Posts

NO data of doctors

Center says no data on doctors who died of covid

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) दो वर्षों में – 2020 से 2022 तक – जब महामारी ने भारत को तबाह कर दिया, कोविड -19 के कारण मरने वाले डॉक्टरों की संख्या पर सहमत होने में असमर्थ हैं।
जबकि राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि उनके पास कोविड के दौरान मरने वाले डॉक्टरों की संख्या का कोई डेटा नहीं है, IMA, चिकित्सकों के एक राष्ट्रीय संगठन, जिसमें 3 लाख से अधिक सदस्य हैं, ने कहा कि 1600 से अधिक डॉक्टरों की महामारी के दौरान मृत्यु हो गई।एक लिखित उत्तर में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार ने कहा, “पेशे से या अन्यथा कोविड -19 के कारण होने वाली मौतों पर अलग-अलग डेटा केंद्रीय रूप से नहीं रखा जाता है।”उन्होंने कहा कि 23 जुलाई तक देश में कोविड-19 (डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों सहित) के कारण कुल 5,25,997 मौतें हुई हैं।मंत्री मार्च 2020 से मरने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या पर एक लिखित सवाल का जवाब दे रहे थे।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Research on dementia

Research on amnesia dementia

डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति की न केवल याददाश्त कमजोर हो जाती है दिमाग की सामंजस्य बैठाने की क्षमता घटती है, जिससे मरीज को कई समस्याएं होने लगती हैं। लैंसेट जर्नल में प्रकाशित 24 से ज्यादा शोधों पर किए गए एनालिसिस में पता चला है कि यदि रोजाना के कामों में कुछ बदलाव किए जाएं तो इसके खतरे को 35% तक घटाया जा सकता है।

ऐसे कम करें डिमेंशिया का रिस्क
1. सुनने की क्षमता का सीधा संबंध: कम सुनाई देने के कारण व्यक्ति सामाजिक रूप से घुलने-मिलने में कतराने लगता है। ऐसे मेें दिमाग की समन्वय की क्षमता घटती है। नतीजा याददाश्त घटने लगती है।

2. ब्लड प्रेशर को रखें संतुलित: ब्लड प्रेशर में गड़बड़ी से दिल के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे फ्री रेडिकल्स बढ़ने लगते हैं। इससे तनाव व इंफ्लामेशन बढ़ता है, जो न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे मस्तिष्क की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

3. डायबिटीज को नियंत्रित करें: बढ़ी हुई डायबिटीज के नियंत्रित नहीं होने पर यह दिमाग में पहुंचने लगती है, जो कोशिकाओं को क्षति पहुंचाती है।

5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया के शिकार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो दुनिया में 5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं। इनमें से 60% मरीज लो या मिडिल इनकम देशों में रहते हैं। भूलने की बीमारी के ज्यादातर मरीज बुजुर्ग ही होते हैं। WHO के मुताबिक, साल 2030 तक मरीजों की संख्या बढ़कर 7.8 करोड़ हो जाएगी। वहीं, साल 2050 तक यह आंकड़ा 13.9 करोड़ पर पहुंच जाएगा।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Perfect use of ayushman’s incentive in hospital by doctors

Doctors told to upgrade hospitals with Ayushman’s incentive

29.07.2022
सरकारी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना की इंसेंटिव राशि के बंटवारे को लेकर मचे बवाल के बीच मेडिसिन विभाग के 12 डॉक्टरों ने कहा है कि कई जांचें, कई तरह की सुविधाएं अस्पताल में नहीं है। इस राशि से अस्पताल को अपग्रेड करना चाहिए।मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. वीपी पांडे, डॉ. शिवशंकर शर्मा, डॉ. संजय दुबे, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. महेंद्र चौरसिया, डॉ. भूपेंद्र सिंह चौहान, डॉ. प्रणय बाजपेयी, डॉ. पुनीत गोयल, डॉ. अंकित मेश्राम सहित 12 डॉक्टरों का कहना है कि इस राशि से अस्पताल को अपग्रेड करना चाहिए।अस्पताल में आज तक खुद का सीटी-एमआरआई जांच सेंटर स्थापित नहीं हो पाया है। थोड़े-थोड़े दिन में सोडियम, पोटेशियम की जांच से इनकार कर दिया जाता है। थायराइड की जांच नहीं हो पा रही है। पूछने पर बताया जाता है कि किट खत्म हो गई। क्रिएटिनिन, एबीजी जैसी सामान्य जांचें भी कई बार नहीं हो पाती हैं। मरीजों को बाहर भेजना पड़ रहा है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Free mobile van for better health

In Jaisalmer, the team of doctors will provide free village-to-village services from mobile vans.

