Pledge for improve health service

05.08.2022
स्वास्थ्य एक ऐसी आवश्यकता है जो हर मनुष्य के जीवन में प्राणवायु के समान मूल्यवान है. यही वजह है कि मध्यप्रदेश में भी स्वास्थ्य सेवा प्रदाय तंत्र को पिछले लगभग दो दशक में सुदृढ़ बनाया गया है. एक बार स्वास्थ्य सेवा प्रदाय तंत्र की आधारभूत संरचना स्थापित कर लेने के बाद इसके सम्यक्, सुचारू और निर्बाध संचालन की आवश्यकता होती है।देश की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में मध्यप्रदेश सरकार ने इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य सेवाओं में सम्पूर्ण सुधार का संकल्प लिया है. नाम दिया है सम्पूर्ण कायाकल्प अभियान. इस अभियान में प्रदेश सरकार अपनी स्वास्थ्य संस्थाओं एवं सेवाओं को दुरुस्त बनाते हुए उनमें आवश्यक विस्तार भी करेगी. न सिर्फ़ नागरिकों के लिए शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं का वातावरण बदला जाएगा बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों, चिकित्सा उपकरणों और अधोसंरचना के माध्यम से श्रेष्ठ स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएंगी.अभियान में प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थाओं की अधोसंरचना का विकास एवं भवन रख-रखाव का कार्य समय-सीमा में किये जाने का संकल्प है. चिकित्सा उपकरण और अस्पताल के फर्नीचर की उपलब्धता, स्वास्थ्य संस्थाओं में जाँच -परीक्षण सेवाओं एवं दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, डायलिसिस एवं कैंसर की नई उपचार सेवाओं का विकास, ब्लड बैंक एवं ब्लड स्टोरेज का सुदृढ़ीकरण, विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिये टेली मेडिसिन सेवाओं का विस्तार, रोगियों के लिए हितग्राहीमूलक सेवाओं का विकास, खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला की स्थापना और स्वास्थ्य सेवाओं में जन-भागीदारी को बढ़ावा देने जैसे कार्यों को मिशन मोड में कार्य किया जाएगा।वर्तमान में प्रदेश में 52 जिला चिकित्सालय, 119 सिविल अस्पताल, 356 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 1,266 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 10 हजार 287 उप स्वास्थ्य केंद्र का एक सशक्त नेटवर्क है. इन्हीं के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ केंद्र एवं प्रदेश शासन की स्वास्‍थ्‍य से जुड़ी विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाता है. अभियान के अंतर्गत स्वास्‍थ्‍य संस्थाओं के निर्माण तथा उन्नयन कार्यों और नवीन सेवाओं एवं उपकरणों की पूर्ति के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का बजट बढ़ाया गया है. पिछले वर्ष की तुलना में लगभग चार गुना की बढ़ोत्तरी करते हुए इस वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर कुल 43486.83 लाख किया गया है. इस राशि में से विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं के अधोसंरचना विकास कुल 14639.69 लाख रुपए की राशि व्यय की जाएगी.सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों के समय की बचत के लिए भी राज्य सरकार गम्भीर है. मरीज़ों और उनके परिजनों की सहायता के लिए Help Desk/ सहायता केंद्र की स्थापना भी की जा रही है. इसके अलावा अस्पताल में प्रतीक्षा का समय कम करने के लिये Queue Management System एवं BMI Scanning मशीन की स्थापना भी की जाएगी।प्रदेश में सीटी स्क़ेन, सोनोग्राफ़ी, डिजिटल एवं कंप्यूटराइज्ड एक्स-रे मशीनों जैसे अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं. पैथालोज़ी जांच सेवाओं के अंतर्गत ज़िला चिकित्सालयों में हीमेटोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, हॉर्मोनल जांच, कैंसर मार्कर आदि जैसी उन्नत जांचों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा चुकी है. हब एंड स्पोक मॉडल से सी.बी.सी., किड्नी और लिवर फंक्शन टेस्ट, मधुमेह जांच, सीरम कोलेस्ट्राल आदि जैसी अत्याधुनिक जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. साथ ही एबीजी मशीन, ईटीओ स्टर्लायजर, एनेस्थेसीआ वर्क स्टेशन, हाइड्रोलिक ओ टी टेबल, ओपीडी किट (स्टेथॉस्कोप, डिजिटल थर्मामीटर, पर्क्यूशन हैमर, एलईडी टॉर्च, मेजरिंग टेप, ओटोस्काप, ट्यूनिंग फोर्क) एवं बीएमआई मशीन जैसे अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं. अस्पताल में मरीज़ों के लिए फ़र्नीचर,चादर, तकियों, गद्दे तथा उनके कवर भी अब नए होंगे.डायलिसिस की सुविधा पाने के लिए प्रतीक्षा न करना पड़े, इसके लिए चरणबद्ध ढंग से सुविधा का विस्तार किया जा रहा है. अब जिला चिकित्सालयों में न्यूनतम 05 डायलिसिस मशीन उपलब्ध कराई जायेंगी तथा इन्हें विश्व स्तरीय मापदंड के अनुरूप विकसित किया जायेगा. साथ ही राज्‍य स्‍तरीय डायलिसिस नेटवर्क के द्वारा रोगियों को फोन के माध्यम से अपॉइन्ट्मेन्ट मिल सकेगा. वर्तमान में प्रदेश में 194 डायलिसिस मशीन उपलब्ध हैं तथा 102 नई मशीन क्रय की जा रही हैं.

