quarantine leave

प्रश्न:- क्वारन्टाइन लीव क्या है और ये किसको देय होगी ?

राजस्थान सरकार के वित विभाग के आदेश क्रमांक -No.FJ(1)FD/Rules/2012 दिनांक 12 may 2020 के तहत राजकीय कार्मिकों को कोविड-19 संक्रमित होने पर क्वारन्टाइन लीव के रूप मे विशेष आकस्मिक अवकाश दिया है। ये अवकाश निम्न रूप मे प्रदान किया जाता है और सर्विस बुक मे भी इंद्राज किया जाएगा।

1️⃣कंडीशन 👉🏼कोई राजकीय सेवक जिसकी सेवा 3 साल से कम हुई हो।

इस स्थिति मे राजकीय सेवक के खुद या अन्य पारिवारिक जन के कोविड 19 संक्रमित होने पर (कार्मिक को होम क्वारन्टाइन किया गया हो) तो उसे सेवा@
नियमो के अनुसार क्वारन्टाइन लीव देय होगा।

(1) सरकारी प्रावधानों के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों को क्वारंटाइन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है जो COVID – 19 के कारण चिकित्सा द्वारा क्वारन्टाइन किया गया है। क्वारंटाइन अवकाश भी ऐसे सरकारी कर्मचारी को स्वीकृत किया जाएगा जिसने तीन वर्ष की सेवा पूरी नहीं की है और वह / वह COVID – 19 से संक्रमित है या इसके कारण चिकित्सा अधिकारियों द्वारा क्वारंटाइन है।क्वारंटाइन को उनके द्वारा अनुशंसित अवधि के लिए सम्बन्धित सीएमएचओ / प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज की सिफारिश पर अनुमोदित किया गया है।

2️⃣कंडीशन कोई राजकीय कर्मचारी जिनकी सेवा अवधि 3 साल से ज्यादा हो गयी हो।

👉🏼कार्मिक के परिवार मे कोई सदस्य कोविड 19 पॉजिटिव पाया जाता है और कार्मिक को होम क्वारन्टाइन किया गया हो (सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र) तो उसको क्वारन्टाइन लीव देय होगी !

👉🏼कार्मिक स्वय कोविड 19 पॉजिटिव हो (लेकिन वो कोविड ड्यूटी पर ना हो) तो उनको क्वारन्टाइन लीव देय नही होगी उनको चिकित्सा अवकाश या pl अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।

👉🏼कार्मिक स्वय कोविड पॉजिटिव पाया गया हो लेकिन इस अवधि मे कोविड 19 ड्यूटी के दौरान ही कोविड पॉजिटिव हुआ हो तो कार्मिक को क्वारन्टाइन लीव देय होगी।

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All govt doctors of rajasthan will get due 7cpc arrears

14.09.2019 JAIPUR

राज्य से सेवारत चिकित्सकों को छठे पे कमिशन से सातवें पे कमिशन में जाने पर 01 जनवरी 2017 से 30 सितम्बर 2017 तक का सेलरी डिफ़रेंस, एरियर के रूप में तीन किश्तों में मिलना था | बाबुओं द्वारा इसकी गणना अपने हिसाब से उलट पलट की गई जिससे काफी चिकित्सकों को आधे एरियर का ही भुगतान हुआ, पीड़ित चिकित्सक दबी जुबान इसकी चर्चा भी कर रहे थे लेकिन बाबूराज के आगे हार मान चुके थे | चिकित्सक शिक्षक इन मामलों में ज्यादा होशियार पड़ते हैं सो उन्होंने चुपचाप इसका आर्डर निकलवा लिया, यह आर्डर सरकारी डॉक्टरों के हाथ लग गया तो वे भी अपने बाबुओं के पास ऑर्डर लेकर पहुंचे तो बाबुओं ने इस आर्डर को केवल ‘चिकित्सक शिक्षकों’ के लिए बताते हुए ख़ारिज कर दिया | पीड़ित चिकित्सक मुद्दे को व्हाट्सएप पर लहराते रहे अंततः मुद्दा अरिसदा के पास लेकर गये जहाँ डॉ. अजय चौधरी ने त्वरित गति से एसीएस मेडिकल & हेल्थ रोहित कुमार सिंह जी से समय लिया और जाकर पीड़ा बयान की तो सर ने वहीँ से ‘निदेशालय कोष एवं लेखा’ वालों को कॉल करके उक्त आदेश को समस्त चिकित्सकों के लिए निकालने को कहा और एक दिन में ही आदेश निकल गया | (पूर्व एवं नवीन आदेश की प्रति संलग्न है)

