राजमेडीकोन कांफ्रेंस के लिए सरकारी डॉक्टरों को मिली छुट्टी

जयपुर के बिड़ला ऑडीटोरियम में 29-30 जून को होने वाली कांफ्रेंस में भाग लेने वाले चिकित्सकों की छुट्टी के लिए आदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जारी कर दिए हैं | इसमें अरिसदा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है | कांफ्रेंस का आयोजन भी सामूहिक रूप से आईएमए राजस्थान एवं अरिसदा द्वारा किया जा रहा है 🙂

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राजस्थान के हृदय रोगियों को मिलेगा मुफ्त इलाज और ओपरेशन

(प्रतिवर्ष एक हजार हृदय रोगियों को मिल सकेगी निःशुल्क उपचार सुविधा)
जयपुर, 28 मई 2019।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डाॅ रघु शर्मा की मौजूदगी में मंगलवार को स्वास्थ्य भवन मेें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एवं राजकोट, गुजरात के प्रशान्ति मेडिकल सर्विसेज एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन (पीएमएसआरएफ) के साथ दो वर्ष का एमओयू किया गया है। इस एमओयू के बाद प्रदेश के हृदय रोगियों को निशुल्क उपचार व रैफरल सेवा मिल पाएगी। एमओयू के तहत प्रतिवर्ष एक हजार हृदय रोगियों को निःशुल्क उपचार सेवायें प्रदान की जायेंगी।
डाॅ शर्मा ने बताया कि एमओयू के तहत इस फाउण्डेशन द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, नाॅन कम्यूनिकेबल डिजीज यूनिट के समन्वय से जिलों में चिन्हित चिकित्सा संस्थानों पर पीडियाट्रिक एवं व्यस्क रोगियों की हैल्थ स्क्रीनिंग के लिये निःशुल्क शिविरों का आयोजन किया जायेगा। चिन्हित संभावित पीडियाट्रिक व कार्डियक रोगियों को ईको टेस्ट सहित जांच सेवायें निःशुल्क प्रदान की जायेगी। उन्होने बताया कि इस फाउण्डेशन द्वारा जन्मजात विकृति एवं हृदयरोग संबंधी बीमारियों से ग्रसित चिन्हित बच्चों एवं व्यस्कों को निःशुल्क उपचार सेवायें अपने चिकित्सा संस्थानों में प्रदान की जायेगी। 

राज्य सरकार की ओर से मरीज को राजकोट, गुजरात आने-जाने पर होने वाले व्यय के लिए 5 हजार रूपये की राशि दी जायेगी। 
मरीज के ठहरने व खाने-पीने एवं उपचार में होने वाले समस्त व्यय प्रशान्ति मेडिकल सर्विसेज एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा वहन किया जायेगा।  हदय रोग से संबंधी सर्जरी पर डेढ़ लाख रूपये तक का खर्चा आता है।
इस एमओयू कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री रोहित कुमार सिंह, शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री हेमन्त गेरा, मिशन निदेशक एनएचएम डाॅ समित शर्मा, प्रबन्ध ट्रस्टी पीएमएसआरएफ श्री मनोज भिमानी, निदेशक जन स्वास्थ्य डाॅ वी के माथुर सहित संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे।

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Substandard Thyronorm-75 and Dynapar Gel recall

The Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) ने बताया कि अबोट की थायरोनॉर्म-75 का एक बैच और ट्रायका की डायनापार जेल के तीन बैच स्तरहीन मिले हैं | वहीँ अबोट का कहना है कि उक्त बैच नंबर उन्होंने बनाया ही नहीं है, यह फर्जी दवाई है जो हमारे नाम से बेचीं जा रही है, अबोट थाइरोक्सिन दवाओं में जाना माना नाम है, उधर ट्रायका का कहना है कि विगत वर्षों में उन्होंने लाखों डायनापार जेल बेची हैं ऐसे में ख़राब गुणवत्ता मिलना मुश्किल है, कभी कोई क्वालिटी इस्सू नहीं आया | CDSCO ने उक्त दोनों कम्पनियों के सम्बंधित बैच बाजार से वापस मंगवाने के आदेश जारी किये हैं |

