Ayushman scheme stopped in punjab

पंजाब में आयुष्मान भारत योजना का दिवाला निकल गया है. इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजाब सरकार सात महीने का बकाया 16 करोड़ पीजीआई चंडीगढ़ को नहीं दे सका. इस वजह से पीजीआई चंडीगढ़ ने पंजाब के मरीजों का इलाज बंद कर दिया है. पीजीआई पंजाब के 1200 से 1400 मरीजों का इस योजना के तहत इलाज करता है. द ट्रिब्यून के मुताबिक पंजाब के स्वास्थ्य सचिव अजय शर्मा ने कहा कि पीजीआई को एक हफ्ते में इसका भुगतान कर दिया जाएगा. अजय शर्मा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार का 300 करोड़ रुपये बकाया है. मामला वित्त विभाग के पास है और उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।

इन अस्पतालों का है बकाया
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर 32 ने इस साल मार्च से पंजाब के मरीजों का इलाज 2.3 करोड़ रुपये बकाया होने के बाद रोक दिया था. पंजाब सरकार पर इस योजना के तहत जीएमसीएच सेक्टर 32, जीएमएसएच सेक्टर 16 और चंडीगढ़ के निजी अस्पतालों का तीन करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. आयुष्मान भारत सेहत बीमा योजना 20 अगस्त, 2019 को शुरू की गई थी. इस योजना को पंजाब की कम से कम 65 प्रतिशत आबादी को वित्तीय सहायता को तहत स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान किया जाता है. यह प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये का पात्रता-आधारित स्वास्थ्य बीमा कवर है.

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Perfect use of ayushman’s incentive in hospital by doctors

29.07.2022
सरकारी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना की इंसेंटिव राशि के बंटवारे को लेकर मचे बवाल के बीच मेडिसिन विभाग के 12 डॉक्टरों ने कहा है कि कई जांचें, कई तरह की सुविधाएं अस्पताल में नहीं है। इस राशि से अस्पताल को अपग्रेड करना चाहिए।मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. वीपी पांडे, डॉ. शिवशंकर शर्मा, डॉ. संजय दुबे, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. महेंद्र चौरसिया, डॉ. भूपेंद्र सिंह चौहान, डॉ. प्रणय बाजपेयी, डॉ. पुनीत गोयल, डॉ. अंकित मेश्राम सहित 12 डॉक्टरों का कहना है कि इस राशि से अस्पताल को अपग्रेड करना चाहिए।अस्पताल में आज तक खुद का सीटी-एमआरआई जांच सेंटर स्थापित नहीं हो पाया है। थोड़े-थोड़े दिन में सोडियम, पोटेशियम की जांच से इनकार कर दिया जाता है। थायराइड की जांच नहीं हो पा रही है। पूछने पर बताया जाता है कि किट खत्म हो गई। क्रिएटिनिन, एबीजी जैसी सामान्य जांचें भी कई बार नहीं हो पाती हैं। मरीजों को बाहर भेजना पड़ रहा है।

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Advantage of chiranjivi’s yojna in Jhunjhunu

22.07.2022
जिले के बीडीके अस्पताल में चिरंजीवी योजना लागू होने के बाद मोतियाबिंद के ऑपरेशन दोगुना हाे गए हैं। लेकिन इसके उलट सर्जरी और ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन पहले की तुलना में कम हाे गए हैं। बीडीके अस्पताल के ऑपरेशन संबंधित आंकड़ाें में यह जानकारी सामने आई है। इस साल जनवरी से जून तक पांच महीने के दाैरान अस्थि विभाग, मेडिकल सर्जरी और आई यूनिट में हुए ऑपरेशन काे लेकर सामने आया कि आंखाें के ऑपरेशन की तादाद पांच साल में सर्वाधिक हाे गई है।बीडीके अस्पताल में 2019-20 में पूरे साल 879 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए थे। जाे 2020-21 में घटकर 530 ही रह गए। लेकिन इसके बाद चिरंजीवी याेजना शुरू हाेने के बाद 2021-22 में यह आंकड़ा 1231 पर पहुंच गया। इस साल अब तक तीन महीने में ही 756 के मोतियाबिंद के ऑपरेशन हाे चुके हैं। पहले हर महीने बीडीके अस्पताल में 73 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन हाेते थे। यह आंकड़ा अब 252 पहुंच गया है।अस्पताल में चार नेत्र विशेषज्ञाें काे टारगेट देकर ऑपरेशन करा रहे हैं और ऑपरेशन डे भी हफ्ते में दाे कर दिए हैं। संसाधन बढ़ा रहे हैं। चिरंजीवी याेजना का भी लाभ मिल रहा है। – डाॅ. वीडी बाजिया, पीएमओ, बीडीके अस्पताल

