10 doctors conferred Padma Shri in Medicine

इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई है और 10 डॉक्टरों को चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया जायेगा I

निम्नलिखित डॉक्टरों को पद्म श्री के लिए नामित किया गया है-

1) डॉ. हिम्मतराव बावस्कर – महाराष्ट्र- मलाड के एक भारतीय चिकित्सक, 71 वर्षीय डॉ हिम्मतराव बावस्कर लाल बिच्छू के डंक से हुई मौतों पर अपने पथप्रदर्शक शोध के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। विभिन्न पत्रिकाओं में केस स्टडी के माध्यम से इस मुद्दे के बारे में उनके बार-बार प्रकाशन ने इस विषय में अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा बिरादरी की रुचि को आकर्षित किया। पिछले 40 वर्षों से, वह स्थानीय लोगों और आदिवासियों को बिच्छू और सांप के काटने के जहर से बचाने के लिए महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के महाड में एक स्वास्थ्य केंद्र में काम कर रहे हैं।

2) डॉ. प्रोकर दासगुप्ता- यूनाइटेड किंगडम- किंग्स कॉलेज लंदन में यूरोलॉजी के प्रोफेसर और अध्यक्ष डॉ. प्रोशकर दासगुप्ता रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में अग्रणी हैं। रोबोटिक यूरोलॉजी के पहले यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण के साथ-साथ “दासगुप्ता तकनीक” के संस्थापक होने के साथ-साथ क्षेत्र में उनके पास कई प्रथम हैं, जो एक लचीली सिस्टोस्कोप का उपयोग करके मूत्राशय की दीवार में बोटॉक्स को इंजेक्ट करने का गणित है। उनकी टीम को मूत्राशय के कैंसर के लिए गाय की रोबोटिक सिस्टोप्रोस्टेटेक्टोमी तकनीक के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और यह अंतर्राष्ट्रीय रोबोटिक सिस्टेक्टोमी कंसोर्टियम (आईआरसीसी) के बीच अग्रणी यूरोपीय समूह है। वह किडनी ट्रांसप्लांट के हिस्से के रूप में कीहोल सर्जरी करने के लिए दा विंची रोबोट का इस्तेमाल करने वाले पहले व्यक्ति थे।

3) डॉ. लता देसाई- गुजरात- 80 वर्षीय डॉ लता और उनके पति डॉ अनिल ने अमेरिका में अपना जीवन छोड़ दिया और ग्रामीण विकास के लिए अपना जीवन समर्पित करने के लिए वापस आ गए। 1980 में उन्होंने झगड़िया, भरूच में सोसाइटी फॉर एजुकेशन, वेलफेयर एंड एक्शन-ग्रामीण (सेवा ग्रामीण) की स्थापना की। समाज क्षेत्र में ग्रामीण आबादी के लिए स्वास्थ्य और कल्याण के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए, जिसमें 200 बिस्तरों वाला कस्तूबरा अस्पताल शामिल है, 3,000 गांवों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के रोगियों की सेवा, स्वास्थ्य प्रशिक्षण, आंखों की जांच, महिला विकास समाज और कई अन्य शामिल हैं।

4) डॉ. विजय कुमार विनायक डोंगरे-कुष्ठ उपचार के लिए अपने काम के लिए जाने जाते हैं I डॉ डोंगरे ने अपना पूरा जीवन महाराष्ट्र के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ नियंत्रण में समर्पित कर दिया।

5) डॉ. नरेंद्र प्रसाद मिश्रा (मरणोपरांत) – मध्य प्रदेश – मध्य प्रदेश के सबसे वरिष्ठ डॉक्टरों में से एक, स्वर्गीय नरेंद्र प्रसाद मिश्रा भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के साथ-साथ कोविड -19 के लिए उपचार प्रोटोकॉल विकसित करने के लिए जिम्मेदार थे।

