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NEW Medical colleges approval

The work of setting up new medical colleges approved under the central scheme should be expedited, the Center

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार 2014 से तीन चरणों में अबतक 157 नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी गयी है।केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों तथा चिकित्सा शिक्षा निदेशकों के साथ योजना की समीक्षा करते हुए परियोजनाओं की धीमी प्रगति को रेखांकित किया।उन्होंने राज्यों से परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी लाने की अपील की ताकि 2023-24 शिक्षण सत्र में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकें।भूषण ने कहा कि चूंकि योजना 31 मार्च 2024 को समाप्त हो रही है,इसलिए सभी परियोजनाएं वक्त पर पूरी होनी जरूरी हैं।मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा परियोजना में व्यय की धीमी गति और धन के लिए अनुरोध नहीं किये जाने को लेकर केंद्र आगे धन जारी नहीं कर सकता।बैठक में अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा और पंजाब ने हिस्सा लिया।

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Tranfer in health department of rajasthan

Kumbh of transfers in Rajasthan, transfers are being done continuously in Health Department

28.07.2022

राजस्थान में 2 साल के कोविड काल के बाद इस बार हैल्थ डिपार्टमेंट में तबादलों को लेकर बड़ा फेरबदल चल रहा है। चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा ने सबसे पहले डेपुटेशन और सेटिंग से शहरों में जमे डॉक्टरों पर हमला किया था और उनको तुरंत अपनी मूल पोस्टिंग वाले स्थानों पर भेजने के आदेश दिए थे। लेकिन अब भी सैकड़ों डॉक्टर-कर्मचारी डेपुटेशन और अपनी पसंदीदा जगह जमे हैं। दूसरी तरफ पिछले 15 दिन में 2400 डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ इधर-उधर किए गए।लिहाजा वर्किंग डे के अनुसार 11 दिन में औसतन 217 प्रतिदिन ट्रांसफर किए गए। इनमें 610 डॉक्टर और 1780 नर्सिंग और पैरा मेडिकल स्टाफ हैं। अब भी तबादलों का कुंभ चल रहा है। माना जा रहा है कि सीजन में 10 हजार से ज्यादा स्टाफ इधर-उधर होगा।27 लिस्ट डॉक्टरों व विशेषज्ञों की
15 दिन में 610 डॉक्टरों की 27 बार ट्रांसफर लिस्ट निकाली गई। यानी रोज करीब 3 लिस्ट जारी की गई। इनमें मेडिकल ऑफिसर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर, वरिष्ठ और कनिष्ठ विशेषज्ञ, अस्थि रोग से लेकर डेंटिस्ट आदि चिकित्सक शामिल हैं।चौमूं से सीधे जैसलमेर-बाड़मेर : तबादला सूचियों में सबसे चर्चित तबादले चौमूं के 7 डॉक्टरों के रहे। डाॅ. बीएल यादव, डाॅ. रवि कुमावत, डॉ. जयंत जैन, डाॅ. ज्योति यादव, डाॅ. सुरेश जांगिड़, डाॅ. मुखराम देवंदा और डाॅ. ज्योति शर्मा के तबादले सीएचसी चौमूं से जैसलमेर और बाड़मेर जिले की विभिन्न सीएचसी और पीएचसी में कर दिए गए हैं

मांगी सरप्लस की सूची
हैल्थ डायरेक्टरेट ने 33 जिलों के लिए आदेश जारी किया है कि सभी सीएमएचओ और उनके अधीन अफसर 29 जुलाई तक अपने-अपने जिले में जितने भी अराजपत्रित कर्मचारी सरप्लस हैं, उनकी पूरी डिटेल मुख्यालय को भेजें। माना जा रहा है कि मंत्री ने सभी अस्पतालों को डॉक्टर स्टाफ मुहैया कराने का आदेश निकलवाया है।

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Compulsion of government service reduced in medical colleges in raj.

