Now, chc and phc will be entrusted to Panchayti raj.

18.07.2022
उपखंड मुख्यालय पर पंचायत समिति के प्रांगण में 533 लाख रुपए की लागत से लालसोट विधानसभा क्षेत्र के 13 उप स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों का शिलान्यास समारोह पूर्वक किया गया। शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि सरकार जल्द ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पंचायत राज के अधीन करने की कार्यवाही करेगी। जिससे उप स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा सामुदायिक चिकित्सा केंद्र की प्रभावी मॉनिटरिंग सरपंच तथा प्रधान कर सकेंगे।इसके लिए जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लालसोट में पांच थाने, पांच तहसील, पांच कॉलेज बनाने का लक्ष्य है, जो कमी होगी डेढ़ वर्ष में पूरी कर दी जाएगी। अभी लालसोट में एक और कॉलेज खोली जाएगी। ईआरसीपी राजस्थान के लोगों के लिए जीवनदायिनी है भारत सरकार का दबाव है की ईआरसीपी प्रोजेक्ट में से 2लाख हेक्टेयर भूमि सिंचाई के बिंदु को हटा दिया जाए मगर सरकार ऐसा नहीं करेगी। प्रधान नाथू लाल मीणा एडवोकेट ने कहा कि सरकार ने 10 करोड रुपए की लागत से ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों को मंजूरी दी है तथा 31 जुलाई तक 38 स्कूलों में आरओ लगवा दिए जाएंगे, ताकि बच्चों को फ्लोराइड पानी से मुक्ति मिल सके ।वही एक भी गांव को धीरे में नहीं रहने दिया जाएगा। गांवों में रोड लाइट का जाल बिछाया जाएगा।पूर्व चेयरमैन दिनेश मिश्र ने कहा कि लालसोट में 6 करोड़ रुपए की लागत से और सड़कों का निर्माण करवाया जा रहा है। प्रधान डॉक्टर को कौशल्या मीणा ने कहा कि लालसोट को मेडिकल बना दिया गया है। इस अवसर पर कार्यक्रम को डॉक्टर मोहन लाल मीणा, ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश प्रसाद राडा, पूर्व सरपंच ईश्वर लाल मीणा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान पूर्व सरपंच दीपक पटेल, सरपंच प्रीतम सिंह, रामविलास खेमावास, उप प्रधान सूरज कटारा, उप प्रधान कैलाश दुसाद, आनंदी लाल मीणा, सहित अन्य लोग अतिथि रूप में मौजूद थे।

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Poor condition of patna health sub centers.

29.06.2022
कोरोना की तीन लहरों के बावजूद हमारे ग्रामीण अस्पतालों की स्थिति अब भी दयनीय है। पटना में 67 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 स्वास्थ्य उप केंद्र हैं। 113 में से 70 से अधिक स्वास्थ्य उप केंद्र अभी भी बदहाल हैंं। 67 में से 50 से अधिक अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों के भवन अच्छे हो गए हैं, लेकन 40 से अधिक में डॉक्टर नहीं आते। दैनिक भास्कर के 13 रिपोर्टर ने पांच दिनों तक लगातार पटना के गावों में पड़ताल की तो ये खुलासे हुए….।नौबतपुर के अजवां पंचायत भवन के एक छोटे से कमरे में 25 वर्ष से स्वास्थ्य उप केंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। कागज पर यह पांच बेड का अस्पताल है लेकिन यहां न बेड है न दवा और न ही इलाज का कोई संसाधन। छह माह पूर्व तक सप्ताह में एक दिन एक आयुष डॉक्टर आते थे। अब वे भी नहीं आते हैं। अन्य कर्मी कभी नहीं आते हैं। पूर्व पंचायत समिति सदस्य वशिष्ठ कुमार बोले-अस्पताल का अपना भवन वर्ष 2001 से बनकर तैयार है। लेकिन आज तक चालू नहीं किया गया। उद्घाटन के पूर्वे सिलिंग और अन्य भाग गिर रहे हैं

