Eight central pay commission

केंद्र सरकार ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर किए गए एक दावे से इनकार किया है जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय कर्मियों व पेंशनरों के वेतन, भत्तों व पेंशन के संशोधन के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन नहीं होगा. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव अभी तक सामने नहीं आया है. चौधरी ने एक सवाल का जवाब में ये बातें कही हैं. सवाल पूछा गया था कि क्या यह सच है कि सरकार केंद्रीय कर्मियों व पेंशनरों के वेतन, भत्तों व पेंशन को रिवाइज करने के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन नहीं करेगी?

इसलिए खड़ा हुआ था सवाल
चौधरी ने राज्यसभा को जानकारी दी कि सातवें वेतन आयोग के चेयरमैन ने सिफारिश की थी कि दस साल के लंबे समय का इंतजार किए बिना भी एक अवधि में पे मैट्रिक्स का रिव्यू किया जा सकता है. मंत्री ने कहा कि पे मैट्रिक्स को रिव्यू किया जा सकता है और Aykroyd formula के आधार पर इसे रिवाइज किया जा सकता है. इस फॉर्मूले में आम आदमी के इस्तेमाल में आने वाली चीजों के भाव में बदलाव को विचार में लिया जाता है जिसे शिमला की लेबर ब्यूरो समय-समय पर रिव्यू करती है. सातवें वेतन आयोग ने सुझाव दिया था कि मैट्रिक्स को समय-समय पर बिना वेतन आयोग का इंतजार किए संशोधित करने के लिए इस फॉर्मूले को आधार बनाया जाना चाहिए।

डीए/डीआर को लेकर मंत्री ने कही ये बात
सरकार से डीए/डीआर को लेकर भी एक सवाल पूछा गया था कि ऊंची थोक महंगाई दर के चलते क्या महंगाई भत्ता (डीयरनेस अलाउंस) और महंगाई राहत (डीयरनेस रिलीफ) को बढ़ाया जाएगा? इस पर चौधरी ने जवाब दिया कि इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि डीए/डीआर ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रिलयल वर्कर्स (AICPI-IW) डेटा के आधार पर तय होता है. यह डेटा शिमला की लेबर ब्यूरो उपलब्ध कराती है. केंद्रीय कर्मी और पेंशनर्स डीए/डीआर दरों में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं.

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कितनी सेलरी बढ़ेगी DACP में प्रमोशन के बाद ? चौंक जायेंगे आप जानकर !

राज्य सरकार चिकित्सकों को Dynamic Assured Career Progression (DACP) के तहत समयबद्ध पदोन्नति देती हैं, छठे पे कमीशन में यह पदोन्नति 5400, 6600,7600 etc. pay grade के रूप में दी जाती थी लेकिन सातवें पे कमीशन में यह pay band levels के रूप में दी जाती है |
एक Government Doctor की DACP के बाद उसकी बेसिक पे कितनी हो जायेगी ? यह एक सामान्य सवाल है !
आप भी जानिये कि प्रमोशन बाद कितनी होगी बेसिक और कुछ वृद्धि क्या होगी ? हालाँकि छठे पे कमिशन के मुकाबले सातवें में प्रमोशन में ठेंगा ही मिलता है, जानकर चौंक जायेंगे आप |

DACP Promotion illustration ;

Suppose Basic Pay on 1 April 2018 is – 69000 /-

One bonus promotional increment – 69000 to 71100 /-
Pay Band level shifting from L-14 (5400) to L-16 (6600)

Basic pay shifting : Just NEXT to promotional Basic pay – Next to 71100 is 71400 /-
Basic after DACP – 71400 /-

Gains

Raised basic = 71400-69000 = 2400/-
Dearness Allowance (Approx. @10%) = 240/-
NPA (If availing @ 20%) = 480/-
HRA (If availing @ 8%) = 192 /-
Gross gain = 2400+240+480+192 = 3312 /-
Net gain (Deduct income tax @ 30%, NPS @ 10%) = 3312-40% = 1987 /- per month

