Kerala medical college scam

27.07.2022
केरल (Kerala) स्थित एक चर्च के बिशप को मंगलवार को तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट (Thiruvananthapuram Airport) पर ब्रिटेन (Britain) जाने से रोक दिया गया।अधिकारियों के मुताबिक, चर्च द्वारा संचालित एक मेडिकल कॉलेज में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध के बाद अधिकारियों ने बिशप ए धर्मराज रसालम (Bishop A Dharmaraj Rasalam) को केरल की राजधानी में स्थित एयरपोर्ट पर रोक लिया।
ईडी डॉ सोमरवेल मेमोरियल सीएसआई मेडिकल कॉलेज चलाने में कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच कर रहा है। इस मामले को काराकोनम मेडिकल कॉलेज घोटाले के नाम से जाना जाने लगा है अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और संलग्न अन्य सभी संस्थान चर्च ऑफ साउथ इंडिया या सीएसआई द्वारा चलाए जाते हैं.।प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने बाद में रसालम से मुलाकात की और उन्हें कल पूछताछ के लिए बुलाया है।केंद्रीय जांच एजेंसी की एक टीम ने कल चर्च संचालित अस्पताल में मेडिकल सीट का वादा कर छात्रों से कथित तौर पर बड़ी रकम वसूलने के मामले में सीएसआई दक्षिण केरल के मुख्यालय पर छापा मारा था।क्रिश्चियन एजुकेशन बोर्ड के निदेशक फादर सीआर गॉडविन ने बताया कि क्राइम ब्रांच पहले ही मामले की जांच कर चुकी है।गॉडविन ने कल कहा था, “जैसा कि मैंने पहले कहा 25 लोगों ने प्रतिव्‍यक्ति शुल्‍क के संबंध में मेडिकल कॉलेज के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं और मामला अदालत में था। ईडी मामले के बारे में और जानना चाहता है। हमें यह स्पष्ट करते हुए खुशी हो रही है कि वे बिशप से पूछताछ कर रहे हैं और वह उनके सवालों के जवाब देने में खुश हैं। वे (सोमवार को) सुबह 6.30 बजे पहुंचे और छापेमारी शुरू की. उन्होंने हमें पहले सूचित नहीं किया।”

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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान के हाल ही में बने एसीएस श्री रोहित कुमार सिंह, आईटी बैकग्राउंड से हैं और इसका प्रभाव आपको आगामी समय में विभाग की योजनाओं और क्रियाकलाप में दिखेगा, इसी क्रम में पहला कदम बढ़ा है स्टडी एंड चयन में अनापत्ति प्रमाण पत्रों को जारी करने की प्रक्रिया में | पहले यह कार्य कागजी होता था और चिकित्सक इसके लिए अपने संस्थान से लेकर निदेशालय-सचिवालय तक खूब भाग दौड़ करते थे, अब उक्त कार्यों हेतु 01-03-2019 से आवेदन और एनओसी ऑनलाइन होंगी, इस आदेश से राज्य के चिकित्सकों में हर्ष का माहौल है |

हालाँकि इस आदेश के एक बिंदु पर विरोध के स्वर भी मुखर हुए हैं जिसमें कहा गया है कि “इन सर्विस पीजी कर चुके चिकित्सक, सीनियर रेजिडेंटशिप के लिए पीजी पश्चात एक वर्ष की सेवा करने पर ही पात्र होंगें” | यह बिंदु सीनियर रेजिडेंटशिप करना चाह रहे सेवारत चिकित्सकों पर कुठाराघात है |

जार्ड ने जताया विरोध

रेजिडेंट्स यूनियन के विरोध पर चिकित्सा विभाग का सकारात्मक रूख सामने आया है, आशा है जल्द समाधान होगा |

Senior resident ship New Rules

एमसीआई द्वारा मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की नियुक्ति में एक साल की सीनियर रेजीडेंसी की अनिवार्यता किये जाने के बाद से विशेषज्ञों में सीनियर रेजीडेंसी करने की ललक बढ़ी है, जबकि पहले लोग मेडिकल कॉलेज में पड़े रहने या रोजगार अथवा थोड़ा और सीख लेने मात्र के लिए बरसों तक एसआरशिप करते रहते थे । अब बड़ी मांग उठी की एसआरशिप का मौका सभी को मिलना चाहिए, जिस पर शासन उप सचिव, चिकित्सा शिक्षा (ग्रुप 1) से आदेश जारी हुआ और निम्न निर्देश दिए गए –

  1. स्नातकोतर सीटों में वृद्धि एवं सहायक आचार्य हेतु अधिकाधिक योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीनियर रेजीडेंसी की अवधि एक वर्ष की जाती है ।
  2. जिन सीनियर रेजिडेंट्स द्वारा एक वर्ष की सीनियर रेजीडेंसी पूर्ण कर ली गयी है उन्हें चयन प्रक्रिया में नए सिरे से सम्मिलित होने पर अधिकतम तीन वर्ष की अवधि हेतु पुनर्नियुक्त किया जा सकेगा ।
  3. परिपत्र जारी होने की दिनांक से पूर्व से कार्यरत सीनियर रेसिडेंट्स की आगे की समयावधिमें वृद्धि नहीं की जायेगी ।
  4. सीनियर रेजिडेंट्स के समस्त पदों पर चयन हेतु मेडिकल कॉलेज स्तर पर विधिवत विज्ञप्ति जारी कर चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगें ।

इस फैसले पर जार्ड के डॉ. रवि जाखड़ ने ख़ुशी जताई तथा एसआरशिप के इंतजार में बैठे चिकित्सकों को भी आस नजर आने लगी है, हालाँकि एसआरशिप में जमे बैठे कई चिकित्सक हलके से मायूस हैं, उन्हें अब मेडिकल कॉलेज छोड़, मैदान में उतरना पड़ेगा ।