Rajasthan state allows court evidence via virtual conference. Just send a email to that court and get vc slot.
doctor got notice even after proper duty
मंगलवार को आदर्श नगर, केकड़ी निवासी भंवरलाल जैन की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन ने शाम 5 बजकर 11 मिनट पर मृत्यु घोषित करते हुए पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए पुलिस और संबंधित चिकित्सक को 5.15 बजे सूचना भिजवा दी। सूचना पर तुरंत सदर थाना पुलिस के हैड कान्स्टेबल सम्पतराज मीणा एवं मेडिकल जूरिस्ट डॉ. रोहित मीणा अस्पताल पहुंच गए। पुलिस के क्षेत्राधिकार का मामला उलझा होने के कारण डॉ. रोहित मीणा को पंचनामा नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पुलिस से पंचनामा मिलने के बाद ही शुरु की जा सकती है। आख़िरकार जब तक पंचनामा प्राप्त हुआ तब तक सूर्यास्त हो चुका था। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करना नियम विरुद्ध है। हालाँकि केन्द्र सरकार ने सुसज्जित अस्पतालों में रात्रिकालीन पोस्टमॉर्टेम की अनुमति दी है लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया है। जब चिकित्सक ने नियमानुसार पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया तो परिजन भड़क गए और डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया। परिजनों उनका कहना था कि सूर्यास्त में काफी समय शेष था, इसके बावजूद चिकित्सक ने जान बूझकर देरी की। सूचना पर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. गणपतराज पुरी भी अस्पताल पहुंच गए तथा चिकित्सक से अँधेरे में पोस्टमार्टम करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सूर्यास्त का हवाला देते हुए पोस्टमार्टम से इंकार कर दिया। इस दौरान चिकित्सकों व परिजन के मध्य नोकझोक भी हुई। इस संबंध में मृतक भंवरलाल जैन के पुत्र अभिषेक जैन ने उपखण्ड अधिकारी विकास पंचोली को ज्ञापन सौंप कर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की । इधर क्षेत्राधिकार के मामले में पुलिस का कहना रहा कि कोहड़ा के समीप हादसे की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस अस्पताल पहुंच गई तथा आवश्यक कार्रवाई शुरु कर दी थी लेकिन बाद में पता चला कि हादसा केकड़ी शहर थाना पुलिस के इलाके में हुआ है। इसके बाद शहर थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची तब तक सूर्यास्त हो गया।परिजनों ने हंगामा किया और पीएमओ को शिकायत दी जिस पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए अस्पताल प्रशासन ने संबंधित चिकित्सक को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए है। वहीं संबंधित चिकित्सक ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
जिम्मेदारों का कहना है :
सड़क हादसे में मृत भंवरलाल जैन के पुत्र अभिषेक जैन ने ज्ञापन दिया है। इस संबंध में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। विकास पंचोली, उपखण्ड अधिकारी, केकड़ी
आमजन से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता रखनी पड़ती है। सूचना मिलने पर मैं खुद अस्पताल गया था तथा परिजन से बात भी की थी। पुलिस कार्रवाई के कारण देरी हुई तथा सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम नहीं हो सकता है, ये दोनों बात सही है। लेकिन चिकित्सक का बातचीत करने का तरीका सही नहीं था। नोटिस देकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए है। डॉ. गणपतराज पुरी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, राजकीय जिला चिकित्सालय, केकड़ी
