Chaos in bhopal memorial hospital

10.08.2022
गैस पीड़ितों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्थापित किए गए भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में गैस पीड़ित मरीजों को दवाइयां ही नहीं मिल रही हैं। जिन मरीजों का डायलिसिस किया जाता है उनको भी जरूरी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में मरीज बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। कई मरीज आर्थिक तंगी के कारण दवाएं नहीं खरीद पा रहे हैं, ऐसे में उनका इलाज ही नहीं हो पा रहा है।आलम यह है कि यहां हररोज 15 से 20 मरीजों के डायलिसिस किए जाते हैं। लेकिन, डायलिसिस के बाद लगने वाले जरूरी इंजेक्शन और दवा ही नहीं मिल पाती है। भोपाल ग्रुप फोर इंफोर्मेशन एंड एक्शन संस्था की रचना ढींगरा ने इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन और निगरानी समिति के साथ ही इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के जिम्मेदारों को अवगत भी कराया है, लेकिन मरीजों को कोई राहत नहीं मिली है।

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health tips for public

04.08.2022
स्वस्थ रहने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल होना जरूरी होता है। योग और व्यायाम के साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन भी व्यक्ति की सेहत पर प्रभाव डालता है। हालांकि मौसमी बीमारी, संक्रमण, खानपान व बिगड़ी जीवन शैली के कारण कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। बीमार होने पर लोग चिकित्सक के पास जाते हैं और उनकी सलाह पर दवाइयों का सेवन करते हैं। हालांकि अगर आपको लगता है कि दवा खाने मात्र से आप स्वस्थ हो सकते हैं, तो आप गलत हैं। कई बार दवा का साइड इफेक्ट हो जाता है। दवाएं भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। लोगों को दवा खाने के सही तरीके के बारे में पता नहीं होता, ऐसे में दवा रोग पर असर नहीं करती, साथ ही दुष्प्रभाव अलग करती है। ऐसे में दवा का सेवन करते समय कुछ सावधानियां भी रखें। चलिए जानते हैं कि दवा के साथ किन चीजों का सेवन भूल से भूी नहीं करना चाहिए, वरना दुष्प्रभाव भी हो सकता है।

एनर्जी ड्रिंक्स

जब आप किसी रोग पर दवा का सेवन करते हैं, तो उसके साथ एनर्जी ड्रिंक नहीं पीनी चाहिए। एनर्जी ड्रिंक्स के साथ दवा लेने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। दवा के डिजाॅल्व होने का समय भी ज्यादा लगता है।

शराब

शरीर के लिए धूम्रपान नुकसानदायक है। दवा के साथ शराब या किसी भी तरह के मादक पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे सेहत पर तो बुरा असर पड़ता ही है, साथ ही एक साथ दोनों के सेवन से लीवर को भी काफी नुकसान हो सकता है। शराब के साथ दवा लेने से लीवर संबंधी कई विकार का जोखिम बढ़ जाता है।

डेयरी प्रोडक्ट्स

अक्सर लोग दूध के साथ दवा का सेवन करते हैं। दूध भले ही सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन कुछ एंटीबायोटिक दवा के असर को कम भी कर सकता है। दूध में कैल्शियम, मैग्नीशियम, मिनरल्स और प्रोटीन पाए जाते हैं, जो दवाइयों के साथ मिलने पर दवा के असर को कम कर देते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, एंटीबायोटिक के साथ दूध या डेयरी प्रोडक्ट का सेवन नहीं करना चाहिए।

मुलेठी

आयुर्वेद में मुलेठी को सेहत के लिए लाभकारी बताया गया है। मुलेठी पाचन तंत्र को मजबूत करती है और पेट संबंधी कई समस्याओं से राहत दिलाती है। लेकिन मुलेठी में ग्लाइसीरिजिजिन पाया जाता है, जो कई दवाओ के असर को कम कर सकता है।

पत्तेदार सब्जियां

बीमार व्यक्ति को पोषण देने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियों के सेवन की सलाह दी जाती है। हालांकि कुछ दवाओं को पत्तेदार सब्जियों के साथ लेने से दवा का प्रभाव बाधित होता है। केल, ब्रोकली या विटामिन के से भरपूर सब्जियां दवाओं के प्रभाव में बाधा डाल सकती हैं।

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Research on dementia

डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति की न केवल याददाश्त कमजोर हो जाती है दिमाग की सामंजस्य बैठाने की क्षमता घटती है, जिससे मरीज को कई समस्याएं होने लगती हैं। लैंसेट जर्नल में प्रकाशित 24 से ज्यादा शोधों पर किए गए एनालिसिस में पता चला है कि यदि रोजाना के कामों में कुछ बदलाव किए जाएं तो इसके खतरे को 35% तक घटाया जा सकता है।