After PG and superspeciality courses from medical colleges in Rajasthan, the compulsion of government service reduced

27.06.2022
प्रदेश के मेडिकल काॅलेजों से पीजी व सुपरस्पेशिलिटी काेर्स के बाद पांच साल की सरकारी सेवा की बाध्यता घटाकर दाे साल कर दी गई है। अगले दाे माह में नीट पीजी की काउंसलिंग हाेनी है, ऐसे में स्टूडेंट्स काे मेडिकल काॅलेज के चयन में इसका लाभ मिलेगा।
इससे प्रदेश के कई स्टूडेंट्स दूसरे प्रदेशाें से पीजी कर रहे थे।
दूसरे प्रदेशाें के कम स्टूडेंट्स ही राजस्थान के कॉलेज चुनते थे। अब अनिवार्य राजकीय सेवा की अवधि 2 साल होने से राजस्थान में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी क्याेंकि प्रदेश के स्टूडेंट्स यहां रुकेंगे। हालांकि करार सिर्फ 2 साल का हाेने पर सरकारी अस्पतालाें में डाॅक्टराें की कमी हाे सकती है। राजस्थान में पीजी की करीब 1300 सीटें हैं। नए नियम के बाद नीट-पीजी में होड़ बढ़ेगी लेकिन डाॅक्टर मिलने की उम्मीद कम ही है।

सवाल: क्या डॉक्टर सेवा जारी रखेंगे?
एमबीबीएस में 4 साल के बाद 3 साल पीजी करने में लगते हैं। सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में 3-5 साल और लगते हैं। ऐसे में कई मेडिकाॅज सरकारी सेवा पूरी करने की बजाय निजी क्षेत्र में जा रहे थे। अब वे दाे साल बाद इसे जारी रखेंगे, इसमें संशय है।सरकारी सेवा अवधि 2 साल करने का आदेश।

प्रतिस्पर्धा: सितंबर में काउंसलिंग, स्टूडेंट्स ज्यादा होंगे
असम में 10 साल की राजकीय सेवा अनिवार्य है। राजस्थान व आंध्र में 5 साल व बिहार, झारखंड, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल में 3 साल है। पहले इन राज्यों के स्टूडेंट्स राजस्थान कम आ रहे थे। उलटे राजस्थान से पीजी के लिए बाहर जा रहे थे। अब राजस्थानी छात्र यहीं रुकेंगे, दूसरे प्रदेशाें से स्टूडेंट राजस्थान आएंगे। ऐसे में इस बार सितंबर में हाेने वाली नीट पीजी की काउंसलिंग में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी।

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Outer site student will not get admission in indian medical colleges

MBBS students returned from Ukraine will not get admission in medical colleges of India!

रूस से जंग के बीच यूक्रेन में अपनी पढ़ाई छोड़कर भारत लौटने को मजबूर मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बुरी खबर है. इन छात्रों को भारत के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिल सकेगा. शुक्रवार, 22 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से इस बारे में लोकसभा में जानकारी दी गई. केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री भारती पवार ने Lok Sabha में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि ‘नेशनल मेडिकल कमीशन ने इसकी अनुमति नहीं दी है’. इन एनएमसी की मंजूरी के बिना Ukraine से लौटे इन मेडिकल स्टूडेंट्स को न तो किसी भारतीय मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर मिल सकेगा, न ही इन्हें एकोमोडेट किया जा सकेगा.

IMC और NMC Act में ऐसा कोई प्रावधान नहीं!
केंद्रीय राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने लोकसभा में बताया कि इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 और नेशनल मेडिकल कामीशन एक्ट 2019 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत विदेश से लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स को भारत के मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर किया जा सके. इसलिए अपने Medical Colleges में इन स्टूडेंट्स को जगह देने के राज्यों के फैसले को एनएमसी ने मंजूरी नहीं दी है

विदेश से मेडिकल करने वालों पर लागू होते हैं FMG नियम
मंत्री ने कहा कि ‘विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स/ ग्रेजुएट्स या तो स्क्रीनिंग टेस्ट रेगुलेशन 2002 में कवर होते हैं, या फिर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट रेगुलेशन 2021 के तहत.’

