MPPSC RECRUITMENT

29.07.2022
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने मेडिकल स्पेशलिस्ट के पदों (MPPSC Medical Specialist Recruitment 2022) पर योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं. इसके लिए कमीशन द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. इस रिक्रूटमेंट ड्राइव (MP Medical Specialist Bharti 2022) के माध्यम से एमपीपीएससी (MP Sarkari Naukri) के कुल 160 मेडिकल स्पेशलिस्ट (MP Medical Specialist Jobs) पद भरे जाएंगे. अगर आप भी इन पदों (MP Government Job) पर आवेदन करने के इच्छुक हों तो अंतिम तारीखे के पहले बताए गए प्रारूप में अप्लाई कर दें.

जानिए जरूरी तारीखें –
आवेदन शुरू होंगे 12 अगस्त 2022 से और इन पदों पर अप्लाई करने की लास्ट डेट है 11 सितंबर 2022।ये ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख है. वहीं पीएससी के ऑफिस में जाकर ऑफलाइन आवेदन जमा करने की लास्ट डेट 23 सितंबर 2022 रखी गई है।

इस वेबसाइट से करें अप्लाई –
mppsc.mp.gov.in

ऑफिशल नोटिफिकेशन में देखें पूरी जानकारी

ATTACHED FILES

ADVT_Medical_Specialist_2022_Dated_27_07_2022

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Delhi doctor succesfull surgery a pak girl with curved neck.

भारत और पाकिस्तान के तनातनी वाले रिश्तों के बीच ऐसे भी मामले सामने आते रहते हैं, जो मानवता का उजाला बिखेरते हैं। ऐसा ही ताजा मामला पाकिस्तान की अफशीन गुल का है। गंभीर शारीरिक समस्या से जूझ रही 13 साल की लड़की को एक भारतीय डॉक्टर के इलाज ने नई जिंदगी दी है।पाकिस्तान के सिंध की अफशीन गुल सात भाई-बहनों में सबसे छोटी है। वह 10 माह की थी तो बहन की बांह से गिर गई थी। उसकी गर्दन 90 डिग्री तक झुक गई। वह न चल सकती थी, न खा सकती थी। बात करने में भी दिक्कत होती थी। उसकी हालत पर 2019 में एक ब्रिटिश पत्रकार की रिपोर्ट पढ़ने के बाद दिल्ली के अपोलो अस्पताल में स्पाइनल सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ. राजगोपालन कृष्णन ने उसकी मुफ्त सर्जरी की पेशकश की।

डॉ. राजगोपालन कृष्णन की पेशकश पर परिवार अफशीन को लेकर दिल्ली आया। डॉक्टर ने उसकी घुमावदार गर्दन का ऑपरेशन किया। अब अफशीन अपने आप चल सकती है, बात कर सकती है, खा सकती है। डॉ. कृष्णन हर हफ्ते स्काइप के जरिए उसका हाल-चाल जानते हैं। अफशीन के भाई याकूब कुंवर का कहना है कि भारत के डॉक्टर ने बहन की जान बचाई।
दुनिया में अपनी तरह का पहला केस
अफशीन एटलांटो-एक्सियल रोटेटरी डिस्लोकेशन से पीड़ित थी। यह रीढ़ की हड्डी का घुमाव है, जो गर्दन की दुर्बलता का कारण बनता है। डॉ. कृष्णन के मुताबिक यह शायद दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला है। अफशीन की समस्या 2017 में सामने आई थी। पाकिस्तान के डॉक्टरों ने ठीक होने की संभावना 50% बताई थी।

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New system held to end the shortage of doctors in Punjab

23.06.2022

विभाग में मेडिकल ऑफिसर और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 950 पद खाली हैं, जिन्हें पूरा करने का कोई प्लान नहीं
कई बड़े अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी क्लेरिकल कार्यों में व्यस्त हैं।डॉक्टरों की कमी खत्म करने को सेहत विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। जिसके तहत पोर्टल के जरिये डॉक्टर को बताना होगा कि दिन में कितने मरीजों का इलाज व कितने मरीज भर्ती किए हैं। इसी आधार पर महीने के अंत में अब डॉक्टर की परफॉर्मेंस रिपोर्ट का रिव्यू हेल्थ सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों की ओर से किया जाएगा।

