Depression distrub the doctors

मध्यप्रदेश में आठ दिन में दो डॉक्टर अपनी जान दे चुके हैं। दोनों में कारण डिप्रेशन है। एक्सपर्ट का मानना है कि कोविड के बाद से डॉक्टर डिप्रेशन में हैं। मेडिकल कॉलेजों में काउंसलर्स रखने की जरूरत है, जिससे मेडिकल स्टूडेंट्स और डॉक्टरों को तनाव से राहत मिल सके। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 80% डॉक्टर मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।भोपाल AIIMS में MBBS की सेकंड ईयर की स्टूडेंट मारिया मथाई ने रविवार को हॉस्टल की तीसरी मंजिल से कूदकर जान दे दी। वह केरल की रहने वाली थी और टॉपर थी। उसे स्कॉलरशिप भी मिली थी। मारिया के पिता ने बताया कि वह पिछले 2 महीनों से पढ़ाई को लेकर परेशान थी। पुलिस ने भी शुरुआती जांच में मौत की वजह डिप्रेशन बताई है।

इंदौर में मेडिकल स्टूडेंट ने लगाई फांसी

आठ दिन पहले इंदौर के एमवाय अस्पताल की जूनियर डॉक्टर अपूर्वा गुलानी ने सुसाइड कर लिया था। वह 3 साल से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप कर रही थी। मौके से सुसाइड नोट भी मिला। इसमें जिंदगी से हारने की बात लिखी है। दोस्तों के मुताबिक वह कई दिन से डिप्रेशन में थी। वह मूल रूप से जबलपुर के नजदीक लखनादौन (सिवनी) की रहने वाली थी। माना जा रहा है कि उसने एनेस्थीसिया का ओवरडोज लिया था।

देशभर में डिप्रेशन में हैं 80% डॉक्टर्स

IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 80% डॉक्टर्स ज्यादा काम की वजह से डिप्रेशन में हैं या मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। 56% डॉक्टर्स को 7 घंटे की नींद भी नसीब नहीं होती। ऐसे में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ पर खतरनाक असर पड़ रहा है।नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने मेडिकल स्टूडेंट्स, रेसीडेंट्स और डॉक्टर्स पर रिसर्च की। इसके मुताबिक पिछले 10 साल में (2010-2019) तक 358 डॉक्टर्स ने सुसाइड किया है। इनमें 125 मेडिकल स्टूडेंट्स हैं, जबकि 105 रेसिडेंट डॉक्टर्स और 128 डॉक्टर्स ने मौत को गले लगाया है। ये रिपोर्ट हाल में जारी की गई है। रिसर्च में ये भी सामने आया कि 10 में से 7 सुसाइड केस ऐसे थे, जिनमें सुसाइड करने वाले डॉक्टर्स की उम्र 30 से कम थी।

एक्सपर्ट व्यू… खुलकर बातचीत करने से मिलेगा हल: डॉ. शोभना

BHU के साइकोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी स्ट्रेस मैनेजमेंट सेल में काउंसलर डॉ. शोभना ने डिप्रेशन को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने बताया कि घर से लेकर स्कूल, कॉलेज और ऑफिस सभी जगह इसका असर देखने को मिल रहा है। खासकर युवाओं में डिप्रेशन सबसे ज्यादा हावी है। कई बार लगातार निगेटिव कमेंट्स या स्ट्रेस के कारण पर्सनालिटी प्रीडिस्पोजिशन होता है। इसका मतलब ये है कि जरा सी परेशानी उनमें एंग्जायटी ट्रिगर कर सकती है, जो सुसाइड का कारण बन सकती है।समाधान का जिक्र करते हुए डॉ. शोभना ने बताया कि मेडिकल फैकल्टी और स्टूडेंट्स के लिए हर सेक्शन में मेडिकल काउंसलर्स का होना जरूरी है, ताकि टीचर्स और स्टूडेंट्स परेशानी को खुलकर साझा कर सकें। डिजिटल युग में पेरेंट्स और बच्चों के बीच बातचीत जरूरी है।

योग और मोटिवेशनल सेशन पर जोर

भोपाल AIIMS के पीआरओ मयंक कपूर ने बताया कि स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ को ध्यान में रखते हुए योग और मेडिटेशन प्रोग्राम किए जा रहे हैं। इसके अलावा, मोटिवेशनल सेशन पर भी फोकस किया जा रहा है। साथ ही, जीनोम सीक्वेंसिंग की मदद से डिप्रेशन और इसके समाधान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह प्रोग्राम सभी लोगों के लिए होगा। इससे हर वर्ग को भी फायदा होगा। हाल में AIIMS भोपाल को नेशनल हेल्थ मिशन और हेल्थ डिपार्टमेंट के साथ मिलकर डिप्रेशन पर जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए फंडिंग की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे मरीज को दवाइयों, काउंसलिंग के साथ स्पेसिफिक इलाज देने में मदद मिलेगी।

