Monkeypox in rajasthan

02.08.2022

राजस्थान में मंकी पॉक्स के दो संदिग्ध केस सामने आए हैं। दोनों को जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। उनके शरीर पर दाने नजर आ रहे हैं। एक अजमेर के किशनगढ़ और दूसरा भरतपुर जिले का रहने वाला है। सोमवार को भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आज आएगी।RUHS के अधीक्षक डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि एक 20 साल का युवक किशनगढ़ से रविवार देर रात रेफर होकर आया था। वह बेंगलुरु में पढ़ाई करता है। उसे बुखार आने व शरीर पर दाने दिखने के बाद संदिग्ध मानते हुए जयपुर रेफर किया गया। सतर्कता बरतते हुए मरीज को आइसोलेट किया है। उसके सैंपल मंकी पॉक्स की जांच के लिए SMS मेडिकल कॉलेज भिजवाए है। मरीज की अभी कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया रिपोर्ट आने के बाद ही कंफर्म होगा कि मंकी पॉक्स का वायरस है या चिकन पॉक्स। ऐसे में हमने सामान्य ट्रीटमेंट शुरू कर दिया है।RUHS से मिली रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य युवक भी सोमवार सुबह भर्ती हुआ है, जो भरतपुर का रहने वाला है। इसके हल्का बुखार होने के साथ ही शरीर पर कुछ ही दाने थे। संदिग्ध मानते हुए भर्ती किया गया है। डॉक्टर की मानें तो दोनों युवकों की तबीयत स्थिर है।

6वीं मंजिल पर बना है वार्ड
जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में प्रशासन ने ओमिक्रॉन वाले मरीजों की तर्ज पर मंकी पॉक्स के संदिग्ध अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया है। यह हॉस्पिटल की छठवीं मंजिल पर है। इस मंजिल पर वार्ड के अलावा कुछ प्राइवेट रूम भी हैं। इन्हीं जगहों पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।

कोरोना की तरह हवा में नहीं फैलता ये संक्रमण
जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमन शर्मा की मानें तो ये संक्रमण कोरोना की तरह हवा में नहीं फैलता। उन लोगों को खास बचने की जरूरत है जो विदेश से यात्रा करके आए हैं। उन्होंने बताया कि वे लोग ज्यादा सतर्क रहे, जो अफ्रीकी देशों से यहां आ रहे हैं। जिन लोगों के बुखार, गर्दन में गांठे, पूरी बॉडी पर चिकन पॉक्स जैसे दाने की समस्या आ रही है तो वह तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।डॉ. शर्मा ने बताया कि इस केस में मरीज के प्राइवेट पार्ट और मल द्वार के आसपास एनोजेनाइटल पेन होता है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मंकी पॉक्स के लक्षण 6 से 13 दिन के अंदर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि कई बार 5 से 21 दिन का समय भी ले सकता है। संक्रमित होने पर अगले 5 दिन के अंदर बुखार, सिरदर्द, थकान और पीठ में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

MCD,hospitals buildings damage in delhi

12.07.2022
दिल्ली नगर निगम के अस्पतालों का बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार पिछले कुछ महीनों से सुर्खियां बना हुआ है। इस बीच दिल्ली की एकीकृत नगर निगम के द्वारा अपने अंतर्गत आने वाले सभी अस्पतालों की जो इमारतों है उनकी जांच के मद्देनजर एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई। यह पूरी कमेटी अगले एक महीने में जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।बता दें कि बीते दिनों निगम के सबसे बड़े मेटरनिटी अस्पताल कस्तूरबा में ऊपरी मंजिल के पिछले हिस्से का छज्जा गिर जाने की वजह से बड़ा विवाद हुआ था।इस घटना से पहले भी इस तरह के हादसे निगम के अस्पतालों में होते रहे हैं, चाहे निगम के अंतर्गत आने वाला राजन बाबू टीबी अस्पताल हो या फिर हिंदू राव अस्पताल या फिर मेटरनिटी अस्पताल कस्तूरबा अस्पताल तीनों ही अस्पतालों में लगातार एक के बाद एक खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के बदहाल हालत को लेकर खबर सामने आ रही हैं। हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते कुछ महीनों में लगभग तीन बार कस्तूरबा अस्पताल में छज्जे नीचे गिरने की खबर अखबारों की सुर्खियां बन चुकी हैं।जिसे देखते हुए निगम के विशेष अधिकारी और कमिश्नर के द्वारा विशेष कमेटी का गठन कर एमसीडी के सभी अस्पतालों की इमारतों की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

