medical college suicide case

06.08.2022
इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट सुसाइड केस में पुलिस पैटर्न लॉक नहीं खोल पा रही है। सायबर एक्सपर्ट भी उसका लॉक खोलने में सफल नहीं हो सके। एसआईटी ने सुसाइड करने वाले स्टूडेंट का मोबाइल जब्त कर भोपाल स्थित सायबर ऑफिस भेजा था। पैटर्न लॉक नहीं खुलने से पुलिस को जांच की दिशा नहीं मिल पा रही है। इधर, ग्रामीण आईजी द्वारा बनाई गई एसआईटी में से डीसीपी का ट्रांसफर होने से भी जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस मामले में पकड़ाए दो छात्रों को भी कोर्ट से जमानत मिल गई है।
चेतन पाटीदार (22 वर्ष) पुत्र दिनेश पाटीदार निवासी ग्राम मौलाना जिला उज्जैन ने 31 मार्च को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। इस मामले में परिवार ने कालेज के डीन डॉ. जीएस पटेल और तृतीय वर्ष के दो छात्रों रोमिल सिंह व दुर्गेश हाड़ा, होशांक वर्मा और अर्पित हाड़ा पर आरोप लगाए थे। पुलिस ने इसमें से डीन डॉ. पटेल और रोमिल व दुर्गेश हाड़ा को आरोपी बनाकर केस दर्ज किया था। दोनों छात्रों की गिरफ्तारी हो गई थी। लेकिन डीन डॉ. जीएस पटेल को सबूत के अभाव में पूरे मामले की जांच करने पर गिरफ्तार करने की बात कही गई थी।

भोपाल में सायबर एक्सपर्ट नहीं खोल पाए पैटर्न लॉक
इंदौर से एसआईटी की टीम में एडिशनल डीसीपी शशिकांत कनकने, अनिल चौहान और राजीव त्रिपाठी मामले की जांच कर रहे थे। उन्होंने खुड़ैल पुलिस द्वारा जब्त चेतन का मोबाइल भोपाल सायबर ऑफिस भेजा था। यहां से भी मोबाइल बिना लॉक खुले वापस आ गया। एक्सर्ट उसका लॉक नहीं खोल पाए। इधर एसआईटी के एक अधिकारी अनिल चौहान का ट्रांसफर हो गया। जिसके कारण जांच रूक गई।

दोनों छात्रों को मिली जमानत
चेतन पाटीदार की मौत के मामले गिरफ्तार किये गए दोनों छात्र रोमिल और दुर्गेश को कोर्ट ने जमानत दे दी। परिवार के मुताबिक उनके दो बार एसआईटी की टीम ने बयान लिये हैं। अब मोबाइल बाहर के सायबर एक्सपर्ट के यहां भेजने की बात कही जा रही है।

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Suicide in aiims,bhopal

भोपाल एम्स में MBBS की स्टूडेंट ने रविवार देर शाम गर्ल्स हॉस्टल की तीसरी मंजिल से कूदकर सुसाइड कर लिया। मारिया मथाई नाम की यह छात्रा एम्स में सेकंड ईयर की स्टूडेंट थी। छात्रा के आधार कार्ड के मुताबिक मारिया एर्नाकुलम (केरल) की रहने वाली थी। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। बागसेवनिया थाना टीआई के अनुसार देर शाम करीब 6:30 बजे छात्रा ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाई है। फिलहाल घटनास्थल से सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। शव को पीएम हाउस में रखवा दिया गया है। फिलहाल कारणों का भी पता नहीं चल सका है। मामले की जांच की जा रही है।

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NMC investigates the medical college

30.07.2022
राजधानी भोपाल के महावीर मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परिषद (एनएमसी) की छह सदस्यीय टीम ने पहुंचकर छानबीन की। टीम जब यहां निरीक्षण करने पहुंची तो गिने–चुने मरीज मिले। मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी स्टाफ भी गायब मिला। टीम को निरीक्ष्रण के दौरान मेडिकल कॉलेज में बडे़ पैमाने पर संसाधनों की कमी पाई गई है। टीम ने जांच पूरी कर ली है।

