Refuses stay on neet pg counseling

10.08.2022
सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG 2022 स्कोर में विसंगतियों का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को NEET PG काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।कोर्ट ने कहा कि इस समय पर ऐसे निर्णय के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ कुछ डॉक्टरों द्वारा दायर एक याचिका पर विचार कर रही थी।इस याचिका में NEET PG 2022 उम्मीदवारों के प्रश्न पत्र और आंसर की जारी करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

क्‍या थी याचिकाकर्ताओं की मांग
याचिकाकर्ताओं ने आंसर की और प्रश्न पत्र जारी नहीं करने के राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि इस तथ्य को जानने के बावजूद NBA ने ऐसा किया जबकि इसके गंभीर दुष्‍परिणाम हो सकते हैं। याचिकाकर्ताओं सहित एनईईटी-पीजी 2022 उम्मीदवारों ने उनके नंबरों में विसंगति के मामले में रीइवेल्‍युएशन की अनुमति देने की मांग की थी।याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने आज पीठ को सूचित किया कि नीट पीजी 2021 से संबंधित एक याचिका भी अदालत में लंबित है। इसके चलते अदालत ने दोनों मामलों को एक साथ टैग किया और मामलों को अंतिम सुनवाई के लिए 25 अगस्त को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। काउंसलिंग पर रोक लगाने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं के वकील द्वारा एक अनुरोध के जवाब में अदालत ने कहा कि वह काउंसलिंग पर रोक लगाने का आदेश जारी नहीं कर सकती है। कांउसलिंग 01 सितंबर से शुरू होने की संभावना है।

NBA नहीं देता रीइवेल्‍यूएशन का मौका
वर्तमान याचिका उन डॉक्टरों द्वारा दायर की गई है जिन्होंने अपनी एमबीबीएस की डिग्री पूरी कर ली है और राज्य चिकित्सा परिषद के तहत रजिस्‍टर्ड हैं।याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने NEET PG 2022 के अपने स्कोर में गंभीर बेमेल पाया. हालांकि, NBA उम्मीदवारों को आंसर शीट में अपने नंबरों का पुनर्मूल्यांकन का विकल्प प्रदान नहीं कर रहा है।याचिकाकर्ताओं ने बताया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित NEET UG परीक्षा के उम्मीदवारों को आंसर की को चुनौती देने का विकल्प मिलता है. कई अन्य प्रतिष्ठित परीक्षाएं जैसे IIT-JEE, CMAT, CLAT परीक्षाएं भी आंसर की को चुनौती देने का विकल्प देती हैं। हालांकि, कोर्ट के आदेश के बाद अब काउंसलिंग समय पर ही आयोजित की जाएगी।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

kayakalp award for hospital in bhopal

भोपाल मिंटो हॉल में आयोजित कायाकल्प अवॉर्ड फंक्शन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान , स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ,एसीएस सुलेमान एवं स्वास्थ्य आयुक्त के समक्ष जिला अस्पताल रायसेन को लगातार तीसरे साल कायाकल्प सांत्वना पुरस्कार प्राप्त हुआ। जिसे जिला अस्पताल के सिविल सर्जन एके शर्मा एवं आरएमओ डॉ विनोद परमार ने प्राप्त किया l अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को उत्तम बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके फल स्वरुप लगातार तीसरे साल कायाकल्प अवॉर्ड सांत्वना पुरस्कार के रूप में प्राप्त हुआ है। इस पुरस्कार में 300000 की राशि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर काम करने के लिए दिए हैं। इसमें से 25% अस्पताल में कायाकल्प के संदर्भ में अच्छा काम करने वाले स्टाफ को वितरित किया जाएगा lहर साल कायाकल्प अभियान के तहत जिला अस्पताल का मूल्यांकन तीन स्तर में किया जाता है सर्वप्रथम इंटरनल एसेसमेंट किया जाता है इंटरनल एसेसमेंट मैं 70% आने के बाद पियर एसेसमेंट होता है पियर असेसमेंट में 70% आने के बाद राज्य स्तरीय एसेसमेंट किया जाता है तथा राज्य स्तर में 70% अंक प्राप्त करने के पश्चात पुरस्कार वितरण किया जाता है। लगभग साढे 450 बिंदुओं पर जिला अस्पताल की गुणवत्ता एवं कार्य विधि कायाकल्प अभियान के तहत हर साल जांची जाती है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