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Improving health system in village

मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले हर छात्र को अब ग्रामीण क्षेत्र में तीन साल के लिए पांच-पांच परिवार को गोद लेना होगा। इस अवधि में प्रत्येक छात्र परिवार सदस्यों से जान पहचान बढ़ाते हुए उनके घर के डॉक्टर बनेंगे। परिवार के सदस्यों की बीमारी को जानने के साथ ही कारणों का पता लगाते हुए उसकी रिपोर्ट तैयार करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर उस गांव की स्थिति, पर्यावरण, पानी व अन्य कारणों से होने वाली बीमारियों को पता लग पाएगा।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने इस संबंध में गाइडलाइन जारी करते हुए समस्त मेडिकल कॉलेजों को पालना के आदेश दिए। आदेश की पालना में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने अभी बडग़ांव पंचायत समिति क्षेत्र चुनिंदा गांव का दौरा किया। अब ये छात्र ब्लॉक सीएमएचओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व आशा सहयोगिनियों के माध्यम से पांच-पांच परिवार गोद लेंगे।ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की पहुंच बढ़ाने व मेडिकल छात्रों को फील्ड की जानकारी के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना को एनएमसी ने परिवार गोद कार्यक्रम का नाम दिया है। इस प्रोग्राम के तहत छात्रों को कॉलेज में किताबी ज्ञान ,अस्पताल में मरीजों कीे सेवा के साथ ही फील्ड का नॉलेज मिलेगा। वे गोद लिए परिवार के व्यवहार, बीमारियों, रहन-सहन एवं व्यवहार से जुड़े मुद्दों के बारे में जान पाएंगें।

यूं शुरू की योजना
– ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी
– चिकित्सकों का मरीजों के प्रति व्यवहार सुधार
– ग्रामीण क्षेत्र में होने वाली बीमारी से समय पर पता लगाना
– काउंसलिंग कर परिवार को समय पर इलाज करवाना
– ग्रामीण परिवारों से संपर्क बढ़ाना
– गांव व गोद लिए परिवार जरूरतों को समझना
– भविष्य में चिकित्सकों को गांवों में तैनाती के लिए भी तैयार करना।

इस कारण महत्वपूर्ण है योजना
– अधिकांश आबादी गांवों में रहती है उसके बावजूद डॉक्टर शहरी क्षेत्रों में हैं, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगोंं की बीमारियों के कारणों को पता नहीं चल पाता। इस महत्ती योजना से लाभ होगा।
– वर्तमान में कम्युनिटी मेडिसिन पाठ्यक्रम के डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रेनिंग लेनी होती है, लेकिन इस कार्यक्रम में अब परिवार को गोद लेना होगा, जिससे बीमारी व कुरीतियों को पता चल पाएगा।
एनएमसी की यह महत्ती योजना है इससे भावी पीढ़ी के नए चिकित्सकों को फील्ड का नॉलेज होगा। ग्रामीणों का चिकित्सकों के प्रति विश्वास बढ़ेगा और वे खुलकर पीड़ा बता सकेंगे, ताकि उस क्षेत्र की स्थिति व बीमारियों का पता लग सकेगा।

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bad health service in mp

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के हाल कितने बदहाल हैं, इसका एक उदाहरण प्रदेश की आर्थिक राजधानी और सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से सामने आया, जहां मॉर्चुरी तक पहुंचने की सड़क खराब होने के कारण परिजनों को शव खाट पर रखकर लाना पड़ा। इतना ही नहीं परेशान परिजन जब आधा किलोमीटर चलकर अपने कंधों पर खाट और खाट पर शव रखकर लाए, तो मोर्चुरी में ताला लगा मिला, जिसके बाद हताश परिजनों ने शव साइड में रख दिया, और ताला खुलने का इंतजार करने लगे। वहीं अब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें लोग मध्य प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को कोस रहे हैं।
कुछ ऐसा है पूरा मामला
यह पूरा मामला शहर के जिला अस्पताल का है, जहां द्वारकापुरी क्षेत्र के रहने वाले किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद परिजन शव लेकर मॉर्चुरी पहुंचे, जहां मॉर्चुरी तक जाने की सड़क खराब होने के कारण गाड़ी मॉर्चुरी तक नहीं जा सकी, जिसके बाद परिजन लगभग आधा किलोमीटर पैदल चलकर शव को खाट पर रख मॉर्चुरी पहुंचे, जिसके बाद यहां भी ताला लगा मिला।

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