Post of senior resident

निदेशालय राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी जयपुर के आदेश के अनुसरण में निम्नलिखित विशेषताओं में राजकीय मेडिकल, कॉलेज चित्तौड़गढ़ के लिए सीनियर रेजिडेंट के पद पर अस्थाई/आवश्यक आधार पर नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किए जाते हैं।

OFFICIAL NOTIFICATION

CamScanner 07-30-2022 17.46.12

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Dog attack resident doctor

नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में आवारा कुत्तों को आतंक देखने को मिल रहा है. अधिकारी के अनुसार एक रेजिडेंट डॉक्टर को रविवार को कम से कम चार आवारा कुत्तों ने काट लिया. जिसके बाद उसे अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराना पड़ा. महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) की जीएमसीएच इकाई के अध्यक्ष डॉ सजल बंसल ने पीटीआई को बताया कि अस्पताल कई दिनों से आवारा कुत्तों के खतरे का सामना कर रहा है, अस्पताल में 40 से 50 कुत्ते देखे जा रहे हैं.बंसल ने कहा, “छात्रावास कैंटीन की पार्किंग में शाम को इन कुत्तों ने एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर पर हमला कर दिया था. जिस कारण वो गंभीर रूप से घायल हो गयीं हैं. उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाया गया है. पिछले हफ्ते से ऐसी चार से पांच घटनाएं हो चुकी है.एमएआरडी के पदाधिकारी ने आरोप लगाया कि जीएमसीएच प्रशासन ने इस मुद्दे के बारे में नागपुर नगर निगम को सूचित किया था, लेकिन बाद में अभी तक कुछ भी नहीं किया गया है.

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Aiims raebareli

28.07.2022
सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायबरेली (All India Institute of Medical Sciences, Raebareli) सुनहरा मौका लेकर आया है. यहां सीनियर रेजिडेंट के 41 पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं. अगर आप भी AIIMS जैसे बड़े और नामी संस्थान में नौकरी चाहते हैं तो जल्द से जल्द आवेदन भेज सकते हैं. उम्मीदवार www.aiimsrbl.edu.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 16 अगस्त 2022 है. आइए देखें इसकी प्रक्रिया और जरूरी जानकारी।

*विभाग और पद

1. एनेस्थिसियोलॉजी- 3
2. बायोकेमिस्ट्री – 1
3. दंत चिकित्सा – 1
4. डर्मेटोलॉजी – 1
5. मेडिसिन – 6
6. माइक्रोबायोलॉजी – 2
7. प्रसूति एवं स्त्री रोग – 3
8. नेत्र विज्ञान- 1
9. हड्डी रोग – 2
10. ओटोलरींगोलॉजी(ENT) – 2
11. बाल रोग – 3
12. पैथोलॉजी- 3
13. मनश्चिकित्सा – 1
14. रेडियोलॉजी – 3
15. सर्जरी – 6
16. आधान चिकित्सा (Transfusion Medicine)- 3

कुल- 41 पद (19 अनारक्षित, 10 OBC, 6 SC, 3 ST और 3 पद EWS उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।

AIIMS रायबरेली भर्ती 2022 के लिए आवेदन शुल्क

सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: 1,000/-
एससी / एसटी वर्ग: 800/-
पीडब्ल्यूबीडी: शून्य

वेतन

सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मैट्रिक्स (स्तर-11) के चयनित उम्मीदवारों को न्यूनतम 67,700 रुपए + एनपीए (चिकित्सा कर्मियों के लिए) दिया जाएगा।

योग्यता
उम्मीदवार को भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 की पहली, दूसरी अनुसूची या तीसरी अनुसूची के भाग II में शामिल एक चिकित्सा योग्यता को पूरा करना चाहिए.
उम्मीदवार को सेंटर या स्टेट चिकित्सा परिषद के साथ पंजीकृत होना चाहिए.
एक स्नातकोत्तर डिग्री यानी संबंधित विशेषता में एमडी / एमएस / डीएनबी या इसके समकक्ष होना चाहिए.
पैथोलॉजी विभाग के लिए: आवश्यक योग्यता एमडी पैथोलॉजी / एमडी लैब मेडिसिन होगी।

आयु सीमा

सीनियर रेजिडेंट्स एसआर के पद के लिए आयु सीमा 45 वर्ष है. (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए 5 वर्ष और 3 वर्ष की छूट)
(ओबीसी उम्मीदवारों के लिए शारीरिक विकलांग (OPH) के मामले में, अधिकतम तक की आयु में छूट).