29.07.2022
चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए मोबाइल हैल्थ वैन शुरू​​​​​​​राजीविका की ब्रांड एंबेसडर एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रूमा देवी की पहल से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क मेडिकल सेवाएं देने के लिए दुबई के एस्टर फाउंडेशन, ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन और रूमा देवी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय मोबाइल हेल्थ वैन का उद्घाटन कार्यक्रम इंद्रप्रस्थ रिसोर्ट में आयोजित हुआ।इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी ने हस्तशिल्पी महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि रूमा देवी फाउंडेशन और ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान द्वारा अलग-अलग सेक्टरों में बिना किसी भेदभाव से मानव कल्याण के लिए सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ जिले के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।उन्होंने कहा कि इस एस्टर मोबाइल हेल्थ वेन द्वारा गांव-गांव, ढाणी- ढाणी जाकर जो चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी, वह निश्चित रूप से ग्रामीणों के लिए वरदान साबित होगी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरेंद्र भाकर ने कहा कि डाॅ. रूमादेवी की इस सराहनीय पहल से आज बाड़मेर जिले को जो हेल्थ मोबाइल वैन मिल रही है, यह चिकित्सा विभाग के लिए भी खुशी की बात है। अध्यक्षता कर रहे कमांडेंट सेक्टर हेड क्वार्टर (बीएसएफ) देवेंद्र सिंह ने कहा कि सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए रोजी-रोटी के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए रूमा देवी फाउंडेशन द्वारा जो अनूठी गतिविधियां आयोजित की जा रही है। उसमें आप और हम सभी मिलकर सकारात्मक सोच के साथ सहयोग प्रदान कर इनका हौसला अफजाई करें। कार्यक्रम में एस्टर डीएम फाउंडेशन के सीएसआर हेड जलील पी.ए., ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन के सीईओ नौफल पीके ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

उद्घाटन से पहले 3 दिन लगाए मेगा शिविर:
रूमा देवी फाउंडेशन द्वारा इनोग्रेशन प्रोग्राम से पहले तीन दिन तक अलग-अलग गांवों में मेगा शिविर का आयोजन किया गया। इसमें दुबई, बेंगलुरु, कोच्चि के चिकित्सक टीमों जिसमें बाल रोग, स्त्री रोग विशेषज्ञ के स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा निशुल्क सेवाएं देकर पंचायत सनावड़ा, खेमपुरा, पोकरासर, मंगले की बेरी, बामणोर, कगाऊ, सोडियार, महाबार, दानजी की होदी, अंबेडकर कॉलोनी, राम नगर, बलदेव नगर के बारह सौ से महिलाओं को लाभान्वित किया।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Low cost technology of treatment

AIIMS Raipur and IIT Bhilai will jointly develop effective and low cost technology of treatment

29.07.2022

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई मिलकर इलाज की प्रभावी और कम लागत तकनीक विकसित करेंगे। इसके साथ ही IIT में नेत्र रोगियों और MRI के लिए विकसित की गई नई तकनीक को भी ट्रायल के लिए एम्स को प्रदान किया जाएगा। दोनों ने मिलकर अनुसंधान के लिए नए अवसर तलाशने के लिए MOU पर हस्ताक्षर किए हैं।एम्स के निदेशक डॉ. नितिन एम. नागरकर और IIT भिलाई के निदेशक प्रो. रजत मूना ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं। बताया गया कि IIT ने नेत्र रोगियों और एमआरआई की लागत कम करने के लिए लगातार शोध के बाद नई तकनीक और उपकरणों का विकास किया है। इसे ट्रायल के लिए एम्स को हस्तांरित किया जा सकता है।प्रो. नागरकर का कहना था कि दोनों संस्थानों के शिक्षक मिलकर संयुक्त अनुसंधान प्रारंभ कर सकते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में सदैव नई तकनीक की जरूरत रहती है जिसे IIT के इंजीनियर पूरा कर सकते हैं। इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है।IIT के निदेशक प्रो. रजत मूना ने बताया कि IIT में 10 से अधिक स्टार्टअप हैं जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के लिए अपनी तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान की है। इनमें नेत्रों की ज्योति को परखने के लिए एक नई मशीन भी बनाई गई है जो काफी कम लागत पर जांच कर सकती है। एमआरआई की लागत कम करने के लिए भी शोध किया गया है जिसका लाभ सभी वर्ग को मिल सकेगा।इस अवसर पर IIT भिलाई ने मेडिकल छात्रों के लिए नई तकनीक पर एक कोर्स भी शुरू करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थान और तकनीकी संस्थान के मध्य यह अपने तरह का पहला MOU है जो प्रदेश के लिए नई राह खोल सकता है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Quack doctor caught by faridabaad health department