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Success story of doctor

लोग छोटी नौकरी पाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं। परंतु कई ऐसे भी लोग होते हैं जो अच्छी नौकरी मिलने के बावजूद अपने मनचाहे काम में हाथ अजमाना चाहते हैं। वे अच्छी नौकरी मिलने के बावजूद उसको छोड़कर सफर में आगे बढ़ते हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक शख्स की कहानी बताएंगे. जिसने सारी लोगों की बातों को झूठा साबित कर अपना एक मुकाम हासिल किया है. हम यहां पर बात कर रहे हैं अनएकेडमी(Unacademy) के को फाउंडर रोमन सैनी की। इनके पास डॉक्टर और आइएएस अधिकारी बनने के बाद ऐसा काम किया, जिसकी सब लोग तारीफ करते हैं।
रोमन सैनी ने 16 वर्ष की उम्र में एमबीबीएस के लिए होने वाले एंटरेन्स एग्जाम को पास किया, 18 बरस की उम्र में एक ऑर्गेनाइजेशन के लिए रिसर्च पेपर लिखा और 22 बरस के होते होते भारत की सबसे मुश्किल एग्जाम में से एक आईएएस के एग्जाम को पास किया.

AIIMS में प्रवेश पाने वाले देश की सबसे युवा बने

बचपन से ही अद्भुत प्रतिभा के धनी रहें रोमन सैनी ने 16 बरस की उम्र में एम्स की प्रतियोगी परीक्षा में पास होकर एम्स में प्रवेश पाने वाले देश के सबसे युवा प्रतिभागी बने. आपको बता दें कि एम्स दिल्ली द्वारा आयोजित यह मेडिकल एग्जाम, एमबीबीएस में प्रवेश लेने के लिए आयोजित होने वाले एग्जाम में सबसे कठिन एग्जाम माना जाता है.

22 की उम्र में बने IAS अफसर

महज 6 महीने डॉक्टर की नौकरी करने के बाद रोमन सैनी का मन सिविल सर्विसेज की तरफ मुड़ गया. पहली बार में ही आईएएस का एग्जाम पास करके रोमन सैनी एक आईएएस अधिकारी बन गए, जिनको मध्यप्रदेश में नियुक्त किया गया. लेकिन रोमन सैनी यहां पर भी ज्यादा वक्त तक रुके नहीं और अपने बचपन की ख्वाहिश को पूरा करने के लिए टीचर बन गए. एक इंटरव्यू में रोमन सैनी ने बताया था कि उनको बचपन से ही पढ़ना और पढ़ाना पसंद था. यह ख्वाहिश ही उनको टीचिंग की तरफ की खिंच लाई.

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Aiims raebareli

28.07.2022
सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायबरेली (All India Institute of Medical Sciences, Raebareli) सुनहरा मौका लेकर आया है. यहां सीनियर रेजिडेंट के 41 पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं. अगर आप भी AIIMS जैसे बड़े और नामी संस्थान में नौकरी चाहते हैं तो जल्द से जल्द आवेदन भेज सकते हैं. उम्मीदवार www.aiimsrbl.edu.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 16 अगस्त 2022 है. आइए देखें इसकी प्रक्रिया और जरूरी जानकारी।

*विभाग और पद

1. एनेस्थिसियोलॉजी- 3
2. बायोकेमिस्ट्री – 1
3. दंत चिकित्सा – 1
4. डर्मेटोलॉजी – 1
5. मेडिसिन – 6
6. माइक्रोबायोलॉजी – 2
7. प्रसूति एवं स्त्री रोग – 3
8. नेत्र विज्ञान- 1
9. हड्डी रोग – 2
10. ओटोलरींगोलॉजी(ENT) – 2
11. बाल रोग – 3
12. पैथोलॉजी- 3
13. मनश्चिकित्सा – 1
14. रेडियोलॉजी – 3
15. सर्जरी – 6
16. आधान चिकित्सा (Transfusion Medicine)- 3

कुल- 41 पद (19 अनारक्षित, 10 OBC, 6 SC, 3 ST और 3 पद EWS उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।