कम मरीजों वाले डॉक्टर की पोस्टिंग भी अन्य हेल्थ सेंटर में शिफ्ट की जाएंगी। हेल्थ सेक्रेटरी अजॉय शर्मा ने बताया, कई बड़े अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी क्लेरिकल कार्यों में व्यस्त हैं, उनकी रिपोर्ट जीरो हो रही है। विभाग में मेडिकल ऑफिसर और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 950 पद खाली हैं, जिन्हें पूरा करने का कोई प्लान नहीं है। इसीलिए परफार्मेंस को आधार बनाया गया है। वहीं पीएचएससी के डॉ. रणजीत सिंह ने कहा सेहत विभाग प्राथमिकता पर अपने सेंटरों का रिव्यू कर रहा है और जिन एरिया में डॉक्टर नहीं हैं, वहां डॉक्टर तैनात किए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और सरकार की सभी सुविधाओं का लाभ लोगों को मिले।

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Specialist doctors will now be posted at district headquarters instead of PHC

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एमडी या एमएस डॉक्टरों के लिए स्पेशलिस्ट कैडर पद सृजित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके अलावा डॉक्टरों को कोई प्रशासनिक कार्य भी नहीं दिया जाएगा और वे अपनी संबंधित विशेषता में ही अभ्यास करेंगे।

मुख्यमंत्री द्वारा दी गई सैद्धांतिक मंजूरी के तहत सरकार विशेषज्ञों के लिए एक विशेष सब कैडर बनाएगी, जिन्हें सलाहकार या वरिष्ठ सलाहकार के रूप में नामित किया जाएगा। इससे पहले एमबीबीएस योग्यता और एमडी/एमएस योग्यता वाले डॉक्टर एक ही कैडर में होते थे। स्पेशलिस्ट कैडर पोस्ट बनने से ये डॉक्टर अपने काम पर और अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे

बड़े अस्पताल में तैनात होंगे विशेषज्ञ

विशेषज्ञ कैडर के रूप में डॉक्टरों को अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के बजाय बड़े अस्पतालों में तैनात किया जाएगा। इससे उनकी पदोन्नति जल्द होगी। प्रदेश सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय से मरीजों को भी बहुत फायदा होगा, क्योंकि उन्हें अच्छे विशेषज्ञों का परामर्श मिलेगा और डॉक्टर अस्पतालों के कामकाज की निगरानी और प्रबंधन करने में अधिक सक्षम होंगे। सीएम मनोहर ने कहा कि वर्तमान संकट की स्थिति में समाज में डॉक्टरों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि डॉक्टरों की यह मांग वर्षों से चली आ रही थी, जिस पर सीएम ने मंगलवार को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।

 

चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर

मंगवार को प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस दौरान ओपीडी सेवाएं बंद रही। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने कहा कि यदि दो दिनों में मांगे नहीं मानी गई तो चिकित्सक 14 जनवरी शुक्रवार को एमरजेंसी सेवाएं भी बंद करके पूर्ण हड़ताल पर चले जाएंगे। वहीं सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है।

 

ये हैं मांगे

एसएमओ की सीधी भर्ती न हो, यह पद प्रमोशन से भरे जाएं। डॉक्टरों की तीन की बजाए चार एसीपी 4, 9, 13 और 20 साल में मिले। विशेषज्ञों के लिए अलग कैडर तैयार किया जाए।

मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंसी के लिए जरुरी है एक वर्ष की सेवा

जयपुर (राज.) अक्टूबर 2019

जनवरी 2019 से पूर्व में मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंसी करने हेतु मिनिमम एक साल की सेवा की बाध्यता थी लेकिन जनवरी में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विशेषज्ञ चिकित्सकों को राहत दी थी कि कभी भी सीनियर रेजीडेंसी हेतु एनओसी के लिए आवेदन कर सकते हैं, इसके बाद अत्यधिक संख्या में चिकित्सक एनओसी के लिए आवेदन करने लगे, चूँकि चिकित्सा शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की मिनिमम अहर्ता एक साल की सीनियर रेजीडेंसी है |