एक सही फैसले से मिली मरीजों काे राहत, पांच महीने में रिकाॅर्ड 1250 ऑपरेशन
बीडीके अस्पताल में पहले हर सप्ताह एक बार मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जाते थे। चिकित्सकाें की संख्या बढ़ी ताे सप्ताह में दाे बार ऑपरेशन डे रखने का फैसला लिया। इससे ऑपरेशनों की संख्या दाेगुना हाे गई। पांच महीने के दाैरान बीडीके में रिकार्ड 1250 ऑपरेशन हाे चुके हैं। जाे बीते पांच साल में सर्वाधिक आंकड़ा है। इसमें जनवरी में 113, फरवरी में 178, मार्च में 203, अप्रैल में 224, मई में 250 और जून में 282 मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए हैं।

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Rajshree Yojna guideline

बेटियां घर की लक्ष्मी हैं लेकिन कई कारणों से बालिकाओं की जन्म दर कम रही है। बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने, उन्हें शिक्षित व सशक्त बनाने के लिए सरकार ने 1 जून 2016 से मुख्यमंत्री राजश्री योजना राज्य में शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य है कि बेटियों की जन्म दर बढ़े, बेटियों को अच्छी परवरिश मिले व बेटियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ें।

विभिन्न चरणों में बालिका के अभिवावकों को आर्थिक सहायता

बालिका के जन्म से लेकर कक्षा 12वीं तक बेटी की पढ़ाई, स्वास्थ्य व देखभाल के लिए अभिभावक को 50,000 तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। ये राशि निम्न चरणों में दी जाती है।

  • बेटी के जन्म के समय 2500 रुपये
  • एक वर्ष का टीकाकरण होने पर 2500 रुपये
  • पहली कक्षा में प्रवेश लेने पर 4000 रुपये
  • कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये
  • कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर 11000 रुपये
  • कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर 25000 रुपये

योजना के लाभ की पात्रता

राजश्री योजना की पहली दो किश्त उन सभी बालिकाओं को मिलेगी जिनका जन्म किसी सरकारी अस्पताल एवं जननी सुरक्षा योजना (जे.एस.वाई.) से रजिस्टर्ड निजी चिकित्सा संस्थानों में हुआ हो। ये दोनों किश्त उनके अभिभावकों को तब भी मिलेगी जिनके तीसरी संतान बालिका हो, किंतु योजना में आगे की किश्तों का लाभ उन्हें नहीं मिल पायेगा।

अब राजश्री योजना का लाभ लाभार्थी को सीधा अपने बैंक खाते में मिले, इसके लिए भामाशाह कार्ड से योजना को जोड़ा गया है।

अब राजश्री योजना का लाभ सुविधापूर्वक अपने खाते में प्राप्त करने के लिए भामाशाह कार्ड ज़रूर बनवायें। योजना के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए अपने ज़िले में कार्यक्रम अधिकारी, महिला अधिकारिता या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से सम्पर्क करें।

भामाशाह कार्ड की अनिवार्यता

  • योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी का भामाशाह कार्ड अनिवार्य है।
  • 15 मई, 2017 के बाद लाभार्थी का भामाशाह कार्ड होने पर भुगतान सीधे उसके बैंक खाते किया जायेगा।
  • लाभ प्राप्त करने के लिए गर्भवती महिला प्रसव पूर्व जांच/एएनसी जांच के दौरान भामाशाह कार्ड एवं भामाशाह कार्ड से जुड़ा हुआ बैंक खाते का विवरण निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पर ए.एन.एम./आशा/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा राजकीय चिकित्सा संस्थान में उपलब्ध करवायें।
  • जिन लाभार्थी महिलाओं का भामाशाह नामांकन नहीं हुआ है, ऐसी महिलाएं अपने निकटतम ई-मित्र केन्द्र से भामाशाह कार्ड बनवाकर निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र अथवा राजकीय चिकित्सा संस्थान में विवरण उपलब्ध करवाये।