ऐसे कम करें डिमेंशिया का रिस्क
1. सुनने की क्षमता का सीधा संबंध: कम सुनाई देने के कारण व्यक्ति सामाजिक रूप से घुलने-मिलने में कतराने लगता है। ऐसे मेें दिमाग की समन्वय की क्षमता घटती है। नतीजा याददाश्त घटने लगती है।

2. ब्लड प्रेशर को रखें संतुलित: ब्लड प्रेशर में गड़बड़ी से दिल के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे फ्री रेडिकल्स बढ़ने लगते हैं। इससे तनाव व इंफ्लामेशन बढ़ता है, जो न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे मस्तिष्क की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

3. डायबिटीज को नियंत्रित करें: बढ़ी हुई डायबिटीज के नियंत्रित नहीं होने पर यह दिमाग में पहुंचने लगती है, जो कोशिकाओं को क्षति पहुंचाती है।

5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया के शिकार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो दुनिया में 5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं। इनमें से 60% मरीज लो या मिडिल इनकम देशों में रहते हैं। भूलने की बीमारी के ज्यादातर मरीज बुजुर्ग ही होते हैं। WHO के मुताबिक, साल 2030 तक मरीजों की संख्या बढ़कर 7.8 करोड़ हो जाएगी। वहीं, साल 2050 तक यह आंकड़ा 13.9 करोड़ पर पहुंच जाएगा।

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Corona blast in raipur

27.07.2022
छत्तीसगढ़ में महाराष्ट्र, केरल, ओडिशा और पं. बंगाल की तरह कोरोना के मामले तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं, लेकिन राजधानी रायपुर में मंगलवार को 24 घंटे में 224 मरीज मिलने से हेल्थ अमले में खलबली मच गई है। रायपुर में तीसरी लहर की शुरुआत यानी लगभग 5 माह बाद दो सौ से ज्यादा कोरोना संक्रमित मिले हैं।हालांकि प्रदेश में 640 मरीज ही मिले और दुर्ग में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। इधर, छत्तीसगढ़ में पहली बार भिलाई और रायपुर में मंकीपॉक्स के 2 संदिग्ध मरीज मिले हैं। रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में भर्ती 14 साल का बालक कांकेर के पास का है। उसकी ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। भिलाई में संदिग्ध मरीज हाल में ओमान से लौटा है। वह कोविड पॉजीटिव भी निकला है।अंबेडकर अस्पताल के आईसीयू में अभी 10 पेशेंट हैं। अधिकांश की उम्र 50 साल से ज्यादा है और सांस की दिक्कत आई है। हेल्थ बुलेटिन के अनुसार मंगलवार को राज्य में 12394 लोगों की कोरोना जांच हुई, जिनमें 640 मरीज मिले।इस तरह संक्रमण दर 5.16 प्रतिशत रही। इसके साथ ही राज्य में सक्रिय मरीजाें की संख्या करीब 4 हजार हो गई है। इनमें से रायपुर में सर्वाधिक सात सौ, दुर्ग में पांच सौ और राजनांदगांव में चार सौ मरीजों का इलाज चल रहा है।

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Corona in gujarat

20.07.2022
गुजरात में मंगलवार को कोरोना के 787 मरीज सामने आए हैं। इनमें से अहमदाबाद जिले में सबसे अधिक 315 (शहर के 308) हैं। सूरत जिले में 87 (शहर में 57), वडोदरा में 65 (शहर के 44) मरीजों की पुष्टि हुई है। मेहसाणा जिले में 55, राजकोट में 53, गांधीनगर में 42, भावनगर में 24, जामनगर एवं भरुच में 21-21, कच्छ एवं पाटण में 16-16,वलसाड में 12, मोरबी एवं नवसारी में 10-10, आणंद में नौ, अमरेली में छह, खेड़ा एवं सुरेन्द्रनगर में पांच-पांच मरीजों की पहचान हुई है। राज्य में सात जिलों में एक भी नया मरीज सामने नहीं आया है। राज्य में एक्टिव केस बढ़कर 4896 हो गए हैं, इनमें से पांच वेंटिलेटर पर हैं। चौबीस घंटे में 659 लोग कोरोना से मुक्त हुए हैं, उन्हें डिस्चार्ज किया गया है। इसके बाद रिकवरी रेट 98.73 हो गई है।

एक माइक्रो कन्टेनमेंट जोन
शहर में कोरोना के मरीजों में वृद्धि के चलते मंगलवार को पश्चिम जोन में एक और माइक्रो कन्टेनमेंटजोन प्रभावी किया गया है। अब शहर में कुल छह माइक्रो कन्टेनमेंट जोन हैं।

