राजस्थान : गैर सेवारत पीजी स्टूडेंट्स लगा रहे सरकार और आमजन को चूना

पी.जी कोर्स मे अनिवार्य सरकारी सेवा के बांड की हो रही अवहेलना
राजस्थान सरकार गैर सरकारी चिकित्सकों को मुफ्त में पीजी करवाती है, ऊपर से तनख्वाह(stipend) और देती हैं, बदले में केवल इतना चाहती हैं कि ये चिकित्सक कोर्स पूरा करने के बाद पांच साल तक प्रदेश में ही आवश्यक रूप से सेवा दें, इसकी गारंटी के रूप में वो एडमिशन देते समय प्रत्येक चिकित्सक से 25 लाख का बांड भरवाती है, या तो पांच साल सेवा दो या फिर 25 लाख जमा करवाओ, तभी ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स वापस मिलेंगे । लेकिन हो क्या रहा है कि ना तो ये चिकित्सक सेवा दे रहे हैं और ना ही 25 लाख जमा करवाए हैं, बस आराम से गायब हो गए हैं । उदाहरण के तौर पर देखें तो चार साल पहले राज्य सरकार ने मेडिकल की पीजी सीटों में एडमिशन के वक्त सरकारी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अनिवार्य सरकारी सेवा के पच्चीस लाख के अनुबंध पत्र (बांड) भरवाए  (सम्बंधित कागजात संलग्न हैं)।
पिछले साल पूरे राज्य से सरकारी मेडिकल कॉलेज से सैंकड़ों डॉक्टर पीजी करके चले गए लेकिन सरकार एक पीजी डिग्री धारी डॉक्टर से बांड भरवाने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों को तीन साल की अनिवार्य सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं दे पाई। सर्विस बॉन्ड के साथ पीजी डॉक्टर्स का एक बैच पास आऊट हो चूका है, तथा प्रिंसिपल एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बाॅन्ड तथा शपथ पत्र की पालना करवाये बगैर औरीजिनल डिग्री प्रमाण पत्र दे दिये, इस मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ।
बॉन्ड की पालना कराने में चिकित्सा शिक्षा विभाग कोई खास रूचि नहीं दिखा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज मे सस्ती दरों पर चिकित्सा शिक्षा लेने वाले डॉक्टर्स ना तो आमजन की सरकारी अस्पतालों में सेवा कर रहे हैं और ना ही बॉन्ड की राशि जमा करवा रहे हैं। जिससे सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है। सरकार को उक्त बांड की राशि प्रिंसिपल अथवा चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से वसूलनी चाहिए या आमजन को सेवाएं दिलानी चाहिए।
चूंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास पीजी पास आऊट की लिस्ट रहती है। अगर चिकित्सा शिक्षा विभाग समय रहते, स्वास्थ्य भवन को सूची उपलब्ध करवा देता है। तो स्वास्थ्य भवन पद्स्थापन कर सकता है। परंतु गत वर्ष स्वास्थ्य भवन को फ्रैशर्स के पद्स्थापन बाबत कोई सूची नहीं पहुंचाई गयी थी। जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बाॅन्ड की सख्त पालना हो रही है। लेकिन दूसरे प्रदेशों से चिकित्सक राजस्थान में पीजी करके राजस्थान की आम जनता को सेवाएं दिए बगैर लौट जाते हैं, और ना ही सरकारी खाते में 25 लाख रुपये जमा करवाते हैं, यानी सरकार को लग रही है डबल चपत।
इनमें से कुछ चिकित्सक सेवा देना भी चाहते हैं तो सरकार उन्हें ले नहीं रही, राजस्थान के सरकारी कॉलेजों से पीजी करने वाले चिकित्सकों ने मांग की है कि उक्त अनुबंध की पालना होनी चाहिए उससे जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और आमजन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं सरकारी अस्पतालों के माध्यम से मिलेगी। जून के प्रथम सप्ताह में करीब 250 ऐसे चिकित्सक अपना कोर्स पूर्ण कर रहे हैं, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन्हें सेवा का मौका देती है या फिर ये 25 लाख का चूना लगाकर मजबूरन होंगें फरार।

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मेडिकल पीजी राजस्थान : स्योरटी बांड, सर्विस बांड

Rajasthan state post graduation PG/Diploma bonds;

