Corona in ratlam

रतलाम जिले में बीते 15 दिनों से कोरोना के मरीज मिलने का सिलसिला जारी है । जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों की रैंडम जांच में मंगलवार को भी 2 कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आये हैं। रतलाम के पत्रकार कॉलोनी में 41 वर्षीय पुरुष और बाजना में 34 वर्षीय पुरुष की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है । बीते 10 दिनों में 15 कोरोना पॉजिटिव मिलने से एक बार फिर रतलाम जिले में संक्रमण के बढ़ने का खतरा बन गया है । हालांकि राहत की बात यह है की पॉजिटिव आये मरीजों में कोई गंभीर लक्षण नहीं पाए गए है । पॉजिटिव आए मरीजों को होम आइसोलेशन में रख कर उपचार दिया जा रहा है।रतलाम जिले में जुलाई के महीने में फिर कोरोना अपने पांव पसार रहा है। रतलाम में पिछले 10 दिनों से लगातार मरीज मिल रहे है । मंगलवार को भी 2 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले है ।पॉजिटिव आए मरीजों को होम आइसोलेशन में रख के उपचार दिया जा रहा है। जिले में एक्टिव मरीजों की संख्या 6 है।

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Medical college of ratlam

शहर के मेडिकल कॉलेज में मार्च माह में दूषित भोजन के सेवन से कई बच्चें बीमार हुए थे और उनको भर्ती करना पड़ा था। पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर मात्र मेस संचालक को हटाने की कार्रवाई की है। इसमे मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मेस संचालक के खिलाफ पुलिस में कोई कार्रवाई तक कराना जरूरी नहीं समझा।मार्च माह में जिले के एकमात्र शासकीय मेडिकल कॉलेज में फूड पाईजिनिंग की घटना हुई थी। इसमे कई बच्चें बीमार हुए थे। इस घटना को पहले तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन दबाता रहा, जब घटना बाहर आ गई तो शुरू से लेकर अंत तक मेस संचालक को बचाने का काम होता रहा। इतना ही नहीं, मेडिकल कॉलेज से जुड़े किसी प्रशासनीक अधिकारी पर इस मामले में जांच तक नहीं की गई।

कई सवाल, जिनके जवाब तक नहीं

घटना के बाद अब अब तक कई सवाल है, जिनके जवाब देने से मेडिकल कॉलेज प्रशासन बचता है। इस मामले में नियम यह है कि जो छात्र बीमार हुए और उल्टी हुई, ऐसे मामले में पुलिस को बुलाकर उल्टी को जांच के लिए सागर लैब भेजा जाता है, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने मात्र पुलिस को सूचना देना जरूरी समझा। इसके लिए अलग से कोई कार्रवाई के लिए बताना तक जरूरी नहीं समझा गया। इतना ही नहीं खाद्य और औषधि प्रशासन को भी इस मामले में कोई सूचना नहीं दी गई। जबकि नियम अनुसार सूचना दी जाती तो यह विभाग बचे हुए उस भोजन के नमूने ले लेता, जिसको खाने से मेडिकल कॉलेज के बच्चें बीमार हुए थे।

समिति में कौन नहीं पता

इस मामले को जहां शुरू से अंत तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन दबाता रहा, वही बाद में भी कोई सूचना साझा करना जरूरी नहीं समझा गया। बड़ी बात यह है कि जब सूचना के अधिकार कानून में जानकारी चाही गई तो यह तो बता दिया गया कि मेस संचालक को हटा दिया गया, लेकिन जांच समिति में कौन था, समिति ने किन बिंदुओं पर जांच की, जांच समिति कब बनाई गई यह सब बताना जरूरी नहीं माना गया
नियम अनुसार कार्रवाई कीमेडिकल कॉलेज में कुछ खाने से बच्चें बीमार हुए थे, जिसके बाद उनको बेहतर उपचार दिया गया था। मार्च माह में हुई इस घटना के बाद जांच की गई और दोषी मेस संचालक को निष्कासित कर दिया गया।

लोकेंद्र सिंह कोट, मीडिया प्रभारी, शासकीय मेडिकल कॉलेज

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Now,PG started in ratlam gov.medical college

शासकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के बाद अब पीजी (स्नातकोत्तर) की पढ़ाई के इंतजाम शुरू कर दिए गए हैं। कॉलेज के 11 विभागों में अब 58 सीटों के लिए कॉलेज प्रबंधन ने मेडिकल कॉनसिल ऑफ इंडिया को फीस जमा करवा दी है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम कॉलेज का अगले निरीक्षण अगले माह कर सकती है। उम्मीद है कि अगले शिक्षण सत्र से पीजी क्लासेस शुरू हो जाएगी।

प्राध्यापकों की संख्या के आधार पर दावा
पीजी की पढ़ाई शुरू होने के बाद मेडिकल कॉलेज में बाहर के छात्र-छात्राएं पीजी करने आएंगे, वे रिसर्च करेंगे। इससे स्थानीय मरीजों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा। कम्युनिटी मेडिसीन विभागाध्यक्ष डॉ. एसके लिखार ने बताया कि बुधवार को ही पीजी संबंधित सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है।स्नातकोत्तर कम्युनिटी मेडिसीन में सीटें पहले ही मिल चुकी हैं। इस बार 11 डिपार्टमेंट में पीजी क्लासेस खोलने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है। अगले शिक्षा सत्र में 11 डिपार्टमेंट में 58 पीजी सीट पर काम किया जाएगा।

– डॉ. जितेंद्र गुप्ता, डीन, मेडिकल कालेज, रतलाम

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Sonography is not well in ratlam hospital

20.07.2022
जिला अस्पताल में सोनोग्राफी के लिए आने वाले मरीज और उनके परिजनों को परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सोनोग्राफी के लिए लोगों को पांच से दस दिनों का भी इंतजार करना पड़ रहा है। रतलाम से करीब 25 किलोमीटर दूर बालोद से सपना पंचाल करीब पांच दिनों से सोनोग्राफी कराने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रही है। मंगलवार को भी उसकी सोनोग्राफी नहीं हो सकी है। दरअसल अकेली सपना ही नहीं उन जैसे दर्जनों लोगों को बिना सोनोग्राफी के वापस लौटना पड़ रहा है।सोनोग्राफी मशीन की एक दिन में करीब 30 से 50 सोनोग्राफी की क्षमता होती है। इसके बाद भी सौ से अधिक सोनोग्राफी एक दिन में जिला अस्पताल में हो रही है।

आसपास सुविधा नहीं
जिले में आसपास के ब्लॉकों में सोनोग्राफी कराने की सुविधाएं ही नहीं है। जिसके कारण लोगों को रतलाम आना पड़ता है। हर बार मरीज और परिजन सोनोग्राफी कराने आते हैं, लेकिन उनको अगले दिन का नंबर मिल जाता है।सोनोग्राफी के लगातार तीन दिनों से आ रहा हूं। लाइन में लगे रहने के बाद वापस घर जाना होता है। हमेशा भीड़ का हवाला देकर अगली डेट दे दी जाती है। – नितिन सोलंकी, मरीजसोनोग्राफी के लिए पांच दिनों से आ रही हूं, लेकिन अस्पताल में सोनोग्राफी ही नहीं हो रही है। अभी कल की फिर तारीख मिली है।- रितिका , रतलाम

पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं, मरीजों की सोनोग्राफी अभी सिर्फ जिला अस्पताल में हो रही है। इमरजेंसी केस में तुरंत सोनोग्राफी करते हैं। – डॉ.रवि दिवेकर, आरएमओ जिला अस्पताल

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