पहली बार छह सदस्यीय टीम ने की जांच

राजधानी में आमतौर पर एनएमसी की टीम में तीन सदस्य ही जांच करने आते हैं लेकिन पहली बार नेशनल मेडिकल कमीशन की तरफ से छह सदस्यीय दल को निरीक्षण करने के लिए भेजा गया है।इस मामले में महावीर मेडिकल कॉलेज के प्रशासक राजेश जैन का कहना है कि ये निरीक्षण रुटीन प्रोसेस है। ये इंस्पेक्शन हर साल होता है। टीम ने दूसरे मेडिकल कॉलेजों का भी निरीक्षण किया है। टीम ने रिपोर्ट में क्या लिखा इसकी जानकारी नहीं हैं। लेकिन मेडिकल कॉलेज में सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक मिली हैं।

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Fraud of numbers

29.07.2022
मप्र की इकलौती जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी में अब नई गड़बड़ी सामने आई। यह गड़बड़ी नंबरों में की गई। जो स्टूडेंट जिस सब्जेक्ट में गैरहाजिर रहे, उनमें उन्हें पास कर दिया और बाकी में फेल। इनमें पहला नाम नम्रता का है, जो फिजियोथैरेपी न्यूरो सेकंड ईयर की स्टूडेंट है। इनका रिजल्ट जब आया तो यह फेल थी, लेकिन जब उन्होंने देखा कि जिस थ्योरी के पेपर में वो गैरहाजिर थीं, उसमें उन्हें 40 नंबर मिल गए और इंटरनल में 17 मार्क्स दिए गए। दूसरा मामला, नेहा नामक स्टूडेंट का है। गैरहाजिर वाले सब्जेक्ट मेडिसिन में उन्हें पासिंग मार्क्स दे दिए गए।ऐसी ढेरों गड़बड़ियों का प्रमाण भी विवि की बैठक के मिनिट्स में मिलता है। 22 जुलाई को आयोजित कार्य परिषद की मीटिंग में विषय 4 से 7 तक में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर के स्टूडेंट के जिक्र के साथ उल्लेख है कि अंकों को चढ़ाने में गलती हो रही है। इसे टायपिंग एरर बताकर गलती करने वालों को माफी दी जा रही है।

मिनट्स में स्वीकार की खामियां… टायपिंग एरर बताकर गलती कर रहे माफ

मेडिकल यूनिवर्सिटी की 22 जुलाई को कार्य परिषद की मीटिंग में कुलपति आईएएस बी चंद्रशेखर उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी में रखे गए मिनट्स में 3 मामले अंकों की गलती के थे। इनमें पहला मामला भोपाल के मेयो कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंस का है। इस कॉलेज के स्टूडेंट विक्रम सिंह वर्मा को पैथोलॉजी के फर्स्ट पेपर में प्रैक्टिकल नंबर 77 की जगह 40 दे दिए गए।

दूसरा मामला, इंदौर के चोइथराम कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंस की स्टूडेंट कामना तिवारी का है। पीटी एथिक्स मैनेजमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन के पेपर में 52 की जगह 2 अंक दे दिए गए। तीसरा मामला, ग्वालियर के लाइफ साइंस कैंसर हॉस्पिटल कैम्पस के छात्र दीपक कुशवाह का है। इन्हें बायो कैमिस्ट्री के पेपर में 90 की बजाय 51 मार्क्स दे दिए गए।

हां, वो मामले डेटा एंट्री की त्रुटियों से संबंधित हैं। इनका परीक्षण किया गया है। हजारों छात्रों के अनेक पेपर होते हैं। प्रैक्टिकल डेटा एंट्री में कुछ त्रुटियां संभव हैं, जिन्हें सुधारा जाता है। यदि कोई जानबूझकर ऐसा करता है तो सख्त कार्रवाई करेंगे।

-बी. चंद्रशेखर, कुलपति, मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर

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Outer site student will not get admission in indian medical colleges

रूस से जंग के बीच यूक्रेन में अपनी पढ़ाई छोड़कर भारत लौटने को मजबूर मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बुरी खबर है. इन छात्रों को भारत के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिल सकेगा. शुक्रवार, 22 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से इस बारे में लोकसभा में जानकारी दी गई. केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री भारती पवार ने Lok Sabha में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि ‘नेशनल मेडिकल कमीशन ने इसकी अनुमति नहीं दी है’. इन एनएमसी की मंजूरी के बिना Ukraine से लौटे इन मेडिकल स्टूडेंट्स को न तो किसी भारतीय मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर मिल सकेगा, न ही इन्हें एकोमोडेट किया जा सकेगा.