6) डॉ. सुनकारा वेंकट आदिनारायण राव- आंध्र प्रदेश- 82 वर्षीय आर्थोपेडिक सर्जन सुनकारा वेंकट आदिनारायण राव गरीब लोगों के लिए विशेष रूप से पोलियो पीड़ितों के लिए अपने काम के लिए जाने जाते हैं। अपने फ्री पोलियो सर्जिकल एंड रिसर्च फाउंडेशन के तहत, उन्होंने पोलियो पीड़ितों के इलाज के लिए पूरे भारत में, विशेष रूप से उत्तर भारत में सम्मान प्राप्त किया है। उन्होंने अब तक एक लाख से ज्यादा सर्जरी की हैं। एक डॉक्टर के रूप में अपनी छह दशकों की सेवा में उन्होंने कई पुरस्कार जीते।

7) डॉ. वीरास्वामी शेषिया – तमिलनाडु- प्रसिद्ध मधुमेह विशेषज्ञ, डॉ शेषिया भारत में मधुमेह विज्ञान के पहले प्रोफेसर थे और मद्रास मेडिकल कॉलेज में भारत में मधुमेह विज्ञान के पहले विभाग की स्थापना के लिए जिम्मेदार थे। वह भारत के गर्भावस्था अध्ययन समूह में मधुमेह के संस्थापक संरक्षक हैं। अतीत में भी उन्हें डायबेटोलॉजी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए डॉ. बी.सी. रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

8) डॉ. भीमसेन सिंघल- महाराष्ट्र- लोकप्रिय न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ भीमसेन सिंघल मुंबई, भारत में बॉम्बे हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में न्यूरोलॉजी के निदेशक हैं। इस नियुक्ति से पहले, वह मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज में मानद प्रोफेसर और न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख थे। उन्हें 200 से अधिक न्यूरोलॉजिस्ट को प्रशिक्षित करने और मल्टीपल स्केलेरोसिस, पार्किंसंस रोग आदि सहित न्यूरोलॉजी को बढ़ावा देने में मदद की गई थी। उन्होंने अग्रवाल समुदाय में एक विशिष्ट जीन दोष के साथ मेगालेन्सेफेलिक ल्यूकोडिस्ट्रॉफी की इकाई की खोज की। अतीत में भी उन्हें डॉ. बी.सी. रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार सहित न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

9) डॉ. बालाजी तांबे (मरणोपरांत)- महाराष्ट्र- आयुर्वेद के क्षेत्र में अग्रणी, स्वर्गीय आयुर्वेदाचार्य डॉ. बालाजी तांबे को आयुर्वेद और योग के क्षेत्र को दुनिया में ले जाने के लिए जाना जाता है। वह आत्मसंतुलना गांव में की जाने वाली सभी गतिविधियों के संस्थापक और प्रेरणा स्रोत थे। आध्यात्मिक गुरु, डॉ तांबे का पिछले साल पुणे के एक निजी अस्पताल में संक्षिप्त बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया।

10) डॉ. कमलाकर त्रिपाठी- उत्तर प्रदेश- एमबीबीएस, एमडी (मेडिसिन), डीएम (नेफ्रोलॉजी) डॉ. कमलाकर त्रिपाठी नेफ्रोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट और पूर्व प्रोफेसर मेडिसिन विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, भारत हैं।

सेवारत चिकित्सकों की एसीआर आईपीआर का ब्यौरा जारी – बाबूराज को फटका

Jaipur (Rajasthan) October 2019

सेवारत चिकित्सकों को प्रतिवर्ष वार्षिक प्रतिवेदन (ACR APR) और अचल संपत्ति विवरण (IPR) विभाग में भरकर देना होता है, वर्ष 2016 के बाद से ये ऑनलाइन भरे जाते हैं, पहले की स्थिति में ऑफलाइन सिस्टम था ।