जरूरी तारीखें
आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि: 16 अगस्त 2022 (शाम 5.00 बजे)
लिखित परीक्षा की तिथि: 20 अगस्त 2022
विभागीय मूल्यांकन की तिथि: 22 अगस्त 2022
चयन प्रक्रिया
लिखित परीक्षा (MCQ आधारित) – 80% वेटेज
विभागीय मूल्यांकन – 20% वेटेज
दस्तावेज सत्यापन के समय उम्मीदवार को मूल दस्तावेज और सेल्फ अटेस्टेड फोटोकॉपी का एक सेट लाना होगा. इसके आधार पर सीनियर रेजिडेंट्स का चयन किया जाएगा|

सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायबरेली (All India Institute of Medical Sciences, Raebareli) सुनहरा मौका लेकर आया है. यहां सीनियर रेजिडेंट के 41 पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं. अगर आप भी AIIMS जैसे बड़े और नामी संस्थान में नौकरी चाहते हैं तो जल्द से जल्द आवेदन भेज सकते हैं. उम्मीदवार www.aiimsrbl.edu.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं| आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 16 अगस्त 2022 है. आइए देखें इसकी प्रक्रिया और जरूरी जानकारी।

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Regarding removal of pay discrepancies of serving Resident Doctors (CAS PG)

सेवारत रेजिडेंट चिकित्सकों (CAS PG) की वेतन विसंगतियां दूर किए जाने के संबंध में-

1.    सेवारत चिकित्सकों को पीजी अध्ययन के लिया अध्ययन (MD/MS/DM/MCH) अवकाश स्वीकृत करने पर उनको चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित दर पर स्टाइपेंड का भुगतान किया जा सकेगा परंतु स्टाइपेंड की राशि अध्ययन अवकाश पर प्रस्थान करने से पूर्व प्राप्त वेतन एवं अध्ययन अवकाश पर देय वेतन की अंतर राशि अधिक नहीं होगी। यह भी सुनिश्चित कर लिया जावे कि उक्त व्यवस्था किए जाने पर स्टाइपेंड के मूल नियमों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता हो। ” There will be deduction in salary for the period of boycott of work”

2.    जिन चिकित्सा अधिकारियों को राजस्थान सेवा नियम 1951 के नियम 110 के प्रावधान के अंतर्गत अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया गया है उन सेवारत पीजी अध्यनरत चिकित्सकों की अंतिम परिलब्धियों की गणना अध्ययन अवकाश पर प्रस्थान करने से पूर्व प्राप्त मूल वेतन, मकान किराया, भत्ता, नगर क्षतिपूर्ति भत्ता, अन्य देय भत्तों एवं समय-समय पर देय महंगाई भत्ते के आधार पर की जाएगी तथा इस प्रकार की गणना की गई परिलब्धियों में से अध्ययन अवकाश पर देय वेतन (मूल वेतन की 50%) एवं इस राशि पर समय-समय पर देय महंगाई भत्ता एवं एमपी की राशि कम कि जाकर अंतर राशि स्टाइपेंड के रूप में दी जाएगी। चिकित्सा अधिकारियों को अध्ययन अवकाश वेतन (अर्द्ध वेतन) के साथ देय स्टाइपेंड की राशि की की गणना निम्नानुसार की जावेगी :–

i.    अध्ययन अवकाश प्रस्थान के समय का मूल वेतन ।

ii.    उस पर समय-समय पर निर्धारित दरों के अनुसार महंगाई भत्ता। अध्यन अवकाश प्रस्थान के समय प्राप्त एमपी ।

iii.    अध्यन अवकाश के समय प्राप्त मकान किराया भत्ता एवं नगर क्षतिपूर्ति भत्ता (यदि देय हो )

iv.    योग 1 से 4

v.    घटाइए

Post MBBS Diploma

know everything

National Board of Examination in Medical Sciences (NBEMS) launched Post MBBS two-year Diploma courses in the following eight Broad specialties:
  • Anesthesiology.
  • Obstetrics & Gynaecology.
  • Paediatrics.
  • Family Medicine (D. Fem. Med).
  • Ophthalmology.
  • Otorhinolaryngology (ENT)
  • Radio Diagnosis.
  • Tuberculosis & Chest Disease.