चिकित्सा शिक्षा विभाग में सेवा देना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुकाबले आसान है और इसे ज्यादा प्रोफेशनल माना जाता रहा है, इसी कारण चिकित्सकों का रुझान एक साल की सीनियर रेजीडेंसी की तरफ बढ़ने लगा और वे एनओसी के लिए भाग दौड़ करने लगे, बताया जाता है कि जल्दी और पुख्ता एनओसी दिलवाने के रैकेट भी विभाग में पनप गए थे, चिकित्सा विभाग चाहता है कि सेवारत चिकित्सक विभाग से यूँही पलायन न करें, कुछ सेवा तो दें, इसीलिये एक साल तक की सेवा करने के नियम को वापस लाया गया है, इससे सेवारत चिकित्सकों को एक साल सेवा देनी होगी जिससे ग्रामीण जनता को अधिक विशेषज्ञ सेवाएँ मिलेंगी 🙂

आदेश संलग्न है –

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Rajasthan : DACP promotion chaos

सरकारी डॉक्टरों पर बाबूराज पड़ रहा भारी ।

सबसे ज्यादा अगर सिस्टम फेलियर है तो वो है, राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में । चिकित्सकों को नियमानुसार समयबद्ध पदोन्नति मिलती है लेकिन उस नियत समय पर वो पदोन्नति दी ही नहीं जाती है । सरकार और विभाग चाहता है कि चिकित्सक अपना काम 24×7 निष्ठा से करें, साथ ही सभी विभागीय लक्ष्यों को भी पूर्ण करें, लेकिन बात जब खुद विभाग की जिम्मेदारी की आती है तो वो फिसड्डी साबित होता है, किसी का प्रोबेशन समय पूरा नहीं होता, किसी का फिक्सेशन नहीं होता, किसी को एनओसी नहीं मिलती तो किसी को कुछ और समयबद्ध नहीं मिलता । हर चीज को डिले करके चिकित्सक को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है ताकि वो अंततः मजबूर होकर, बाबूराज के आगे घुटने टेक दे और फिर चढ़ावा चढ़ावे । चिकित्सक का यह हाल कर दिया जाता है कि वो खुद आहत होकर मजबूरन बाबुओं के आगे नतमस्तक हो जाता है । इन बाबुओं को बड़े अधिकारियों की शह और प्राप्त है, कुछ सयाने तो यह कहते हैं कि अधिकारी भी इस बाबूराज के आगे आहत हैं, कमजोर हैं ।

सरकार ने चिकित्सकों को हर वर्ष की एक अप्रैल को समयबद्ध पदोन्नति देने का नियम बनाया था, जिसकी पालना में करीब 1500 चिकित्सकों की पदोन्नति 1 अप्रैल 2018 को होनी थी लेकिन बाबूराज के कारण नहीं हुई, 1 अप्रैल 2019 को कुछ लोग और जुड़ गए लेकिन पदोन्नति नहीं दी गयी, यानी करीब 1700 चिकित्सकों की पदोन्नति बकाया हो गयी ।

पूर्व में DPC की पदोन्नति के लिए चिकित्सकों को प्रत्येक वर्ष का वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (APR/ACR) एवं अचल संपत्ति विवरण (IPR) जमा करवाना होता था, लेकिन वर्तमान DACP बिना ACR/IPR के ही समयबद्ध तरीके से की जाती है, साथ ही, इस ACR और IPR का निदेशालय में कोई धणी-धोरी नहीं है, चिकित्सक अपना अपना रेकॉर्ड समय से भेज भी दें तो यह रास्ते मे पता नहीं कहाँ कहाँ अटक जाता है, और इस अनुभाग में पहुंच भी जाये तो दांयी से बांयी टेबल पर नहीं आता, वहां भी कमियां निकाल कर पटक दिया जाता है, भोग की आस में । चिकित्सक तो ये सोचकर आराम से बैठे होते हैं कि उनका रेकॉर्ड तो पहुंच गया है, और 1 अप्रैल को उनकी पदोन्नति हो जाएगी, उन्हें क्या पता कि किस बिल और भोलाराम के जीव में अटक रखा है उनका रिकॉर्ड ।