MBBS students will go to china

10.08.2022
चीन ने कहा कि उसने स्वदेश वापसी के बाद कोविड-19 से जुड़ी वीजा पाबंदियों के कारण घर में फंसे भारतीय विद्यार्थियों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की है और इनका पहला बैच बहुत जल्द आ सकता है। इससे चीन स्थित कॉलेजों में पढ़ाई दोबारा शुरू करने की प्रतीक्षा कर रहे हजारों विद्यार्थियों में उम्मीद जगी है। यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से चीनी राजनयिकों की उन सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में पूछा गया, जिसमें विदेशी विद्यार्थियों के लिए नयी वीजा नीति लाने की बात कही गई है।इस सवाल पर वांग वेनबिन ने कहा, ”हम चीन में विदेशी विद्यार्थियों की वापसी की दिशा में गहनता से काम कर रहे हैं और भारतीय छात्रों की वापसी के लिए यह प्रक्रिया शुरू हो गई है।” चीन द्वारा पढ़ाई के लिए तुरंत लौटने के इच्छुक विद्यार्थियों के नाम मांगे जाने के बाद भारत ने कई सौ विद्यार्थियों की सूची प्रस्तुत की है। वांग ने उम्मीद जताई कि बहुत जल्द भारतीय विद्यार्थियों के पहले बैच की वापसी होगी। यह पूछे जाने पर कि चीन वापस आने के इच्छुक भारतीय विद्यार्थियों के बारे में यहां भारतीय दूतावास द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची की प्रक्रिया किस चरण में है, उन्होंने कहा कि संबंधित जानकारी जल्द ही जारी की जाएगी।चीन में पढ़ाई कर रहे 23,000 विद्यार्थी, जिसमें ज्यादातर चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं, भारत वापस आने के बाद कोविड-19 से जुड़े वीजा प्रतिबंधों के कारण फंस गये और पढ़ाई के लिए चीन नहीं लौट सके। हाल के हफ्तों में श्रीलंका, पाकिस्तान, रूस और कई अन्य देशों के कुछ विद्यार्थी चार्टर्ड विमानों से चीन पहुंचे। चीन भी विभिन्न देशों से उड़ानों की अनुमति दे रहा है, लेकिन अभी तक भारत-चीन के बीच उड़ान सेवा शुरू नहीं की गई है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Gwalior treatment negligence case

10.08.2022
ग्वालियर की 3 साल की मासूम बच्ची गार्गी की मौत के 9 साल बाद कोर्ट का फैसला आया है, जिसमें उपभोक्ता फोरम इंदौर ने ग्वालियर के मेहरा अस्पताल और मैस्कॉट अस्पताल पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है। हालांकि इसके लिए मासूम के पिता ने थाने से लेकर उपभोक्ता फोरम कोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ी। अस्पताल में निमोनिया से पीड़ित बच्ची को आईवी फ्लूड दिया जाता रहा। साथ ही ट्रीटमेंट शीट से भी छेड़छाड़ की गई थी।
मासूम को निमोनिया होने पर उसके पिता ने इलाज के लिए उसे ग्वालियर के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि बच्ची को बचाने के लिए वे उसे जिस अस्पताल में लेकर जा रहे हैं, वहां से वह लौटकर नहीं आएगी। दो प्राइवेट अस्पतालों के बिना डिग्री वाले डॉक्टर, ICU के अनट्रेंड स्टॉफ की लापरवाही से माता-पिता ने अपनी मासूम बच्ची को हमेशा के लिए खो दिया।

