doctor got notice even after proper duty

मंगलवार को आदर्श नगर, केकड़ी निवासी भंवरलाल जैन की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन ने शाम 5 बजकर 11 मिनट पर मृत्यु घोषित करते हुए पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए पुलिस और संबंधित चिकित्सक को 5.15 बजे सूचना भिजवा दी। सूचना पर तुरंत सदर थाना पुलिस के हैड कान्स्टेबल सम्पतराज मीणा एवं मेडिकल जूरिस्ट डॉ. रोहित मीणा अस्पताल पहुंच गए। पुलिस के क्षेत्राधिकार का मामला उलझा होने के कारण डॉ. रोहित मीणा को पंचनामा नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पुलिस से पंचनामा मिलने के बाद ही शुरु की जा सकती है। आख़िरकार जब तक पंचनामा प्राप्त हुआ तब तक सूर्यास्त हो चुका था। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करना नियम विरुद्ध है। हालाँकि केन्द्र सरकार ने सुसज्जित अस्पतालों में रात्रिकालीन पोस्टमॉर्टेम की अनुमति दी है लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया है। जब चिकित्सक ने नियमानुसार पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया तो परिजन भड़क गए और डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया। परिजनों उनका कहना था कि सूर्यास्त में काफी समय शेष था, इसके बावजूद चिकित्सक ने जान बूझकर देरी की। सूचना पर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. गणपतराज पुरी भी अस्पताल पहुंच गए तथा चिकित्सक से अँधेरे में पोस्टमार्टम करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सूर्यास्त का हवाला देते हुए पोस्टमार्टम से इंकार कर दिया। इस दौरान चिकित्सकों व परिजन के मध्य नोकझोक भी हुई। इस संबंध में मृतक भंवरलाल जैन के पुत्र अभिषेक जैन ने उपखण्ड अधिकारी विकास पंचोली को ज्ञापन सौंप कर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की । इधर क्षेत्राधिकार के मामले में पुलिस का कहना रहा कि कोहड़ा के समीप हादसे की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस अस्पताल पहुंच गई तथा आवश्यक कार्रवाई शुरु कर दी थी लेकिन बाद में पता चला कि हादसा केकड़ी शहर थाना पुलिस के इलाके में हुआ है। इसके बाद शहर थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची तब तक सूर्यास्त हो गया।परिजनों ने हंगामा किया और पीएमओ को शिकायत दी जिस पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए अस्पताल प्रशासन ने संबंधित चिकित्सक को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए है। वहीं संबंधित चिकित्सक ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

जिम्मेदारों का कहना है :

सड़क हादसे में मृत भंवरलाल जैन के पुत्र अभिषेक जैन ने ज्ञापन दिया है। इस संबंध में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। विकास पंचोली, उपखण्ड अधिकारी, केकड़ी 

आमजन से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता रखनी पड़ती है। सूचना मिलने पर मैं खुद अस्पताल गया था तथा परिजन से बात भी की थी। पुलिस कार्रवाई के कारण देरी हुई तथा सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम नहीं हो सकता है, ये दोनों बात सही है। लेकिन चिकित्सक का बातचीत करने का तरीका सही नहीं था। नोटिस देकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए है। डॉ. गणपतराज पुरी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, राजकीय जिला चिकित्सालय, केकड़ी 

सड़क हादसे में मृत्यु की सूचना मिलते ही तुरंत अस्पताल पहुंच गया था। उस समय सूर्यास्त नहीं हुआ था। लेकिन पुलिस के क्षेत्राधिकार का मामला अटका होने के कारण काफी देर तक उन्हें पंचनामा नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पुलिस से पंचनामा मिलने के बाद ही शुरु की जा सकती है। आख़िरकार जब तक पंचनामा प्राप्त हुआ तब तक सूर्यास्त हो चुका था। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करना नियम विरुद्ध है। वैसे भी सरकार ने उनकी नियुक्ति पोस्टमार्टम के लिए ही की है, ऐसे में पोस्टमार्टम के लिए मना करने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। दबाव में आकर नियम विरुद्ध कार्य करना सही नहीं है तथा भविष्य में भी वे किसी के दबाव में आकर नियमों के विपरित कार्य नहीं करेंगे। डॉ. रोहित मीणा, मेडिको लीगल ऑफिसर, राजकीय जिला चिकित्सालय, केकड़ी