मई माह में डीओपी द्वारा पदोन्नति किये जाने वाले चिकित्सकों का रिकॉर्ड मांगे जाने पर निदेशालय के बाबूराज द्वारा आधा अधूरा रिकॉर्ड पकड़ा दिया जाता है, कायदे से रिकॉर्ड देने से पहले आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं कि किसका कौनसा रेकॉर्ड बकाया है ताकि वो अपना अटका रिकॉर्ड निकलवा सके और कुछ बकाया हो तो जमा करवा सके । लेकिन बिना सूचित किये ही अधकचरे को आगे भिजवाया गया और 15 जून को जारी हुई लिस्ट में 1700 में से करीब 600 की ही पदोन्नति की गई, इसमें भी सीनियरिटी का ध्यान नहीं रखा गया है, साथ ही क्लीनिकल ब्रांच वालों को भी एसएमओ बना दिया गया है और फार्माकोलॉजी एवं कम्युनिटी मेडिसिन के एक डॉक्टर को एसएमओ तो उसी ब्रांच के दूसरे को जेएस बना दिया गया है, चार ACR वाले का नाम है लेकिन सैंकड़ों ऐसों का नाम नहीं है जिनकी पूरी 6 जमा थी, यानी भयंकर गफलत हुई है जिससे राज्य के हजार चिकित्सक तनाव में हैं ।

देखना दिलचस्प होगा कि अब बाकी छोड़े गए चिकित्सकों की लिस्ट 1 अप्रैल 2020 के बाद आएगी या पहले ?

पहले तभी आ सकती है जब इस बाबूराज का विरोध हो वो भी सक्षम स्तर पर । हालांकि सेवारत चिकित्सक संघ का मुख्य मुद्दा DACP रहा है लेकिन 2011 की DACP के बारे में उनकी पिछले 2 सालों से जो चुप्पी है वो भी कई सवाल खड़े करती है । करीब एक महीने से गलियारों में चर्चा थी कि केवल 600 की ही DACP हो रही है लेकिन किसी चिकित्सक के भी जूं नहीं रेंगी, जो कि चिंतनीय है । अब डेफर हो चुके चिकित्सकों के लिए इस बाबूराज से पार पाना आसान नहीं होगा । बाबुओं ने फर्जी विसंगतियों से भरी लिस्ट ही सचिवालय भेज दी और वहां से लिस्ट जारी भी हो गई, इससे सचिवालय के अधिकारियों की भी हो रही है किरकिरी, अब देखना यह है कि निदेशालय के अधिकारी तो इनका कुछ बिगाड़ नहीं पाए तो सचिवालय के अधिकारी भी कमतर साबित होते हैं या बाबूराज को रोक पाते हैं ?

doctors on part-time basis

JAIPUR: Battling against shortage of doctors, health department has decided to rope in doctors on part-time basis. The health department will lure the specialist doctors, who are not government doctors, by paying them Rs 2,000 per two hours of their service in urban primary health centres.
A health department official said that the service would remain available on Monday, Wednesday and Friday.
Officials said that those specialist doctors who have retired from the government service will also be able to apply for the part-time specialist medical officer.
The specialist doctors in gynaecology, paediatrics, medicine, skin, orthopaedics and ENT will be able to get apply for the part time specialist doctors’ post.
The health department has also issued a list of urban primary health centres where specialist doctors are required. The health department has issued a list of 245 primary health centres in urban areas, which are reeling under the shortage of specialist doctors. In Jaipur (I), there are 39 such urban PHCs which require specialist doctors.
In Jaipur (II), there are 20 such urban PHCs. Officials said that in winters, the PHCs remain open from 9am to 1pm and from 4pm to 6pm. In summers, they remain open from 8am to 12 noon and from 5 pm to 7pm.
A health department official said that earlier too, the government had decided to pay a certain amount of money to anaesthesia specialist for a visit as in some first referral units (FRUs), there are gynaecologist but there is no anaesthesia specialist. In that situation, a gynaecologist is unable to perform surgery or cesarean section as there is no anaesthesia specialist.
In such FRUs, an anaesthesia specialist gets Rs1000 to Rs1,500 per visit. The health department is now expanding it to other specialists by paying them Rs2,000 per two hours of service in outpatient department of urban PHCs. Officials claimed that it will help improving healthcare services in urban PHCs by providing specialised healthcare services to the patients.

 The health department has made it mandatory to provide undated registration issued by Rajasthan Medical Council for part time specialist job in urban PHCs.
Source – Toi