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Infection during rainy season

risk of infection during the rainy season; Include foods rich in fiber, protein, carbohydrates and vitamins in the diet

बारिश के मौसम में सेहत को लेकर लापरवाही महंगी पड़ सकती है, क्योंकि इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा अधिक होता है। ऐसे में खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। बारिश के मौसम में हमारा पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है और इम्युनिटी भी कमजोर हो जाती है। इस मौसम में सेहत को लेकर काफी सजग रहने की जरूरत होती है।अगर मौसम के अनुसार डाइट को लिया जाए तो मौसम के कारण होने वाली तमाम बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। इस मौसम में डाइट में इम्युनिटी बढ़ाने वाले फूड को शामिल करना चाहिए, जो मानसून में वायरस और बैक्टीरिया से लड़ सकते हैं। शहर के डाइटीशियन से जानिए खुद को फिट रखने के लिए इस मौसम में किस तरह की डाइट लेनी चाहिए।

ज्यादा पानी पिएं और खुद को हाइड्रेट रखें, ऑयली-स्पाइसी फूड खाने से पूरी तरह से करें परहेज

बरसात के मौसम में इम्युनिटी मजबूत करने के लिए विटामिन-सी से भरपूर खाद्य पदार्थ लें। पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और खुद को हाइड्रेट रखें। आंवला, नींबू पानी, कोकोनट वॉटर पीएं। इस मौसम में साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। हाथों को बार-बार अच्छी तरह धोना चाहिए। फल-सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले गुनगुने पानी में नमक डालकर साफ करें। फाइबर, प्रोटीन, न्यूट्रिएंट, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन से भरपूर चीजें डाइट में शामिल करें। बारिश के मौसम में दूध, दही, पनीर, छाछ डेयरी प्रोडक्ट्स न खाने की सलाह दी जाती है। इस मौसम में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ऐसे में ये चीजें आसानी से डाइजेस्ट नहीं हो पातीं। वहीं, कफ से जुड़ी समस्याएं बढ़ने का रिस्क ज्यादा होता है। दूध अगर पीना भी है तो हल्का गर्म और हल्दी डालकर ही पीएं।
मानसून के मौसम में किसी भी प्रकार के बाहरी भोजन से बचें। कोई जोखिम न लें। टिक्की, गोलगप्पे, चाट, पकौड़े, समोसे वगैरह भी बारिश के महीने में नहीं खाने चाहिए। ये चीजें भारी होती हैं और पेट के लिए तमाम परेशानियां पैदा करती हैं। बारिश के मौसम में ऑयली और स्पाइसी फूड खाने से पूरी तरह से परहेज करें। घर में ताजा खाना बनाकर ही खाएं, बासी खाना न खाएं। पानी की स्वच्छता का विशेष ख्याल रखें। बारिश के मौसम में पानी जल्दी दूषित होता है। ऐसे में इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। करेला, कद्दू और आंवला जैसे एंटीऑक्सिडेंट के रूप में काम करने वाले फूड्स मानसून के दौरान आपके लिए अच्छे होते हैं। वे संक्रमण को रोकने में भी मदद करते हैं और हेल्दी रखते हैं। सूप, चाय, कॉफी और अन्य गर्म पेय शरीर के तापमान को बनाए रखने का एक अच्छा तरीका है। स्वस्थ रहने के लिए मानसून के दौरान गर्म तरल चीजें पीएं।

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Healthy liver camp in Udaipur

Healthy Liver Campaign in Udaipur, Hepatitis Screening will also be done

22.07.2022
जिले में हेपेटाइटिस ए यानी पीलिया रोग से बचाव एवं रोकथाम की जानकारी, हेपेटाइटिस के अन्य रूप की स्क्रीनिंग करने के लिए चल रहे हेल्दी लिवर कैंपेन के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूलों, ग्राम चौपालों में लोगों को स्वच्छ पेयजल व साफ सफाई का महत्व, लीवर को स्वस्थ रखने के उपाय एवं उचित खानपान की जानकारी दे रही है।दूसरी ओर जेल में बंद कैदियों, सेक्स वर्कर्स, गर्भवती माताओं जैसे हाई रिस्क ग्रुप को लक्षित कर उनकी स्क्रीनिंग एवं जांच कर हेपेटाइटिस के रोगियों का पता लगा रही है ताकि समय पर उनका उपचार शुरू किया जा सके। सीएमएचओ डॉ दिनेश खराड़ी ने बताया कि अभियान के तहत हाई रिस्क समूहों की स्क्रीनिंग के तहत हेपेटाइटिस रोगियो की पहचान कर टेस्ट कर रहे हैं। अभी तक जिले की सेंट्रल जेल एवं महिला जेल में बंद कैदियों की स्क्रीनिंग की गई है। स्क्रीनिंग के दौरान यदि किसी में हेपेटाइटिस रोग के लक्षण पाए जाते हैं तो उन सभी का वायरल लोड की जांच करने के लिए ब्लड सैंपल लिया जाकर प्रयोगशाला भिजवाया जाएगा। जहां प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार पॉजिटिव रोगियो का उपचार शुरू किया जाएगा। एड्स कंट्रोल टीम द्वारा औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों समूहों की भी हेपेटाइटिस रोग के लिए जांच की जा रही है।