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खुश खबर : NPA है ‘बेसिक पे’ और इसे जोड़ा जायेगा PL सरेंडर और रिटायर्मेंट बेनिफिट में

पिछले कुछ दिनों से चल रही गफलत का हुआ पटाक्षेप और Non Practicing Allowance को बेसिक पे माना गया है, यानि एनपीए को सभी अलाउंसेज की गणना में जोड़ा जायेगा, PL सरेंडर और रिटायर्मेंट की 300 PL के पैसों के नकद भुगतान में इसे मूल वेतन मानते हुए गणना की जाएगी |
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एक मामले में फाइनेंस विभाग ने चिकित्सकों की जिन्दगी झालावाड़ करने की कोशिश की थी लेकिन मौके पर ही मेडिकल टीचर्स ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराया जिससे आर्डर रिवर्ट किया गया |

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प्रमोशन की आस में बिलखता सरकारी डॉक्टर

एक तरफ सरकार कम चिकित्सकों का रोना रोती है और दूसरी तरफ जो चिकित्सक सेवा में हैं उन्हें दर्द देने में कोई कसर नहीं छोड़ती है, चाहे वो मूलभूत संसाधनों की बात हो या चिकित्सा के अलावा अन्य कामों में उलझाए जाने या फिर विभागीय लफड़ों में अटका देने जैसे बहुत से फसाद ।
लेकिन अगर एक आज के मोटे दर्द की बात कि जाए तो वह है समयबद्ध पदोन्नति ।
पूर्व में चिकित्सक अपनी सेवा के शुरूआती पदों जैसे कि चिकित्सा अधिकारी या वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी या कनिष्ठ विशेषज्ञ के पदों पर ही पूरी जिन्दगी सेवा करते हुए सेवानिवृत हो जाते थे, वक़्त के साथ जागरूकता एवं मांग हुई कि चिकित्सकों को समयबद्ध पदोन्नति दी जाए, लेकिन ऊपर के पद कम थे इसलिए डीपीसी (The Departmental Promotion Committee) में कुछेक के प्रमोशन होते थे, हालात वही रहे तो मांग फिर तेज हुई और मिला केन्द्र की तर्ज पर डीएसीपी (Central Health Service (CHS) Officers in Central Government are governed by the Dynamic Assured Career Progression (DACP) Scheme), यानि समयबद्ध पदोन्नति, जैसे कि एक चिकित्सक को सेवा में आने के बाद प्रमोशन मिलेंगे 6-6 साल बाद, इसमें भी आगे कई विसंगतियां हैं लेकिन उनके लिए मांग जारी है ।
प्रमोशन को लेकर राजस्थान में बड़ी बड़ी हड़तालें और समझौते तक हो चुके हैं, बड़ा समझौता हुआ था कि हर साल को एक अप्रेल तक के जितने प्रमोशन बकाया होंगें वे एक अप्रेल को आगे की पे ग्रेड में प्रमोट कर दिए जायेंगे, लेकिन वही ढाक के तीन पात । आगे के प्रमोशन को तो छोड़ो, पहले प्रमोशन के ही लाले पड़ रहे हैं ।

2017 में सरकारी वादा हुआ कि आगे से हर साल कि एक अप्रेल को विगत साल के समस्त बकाया प्रमोशनों की लिस्ट जारी कर दी जायेगी, अच्छा लगा, जय जयकार हुई, मजा आया, लेकिन दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि यह मजा आभासी निकला, करीब 1500 डॉक्टरों के प्रमोशन 1 April 2018 को होने थे, एक अप्रेल को वो सुबह से नहा धोकर पूजा की थाली ले, पूरे दिन विभाग और अरिसदा की जय जयकार करते हुए इन्तजार करते रहे कि कब वो समझौते कि मोहर लगी प्रमोशन लिस्ट जारी हों और चिकित्सा अधिकारी हो जाएँ वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, दिन ढल गया रात हो गयी, अगला दिन चला गया, अगला महीना चला गया अप्रेल 2018 से अप्रेल 2019 आ गयी, वरिष्ठ बनने कि लालसा पाले वो बेचारा आम एमओ, त्रिविम में झाँक रहा है, मई 2019 आ गया है ।