Surety Bond5* Lacs
(1.5 + 3.5)Can’t leave course meanwhile
Service Bond25 LacsHave to serve state at least 5 years
* few specialties exempted
* 1.5 Lac – Bank guarantee
3.5 Lac – Surety Bond

No service bond for these courses, so no compulsion to serve 5 years after course completion –

(But have to pay surety bond of 5 Lac)

PG Courses;

  • Anatomy
  • Biochemistry
  • Pharmacology
  • PSM
  • Physiology
  • Forensic Medicine

Super Specialty Courses;

  • Cardio Thorasic Surgery
  • Pediatric Surgery

# Government order is attached below.
# All formats are attached below.

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राजस्थान के सेवारत चिकित्सकों को पीजी कोर्स हेतु कार्यमुक्त करने के आदेश

निदेशक जन स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान ने नीट पीजी 2019 के सेवारत चिकित्सकों को कार्यमुक्त करने के आदेश जारी किये हैं |
In service NEET PG doctors relieve 2019.
आदेश संलग्न हैं –

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राजस्थान के सेवारत दंत चिकित्सकों को पीजी कोर्स हेतु कार्यमुक्त करने के आदेश

निदेशक जन स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान ने नीट पीजी 2019 के सेवारत दंत चिकित्सकों को कार्यमुक्त करने के आदेश जारी किये हैं |
आदेश संलग्न हैं –

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नीट पीजी काउंसलिंग और वकीलों की चांदी

मेडिकल पीजी की एक सीट करोड़ रुपये की मानी जाती है, सो साफ़ है कि हर सीट के लिए घमासान होता है, ब्रांच का लालच हो या पीजी का तमगा, ख़ास तो होता ही है, अगर इसके लिए पढाई के साथ कुछ क़ानूनी लड़ाई में पैसे खर्च हो जाएँ तो भी कम ही हैं | लगभग हर साल ही काउंसलिंग कोर्ट में घसीटी ही जाती है, कोर्ट यानी वकील, वकील यानि मोटी फीस, वो भी नकद में | हर वकील सोचता है कि डॉक्टरों के पास पैसों की क्या कमी ? सो तैयार रहते हैं, हालांकि सरकारी ग्रामीण भत्ताधारी चिकित्सकों के पास कहाँ पैसा है लेकिन वकील उनकी तुलना जयपुर के एसएमएस वाले मोटे डॉक्टरों से करते हैं, सो बेचारे सरकारी डॉक्टर चंदा चपाटी करके ये फीस चुकाते हैं | पिछले तीन साल में केस जयपुर से दिल्ली तक गए और फीस लाखों से करोड़ों तक गयी | इसी बीच जयपुर में कुछ युवा वकीलों ने मेडिकल लाइन में ही कैरियर बनाने कि ठानी और वे दिल्ली की सभी सुनवाइयों में खुद के खर्चे पर जाने लगे, मकसद यह दिखाना कि हम मेडिकल के केसों के जानकार हैं, पधारो म्हारे ऑफिस, कई कॉलेज वाले छात्र उनके यहाँ पधारने लगे | एक युवा वकीलन ने तो मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के आस पास फ्रेशर ढूंढने कि कोशिश करी ताकि एक बार कैसे भी मामले को खुद के पैसे खर्च करके भी कोर्ट में पटक दिया जाए ताकि फिर एक बार माहौल बन जाए तो वो दिल्ली तक जाए, कैरियर भी बने और कैशियर भी | यानि जबरदस्ती शुरुआत की कोशिश की जा रही है जबकि राजस्थान में कोई किसी भी तरह का केस बनता ही नहीं, गिने चुने सेवारतों के काम चलाऊ नंबर आये हैं, फील्ड से ज्यादातर लोग कॉलेजों में जा चुके हैं, अब बचे ही बहुत कम हैं, जो हैं वे भी एक दो साल में ही आये हैं | अतः सावधान रहें, चांदी बचा कर रखें |

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Impact of Tamilnadu High Court decision in Rajasthan about NEET PG bonus marks