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Bad for medical community

If that‘s true, it’s a slap in the face to the medical community

26.07.2022
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हिंसा से स्वास्थ्य कर्मियों और स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा पर मसौदा कानून वापस ले लिया है, जिसमें अपराधियों को पांच साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।यह बात 5 जुलाई को कन्नूर स्थित नेत्र रोग विशेषज्ञ और आरटीआई कार्यकर्ता केवी बाबू द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दायर एक सवाल के जवाब में मंत्रालय के जवाब में सामने आई, जिसमें स्वास्थ्य सेवा कार्मिक और नैदानिक ​​प्रतिष्ठानों (हिंसा का निषेध और निषेध) की स्थिति की मांग की गई थी। संपत्ति को नुकसान) विधेयक, 2019।उन्होंने हितधारकों से मसौदे पर प्राप्त टिप्पणियों और स्वास्थ्य और गृह मंत्रालयों के बीच आदान-प्रदान और फाइल नोटिंग, यदि कोई हो, की प्रतियां मांगीं। अपने 20 जुलाई के जवाब में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा: “यह सूचित किया जाता है कि मसौदा कानून को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया गया था।” उत्तर में कहा गया है कि अपेक्षित शुल्क के भुगतान के बाद फाइल नोटिंग और पत्रों की प्रति प्राप्त की जा सकती है।“महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधन के लिए राज्यसभा में एक अध्यादेश पर बहस के दौरान, तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि अध्यादेश लाए जाने के बाद से स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं की संख्या में नाटकीय गिरावट आई है। in. अध्यादेश में COVID-19 रोगियों का इलाज कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों पर हिंसा की घटनाओं को गैर-जमानती अपराध बनाने का प्रस्ताव किया गया था। इसका मतलब है कि एक मजबूत कानून का असर होगा, ”डॉ बाबू ने कहा।अध्यादेश केवल COVID-19 उपचार में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों से संबंधित था। उन्होंने कहा, “आरटीआई के जवाब से, हालांकि, ऐसा लगता है कि सरकार सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए अध्यादेश के दायरे का विस्तार करने की इच्छुक नहीं है।”स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा और नैदानिक ​​प्रतिष्ठानों को नुकसान से निपटने के लिए कानून का प्रस्ताव किया गया था। अधिनियम के तहत किसी भी मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक से कम रैंक के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी।

अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होने का प्रस्ताव किया गया था।

दोषी को क्षतिग्रस्त संपत्ति के उचित बाजार मूल्य या इससे हुए नुकसान के दोगुने मुआवजे के रूप में भुगतान करने के लिए उत्तरदायी था; स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को चोट पहुंचाने के लिए ₹1 लाख; और स्वास्थ्य कर्मियों को गंभीर चोट पहुंचाने के लिए ₹5 लाख।यदि मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उक्त राशि राजस्व वसूली अधिनियम, 1890 के तहत भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल की जाएगी।

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Decrees to doctors

decrees to doctors; The results came on time, so the medical teacher should check 100 copies every day, the order of the director of the medical education department with a sarcasm

26.07.2022
मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के संचालक डॉ. जितेन शुक्ला के एक फरमान ने डॉक्टरों में हड़कंप पैदा कर दिया है। उन्होंने 14 जुलाई को जारी आदेश में कहा है कि एमबीबीएस का रिजल्ट समय पर जारी हो, इसके लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज के एक टीचर को एक दिन में 100 स्टूडेंट्स की कॉपी जांचने का काम दें।ये आदेश भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, विदिशा, सागर, खंडवा, शहडोल, शिवपुरी, रतलाम, रीवा, दतिया और छिंदवाड़ा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डीन को भेजा गया है। साथ ही इसका सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। संचालक के इस अव्यवहारिक आदेश से डॉक्टर परेशान हैं, क्योंकि वे सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मेडिकल स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं।इन आठ घंटों में वे कॉपियां जांचना संभव नहीं है, क्योंकि इसी दौरान डॉक्टरों को मरीजों को भी देखना पड़ता है। लेकिन संचालक के इस अव्यवहारिक आदेश का असर जल्दबाजी में कॉपी जांचने के चलते रिजल्ट पर भी दिखाई देगा। इस ऑर्डर को लेकर जब संचालक से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। कुछ देर बाद ऑर्डर की कॉपी उनके वॉट्सएप पर भेजी तो इसका भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