पदोन्नति के लिए चिकित्सकों को प्रत्येक वर्ष का वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (APR/ACR) एवं अचल संपत्ति विवरण (IPR) जमा करवाना होता है, लेकिन इस ACR और IPR का निदेशालय में कोई धणी-धोरी नहीं है, चिकित्सक अपना अपना रेकॉर्ड समय से भेज भी दें तो यह रास्ते मे पता नहीं कहाँ कहाँ अटक जाता है, और इस अनुभाग में पहुंच भी जाये तो दांयी से बांयी टेबल पर नहीं आता, वहां भी कमियां निकाल कर पटक दिया जाता है, भोग की आस में । चिकित्सक तो ये सोचकर आराम से बैठे होते हैं कि उनका रेकॉर्ड तो पहुंच गया है, और 1 अप्रैल को उनकी पदोन्नति हो जाएगी, उन्हें क्या पता कि किस बिल और भोलाराम के जीव में अटक रखा है उनका रिकॉर्ड ।

2019 मई माह में डीओपी द्वारा पदोन्नति किये जाने वाले चिकित्सकों का रिकॉर्ड मांगे जाने पर निदेशालय के बाबूराज द्वारा आधा अधूरा रिकॉर्ड पकड़ा दिया जाता है, कायदे से रिकॉर्ड देने से पहले आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं कि किसका कौनसा रेकॉर्ड बकाया है ताकि वो अपना अटका रिकॉर्ड निकलवा सके और कुछ बकाया हो तो जमा करवा सके । लेकिन बिना सूचित किये ही अधकचरे को आगे भिजवाया गया और 15 जून 2019 को जारी हुई लिस्ट में 1700 में से करीब 600 की ही पदोन्नति की गई, इसमें भी सीनियरिटी का ध्यान नहीं रखा गया है, चार ACR वाले का नाम है लेकिन सैंकड़ों ऐसों का नाम नहीं है जिनकी पूरी 6 जमा थी, यानी भयंकर गफलत हुई है जिससे राज्य के हजार चिकित्सक तनाव में हैं ।

एक सरकारी चिकित्सक सैंकड़ों किलोमीटर यात्रा करके निदेशालय में मात्र इसलिए जाता है कि उसे यह पता लगे की उसकी कौनसी ACR or IPR बकाया है, वह चिकित्सक वहां जाकर बाबूराज से मिन्नतें करता हुआ दिखता है, घूस वाली चाय भी पिलाता है । ऐसी स्थिति में सरकारी डॉक्टर द्वारा श्रीमान एसीएस महोदय को इस भयावह स्थिति से अवगत करवाया, साथ ही अरिसदा द्वारा भी सहयोग दिया गया तो एसीएस महोदय ने कई ऑनलाइन सहूलियतें देने की हामी भरी जिनमें से एक था ACR IPR का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना, यह ब्यौरा सार्वजनिक किया गया है, नीचे संलग्न है ।

  • ऑनलाइन की स्थिति में जिनका ACR स्टेटस Initiated हैं, यानि इनकी ACR इनके राजकाज खाते में अनछुई पड़ी है इसे फटाफट से भरकर सबमिट करें, आगे कहीं पेंडिंग है तो उसके लिए जिम्मेदार सम्बंधित अधिकारी हैं ।

बाकी जिनकी ACR IPR बकाया है वे जल्द से जल्द इसकी पूर्ती करावें क्यूंकि एसीएस महोदय के आदेशों से जल्द ही DACP होने जा रही है ।

IMMOVABLE PROPERTY REPORT (IPR) ONLINE STATUS ON DOP WEBSITE –

ANNUAL PERFORMANCE APPRAISAL REPORTS FILLING AUTHORITIES (NEW) –

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Rajasthan Government launched Jan Soochna Portal for public information

जन सूचना पोर्टल अपनी तरह का पहला ऐसा प्रयास है जिसमें सरकार द्वारा वार्ड/पंचायत में क्रियान्वित सभी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध करवाई जा रही है। यह सूचना के अधिकार, 2005 की धारा 4(2) को क्रियान्वित करता है: “प्रत्येक लोक अधिकारी का निरंतर यह प्रयास होगा कि वह उपधारा (1) के खंड (ख) की अपेक्षाओं के अनुसार, स्वप्रेरणा से, जनता को नियमित अन्तरालों पर संसूचना के विभिन्न साधनों के माध्यम से, जिनके अन्तर्गत इंटरनेट भी है, इतनी अधिक सूचना उपलब्ध कराने के लिये उपाय करे जिससे कि जनता को सूचना प्राप्त करने के लिये इस अधिनियम का कम से कम अवलंब लेना पड़े”।