AIIMS रायबरेली भर्ती 2022 के लिए आवेदन शुल्क

सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: 1,000/-
एससी / एसटी वर्ग: 800/-
पीडब्ल्यूबीडी: शून्य

वेतन

सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मैट्रिक्स (स्तर-11) के चयनित उम्मीदवारों को न्यूनतम 67,700 रुपए + एनपीए (चिकित्सा कर्मियों के लिए) दिया जाएगा।

योग्यता
उम्मीदवार को भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 की पहली, दूसरी अनुसूची या तीसरी अनुसूची के भाग II में शामिल एक चिकित्सा योग्यता को पूरा करना चाहिए.
उम्मीदवार को सेंटर या स्टेट चिकित्सा परिषद के साथ पंजीकृत होना चाहिए.
एक स्नातकोत्तर डिग्री यानी संबंधित विशेषता में एमडी / एमएस / डीएनबी या इसके समकक्ष होना चाहिए.
पैथोलॉजी विभाग के लिए: आवश्यक योग्यता एमडी पैथोलॉजी / एमडी लैब मेडिसिन होगी।

आयु सीमा

सीनियर रेजिडेंट्स एसआर के पद के लिए आयु सीमा 45 वर्ष है. (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए 5 वर्ष और 3 वर्ष की छूट)
(ओबीसी उम्मीदवारों के लिए शारीरिक विकलांग (OPH) के मामले में, अधिकतम तक की आयु में छूट).

जरूरी तारीखें
आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि: 16 अगस्त 2022 (शाम 5.00 बजे)
लिखित परीक्षा की तिथि: 20 अगस्त 2022
विभागीय मूल्यांकन की तिथि: 22 अगस्त 2022
चयन प्रक्रिया
लिखित परीक्षा (MCQ आधारित) – 80% वेटेज
विभागीय मूल्यांकन – 20% वेटेज
दस्तावेज सत्यापन के समय उम्मीदवार को मूल दस्तावेज और सेल्फ अटेस्टेड फोटोकॉपी का एक सेट लाना होगा. इसके आधार पर सीनियर रेजिडेंट्स का चयन किया जाएगा|

सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायबरेली (All India Institute of Medical Sciences, Raebareli) सुनहरा मौका लेकर आया है. यहां सीनियर रेजिडेंट के 41 पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं. अगर आप भी AIIMS जैसे बड़े और नामी संस्थान में नौकरी चाहते हैं तो जल्द से जल्द आवेदन भेज सकते हैं. उम्मीदवार www.aiimsrbl.edu.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं| आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 16 अगस्त 2022 है. आइए देखें इसकी प्रक्रिया और जरूरी जानकारी।

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Tranfer in health department of rajasthan

28.07.2022

राजस्थान में 2 साल के कोविड काल के बाद इस बार हैल्थ डिपार्टमेंट में तबादलों को लेकर बड़ा फेरबदल चल रहा है। चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा ने सबसे पहले डेपुटेशन और सेटिंग से शहरों में जमे डॉक्टरों पर हमला किया था और उनको तुरंत अपनी मूल पोस्टिंग वाले स्थानों पर भेजने के आदेश दिए थे। लेकिन अब भी सैकड़ों डॉक्टर-कर्मचारी डेपुटेशन और अपनी पसंदीदा जगह जमे हैं। दूसरी तरफ पिछले 15 दिन में 2400 डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ इधर-उधर किए गए।लिहाजा वर्किंग डे के अनुसार 11 दिन में औसतन 217 प्रतिदिन ट्रांसफर किए गए। इनमें 610 डॉक्टर और 1780 नर्सिंग और पैरा मेडिकल स्टाफ हैं। अब भी तबादलों का कुंभ चल रहा है। माना जा रहा है कि सीजन में 10 हजार से ज्यादा स्टाफ इधर-उधर होगा।27 लिस्ट डॉक्टरों व विशेषज्ञों की
15 दिन में 610 डॉक्टरों की 27 बार ट्रांसफर लिस्ट निकाली गई। यानी रोज करीब 3 लिस्ट जारी की गई। इनमें मेडिकल ऑफिसर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर, वरिष्ठ और कनिष्ठ विशेषज्ञ, अस्थि रोग से लेकर डेंटिस्ट आदि चिकित्सक शामिल हैं।चौमूं से सीधे जैसलमेर-बाड़मेर : तबादला सूचियों में सबसे चर्चित तबादले चौमूं के 7 डॉक्टरों के रहे। डाॅ. बीएल यादव, डाॅ. रवि कुमावत, डॉ. जयंत जैन, डाॅ. ज्योति यादव, डाॅ. सुरेश जांगिड़, डाॅ. मुखराम देवंदा और डाॅ. ज्योति शर्मा के तबादले सीएचसी चौमूं से जैसलमेर और बाड़मेर जिले की विभिन्न सीएचसी और पीएचसी में कर दिए गए हैं