10 से 15 कॉपी ही जांच सकेंगे, वजह- दिनभर व्यस्तता, रात में ही कुछ घंटे का समय मिलेगा

शाम चार बजे के बाद कई डॉक्टर निजी प्रैक्टिस भी करते हैं। इस दौरान भी कॉपियों की जांच हो पाना मुश्किल है।
घर लौटने के बाद या रात 10 बजे के बाद जब कॉपियों की जांच शुरू होती है तो चार घंटे में कुछ कॉपी चैक हो पाती हैं।
एक टीचर्स ने बताया कि एक कॉपी की ईमानदारी से जांच में कम से कम 20 से 25 मिनट लगते ही हैं। इस हिसाब से 10 कॉपी जांचने में करीब 4 घंटे 10 मिनट लगेंगे। इस दौरान नंबर भी देना होता है। इसके बाद ही अगली कॉपी शो होती है।
आदेश का पालन होता है तो एक 25 मिनट प्रति कॉपी के हिसाब से 100 कॉपियों की जांच करने में करीब 2500 मिनट यानी 41 घंटे से ज्यादा का वक्त लगा।
मेडिकल टीचर्स की माने तो सुबह 8 से 4 बजे तक मेडिकल की पढ़ाई का समय फिक्स है। इसमें ओपीडी और बेड साइड टीचिंग का समय भी शामिल है।

यूनिवर्सिटी पर सवाल… परीक्षा कराने और रिजल्ट की जिम्मेदारी इसी पर
ऐसा बहुत कम हुआ है कि यूनिवर्सिटी के काम में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महकमे ने हस्तक्षेप किया हो। परीक्षा करवाने और रिजल्ट की जिम्मेदारी सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की होती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि आदेश यूनिवर्सिटी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। सरकार को दखल इसीलिए भी करना पड़ा, क्योंकि विवि काम सही से नहीं कर रहा।

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Free medical camp organized in Pali

Free medical camp organized in Pali, doctors from Ahmedabad checked the health of 663 patients

25.07.2022
पाली शहर के पानी दरवाजा के निकट स्थित बागबेरा दादावाड़ी में रविवार को जैन युवा संगठन एवं मेरिंगो सिम्स हॉस्पिटल के तत्वावधान में निशुल्क सुपर स्पेशलिस्ट मेडिकल शिविर आयोजित किया गया। जिसमें अहमदाबाद से आए स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की टीम ने 663 मरीजों के स्वास्थ्य की जांचकर उचित परामर्श दिया। शिविर का श्री संघ सभा के अध्यक्ष तेजराज तातेड़, सचिव सज्जनराज बाठिया ने भगवान महावीर की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर शुभारम्भ किया।जैन युवा संगठन के अध्यक्ष राकेश कुंडलिया ने बताया कि शिविर में अहमदाबाद के प्रसिद्ध सिम्स हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ धीरेन शाह ,डॉ सत्य गुप्ता ,डॉ प्रशांत पटेल , डॉ भावेश ठक्कर, डॉ मौलिक आर भेसदड़िया, डॉ टीकेबी गणपथी , डॉ मयूर पाटील, डॉ जयनु शाह, डॉ इंद्र देसाई ने हृदय, लीवर, पेट, सभी मरीजों की जांच एवं परामर्श दिया गया । शिविर संयोजक तेजपाल जैन व प्रवीण तातेड़ ने बताया कि शिविर में पाली के डॉक्टर मनीष माहेश्वरी ने मरीजों की रिपोर्ट देखकर परामर्श दिया और मरीजों के BP, ईसीजी ,पीएसपी एवं शुगर की जांच निशुल्क की। शिविर के दौरान व्यवस्थाओं में संस्था के पूर्व अध्यक्ष परेश बाफना ,गौतम गोगड़ ,राकेश मेहता,हितेश वरडिया, रुपेश पारख,धर्मेश गेमावत ,विशाल कांकरिया, तलेसरा,निहालचंद कावड़िया, मनोज लुक्कड़ ,योगेश काकरिया, अंकित भंसाली, राजेंद्र नाहर,अर्पित मेहता, भैरव भंडारी, प्रफ्फुल कवाड, विकास संचेती, मनीष बंगलावाला, धर्मेद्र नाहर, रजत सांड,अभिषेक सालेचा, भव्य लोढ़ा आदि जुटे रहे।