फुल स्टोरी – इंडियन एक्सप्रेस

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Senior resident ship New Rules

एमसीआई द्वारा मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की नियुक्ति में एक साल की सीनियर रेजीडेंसी की अनिवार्यता किये जाने के बाद से विशेषज्ञों में सीनियर रेजीडेंसी करने की ललक बढ़ी है, जबकि पहले लोग मेडिकल कॉलेज में पड़े रहने या रोजगार अथवा थोड़ा और सीख लेने मात्र के लिए बरसों तक एसआरशिप करते रहते थे । अब बड़ी मांग उठी की एसआरशिप का मौका सभी को मिलना चाहिए, जिस पर शासन उप सचिव, चिकित्सा शिक्षा (ग्रुप 1) से आदेश जारी हुआ और निम्न निर्देश दिए गए –

  1. स्नातकोतर सीटों में वृद्धि एवं सहायक आचार्य हेतु अधिकाधिक योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीनियर रेजीडेंसी की अवधि एक वर्ष की जाती है ।
  2. जिन सीनियर रेजिडेंट्स द्वारा एक वर्ष की सीनियर रेजीडेंसी पूर्ण कर ली गयी है उन्हें चयन प्रक्रिया में नए सिरे से सम्मिलित होने पर अधिकतम तीन वर्ष की अवधि हेतु पुनर्नियुक्त किया जा सकेगा ।
  3. परिपत्र जारी होने की दिनांक से पूर्व से कार्यरत सीनियर रेसिडेंट्स की आगे की समयावधिमें वृद्धि नहीं की जायेगी ।
  4. सीनियर रेजिडेंट्स के समस्त पदों पर चयन हेतु मेडिकल कॉलेज स्तर पर विधिवत विज्ञप्ति जारी कर चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगें ।

इस फैसले पर जार्ड के डॉ. रवि जाखड़ ने ख़ुशी जताई तथा एसआरशिप के इंतजार में बैठे चिकित्सकों को भी आस नजर आने लगी है, हालाँकि एसआरशिप में जमे बैठे कई चिकित्सक हलके से मायूस हैं, उन्हें अब मेडिकल कॉलेज छोड़, मैदान में उतरना पड़ेगा ।

Village Health Sanitation and Nutrition Committee VHSC

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत प्रत्येक राजस्व ग्राम स्तर पर एक ग्राम स्वच्छता एवं स्वास्थ्य समिति का गठन किया गया है, जिसमें सरपंच अध्यक्ष,एएनएम उपाध्यक्ष एवं आशा सदस्य सचिव होती हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत गठित ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति में छह सदस्य होते हैं, जिसका संचालन ग्राम सरपंच एवं एएनएम की ओर से किया जाता है.
गांवों में स्वास्थ्य और स्व्चछता संबंधी जरूरी कार्य कराने के लिए सरकार की ओर से प्रत्येक राजस्व गांव को 10 हजार रुपए की धनराशि दी जाती है, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों को सरकार की ओर से जो धन दिया जाता है उसमें स्वास्थ्य कार्यक्रम, पोषण, शिक्षा एवं पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में ग्राम स्तरीय गतविधियां, स्वच्छता अभियान,आरोग्यकारी गतविधियां, कूड़े कचरे का प्रबन्धन तथा परिवार सर्वेक्षण के कार्य कराए जाते हैं और ग्राम स्वास्थ्य समिति के फण्ड से ग्राम को आर्थिक योगदान भी किया जा सकता है, जिससे कि स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के क्षेत्र में उसका उपयोग किया जा सके। 
इस समिति का बैंक में खाता खुलवाया जाता है जिसका संचालन आशा और ग्राम सरपंच के द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है
इस समिति की मासिक बैठक गुरुवार को आंगनवाड़ी पर आयोजित टीकाकरण सत्र के दौरान आयोजित की जाती है

responsibilities of government employees to stop child marriage