06.08.2022
जयपुर में 104 साल के मरीज का हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट किया है। जयपुर स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में हुए इलाज के बाद मरीज अब पूरी तरह ठीक है। उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी है। हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का दावा है कि ये पूरे भारत में पहला केस होगा जब इतनी बड़ी उम्र के किसी मरीज का वॉल्व रिप्लेसमेंट किया गया है।
हॉस्पिटल के स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज डायरेक्टर डॉ. अमित चौरसिया ने बताया देश में ये अब तक के सबसे अधिक उम्र के मरीज में बिना सर्जरी के हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट प्रोसीजर टावी (ट्रांस कैथेटर एओर्टिक वॉल्व इंप्लांटेशन) हुआ है। इससे पहले भारत में 92 वर्ष तक के मरीज का टावी तकनीक से सफल केस रिपोर्ट किया गया है।
छाती में दर्द की शिकायत पर पहुंचे थे हॉस्पिटल
डॉ. चौरसिया ने बताया कि मरीज नानकराम को छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके बाद वे हॉस्पिटल आए थे। 2डी ईको जांच में उनके हार्ट के एओर्टिक वॉल्व में सिकुड़न देखी गई थी, तभी उन्हें वॉल्व रिप्लेसमेंट की सलाह दी गई थी। उनका एंजियोग्राम भी किया गया जिसमें सामान्य ब्लॉकेज थे। ऐसे में यह स्पष्ट हो गया कि एओर्टिक स्टेनोसिस के कारण ही उन्हें छाती में दर्द हो रहा था। काफी ज्यादा उम्र होने के कारण सर्जरी से वॉल्व रिप्लेसमेंट संभव नहीं था, इसीलिए टावी तकनीक से उनका वॉल्व बदला गया। सिर्फ डेढ़ घंटे में ही पूरा प्रोसीजर हो गया और उन्होंने अगले दिन चलना-फिरना शुरू भी कर दिया।
क्या होता है टावी प्रक्रिया?
डॉ. ने बताया कि ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लाटेंशन (टावी) एक प्रकार की नॉन सर्जिकल प्रोसेस है। इस प्रक्रिया में मरीज को बिना बेहोश किए और बिना चीरा लगाए रोगी की पैर की नस (फेमोरल आर्टरी) से हृदय तक पहुंच कर सिकुड़े हुए वॉल्व को बैलून से फूलाकर नया वॉल्व लगाया जाता है। इस ऑपरेशन में टिशु वॉल्व लगाया जाता है। यह एक तरह से एंजियोप्लास्टी की तरह ही होता है।
⇓ Share post on Whatsapp & Facebook ⇓