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Medical college of ratlam

Ratlam medical college messed up

शहर के मेडिकल कॉलेज में मार्च माह में दूषित भोजन के सेवन से कई बच्चें बीमार हुए थे और उनको भर्ती करना पड़ा था। पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर मात्र मेस संचालक को हटाने की कार्रवाई की है। इसमे मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मेस संचालक के खिलाफ पुलिस में कोई कार्रवाई तक कराना जरूरी नहीं समझा।मार्च माह में जिले के एकमात्र शासकीय मेडिकल कॉलेज में फूड पाईजिनिंग की घटना हुई थी। इसमे कई बच्चें बीमार हुए थे। इस घटना को पहले तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन दबाता रहा, जब घटना बाहर आ गई तो शुरू से लेकर अंत तक मेस संचालक को बचाने का काम होता रहा। इतना ही नहीं, मेडिकल कॉलेज से जुड़े किसी प्रशासनीक अधिकारी पर इस मामले में जांच तक नहीं की गई।

कई सवाल, जिनके जवाब तक नहीं

घटना के बाद अब अब तक कई सवाल है, जिनके जवाब देने से मेडिकल कॉलेज प्रशासन बचता है। इस मामले में नियम यह है कि जो छात्र बीमार हुए और उल्टी हुई, ऐसे मामले में पुलिस को बुलाकर उल्टी को जांच के लिए सागर लैब भेजा जाता है, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने मात्र पुलिस को सूचना देना जरूरी समझा। इसके लिए अलग से कोई कार्रवाई के लिए बताना तक जरूरी नहीं समझा गया। इतना ही नहीं खाद्य और औषधि प्रशासन को भी इस मामले में कोई सूचना नहीं दी गई। जबकि नियम अनुसार सूचना दी जाती तो यह विभाग बचे हुए उस भोजन के नमूने ले लेता, जिसको खाने से मेडिकल कॉलेज के बच्चें बीमार हुए थे।

समिति में कौन नहीं पता

इस मामले को जहां शुरू से अंत तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन दबाता रहा, वही बाद में भी कोई सूचना साझा करना जरूरी नहीं समझा गया। बड़ी बात यह है कि जब सूचना के अधिकार कानून में जानकारी चाही गई तो यह तो बता दिया गया कि मेस संचालक को हटा दिया गया, लेकिन जांच समिति में कौन था, समिति ने किन बिंदुओं पर जांच की, जांच समिति कब बनाई गई यह सब बताना जरूरी नहीं माना गया
नियम अनुसार कार्रवाई कीमेडिकल कॉलेज में कुछ खाने से बच्चें बीमार हुए थे, जिसके बाद उनको बेहतर उपचार दिया गया था। मार्च माह में हुई इस घटना के बाद जांच की गई और दोषी मेस संचालक को निष्कासित कर दिया गया।

लोकेंद्र सिंह कोट, मीडिया प्रभारी, शासकीय मेडिकल कॉलेज

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5 medical courses without neet