चिकित्सकों में ख़ुशी की लहर है, उदाहरण के तौर पर वर्ष 2011 जोइनिंग वालों का एरियर करीब 150000/- रुपये बन रहा था जो कट-पिट कर एक लाख से ऊपर मिलना था लेकिन दिया गया मात्र पचास हजार या साठ हजार | चिकित्सकों ने अरिसदा अध्यक्ष का आभार जताया है | डॉ. चौधरी ने पूरा श्रेय एसीएस मेडिकल हेल्थ को दिया है जिनके सहयोग से यह काम इतनी जल्दी हो पाया | सर्वविदित है की एसीएस श्री रोहित कुमार सिंह, चिकित्सकों की पीड़ा को सुनते हैं और त्वरित निर्णय लेते हैं |
हालाँकि इस आदेश के बाद बाबु समुदाय तनाव में हैं क्यूंकि उन्हें वापस से जोड़ तोड़ करनी पड़ेगी, हिसाब मिलाना पड़ेगा |

Tip : यह एरियर वहीँ से मिलेगा, जहाँ से पहले मिला था, ट्रांसफर नहीं हुआ है तो कोई लफड़ा नहीं, ट्रांसफर हुआ है तो कुछ वक़्त के लिए पे-मैनेजर आईडी वापस वहां ट्रांसफर की जाएगी | अगर नया बाबु राजी है तो बिना आईडी भेजे पूरानी जगह से शीट मंगवाकर यहीं करवा लो |

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कितनी सेलरी बढ़ेगी DACP में प्रमोशन के बाद ? चौंक जायेंगे आप जानकर !

राज्य सरकार चिकित्सकों को Dynamic Assured Career Progression (DACP) के तहत समयबद्ध पदोन्नति देती हैं, छठे पे कमीशन में यह पदोन्नति 5400, 6600,7600 etc. pay grade के रूप में दी जाती थी लेकिन सातवें पे कमीशन में यह pay band levels के रूप में दी जाती है |
एक Government Doctor की DACP के बाद उसकी बेसिक पे कितनी हो जायेगी ? यह एक सामान्य सवाल है !
आप भी जानिये कि प्रमोशन बाद कितनी होगी बेसिक और कुछ वृद्धि क्या होगी ? हालाँकि छठे पे कमिशन के मुकाबले सातवें में प्रमोशन में ठेंगा ही मिलता है, जानकर चौंक जायेंगे आप |

DACP Promotion illustration ;

Suppose Basic Pay on 1 April 2018 is – 69000 /-

One bonus promotional increment – 69000 to 71100 /-
Pay Band level shifting from L-14 (5400) to L-16 (6600)

Basic pay shifting : Just NEXT to promotional Basic pay – Next to 71100 is 71400 /-
Basic after DACP – 71400 /-

Gains

Raised basic = 71400-69000 = 2400/-
Dearness Allowance (Approx. @10%) = 240/-
NPA (If availing @ 20%) = 480/-
HRA (If availing @ 8%) = 192 /-
Gross gain = 2400+240+480+192 = 3312 /-
Net gain (Deduct income tax @ 30%, NPS @ 10%) = 3312-40% = 1987 /- per month

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खुश खबर : NPA है ‘बेसिक पे’ और इसे जोड़ा जायेगा PL सरेंडर और रिटायर्मेंट बेनिफिट में

पिछले कुछ दिनों से चल रही गफलत का हुआ पटाक्षेप और Non Practicing Allowance को बेसिक पे माना गया है, यानि एनपीए को सभी अलाउंसेज की गणना में जोड़ा जायेगा, PL सरेंडर और रिटायर्मेंट की 300 PL के पैसों के नकद भुगतान में इसे मूल वेतन मानते हुए गणना की जाएगी |
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एक मामले में फाइनेंस विभाग ने चिकित्सकों की जिन्दगी झालावाड़ करने की कोशिश की थी लेकिन मौके पर ही मेडिकल टीचर्स ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराया जिससे आर्डर रिवर्ट किया गया |

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सरकारी डॉक्टरों को बुढापे में फटका