The Government of Rajasthan is proud to launch the Jan Soochna Portal, conceptualized in collaboration with peoples’ campaigns of Rajasthan . The Portal which is the first public portal of its kind in the country, is an extension of a Janta Information System, and is aimed to disclose information in the public domain suo-moto as per Section 4(2) of the RTI Act (It shall be a constant endeavour of every public authority to take steps in accordance with the Act to provide as much information suo-moto to the public at regular intervals through various means of communication, including the internet, so that the public have minimum resort to the use of this Act to obtain information).

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की दो योजनाओं की पूर्ण जानकारी इस पोर्टल पर उपलब्ध करवाई जाएगी –

  1. मुख्यमंत्री निशुल्क दवा एवं जांच योजना (MNDY/MNJY)
  2. आयुष्मान भारत महात्मा गाँधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना (AB MGRSBY)

Portal launching : 13 September 2019, Birla Auditorium, Jaipur (Raj.)

Nodal Officer (Department of Medical & Health) – Dr. Laxman Singh

Portal developer : Department of Information Technology & Communication (DoIT&C)

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मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर राजस्थान सरकार खोलेगी “जनता क्लिनिक”

राजस्थान सरकार ने नए कार्यकाल का पहला बजट पेश किया। इस बजट में कई खास चीजे थी जिनमें से एक था जनता के लिए खोला जाने वाला जनता क्लीनिक। दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रदेश में जनता क्लीनिक खोलने का फैसला किया है। शहरों में ये जनता क्लिनिक खोले जायेंगे, इसके लिए भवन दान-दाताओं से लिए जायेंगे | इनमें MNDY, MNJY जैसी सभी योजनाओं का लाभ दिया जायेगा |

इसके लिए नोडल ऑफिसर डॉ. राजा चावला को बनाया गया है |

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राजमेडिकोन 2019 : चिकित्सक संगम, आयोजन और विवाद, पूरी कहानी

राज-मेडिकोन 2019, आइएमए और अरिसदा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चिकित्सक महासंगम का आयोजन 29-30 जून को जयपुर के बिड़ला ऑडीटोरियम में हुआ । आयोजन एतिहासिक था, जिसमें करीब 2500 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया, इन चिकित्सकों में प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के थे, चूँकि यह अरिसदा का पहला अधिकारिक संगम भी था । दो दिन के आयोजन में बहुत सी सेलेब्रिटीज और चिकित्सा जगत के नामी जनों के सेशन्स थे जिनका चिकित्सकों ने भरपूर आनंद लिया, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ऑनलाइन एवं ऑफलाइन थी, नाश्ते, खाने का आयोजन बहुत ही शानदार बताया गया (बटरचिकन नहीं था), हालांकि ड्रिंक्स के दो कूपन मिलने पर चिकित्सक चर्चा करते देखे गये कि इनका क्या उद्देश्य है, साथ ही रेजिडेंट डॉक्टरों को ड्रिंक्स कूपन नहीं मिलने कि चर्चा एवं शिकायत गलियारों में रही । चिकित्सकों ने आयोजन को सराहा और भविष्य में ऐसे आयोजन चिकित्सक एकता की दिशा में करते रहने की आवश्यकता जताई । सरकारी डॉक्टरों के लिए आयोजन में भाग लेने को ड्यूटी माने जाने के आदेश विभाग की तरफ से जारी किये गए, जिससे चिकित्सकों में उत्साह दिखा । एक प्राइवेट लेब कि तरफ से चिकित्सकों कि लिपिड और डायबिटीज प्रोफाइल मुफ्त में जाँची जा रही थी जिसकी रिपोर्ट देखकर भी कई चिकित्सक माथा और पेट पकड़े हुए, सुबह उठकर दौड़ने का प्लान बना रहे हैं ।