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No fuel available for ambulance in ‘SRILANKA’

12.07.2022
श्रीलंका में सियासी और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और सचिवालय में धावा बोल दिया है और यहां से हटने से मना कर दिया है। इनका कहना कि जब तक प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति इस्तीफा नहीं देंगे, हम नहीं हटेंगे।देश में हालात इतने खराब हो गए हैं कि एंबुलेंस चलाने के लिए भी डीजल-पेट्रोल नहीं बचा है। एंबुलेंस सर्विस ने जनता से कॉल न करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि हम सेवा देने में असमर्थ हैं।इस बीच स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धन ने कहा कि राष्ट्रपति गोटाबाया ने देश छोड़ दिया है और वे बुधवार तक लौट आएंगे। हालांकि, बाद में स्पीकर पलट गए और कहा कि उन्होंने गलती से कहा कि राष्ट्रपति ने देश छोड़ दिया है। वे यहीं हैं।

बुधवार को पद छोड़ देंगे राष्ट्रपति
राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने स्पीकर को सूचित किया है कि वह बुधवार को पद छोड़ देंगे। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ सौदे में देरी होने की आशंका है। विदेशी आर्थिक मदद के बिना श्रीलंका की हालत हर दिन बदतर होती जा रही है।दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल ने अंतरिम राष्ट्रपति पद के लिए सजिथ प्रेमदासा का नामांकन करने का फैसला किया है। विपक्षी दल एसजेबी के पास 50 सांसद हैं और उन्हें 113 सांसदों का समर्थन चाहिए। यदि राष्ट्रपति गोटाबाया 13 जुलाई को पद छोड़ देते हैं तो 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चयन किया जाएगा।

अच्छे से नहीं मिल पा रहा एक वक्त का खाना
लोगों को एक वक्त का खाना भी अच्छे से नहीं मिल पा रहा है। खाने-पीने वाले प्रोडेक्ट के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं। दाल की कीमतें तीन गुना बढ़ चुकी हैं। हालात इतने नाजुक हैं कि यहां भुखमरी और कुपोषण जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। डीजल नहीं होने की वजह से नावें समुद्र में नहीं जा पा रही हैं, जिससे मछलियां भी नहीं पकड़ी जा रहीं। कई लोगों के लिए यह संकट महीनों से बना हुआ है।

पेट्रोल-डीजल की है भारी कमी
श्रीलंका में अधिकतर पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं, क्योंकि पेट्रोल-डीजल ही नहीं है। जिन जगहों पर खुले हुए हैं, वहां बहुत लंबी-लंबी लाइन लग रही हैं। इतना ही नहीं पेट्रोल पंप की निगरानी के लिए पुलिस और आर्मी तैनात कर दी गई है।

पेट्रोलियम मंत्री ने सोमवार को स्पष्ट किया कि 15-17 जुलाई को डीजल और 22-24 जुलाई के बीच पेट्रोल की खेप आने की उम्मीद है। यानी इससे पहले स्थिति में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।

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Aim to connect more and more people for health insurance

27.06.2022
मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत जिले में 8.48 परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य है। लेकिन अभी भी एक लाख 28 हजार से ज्यादा परिवार नहीं जुड़ पाए हैं। वंचितों की योजना का लाभ दिलाने के बार-बार निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने रणनीति बदली गई। अब एएनएम, नर्सेज और आशा सहयोगिनीया घर घर जाकर लोगों को चिरंजीवी योजना के लिए प्रेरित करेंगे। सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने बताया की आदेश के अनुसार चिरंजीवी योजना से वंचित परिवारों के रजिस्ट्रेशन के लिए शुक्रवार को आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत जिले की एएनएम आशा सहयोगिनिया घर घर जाएंगी और और लोगों को योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाने के बारे में पूछेंगी। इस योजना में पंजीकरण नहीं होने के कारण पूछा जाएगा और योजना के लाभ बताए जाएंगे।

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Use of mask and social distancing essential in raipur