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

अस्पताल बना अखाड़ा, भड़के डॉक्टर तो भागे एसडीएम : पूरी कहानी

उत्तराखंड के काशीपुर शहर के राजकीय एलडी भट्ट चिकित्सालय में 6 फरवरी को सुबह एसडीएम हिमांशु खुराना (IAS) ने औचक निरीक्षण किया । बताया जा रहा है कि हड्डी वार्ड में कुछ मरीजों ने शिकायत करी कि उनसे कुछ दवाइयां और रूई बाहर से मंगवाई गयी हैं, एसडीएम खुराना इन मरीजों से जानकारी ले ही रही थे, इसी बीच हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गहलोत भी वहीँ पुरुष वार्ड में पहुँच गए, एसडीएम ने डॉ. विकास को वार्ड से बाहर जाने को बोला तो डॉ. ने मना किया तब एसडीएम ने यह कहते हुए कि यह “चोर” हैं, अपने गार्ड से बाहर निकलवा दिया । फिर एसडीएम वहां से अस्पताल प्रभारी की कुर्सी पर जाकर जम गए और उनसे कुछ बात करने लगे, इधर अस्पताल के समस्त चिकित्सक भड़क गए और उसी कक्ष में पहुंचकर विरोध दर्ज करवाने लगे, ओपीडी बंद कर दी गई, बढ़ता विरोध देकर एसडीएम ने वहां से निकलने में ही अपनी भलाई समझी और वे उठकर जाने लगे पर सभी चिकित्सक उनके पीछे पड़ गए, डॉ. विकास बार बार उनसे पूछते रहे कि उन्हें चोर कैसे कहा गया, साथ ही वो मामला सुलटाये जाने बाबत भी कह रहे थे । डॉ. विकास इस घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड भी कर रहे थे, इसी बीच एसडीएम ने उनके मोबाइल पर गुस्से में झपट्टा भी मारा । अस्पताल से बाहर आकर फिर बहस होने लगी, एसडीएम किसी अनहोनी कि आशंका में बार बार क्रोधित डॉक्टरों को पीछे भी कर रहे थे, डॉ. विकास ने कहा कि जब अस्पताल में जो दवाई या रूई है ही नहीं तो इसके लिए वो चोर कैसे हुआ, इसमें प्रशासन की जवाबदेही है कि वो सामान उपलब्ध करवाए, चोर कहना बिलकुल गलत है इसके लिए एसडीएम को माफ़ी मांगनी चाहिए, इसी बीच एक महिला चिकित्सक ने कहा कि नई उम्र में एसडीएम बन गए हो इसका यह मतलब थोड़े ही है कि डॉक्टर को तुम चोर बता दोगे, जब एसडीएम से जवाब देते नहीं बना वे तैश में धमकाने लगे कि “सबके सब नपेंगे” , इस पर और विरोध हुआ तो वे तेजी से वहां से निकल लिए ।

देखें पूरा विडियो –

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

RMRS Rajasthan Medicare Relief Society

Since November 1995, the Govt. of Rajasthan has created a society named as Rajasthan Medicare relief Society (R.M.S.) aimed to provide various diagnostic & treatment facilities on nominal cost to general patients and free of cost to very poor (B.P.L) and dependent patients.

Attached – Rajasthan Medicare Relief Society Rules 2007 Booklet

Attached – Revised Rajasthan Medicare Relief Society Rules 2007 Booklet

Attached – Rajasthan Medicare Relief Society Rules 2017 Booklet

Attached – Rajasthan Medicare Relief Society Rules 2017 Amendment Order
(BDO and SDM are replaced by BCMO and CMHO)

Attached – Senior Lab Technician will be member of RMRS order

Attached – Rajasthan Medicare Relief Society Rules 2018 Booklet

It Includes –

RMRS General Rules
RMRS Financial Rules
RMRS Store Rules
RMRS Drug Store Rules
RMRS Constitution Rules