गर्भवती से बच्चे को खतरा ज्यादा : डॉ खराड़ी ने कहा कि यदि गर्भवती महिला हेपेटाइटिस रोग से संक्रमित है तो बच्चे को भी खतरा बना रहता है। इसलिए जरूरी है कि प्रत्येक गर्भवती महिला की एएनसी के दौरान हेपेटाइटिस की भी जांच हो। इसके लिए प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को सभी राजकीय चिकित्सालयों में जांच की जा रही है। अभियान के अंतर्गत नवजात को भी हेपेटाइटिस बी का टीका नियमित टीकाकरण के अंतर्गत जन्म के 24 घंटे के अंदर लगाया जा रहा है।

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list of medical doctors

Under the Rajasthan Medical and Health Service Rules, the final seniority list of the doctors selected for the post of Medical Officer regularly released.

18.07.2022
राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा नियम-1963 के नियम 27 के अनुसार नियमित रूप से चिकित्सा अधिकारी के पद पर चयनित चिकित्सकों की अंतरिम वरिष्ठता सूची दिनांक 1.04.2022 की स्थिति दर्शाते हुए एतद् द्वारा जारी की जाती है, यदि कोई अधिकारी इससे परिवर्धित हो तो वह अपना अभ्यावेदन इस सूची के जारी होने की तिथि से 15 दिवस की समयअवधि में निम्न हस्ताक्षरकर्ता को अवश्यमेव प्रस्तुत करें। निर्धारित अवधि के पश्चात प्राप्त होने वाले अभ्यावेदनो पर कोई विचार नहीं किया जावेगा और अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी कर दी जावेगी

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Gwalior health commissioner warning for better health facilities in hospital

Gwalior Health Commissioner’s warning to the civil surgeon, orders to keep medicines and complete facilities in the hospital

14.07.2022

स्वास्थ्य आयुक्त डॉक्टर सुदाम पी खाड़े तथा मिशन संचालक एनआरएचएम प्रियंका दास ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों की संभागीय स्तरीय बैठक में कहा कि जिला अस्पतालों में 295 तरह की दवाएं हमेशा उपलब्ध रहें। उसी तरह उससे छोटी सभी संस्थाओं पर भी दवाओं की उपलब्धता शत-प्रतिशत रहे। यह सुनिश्चित करें अगर कहीं दवाओं की कमी या किसी की लापरवाही मिलती है तो संबंधित फार्मासिस्ट के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में उन्होंने गर्भवती माताओं की जांच एवं उनको मिलने वाली सेवाओं पर चर्चा की। जिसमें लगभग सभी जिलों की स्थिति संतोषजनक नहीं थी।स्वास्थ्य आयुक्त ने मंगलवार को हुए जिला चिकित्सालय के भ्रमण के दौरान मिली कमी को लेकर सिविल सर्जन को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको ग्वालियर में रहना तो आपको सुधारात्मक कार्रवाई करनी पड़ेगी, उन्होंने श्योपुर सिविल सर्जन से पूछा कि कभी आपने इंस्ट्रूमेंट चेक किए। जिसका संतोषजनक जवाब ना मिलने पर नाराजगी व्यक्त की उन्होंने कहा कि संभाग के सभी सिविल सर्जन एवं सीएमएचओ के पास कंपनी के मोबाइल नंबर होने चाहिए ताकि इंस्ट्रूमेंटों में खराबी होने पर सूचना दी जा सके।

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four medical tests which must be done will know the exact state of health.

According to the research of doctors, after crossing the age of 40, four medical tests, which must be done, will know the exact state of health.