कार्यक्रम की आयोजन कमेटी

रजिस्ट्रेशन फीस

साथ ही गारंटी ली गयी थी कि अगर मजा नहीं आये तो पूरा पैसा वापस दिया जायेगा, कुछ चिकित्सकों का कहना है, उन्हें उतना मजा नहीं आया, वे कूपन लेकर डोल रहे हैं, सो अब वे इस गारंटी को भुनाने के प्रयास जल्द ही आयोजनकर्ताओं से मिलकर करेंगे ।

कार्यक्रम का अजेंडा और सेशन

अवार्ड्स

निम्न केटेगरीज में करीब सौ से ज्यादा अवार्ड थे, जिनमें से कई चयन विवादित रहे, नजदीकीवाद दिखा ।

विवाद

निश्चित रूप से इतना बड़ा आयोजन होता है तो कुछ न कुछ छोटा मोटा विवाद से नाता हो ही जाता है लेकिन दैनिक भास्कर के फ्रंट पेज पर न्यूज छप जाने के बाद अंदर कि बातें सार्वजनिक हुई, पहले दिन मंत्रीजी के आंकड़ों के बारे में खबर छपी तो दुसरे दिन मारपीट और बाबा की खबर । बिना फाइनेंस कमेटी और ट्रेजरार कमेटी के आयोजन पर भी कई सवाल अंत में हुई जीबीएम में खड़े हुए, आइएमए सचिव डॉ. जैन शरीर का ताप बढ़ जाने के कारण, समापन जीबीएम में अनुपस्थित रहे । कुछ आइएमए के वरिष्ठ भी साइडलाइन किये जाने से चुपचाप दिखे |

विवाद 1. बेटी-सालीवाद

निश्चित रूप से आयोजनकर्ता का हस्तक्षेप आयोजन प्रक्रिया, अवार्ड्स, सेशन्स, सेलेब्रिटी चयन में रहता है लेकिन उन्हें इस तरह कि स्थिति से जितना हो सके बचना चाहिए, लेकिन जैन शाहब बच नहीं पाए, सपरिवार महामहिम पूर्व राष्ट्रपति के साथ फोटो खिंचवाने, खुद की बेटी जो कि मुंबई में चिकित्सक है उस से महामहिम को स्वागत बुके भेंट करवाने को लेकर सयानों में चर्चा रही लेकिन सबसे अजीब और विकट स्थिति तब उत्पन्न हुई जब शाहब कि साली शाहीबा जो कि एक आरएएस अधिकारी हैं, भ्रष्टाचार में एसीबी में रंगे हाथ पकड़ी गयी थी, अभी सस्पेंड चल रही हैं, उनसे राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री रोहित कुमार सिंह को स्वागत बुके भेंट करवा दिया गया, घटना से चिकित्सक सतब्ध रह गये लेकिन डायस पर पूर्व राष्ट्रपति के होने के कारण चुप्पी साध गए, सयानों का कहना है कि सस्पेंड साली को इस आयोजन से दूर रखा जाना चाहिए था, उसकी फेसवेल्यु बढाने के लिए इस आयोजन का इस्तेमाल न किया जाए, आयोजन के दो दिन पहले राज्य के एक बड़े मीडिया हाउस ने इसका खुलासा भी कर दिया था कि एक भ्रष्ट अधिकारी राजमेडिकोन में अहम रोल अदा कर रही है, तत्पश्चात आयोजकों ने कहा था कि वे इस अधिकारी से किनारा करेंगे लेकिन ऐन मौके पर बेटीसालिवाद फैलाया गया जिस मुद्दे पर शाम 7 बजे के करीब ऑडीटोरियम की सीढ़ियों पर आयोजकों एवं कुछ चिकित्सकों में तनातनी हुई, तत्पश्चात ड्रिंक काउंटर बंद कर दिए गए तो कई चिकित्सकों ने विरोध दर्ज किया, आयोजक बिगड़ते माहौल को देख गाड़ी में भागने लगे तो कुछ लोगों ने गाड़ी को जाने नहीं दिया, लेकिन अरिसदा अध्यक्ष और आईएमए के सयानों के हस्तक्षेप से श्री जैन रवाना हुए और काउंटर, खाना आदि चले, आधी रात तक ।