IMC और NMC Act में ऐसा कोई प्रावधान नहीं!
केंद्रीय राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने लोकसभा में बताया कि इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 और नेशनल मेडिकल कामीशन एक्ट 2019 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत विदेश से लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स को भारत के मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर किया जा सके. इसलिए अपने Medical Colleges में इन स्टूडेंट्स को जगह देने के राज्यों के फैसले को एनएमसी ने मंजूरी नहीं दी है

विदेश से मेडिकल करने वालों पर लागू होते हैं FMG नियम
मंत्री ने कहा कि ‘विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स/ ग्रेजुएट्स या तो स्क्रीनिंग टेस्ट रेगुलेशन 2002 में कवर होते हैं, या फिर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट रेगुलेशन 2021 के तहत.’

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Without studies medical university give degree to student in Jabalpur

12.07.2022

मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर में 278 स्टूडेंट्स की परीक्षा के नाम पर फर्जीवाड़े का खुलासा है। व्यापमं घोटाले की तर्ज पर मेडिकल कॉलेज से लेकर नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश से लेकर पढ़ाई में नामांकन नहीं होने के बाद भी परीक्षा में बैठाकर डिग्री बांट दी गई। उनके रिकॉर्ड में कई तरह की गड़बड़ी सामने आई है। ऐसे छात्रो ंने किसी भी कॉलेज में प्रवेश तक नहीं लिया।फर्जीवाड़े में मेडिकल कॉलेज, मेडिकल यूनिवर्सिटी और परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी माइंडलॉजिस्टिक इन्फ्राटेक की सांठगांठ उजागर हुई है। यह चौंकाने वाला खुलासा मप्र हाईकोर्ट में पेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस केके त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी की 42 पेज की रिपोर्ट में हुआ है।

फर्जीवाड़ा ऐसा कि बदल देते थे रिकॉर्ड
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने बताया, परीक्षा संचालन एजेंसी माइंडलॉजिस्टिक इन्फ्राटेक के अफसरों से जांच कमेटी ने परीक्षाओं के सभी रेकॉर्ड मंगवाए। अफसरों से पूछताछ भी की गई। इसमें खुलासा हुआ कि परीक्षा के पहले ही एजेंसी को छात्रों की जानकारी एनरोलमेंट नंबर सहित मिलती थी, जो एजेंसी के सर्वर पर रहती थी। परीक्षा का कार्यक्रम घोषित होने की सूचना एजेंसी को मिलने पर पोर्टल पर दी जाती थी। इसे संबंधित मेडिकल कॉलेज व छात्र एक्सेस करते थे। छात्र पोर्टल से परीक्षा फॉर्म भरते थे।

दोबारा यूनिवर्सिटी सुधार के लिए खोलती थी पोर्टल

कॉलेज के प्राचार्य परीक्षा फॉर्म चेक कर पोर्टल पर वापस डालने के साथ ही इसे एजेंसी को भेज देते थे। परीक्षा केंद्र और छात्रों की डिटेल्स चेक होने के बाद यह जानकारी पोर्टल पर अपलोड होती थी। साजिशपूर्ण तरीके से इसी दौरान एक विशेष छात्र के फॉर्म में गलती होने की सूचना देकर संबंधित मेडिकल कॉलेज यूनिवर्सिटी से फिर से सुधार के लिए पोर्टल खोलने की अनुमति मांगता था। यह अनुमति मिल जाती थी। एजेंसी के पोर्टल रिओपेन करने के बाद कॉलेज से संबंधित छात्र का इनरोलमेंट नंबर छोड़कर परीक्षार्थी की सारी जानकारी बदल जाती थी। इस आधार पर एजेंसी सॉफ्टवेयर ऑटोमेटिक एडमिट कार्ड जनरेट कर देता था।

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Medical student suicide in sms medical college

