10.06.2022
सदर अस्पताल में एक अज्ञात शव की पहचान के बाद उसे स्वजन को सौंपने के एवज में पोस्टमार्टम कर्मी ने 50 हजार रुपये मांगे। स्वजन गांव लौटे और घर-घर जाकर राशि जुटाने के लिए भीख मांगने लगे। इसका वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। अवकाश पर रहते हुए भी डीएम योगेंद्र सिंह ने सिविल सर्जन को तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया है। इस मामले को स्वास्थ्य मंत्री ने गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। उन्होंने कहा है कि दोषि को छोड़ा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी, अस्पताल में ऐसी घटना होना बहुत ही निंदनीय बात है इससे आम लोगों का अस्पतालों पर भरोसा कम होता चला जाता है।
पुलिस की यह कैसी बर्बरता, पोस्टमॉर्टम में लापरवाही
30.5.2022
दूदू पुलिस की लापरवाही की वजह से मेडिकल बोर्ड पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, मामला 28.5.2022 दूदू का है जब तीन सगी बहनें दो बच्चों के साथ कुएं में कूद गई और अपनी जिंदगी समाप्त कर ली, जिस पर पुलिस ने पांचों शवों का पोस्टमॉर्टम करवाया जिसमें दो दंपतियों के प्रेगनेंट होने की पुष्टि हुई, फिर शवों को परिजनों को सुपुर्द कर दिया।
मामला आज गरमाया जब ग्रामीणों द्वारा कुएं में नवजात का शव तैरता हुआ दिखाई दिया, इससे पुलिस की लापरवाही साफ देखने को मिली और मेडिकल बोर्ड की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो उठे। माना जा रहा है कि यह नवजात शव उन्हीं दंपत्ति में से एक का है जिसकी डिलीवरी का समय डॉक्टरों द्वारा 2 दिन बाद बताया गया था। अप पुलिस द्वारा इस नवजात सबका भी पोस्टमॉर्टम करवाकर डीएनए का पता लगाया जाएगा और पुष्टि की जाएगी कि यह यह शव उन्हीं में से एक दंपति का है।
doctor got notice even after proper duty
मंगलवार को आदर्श नगर, केकड़ी निवासी भंवरलाल जैन की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन ने शाम 5 बजकर 11 मिनट पर मृत्यु घोषित करते हुए पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए पुलिस और संबंधित चिकित्सक को 5.15 बजे सूचना भिजवा दी। सूचना पर तुरंत सदर थाना पुलिस के हैड कान्स्टेबल सम्पतराज मीणा एवं मेडिकल जूरिस्ट डॉ. रोहित मीणा अस्पताल पहुंच गए। पुलिस के क्षेत्राधिकार का मामला उलझा होने के कारण डॉ. रोहित मीणा को पंचनामा नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पुलिस से पंचनामा मिलने के बाद ही शुरु की जा सकती है। आख़िरकार जब तक पंचनामा प्राप्त हुआ तब तक सूर्यास्त हो चुका था। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करना नियम विरुद्ध है। हालाँकि केन्द्र सरकार ने सुसज्जित अस्पतालों में रात्रिकालीन पोस्टमॉर्टेम की अनुमति दी है लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया है। जब चिकित्सक ने नियमानुसार पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया तो परिजन भड़क गए और डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया। परिजनों उनका कहना था कि सूर्यास्त में काफी समय शेष था, इसके बावजूद चिकित्सक ने जान बूझकर देरी की। सूचना पर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. गणपतराज पुरी भी अस्पताल पहुंच गए तथा चिकित्सक से अँधेरे में पोस्टमार्टम करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सूर्यास्त का हवाला देते हुए पोस्टमार्टम से इंकार कर दिया। इस दौरान चिकित्सकों व परिजन के मध्य नोकझोक भी हुई। इस संबंध में मृतक भंवरलाल जैन के पुत्र अभिषेक जैन ने उपखण्ड अधिकारी विकास पंचोली को ज्ञापन सौंप कर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की । इधर क्षेत्राधिकार के मामले में पुलिस का कहना रहा कि कोहड़ा के समीप हादसे की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस अस्पताल पहुंच गई तथा आवश्यक कार्रवाई शुरु कर दी थी लेकिन बाद में पता चला कि हादसा केकड़ी शहर थाना पुलिस के इलाके में हुआ है। इसके बाद शहर थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर शहर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची तब तक सूर्यास्त हो गया।परिजनों ने हंगामा किया और पीएमओ को शिकायत दी जिस पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए अस्पताल प्रशासन ने संबंधित चिकित्सक को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए है। वहीं संबंधित चिकित्सक ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
