Ayushman scheme failed in punjab

स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है क्योंकि निजी अस्पतालों ने उनके लिए पहले ही अपने दरवाजे बंद कर लिए थे और अब सरकारी अस्पतालों में ‘आरोग्य मित्रों’ ने भी उनकी सहायता करना बंद कर दिया है।आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की सहायता के लिए सरकारी अस्पतालों में तैनात 150 ‘आरोग्य मित्र’ ने अपनी सेवाएं देना बंद कर दिया क्योंकि उन्हें पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। वे वहां योजना के लाभार्थियों की मदद करने के लिए थे ताकि उन्हें आसानी से इलाज मिल सके।उनके विरोध के परिणामस्वरूप, आयुष्मान भारत मुख मंत्री सेहत बीमा योजना योजना राज्य भर के सभी सरकारी अस्पतालों में ठप हो गई है। यह योजना कार्ड धारकों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य उपचार सुनिश्चित करती है।अफसोस की बात है कि सरकार द्वारा बकाया राशि की प्रतिपूर्ति करने में विफल रहने के बाद, निजी सूचीबद्ध अस्पतालों ने स्वास्थ्य योजना के पात्र लाभार्थियों के लिए पहले ही अपने दरवाजे बंद कर लिए थे।जून से वेतन नहीं मिलने वाले आरोग्य मित्रों ने मंगलवार से लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड की प्रोसेसिंग बंद कर दी है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने दावा किया कि आउटसोर्सिंग एजेंसी – एमडी इंडिया – को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से धन नहीं मिला है, जो राज्य में योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है।आरोग्य मित्रों में से एक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारे पास हड़ताल पर जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था क्योंकि हम बिना वेतन के हैं। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और एमडी इंडिया को भुगतान करना चाहिए।

इंडोर मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित

योजना के तहत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों को इलाज के लिए जारी नहीं रख पाने के कारण उन्हें मझधार में छोड़ दिया गया है। साथ ही, जिन रोगियों को छुट्टी की आवश्यकता होती है, वे आगे नहीं बढ़ सकते क्योंकि उन्हें आरोग्य मित्र से मंजूरी की आवश्यकता होती है जिन्होंने काम करना बंद कर दिया है।मानसा की लाभार्थी रोगी चरणजीत कौर के एक परिजन भूपिंदर सिंह ने कहा, “हमारा मरीज गवर्नमेंट राजिंद्र अस्पताल में भर्ती है और बहुत गंभीर है। हमें इलाज करवाना है। हालांकि, आरोग्य मित्र ने कार्ड को प्रोसेस करने से मना कर दिया है। हम महंगे लैब टेस्ट का खर्च नहीं उठा सकते।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Government is bringing TMR scheme

आम लोगों को बीपी, शुगर, कैंसर और दिल की बीमारी सहित अन्य दवाओं की कीमतें कम करने के लिए केंद्र सरकार 15 अगस्त से टीएमआर (ट्रेड मार्जिन रेशनालाइजेशन) स्कीम लाने जा रही है। एक दवा, एक दाम थीम से जुड़े योजना का खाका तैयार कर लिया गया है और 15 से इसे लागू करने की तैयारी है। इस संबंध में पिछले दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने देश के विभिन्न औद्योगिक संगठनों से चर्चा भी की थी।इंदौर लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया था। औद्योगिक संगठन सस्ती दवाएं देने के तो पक्ष में हैं। उनका कहना है इस स्कीम से देश में बड़ी फार्मा कंपनियों को तो फायदा मिलेगा, लेकिन प्रतिस्पर्धा में छोटी और मध्यम उद्योगों (MSME) को बड़ा नुकसान होगा। ट्राइबल, रूरल सहित पहाड़ी इलाकों में दवाओं का वितरण और उपलब्धता प्रभावित होगी। बिना वितरण व्यवस्था जाने इसे लागू करने से एमएसएमई को बड़ा नुकसान होगा।9हजार करोड़ का कारोबार है मप्र में दवाओं का41 हजार होलसेल और रिटेल लाइसेंस होल्डर हैं

दरों के बजाय दवाओं के मार्जिन तय करना चाहिए

ऑल इंडिया ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के महासचिव राजीव सिंघल का कहना है दवाओं के दाम कम होना ही चाहिए, आम जनता को राहत मिलेगी, लेकिन दवा के एक कॉम्बिनेशन की दरें एक करने से बड़ी कंपनियां तो सर्वाइवर कर जाएंगी, लेकिन छोटे उद्योगों को मुशिक्ल होगी। दरों के बजाए दवाओं के मार्जिन तय करना चाहिए।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Fraud in ayushman bharat scheme