Government of India (MOHFW) Gazette
NBE Notification
NBE Information Bulletin
NMC Schedule 1
NMC Schedule 2
NMC Schedule 3
CPS Recognition
THE INDIAN MEDICAL COUNCIL ACT, 1956

Seat Matrix of MD/MS/Diploma
Fee and Accounts of Institutes

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मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंसी के लिए जरुरी है एक वर्ष की सेवा

जयपुर (राज.) अक्टूबर 2019

जनवरी 2019 से पूर्व में मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंसी करने हेतु मिनिमम एक साल की सेवा की बाध्यता थी लेकिन जनवरी में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विशेषज्ञ चिकित्सकों को राहत दी थी कि कभी भी सीनियर रेजीडेंसी हेतु एनओसी के लिए आवेदन कर सकते हैं, इसके बाद अत्यधिक संख्या में चिकित्सक एनओसी के लिए आवेदन करने लगे, चूँकि चिकित्सा शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की मिनिमम अहर्ता एक साल की सीनियर रेजीडेंसी है |

चिकित्सा शिक्षा विभाग में सेवा देना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुकाबले आसान है और इसे ज्यादा प्रोफेशनल माना जाता रहा है, इसी कारण चिकित्सकों का रुझान एक साल की सीनियर रेजीडेंसी की तरफ बढ़ने लगा और वे एनओसी के लिए भाग दौड़ करने लगे, बताया जाता है कि जल्दी और पुख्ता एनओसी दिलवाने के रैकेट भी विभाग में पनप गए थे, चिकित्सा विभाग चाहता है कि सेवारत चिकित्सक विभाग से यूँही पलायन न करें, कुछ सेवा तो दें, इसीलिये एक साल तक की सेवा करने के नियम को वापस लाया गया है, इससे सेवारत चिकित्सकों को एक साल सेवा देनी होगी जिससे ग्रामीण जनता को अधिक विशेषज्ञ सेवाएँ मिलेंगी 🙂

आदेश संलग्न है –

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राजस्थान : गैर सेवारत पीजी स्टूडेंट्स लगा रहे सरकार और आमजन को चूना

पी.जी कोर्स मे अनिवार्य सरकारी सेवा के बांड की हो रही अवहेलना
राजस्थान सरकार गैर सरकारी चिकित्सकों को मुफ्त में पीजी करवाती है, ऊपर से तनख्वाह(stipend) और देती हैं, बदले में केवल इतना चाहती हैं कि ये चिकित्सक कोर्स पूरा करने के बाद पांच साल तक प्रदेश में ही आवश्यक रूप से सेवा दें, इसकी गारंटी के रूप में वो एडमिशन देते समय प्रत्येक चिकित्सक से 25 लाख का बांड भरवाती है, या तो पांच साल सेवा दो या फिर 25 लाख जमा करवाओ, तभी ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स वापस मिलेंगे । लेकिन हो क्या रहा है कि ना तो ये चिकित्सक सेवा दे रहे हैं और ना ही 25 लाख जमा करवाए हैं, बस आराम से गायब हो गए हैं । उदाहरण के तौर पर देखें तो चार साल पहले राज्य सरकार ने मेडिकल की पीजी सीटों में एडमिशन के वक्त सरकारी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अनिवार्य सरकारी सेवा के पच्चीस लाख के अनुबंध पत्र (बांड) भरवाए  (सम्बंधित कागजात संलग्न हैं)।
पिछले साल पूरे राज्य से सरकारी मेडिकल कॉलेज से सैंकड़ों डॉक्टर पीजी करके चले गए लेकिन सरकार एक पीजी डिग्री धारी डॉक्टर से बांड भरवाने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों को तीन साल की अनिवार्य सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं दे पाई। सर्विस बॉन्ड के साथ पीजी डॉक्टर्स का एक बैच पास आऊट हो चूका है, तथा प्रिंसिपल एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बाॅन्ड तथा शपथ पत्र की पालना करवाये बगैर औरीजिनल डिग्री प्रमाण पत्र दे दिये, इस मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ।
बॉन्ड की पालना कराने में चिकित्सा शिक्षा विभाग कोई खास रूचि नहीं दिखा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज मे सस्ती दरों पर चिकित्सा शिक्षा लेने वाले डॉक्टर्स ना तो आमजन की सरकारी अस्पतालों में सेवा कर रहे हैं और ना ही बॉन्ड की राशि जमा करवा रहे हैं। जिससे सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है। सरकार को उक्त बांड की राशि प्रिंसिपल अथवा चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से वसूलनी चाहिए या आमजन को सेवाएं दिलानी चाहिए।
चूंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास पीजी पास आऊट की लिस्ट रहती है। अगर चिकित्सा शिक्षा विभाग समय रहते, स्वास्थ्य भवन को सूची उपलब्ध करवा देता है। तो स्वास्थ्य भवन पद्स्थापन कर सकता है। परंतु गत वर्ष स्वास्थ्य भवन को फ्रैशर्स के पद्स्थापन बाबत कोई सूची नहीं पहुंचाई गयी थी। जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बाॅन्ड की सख्त पालना हो रही है। लेकिन दूसरे प्रदेशों से चिकित्सक राजस्थान में पीजी करके राजस्थान की आम जनता को सेवाएं दिए बगैर लौट जाते हैं, और ना ही सरकारी खाते में 25 लाख रुपये जमा करवाते हैं, यानी सरकार को लग रही है डबल चपत।
इनमें से कुछ चिकित्सक सेवा देना भी चाहते हैं तो सरकार उन्हें ले नहीं रही, राजस्थान के सरकारी कॉलेजों से पीजी करने वाले चिकित्सकों ने मांग की है कि उक्त अनुबंध की पालना होनी चाहिए उससे जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और आमजन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं सरकारी अस्पतालों के माध्यम से मिलेगी। जून के प्रथम सप्ताह में करीब 250 ऐसे चिकित्सक अपना कोर्स पूर्ण कर रहे हैं, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन्हें सेवा का मौका देती है या फिर ये 25 लाख का चूना लगाकर मजबूरन होंगें फरार।