11.07.2022

सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के एक छात्र ने शुक्रवार रात हॉस्टल में ही फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। वह एमबीबीएस थर्ड ईयर का छात्र था। शनिवार सुबह साढ़े नौ बजे उसके साथियों ने खिड़की से देखा तो वह बेडशीट से बने फंदे से झूलता दिखा। साथियों ने दरवाजा तोड़कर छात्र को नीचे उतारा, लेकिन जब तक उसकी जान जा चुकी थी।एसएमएस अस्पताल थानाधिकारी नवरत्न धौलिया ने बताया कि शिमला निवासी अमन (22) मेडिकल कॉलेज के कोठारी हॉस्टल में रहता था। अमन के परिजन को सूचित कर दिया है। वे जयपुर के लिए रवाना हो गए। मृतक के पिता प्रीतम कपड़ा व्यापारी हैं। अमन के साथियों ने पुलिस को बताया कि उसे रात साढ़े दस बजे तक देखा था, वह कमरे में अकेला था। सुबह वह कमरे से बाहर नहीं आया तो उसे कॉल किया। कॉल रिसीव नहीं करने पर गेट खटखटाया, उसका भी जवाब नहीं दिया। इसके बाद खिड़की से देखा तो वह फंदे से लटका हुआ था।मौके से साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस ने एफएसएल टीम को बुलाया। टीम दो घंटे देरी से पहुंची। मौके से सुसाइड नोट नहीं मिला है। इस कारण आत्महत्या के कारण का पता नहीं चल सका है। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार रात को अमन ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट किया था। पुलिस उसका मोबाइल व आइपैड जब्त कर जांच कर रही है।

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No examination controller in rajasthan paramedical council

06.07.2022
एक तरफ सरकार बेरोजगारों को सरकारी नौकरी के सपने दिखा रही है। वहीं राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल में पिछले 20 दिन से परीक्षा नियंत्रक ही नहीं है। काउंसिल के पास प्रदेश की पैरामेडिकल संस्थानों की परीक्षा के लिए फार्म भरवाना, थ्योरी और प्रायोगिक परीक्षा का टाइम टेबल की घोषणा करना।ऑल राजस्थान पैरामेडिकल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष जतन गुर्जर का कहना है कि काउंसिल की लापरवाही के कारण विद्यार्थियों का भविष्य खतरें में है। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द परीक्षा नियंत्रक लगाना चाहिए। आने वाली भर्ती में शामिल नहीं होने पर जिम्मेदारी राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल की होगी। इसलिए शीघ्र ही इसमें निर्णय लेना होगा।

असर:
परीक्षा नियंत्रक नहीं होने से वर्ष 2018-19 की सैकंड ईयर की परीक्षा के साथ विभिन्न कोर्स कर रहे छात्रों की रिमांडेड, थ्याेरी और प्रायोगिक परीक्षा प्रभावित हो रही है। परीक्षा नियंत्रक नहीं होने की सूचना से करीब 8 हजार परीक्षार्थी डिप्रेशन में है। सरकार 900 मेडिकल लैब टेक्नीशियन और 800 असिस्टेंट रेडियोग्राफरों के पदों पर भर्ती निकालने जा रही है।

काउंसिल पर समय पर परीक्षा आयोजित कराने का दबाव है।
मौजूदा स्थिति में पैरामेडिकल काउंसिल में परीक्षा नियंत्रक का कुछ दिनों से पद रिक्त चल रहा है। इस वजह से विद्यार्थियों की परीक्षा का काम प्रभावित हो रहा है। इस पद पर तुरंत नियुक्त करने के लिए सरकार को निवेदन किया गया है। इस पद पर नियुक्ति होते ही कार्य शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा। -कैलाश नारायण मीणा, रजिस्ट्रार, राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल

ये पद भी रिक्त
: पैरामेडिकल काउंसिल के गठन के बाद भी परीक्षा सलाहकार, जूनियर लीगल एडवाइजर, लेखाकार व जूनियर एकाउंटेंट, सीनियर व जूनियर असिस्टेंट, सूचना सहायक, कम्प्यूटर ऑपरेटर व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद रिक्त चल रहे है, जिससे काम प्रभावित हो रहा है।

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Admission process for gnm course is closed in rajasthan