मांगी सरप्लस की सूची
हैल्थ डायरेक्टरेट ने 33 जिलों के लिए आदेश जारी किया है कि सभी सीएमएचओ और उनके अधीन अफसर 29 जुलाई तक अपने-अपने जिले में जितने भी अराजपत्रित कर्मचारी सरप्लस हैं, उनकी पूरी डिटेल मुख्यालय को भेजें। माना जा रहा है कि मंत्री ने सभी अस्पतालों को डॉक्टर स्टाफ मुहैया कराने का आदेश निकलवाया है।

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Inspection of health camp in bihar

26.07.2022
मुंगेर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला को लेकर जिला प्रशासन के द्वारा कच्ची कांवरिया पथ पर मुंगेर जिला अंतर्गत असरगंज प्रखंड के कमरांय से लेकर संग्रामपुर प्रखंड कुमरसार तक स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कुल 13 जगहों पर स्वास्थ्य शिविर लगाया गया है। इस दौरान कार्य में किसी प्रकार की कोताही ना हो इसे लेकर सोमवार की देर रात लगभग 10 बजे से 3:00 बजे तक मुंगेर सिविल सर्जन डॉक्टर पीएम सहाय औचक निरीक्षण करने को लेकर कच्ची कांवरिया पथ पर औचक निरीक्षण करने पहुंच गए।इस दौरान सिविल सर्जन धोबई स्वास्थ्य शिविर पहुंचे। यहां शिविर में अपने ड्यूटी पर सभी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। मगर शिविर में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने सिविल सर्जन को शिकायत करते हुए बताया कि यहां जो बिजली व्यवस्था दिया गया है वह सही तरीके से नहीं रहता है जिस कारण पंखा भी नहीं चलता है इसके अलावा बारिश पड़ने पर पूरा चुने की वजह से हम लोग बारिश के दौरान बिक जाते हैं।इसके बाद सिविल सर्जन रात 12: 45 में गोगाचक स्थित स्वास्थ्य शिविर पहुंचे इस जगह पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि रूबी कुमारी एएनएम सोई हुई थी जिसे सिविल सर्जन ने कार्य में कोताही बरतने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा । रात 1 बजे तेघड़ा स्वास्थ्य वीर पहुंचे यहां पर जीएनएम कुंती कुमारी ड्यूटी पर अब्सेंट थी। सिविल सर्जन के द्वारा अनुपस्थिति पणजी देखने पर कुंती कुमारी का लगातार ड्यूटी पर नहीं रहने का अब्सेंट रजिस्टर पर पाया गया। इस पर सिविल सर्जन ने जांच के बाद विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया।इसके बाद सिविल सर्जन के द्वारा असरगंज थाना मोड़, कमरांय सहित अन्य स्वास्थ्य वीर का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने संतुष्ट पाया। इस दौरान सिविल सर्जन ने बताया कि श्रावणी मेले के अवसर पर जो मुंगेर जिला प्रशासन के द्वारा कमरिया की स्वास्थ्य का ध्यान में रखते हुए प्रत्येक 2 किलोमीटर पर स्वास्थ शिविर लगाया गया है। इस स्वास्थ्य वीर में 24 ×7 स्वास्थ्य कर्मियों को ड्यूटी पर लगाया गया है। कार्य में किसी प्रकार की कोताही ना हो इसे लेकर आज देर रात औचक निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने 1 माह तक चलने वाले श्रावणी मेला के बारे में बताया कि श्रावणी मेला के दौरान लगातार स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों द्वारा जांच किया जा रहा है इसी क्रम में आज हम अपने से जांच करने के लिए निकले। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को हिदायत देते हुए कहा कि कार्य के दौरान जो भी स्वास्थ्य कर्मी लापरवाही बरतेंगे उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन के द्वारा सभी शिविर में स्वास्थ्य कर्मियों से समस्या के बारे में भी अवगत हुए। कर्मचारियों द्वारा सिविल में बिजली कट जाने पर अंधकार रहने की बात कही गई साथ ही बारिश होने पर ऊपर से पानी टपकने की शिकायत की गई। सिविल सर्जन ने बताया कर्मचारियों की समस्या से जिलाधिकारी को अवगत कराया जाएगा।