08.07.2022
उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं।इन बदलावों के साथ कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें (Health Problems) भी आती हैं। ऐसे में किसी बीमारी के अंदर ही अंदर बढ़ जाने से बेहतर है उसका समय रहते पता लगाना और इलाज के लिए आगे बढ़ना। अगर 40 की उम्र के बाद आप इन सभी जरूरी टेस्ट (Tests) में नेगेटिव निकलते हैं तो यह और भी अच्छा है कि किसी तरह की बीमारी का अंदाजा लगाते नहीं रहना पड़ेगा, आपको पता होगा कि आपका शरीर रोगों से मुक्त है।आइए जानें, 40 की उम्र हो जाने के बाद व्यक्ति को किस तरह के टेस्ट कराने चाहिए।

40 के बाद कराने वाले टेस्ट | Tests After 40 Years of Age

ब्लड शुगर टेस्ट
चाहे आपको डायबिटीज (Diabetes) के लक्षण न दिख रहे हों या घर में किसी को कभी डायबिटीज ना भी हुई हो फिर भी आपको 40 के बाद डायबिटीज का टेस्ट (Diabetes Test) कुछ महीनों के अंतराल पर कराते रहना चाहिए। इस टेस्ट से आपको यह पता लग जाएगा कि आपका शुगर लेवल बढ़ने तो नहीं लगा है. शरीर में थोड़ा भी शुगर लेवल बढ़ रहा हो तो आप उसके प्रति सजग होकर खानपान सुधार सकते हैं।

हड्डियों के लिए ऑस्टियोपोरोसिस टेस्ट
ऑस्टियोपोरोसिस टेस्ट 40 की उम्र के बाद जरूर करवा लेना चाहिए. इस टेस्ट से हड्डियों में कमजोरी, विटामिन डी की कमी (Vitamin D Deficiency) और बोन डेंसिटी का भी पता लग सकता है। हड्डियों को सालों-साल मजबूत रखने के लिए उनकी जरूरत की जानकारी होना भी आवश्यक है।

दिल की सेहत के लिए टेस्ट
व्यक्ति को बढ़ती उम्र के साथ दिल की सेहत (Heart Health) का ख्याल भी करना चाहिए. इसके लिए कार्डियक इवेलुएशन का टेस्ट कराया जाता है। यह टेस्ट दिल की जांच और स्वास्थ्य से जुड़ा है जिसमें शरीर के कॉलेस्ट्रोल लेवल का पता चलता है। कॉलेस्ट्रोल लेवल के बढ़ने की शुरुआत में ही पता लगना बेहतर साबित होता है‌।

ब्लड प्रेशर टेस्ट
हाई बीपी (High BP) या लो बीपी का शिकार होना सेहत के लिए बिलकुल अच्छा नहीं है। चाहे स्त्री हो या पुरुष, 40 की उम्र के आसपास इस टेस्ट को जरूर कराएं।बिना टेस्ट कराए और सही इलाज से वंचित रहकर ब्लड प्रेशर के मरीज अपनी जान को खतरे में डालने का काम करते हैं।

बहुत छोटे बच्चे को आम खिलाना कब करना चाहिए शुरू, जानिए बच्चों की सेहत पर क्या प्रभाव डालता है Mango खाना

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Lack of facilities in Bhopal’s railway hospital

Lack of facilities in Bhopal’s railway hospital, no doctor, no better health services

07.07.2022
सुविधाओं के अभाव और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण निशातपुरा स्थित रेलवे हॉस्पिटल केवल रैफरल बनकर रह गया है। विशेषज्ञों के अलावा भी यहां डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। ये स्थिति भी तब है, जबकि यहां संभागीय रेल मंडल प्रबंधक का कार्यालय है तो रेलवे जीएम और अन्य अफसर भी भोपाल आते रहते हैं।इस हॉस्पिटल पर 16 हजार रेलकर्मियों, उनके परिजन, रिटायर्ड कर्मचारियों सहित करीब सवा लाख लोग आश्रित हैं। यहां आने वाले मरीजों को अनुबंधित हॉस्पिटलों में रैफर कर दिया जाता है। पश्चिम-मध्य रेल जोन के तहत आने वाले कोटा में भी मंडल स्तर का हॉस्पिटल है।110 बेड वाले कोटा के रेलवे हॉस्पिटल में संविदा सहित करीब 35 डॉक्टर हैं। भोपाल में 80 बेड वाले इस हॉस्पिटल में संविदा सहित कुल 23 डॉक्टर हैं। उनमें से भी तीन-चार अवकाश पर रहते हैं। दस विशेषज्ञ डॉक्टर होना चाहिए लेकिन मात्र चार हैं। यहां की प्रभारी डॉ. आशा चिमनिया ने कहा कि जल्द विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्तियां होगी।

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Poor health system in Patna Aiims

Poor Health System in All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), Patna even after 10 years, all departments could not be functioning