एक साल एक्स्ट्रा गुजर गया, लेकिन कुछ नहीं, हालाँकि बीच में एक बार सीनियरटी लिस्ट जरूर डाली गयी थी जिसमें 2011 वाले को 2007 वाले सीनियर बता रखा था, आवेदन मांगे गए कि कोई कमी लगे तो बताओ, लोगों ने कमियां बताई, फिर लिस्ट जारी हुई, लगभग सभी कमियां वैसी कि वैसी थी, फिर से लिस्ट जारी हुई, ज्यादातर कमियां सेम कि सेम, लोगों ने दो बार अप्लिकेशन देदी कि मेरी गलती सुधार दो लेकिन कोई धणी-धोरी नहीं ।

1 अप्रेल 2018 तक करीब 1500 चिकित्सकों का प्रमोशन बकाया था, अप्रेल 2019 में फिर बहुत से बढ़ गए ।

सुना है कि अभी इन 1500 चिकित्सकों का डेटा कार्मिक विभाग भेजा गया है ताकि DACP कि कारवाई हो, वो डेटा ? हाँ वही जो एकदम फर्जी था । लोगों ने दो दो बार अपनी ACR जमा करवा दी लेकिन जवाब मिलता है कि आपकी ACR/APR (Annual Progress Report) नहीं आई । किसी कि कहते हैं IPR (Immovable Property Return – Yearly) नहीं आई, जबकि वो जमा करवा चुका, कार्मिक विभाग को डेटा भेजने से पहले एक बार संशोधन का मौका तो दिया जाता ना कि किसका क्या आधा अधुरा है । निदेशालय में कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ से यह पता किया जा सके कि किस कर्मचारी का किस वर्ष का ACR & IPR जमा है और किस वर्ष का नहीं, जिलों से ACR भेजे जाते रहे हैं लेकिन यहाँ नहीं पहुँचते, ना ही कोई पावती दी जाती है, ना ही डेटा ऑनलाइन किया गया, किसी को कोई लेना देना नहीं है, सरकारी डॉक्टर बस बिलखता रहे, ना विभाग, ना विभाग के आला अधिकारी । विभागीय लक्ष्यों और कार्यक्रमों के आंकड़े इन्हें फटाफट और सही चाहिए, सब उपस्थित, युनिफोर्म और सफाई जोरदार चाहिए, कहते हैं नाकारा सामान हटाओ, अजी असली नाकारा सामान तो स्वास्थ्य भवन का बाबूराज है, जिनके कारण से एक अप्रेल को होने वाला प्रमोशन अगली एक अप्रेल को पार कर गया है, जिन 1500 चिकित्सकों का डेटा कार्मिक विभाग भेजा गया है उनमें से करीब एक हजार के कागजों में कुछ ना कुछ दिक्कत है और उनके प्रमोशन “डेफर” किये जा रहे हैं, यानी ठन्डे बस्ते में, और यह बस्ता इतना ठंडा है कि काफी गरम करने के बाद ही फ़ाइल यहाँ से खिसकती है, और बड़ी बात यह कि असल में ACR कि जरुरत ही DPC के लिए होती है, DACP तो बिना किसी कागज़ के नियत समय पर कर दी जाती है ।

लेकिन सुने कौन ???
किसे सामने गिडगिडायें ?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारीयों के सामने ? मीडिया के सामने ? कोर्ट के सामने ? संघ के सामने ? या फिर स्वास्थ्य विभाग के बाबूराज के आगे दण्डवत हो जावें, यह मान लें कि चिकित्सा विभाग का बाबु ही भगवान है और वो जितनी खैरात विभाग के अपने जैसे तथाकथित अधिकारीयों को बाँट दे उसे लेकर जय जयकार करते रहें ? क्या करें ?