In Faridabad, the health department caught a quack doctor

फर्जी डॉक्टर बनकर अवैध तरीके से गर्भपात कराने का धंधा करने वाले एक व्यक्ति को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। आरोप के खिलाफ केस भी दर्ज करा दिया है। उसके कब्जे से गर्भपात कराने वाली दवा किट भी बरामद हुई है। गया आरोपी की पहचान गांव खोरी जमालपुर धौज निवासी जुबैर के रूप में हुई है। वह दसवीं पास है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।जानकारी के अनुुसार सीएमओ डॉ विनय गुप्ता को सूचना मिली कि गांव खोरी जमालपुर निवासी जुबैर नामक व्यक्ति खुद को डॉक्टर बनकर अवैध गर्भपात का धंधा चला रहा है। इसके बदले महिलाओं से पांच हजार रुपए वसूल करता है। इससे महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान संकट में पड़ जाता है। सूचना पर सीएमओ ने डाॅ. रामनिवास, डाॅ. हरीश आर्य, डाॅ. स्वेता व डाॅ. कुलदीप की टीम बनाकर जांच के लिये भेजा। डाॅ. रामनिवास ने गुड्डी पत्नी रोहताश को नकली ग्राहक बनाया। टीम ने पांच-पांच सौ दस नोट पांच हजार रुपये नंबर नोट करके नकली ग्राहक को दिए और जुबेर के पास गर्भपात करवाने की बात करने के लिए भेजा। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव खोरी जमालपुर पहुंची। नकली ग्राहक के पति ने जुबेर को फोन कर गर्भपात करवाने की बात करी। जुबेर ने अपनी लोकेशन वाट्सएप की। नकली ग्राहक जुबेर से पाली सोहना रोड पर गांव सिरोही के पास मिले। जुबेर ने महिला से पांच सौ रुपये गर्भपात की दवाई के लिये मांगे और अपनी जेब से दवा की किट निकालकर महिला के पति को दे दिए। महिला के पति ने जैसे ही रूपए जुबेर को दिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसे दबोच लिया। उसके कब्जे से एमटीपी किट और ग्राहक द्वारा दिए गए पांच सौ रूपए बरामद किए। पूछताछ में जुबेर ने बताया कि वह दसवीं पास है। उसके पास डॉक्टरी की कोई डिग्री नहीं है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

New advisory

National Institute of Medical Sciences issued advisory

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थाओं को एडवाइजरी जारी करते हुए बताया गया है कि सभी को अपने मेडिकल कॉलेज व संस्था में दिए गए निर्देशानुसार और बताएं गई जगहों पर कैमरा लगवाना है

ATTACHED FILES

20220727062249 (1)

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Gender investigation gang caught by health department

Health Department Hisar caught gender investigation gang

28.07.2022
हरियाणा के हिसार जिले के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हांसी में लिंग जांच गिरोह का पर्दाफाश किया है। विभाग ने हांसी के दत्तरवाल अस्पताल पर छापा मारकर अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन और अन्य रिकॉर्ड जब्त कर लिया है। साथ ही डॉक्टर, स्टाफ नर्स और 2 महिला दलालों को गिरफ्तार भी किया गया है। गिरोह के खिलाफ कारवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस को शिकायत दी थी।गिरोह का खुलासा करने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम में डॉ. प्रभु दयाल, डॉ. कामिद मोंगा, अंकित, अजय शामिल हैं। टीम के सदस्य डॉ. कामिद मोंगा ने बताया कि 20 जुलाई को मुखबिर से सूचना मिली थी कि हांसी के दत्तरवाल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाकर लिंग जांच की जाती है। हमने अपने डिकॉय पेशेंट का अल्ट्रासाउंड 23 जुलाई को करवाया। तब डॉक्टर ने रिपोर्ट के बारे में नहीं बताया।