सड़क हादसे में मृत्यु की सूचना मिलते ही तुरंत अस्पताल पहुंच गया था। उस समय सूर्यास्त नहीं हुआ था। लेकिन पुलिस के क्षेत्राधिकार का मामला अटका होने के कारण काफी देर तक उन्हें पंचनामा नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पुलिस से पंचनामा मिलने के बाद ही शुरु की जा सकती है। आख़िरकार जब तक पंचनामा प्राप्त हुआ तब तक सूर्यास्त हो चुका था। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करना नियम विरुद्ध है। वैसे भी सरकार ने उनकी नियुक्ति पोस्टमार्टम के लिए ही की है, ऐसे में पोस्टमार्टम के लिए मना करने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। दबाव में आकर नियम विरुद्ध कार्य करना सही नहीं है तथा भविष्य में भी वे किसी के दबाव में आकर नियमों के विपरित कार्य नहीं करेंगे। डॉ. रोहित मीणा, मेडिको लीगल ऑफिसर, राजकीय जिला चिकित्सालय, केकड़ी
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महिला रेप विक्टिम की मेडिकल जांच नहीं कर सकते पुरुष चिकित्सक
09.09.2019
राजस्थान : महिला रेप विक्टिम की मेडिकल जांच कौन चिकित्सक करेगा और कौन नहीं, इसके लिए उहापोह की स्थिति बनी हुई थी | कई बार पीडितायें भी पुरुष चिकित्सकों से चिकित्सकीय परिक्षण करवाने में असहज महसूस करती थी | ऐसे में नागौर जिला अस्पताल के फोरेंसिक एक्सपर्ट, डॉ. महावीर चोयल ने इस विषय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से इस विषय में मार्गदर्शन माँगा तब विभाग ने यह निर्देश दिए हैं कि “महिला रेप विक्टिम्स की मेडिकल जांच केवल महिला चिकित्सकों द्वारा ही की जावे” |
डॉ. चोयल द्वारा माँगा गया मार्गदर्शन और विभाग के निर्देश संलग्न है |
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सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों को सरकार देगी इनाम
सड़क दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने में दुर्घटना के समय वहां उपस्थित व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, अगर वे समय पर पीड़ित को अस्पताल पहुंचा दें तो उसकी जान बचने के आसार बढ़ जाते हैं, एवं नुकसान भी कम होता है | लेकिन भूतकाल में सहायता करने वालों से ही उलटे सवाल किये जाने लगे, क़ानूनी प्रक्रिया में उलझाया जाने लगा तो लोग आपातकाल में सहायता देने से कतराने लगे |
इसके बचाव हेतु सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार ने दुर्घटना पीड़ितों कि मदद करने वाले नेक आदमियों (Good Samaritan) को प्रोत्साहित करने के लिए उनसे अस्पताल प्रशासन और पुलिस द्वारा अनावश्यक सवाल पूछे जाने से रोकने कि व्यवस्था की है, मदद करने वाले को पुलिस के लफड़ों में नहीं उलझना पड़ेगा, ना ही कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ेंगे |
साथ ही अस्पताल प्रशासन की तरफ से उस नेक बन्दे को “गुड सेमेरिटन प्रोत्साहन पत्र” एक सर्टिफिकेट के रूप में जारी किया जायेगा |

इसके साथ ही कई अन्य अच्छी व्यवस्थाएं भी की हैं जिनकी जानकारी संलग्न है –
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“IT’S A MURDER, NOT SUICIDE”, FAMILY OF DECEASED DR. AASTHA MUNJAL CRIES !