राजस्थान के सरकारी डॉक्टरों को वित्त विभाग ने जोर का झटका हौले से दिया है |
सरकारी कर्मचारी एक वर्ष में मिलने वाले कुल उपार्जित अवकाशों में से आधे आवकाश समर्पित (surrender) करके उनका पैसा नकद ले सकते हैं –
सरेंडर के बदले में मिलने वाला पैसा = (15 Days Basic Pay + 15 Days NPA) * DA

साथ ही रिटायर्मेंट के समय 300 PL तक का पैसा नकद ले सकते हैं |

अभी तक यह पैसा मिलता रहा है लेकिन सातवाँ वेतनमान लागू करते ही, वित्त विभाग ने एक गेम कर दिया और NPA को बेसिक पे मानना बंद कर दिया और कहा गया कि DA और CCA के लिए ही NPA को बेसिक माना जाएगा बाकी किसी के लिए भी नहीं यानी समर्पित अवकाश के लिए NPA को बेसिक में नहीं माना जायेगा |

कितना फटका लगा ?

NPA 20% मूल बेसिक का मिलता है और इस पर DA अलग से मिलता है, यानि कोई अगर आज रिटायर हो रहा है तो उसे अपनी 300 PL पर DA का फटका मिलाकर करीब 30% फटका लगेगा जो कि वक़्त के साथ और बढेगा |

रिटायर्मेंट के समय बेसिक = अगर एक लाख पचास हजार मासिक हो तो 30 दिन फटका 30% = करीब पचास हजार
300 दिन की PL का फटका = X10 = पांच लाख रुपये का फटका :/

पांच लाख का तो रिटायर्मेंट पर और हर साल पंद्रह सरेंडर का फटका यानि कुल दस लाख से पार 🙁

Update – खुश खबर : NPA है ‘बेसिक पे’ और इसे जोड़ा जायेगा PL सरेंडर और रिटायर्मेंट बेनिफिट में :

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पीएल सरेंडर में गफलत से डॉक्टर तनाव में

बाबूराज से परेशान सरकारी डॉक्टर की राह में सबसे ज्यादा रोड़े अटकाता है फाइनेंस डिपार्टमेंट, फाइनेंस वालों कि बाकी सब विभागों पर मेहरबानी रहती है लेकिन डॉक्टरों का कोई मसला होता है तो उसे जरूर अटकाया जाता है चाहे वो कितना भी मामूली मसला हो | कई बार कई दिनों तक इनके हाथ कोई मसला नहीं लगता तो ये बैठकर सोचते होंगे कि कैसे डॉक्टरों को दर्द दिया जाए, सो इस बार ये लेके आये हैं |

A non practice allowance (NPA) is a special allowance given to doctors employed by the central government (of India) and certain State governments. Reason is be to restrict private practice for government doctors. A government hospital (in fact all hospitals) require round the clock care and more importantly have no definable work hours. In Rajasthan state this allowance is optional to choose.

राजस्थान सरकार के चिकित्सक को प्रति वर्ष 30 Privileged Leave/Earned Leave मिलती हैं जिनमें से पंद्रह को सरेंडर करके बदले में वो पैसा प्राप्त कर सकता है |
सरेंडर के बदले में मिलने वाला पैसा = (15 Days Basic Pay + 15 Days NPA) * DA

Example – 

अभी एक बड़ा लोचा सामने आया है जिसमें कहा जा रहा है कि लीव सरेंडर में केवल बेसिक और उसका DA मिलेगा, NPA और उसका DA नहीं मिलेगा, यानि बड़ा फटका | कारण वही फाइनेंस वाले, फिर से उड़ता तीर लेके आये हैं | वो भी एक आदेश के आधार पर |

नियम क्या कहते हैं ?

एनपीए को हमेशा से मूल वेतन माना गया है – Ministry of Health & Family Welfare has clarified vide their O.M. no. A45012/11/97-CHS.V dated 7-4-98 that the Non-Practising Allowance shall count as ‘pay’ for all service benefits.

लेकिन राजस्थान के फाइनेंस विभाग ने चुपके से एक लाइन घुसेड़ कर गेम कर दिया –

The amount of Non-Clinical Allowance / Non-Practicing Allowance shall be treated as “Pay” for the purpose of admissibility of Dearness Allowance and Compensatory (City) Allowance only.