चिकित्सक ने कहा कि दलाल के माध्यम से रिपोर्ट पता करें। दलाल गीता और पूनम से उससे संपर्क किया तो दलाल ने कहा कि 15 दिन बाद फाइनल अल्ट्रासाउंड किया जाएगा, उस दिन रिपोर्ट बताई जाएगी। 40 हजार में सौदा तय किया गया। गीता जिंदल अस्पताल में कार्यरत है और पूनम ने GNM का कोर्स किया है। घर में रहती है और दत्तरवाल अस्पताल में आती जाती रहती है।

25 जुलाई को गीता ने पैसे मांगे और रिपोर्ट देने की बात कही। उस दिन हमारी टीम बाहर थी। हमने एक दो दिन और मांगे। बुधवार को हमें जिंदल अस्पताल के बाहर बुलाया गया कि गीता रिपोर्ट बता देगी। सुबह फोन नहीं उठाया। शाम 4 बजे फोन आया कि रिपोर्ट ले जाएं और पैसे दे जाएं। 5 बजे गीता आई और डिकॉय पेशेंट से पैसे लिए। टीम ने मौके पर गीता को पैसों सहित पकड़ लिया।

वहां से गीता को लेकर पूनम के घर गए। पूनम घर पर नहीं थी। बुलाने पर आई तो उसे पकड़ लिया। उसके बाद दोनों को लेकर हांसी के दतरवाल पहुंचे। डिकॉय पेशेंट ने पहचान लिया कि स्टाफ नर्स जसबीर और डॉक्टर उर्मिल दत्तरवाल ने अल्ट्रासाउंड किया था। मशीनें सील कर दी गईं। अस्पताल में लंबे समय से यह खेल चल रहा था। आरोपियों के खिलाफ PNDT एक्ट के तहत पुलिस को कार्रवाई के लिए एप्लीकेशन दी जा रही है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Standard of health department

Not a single government hospital in Muzaffarpur is up to the standard of health department

सदर अस्पताल समेत मुजफ्फरपुर जिले का एक भी सरकारी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के स्टैंडर्ड के अनुरूप नहीं है। यहां तक कायाकल्प योजना के तहत अनुशंसित मुरौल सीएचसी भी। जबकि, राज्यस्तरीय एसेसमेंट(मूल्यांकन) के लिए मुरौल सीएचसी को तैयार करने को लेकर बिल्डिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि पर लाखों रुपए खर्च किए गए। लेकिन, मुरौल सीएसची समेत जिले के किसी भी सीएचसी-पीएचसी में 24 घंटे जांच, ब्लड स्टोरेज यूनिट, बीपी जांच के लिए ऑपरेटर, वजन मशीन, प्राइवेसी, कॉर्डिएक मॉनिटर की सुविधा नहीं है।
शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सदर में भी 24 घंटे जांच की सुविधा नहीं है। पिछले वर्ष कायाकल्प योजना के तहत जिले से सदर अस्पताल के एमसीएच के एसेसमेंट की अनुशंसा की गई थी। लेकिन, सरकार की सूची से यह बाहर हाे गया। इस वर्ष मुराैल सीएचसी को कायाकल्प प्रमाणीकरण के लिए तैयार किया गया। इसके बाद सिविल सर्जन ने 12 मार्च काे राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी काे पत्र लिखकर कायाकल्प के तहत अस्पताल के एसेसमेंट की अनुशंसा की।वहीं, 27 मई काे डीएम प्रणव कुमार ने राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक काे पत्र लिखकर मुराैल पीएचसी का कायाकल्प याेजना के लिए एसेसमेंट कराने की अनुशंसा की। डीएम ने लिखा था कि तीन माह तक मुराैल पीएचसी काे मानक में लाने के लिए तैयार किया गया है। बावजूद इसके 26 जुलाई काे जब राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से कायाकल्प के तहत एसेंसमेंट कराने के लिए कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने जो सूची जारी की, उसमें मुजफ्फरपुर जिले का एक भी अस्पताल शामिल नहीं है।