विवाद 2. बाबावाद

अक्षरधाम अहमदाबाद में बाबा ज्ञानवत्सल जी का मोटिवेशन एवं टेंशनमुक्ति पर सेशन था, पूरा सभागार खचाखच था, अचानक बड़े ही रूड तरीके से अनाउंस किया गया कि आगे कि सात रो से सभी महिला चिकित्सकों को हटाकर पीछे भेज दिया जाए क्यूंकि बाबाजी का प्रोटोकोल है कि वे अपने से करीब दस मीटर तक किसी भी महिला कि उपस्थिति नहीं चाहते, इस अनाउंसमेंट से पूरा ऑडिटोरियम सकते में आ गया, चिकित्सक महिला हो जा पुरुष कैसा भेद ? जब चिकित्सक ही किसी के साथ भेद नहीं करते तो उनके साथ क्यूँ ? वो भी एलाईट डॉक्टर समुदाय में । कई तर्क दिए जाने लगे कि, बाबा फ्लाईट या ट्रेन में नहीं जाते क्या या अपनी माँ से पैदा भी तो हुए हैं, डाउनलोड थोड़े ही हुए हैं । आयोजकों की समझाईस पर यह बात मान ली गयी कि आगे कि दो रो में कोई नहीं बैठेगा, पीछे सब समान तरीके से बैठेंगे, इसी बाबाजी स्टेज पर एक सेकंड से भी कम समय के लिए आये और चलते बने, जो कि फिर अगले दिन दैनिक भास्कर के मुख्य पेज पर आकर रुके । डेलिगेट्स ने आयोजकों के इस बाबा बुलावन को गलत ठहराया ।

“कुछ बड़ा करना हो तो अटैक करना सीखिए – राजस्थान कि महिला चिकित्सकों से”

विवादों को साइड में कर दें तो आयोजन बेहतरीन रहा, डॉ. वीके जैन का मुंबई से आया मेरा दोस्त वाला, डॉ. अजय चौधरी का जोशीला भाषण और डॉ. वशिष्ठ का बाबा पश्चात कंट्रोल डेमेज सेशन चर्चा में रहे ।

आशा है भविष्य में ऐसे आयोजन सादगी से बिना किसी विवाद के होंगें और चिकित्सा एकता एक अलग ऊंचाई पर जाएगी ।

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राजमेडीकोन कांफ्रेंस के लिए सरकारी डॉक्टरों को मिली छुट्टी

जयपुर के बिड़ला ऑडीटोरियम में 29-30 जून को होने वाली कांफ्रेंस में भाग लेने वाले चिकित्सकों की छुट्टी के लिए आदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जारी कर दिए हैं | इसमें अरिसदा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है | कांफ्रेंस का आयोजन भी सामूहिक रूप से आईएमए राजस्थान एवं अरिसदा द्वारा किया जा रहा है 🙂

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दोस्ती की मिशाल : बीमार साथी डॉक्टर को दी 45 लाख की मदद

शिमला के इंदिरा गाँधी मेडिकल कॉलेज की रेजिडेंट डॉक्टर्स असोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर अजय जरयाल, को ब्रेन ट्यूमर हुआ, जिसके लिए पहले उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज लिया और उसके बाद प्रोटोन कैंसर थेरेपी के लिए अपोलो चेन्नई में भेजा गया, जिसमें करीब 30 लाख रुपये का खर्चा आना था, जिसे चुकाना डॉ. जरयाल के लिए असंभव था | साथी चिकित्सकों ने इलाज के पैसे इकट्ठे करने के लिए मुहीम छेड़ी और करीब 45 लाख रुपये कि सहयोग राशि एकत्र कर ली 🙂

डॉ. जरयाल ने असोसिएशन के अध्यक्ष रहते चिकित्सकों के बहुत से मुद्दों पर लम्बी लडाइयां लड़ी हैं, चाहे वो वर्किंग कंडीशन्स सुधारने की बात हो या हॉस्टल की अथवा सेलरी से संबंधित मुद्दे, वे हमेशा डॉक्टरों के लिए खड़े रहे |

