट शुरू कर दिया है।RUHS से मिली रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य युवक भी सोमवार सुबह भर्ती हुआ है, जो भरतपुर का रहने वाला है। इसके हल्का बुखार होने के साथ ही शरीर पर कुछ ही दाने थे। संदिग्ध मानते हुए भर्ती किया गया है। डॉक्टर की मानें तो दोनों युवकों की तबीयत स्थिर है।

6वीं मंजिल पर बना है वार्ड
जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में प्रशासन ने ओमिक्रॉन वाले मरीजों की तर्ज पर मंकी पॉक्स के संदिग्ध अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया है। यह हॉस्पिटल की छठवीं मंजिल पर है। इस मंजिल पर वार्ड के अलावा कुछ प्राइवेट रूम भी हैं। इन्हीं जगहों पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।

कोरोना की तरह हवा में नहीं फैलता ये संक्रमण
जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमन शर्मा की मानें तो ये संक्रमण कोरोना की तरह हवा में नहीं फैलता। उन लोगों को खास बचने की जरूरत है जो विदेश से यात्रा करके आए हैं। उन्होंने बताया कि वे लोग ज्यादा सतर्क रहे, जो अफ्रीकी देशों से यहां आ रहे हैं। जिन लोगों के बुखार, गर्दन में गांठे, पूरी बॉडी पर चिकन पॉक्स जैसे दाने की समस्या आ रही है तो वह तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।डॉ. शर्मा ने बताया कि इस केस में मरीज के प्राइवेट पार्ट और मल द्वार के आसपास एनोजेनाइटल पेन होता है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मंकी पॉक्स के लक्षण 6 से 13 दिन के अंदर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि कई बार 5 से 21 दिन का समय भी ले सकता है। संक्रमित होने पर अगले 5 दिन के अंदर बुखार, सिरदर्द, थकान और पीठ में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं।

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Murder case in hospital

Vein cut instead of knot in hospital, murder case

कालवाड़ थाना पुलिस ने इलाके के चिरायु अस्पताल के डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया हैं। कोर्ट के आदेश पर डॉक्टर मनोज चौधरी के खिलाफ हत्या का केस किया गया। इस मामले की जांच सीआई कालवाड़ को दी गई है। जगदम्बा नगर झोटवाड़ा निवासी कृष्णकांत जांगिड थाने में रिपोर्ट देते हुए बताया कि उसकी 22 वर्षीय बहन निकिता जांगिड़ के बांए पैर की पिंडली में एक गांठ थी। ईलाज के लिए वह बहन को 26 अप्रैल को चिरायु अस्पताल लेकर गया। वहीं, इस मामले में डॉक्टर मनोज चौधरी का कहना है कि यह एफआईआर गलत तथ्यों के आधार पर दर्ज की गई है। मौत DIC नाम के कैंसर से हुई।पीड़ित ने बताया कि डॉक्टर मनोज चौधरी ने चैक करने के बाद कहा था कि यह सामान्य गांठ है। एक छोटा सा ऑपरेशन करके छुट्टी दे देंगे। उपचार के लिए एसएमएस के डॉक्टर दिनेश जिंदल आएंगे। जिस पर युवती को एडमिट कर लिया गया। 27 अप्रैल को बिना सर्जन डॉक्टर दिनेश जिंदल को बुलाए ही युवती का ऑपरेशन डॉक्टर मनोज चौधरी ने कर दिया। इस दौरान पैर की गलत नस कट गई। ज्यादा की खून बहने पर डॉक्टर मनोज चौधरी ने ऑपरेशन के बाद तीन यूनिट ब्लड मंगवाया। इसके बाद दो यूनिट ब्लड और चार यूनिट प्लाजमा भी मंगवाया। शाम को डॉक्टर मनोज चौधरी ने बताया कि निकिता की हालत सीरियस है। इसलिए वेन्टीलेटर पर ले लिया है।पूछताछ करने पर डॉक्टर मनोज चौधरी ने बताया कि गलती से इसकी ब्लड की नस कट जाने के कारण ब्लीडिंग ज्यादा हो गई। शरीर में ब्लड की कमी हो रही है। इसे बार- बार प्लाजमा और ब्लड दिया जा रहा है, इसलिए इसे वेन्टीवेटर पर लिया गया है। निकिता की तबीयत खराब होने पर उसे परिजन एसएमएस लेकर गए। जहां उपचार के दौरान निकिता की मौत हो गई।

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