दिल्ली के महाराजा अग्रसेन अस्पताल ड्यूटी रूम में संदेहास्पद परिस्थिति में मृत पाई गई डॉ. आस्था मुंजाल के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर चिकित्सक की हत्या का आरोप लगाया है, परिजनों का कहना है कि आस्था ने यहां 5 महीने पहले ही नौकरी ज्वाइन की थी और इस अंतराल में उन्होंने बार-बार अस्पताल में हो रही गलत प्रैक्टिसेज के बारे में आवाज उठाई तथा हाल ही में उन्होंने अस्पताल में कार्यरत सभी चिकित्सकों के स्वाइन फ्लू वैक्सीन लगवाए जाने की मांग की थी इस पर अस्पताल ने कहा था कि बाहर किसी सरकारी अस्पताल से वैक्सीनेशन करवा लीजिए ।
अस्पताल प्रबंधन और पुलिस का मानना है कि यह एक सुसाइड है जबकि परिजनों रिश्तेदारों और दोस्तों के अनुसार यह हत्या है क्योंकि कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है, मृतक के पिता आरके मुंजाल का कहना है कि वह अपने सीनियरों से टकराव के कारण यहां नौकरी नहीं करना चाहती थी ।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डॉक्टर आस्था मुंजाल ने खुद को 10 मिलीलीटर वाला प्रोपोफॉल का इंजेक्शन लगाया था इस पर विश्वास करना मुश्किल है क्योंकि 5 मिलीलीटर से ही बेहोशी आ जाती है जबकि मृतक के पास से तीन खाली बोतलें बरामद हुई है, अतः परिजनों का मान कि इतनी जल्दी तीन इंजेक्शन नहीं दिए जा सकते, हॉस्पिटल प्रबंधन को बॉडी सुबह 4:50 पर मिली जबकि उन्होंने घर वालों को 6:50 पर बताया, काम में ली गई दवाई हॉस्पिटल की दवा नहीं थी तो क्यों डॉक्टर मुंजाल बाहर से दवा लाई होगी ?
सीसीटीवी फुटेज देखने पर पता लगता है कि उसके कमरे में घुसने के बाद से ही कमरे की लाइट बंद थी तो अंधेरे में कैसे वो खुद को इंजेक्शन लगा सकती है ?
गेट की सांकल भी अंदर से टूटा हुआ था, घरवालों का कहना है कि जब अस्पताल प्रबंधन के पास कमरे की दूसरी चाबी थी तो उन्होंने क्यों कमरे का दरवाजा तोड़ा और घरवालों ने जब वहां के सुपरवाइजर से इस बारे में जानकारी मांगी तो वह भाग खड़ा हुआ । पूछताछ में यह भी सामने आया है कि रात को 12:30 के आसपास डॉक्टरों की आवाजाही उस इलाके में काफी बढ़ी थी ।
डॉक्टर मुंजाल की बाहों पर चोट के निशान है ऐसा लगता है जैसे इंजेक्शन लगाते समय किसी ने उसे पकड़ रखा हो, स्टाफ की माने तो वह ड्यूटी रूम में सोने गई थी और सुबह उसका शव भी सोती हुई अवस्था में ही मिला यानी किसी और ने इंजेक्शन लगाया होगा, उसके मुंह पर कुछ झाग भी लगे हुए थे जो कि प्रोपूफोल इंजेक्शन से नहीं पैदा होते हैं ।
बहुत से ऐसे सवाल हैं जिनका कोई जवाब नहीं है और फैमिली द्वारा अस्पताल प्रबंधन से कुछ भी पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है, ऐसे में घर वालों का मानना है कि उनके साथ गलत हुआ है और उनको न्याय मिलना चाहिए इसके लिए उन्होंने एक ऑनलाइन पिटिशन भी शुरू की है –
Petition link on change.org: http://chng.it/LS7mVKGd4G
Medical Council of India Gazette notification for Rural area
नीट पीजी में प्रवेश हेतु सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंकों का प्रावधान एमसीआई द्वारा किया गया है, संशय यह था कि किन इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को यह लाभ दिया जाए ? चूँकि संविधान के अनुसार हेल्थ एक स्टेट सब्जेक्ट है यानि सभी पालिसी स्टेट को बनानी होती हैं | हर स्टेट के अपने अलग क्राइटेरिया हैं | ज्यादातर जगहों को ग्रामीण, दुर्गम, दूरस्थ, पहाड़ी, ट्राइबल, रेगिस्तानी आदि इलाकों में विभाजित किया गया है | 2018 से पूर्व में एमसीआई ने केवल दुर्गम अथवा दूरस्थ इलाकों को ही बोनस अंक के योग्य माना था लेकिन 05.04.2018 के गैजेट नोटिफिकेशन में इसे ग्रामीण अथवा दुर्गम अथवा दूरस्थ कर दिया गया है | यानि जो भी ग्रामीण भत्ते के हक़दार हैं वे बोनस अंको के भी हक़दार हैं | ग्रामीण क्षेत्रों को परिभाषा राज्य के अधीन आती है जिसके अन्तर्गत आने वाले संस्थाओं को हर वर्ष नोटिफाई किया जाना होता है क्यूंकि कई जगह नए संस्थान खुल जाते हैं तथा कुछ संस्थान ग्रामीण की परिभाषा से बाहर भी हो सकते हैं |
What is Rural Area & Allowance in Rajasthan ?