Apart from MBBS, you can also do this course related to medical, there will be no need to qualify NEET

23.07.2022
:लाखों लोग MBBS की डिग्री हासिल करने के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की परीक्षा देते हैं. NEET स्कोर के आधार पर ही देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में MBBS और BDS कोर्स में एडमिशन मिलता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं मेडिकल फील्ड में करियर बनाने के लिए NEET एग्जाम ही पास होना चाहिए, ऐसा जरूरी नहीं है. बिना NEET क्वालीफाई किए भी आप मेडिकल फील्ड में करियर बना सकते हैं. अगर आप फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी या मैथ्स सब्जेक्ट के साथ 12वीं पास हैं तो आप बिना NEET के कई मेडिकल कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं. यहां हम ऐसे ही कुछ कोर्सेज के बारे में बता रहे हैं।

NEET के बिना किए जाने वाले मेडिकल कोर्स | Medical Courses Without NEET

1. BSC नर्सिंग

बिना NEET के 12वीं के बाद सबसे लोकप्रिय मेडिकल कोर्स में से एक B.Sc नर्सिंग है।अस्पताल में एक मरीज को ठीक होने के लिए न केवल डॉक्टर के परामर्श और दवाओं की जरूरत होती है बल्कि नर्स की देखभाल की भी जरूरत पड़ती है. नर्सिंग न केवल एक नौकरी है बल्कि एक सामाजिक कार्य भी है। यह 4 साल का कोर्स है जो स्नातक की डिग्री प्रदान करता है। यह कोर्स AIIMS और AFMC समेत कई टॉप कॉलेजों में उपलब्ध है।

2. B फार्मा

फार्मासिस्ट एक प्रशिक्षित व्यक्ति होता है जिसे दवाओं, उनके डेवलपमेंट, दवाओं के क्लिनिकल रिसर्च आदि के बारे में काफी जानकारी होती है। यह 4 साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स है जो एक शानदार वेतन और शानदार करियर के अवसर प्रदान करता है।
3. बायोटेक्नोलॉजी में B.Sc

बैचलर इन बायोटेक्नोलॉजी 3 साल का कोर्स है जो अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रदान करता है। बायोटेक्नोलॉजी के छात्रों को सूक्ष्म जीवों के आनुवंशिकी, उनके विकास आदि के बारे में पढ़ाया जाता है।बायोटेक्नोलॉजिस्ट बायोलॉजी और टेक्नोलॉजी की स्टडी को मिलाकर पृथ्वी पर जीवन को बेहतर बनाने के लिए रिसर्च करते हैं।

4. माइक्रोबायोलॉजी में B.Sc
B.Sc माइक्रोबायोलॉजी में पर्यावरण में मौजूद सूक्ष्मजीवों का अध्ययन किया जाता है।यह 12वीं कक्षा के बाद लोकप्रिय चिकित्सा पाठ्यक्रमों में से एक है।यह 3 साल का पाठ्यक्रम है जिसमें सूक्ष्मजीवों के अध्ययन से संबंधित विविध अध्याय हैं।

5. पोषण में B.Sc
खानपान को लेकर लोगों की बढ़ती चिंता के साथ पोषण विशेषज्ञों की जरूरत भी बढ़ गई है।पोषण विशेषज्ञ और आहार विशेषज्ञ पोषण और उचित आहार के क्षेत्र में विशेषज्ञ होते हैं।वे खिलाड़ियों और ऑर्गेनाइजेशन के लिए सलाहकार के रूप में काम कर सकते हैं और लोगों से उनकी आवश्यक आहार आदतों के बारे में परामर्श के लिए क्लीनिक स्थापित कर सकते हैं।यह 3 साल का कोर्स है जो दिलचस्प और अत्यंत ज्ञानवर्धक दोनों है।

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NHM bhopal released bumper recruitment

National Health Mission (NHM) Bhopal has released bumper recruitment for 37 District Quality Monitor, Hospital Superintendent and Deputy Director IT