इस बोर्ड के झांसे में न आएं : सिर्फ दिखावे के लिए हैं, सुविधाएं मयस्सर नहीं

केंद्रीय स्वास्थ्य कल्याण एवं परिवार मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई और संक्रमण रोकने के लिए किए गए प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए कायाकल्प योजना की शुरुआत की है। इसके तहत स्वच्छता, साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण के उच्च मानकों को हासिल करने वाले जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को उनके कार्यों के आधार पर पुरस्कार दिया जाता है। स्वास्थ्य सचिव या मिशन डायरेक्टर स्तर की कमेटी अस्पताल में सुविधाओं का एसेसमेंट करती है। प्रथम स्थान अस्पताल को 50 लाख का पुरस्कार दिया जाता है।
कायाकल्प याेजना के लिए सदर अस्पताल के एमसीएच और मुराैल सीएचसी काे तैयार किया गया है। इसके लिए तत्कालीन सिविल सर्जन और फिर डीएम की ओर से राज्यस्तरीय एसेसमेंट कराने के लिए अनुशंसा की गई थी। सरकार की जाे लिस्ट नहीं है, उसे अभी तक देखा नहीं है। अब फिर से दाेनाें अस्पतालाें में जाे भी मानक में कमियां हाेंगी, उसे पूरा कर एसेसमेंट के लिए अनुशंसा की जाएगी।
-डाॅ. यूसी शर्मा, सिविल सर्जन।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Blood buisness in patna

Red blood black business in Patna; page of entry register of blood center of niveda hospital missing

27.07.2022
बच्चों का खून निकालकर बेचने के मामले में ड्रग कंट्रोलर विभाग की टीम ने कंकड़बाग स्थित निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर से बरामद कागजात की जांच शुरू की है। अस्पताल के चेयरमैन ने मंगलवार को एक दिन का बाकी कागजात और ब्लड सेंटर के प्रभारी को बुलाने के लिए एक दिन का समय लिया है।यानी बुधवार को फिर टीम जांच करने के लिए निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर जाएगी। अस्पताल से जो कागजात मिले हैं फिलहाल उसकी जांच की जा रही है। ब्लड सेंटर से छह रजिस्टर मिले हैं। ब्लड इंट्री रजिस्टर के पेज भी बीच-बीच में फाड़कर हटाए गए हैं। रजिस्टर देखकर लगता है कि पेज हाल ही में फाड़ा गया है। इसकी पुष्टि ड्रग कंट्रोलर ने की है।

जिसके नाम से लाइसेंस वह नालंदा पीएचसी में पोस्टेड

बताया गया कि ब्लड सेंटर का लाइसेंस जिस डॉक्टर के नाम से है वह नालंदा में पीएचसी में पोस्टेड हैं। सोमवार को उन्हें कई बार फोन करके बुलाया गया पर वे मौजूद नहीं हो सके। अस्पताल के चेयरमैन ने उन्हें बुधवार को बुलाने की बात कही है। बताया गया कि अमूमन कोई बड़ी घटना पर दूसरे राज्यों से खून मंगाया जाता है।पर निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर कोलकाता के लाइफ केयर फाउंडेशन नामक ब्लड सेंटर से रेगुलर खून मंगाता था। सिर्फ 22 दिन के अंदर कोलकाता के ब्लड सेंटर से 533 यूनिट खून बैग समेत मंगाया गया है। इस बाबत अस्पताल ने कोलकाता के ब्लड सेंटर से करार भी किए हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि खून खरीदकर मंगाने का रिकार्ड तो है पर किसको दिया गया है इसका कोई रिकार्ड नहीं है।

खून को लेकर रिकार्ड ठीक से मेंटेन नहीं किया गया
सोमवार को जब निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर में ड्रग विभाग की पहुंची तो सभी स्टाफ और प्रभारी गायब थे। वैसे आरोपी संतोष कुमार के घर के फ्रिज से 45 यूनिट खून बरामद किया गया था। वहीं से निवेदा अस्पताल के रैपर और लेटर पैड बरामद हुआ था।सोमवार को ड्रग इंस्पेक्टरों को जांच के दौरान पता चला कि निवेदा अस्पताल के ब्लड बैंक में खून का लेन-देन का रिकार्ड ठीक से मेनटेन नहीं किया गया है। हालांकि बैंक में जितने भी इससे संबंधित कागजात की कॉपी ली गई है। निवेदा अस्पताल के ब्लड सेंटर ने कोलकाता के एक ब्लड सेंटर से एक जुलाई से 22 जुलाई तक 533 यूनिट खून मंगाया गया है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