05.07.2022
राजस्थान जीएनएम नर्सिंग काॅलेजों में वर्ष 2020-21 सत्र की काउंसलिंग के माध्यम से एडमिशन प्रक्रिया अब बंद की गई है, जब अगले सत्र 2022-23 के लिए 15 दिन बाद फार्म भरे जाने वाले हैं। सत्र 2020-21 के लिए एडमिशन इतना लेट करने के बावजूद करीब 30 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग निदेशालय ने जीएनएम कोर्स 2020-21 के लिए अब प्रवेश प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से बंद कर दी है। अब काॅलेजों संचालकों को 15 दिन समय दिया है कि वे मैनेजमेंट कोटे की सीटों को भर सकते हैं। इसमें भी नहीं भरे जाने पर सीटें खाली ही रहेंगी।गौरतलब है कि साइंस में सीनियर के बाद प्रदेश के काॅलेजों में 3 से साढ़े तीन साल के लिए जीएनएम कोर्स कराया जाता है। प्रदेश में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर करीब 41 नर्सिंग काॅलेज हैं। पिछले साल 7 बढ़ाए गए। सीटें 7620 से बढ़कर 8040 हुई। लेकिन अलग अलग कोर्स के लिए अलग अलग सीटें हैं। कोरोना खत्म होने के बावजूद सबसे विलंब से नर्सिंग के कोर्स चल रहे हैं।2020-21 के कोर्स की प्रवेश प्रक्रिया अभी चल रही है। जबकि वित्तीय वर्ष अप्रैल से 2022-23 शुरू हो चुका है। अभी तक नर्सिंग काॅलेजों का 2021-22 का सत्र शुरू होना है, उसके बाद 2022-23 का सत्र आएगा। लिहाजा करीब 2 साल पीछे प्रक्रिया चल रही है। 2020-21 के जीएनएम कोर्स के लिए भी 23 मार्च से 26 जून तक तीन चरण में काउंसलिंग हुई।

काउंसलिंग में भी नहीं भरी सीटें
41 नर्सिंग काॅलेजों में काउंसलिंग के 3 चरण के बाद भी करीब 2400 सीटें खाली बताई जा रही है। 3 चरण काउंसलिंग के होने पर भी सीटें नहीं भरने पर राजकीय कोटे की सीटों को संयुक्त फेडरेशन के माध्यम से निर्धारित शर्तों की पालना सुनिश्चित करते हुए 15 दिन में सीटें भरे जानी की पाबंदी लगाई है।

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NMC Issues Notice For MBBS Admission In China; “Online Courses Not To Be Recognised”

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission) ने चीन के मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे स्टूडेंट्स के लिए अलर्ट जारी किया हैI NMC ने जारी निर्देश में कहा कि, ‘चीन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हजारों छात्र पहले ही फंसे हुए हैं, जबकि कुछ चीनी यूनिवर्सिटीज की तरफ से इस साल और अगले साल के लिए एडमिशन प्रोसेस शुरू किया जा रहा हैI आयोग ने भारतीय छात्रों को मेडिकल यूनिवर्सिटीज में एडमिशन को लेकर सावधान किया हैI साथ ही बताया गया कि जो स्टूडेंट्स वहां के मेडिकल कॉलेज से ऑनलाइन पढ़ रहे हैं, मेडिकल कमिशन अब से ऑनलाइन मेडिकल पढ़ाई को मान्यता नहीं देगाI

इस बात की जानकारी आयोग के अनुसार विदेश मंत्रालय के जरिए मिली हैI दरअसल चीनी यूनिवर्सिटीज मेडिकल में एडमिशन की प्रक्रिया को शुरू कर रहे हैंI ऐसे में भारतीय स्टूडेंट भी वहां एडमिशन लेने के लिए आवेदन की संभावनाएं ढूंढ रहे हैंI

भारत के संदर्भ में कोई चर्चा नहीं

NMC का कहना है कि भारतीय छात्रों को आवेदन करने से पहले इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि चीन ने नवंबर, 2020 से सख्त यात्रा प्रतिबंध और नए वीजा बंद कर रखे हैं, जिसकी वजह से चीन में पहले से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र वापस चीन नहीं लौट पा रहे हैंI लेकिन अब चीन बाकी देशों के लिए यात्रा प्रतिबंध आसान करने की सोच रहा है, जिसमें भारत के संदर्भ में फिलहाल उसने कोई चर्चा नहीं की हैI

ऑनलाइन मेडिकल पढ़ाई को मान्यता नहीं

भारत सरकार की तरफ से कई बार भारतीय स्टूडेंट्स को वापस भेजने के बारे में चीन से निवेदन किया गया था, लेकिन अब तक उसने इसपर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दीI बता दें जो स्टूडेंट्स वहां के मेडिकल कॉलेज में कई सालों से पढ़ाई कर रहे थे, वो स्टूडेंट ऑनलाइन क्लासेस ले रहे हैं, लेकिन अब NMC ऑनलाइन मेडिकल की पढ़ाई को मान्यता नहीं देगाI ऐसे में भविष्य में इन छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.