डॉ. जरयाल ने जूनियर और सीनियर साथियों को धन्यवाद दिया है |

फिर एक बार साबित हो गया कि एक चिकित्सक की परेशानी में सभी चिकित्सक साथ देते हैं 🙂

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राजस्थान के हृदय रोगियों को मिलेगा मुफ्त इलाज और ओपरेशन

(प्रतिवर्ष एक हजार हृदय रोगियों को मिल सकेगी निःशुल्क उपचार सुविधा)
जयपुर, 28 मई 2019।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डाॅ रघु शर्मा की मौजूदगी में मंगलवार को स्वास्थ्य भवन मेें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एवं राजकोट, गुजरात के प्रशान्ति मेडिकल सर्विसेज एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन (पीएमएसआरएफ) के साथ दो वर्ष का एमओयू किया गया है। इस एमओयू के बाद प्रदेश के हृदय रोगियों को निशुल्क उपचार व रैफरल सेवा मिल पाएगी। एमओयू के तहत प्रतिवर्ष एक हजार हृदय रोगियों को निःशुल्क उपचार सेवायें प्रदान की जायेंगी।
डाॅ शर्मा ने बताया कि एमओयू के तहत इस फाउण्डेशन द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, नाॅन कम्यूनिकेबल डिजीज यूनिट के समन्वय से जिलों में चिन्हित चिकित्सा संस्थानों पर पीडियाट्रिक एवं व्यस्क रोगियों की हैल्थ स्क्रीनिंग के लिये निःशुल्क शिविरों का आयोजन किया जायेगा। चिन्हित संभावित पीडियाट्रिक व कार्डियक रोगियों को ईको टेस्ट सहित जांच सेवायें निःशुल्क प्रदान की जायेगी। उन्होने बताया कि इस फाउण्डेशन द्वारा जन्मजात विकृति एवं हृदयरोग संबंधी बीमारियों से ग्रसित चिन्हित बच्चों एवं व्यस्कों को निःशुल्क उपचार सेवायें अपने चिकित्सा संस्थानों में प्रदान की जायेगी। 

राज्य सरकार की ओर से मरीज को राजकोट, गुजरात आने-जाने पर होने वाले व्यय के लिए 5 हजार रूपये की राशि दी जायेगी। 
मरीज के ठहरने व खाने-पीने एवं उपचार में होने वाले समस्त व्यय प्रशान्ति मेडिकल सर्विसेज एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा वहन किया जायेगा।  हदय रोग से संबंधी सर्जरी पर डेढ़ लाख रूपये तक का खर्चा आता है।
इस एमओयू कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री रोहित कुमार सिंह, शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री हेमन्त गेरा, मिशन निदेशक एनएचएम डाॅ समित शर्मा, प्रबन्ध ट्रस्टी पीएमएसआरएफ श्री मनोज भिमानी, निदेशक जन स्वास्थ्य डाॅ वी के माथुर सहित संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे।

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मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में राजस्थान देशभर में अव्वल

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के विशिष्ट शासन सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम डाॅ.समित शर्मा ने बताया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक एवं अतिरिक्त सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग भारत सरकार ने श्री रोहित कुमार अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर इस संबंध में जानकारी दी है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत द्वारा इस योजना को राजस्थान में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयन्ती पर 2 अक्टूबर 2011 से राजस्थान में प्रारम्भ किया गया था।

जनसामान्य को दवाईयों के भारी खर्च से बचाने और उनको राजकीय स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित करने के लिए प्रदेश में इस योजना की परिकल्पना की गई थी। तब से यह योजना राज्य में सफलतापूर्वक संचालन के 9 वर्ष पूर्ण कर चुकी है।

राजस्थान में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना का अध्ययन 18 राज्यों के प्रतिनिधि एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि यहां आकर कर चुके हैं। कुछ ही समय पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा के सलाहकार श्री पेट्रिक गेसपार्ड ने भी बस्सी और जयपुर में इस दवा योजना के क्रियान्वयन को प्रत्यक्ष रूप से देखा था। हाल ही में स्विट्जरलैण्ड के जेनेवा में भी चिकित्सा मंत्री श्री रघु शर्मा ने इसके बारे में प्रस्तुतीकरण दिया था। 