05.07.2022

पटना एम्स की स्थापना 2012 में हुई। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर की भी सुविधा बहाल हो गई। लेकिन लगभग 10 साल पूरे हो जाने के बाद भी यहां सभी विभाग कार्यरत नहीं हो पाए हैं। विशेषकर सुपर स्पेशियलिटी विभाग। रोलॉजी, हेमेटोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी का सुपर स्पेशियलिटी विभाग अबतक चालू नहीं हो पाया है। सभी विभागों की चिकित्सकीय सुविधाएं इतने बड़े अस्पताल में नहीं मिलने से राज्य के मरीजों में मायूसी व्याप्त है।मरीज आते हैं इलाज कराने, पर विभाग में सुविधा नहीं होने से उन्हें बैरंग लौट जाना पड़ता है और अन्यत्र इलाज कराना उनकी मजबूरी होती है। मरीज को लगता है कि एम्स में जो चिकित्सकीय सुविधा हैं वह विशेषज्ञता वाली है। इसी लालच में मरीज इलाज के लिए इंतजार करते हैं या इलाज के लिए यहां पहुंच जाते हैं। एम्स के हर कार्यरत विभागों के ओपीडी में मरीजों की भीड़ है। यदि इन चार विभागों में चिकित्सक होते यहां भी मरीज की भीड़ रहती है। एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में दो चिकित्सकों के ज्वाइन करने से हार्ट के मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा मिलने लगी है। एम्स की सेवा बीते 10 साल से राज्य के जनता मिल रही है। जबकि सुपर स्पेशियलिटी विभागों की सुविधा 2017 से मिलनी शुरू हुई है। पर अभी तक चार सुपर स्पेशियलिटी विभागों की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी है। बीच में न्यूरोलॉजी और हेमेटोलॉजी विभाग की सुविधा बहाल हुई थी। पर चिकित्सक एम्स छोड़कर दूसरे अस्पताल चले गए।इन सुपर स्पेशियलिटी विभागों में न्यूरोलॉजी, हेमेटोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग शामिल है। इन सुपर स्पेशियलिटी विभागों में चिकित्सक ही नहीं है। ये चारों विभाग आज की तारीख में महत्वपूर्ण विभाग हैं।इन विभागों में मरीजों की संख्या भी अधिक है। इंडोक्राइनोलॉजी विभाग में ब्लड शुगर , थायराइड आदि का इलाज होता है जबकि नेफ्रोलॉजी विभाग में किडनी के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। वहीं न्यूरोलॉजी में ब्रेन संबंधित और हेमेटोलॉजी विभाग में ब्लड कैंसर संबंधित बीमारियों का इलाज होता है। इन चारों में विभागों में हर अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक है।
कई डॉक्टरों ने ज्वाइन किया और कुछ दिन बाद चले गए
वैसे पटना एम्स में कई चिकित्सक ज्वाइन किए और कुछ दिन तक अपनी सेवा देने के बाद छोड़ कर अन्य जगह चले भी गए। यहां तो ट्रांसप्लांट करने वाले सर्जन भी ज्वाइन कर चुके थे। पर विभाग में ढांचागत सुविधाएं बहाल नहीं होने से छोड़कर चले गए।बताया जा रहा है कि चिकित्सकों की कमी की वजह से विभागों में चिकित्सकीय सुविधा बहाल नहीं हो सकी है। पटना एम्स की स्थिति यह है कि यहां चिकित्सकों के 305 पद स्वीकृत हैं जबकि यहां वर्तमान में सिर्फ 135 चिकित्सक की कार्यरत हैं। चिकित्सकों की भारी कमी है। इस बीच एम्स नए निदेशक ने पदभार संभाला लिया है। पुराने निदेशक का कार्यकाल खत्म होने के बाद देवघर एम्स के निदेशक को पटना एम्स का कार्यकारी निदेशक बनाया गया था।

निदेशक बोले-सुविधा जल्द
नए निदेशक डॉ. गोपाल कृष्ण पाल का कहना है कि नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही इन विभागों में फैकल्टी का सेलेक्शन का काम पूरा हो जाएगा। फैकल्टी की नियुक्ति होते ही इन चार विभागों की चिकित्सकीय सुविधा मरीजों को मिलने लगेगी। मंगलवार को फैकल्टी की नियुक्ति से संबंधित बैठक भी करेंगे। निदेशक ने कहा कि बाकी विभागों में फैकल्टी की कमी है। उसकी भी जल्द भरपाई होगी।

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Corona cases increases silently in rajasthan.

According to the report of Medical Health Department Rajasthan, the danger of corona is increasing silently in Rajasthan.

