Health system gasping due to strike

29.06.2022
नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारी सोमवार को हड़ताल पर रहे। लिहाजा एक साथ करीब 370 कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं हांफ गई। मांगों को लेकर कर्मचारी सुबह 9 बजे ही सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उमस भरी गर्मी के बीच कर्मचारियों ने दोपहर बाद 5 बजे तक हड़ताल पर बैठकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट और लेबर सेक्शन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। हड़ताल के चलते कई डिलीवरी केस को चंडीगढ़ 32 अस्पताल रेफर करना पड़ा। उधर एंबुलेंस सेवाएं भी प्रभावित रही। एंबुलेंस पर करीब 94 ड्राइवर एनएचएम के तहत ही सेवाएं देते हैं जबकि करीब 6 इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन भी हैं। यह सभी पहले दिन अवकाश पर रहे। इसी कारण एंबुलेंस सेवाएं भी बाधित रही। इस दौरान हरियाणा रोडवेज से स्वास्थ्य विभाग को मिले करीब 4 ड्राइवर और रोजगार कौशल निगम के तहत आए 6-7 ड्राइवरों ने एंबुलेंस की कमान संभाली। लेकिन इनसे केवल आपात सेवाएं ही चल सकी।

एनएचएम के सभी डाक्टरों ने दी सेवाएं
जिला नागरिक, नागरिक अस्पताल कैंट और नागरिक अस्पताल नारायणगढ़ के अलावा सभी पीएचसी और सीएचसी में तैनात एनएचएम के सभी डाक्टरों ने कर्मियों की इस हड़ताल के बीच अपनी नियमित सेवाएं सुचारू रूप से जारी रखी। हालांकि पीएचसी में अन्य स्टाफ जैसे लैब टेक्नीशियन इत्यादि नहीं होने के कारण डाक्टरों को उपचार में परेशानियां झेलनी पड़ी। बता दें कि एनएचएम के 30 डाक्टर जिलेभर में तैनात हैं। लेकिन सरकार द्वारा हाल ही में बनाए गए बायलाज इन डाक्टरों पर लागू नहीं होते इसीलिए एनएचएम के डाक्टर हड़ताल का हिस्सा नहीं बने।

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हड़ताल अवधि की छुट्टियाँ होंगीं सेवारत कोटे के कार्यकाल में सम्मिलित

सेवारत चिकित्सकों की दिसंबर 2017 की हड़ताल पर चले जाने के कारण नए चिकित्सकों की सेवा अवधि गणना में बाधा उत्पन्न हो रही थी जिस हेतु अरिसदा की मांग पर गतवर्ष उक्त अवधि को EOL मानते हुए सेवा में माना गया था, परन्तु इस वर्ष यह समान बाधा उत्पन्न हो रही थी जिस हेतु सर्कार ने आदेश जारी करते हुए स्पस्ट कर दिया है कि आगे की सभी पीजी परीक्षाओं हेतु भी हड़ताल अवधि की गणना करी जाएगी |
यूनियन और सेवारत चिकित्सकों ने इसका स्वागत किया है |

8700 ग्रेड पे की कैपिंग वाले हड़ताली समझौते का पोस्टमार्टम

सरकार और चिकित्सकों के बीच हुए समझौते की हकीकत

वर्ष 2011 दिसम्बर में हुई एतिहासिक हड़ताल के बाद दवाब में आकर कांग्रेस सरकार ने कुछ समझौते किये जिन्हें लेकर चिकित्सक करीब सात वर्ष तक घूमते रहे लेकिन उनका पूर्ण किर्यांवन किया नहीं गया | इसी क्रम में फिर से चिकित्सक आक्रोशित हुए और वर्ष 2017 की अगस्त क्रांति और दिसम्बर की बड़ी हड़ताल के बाद तत्कालीन भाजपा सरकार ने फिर से समझौतों का पुलिंदा बाँध दिया, जिसके किर्यांवन के लिए चिकित्सक वापस से उसी हालात में हैं |

इसी बीच निदेशक जनस्वास्थ्य के एक आदेश (नीचे संलग्न है) से चिकित्सकों में शंका है कि 8700 ग्रेड पे की कैपिंग तो हट गयी थी तो यह लेटर कहाँ से आया ? यह तो समझौते की ध्वजियाँ उड़ रही हैं ? आप खुद समझौते और निदेशक के आदेश को दुबारा पढ़ें !

दिसम्बर 2017 समझौते के प्रथम बिंदु में ही डीएसीपी से संबंधित मुद्दे थे, जिसमें कहा गया था कि 18 वर्ष वाले तीसरे प्रमोशन (6-6-6) में कुल चिकित्सकों के 18% के बजाय सभी पात्र चिकित्सकों को डीएसीपी का लाभ दिलवाया* जायेगा |

* यहीं पेच है, समझौते में सरकार चालाकी बरत गयी, 18% की कैपिंग नहीं हटाई, बल्कि यह लिख दिया गया की शेष को भी वित्त विभाग से शिथिलन दिलवा देंगे |
* अपना कैडर करीब दस हजार चिकित्सकों का है यानि 18% के हिसाब से 1800 डॉक्टर ही 8700 ग्रेड में घुसे रह सकते हैं, अभी करीब 900 डॉक्टर इसमें घुसे हुए हैं, कुछ नए घुसेंगे और कुछ रिटायर होते रहेंगे, अगर देखा जाए तो अगले दस साल तो कोई दिक्कत नहीं आएगी लेकिन वर्ष 2005 के बाद भर्ती हुए चिकित्सक जब तीसरे प्रमोशन की उम्र तक पहुंचेंगे, उस वक़्त 8700 ग्रेड में 1800 लोग हो चुके होंगें और यह फुल हो चुका होगा, यानि बड़ी दिक्कत तभी आएगी (करीब वर्ष 2025 ) |

* मुद्दा 8700 की कैपिंग को हटवाने का था लेकिन समझौता कैपिंग ना हटवाकर एक्स्ट्रा लोगों को वित्त विभाग से परमिशन दिलवाकर उन्हें डीएसीपी दिलवाने का हुआ तो अब वित्त विभाग परमिशन दे, ना दे, किसको दे, क्या पता | बाकि राड़ 2025 में होगी जब 1801वां चिकित्सक 2025 में जाकर कहेगा की हमारा दिसम्बर 2017 में समझौता हुआ था, उसकी अनुपालना में मुझे वित्त विभाग से शिथिलता दिलवाकर 8700 ग्रेड में लो, तो राम जाने लेंगे की नहीं !

EOL sanctioned for probation MO (Strike time)

Leaves taken during strike time will be counted as service.