23.06.2022
कोरोना के बढ़ते केसों की वजह से स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी प्रारंभ कर दी है। फिलहाल मास्क का उपयोग बढ़ाने व सोशल डिस्टेंसिंग पर जोर देने का फैसला किया है। बूस्टर लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करने को कहा गया है। प्रदेश में 4 हजार टीकाकरण केंद्र खोले हैं।15 आरटीपीसीआर जांच केंद्र रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, अंबिकापुर, बस्तर, राजनांदगांव, कोरबा, महासमुंद, कांकेर, कोरिया, जशपुर, जांजगीर-चांपा, बालोद, बलौदाबाजार व दंतेवाड़ा में संचालित हो रहे हैं। जांच के लिए 1210 रैपिड एंटीजेन जांच केंद्र बनाए हैं। प्रदेश में भरपूर वैक्सीन होने का दावा किया गया है।मंत्रालय में कॉडर के 1200 और करीब 800 संलग्न अधिकारी – कर्मचारी हैं। जीएडी ने इनमें से 850 को स्वास्थ्य विभाग का कैंप लगाकर बूस्टर डोज लगाया है। बाकी स्टाफ ने पहले ही बूस्टर लगवा लिया है। स्वास्थ्य विभाग के जरिए मंत्रालय में दो- तीन दिनों की अंतर में सेनिटाइजेशन भी प्रारंभ कर दिया गया है।हालांकि अभी पहले की तरह गेट पर इसकी व्यवस्था नहीं की गई है। करीब 72 बसें पहले की तरह स्टाफ को लाना- ले जाना कर रही हैं। इधर, प्रदेश में कोरोना के बढ़ते केसेस पर जीएडी, हेल्थ और राजस्व विभाग नजर रखे हुए हैं।वे आपस में को ऑर्डिनेशन कर पहले से तैयारियों को लेकर राय -मशविरा कर रहे हैं। कोरोना की तीन लहरों में इन विभागों ने ही पूरे प्रदेश में दायित्व संभाला था। मालूम हो कि कोरोना की वजह से मंत्रालय के ही आधा दर्जन कर्मचारियों की मौत हो चुकी है।

पब्लिक के लिए हेल्थ गाइडलाइन जारी
कोरोना बढ़ रहा, सावधानी रखें।
भीड़भाड़ व कम हवादार वाले स्थानों पर जाने से बचें।
मास्क लगाए, डिस्टेंसिंग रखें, साबुन से बार-बार हाथ धोएं।
सर्दी-खांसी, बुखार, सांस में तकलीफ पर जांच करवाएं।
उल्टी -दस्त भी लक्षण में हैं शामिल, गंभीरता से लें।

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Specialist doctors will now be posted at district headquarters instead of PHC

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एमडी या एमएस डॉक्टरों के लिए स्पेशलिस्ट कैडर पद सृजित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके अलावा डॉक्टरों को कोई प्रशासनिक कार्य भी नहीं दिया जाएगा और वे अपनी संबंधित विशेषता में ही अभ्यास करेंगे।

मुख्यमंत्री द्वारा दी गई सैद्धांतिक मंजूरी के तहत सरकार विशेषज्ञों के लिए एक विशेष सब कैडर बनाएगी, जिन्हें सलाहकार या वरिष्ठ सलाहकार के रूप में नामित किया जाएगा। इससे पहले एमबीबीएस योग्यता और एमडी/एमएस योग्यता वाले डॉक्टर एक ही कैडर में होते थे। स्पेशलिस्ट कैडर पोस्ट बनने से ये डॉक्टर अपने काम पर और अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे

बड़े अस्पताल में तैनात होंगे विशेषज्ञ

विशेषज्ञ कैडर के रूप में डॉक्टरों को अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के बजाय बड़े अस्पतालों में तैनात किया जाएगा। इससे उनकी पदोन्नति जल्द होगी। प्रदेश सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय से मरीजों को भी बहुत फायदा होगा, क्योंकि उन्हें अच्छे विशेषज्ञों का परामर्श मिलेगा और डॉक्टर अस्पतालों के कामकाज की निगरानी और प्रबंधन करने में अधिक सक्षम होंगे। सीएम मनोहर ने कहा कि वर्तमान संकट की स्थिति में समाज में डॉक्टरों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि डॉक्टरों की यह मांग वर्षों से चली आ रही थी, जिस पर सीएम ने मंगलवार को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।

 

चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर

मंगवार को प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस दौरान ओपीडी सेवाएं बंद रही। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने कहा कि यदि दो दिनों में मांगे नहीं मानी गई तो चिकित्सक 14 जनवरी शुक्रवार को एमरजेंसी सेवाएं भी बंद करके पूर्ण हड़ताल पर चले जाएंगे। वहीं सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है।

 

ये हैं मांगे

एसएमओ की सीधी भर्ती न हो, यह पद प्रमोशन से भरे जाएं। डॉक्टरों की तीन की बजाए चार एसीपी 4, 9, 13 और 20 साल में मिले। विशेषज्ञों के लिए अलग कैडर तैयार किया जाए।

Rajasthan alert in case of epidemic

चिकित्सा विभाग ने जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए जिलों के लक्ष्य निर्धारित किए, जिससे नए नए वैरिएंट का पता चलेगा I सभी जिलों से 20 सैंपल, संभागीय मुख्यालय के जिलों से 30 और जयपुर से 50 सैंपल प्रति सप्ताह जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए हेजे जायेंगे I