MCI Rural Gazette notification attached below –
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नीट पीजी काउंसलिंग और वकीलों की चांदी
मेडिकल पीजी की एक सीट करोड़ रुपये की मानी जाती है, सो साफ़ है कि हर सीट के लिए घमासान होता है, ब्रांच का लालच हो या पीजी का तमगा, ख़ास तो होता ही है, अगर इसके लिए पढाई के साथ कुछ क़ानूनी लड़ाई में पैसे खर्च हो जाएँ तो भी कम ही हैं | लगभग हर साल ही काउंसलिंग कोर्ट में घसीटी ही जाती है, कोर्ट यानी वकील, वकील यानि मोटी फीस, वो भी नकद में | हर वकील सोचता है कि डॉक्टरों के पास पैसों की क्या कमी ? सो तैयार रहते हैं, हालांकि सरकारी ग्रामीण भत्ताधारी चिकित्सकों के पास कहाँ पैसा है लेकिन वकील उनकी तुलना जयपुर के एसएमएस वाले मोटे डॉक्टरों से करते हैं, सो बेचारे सरकारी डॉक्टर चंदा चपाटी करके ये फीस चुकाते हैं | पिछले तीन साल में केस जयपुर से दिल्ली तक गए और फीस लाखों से करोड़ों तक गयी | इसी बीच जयपुर में कुछ युवा वकीलों ने मेडिकल लाइन में ही कैरियर बनाने कि ठानी और वे दिल्ली की सभी सुनवाइयों में खुद के खर्चे पर जाने लगे, मकसद यह दिखाना कि हम मेडिकल के केसों के जानकार हैं, पधारो म्हारे ऑफिस, कई कॉलेज वाले छात्र उनके यहाँ पधारने लगे | एक युवा वकीलन ने तो मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के आस पास फ्रेशर ढूंढने कि कोशिश करी ताकि एक बार कैसे भी मामले को खुद के पैसे खर्च करके भी कोर्ट में पटक दिया जाए ताकि फिर एक बार माहौल बन जाए तो वो दिल्ली तक जाए, कैरियर भी बने और कैशियर भी | यानि जबरदस्ती शुरुआत की कोशिश की जा रही है जबकि राजस्थान में कोई किसी भी तरह का केस बनता ही नहीं, गिने चुने सेवारतों के काम चलाऊ नंबर आये हैं, फील्ड से ज्यादातर लोग कॉलेजों में जा चुके हैं, अब बचे ही बहुत कम हैं, जो हैं वे भी एक दो साल में ही आये हैं | अतः सावधान रहें, चांदी बचा कर रखें |
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Impact of Tamilnadu High Court decision in Rajasthan about NEET PG bonus marks
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गैजेट नोटिफिकेशन की अनुपालना में सेवारत चिकित्सकों को पीजी कोर्सेज में प्रवेश हेतु लगने वाली नीट परीक्षा में उनके प्राप्तांकों के प्रतिशत के रूप में बोनस अंक दिए जाते हैं | राजस्थान राज्य में कार्यरत सेवारत चिकित्सकों को 1 साल के 10% तथा अधिकतम 3 साल के 30% अंक बोनस के रूप में दिए जाते हैं | पिछले साल के मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार सभी रूरल/ग्रामीण सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंक का हक़ है, चूँकि राजस्थान ऐसा राज्य है जिसमें पहले से ही इलाकों को पहाड़ी, दुर्गम, दूरस्थ और ग्रामीण (Hilly/Difficult/Remote/Rural) में बांटने के बजाय केवल ग्रामीण क्षेत्र में ही बांटा गया है जिसका आधार केवल ग्रामीण भत्ते (Rural Allowance) को माना गया है यानी जिसे यह भत्ता देय है वह बोनस अंक का हकदार है |
देखा जाए तो यह एक बड़ी पालिसी है जो एमसीआई के गैजेट और ग्रामीण भत्ते पर टिकी है, साथ ही पिछले सालों के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी इन दोनों को ही सही ठहराया गया है, ऐसी स्थिति में राजस्थान में 10-20-30 बना रहेगा, वो भी हर स्थिति में |
तमिलनाडु हाईकोर्ट की कमेटी ने किया बोनस अंक प्रक्रिया में बदलाव
What is Rural Allowance in Rajasthan ?