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गैजेट नोटिफिकेशन की अनुपालना में सेवारत चिकित्सकों को पीजी कोर्सेज में प्रवेश हेतु लगने वाली नीट परीक्षा में उनके प्राप्तांकों के प्रतिशत के रूप में बोनस अंक दिए जाते हैं | राजस्थान राज्य में कार्यरत सेवारत चिकित्सकों को 1 साल के 10% तथा अधिकतम 3 साल के 30% अंक बोनस के रूप में दिए जाते हैं | पिछले साल के मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार सभी रूरल/ग्रामीण सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंक का हक़ है, चूँकि राजस्थान ऐसा राज्य है जिसमें पहले से ही इलाकों को पहाड़ी, दुर्गम, दूरस्थ और ग्रामीण (Hilly/Difficult/Remote/Rural) में बांटने के बजाय केवल ग्रामीण क्षेत्र में ही बांटा गया है जिसका आधार केवल ग्रामीण भत्ते (Rural Allowance) को माना गया है यानी जिसे यह भत्ता देय है वह बोनस अंक का हकदार है |

देखा जाए तो यह एक बड़ी पालिसी है जो एमसीआई के गैजेट और  ग्रामीण भत्ते पर टिकी है, साथ ही पिछले सालों के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी इन दोनों को ही सही ठहराया गया है, ऐसी स्थिति में राजस्थान में 10-20-30 बना रहेगा, वो भी हर स्थिति में |

तमिलनाडु हाईकोर्ट की कमेटी ने किया बोनस अंक प्रक्रिया में बदलाव

What is Rural Allowance in Rajasthan ?

MCI “Rural” word Gazette Notification is here

नीट पीजी 2019 के रिजल्ट के बाद सेवारत चिकित्सकों में क्यों है सन्नाटा ?

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New NEET PG bonus marks criteria for Tamilnadu In-Service Doctors

मद्रास हाई कोर्ट ने इनसर्विस कैंडिडेट को पीजी में दिए जाने वाले बोनस अंकों की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है | हाईकोर्ट ने एक सात सदस्य कमेटी का गठन किया था इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को प्रस्तुत कर दी है | कमेटी ने तमिलनाडु राज्य के सभी इनसर्विस कैंडीडेट्स को चार कैटिगरीज में बांटा है, हर केटेगरी के कैंडिडेट को अलग-अलग बोनस अंक दिए जाएंगे, ये चार केटेगरी निम्न है – पहाड़ी, दुर्गम, दूरस्थ और ग्रामीण | (Hilly/Difficult/Remote/Rural)
पहाड़ी इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को उनके नीट स्कोर का 1 साल का 10% बोनस अंक मिलेगा (Max 30%) तथा इस तरह के पहाड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 119 है, दुर्गम इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को 1 साल के 9% बोनस अंक मिलेंगे (Max 27%) तथा इस तरह की 660 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, दूरस्थ इलाकों में कार्य चिकित्सकों को 1 साल के 8% बोनस अंक दिए जाएंगे (Max 24%), अंतिम केटेगरी है ग्रामीण चिकित्सक जिनको की 1 साल के 5% बोनस अंक तथा 3 साल के अधिकतम 15% बोनस अंक दिए जाएंगे |
साथ ही कुल डिप्लोमा कोर्स की सीटों की 50 फ़ीसदी सीटें केवल सेवारत चिकित्सकों के लिए आरक्षित होंगी |

# Health is a state subject in the Constitution.

Source : Times of India

तमिलनाडु नीट पीजी बोनस अंक डिसीजन और राजस्थान –

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नीट पीजी 2019 के रिजल्ट के बाद सेवारत चिकित्सकों में क्यों है सन्नाटा ?

31 जनवरी की शाम नीट पीजी का रिजल्ट घोषित हो चुका है लेकिन सेवारत चिकित्सकों में सन्नाटा देखने को मिल रहा है, हर साल खूब कोहराम मचता है, रेंक लिस्ट और ग्रुप्स बनने लगते हैं लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है, हालांकि कुछ लोगों ने अपने अंक साझा भी किये हैं लेकिन माहौल में ढीलापन देखने को मिल रहा है |
इसके पीछे कई कारण हैं –