मिशन निदेशक ने बताया कि केन्द्र सरकार ने एनएचएम में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा और मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना को शामिल किया है। जो राज्य इन योजनाओं को अपने यहां लागू करना चाहते हैं, उन्हें वित्तीय सहायता एनएचएम के अन्तर्गत प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया राजस्थान में 750 से अधिक दवाइयां मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के अन्तर्गत प्रदान की जा रही हैं। जो भारत में सर्वाधिक है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत विधानसभा में इन दवाओं एवं जांचों की संख्या बढाने की भी घोषणा कर चुके हैं। आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। योजना के सफल संचालन के लिए “एमएनडीवाई सेल” की स्थापना भी की गयी है ।

राजस्थान के चिकित्सा मंत्री और मिशन निदेशक पहुंचे स्विट्ज़रलैंड –

Partick gaspard meeting with Dr. samit sharma, MD NHM

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अस्पताल बना अखाड़ा, भड़के डॉक्टर तो भागे एसडीएम : पूरी कहानी

उत्तराखंड के काशीपुर शहर के राजकीय एलडी भट्ट चिकित्सालय में 6 फरवरी को सुबह एसडीएम हिमांशु खुराना (IAS) ने औचक निरीक्षण किया । बताया जा रहा है कि हड्डी वार्ड में कुछ मरीजों ने शिकायत करी कि उनसे कुछ दवाइयां और रूई बाहर से मंगवाई गयी हैं, एसडीएम खुराना इन मरीजों से जानकारी ले ही रही थे, इसी बीच हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गहलोत भी वहीँ पुरुष वार्ड में पहुँच गए, एसडीएम ने डॉ. विकास को वार्ड से बाहर जाने को बोला तो डॉ. ने मना किया तब एसडीएम ने यह कहते हुए कि यह “चोर” हैं, अपने गार्ड से बाहर निकलवा दिया । फिर एसडीएम वहां से अस्पताल प्रभारी की कुर्सी पर जाकर जम गए और उनसे कुछ बात करने लगे, इधर अस्पताल के समस्त चिकित्सक भड़क गए और उसी कक्ष में पहुंचकर विरोध दर्ज करवाने लगे, ओपीडी बंद कर दी गई, बढ़ता विरोध देकर एसडीएम ने वहां से निकलने में ही अपनी भलाई समझी और वे उठकर जाने लगे पर सभी चिकित्सक उनके पीछे पड़ गए, डॉ. विकास बार बार उनसे पूछते रहे कि उन्हें चोर कैसे कहा गया, साथ ही वो मामला सुलटाये जाने बाबत भी कह रहे थे । डॉ. विकास इस घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड भी कर रहे थे, इसी बीच एसडीएम ने उनके मोबाइल पर गुस्से में झपट्टा भी मारा । अस्पताल से बाहर आकर फिर बहस होने लगी, एसडीएम किसी अनहोनी कि आशंका में बार बार क्रोधित डॉक्टरों को पीछे भी कर रहे थे, डॉ. विकास ने कहा कि जब अस्पताल में जो दवाई या रूई है ही नहीं तो इसके लिए वो चोर कैसे हुआ, इसमें प्रशासन की जवाबदेही है कि वो सामान उपलब्ध करवाए, चोर कहना बिलकुल गलत है इसके लिए एसडीएम को माफ़ी मांगनी चाहिए, इसी बीच एक महिला चिकित्सक ने कहा कि नई उम्र में एसडीएम बन गए हो इसका यह मतलब थोड़े ही है कि डॉक्टर को तुम चोर बता दोगे, जब एसडीएम से जवाब देते नहीं बना वे तैश में धमकाने लगे कि “सबके सब नपेंगे” , इस पर और विरोध हुआ तो वे तेजी से वहां से निकल लिए ।

देखें पूरा विडियो –

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