जिम्मेदारों का कहना है :
सड़क हादसे में मृत भंवरलाल जैन के पुत्र अभिषेक जैन ने ज्ञापन दिया है। इस संबंध में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। विकास पंचोली, उपखण्ड अधिकारी, केकड़ी
आमजन से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता रखनी पड़ती है। सूचना मिलने पर मैं खुद अस्पताल गया था तथा परिजन से बात भी की थी। पुलिस कार्रवाई के कारण देरी हुई तथा सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम नहीं हो सकता है, ये दोनों बात सही है। लेकिन चिकित्सक का बातचीत करने का तरीका सही नहीं था। नोटिस देकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए है। डॉ. गणपतराज पुरी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, राजकीय जिला चिकित्सालय, केकड़ी
सड़क हादसे में मृत्यु की सूचना मिलते ही तुरंत अस्पताल पहुंच गया था। उस समय सूर्यास्त नहीं हुआ था। लेकिन पुलिस के क्षेत्राधिकार का मामला अटका होने के कारण काफी देर तक उन्हें पंचनामा नहीं दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पुलिस से पंचनामा मिलने के बाद ही शुरु की जा सकती है। आख़िरकार जब तक पंचनामा प्राप्त हुआ तब तक सूर्यास्त हो चुका था। सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करना नियम विरुद्ध है। वैसे भी सरकार ने उनकी नियुक्ति पोस्टमार्टम के लिए ही की है, ऐसे में पोस्टमार्टम के लिए मना करने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। दबाव में आकर नियम विरुद्ध कार्य करना सही नहीं है तथा भविष्य में भी वे किसी के दबाव में आकर नियमों के विपरित कार्य नहीं करेंगे। डॉ. रोहित मीणा, मेडिको लीगल ऑफिसर, राजकीय जिला चिकित्सालय, केकड़ी
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महिला रेप विक्टिम की मेडिकल जांच नहीं कर सकते पुरुष चिकित्सक
09.09.2019
राजस्थान : महिला रेप विक्टिम की मेडिकल जांच कौन चिकित्सक करेगा और कौन नहीं, इसके लिए उहापोह की स्थिति बनी हुई थी | कई बार पीडितायें भी पुरुष चिकित्सकों से चिकित्सकीय परिक्षण करवाने में असहज महसूस करती थी | ऐसे में नागौर जिला अस्पताल के फोरेंसिक एक्सपर्ट, डॉ. महावीर चोयल ने इस विषय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से इस विषय में मार्गदर्शन माँगा तब विभाग ने यह निर्देश दिए हैं कि “महिला रेप विक्टिम्स की मेडिकल जांच केवल महिला चिकित्सकों द्वारा ही की जावे” |
डॉ. चोयल द्वारा माँगा गया मार्गदर्शन और विभाग के निर्देश संलग्न है |
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Postmortem format
Postmortem format is enclosed.
Postmortem Allowance for doctors and assistant

अस्पताल में मेडिको लीगल कार्य करने की जिम्मेदारी है किस डॉक्टर की ?
Rajasthan State
किसी भी अस्पताल में अगर एक ही चिकित्सक कार्यरत है तो निश्चित रूप से सभी मेडिको-लीगल कार्य करना उसकी ही जिम्मेदारी होगा |
लेकिन अगर अस्पताल में एक से अधिक चिकित्सक कार्यरत हैं तो यह जिम्मेदारी कौन निभाएगा इसके लिए राज्य सरकार ने दिशा निर्देश तय किये हैं | हालाँकि अधिकतर अस्पतालों में रोटेशन से आपसी समझ से यह कार्य किया जाता है जो की सबसे बेहतरीन स्थिति है लेकिन कई बार कुछ कीड़ादायक स्थिति उत्पन्न हो जाने पर ये दिशा निर्देश लागू होते हैं |
कनिष्ठ विशेषज्ञ फोरेंसिक मेडिसिन (JS FM Male & Female)
चिकित्सा संस्थान प्रभारी*
वरिष्ठतम कनिष्ठ विशेषज्ञ (Senior most JS of any speciality)
कनिष्ठ विशेषज्ञ (Senior JS of any speciality)
वरिष्ठतम वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (Senior most SMO)
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (Senior SMO)
चिकित्सा अधिकारी (Senior most MO)
चिकित्सा अधिकारी (Senior MO)
# उपरोक्त लिस्ट में जिम्मेदारी ऊपर से नीचे तय होगी, सबसे ऊपर वाला मेडिको लीगल कार्य संपादित करेगा, ऊपर का पद रिक्त/अवकाश होने की स्थिति में स्वतः ही उसके जस्ट नीचे वाला वो कार्य संपादित करने का उत्तरदायी होगा |
* संस्थान प्रभारी अगर अन्य कार्य में व्यस्त हैं तो उन्हें बाई-पास किया जायेगा |
# महिला चिकित्सक से बोर्ड एवं रेप केसेज की स्थिति में ही मेडिको लीगल कार्य करवाया जाए |
# फोरेंसिक मेडिसिन की महिला विशेषज्ञ होने पर समस्त कार्य करने ही होंगें |