1 घंटे के भीतर 500ml नॉर्मल सलाइन की बोतल चढ़ाई

घटना 25 जनवरी 2013 की है। तीन साल की बेटी के पिता मनोज उपाध्याय ग्वालियर में एडवोकेट हैं। शहर के थाटीपुर चौहान प्याऊ में उनका निवास है। उन्होंने अपनी बेटी गार्गी को मेहरा बाल चिकित्सालय अनुपम नगर में भर्ती कराया। यहां के डॉक्टर डीडी शर्मा ने यहां से रेफर कर दिया। गार्गी को निमोनिया की शिकायत थी। मेहरा बाल चिकित्सालय में डॉक्टर आरके मेहरा अस्पताल के संचालक थे। डॉ. अंशुल मेहरा बच्चों के डॉक्टर थे। डॉ. अंशुल मेहरा खुद को एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए की एमडी डिग्री होना बताते हुए ग्वालियर में मरीजों के साथ धोखाधड़ी करते थे। बेबी गार्गी का इलाज भी एमडी पीडियाट्रिशियन यूएसए बताते हुए किया। गार्गी को निमोनिया होते हुए भी मेहरा हॉस्पिटल में 1 घंटे के भीतर 500ml नॉर्मल सलाइन की बोतल चढ़ा दी गई और तबीयत बिगड़ने पर भी आईवी फ्लूड दिया जाता रहा। इससे बेबी गार्गी के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा। डॉ. अंशुल मेहरा ने बच्ची को भर्ती कराने के 3 घंटे बाद वेंटिलेटर की आवश्यकता बताते हुए मैस्कॉट हॉस्पिटल रेफर कर दिया था।

बिना डिग्री के एमडी पीडियाट्रिशियन कर रहे थे इलाज
गार्गी के पिता एडवोकेट मनोज उपाध्याय ने मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में मैस्कॉट के डॉ. अंशुल मेहरा की एमडी पीडियाट्रिशियन की डिग्री पर सवाल करते हुए शिकायत की थी। इस पर डॉ. अंशुल मेहरा ने मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल भोपाल के समक्ष माफी मांगी थी। साथ ही कहा था कि वह एमडी पीडियाट्रिशियन नहीं है और भविष्य में उक्त डिग्री का उल्लेख अपने नाम के आगे नहीं करेंगे।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Dr. YS Sachan death case