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नीट पीजी 2019 के रिजल्ट के बाद सेवारत चिकित्सकों में क्यों है सन्नाटा ?

31 जनवरी की शाम नीट पीजी का रिजल्ट घोषित हो चुका है लेकिन सेवारत चिकित्सकों में सन्नाटा देखने को मिल रहा है, हर साल खूब कोहराम मचता है, रेंक लिस्ट और ग्रुप्स बनने लगते हैं लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है, हालांकि कुछ लोगों ने अपने अंक साझा भी किये हैं लेकिन माहौल में ढीलापन देखने को मिल रहा है |
इसके पीछे कई कारण हैं –

  1. पिछले दो वर्षों में अत्यधिक सिलेक्शन – 2017 से पहले हर वर्ष औसतन 190 सेवारत चिकित्सक पीजी करने जाते थे लेकिन पिछले दो ही सालों में एक हजार से अधिक सेवारत चिकित्सकों के पीजी में चले गए हैं, जिस से अभी पात्र अभ्यर्थी कम हो गए हैं |
  2. समानांतर पैरास्पेस्लिस्ट कोर्स – पिछले दो तीन वर्षों में राजस्थान सरकार द्वारा सेवारत चिकित्सकों के लिए दो अहम कोर्स प्रारंभ किये गए हैं जोकि पीजी के समकक्ष तो नहीं हैं लेकिन उनका कार्य संपादित कर सकते हैं, एक है इक्कीस माह का मेडिकल कॉलेजों में करवाया जाने वाला सर्टिफिकेट कोर्स और दूसरा जिला अस्पतालों में करवाया जाने वाला सीपीएस कोर्स, इन दो कोर्सेज में भी बहुत से सेवारत चिकित्सक जा चुके हैं, यानि पॉइंट 1 & 2 के कारण फील्ड में पीजी देने वालों की संख्या बेहद कम रह गयी है |
  3. सेवा में बढ़ा कार्यभार – पूर्व में सेवारत चिकित्सक सेवा कम और पढाई ज्यादा कर पाते थे लेकिन हाल ही में अस्पतालों में कार्यभार एवं योजनाओं के बढ़ जाने और मजबूत मोनिटरिंग के कारण उन्हें पढाई हेतु पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है, एग्जाम से पहले मौसमी बिमारियों के नाम पर छुट्टियों पर रोक आदि से भी परेशानी होती रही है |
  4. बढ़ा एग्जाम पैटर्न दे रहा दिक्कत – समय के साथ परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव आया है, जिसे बरसों तक गाँवों में काम कर रहे, किताबों से दूर हो रहे सेवारत चिकित्सक टैकल नहीं कर पा रहे हैं, साथ ही नेगेटिव मार्किंग का भी असर देखने को मिल रहा है |
  5. पीजी में पीछे की सीटें (नॉन क्लिनिकल) लेकर शहर में पढाई करके दुबारा से परीक्षा देकर बड़ी सीट लेने का चलन बढ़ रहा है, बजाय इसके की फील्ड में रहके तैयारी की जाए |