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Now,doctor Rakesh choudhary becomes new president of resident doctors association,bikaner

14.07.2022
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन बीकानेर के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में डा राकेश चौधरी निर्वाचित हुए। दो बार डॉ महिपाल नेहरा के अध्यक्ष रहने के बाद लगातार तीसरी बार फॉरेंसिक मेडिसिन के ही डॉ राकेश चौधरी विजयी हुए। चुनाव में 306 में से 160 मत डॉ राकेश चौधरी ने हासिल किए। चुनाव अधिकारी डॉ मनोज यादव, पर्यवेक्षक फारमेकॉलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विनोद छिम्पा रहे।

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Kidney transplant to another body success in delhi gangaram hospital

13.07.2022
नई दिल्ली. दिल्ली में सर गंगाराम हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने ऑटो-किडनी ट्रांसप्लांट में कामयाबी हासिल की है। इस सर्जरी में 29 वर्षीय रोगी की एक किडनी को निकालकर दूसरी तरफ स्थापित कर उसे सामान्य रूप से सक्रिय किया गया है। रोगी को किडनी स्टोन की शिकायत थी। इसकी पंजाब के एक निजी अस्पताल में सर्जरी की गई थी। दुर्भाग्यवश सर्जरी के दौरान 25-26 सेमी पेशाब की नली पथरी के साथ बाहर निकल गई थी। ऐसी स्थिति में किडनी से ब्लैडर का संपर्क टूट गया, जिससे पेशाब के पेट में इकट्ठा होने का खतरा था।

ट्रांसप्लांट के बाद मरीज हुआ स्वस्थ

पंजाब से केस जब सर गंगाराम अस्पताल पहुंचा तो यहां डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती जल्द के जल्द नई ट्यूब के माध्यम से किडनी और पेशाब की थैली को जोड़ना था, जिससे अपशिष्टों को पेट में जमा होने से रोका जा सके। डॉक्टरों की टीम ने ‘ऑटो-किडनी ट्रांसप्लांट’ प्रक्रिया कर सफल ऑपरेशन किया। अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है।

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Doctor saved life a patient in Raipur ambedkar college

13.07.2022
आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में हार्टअटैक की स्थिति में पहुंचे एक 30 साल के युवक की इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी कर जान बचाई गई। हार्ट अटैक की स्थिति में लेजर द्वारा हार्ट की नली के थक्के को भाप बनाकर निकाला गया। हार्टअटैक के बीच लेजर के माध्यम से खून के थक्के को भाप बनाकर निकालना संभवत: देश की इस तरह की यह पहली प्रक्रिया है। मंगलवार सुबह करीब 9 युवक हार्टअटैक की स्थिति में एसीआई पहुंचा। उसकी तुरंत एंजियोग्राफी करने पर पता चला कि बहुत सारा खून का थक्का उसके हाथ की एक प्रमुख नली को पूरी तरह से बंद कर दिया है। आईवीयूएस यानी हार्ट के नस के अंदर की सोनोग्राफी करने पर पता चला कि यह रुकावट सिर्फ खून के थक्के के कारण हुआ है और इसमें नस का कोई ब्लाकेज नहीं है। ऐसे में युवक की कम उम्र को देखते हुए उसे खून के थक्के को लेजर द्वारा भाप बनाने का निर्णय लिया गया और यह प्रक्रिया मात्र आधे घंटे के समय में पूरी की गई। युवक की बंद नली पूरी तरह खुल गई

खून क्यों ब्लॉक हुआ, कारण का पता नहीं

काडियोलॉजिस्ट डॉ. स्मित श्रीवास्तव बताते हैं, युवक के शरीर में खून क्यों ब्लॉक हुआ। इसके कारण का पता नहीं चल पाया, क्योंकि युवक किसी प्रकार से नशे का सेवन नहीं करता। लेजर के माध्यम से भाप बनाकर खून का थक्का निकालने का केस दस से अधिक हो चुका है, लेकिन आर्टअटैक के बीच ऐसा करना देश में पहली बार है। युवकों में हार्टअटैक का प्रमुख कारण अनियमित दिनचर्चा है, जिसमें ध्यान देने की जरूरत है।