10.08.2022
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पूर्व उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) डॉ वाईएस सचान की जेल में संदिग्ध परिस्थिति में मौत के मामले में विशेष अदालत के सात जुलाई, 2022 के आदेश पर रोक लगाते हुए पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कर्मवीर सिंह, तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) विजय कुमार गुप्ता और अन्य को बड़ी राहत दी है।उच्‍च न्‍यायालय ने डॉ. सचान की जेल में मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत द्वारा बतौर अभियुक्त तलब किए गए तत्कालीन डीजीपी कर्मवीर सिंह, तत्कालीन अपर डीजीपी विजय कुमार गुप्ता एवं तत्कालीन जेलर भीमसेन मुकुंद के खिलाफ गत सात जुलाई को जारी तलबी आदेश पर रोक लगा दी है।अदालत ने डॉ. सचान की पत्नी मालती सचान को नोटिस जारी कर उनको इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, सीबीआई के सात जुलाई के आदेश पर अंतरिम रोक केवल याचिकाकर्ताओं के लिए रहेगी।न्यायमूर्ति ए के श्रीवास्तव की पीठ ने उपरोक्त तीनों पूर्व अधिकारियों की ओर से अलग-अलग दाखिल याचिकाओं पर यह आदेश दिया। आदेश सोमवार को जारी किया गया। पीठ ने अपने आदेश में सीबीआई के अधिवक्ता अनुराग कुमार सिंह की दलील को आधार बनाया, जिसमें उन्होंने कहा था सीबीआई ने मामले की बारीकी से जांच की थी और डॉ. सचान की मृत्यु को आत्महत्या पाए जाने के बाद ही क्लोजर रिपोर्ट लगाई गई थी।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मामले में सीबीआई जांच कर चुकी थी और डॉ. सचान की मृत्यु को आत्महत्या पाते हुए क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की गई थी। यह भी दलील दी गई कि सरकारी अधिकारी होने के कारण याचिकाकर्ताओं को तलब किए जाने से पूर्व शासन से संस्तुति प्राप्त करना अनिवार्य था।उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सचान कथित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में मुख्य आरोपी थे। यह घोटाला स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत करने के मद में जारी करोड़ों रुपये का गबन से संबंधित है। डॉ. सचान एनआरएचएम घोटाला मामले में न्यायिक हिरासत में थे और 22 जून 2011 को लखनऊ जेल में संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मौत हो गई थी।यहां की एक अदालत ने पूर्व डीजीपी सिंह, तत्कालीन एडीजी गुप्ता, तत्कालीन लखनऊ जेल के जेलर भीम सेन मुकुंद को एक दशक पहले जेल में डॉ.सचान को मारने की साजिश रचने के आरोप में मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया था।उनकी मौत के सिलसिले में 26 जून, 2011 को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ थाना गोसाईगंज में प्राथमिकी दर्ज हुई थी. इसके बाद डॉ सचान की मौत की न्यायिक जांच शुरू हुई। 11 जुलाई 2011 को न्यायिक जांच रिपोर्ट में डॉ सचान की मौत को हत्या करार दिया गया। 14 जुलाई, 2011 को उच्‍च न्‍यायालय ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।27 सितंबर, 2012 को सीबीआई ने जांच के बाद डॉ सचान की मौत को आत्महत्या करार देते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल किया।डॉ.सचान की पत्नी मालती सचान ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दी. सीबीआई की विशेष अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए सीबीआई को अतिरिक्त कार्रवाई का आदेश दिया. नौ अगस्त, 2017 को सीबीआई ने फिर से अंतिम रिपोर्ट दाखिल किया। 19 नवंबर, 2019 को सीबीआई अदालत ने इसे भी खारिज कर दिया और मालती सचान की अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज किया।मालती सचान ने अदालत में न्यायिक जांच रिपोर्ट के अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल एक्सपर्ट ओपिनियन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों के बयान के साथ ही सीबीआई द्वारा दर्ज बयानों का भी हवाला दिया। सात जुलाई 2022 को सीबीआई अदालत ने डॉ सचान की मृत्यु को हत्या का मामला मानते हुए, तत्कालीन डीजीपी सिंह, तत्कालीन एडीजीपी गुप्ता एवं लखनऊ जोन के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुबेश कुमार सिंह समेत लखनऊ जेल के तत्कालीन जेलर बीएस मुकुंद, डिप्टी जेलर सुनील कुमार सिंह, प्रधान बंदीरक्षक बाबू राम दूबे और बंदीरक्षक फहींद्र सिंह को हाजिर होने का आदेश दिया था।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Fire at Jabalpur hospital

10.08.2022
जबलपुर के न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल के शिशु वॉर्ड के करीब आग लग गई। हालांकि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन एक बार फिर मध्यप्रदेश में फायर एनओसी और फायर सेफ्टी को लेकर बहस तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में 40 बच्चे भर्ती थे, जब उसके करीब शॉर्ट सर्किट हुआ. जिसके चलते वार्ड में धुआं फैल गया और लाइट चली गई।गौरतलब है कि पिछले डेढ़ साल में प्रदेश के छह अस्पतालों में आगजनी से 23 लोगों की मौत हुई है। बता दें कि अस्पताल खोलने या नवीनीकरण के लिए 12 दस्तावेज मांगे जाते हैं। इसमें 11 तो जरूरी हैं लेकिन फायर एनओसी नहीं। सिर्फ फायर एनओसी के लिए आवेदन की पावती के आधार पर पिछले 2 साल में राज्य में 200 से ज्यादा नए अस्पतालों को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि सरकार की तरफ से अकेले जबलपुर में फायर एनओसी नहीं होने तथा अन्य कमियां पाये जाने पर अब तक 24 अस्पतालों के पंजीयन निरस्त किये जा चुके हैं।नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने पूरे मामले पर कहा है कि फायर एनओसी नगर निगम देता है फिर हेल्थ डिपार्टमेंट लाइसेंस देता है। फायर एनओसी का पालन संबंधित लोगों ने किया है या नहीं ये देखना चाहिये, ये दोनों तरफ से लापरवाही होती है। इसलिये इस तरह की घटना होती है। इसमें सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