05.08.2022
यूपी के देवरिया में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है. देवरिया के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ने 387 फर्जी क्लेम के जरिए 17,11,800 रुपये भुगतान करा लिया. इस मामले की जांच तीन सदस्यीय टीम ने की थी. रिपोर्ट आने के बाद आयुष्मान भारत PMJAY और स्टेट हेल्थ एजेंसी ने अस्पताल प्रबंधन से क्लेम में ली गई रकम से दोगुनी यानी 34,23,600 रुपये जुर्माना वसूलने का आदेश दिया है.करीब एक महीने पहले देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील के रुद्रपुर कस्बे में आशुतोष हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी की थी. इस दौरान वहां अवैध अल्ट्रासाउंड मशीन पकड़ी गई और डॉक्टर एस. के. त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई हुई. इसमें जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन की कई खामियां उजागर हुई थीं. सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी और अस्पताल में गड़बड़ियों का जिक्र किया. उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के तहत यहां घपले की आशंका जताई थी.मामला गंभीर होने पर डीएम जे.पी. सिंह ने तीन सदस्यीय टीम गठित की. जांच के दौरान पता चला कि आयुष्मान योजना के तहत 387 फर्जी केस में क्लेम लिया गया. पूरी रिपोर्ट डीएम ने आयुष्मान भारत PMJAY और स्टेट हेल्थ एजेंसी को भेजी. आंतरिक जांच में भी फर्जी क्लेम की पुष्टि हुई. अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारकों के इलाज कराने के रिकॉर्ड की जांच की गई बहुत सारे मामले एक समान पाए गए. 387 ऐसे मामले थे जो पूरी तरह फर्जी पाए गए. अब अस्पताल प्रबंधन पर 34,23,600 रुपये जुर्माना लगाया गया है

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Chandigarh ayushman health scheme

पंजाब में आयुष्मान स्कीम के तहत 5 लाख तक कैशलेस इलाज बंद किए जाने पर सियासी बवाल मच गया है। कल PGI चंडीगढ़ ने भी 16 करोड़ बकाया न देने पर इलाज से इनकार कर दिया। इसके बाद विरोधियों ने आम आदमी पार्टी और CM भगवंत मान को घेर लिया। उन्होंने कहा कि क्या यही वह हेल्थ मॉडल है, जिसे सीएम भगवंत मान ने पंजाब में लागू किया है। वहीं वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने दावा किया कि पीजीआई में कल से इलाज शुरू हो जाएगा। पंजाब सरकार फंड जारी कर रही है।

भगवंत मान इलाज के लिए दिल्ली चले गए, गरीब कहां जाए? : अकाली दल
अकाली नेता परमबंस सिंह बंटी रोमाणा ने कहा कि PGI के अलावा सेक्टर 32 और 16 अस्पताल में मरीजों का इलाज बंद कर दिया गया है। PGI चंडीगढ़ का 16 करोड़, सेक्टर 16 अस्पताल के 3 करोड़ और ढाई करोड़ 32 सेक्टर मेडिकल कॉलेज का पेंडिंग पड़ा है। क्या यही पंजाब सरकार का दिल्ली मॉडल है। 300 करोड़ पंजाब के अस्पतालों का बकाया है। 40 लाख गरीब परिवार इलाज से वंचित है। सीएम के पेट में दर्द हुआ तो जहाज लेकर स्पेशल दिल्ली जाकर एडमिट हो गए थे। गरीब आदमी कहां जाए?। चंडीगढ़ और पंजाब के बड़े अस्पतालों में इस स्कीम के तहत इलाज नहीं हो रहा।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

NEW Medical colleges approval

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार 2014 से तीन चरणों में अबतक 157 नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी गयी है।केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों तथा चिकित्सा शिक्षा निदेशकों के साथ योजना की समीक्षा करते हुए परियोजनाओं की धीमी प्रगति को रेखांकित किया।उन्होंने राज्यों से परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी लाने की अपील की ताकि 2023-24 शिक्षण सत्र में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकें।भूषण ने कहा कि चूंकि योजना 31 मार्च 2024 को समाप्त हो रही है,इसलिए सभी परियोजनाएं वक्त पर पूरी होनी जरूरी हैं।मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा परियोजना में व्यय की धीमी गति और धन के लिए अनुरोध नहीं किये जाने को लेकर केंद्र आगे धन जारी नहीं कर सकता।बैठक में अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा और पंजाब ने हिस्सा लिया।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

RGHS Schme in raj.

सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के अंतर्गत मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं के अनुरूप माननीय विधायक गण, राज्य के सरकारी, अर्ध सरकारी, बोर्ड निगम आदि के कर्मचारियों, पेंशनधारियों को कैशलेस और बेहतर सुविधा प्रदान करवाने हेतु राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम की घोषणा हुई है, अब आरजी एचएस के अंतर्गत चिकित्सा संबंधी रूल्स एवं रेगुलेशंस आरजीएचएस मैं निहित कर दिए गए हैं। अतः आरजी एचएस वेब पोर्टल पर पंजीयन करवाना अनिवार्य है।

Circularonewithcorrigendum (1).pdf(RGHS GRADE)

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

4.5 crore claimed from ayushman scheme on the basis of fake patient in bhopal

13.07.2022
आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों द्वारा किया जा रहा एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। शहर के डीआईजी बंगला क्षेत्र में स्थित गुरुआशीष अस्पताल ने फर्जी मरीजों के आधार पर आयुष्मान योजना से करीब 4.5 करोड़ का क्लेम ले लिया। यह वे मरीज थे जो अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए। पिछले महीने योजना का संचालन करने वाली स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) की तरफ से चिकित्सकों की टीम भेजकर प्रदेश भर के कुछ अस्पतालों की जांच की गई थी। इसमें यह अस्पताल भी शामिल था। मंगलवार को एसएचए ने अस्पताल पर धोखाधड़ी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई। इसके साथ ही सीएमएचओ द्वारा अस्पताल को नोटिस जारी कर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की प्रक्रिया की जाएगी।
सिर्फ सात अस्पतालों ने दिया जवाब

आयुष्मान भारत योजना के सीईओ अनुराग चौधरी ने बताया कि एसएचए ने गड़बड़ी करने वाले प्रदेश के सभी 28 अस्पतालों को 15 जून को नोटिस जारी किया था। इनमें अभी तक सिर्फ सात अस्पतालों ने ही जवाब दिया है। सभी का जवाब आने के बाद योजना से निलंबित कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

एक और अस्पताल पर भी हो चुकी है कार्रवाई

महीने भर पहले वैष्णव अस्पताल में भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। इस पर एफआइआर के बाद अस्पताल के संचालक डा. विवेक परिहार को गिरफ्तार किया गया था। यह गड़बड़ी उजागर होने के बाद ही प्रदेश के विभिन्न जिलों के 47 निजी चिकित्सालयों की जांच चिकित्सकों के 20 दल बनाकर की गई थी। इनमें 28 अस्पतालों में गड़बड़ी मिली थी। बड़ी बात यह है कि इनमें भोपाल के 15 अस्पताल शामिल हैं।
मरीजों के नाम पर बनाए फेंटम बिल

अस्पताल ने बीते कुछ महीनों में ऐसे मरीजों के क्लेम प्रस्तुत किए जो अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए। अस्पताल द्वारा इन क्लेम को फेंटम बिल नाम दिया गया था। जांच के बाद सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन ने कुल 1655 फर्जी मरीजों के फर्जी दस्तावेज जमा कर आयुष्मान योजना से 45195565 रुपए का क्लेम ले लिया। एसएचए ने इसे धोखाधड़ी मानते हुए अस्पताल संचालक डॉ. संदीप दुबे पर एफआईआर दर्ज कराई गई।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Hanumangarh becomes 11th rank in chiranjivi health scheme

12.07.2022
मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना की रैंकिंग में हमारा जिला 23वें से 11वें पायदान पर आ गया है जबकि जयपुर पहले और श्रीगंगानगर 20वें स्थान पर है। जिले का कुल स्कोर 40 फीसदी रहा है। जिले में अब तक 3 लाख 48 हजार परिवार योजना से जुड़ चुके हैं और इसमें अप्रैल माह में 5256 रोगियों का उपचार किया गया।क्लेम की बात करें तो जिले के अस्पतालों को अभी तक 5 करोड़ रुपए का क्लेम मिल चुका है जिसमें प्राइवेट अस्पताल 3 करोड़ 89 लाख रुपए और सरकारी अस्पताल 1 करोड़ 11 लाख रुपए क्लेम राशि ले चुके हैं। सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि चिरंजीवी परिवारों की महिला मुखिया को अगस्त माह तक एंड्रॉयड मोबाइल देने की तैयारी है। इसको लेकर उच्च स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो गई है।जिला अस्पताल में योजना में दो माह से अधिक क्लेम बुक हो रहे हैं। इससे आरएमआरएस की आय बढ़ने से जिला अस्पताल को फायदा हो रहा है। पीएमओ डॉ. मुकेश पोटलिया ने बताया कि पहले रोगियों को राहत और अस्पताल को फायदा हो इसके लिए स्टाफ प्रयासरत है। अप्रैल में 636 केस का क्लेम किया था। वहीं मई में यह संख्या बढ़कर 1032 और जून में 1382 हो गई। इस तरह से अप्रैल में क्लेम राशि 24 लाख रुपए, मई में 38 लाख रुपए और जून में 46 लाख रुपए तक आंकड़ा पहुंच गया। यहां बता दें कि इससे पहले 8 से 10 लाख रुपए प्रतिमाह का काम हो रहा था।चिरंजीवी योजना में 850 रुपए की राशि जमा करवाने के बाद ऐसे लोग जिनकी पॉलिसी अवधि शुरू नहीं हुई है वह भी योजना में इलाज करवा सकेंगे। ऐसे लोगों में यदि कोई गरीब, असहाय एवं निराश्रित परिवार योजना की निशुल्क श्रेणी में पात्रता रखता है लेकिन किसी कारणवश उस श्रेणी में उस परिवार का नाम नहीं जुड़ सका एवं अज्ञानतावश संबंधित ने 850 रुपए प्रीमियम जमा करवाकर योजना में पंजीकरण करवा लिया है लेकिन उसकी पॉलिसी शुरू नहीं हुई है तो इस प्रकार के केस में कलेक्टर की अनुशंषा पर ऐसे मरीजों को योजना में निशुल्क उपचार का लाभ दिया जा सकेगा।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Dr. Jitendra kumar Bagria Dissertation