MCI “Rural” word Gazette Notification is here
नीट पीजी 2019 के रिजल्ट के बाद सेवारत चिकित्सकों में क्यों है सन्नाटा ?
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New NEET PG bonus marks criteria for Tamilnadu In-Service Doctors
मद्रास हाई कोर्ट ने इनसर्विस कैंडिडेट को पीजी में दिए जाने वाले बोनस अंकों की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है | हाईकोर्ट ने एक सात सदस्य कमेटी का गठन किया था इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को प्रस्तुत कर दी है | कमेटी ने तमिलनाडु राज्य के सभी इनसर्विस कैंडीडेट्स को चार कैटिगरीज में बांटा है, हर केटेगरी के कैंडिडेट को अलग-अलग बोनस अंक दिए जाएंगे, ये चार केटेगरी निम्न है – पहाड़ी, दुर्गम, दूरस्थ और ग्रामीण | (Hilly/Difficult/Remote/Rural)
पहाड़ी इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को उनके नीट स्कोर का 1 साल का 10% बोनस अंक मिलेगा (Max 30%) तथा इस तरह के पहाड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 119 है, दुर्गम इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को 1 साल के 9% बोनस अंक मिलेंगे (Max 27%) तथा इस तरह की 660 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, दूरस्थ इलाकों में कार्य चिकित्सकों को 1 साल के 8% बोनस अंक दिए जाएंगे (Max 24%), अंतिम केटेगरी है ग्रामीण चिकित्सक जिनको की 1 साल के 5% बोनस अंक तथा 3 साल के अधिकतम 15% बोनस अंक दिए जाएंगे |
साथ ही कुल डिप्लोमा कोर्स की सीटों की 50 फ़ीसदी सीटें केवल सेवारत चिकित्सकों के लिए आरक्षित होंगी |
# Health is a state subject in the Constitution.
Source : Times of India
तमिलनाडु नीट पीजी बोनस अंक डिसीजन और राजस्थान –
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On time salary is right of employee : High Court
डॉ. दीपक शर्मा का रिट पेटीशन पर राजस्थान हाई कोर्ट ने डिसीजन दिया कि प्रार्थी को उसकी बकाया सेलरी निर्धारित दिवस तक देय हो अथवा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सचिव खुद कोर्ट में उपस्थित हों | तबादले के बाद प्रार्थी को नौ महीने तक तनख्वाह नहीं दी गयी तो पहले तो उन्होंने सभी स्तरों पर संपर्क किया लेकिन कोई समाधान नहीं होने पर मजबूरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मिला त्वरित न्याय | यह फैसला बना नजीर | निर्धारित अवधि में सेलरी नहीं दिये जाने पर DDO को जेब से भरना पड़ सकता है उस राशी का ब्याज |
संलग्न – हाईकोर्ट का आदेश
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