Child care leave Rajasthan CCL

चाइल्ड केयर लीव
तीन स्थितियों में ली जा सकती है – बच्चे की देखभाल अथवा परीक्षा अथवा बीमारी में, यानि बच्चे की परीक्षा और बीमारी ही होना आवश्यक नहीं है बल्कि सामान्य पालन हेतु भी छुट्टी मिलती है 🙂
1- राजस्थान सेवा नियम 1951 में नया नियम *103 C चाइल्ड केअर लीव* जोड़ा गया।
2- एक महिला कर्मिक को उसके पूरे सेवाकाल में सबसे बड़े दो बच्चों के पालन पोषण व जरूरत के समय देखभाल यथा बीमार होने, परीक्षा इत्यादि के लिए अधिकतम *2 वर्ष जो कि 730 दिन* के लिए ये, अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत की जा सकेगी।
3- तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।
4- चाइल्ड का तात्पर्य उसकी *आयु 18 वर्ष से कम हो*। *40%* या उससे अधिक विकलांगता की स्थिति में *22 वर्ष* तक चाइल्ड माना जायेगा।
5- यह *सवैतनिक अवकाश* होगा।  अवकाश प्रस्थान से पूर्व जो वेतन आहरित किया जा रहा है वो इस अवकाश काल में देय होगा।
6- इसे अन्य किसी भी देय अवकाश के साथ लिया जा सकेगा।
7- इस अवकाश के लिए आवेदन राज्य सरकार द्वारा जारी *अनुमोदित प्रारूप* में स्वीकृती हेतु समयानुरूप आवेदन करना होगा।
8- चाइल्ड केयर लीव अधिकार नही है। किसी भी स्थिति में महिला कार्मिक बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति के अवकाश पर प्रस्थान नहीं कर सकेगी।
9- किसी भी स्थिति में अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रही महिला कार्मिक को यह अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायेगा अगर बाद में इस अवकाश हेतु आवेदन किया है तो।
10- *पहले लिए जा चुके अवकाश* और वर्तमान में धारित अवकाश को किसी भी सूरत में चाइल्ड केयर लीव में *परिवर्तित नही* किया जा सकेगा।
11- इस अवकाश को अन्य अवकाश लेखो में से नहीं घटाया जा सकेगा।  राज्य सरकार द्वारा निर्धारित फॉर्म में इन अवकाशों को संधारित किया जाएगा। तथा ये फॉर्म सेवा पुस्तिका में चिपकाया जाएगा।
12- सक्षम अधिकारी आवेदित अवकाश को स्वीकृत करने से *मना भी कर सकता* अगर राज कार्य प्रभावित होते होते हों अथवा विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति नहीं हो पा रही हों।
13-  *एक कलेंडर वर्ष में तीन बार से अधिक ये अवकाश नहीं लिया जा सकेगा।* एक स्पेल जो कि एक कैलेंडर वर्ष में शुरू हुआ और अगले कैलेंडर वर्ष में खत्म हो है तो ऐसी स्थिति में उसे, जिस कलेंडर वर्ष में अवकाश शुरू हुआ है उसमें गिना जाएगा।
14- सामान्यता *प्रोबेशनर्स को यह अवकाश देय नही होगा*।यद्धपी फिर भी विशेष परिस्थितियों कोई ये अवकाश लेता है तो उसका प्रोबेशन अवकाश अवधि के बराबर आगे बढ़ाया जाएगा।
15- यह अवकाश उपार्जित अवकाश की भांति ही ट्रीट होगा। तथा उसी प्रकार स्वीकृत किया जा सकेगा।
16- इस अवकाश के प्रारम्भ अथवा अंत में आने वाले रविवार, सार्वजनिक अवकाश घटाए जायेंगे।
17- दिव्यांग चाइल्ड के लिए ये अवकाश लेने पर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही स्वीकृत किया जा सकेगा।
18- चाइल्ड के बीमार होने पर व बाहर रहने की स्थिति में डॉक्टर के प्रमाण के आधार पर ये अवकाश लिया जा सकेगा।
19- चाइल्ड की परीक्षा होने पर लिया जा सकेगा। यदि चाइल्ड होस्टल में रहता है तो महिला कार्मिक को यह तथ्य प्रस्तुत करना होगा कि होस्टल में आपकी केअर की जरूरत कैसे है। इसका प्रमाण प्रस्तुत करने पर ही हॉस्टलर्स चाइल्ड के लिए ये अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।।
Attachments –
1. Order, Application formats
2. Clarification

RAJASTHAN PUBLIC SERVICE COMMISSION (GAZETTED STAFF) SREVICE RULES AND REGULATIONS, 1991

RSR increment rule Extraordinary leave

rsr increment rule Extraordinary leave –

Government of Rajasthan’s Decision.