ACR/PAR Initiation and Hierarchy management

हर साल हर सरकारी कर्मचारी को ACR APAR भरनी होती है, जिसके लिए आवश्यक है कि पहले इसे initiate किया जावे|
पूरी जानकारी दिए गए लिंक के विडियो से जानें और आसानी से पांच मिनट में कार्य पूर्ण करें|

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

राजस्थान के विभिन्न संवर्ग के चिकित्सकों की वरिष्ठता सूची (Seniority List 2020)

Rajasthan in service doctors seniority list of RUHS & RPSC selected doctors.

MO SMO Deputy Director PCMO JS SS PS list as on 1 April 2020.

Visit now

राजस्थान के विभिन्न संवर्ग के चिकित्सकों की वरिष्ठता सूची (Seniority List 2019)

Rajasthan in service doctors seniority list of RUHS & RPSC selected doctors.

MO SMO Deputy Director PCMO JS SS PS list as on 1 April 2019.

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर राजस्थान सरकार खोलेगी “जनता क्लिनिक”

राजस्थान सरकार ने नए कार्यकाल का पहला बजट पेश किया। इस बजट में कई खास चीजे थी जिनमें से एक था जनता के लिए खोला जाने वाला जनता क्लीनिक। दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रदेश में जनता क्लीनिक खोलने का फैसला किया है। शहरों में ये जनता क्लिनिक खोले जायेंगे, इसके लिए भवन दान-दाताओं से लिए जायेंगे | इनमें MNDY, MNJY जैसी सभी योजनाओं का लाभ दिया जायेगा |

इसके लिए नोडल ऑफिसर डॉ. राजा चावला को बनाया गया है |

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Rajasthan : DACP promotion chaos

सरकारी डॉक्टरों पर बाबूराज पड़ रहा भारी ।

सबसे ज्यादा अगर सिस्टम फेलियर है तो वो है, राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में । चिकित्सकों को नियमानुसार समयबद्ध पदोन्नति मिलती है लेकिन उस नियत समय पर वो पदोन्नति दी ही नहीं जाती है । सरकार और विभाग चाहता है कि चिकित्सक अपना काम 24×7 निष्ठा से करें, साथ ही सभी विभागीय लक्ष्यों को भी पूर्ण करें, लेकिन बात जब खुद विभाग की जिम्मेदारी की आती है तो वो फिसड्डी साबित होता है, किसी का प्रोबेशन समय पूरा नहीं होता, किसी का फिक्सेशन नहीं होता, किसी को एनओसी नहीं मिलती तो किसी को कुछ और समयबद्ध नहीं मिलता । हर चीज को डिले करके चिकित्सक को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है ताकि वो अंततः मजबूर होकर, बाबूराज के आगे घुटने टेक दे और फिर चढ़ावा चढ़ावे । चिकित्सक का यह हाल कर दिया जाता है कि वो खुद आहत होकर मजबूरन बाबुओं के आगे नतमस्तक हो जाता है । इन बाबुओं को बड़े अधिकारियों की शह और प्राप्त है, कुछ सयाने तो यह कहते हैं कि अधिकारी भी इस बाबूराज के आगे आहत हैं, कमजोर हैं ।

सरकार ने चिकित्सकों को हर वर्ष की एक अप्रैल को समयबद्ध पदोन्नति देने का नियम बनाया था, जिसकी पालना में करीब 1500 चिकित्सकों की पदोन्नति 1 अप्रैल 2018 को होनी थी लेकिन बाबूराज के कारण नहीं हुई, 1 अप्रैल 2019 को कुछ लोग और जुड़ गए लेकिन पदोन्नति नहीं दी गयी, यानी करीब 1700 चिकित्सकों की पदोन्नति बकाया हो गयी ।