NMC investigate from Dolo company

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने आयकर विभाग से उन डॉक्टरों का ब्योरा मांगा है, जिन्होंने डोलो 650 बनाने वाली माइक्रो लैब्स सहित छह दवा कंपनियों से कथित तौर पर मुफ्त गिफ्ट लिए. आयकर विभाग के प्रशासनिक निकाय केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जुलाई में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली डोलो-650 टैबलेट के निर्माताओं पर गलत चिजों में लिप्त होने और चिकित्सा पेशेवरों एवं डॉक्टरों को इसके उत्पादों को बढ़ावा देने के बदले में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के मुफ्त उपहार वितरित करने का आरोप लगाया था. बता दें कि आयकर विभाग ने छह जुलाई को बेंगलुरु स्थित माइक्रो लैब्स लिमिटेड के खिलाफ नौ राज्यों में 36 परिसरों पर छापेमारी की थी.एनएमसी ने गत तीन अगस्त को एक पत्र में, सीबीडीटी के अध्यक्ष नितिन गुप्ता से शामिल डॉक्टरों के नाम, पंजीकरण संख्या और पते भेजने का अनुरोध किया था ताकि उन विवरणों को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों को भेजा जा सके. एनएमसी के नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड (ईएमआरबी) के सदस्य डॉ. योगेंद्र मलिक ने पत्र में समय-समय पर संशोधित भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 की धारा 6.8 की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो दवा कंपनियों और संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र उद्योग के साथ डॉक्टरों के संबंधों में आचार संहिता निर्धारित करता है।उन्होंने कहा कि यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि पहली बार, पंजीकृत चिकित्सक द्वारा पेशेवर कदाचार के संबंध में किसी भी शिकायत का निस्तारण संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद द्वारा किया जाना है. मलिक ने कहा कि मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड (ईएमआरबी), राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग पंजीकृत चिकित्सकों के जीवन में नैतिकता लाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी कदाचार को बर्दाश्त नहीं करेगा

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Doctor committed suicide in indore

08.08.2022
इंदौर में बड़वाह (खरगोन) के सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी। वह शनिवार को पत्नी और 13 महीने की बेटी के साथ इंदौर आए थे। रविवार सुबह पत्नी ने उन्हें फंदे पर लटके देखा और अपने पिता को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।पुलिस के मुताबिक अभी कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। यह जानकारी सामने आई है कि खुदकुशी करने वाले डॉक्टर का इंदौर के रिहेब सेंटर में तीन माह तक इलाज चला था। उन्हें सोमवार को दोबारा रिहेब सेंटर ले जाने की तैयारी थी। लेकिन वे जाने को तैयार नहीं थे।

पत्नी ने देखा सबसे पहले

इंदौर के द्वारकापुरी TI सतीश द्विवेदी के मुताबिक घटना ग्रेटर वैशाली की है। यहां डॉक्टर अनिल सोलंकी (35) पुत्र स्व. बाबूसिंह सोलंकी निवासी बड़वानी ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी। पत्नी नंदिनी ने उन्हें सुबह फंदे पर लटके देखा था। डॉ. अनिल की 2019 में शादी हुई थी। उनकी 13 माह की बेटी भी है। साला भी पेशे से डॉक्टर है ओर ससुर रिटायर्ड फूड ऑफिसर है। पत्नी नंदिनी से सुबह पति को फंदे पर लटके देखा। जिसके बाद पिता माधव सिंह को जानकारी दी।

रिहेब सेंटर में चला था उपचार

पुलिस के मुताबिक डॉ. अनिल ने इंदौर के एक रिहेब सेंटर में उपचार कराया था। उनके पिता की काफी समय पहले मौत हो चुकी है। छोटा भाई भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पुलिस पूरे मामले में जांच कर रही है। पहले पुलिस द्वारा इनकी पोस्टिंग बड़वानी बताई जाती रही, लेकिन बाद में परिवार ने पुलिस को स्पष्ट किया कि वे खरगोन जिले के बड़वाह के सरकारी अस्पताल में पदस्थ थे।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