According to ‘Proviso’ below Rule 31 (b) (ii) of Rajasthan Service Rules [inserted

vide Finance Department Notification No. F. 1 (71) FD (Exp.-Rules)66, dated 28-10-1966],

extraordinary leave in individual cases is allowed to count for increment, if such leave is

availed of for any of the reasons specified in clause (i) or (ii) of the said rule.

It has been observed that such cases are referred to Finance Department long after

the leave is sanctioned. The matter has been considered and it has been decided that the

authority competent to sanction leave while sanctioning extraordinary leave should also

decide at the same time and not later, whether such period of leave should count for

increment and specific recommendation to that effect should be made simultaneously to

Government in the Administrative Department which will take decision with approval of

Finance Department.

Recommendations for period of Extraordinary leave granted in future counting for increment

will not be entertained by the Department, if it was not made simultaneously while granting

leave.

Rajshree Yojna guideline

बेटियां घर की लक्ष्मी हैं लेकिन कई कारणों से बालिकाओं की जन्म दर कम रही है। बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने, उन्हें शिक्षित व सशक्त बनाने के लिए सरकार ने 1 जून 2016 से मुख्यमंत्री राजश्री योजना राज्य में शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य है कि बेटियों की जन्म दर बढ़े, बेटियों को अच्छी परवरिश मिले व बेटियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ें।

विभिन्न चरणों में बालिका के अभिवावकों को आर्थिक सहायता

बालिका के जन्म से लेकर कक्षा 12वीं तक बेटी की पढ़ाई, स्वास्थ्य व देखभाल के लिए अभिभावक को 50,000 तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। ये राशि निम्न चरणों में दी जाती है।

  • बेटी के जन्म के समय 2500 रुपये
  • एक वर्ष का टीकाकरण होने पर 2500 रुपये
  • पहली कक्षा में प्रवेश लेने पर 4000 रुपये
  • कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये
  • कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर 11000 रुपये
  • कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर 25000 रुपये

योजना के लाभ की पात्रता

राजश्री योजना की पहली दो किश्त उन सभी बालिकाओं को मिलेगी जिनका जन्म किसी सरकारी अस्पताल एवं जननी सुरक्षा योजना (जे.एस.वाई.) से रजिस्टर्ड निजी चिकित्सा संस्थानों में हुआ हो। ये दोनों किश्त उनके अभिभावकों को तब भी मिलेगी जिनके तीसरी संतान बालिका हो, किंतु योजना में आगे की किश्तों का लाभ उन्हें नहीं मिल पायेगा।

अब राजश्री योजना का लाभ लाभार्थी को सीधा अपने बैंक खाते में मिले, इसके लिए भामाशाह कार्ड से योजना को जोड़ा गया है।

अब राजश्री योजना का लाभ सुविधापूर्वक अपने खाते में प्राप्त करने के लिए भामाशाह कार्ड ज़रूर बनवायें। योजना के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए अपने ज़िले में कार्यक्रम अधिकारी, महिला अधिकारिता या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से सम्पर्क करें।

भामाशाह कार्ड की अनिवार्यता

  • योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी का भामाशाह कार्ड अनिवार्य है।
  • 15 मई, 2017 के बाद लाभार्थी का भामाशाह कार्ड होने पर भुगतान सीधे उसके बैंक खाते किया जायेगा।
  • लाभ प्राप्त करने के लिए गर्भवती महिला प्रसव पूर्व जांच/एएनसी जांच के दौरान भामाशाह कार्ड एवं भामाशाह कार्ड से जुड़ा हुआ बैंक खाते का विवरण निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पर ए.एन.एम./आशा/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा राजकीय चिकित्सा संस्थान में उपलब्ध करवायें।
  • जिन लाभार्थी महिलाओं का भामाशाह नामांकन नहीं हुआ है, ऐसी महिलाएं अपने निकटतम ई-मित्र केन्द्र से भामाशाह कार्ड बनवाकर निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र अथवा राजकीय चिकित्सा संस्थान में विवरण उपलब्ध करवाये।