Non-Clinical and Non-Practicing Allowance to Medical Officers F.6(8)FD/Rules/2017 30/10/2017

निश्चित तौर पर इन रोज रोज के फटकों से प्रदेश का सरकारी चिकित्सक आहत है, कभी नए डॉक्टरों को फटका तो कभी DACP में अडंगा |

पुरजोर विरोध ही अंतिम उपाय है, या फिर कोर्ट जाया जा सकता है| जिंदाबाद |

Update – खुश खबर : NPA है ‘बेसिक पे’ और इसे जोड़ा जायेगा PL सरेंडर और रिटायर्मेंट बेनिफिट में :

Detailed information and option forms.

Detailed information and calculations.

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जहर खरीदने के लिए पैसे नहीं, कैसे दूं वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति ?

जहर खरीदने के लिए पैसे नहीं, कैसे दूं वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति…. ये शब्द किसी आम इंसान के नहीं बल्कि एक चिकित्सा अधिकारी के हैं। जो जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति को लेकर आर्थिक समस्या का हवाला देते है।….जी हां जालौर जिले के करडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक ने एक पत्र के माध्यम से सरकार को यह बात बताइ कि उन्हें पिछले कई महीनों से नहीं मिल रही तनख्वाह ।  जालौर जिले में रानीवाड़ा और भीनमाल ब्लॉक के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे में कार्यरत कर्मचारियों एवं चिकित्सकों को वेतन समय पर नहीं मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि करड़ा में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी धनंजय मीणा ने सरकार को पत्र लिखकर अवांछनीय कदम उठाने की चेतावनी दे डाली… मामला जालौर जिले के करडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है जहां के चिकित्सक ने पिछले कई महीने से वेतन नहीं मिलने का हवाला देते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जालौर को पत्र लिखते हुए बताया कि वह जिला मुख्यालय पर होने वाले कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकते इसका कारण आर्थिक परेशानी बताया एवं अपने खाते का बैलेंस एक रूपया 77 पैसे बता रहे हैं और यह भी कह रहे हैं ।साथ में इतने पैसे से जहर भी नहीं खरीदा जा सकता चिकित्सा अधिकारी ने प्रतिलिपि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम भी भेजा है। मामले को लेकर रानीवाड़ा के ब्लॉक सीएमएचओ ने बजट का हवाला देते हुए पत्र का जवाब भी दिया है देखा जाए तो वेतन नहीं मिलने के हालात करडा सीएचसी सहित रानीवाड़ा के व भीनमाल ब्लॉक के अधिकतर चिकित्सकों का वेतन पिछले कई महीने से देय नहीं हो रहा है ऐसे में इन कर्मचारियों एवं अधिकारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भीनमाल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धुम्बडिया के कर्मचारियों व अधिकारियों के भी ये ही हालात हैं जहां पिछले 3 महीने से उनको वेतन नहीं मिल रहा कर्मचारियों का कहना है कि जब भी भीनमाल ब्लॉक कार्यालय में वेतन संबंधी मांग की जाती है तो बजट का हवाला देकर टरका दिया जाता है… ऐसे ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि इन विकट आर्थिक परिस्थितियों से गुज़र रहे डॉक्टरों की माँग को लेकर सरकार कितनी गंभीर होगी और कितने दिनों में इनको सैलरी मिल पाएंगी ये आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी ….! डॉक्टर धनंजय मीणा ने बताया कि उसको सैलरी नहीं मिलने की वजह से कई प्रकार की घरेलु परेशानीयों का सामन करना पड़ रहा है। डॉक्टर ने बताया कि पैसों के अभाव में राशन के सामान के लिए भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है… डॉक्टर ने बताया कि मेरे पर्सनल लोन की किस्त भी ओवरडूयू हो चुकी है.. ऐसे में अब भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.. उन्होने बताया कि मैं घर से 500 किलोमीटर दूरी पर यहाँ पर बैठा हूँ ऐसे में मुझे सैलरी नहीं मिलेगी तो मैं खाना कैसे खाऊँगा…. डॉक्टर ने बताया कि उसके साथ साथ उसके अस्पताल में कार्यरत क़रीब स्टाफ़ भी पिछले दो महीने से सैलरी नहीं बन रही है जिसके चलते भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह की गंभीर पीड़ा अगर सोशल मीडिया पर वायरल होती है तो ज़ाहिर सी बात है कि विभाग के आलाधिकारियों पर सवाल खड़े होना लाज़मी है… ।

# डॉ. धनंजय मीणा, कॉलेज के ज़माने से ही बेबाक और दबंग स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, ये जयपुर के सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस हैं |