पूर्व में DPC की पदोन्नति के लिए चिकित्सकों को प्रत्येक वर्ष का वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (APR/ACR) एवं अचल संपत्ति विवरण (IPR) जमा करवाना होता था, लेकिन वर्तमान DACP बिना ACR/IPR के ही समयबद्ध तरीके से की जाती है, साथ ही, इस ACR और IPR का निदेशालय में कोई धणी-धोरी नहीं है, चिकित्सक अपना अपना रेकॉर्ड समय से भेज भी दें तो यह रास्ते मे पता नहीं कहाँ कहाँ अटक जाता है, और इस अनुभाग में पहुंच भी जाये तो दांयी से बांयी टेबल पर नहीं आता, वहां भी कमियां निकाल कर पटक दिया जाता है, भोग की आस में । चिकित्सक तो ये सोचकर आराम से बैठे होते हैं कि उनका रेकॉर्ड तो पहुंच गया है, और 1 अप्रैल को उनकी पदोन्नति हो जाएगी, उन्हें क्या पता कि किस बिल और भोलाराम के जीव में अटक रखा है उनका रिकॉर्ड ।

मई माह में डीओपी द्वारा पदोन्नति किये जाने वाले चिकित्सकों का रिकॉर्ड मांगे जाने पर निदेशालय के बाबूराज द्वारा आधा अधूरा रिकॉर्ड पकड़ा दिया जाता है, कायदे से रिकॉर्ड देने से पहले आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं कि किसका कौनसा रेकॉर्ड बकाया है ताकि वो अपना अटका रिकॉर्ड निकलवा सके और कुछ बकाया हो तो जमा करवा सके । लेकिन बिना सूचित किये ही अधकचरे को आगे भिजवाया गया और 15 जून को जारी हुई लिस्ट में 1700 में से करीब 600 की ही पदोन्नति की गई, इसमें भी सीनियरिटी का ध्यान नहीं रखा गया है, साथ ही क्लीनिकल ब्रांच वालों को भी एसएमओ बना दिया गया है और फार्माकोलॉजी एवं कम्युनिटी मेडिसिन के एक डॉक्टर को एसएमओ तो उसी ब्रांच के दूसरे को जेएस बना दिया गया है, चार ACR वाले का नाम है लेकिन सैंकड़ों ऐसों का नाम नहीं है जिनकी पूरी 6 जमा थी, यानी भयंकर गफलत हुई है जिससे राज्य के हजार चिकित्सक तनाव में हैं ।

देखना दिलचस्प होगा कि अब बाकी छोड़े गए चिकित्सकों की लिस्ट 1 अप्रैल 2020 के बाद आएगी या पहले ?

पहले तभी आ सकती है जब इस बाबूराज का विरोध हो वो भी सक्षम स्तर पर । हालांकि सेवारत चिकित्सक संघ का मुख्य मुद्दा DACP रहा है लेकिन 2011 की DACP के बारे में उनकी पिछले 2 सालों से जो चुप्पी है वो भी कई सवाल खड़े करती है । करीब एक महीने से गलियारों में चर्चा थी कि केवल 600 की ही DACP हो रही है लेकिन किसी चिकित्सक के भी जूं नहीं रेंगी, जो कि चिंतनीय है । अब डेफर हो चुके चिकित्सकों के लिए इस बाबूराज से पार पाना आसान नहीं होगा । बाबुओं ने फर्जी विसंगतियों से भरी लिस्ट ही सचिवालय भेज दी और वहां से लिस्ट जारी भी हो गई, इससे सचिवालय के अधिकारियों की भी हो रही है किरकिरी, अब देखना यह है कि निदेशालय के अधिकारी तो इनका कुछ बिगाड़ नहीं पाए तो सचिवालय के अधिकारी भी कमतर साबित होते हैं या बाबूराज को रोक पाते हैं ?