  1. पिछले दो वर्षों में अत्यधिक सिलेक्शन – 2017 से पहले हर वर्ष औसतन 190 सेवारत चिकित्सक पीजी करने जाते थे लेकिन पिछले दो ही सालों में एक हजार से अधिक सेवारत चिकित्सकों के पीजी में चले गए हैं, जिस से अभी पात्र अभ्यर्थी कम हो गए हैं |
  2. समानांतर पैरास्पेस्लिस्ट कोर्स – पिछले दो तीन वर्षों में राजस्थान सरकार द्वारा सेवारत चिकित्सकों के लिए दो अहम कोर्स प्रारंभ किये गए हैं जोकि पीजी के समकक्ष तो नहीं हैं लेकिन उनका कार्य संपादित कर सकते हैं, एक है इक्कीस माह का मेडिकल कॉलेजों में करवाया जाने वाला सर्टिफिकेट कोर्स और दूसरा जिला अस्पतालों में करवाया जाने वाला सीपीएस कोर्स, इन दो कोर्सेज में भी बहुत से सेवारत चिकित्सक जा चुके हैं, यानि पॉइंट 1 & 2 के कारण फील्ड में पीजी देने वालों की संख्या बेहद कम रह गयी है |
  3. सेवा में बढ़ा कार्यभार – पूर्व में सेवारत चिकित्सक सेवा कम और पढाई ज्यादा कर पाते थे लेकिन हाल ही में अस्पतालों में कार्यभार एवं योजनाओं के बढ़ जाने और मजबूत मोनिटरिंग के कारण उन्हें पढाई हेतु पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है, एग्जाम से पहले मौसमी बिमारियों के नाम पर छुट्टियों पर रोक आदि से भी परेशानी होती रही है |
  4. बढ़ा एग्जाम पैटर्न दे रहा दिक्कत – समय के साथ परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव आया है, जिसे बरसों तक गाँवों में काम कर रहे, किताबों से दूर हो रहे सेवारत चिकित्सक टैकल नहीं कर पा रहे हैं, साथ ही नेगेटिव मार्किंग का भी असर देखने को मिल रहा है |
  5. पीजी में पीछे की सीटें (नॉन क्लिनिकल) लेकर शहर में पढाई करके दुबारा से परीक्षा देकर बड़ी सीट लेने का चलन बढ़ रहा है, बजाय इसके की फील्ड में रहके तैयारी की जाए |

देखा जाए तो अब सेवा में रहकर मेवा खाना आसान नहीं है, लगभग सेच्युरेशन की स्थिति आ चुकी है, इस स्थिति में नए एमबीबीएस करके निकल रहे अभ्यर्थी शायद सरकारी सेवाओं का रूख कम करेंगें, जो सेवा में हैं वे पीजी नहीं तो सर्टिफिकेट, सोनोग्राफी, सीपीएस जैसे कोर्सेज में सेटल हो लेंगें अन्यथा बीसीएमओ की सीट टटोलेंगे 🙂

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NOC for NEET PG super speciality SR AP will be online

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान के हाल ही में बने एसीएस श्री रोहित कुमार सिंह, आईटी बैकग्राउंड से हैं और इसका प्रभाव आपको आगामी समय में विभाग की योजनाओं और क्रियाकलाप में दिखेगा, इसी क्रम में पहला कदम बढ़ा है स्टडी एंड चयन में अनापत्ति प्रमाण पत्रों को जारी करने की प्रक्रिया में | पहले यह कार्य कागजी होता था और चिकित्सक इसके लिए अपने संस्थान से लेकर निदेशालय-सचिवालय तक खूब भाग दौड़ करते थे, अब उक्त कार्यों हेतु 01-03-2019 से आवेदन और एनओसी ऑनलाइन होंगी, इस आदेश से राज्य के चिकित्सकों में हर्ष का माहौल है |

हालाँकि इस आदेश के एक बिंदु पर विरोध के स्वर भी मुखर हुए हैं जिसमें कहा गया है कि “इन सर्विस पीजी कर चुके चिकित्सक, सीनियर रेजिडेंटशिप के लिए पीजी पश्चात एक वर्ष की सेवा करने पर ही पात्र होंगें” | यह बिंदु सीनियर रेजिडेंटशिप करना चाह रहे सेवारत चिकित्सकों पर कुठाराघात है |

जार्ड ने जताया विरोध

रेजिडेंट्स यूनियन के विरोध पर चिकित्सा विभाग का सकारात्मक रूख सामने आया है, आशा है जल्द समाधान होगा |

NEET PG 2019 RESULT DECLARED, CHECK HERE

Full result file is attached below –