रूस से जंग के बीच यूक्रेन में अपनी पढ़ाई छोड़कर भारत लौटने को मजबूर मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बुरी खबर है. इन छात्रों को भारत के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिल सकेगा. शुक्रवार, 22 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से इस बारे में लोकसभा में जानकारी दी गई. केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री भारती पवार ने Lok Sabha में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि ‘नेशनल मेडिकल कमीशन ने इसकी अनुमति नहीं दी है’. इन एनएमसी की मंजूरी के बिना Ukraine से लौटे इन मेडिकल स्टूडेंट्स को न तो किसी भारतीय मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर मिल सकेगा, न ही इन्हें एकोमोडेट किया जा सकेगा.
IMC और NMC Act में ऐसा कोई प्रावधान नहीं!
केंद्रीय राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने लोकसभा में बताया कि इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 और नेशनल मेडिकल कामीशन एक्ट 2019 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत विदेश से लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स को भारत के मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर किया जा सके. इसलिए अपने Medical Colleges में इन स्टूडेंट्स को जगह देने के राज्यों के फैसले को एनएमसी ने मंजूरी नहीं दी है
विदेश से मेडिकल करने वालों पर लागू होते हैं FMG नियम
मंत्री ने कहा कि ‘विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स/ ग्रेजुएट्स या तो स्क्रीनिंग टेस्ट रेगुलेशन 2002 में कवर होते हैं, या फिर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट रेगुलेशन 2021 के तहत.’
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