मेडिकल पीजी राजस्थान : स्योरटी बांड, सर्विस बांड

Rajasthan state post graduation PG/Diploma bonds;

Surety Bond5* Lacs
(1.5 + 3.5)Can’t leave course meanwhile
Service Bond25 LacsHave to serve state at least 5 years
* few specialties exempted
* 1.5 Lac – Bank guarantee
3.5 Lac – Surety Bond

No service bond for these courses, so no compulsion to serve 5 years after course completion –

(But have to pay surety bond of 5 Lac)

PG Courses;

  • Anatomy
  • Biochemistry
  • Pharmacology
  • PSM
  • Physiology
  • Forensic Medicine

Super Specialty Courses;

  • Cardio Thorasic Surgery
  • Pediatric Surgery

# Government order is attached below.
# All formats are attached below.

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

राजस्थान : डॉ. शर्मा बने अतिरिक्त निदेशक (राजपत्रित)

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान के अहम पद, अतिरिक्त निदेशक (राजपत्रित) पर डॉ. के.के. शर्मा को पदस्थापित किया गया है | डॉ. शर्मा, इसके साथ संयुक्त निदेशक, जोन जयपुर के पद पर पहले से कार्यरत हैं |

डॉ. संजीव जैन, इस पद पर कार्यरत थे, जिनकी सेवानिवृति 31 मई 2019 को होनी थी |

⇓ Share this post on Whatsapp & Facebook  ⇓

सैकड़ों चिकित्सक बेरोजगार, नहीं निकलेगी कोई भर्ती

राजस्थान में एक जमाना था जब हजार चिकित्सकों कि भर्ती परीक्षा होती तो पांच सौ चिकित्सक परीक्षा देने आते थे, फिर पदस्थापन के बाद करीब चार सौ लोग उस जगह पर जाने का मन बनाते थे, जगह पर जाने के बाद वहां के हालातों से जूझने के बाद करीब सौ लोग भाग खड़े होते थे और तीन सौ चिकित्सक ही सेवा देते थे, उस समय पैसा भी कम मिलता था, समय के साथ सेलरी बढ़ी जो कि आज के दिन नियुक्ति के प्रथम माह में 56100/- है, प्रोबेशन भी एक साल का है उसके बाद स्थाई हो जाने पर सेलरी काफी बढ़ जाती है, साथ ही सेवारत चिकित्सकों को सेवाकाल के अनुसार उच्च शिक्षा (पीजी) में नीट परीक्षा के प्राप्तांकों पर 10-20-30% बोनस अंकों की व्यवस्था भी है, यानी नौकरी अच्छी है |

पिछले कुछ सालों में इसी कारण भर्तियों में भीड़ बढ़ गयी और चयन मुश्किल होने लगा, पदस्थापन में भी दिक्कतें आने लगी, आज के दिन राजस्थान में हालात ये हैं कि चिकित्सा अधिकारीयों के स्वीकृत पद 6200 हैं और प्रदेश में कार्यरत चिकित्सा अधिकारीयों की संख्या 7500 है, ये अतिरिक्त चिकित्सक UTB (Urgent Temporary Basis) वाले हैं, देखें तो हालात ये हैं कि आगामी कई वर्षों तक राजस्थान सरकार को चिकित्सा अधिकारीयों की कोई भी भर्ती नहीं निकालनी है |

बहुत से नए चिकित्सक MBBS करने के उपरांत इंतजार कर रहे हैं कि कब सरकारी सेवा की राह खुले और वे सेवा में आवें लेकिन राह कठिन है |

विकल्प –

  1. स्वीकृत चिकित्सा अधिकारीयों के पद 6200 से बढाकर 10000 किये जावें एवं भर्ती निकाली जावे |
  2. करीब 1500 चिकित्सा अधिकारीयों की पदोन्नति वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के पद पर होनी करीब एक साल से बकाया है, अगर इनकी पदोन्नति हो जाए तो ये MO के 1500 पद खाली हो जायेंगे और भर्ती की राह खुलेगी, लेकिन सरकार पदोन्नति करने में असफल रही है, कारण पता नहीं |
  3. UTB पर कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी ज्वाइन की जा सकती है लेकिन वो रिक्त पदों पर ज्वाइन करवाते हैं, जिनकी संख्या भी काफी कम है |

देखना दिलचस्प रहेगा कि कम चिकित्सकों का रोना रोने वाली सरकार हजारों बेरोजगार चिकित्सकों को कैसे रोजगार देती है और प्रदेश कि ग्रामीण जनता को चिकित्सा व्यवस्थाएं मुहैया करवाती है |

⇓ Share this post on Whatsapp & Facebook  ⇓