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने अस्पतालों में क्वालिटी सर्विस को सुधारने के लिए अब संविदा जिला क्वालिटी मॉनिटर की भर्ती शुरू की है। प्रदेश के करीब 37 जिला अस्पतालों में इनकी नियुक्ति की जाएगी। ये संविदा क्वालिटी मॉनिटर जिले भर के अस्पतालों में गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी करेंगे। एनएचएम ने इसकी भर्ती शुरू की है। इसके साथ ही स्किल लैब में 5 प्रशिक्षक मेडिकल ऑफीसर, एक डिप्टी डायरेक्टर आईटी की भर्ती निकाली है।

इन पदों पर निकली भर्तियां

पद का नाम खाली पद शैक्षणिक योग्यता वेतन
संविदा जिला क्वालिटी मॉनिटर 37 डेंटल, आयुष में ग्रेजुएट, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, हेल्थ केयर मैनेजमेंट/पब्लिक हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन डिग्री 40 हजार रूपए प्रतिमाह
प्रशिक्षक मेडिकल ऑफीसर (स्किल लैब) 5 NHM मप्र में संविदा मेडिकल ऑफीसर के तौर पर दो साल OBGY/Pedia विभाग में काम करने का अनुभव। 66 हजार रूपए प्रतिमाह
डिप्टी डायरेक्टर (IT) 1 इलेक्ट्रॉनिक, कम्प्यूटर साइंस,इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन, इन्फाॅर्मेशन टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएट प्रतिनियुक्ति में वर्तमान पद के अनुसार
संविदा में रिटायर अधिकारी को अंतिम वेतन के आधार पर स्वीकृत पेंशन को कम करने के बाद बाकी राशि वेतन के रूप में मिलेगी।
संविदा अस्पताल अधीक्षक 1
हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेश्​​​​​​न में पीजी, डिप्लोमा धारी डॉक्टर
आर्मी और अन्य केन्द्रीय विभागों के रिटायर अधिकारी जिन्हें अस्पताल प्रशासन का अनुभव हो

1 से सवा लाख रूप

भर्ती के नियम और शर्तें जानने के लिए पद नाम पर क्लिक करें

संविदा जिला क्वालिटी मॉनिटर – ऑनलाइन आवेदन की लिंक 28 जुलाई से ओपन होगी। 30 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे।

प्रशिक्षक मेडिकल ऑफीसर (स्किल लैब) – जिलों के सीएमएओ इन अर्हताओं को पूरी करने वाले 3-3 संविदा मेडिकल ऑफीसर्स की लिस्ट 25 जुलाई तक एनएचएम को भेजेंगे।

डिप्टी डायरेक्टर (IT) – अंतिम तिथि- 10 अगस्त 2022

संविदा अस्पताल अधीक्षक – अंतिम तिथि- 16 अगस्त 2022

भोपाल के काटजू अस्पताल में अधीक्षक की होगी संविदा नियुक्ति

राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट इलाके में एक साल पहले बनकर तैयार हुए काटजू अस्पताल में अब तक मरीज भर्ती होने शुरु नहीं हो पाए हैं। इस अस्पताल के अधीक्षक का प्रभार सीएमएचओ को दिया गया है। एनएचएम ने काटजू अस्पताल के अधीक्षक के लिए भर्ती निकाली है। हॉस्पिटल मैनेजमेंट,हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में पीजी डिग्री, डिप्लोमा धारी डॉक्टर प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा आर्मी और केन्द्रीय विभागों से राजपत्रित श्रेणी के रिटायर अफसर जिनके पास अस्पताल प्रबंधन का अनुभव है। वे काटजू अस्पताल में अधीक्षक के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्रतिनियुक्ति के लिए आयु 50 साल और रिटायर अफसरों के लिए आयुसीमा 65 साल तक तय की गई है। वेतन के तौर पर प्रतिमाह एक लाख से सवा लाख रूपए तक दिए जाएंगे।

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