देखा जाए तो अब सेवा में रहकर मेवा खाना आसान नहीं है, लगभग सेच्युरेशन की स्थिति आ चुकी है, इस स्थिति में नए एमबीबीएस करके निकल रहे अभ्यर्थी शायद सरकारी सेवाओं का रूख कम करेंगें, जो सेवा में हैं वे पीजी नहीं तो सर्टिफिकेट, सोनोग्राफी, सीपीएस जैसे कोर्सेज में सेटल हो लेंगें अन्यथा बीसीएमओ की सीट टटोलेंगे 🙂

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NOC for NEET PG super speciality SR AP will be online

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान के हाल ही में बने एसीएस श्री रोहित कुमार सिंह, आईटी बैकग्राउंड से हैं और इसका प्रभाव आपको आगामी समय में विभाग की योजनाओं और क्रियाकलाप में दिखेगा, इसी क्रम में पहला कदम बढ़ा है स्टडी एंड चयन में अनापत्ति प्रमाण पत्रों को जारी करने की प्रक्रिया में | पहले यह कार्य कागजी होता था और चिकित्सक इसके लिए अपने संस्थान से लेकर निदेशालय-सचिवालय तक खूब भाग दौड़ करते थे, अब उक्त कार्यों हेतु 01-03-2019 से आवेदन और एनओसी ऑनलाइन होंगी, इस आदेश से राज्य के चिकित्सकों में हर्ष का माहौल है |

हालाँकि इस आदेश के एक बिंदु पर विरोध के स्वर भी मुखर हुए हैं जिसमें कहा गया है कि “इन सर्विस पीजी कर चुके चिकित्सक, सीनियर रेजिडेंटशिप के लिए पीजी पश्चात एक वर्ष की सेवा करने पर ही पात्र होंगें” | यह बिंदु सीनियर रेजिडेंटशिप करना चाह रहे सेवारत चिकित्सकों पर कुठाराघात है |

जार्ड ने जताया विरोध

रेजिडेंट्स यूनियन के विरोध पर चिकित्सा विभाग का सकारात्मक रूख सामने आया है, आशा है जल्द समाधान होगा |

Senior resident ship New Rules

एमसीआई द्वारा मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की नियुक्ति में एक साल की सीनियर रेजीडेंसी की अनिवार्यता किये जाने के बाद से विशेषज्ञों में सीनियर रेजीडेंसी करने की ललक बढ़ी है, जबकि पहले लोग मेडिकल कॉलेज में पड़े रहने या रोजगार अथवा थोड़ा और सीख लेने मात्र के लिए बरसों तक एसआरशिप करते रहते थे । अब बड़ी मांग उठी की एसआरशिप का मौका सभी को मिलना चाहिए, जिस पर शासन उप सचिव, चिकित्सा शिक्षा (ग्रुप 1) से आदेश जारी हुआ और निम्न निर्देश दिए गए –

  1. स्नातकोतर सीटों में वृद्धि एवं सहायक आचार्य हेतु अधिकाधिक योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीनियर रेजीडेंसी की अवधि एक वर्ष की जाती है ।
  2. जिन सीनियर रेजिडेंट्स द्वारा एक वर्ष की सीनियर रेजीडेंसी पूर्ण कर ली गयी है उन्हें चयन प्रक्रिया में नए सिरे से सम्मिलित होने पर अधिकतम तीन वर्ष की अवधि हेतु पुनर्नियुक्त किया जा सकेगा ।
  3. परिपत्र जारी होने की दिनांक से पूर्व से कार्यरत सीनियर रेसिडेंट्स की आगे की समयावधिमें वृद्धि नहीं की जायेगी ।
  4. सीनियर रेजिडेंट्स के समस्त पदों पर चयन हेतु मेडिकल कॉलेज स्तर पर विधिवत विज्ञप्ति जारी कर चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगें ।

इस फैसले पर जार्ड के डॉ. रवि जाखड़ ने ख़ुशी जताई तथा एसआरशिप के इंतजार में बैठे चिकित्सकों को भी आस नजर आने लगी है, हालाँकि एसआरशिप में जमे बैठे कई चिकित्सक हलके से मायूस हैं, उन्हें अब मेडिकल कॉलेज छोड़, मैदान में उतरना पड़ेगा ।