शेरपुर एपीएचसी के डॉक्टर डेपुटेशन पर, सफाईकर्मी के हवाले गोपालपुर एपीएचसी
मनेर के शेरपुर में किराये के मकान में चल रहे एपीएचसी में एक आयुष चिकित्सक डॉ मणिशंकर हैं, तो दूसरे एमबीबीएस डॉ चंदन। डॉ चंदन का डेपुटेशन मनेर पीएचसी में कर दिया गया है। लिहाजा यहां की सारी जवाबदेही डॉ मणिशंकर पर है। मनेर का दूसरा एपीएचसी कमला गोपालपुर में है। किराये के मकान में चल रहे इस एपीएचसी में भास्कर की टीम पहुंची तो देखा कि केंद्र पर बूढ़ी औरत सफाई कर्मी फुलपतिया देवी मौजूद थी।कमरे में बैठने की कौन कहे खड़ा होने की भी जगह नहीं थी। ग्रामीणों ने बताया कि यहां कोई आता – जाता नहीं है। डॉक्टर तो छोड़िए एएनएम भी नहीं आना चाहती। कोई दवा भी उपलब्ध नहीं रहता है।सिर्फ टीकाकरण किया जाता है। नया भवन 1 करोड़ 7 लाख की लागत से बनकर तैयार है।

मसौढ़ी व धनरुआ के एपीएचसी की स्थिति अच्छी
मसौढ़ी प्रखंड में दो एपीएचसी हैं। इनमें एक भगवानगंज और दूसरा लहसुना गांव में है। इन दोनों एपीएचसी में स्टाफ नर्स की नियुक्ति हो चुकी है और वे रोज ड्यूटी भी करती हैं। इन दोनों एपीएचसी में दो डॉक्टर हैं। यहां हर तरह की दवाएं भी उपलब्ध हैं। वहीं, धनरुआ में कुल तीन एपीएचसी हैं। इसमें वीर , बांसबिगहा और सिम्हारी एपीएचसी शामिल है। तीनों केंद्रों पर स्टाफ नर्स की नियुक्ति है। इन केंद्रों पर 10 से 15 तरह की दवाएं ही उपलब्ध है।

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CMHO,sikar inspected the PHC

27.06.2022
सिरोही जिले के आमजन को तक स्वास्थ्य सेवाए पहुंचाना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख उद्देश्य है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के इस अहम उद्देश्य को सिरोही जिले के आम नागरिक तक विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लेने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश कुमार निरंतर रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा ले रहे है।इसी कड़ी में सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, आल्पा का औचक निरीक्षण किया।सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार ने चिकित्सा संस्थान के सेक्टर की कोरोना वैक्सीनेशन की स्थिति, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सभी राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं योजना की स्थिति के बारे में चिकित्सा अधिकारी प्रभारी से जानकारी ली।साथ ही सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार ने कहा की पीएचसी सेक्टर के सभी नागरिकों एवं मरीजों को समय पर सुविधा मिले यह ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के इस अहम उद्देश्य है।सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार ने विभिन्न सरकारी चिकित्सा संस्थान में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की गहराई से जानकारी लेकर अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।इस दौरान मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना और जांच योजना, मेडिकल बायो वेस्ट निस्तारण, साफ सफाई और स्टाफ की उपस्थिति सम्बन्धित रिकॉर्ड का गहराई से निरीक्षण किया।

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Case of locking of 3 sub health centers due to lack of staff in three villages of Mandar area of ​​Abu Road

11.06.2022
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और अनदेखी की वजह से आम लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में गर्मी ने दस्तक दे दी है जिससे विभिन्न बीमारियों के मरीज बढ़ गए है। सीतापुरा, रामपुरा और सोणाली गांव में संचालित उपस्वास्थ्य केंद्र पर कुछ महीने पहले तक एनएम पद पर कर्मचारी लगे हुए थे, जिस का तबादला कर देने के कारण अब तीनों केंद्रों पर ताले लगाने की नौबत आ गई। बीसीएमओ डॉ.रितेश सांखला की तरफ से विभाग के अधिकारियों को कई बार इस मामले की जानकारी देकर एनएम लगाने की मांग करने के बाद भी यहां किसी की पोस्ट नहीं दी गई है।लाखों रुपए खर्च करके भवन बनवाए गए थे,लेकिन कर्मचारी नहीं होने के कारण सभी भवन बेकार पड़े हैं।इन भवनों में सभी उपकरण और मेडिकल किट रखे हुए हैं जो धूल खा रहे हैं। इन उप- स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लगे होने की वजह से गांव वालों को अपने इलाज के लिए दूर स्थित सरकारी अस्पताल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

Specialist doctors will now be posted at district headquarters instead of PHC

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एमडी या एमएस डॉक्टरों के लिए स्पेशलिस्ट कैडर पद सृजित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके अलावा डॉक्टरों को कोई प्रशासनिक कार्य भी नहीं दिया जाएगा और वे अपनी संबंधित विशेषता में ही अभ्यास करेंगे।

