15.07.2022
दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच में लंबी देरी को लेकर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने स्वास्थ्य विभाग को गुरुवार को नोटिस जारी किया। आयोग की टीम की सदस्य यौन हिंसा की पीड़िता महिलाओं और बच्चियों को आयोग की रेप क्राइसिस सेल (आरसीसी) और क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर (सीआइसी) कार्यक्रमों के जरिए सहायता करता है। आयोग ने इस दौरान यह पाया कि अस्पतालों में पीड़िताओं की मेडिकल जांच में अनुचित देरी होती है। आयोग ने दावा किया है कि उन्होंने पाया कि दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच करने में लगभग 15 घंटे, लोक नायक अस्पताल में 12 घंटे और सफदरजंग अस्पताल में 8 घंटे 28 मिनट, राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 8 घंटे 4 मिनट, जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में 7 घंटे 20 मिनट, दीपचंद बंधू अस्पताल में 7 घंटे 2 मिनट, बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर अस्पताल में 5 घंटे 37 मिनट, हिंदू राव अस्पताल में 5 घंटे 28 मिनट लगे। राजधानी के अस्पतालों में एक दुष्कर्म पीड़िता को उसकी मेडिकल जांच के लिए औसतन घंटों इंतजार करना पड़ता है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर 23 अस्पतालों में इंटरनल एमएलसी और पांच अस्पताल में फॉर्मल एमएलसी में मेडिकल जांच के मामलों में देरी को लेकर नाम बताए हैं।समय सीमा पर जांच न होने पर कार्रवाई की मांगी जानकारी : आयोग ने दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच को प्राथमिकता देने के लिए अस्पतालों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, मेडिकल जांच के लिए तय मानक समय सीमा और जरूरी समय सीमा के अंदर मेडिकल जांच नहीं होने पर अधिकारियों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है। आयोग ने नोटिस में कहा है कि अगर स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में अभी तक किसी मानक प्रक्रिया का मसौदा तैयार नहीं किया गया है, तो इसे तत्काल तैयार किया जाना चाहिए।
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