A Study to Assess the Practice and Utilization of e-Health Initiative- “KILKARI” for Antenatal and Vaccination under RCH Programme at Dudu Block, Jaipur District, Rajasthan

Dr. Jitendra Kumar Bagria1 and Dr. Ramachandra Rao Sathuluri2

1PGDPHM 2017-2018, NIHFW, Munirka, New Delhi, 110067
2Reader, Department of Reproductive Biomedicine, NIHFW, Munirka, New Delhi 110067

 

Introduction: To provide health information with regard to antenatal care and vaccination to the pregnant women and mothers of children age up to 1 year, an e-Health initiative KILKARI was launched by MOHFW on 15th January 2016 in 6 states including Rajasthan. To avail the KILKARI scheme, one has to register with MCTS. Then participants star receiving weekly, free, and pre-recorded audio health messages on their mobiles. Therefore, it was of interest to assess KILKARI’s practice and utilization among participants and this becomes Objective of the study.

Methodology: A descriptive and interview-based study was conducted in Dudu Block of Jaipur district, Rajasthan and interviewed 166 participants. Of them, 82 were pregnant women and rest were mothers of children.

Results: The study revealed that around 2/3rd of participants had a personal phone, rest has shared one. Thirty-seven percent participants listened to the audio messages completely rest hang-up after listening partially. Of the 166 participants, 80% understood the language of messages, while 67% understood the content. Further, over 3/4th of the participants were satisfied with the numbers and duration of the messages. It was also found that nearly 74% of the participants felt that audio messages receive are of importance to them and also motivated to follow instructions. In addition, it was also found that over 80% of the beneficiaries utilized the services of the health facilities by this scheme. This was a great outcome of the scheme.

Conclusions: Registration of the pregnant women with MCTS is a necessary prerequisite to avail the service. In the end, in my opinion, to avail the benefits of KILKARI, availability of mobile, content language and content of messages needs to be addressed. The other suggestion should focus on awareness of this scheme among public & health workers by proper advertising.

PMMVY Pradhan Mantri Matritva Vandana Yojana

Maternity Benefits Under Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana
 

            The maternity benefits under Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY) are available to all Pregnant Women & Lactating Mothers (PW&LM) except those in regular employment with the Central Government or State Government or Public Sector Undertaking or those who are in receipt of similar benefits under any law for the time being in force, for first living child of the family as normally, the first pregnancy of a woman exposes her to new kind of challenges and stress factors. The objectives of the scheme are: (i) providing partial compensation for the wage loss in terms of cash incentives so that the woman can take adequate rest before and after delivery of the first living child; and (ii) the cash incentives provided would lead to improved health seeking behaviour amongst the Pregnant Women and Lactating Mothers (PW&LM).

However, to address the problem of malnutrition and morbidity among children, the Anganwadi Services Scheme, which is universal, is available to all PW&LM including the second pregnancy. Further, in order to address the malnutrition and morbidity during pregnancies a number of interventions are provided to the pregnant women viz. universal screening of pregnant women for Anaemia and Iron and Folic Acid (IFA) supplementation, Calcium supplementation in pregnancy, Deworming in pregnancy, Weight gain monitoring and Counselling on nutrition, family planning and prevention of diseases.

The Government of India has approved Pan-India implementation of PMMVY in all districts of the country w.e.f. 01.01.2017 under which the eligible beneficiaries gets Rs. 5,000/- under PMMVY and the remaining cash incentive as per approved norms (+1000 for urban) towards Maternity Benefit under Janani Suraksha Yojana (JSY) after institutional delivery so that on an average, a woman gets Rs. 6000/-.