मुख्यमंत्री द्वारा दी गई सैद्धांतिक मंजूरी के तहत सरकार विशेषज्ञों के लिए एक विशेष सब कैडर बनाएगी, जिन्हें सलाहकार या वरिष्ठ सलाहकार के रूप में नामित किया जाएगा। इससे पहले एमबीबीएस योग्यता और एमडी/एमएस योग्यता वाले डॉक्टर एक ही कैडर में होते थे। स्पेशलिस्ट कैडर पोस्ट बनने से ये डॉक्टर अपने काम पर और अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे

बड़े अस्पताल में तैनात होंगे विशेषज्ञ

विशेषज्ञ कैडर के रूप में डॉक्टरों को अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के बजाय बड़े अस्पतालों में तैनात किया जाएगा। इससे उनकी पदोन्नति जल्द होगी। प्रदेश सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय से मरीजों को भी बहुत फायदा होगा, क्योंकि उन्हें अच्छे विशेषज्ञों का परामर्श मिलेगा और डॉक्टर अस्पतालों के कामकाज की निगरानी और प्रबंधन करने में अधिक सक्षम होंगे। सीएम मनोहर ने कहा कि वर्तमान संकट की स्थिति में समाज में डॉक्टरों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि डॉक्टरों की यह मांग वर्षों से चली आ रही थी, जिस पर सीएम ने मंगलवार को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।

 

चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर

मंगवार को प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस दौरान ओपीडी सेवाएं बंद रही। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने कहा कि यदि दो दिनों में मांगे नहीं मानी गई तो चिकित्सक 14 जनवरी शुक्रवार को एमरजेंसी सेवाएं भी बंद करके पूर्ण हड़ताल पर चले जाएंगे। वहीं सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है।

 

ये हैं मांगे

एसएमओ की सीधी भर्ती न हो, यह पद प्रमोशन से भरे जाएं। डॉक्टरों की तीन की बजाए चार एसीपी 4, 9, 13 और 20 साल में मिले। विशेषज्ञों के लिए अलग कैडर तैयार किया जाए।

Referral Module for PHC CHC DH Medical college

Rajasthan Health System Development Project (RHSDP) was conceived with the support of World Bank. The ultimate goal of the project is improvement in the Health of people of the State, with the following aims and objectives.

1. To enhance the effectiveness and quality of health services at the primary and secondary levels through policy and institutional development.

2. To increase access to and equity in health care service delivery with particular focus to the underserved sections.
To achieve these objectives the whole project has following components.
1. Policy Development and Project Management

2. Improving Quality and Efficiency of Public Health Care services at Primary/secondary level.

3. Improving access to Health care services for poor.

In consonance with the components it is proposed to strengthen the referral system. In this context quality norms have been decided for various levels of Medical Care facilities.

Referral services are non-existent in the state and do not have definite norms.
Patient is at liberty to seek care at any level of his/her choice and convenience.
In other words a patient does not require referral slip or prior appointment to seek care at higher level facilities. Most of the in- patients at the secondary level institutions, such as CHCs or district hospitals, by pass the primary health facilities, whenever they wish. Self referrals even for common ailments create overcrowding at higher-level institutions. CHCs are also bypassed for even minor ailments resulting in extremely poor bed occupancy. The main reasons for bypassing lower level institutions seem to be lack of diagnostic andreatment facilities at these centers, absence of qualified medical

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and nursing staff, non-availability of drugs, poor equipment, and people’s lack of knowledge about the available services. On the other hand, people often refuse to be referred to higher-level institutions, especially in backward areas, due to high transportation and other costs, and apprehension of mistreatment or poor attention there. In improving quality of health services, a key instrument is referral system, which has to be reviewed to make it stream lined.

The project strongly emphasizes that strengthening of secondary level hospitals would raise credibility of the primary health care system as the referred cases from the primary level will get better quality care on the one hand while reducing the work load of tertiary care hospitals on the other. It is thus imperative to have a good referral system with adequate support so that services

are available in a comprehensive manner nearer their doorsteps. An efficient and effective referral system depends upon

• Linkages between different levels of health care

• Availability of specialists and support services

• Resources

• Timely decision

• Transport and communication

• Referral criteria and protocols

• Feedback and follow-up

Kathputali IEC Order

Differential Physical and Financial guidelines for DH SDH CHC PHC SC Untied & MRS