NMC team check medical college

08.08.2022
मेडिकल काॅलेज की व्यवस्थाएं देखने इसी माह इंडियन मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की टीम अाएगी। निरीक्षण के बाद थर्ड ईयर शुरू करने का फैसला हाेगा। थर्ड ईयर में 100 स्टूडेंट काे प्रवेश दिया जाएगा। मेडिकल काॅलेज और राजमेस के अधिकारियाें ने फैकल्टी, उपकरण और नाॅन क्लीनिकल स्टाफ की भर्ती कर रहे हैं।टीचिंग फैकल्टी के आवेदन लेकर चयन कर लिया है। 12 अगस्त ज्वाइनिंग की अंतिम तिथि है। मेडिकल काॅलेज में सर्जरी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्राेफसर, गायनिक में एसाेसिएट, मेडिसिन में असिस्टेंट, पीसीएम में एसाेसिएट प्राेफेसर के एक-एक पर नियुक्ति हाेगी। रेडियाेलाॅजी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्राेफेसर का पद भरने की कवायद चल रही है। सीनियर डेमाेस्ट्रेटर के पद भी भरे जाएंगे। मेडिकल काॅलेज स्तर पर सीनियर रेजीडेंट और जूनियर रेजीडेंट के पद भरने काे लेकर प्रक्रिया पूरी कर ली है।मेडिकल काॅलेज की लैब में उपकरण और लाईब्रेरी में पुस्तकें समेत दूसरी सुविधाएं भी जुटा ली है। अटैच एसके अस्पताल में भी सुविधाएं जुटाई जा रही है। अस्पताल में निर्धारित बैड की संख्या, ऑपरेशन थिएटर, लेबाेरेट्री समेत तमाम सुविधाएं पहले से ही संचालित है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

NMC approves 2 new medical colleges

08.08.2022

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने हाल ही में राज्य में दो नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है, एक पंचमहल जिले के गोधरा में और दूसरा पोरबंदर में।एनएमसी द्वारा 29 जुलाई को दो कॉलेजों का निरीक्षण किया गया था, जिसके बाद उन्होंने एक सप्ताह से भी कम समय में मंजूरी जारी कर दी थी।वर्तमान में, राज्य में 30 मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें निजी, सरकारी और अनुदान प्राप्त कॉलेज शामिल हैं, जिनमें कुल उपलब्ध मेडिकल सीटों की संख्या 5,500 है।नए स्वीकृत दो कॉलेजों में प्रत्येक में 100 सीटें होंगी, जिससे राज्य में उपलब्ध मेडिकल सीटों की कुल संख्या बढ़कर 5,700 हो जाएगी।राज्य में प्रस्तावित पांच नए मेडिकल कॉलेजों में से एनएमसी ने उनमें से दो के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। अन्य तीन प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज राजपीपला, नवसारी और मोरबी में स्थित हैं। एनएमसी ने कथित तौर पर राजपिपला, नवसारी और मोरबी में अन्य तीन प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों का भी निरीक्षण किया था।स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों का निर्माण 660 करोड़ रुपये और प्रत्येक में 330 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। और सूत्रों के अनुसार, खर्च का 60% केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा जबकि शेष 40% राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा।यह कहते हुए कि दो कॉलेजों को एनएमसी द्वारा अनुमोदित किया गया है, गुजरात के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मनोज अग्रवाल ने कहा, “प्रत्येक में 100 एमबीबीएस सीटें होंगी। इससे राज्य के छात्रों को बड़े पैमाने पर मदद मिलेगी।” उन्होंने कहा कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि एनएमसी जल्द से जल्द तीन अन्य कॉलेजों के लिए भी मंजूरी दे देगा।नए कॉलेजों में प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, छात्रावास, ट्यूटर और पैरामेडिकल स्टाफ जैसी सुविधाएं होंगी। गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी (जीएमईआरएस) ने हाल ही में प्रस्तावित नए कॉलेजों में मेडिकल कॉलेजों में शिक्षक के रूप में काम कर रहे 258 डॉक्टरों को स्थानांतरण आदेश जारी किए थे।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