हार्ट को नहीं पहुंचा नुकसान

हार्ट अटैक के कारण ईसीजी में आया परिवर्तन भी एंजियोप्लास्टी के बाद ठीक हो गया, जो इस बात का साक्ष्य हैं कि यह प्रक्रिया सफल हुई और युवक हार्ट को और जीवन को नुकसान होने से बचा लिया गया। इस इमरजेंसी लेजर एनजियोप्लास्टी में प्रोफेसर डॉ. स्मित श्रीवास्तव के साथ डॉ. जोगेश, डॉ. आनंद, डॉ. गोपेश, डॉ. प्रतीक, नर्सेज बुद्धेश्वर और पूर्णिमा, टेक्नीशियन आईपी वर्मा, खेम सिंह, महेंद्र साहू, अश्वितिन साहू और जितेंद्र चलकर शामिल थे।

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Operation theatre again started in bhopal ,JP hospital

13.07.2022
जेपी अस्पताल का आई ओटी सप्ताह भर बाद फिर शुरू हो गया। पहले दिन चार मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन भी किया गया है। मालूम हो कि इसमें नल टूटने के चलते पानी भर गया था जिससे सावधानीवश ऑपरेशन बंद कर कल्चर टेस्ट कराए गए थे। टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ओटी फिर शुरू कर दी गई है। जेपी अस्पताल के नेत्र विभाग की ओटी के टॉयलेट में निर्माण सामग्री रखने के दौरान नल टूट गया था। उस दौरान टंकी में पानी नहीं था। इस कारण पानी नहीं बहा। दूसरे दिन जब टंकी भरी गई तो रात में टूटे नल से पानी निकलकर टायलेट से होते हुए पूरे ओटी में भर गया था। पानी भरने से ओटी में संक्रमण फैलने का खतरा था। इस कारण इसे बंद कर दिया गया था। इसके बाद पानी निकालकर ओटी को हाइपोक्लोराइड से संक्रमणमुक्त कर दिया गया। सावधानी के लिए ओटी से कुछ जगह से स्वाब के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। ओटी शुरू होने के बाद अब यहां मोतियाबिंद के आपरेशन, आंख में चोट लगने पर होने वाले आकस्मिक आपरेशन व अन्य तरह की सर्जरी हो सकेंगी।

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Money invest in the name of software in gov.hospital ,Bhopal

13.07.2022
शहर के सरकारी अस्पताल मुफ्त की कोई भी चीज पसंद नहीं करते। यही वजह है कि अस्पतालों का कामकाज निर्धारित करने के लिए केन्द्र के मुफ्त के पोर्टल का उपयोग नहीं करना चाहते। शहर के सरकारी अस्पतालों ने मरीजों की सुविधा का हवाला देकर खुद के सॉफ्टवेयर के नाम पर करीब 6 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। हमीदिया से लेकर एम्स और अन्य सरकारी अस्पतालों ने राशि तो खर्च कर दी, लेकिन अपने स्तर पर जो पोर्टल तैयार कराए वे फिलहाल तो काम नहीं कर रहे।

हमीदिया अस्पताल: खर्च किए 2.5 करोड़ रुपए:
हमीदिया में तीन साल पहले हेल्थ इंफॉर्मेशन एंड मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया था। दावे हुए थे कि पूरे काम ऑनलाइन होंगे। यही नहीं इस सॉफ्टवेयर को सरकारी एजेंसी 25 लाख में तैयार कर रही थी, लेकिन प्रबंधन ने निजी एजेंसी को 2.5 करोड़ रुपए दे दिए। इसके बावजूद अब तक सॉफ्टवेयर तैयार नहीं है।

एम्स:फर्जीवाड़ा ऐसा कि हो गई जांच
एम्स भोपाल में भी सॉफ्टवेयर के निर्माण के दौरान फर्जीवाड़ा हुआ। एम्स प्रबंधन ने अपने सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए सरकारी एजेंसी को 86 लाख रुपए जारी किए, लेकिन चार साल तक सॉफ्टवेयर का निर्माण नहीं हो पाया। इसके बाद एम्स मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने निजी एजेंसी को सॉफ्टवेयर का ठेका दे दिया।

अन्य अस्पतालों में भी खुद के सॉफ्टवेयर फेल:
जेपी अस्पताल में भी सॉफ्टवेयर तैयार किए गए। उस दौरान यह प्रचारित किया गया कि प्रदेश का पहला अस्पताल जहां मिलेगी कतारों से आजादी, लेकिन स्थिति अब भी वैसी ही है। वहीं गैस राहत विभाग के सभी अस्पतालों और बीएमएचआरसी में भी सॉफ्टवेयर तैयार किए गए, जो अब तक अधूरे ही हैं।

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