04.07.2022
राजस्थान में कोरोना का संक्रमण भले ही घातक न हो, लेकिन ये अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। पिछले महीने जून में राज्य मिले कुल केस मई के मुकाबले 28 फीसदी ज्यादा थे, जबकि डेथ केस भी 50 फीसदी बढ़े है। विशेषज्ञों की माने तो जुलाई के शुरूआती दिनों में जो ट्रेंड दिख रहा है, उसे देखकर लगता है कि जुलाई में संक्रमण और बढ़ने की आशंका है।मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट राजस्थान की रिपोर्ट देखे तो मई में राज्य में 2098 संक्रमित केस मिले थे, जबकि 31 दिन के अंदर केवल 5 मरीजों की मौत हुई थी। लेकिन जून में संक्रमित केसों की संख्या बढ़कर 2677 और डेथ केस 8 तक पहुंच गए। वहीं जुलाई महीने के शुरूआती 3 दिन की रिपोर्ट देखे तो अब तक कुल 328 केस मिल चुके है, जबकि 1 मरीज की अब तक डेथ हो चुकी है।पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में 106 नए मरीज मिले है, जबकि एक्टिव केस बढ़कर अब 948 हो गए है। वर्तमान में राज्य में औसत टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 2 फीसदी के करीब
जयपुर में सबसे ज्यादा केस
पिछले महीने जून में राजधानी जयपुर में सबसे ज्यादा केस मिले है। जयपुर में 30 दिन के अंदर 1136 मरीज मिले, जबकि बीकानेर राज्य में दूसरा जिला रहा जहां जयपुर के बाद सबसे ज्यादा 286 केस मिले है। इन दो जिलों के अलावा अलवर में 210, जोधपुर 233, अजमेर 172 और उदयपुर में 118 मरीज मिले।

ये 4 जिले रहे कोरोना मुक्त
राज्य में 33 में से 4 ऐसे जिले भी रहे जहां कोरोना का एक भी केस नहीं मिला। इसमें बूंदी, करौली, जैसलमेर और पाली शामिल है। इसके अलावा सवाई माधाेपुर, प्रतापगढ़, झुंझुनूं, डूंगरपुर, धौलपुर, भरतपुर और बाड़मेर ऐसे जिले रहे जहां कोरोना के कुल केस पिछले महीने 10 से भी कम रहे।

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Aim to connect more and more people for health insurance

Aim to connect 8.48 lakh families in Udaipur under Chief Minister Chiranjeevi Health Insurance Scheme

27.06.2022
मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत जिले में 8.48 परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य है। लेकिन अभी भी एक लाख 28 हजार से ज्यादा परिवार नहीं जुड़ पाए हैं। वंचितों की योजना का लाभ दिलाने के बार-बार निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने रणनीति बदली गई। अब एएनएम, नर्सेज और आशा सहयोगिनीया घर घर जाकर लोगों को चिरंजीवी योजना के लिए प्रेरित करेंगे। सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने बताया की आदेश के अनुसार चिरंजीवी योजना से वंचित परिवारों के रजिस्ट्रेशन के लिए शुक्रवार को आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत जिले की एएनएम आशा सहयोगिनिया घर घर जाएंगी और और लोगों को योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाने के बारे में पूछेंगी। इस योजना में पंजीकरण नहीं होने के कारण पूछा जाएगा और योजना के लाभ बताए जाएंगे।

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Prices of prostheses and accessories increased in KGMU

KGMU में कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण की कीमतें बढ़ीं


केजीएमयू में दिव्यांगों का दर्द बढ़ गया है। यहां कृत्रिम अंग व सहायक उपकरणों की कीमतों में पांच से 10 फीसदी का इजाफा हो गया है। नतीजतन अब दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंगों के एवज में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपकरणों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के बाजार मूल्य में वृद्धि हुई है। इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ी।

केजीएमयू के पीएमआर विभाग में कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण बनाए जाते हैं। प्रदेश भर से मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। डॉक्टरों की सलाह पर दिव्यांगों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण बनाए जाते हैं जो कि बाजार व निजी संस्थानों से काफी सस्ते हैं। उपकरणों को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की कीमतों में इजाफा हुआ। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने वर्ष 2013 के बाद कृत्रिम अंग व सहायक उपकरणों की कीमतों में इजाफा का फैसला किया है। इससे गरीब मरीजों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। कुछ उपकरणों में 100 से लेकर चार हजार रुपये तक का इजाफा किया गया है। घुटना, खास तरह के जूते, कृत्रिम हाथ आदि शामिल हैं।