हम सब अधिकारियों और कर्मचारियों के हक की लड़ाई है ये कोई व्यक्तिगत दुश्मनी या बैर नही है ।हमारी लड़ाई राज से है अधिकारी और राज के प्रितिनिधि से है अतः इसे कोई व्यक्तिगत न ले।
जब पुलिस में वेतन महीने की अंतिम तारीख को मिल जाता है तो हमको क्यों नही क्या राज्य को हमारी जरूरत का पता नही है
हम भी आपातकालीन सेवा में है तो हमको सुविधा भी तो हो ,ओर कुछ नही तो वेतन तो समय पर मिले।
अगर सरकार के पास पैसा नही है तो फिर पुलिस और सेक्रेतिरेट में ओर मंत्रालयों में वेतन समय पर क्यों।
ऐसा नियम क्यों नही की जिलाधिकारी का वेतन जिले में प्रत्येक कर्मचारी का वेतन मिलने के बाद मिलेगा। ये ही मांग हैं कि वेतन समय पर मिले।
एकता सदा विजेयता। जय हिंद जय संगठन।।।।।।।।।सभी से सहयोग की आशा में।।।।

आपका
डॉ धनंजय मीणा 

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On time salary is right of employee : High Court

डॉ. दीपक शर्मा का रिट पेटीशन पर राजस्थान हाई कोर्ट ने डिसीजन दिया कि प्रार्थी को उसकी बकाया सेलरी निर्धारित दिवस तक देय हो अथवा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सचिव खुद कोर्ट में उपस्थित हों | तबादले के बाद प्रार्थी को नौ महीने तक तनख्वाह नहीं दी गयी तो पहले तो उन्होंने सभी स्तरों पर संपर्क किया लेकिन कोई समाधान नहीं होने पर मजबूरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मिला त्वरित न्याय | यह फैसला बना नजीर | निर्धारित अवधि में सेलरी नहीं दिये जाने पर DDO को जेब से भरना पड़ सकता है उस राशी का ब्याज |

संलग्न – हाईकोर्ट का आदेश

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यात्रा और दैनिक भत्ते के लिए कैसे करें ऑनलाइन आवेदन ?

अगर किसी भी सरकारी कर्मचारी ने सरकारी कार्य हेतु यात्रा की है तो वो यात्रा किराए भत्ते और दैनिक खर्च भत्ते का हक़दार होता है |
राज्य सरकार ने अब व्यवस्था की है की उक्त भत्तों हेतु आवेदन ऑनलाइन किया जाए क्यूंकि पहले के ऑफलाइन आवेदनों में भयंकर धांधली और लेटलतीफी होती थी |
आवेदन का तरीका थोडा पेचीदा है लेकिन हमने बहुत ही सरल तरीके से समझाया है, इसे देखने के बाद आप कुछ ही मिनटों में आवेदन कर देंगें |
धन्यवाद.. हमारा विडियो देखें, लाइक करें 🙂

यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता क्या है ? कितना है ? जानने के लिए –

डीएसीपी के इंतजार में पथरा रही आँखें

राजस्थान के युवा सरकारी डॉक्टरों में सबसे ज्यादा की जोइनिंग दिसम्बर 2011 के आस पास की है, इन डॉक्टरों का पहला प्रोमोशन छह साल बाद होना होता है, यानि दिसंबर 2017 में | अरिसदा के लम्बे संघर्ष के बाद समझौता हुआ की हर वर्ष की 1 अप्रेल को उस दिन तक के बकाया सभी प्रोमोशन की डीएसीपी लिस्ट जारी कर दी जाएगी, इस समझौता से हर चेहरा खिला हुआ था, अप्रेल बीते जमाना हो चुका, पर अभी तक लिस्ट की कोई सुचना नहीं हैं, बीच में कई बार सीनियरटी लिस्ट जरूर डाली गयी हैं, लेकिन उनमें भी बेजा खामियां हैं | अप्रेल-मई में तो इन लाभार्थियों ने भाग दौड़ भी मचाई, वाट्सएप पर भी चर्चाएँ चली पर अब आस धूमिल हो चुकी हैं, लगता था कि नयी सरकार ही सुध लेगी, पर वे भी बेवफा ही निकले | दबी जुबान कुछ डॉक्टर समझौते के सामर्थ्य पर शक कर रहे हैं तो कुछ निदेशालय के बाबूराज को कोस रहे हैं |