आप ही बतावें ।

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जहर खरीदने के लिए पैसे नहीं, कैसे दूं वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति ?

जहर खरीदने के लिए पैसे नहीं, कैसे दूं वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति…. ये शब्द किसी आम इंसान के नहीं बल्कि एक चिकित्सा अधिकारी के हैं। जो जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति को लेकर आर्थिक समस्या का हवाला देते है।….जी हां जालौर जिले के करडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक ने एक पत्र के माध्यम से सरकार को यह बात बताइ कि उन्हें पिछले कई महीनों से नहीं मिल रही तनख्वाह ।  जालौर जिले में रानीवाड़ा और भीनमाल ब्लॉक के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे में कार्यरत कर्मचारियों एवं चिकित्सकों को वेतन समय पर नहीं मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि करड़ा में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी धनंजय मीणा ने सरकार को पत्र लिखकर अवांछनीय कदम उठाने की चेतावनी दे डाली… मामला जालौर जिले के करडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है जहां के चिकित्सक ने पिछले कई महीने से वेतन नहीं मिलने का हवाला देते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जालौर को पत्र लिखते हुए बताया कि वह जिला मुख्यालय पर होने वाले कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकते इसका कारण आर्थिक परेशानी बताया एवं अपने खाते का बैलेंस एक रूपया 77 पैसे बता रहे हैं और यह भी कह रहे हैं ।साथ में इतने पैसे से जहर भी नहीं खरीदा जा सकता चिकित्सा अधिकारी ने प्रतिलिपि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम भी भेजा है। मामले को लेकर रानीवाड़ा के ब्लॉक सीएमएचओ ने बजट का हवाला देते हुए पत्र का जवाब भी दिया है देखा जाए तो वेतन नहीं मिलने के हालात करडा सीएचसी सहित रानीवाड़ा के व भीनमाल ब्लॉक के अधिकतर चिकित्सकों का वेतन पिछले कई महीने से देय नहीं हो रहा है ऐसे में इन कर्मचारियों एवं अधिकारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भीनमाल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धुम्बडिया के कर्मचारियों व अधिकारियों के भी ये ही हालात हैं जहां पिछले 3 महीने से उनको वेतन नहीं मिल रहा कर्मचारियों का कहना है कि जब भी भीनमाल ब्लॉक कार्यालय में वेतन संबंधी मांग की जाती है तो बजट का हवाला देकर टरका दिया जाता है… ऐसे ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि इन विकट आर्थिक परिस्थितियों से गुज़र रहे डॉक्टरों की माँग को लेकर सरकार कितनी गंभीर होगी और कितने दिनों में इनको सैलरी मिल पाएंगी ये आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी ….! डॉक्टर धनंजय मीणा ने बताया कि उसको सैलरी नहीं मिलने की वजह से कई प्रकार की घरेलु परेशानीयों का सामन करना पड़ रहा है। डॉक्टर ने बताया कि पैसों के अभाव में राशन के सामान के लिए भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है… डॉक्टर ने बताया कि मेरे पर्सनल लोन की किस्त भी ओवरडूयू हो चुकी है.. ऐसे में अब भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.. उन्होने बताया कि मैं घर से 500 किलोमीटर दूरी पर यहाँ पर बैठा हूँ ऐसे में मुझे सैलरी नहीं मिलेगी तो मैं खाना कैसे खाऊँगा…. डॉक्टर ने बताया कि उसके साथ साथ उसके अस्पताल में कार्यरत क़रीब स्टाफ़ भी पिछले दो महीने से सैलरी नहीं बन रही है जिसके चलते भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह की गंभीर पीड़ा अगर सोशल मीडिया पर वायरल होती है तो ज़ाहिर सी बात है कि विभाग के आलाधिकारियों पर सवाल खड़े होना लाज़मी है… ।

# डॉ. धनंजय मीणा, कॉलेज के ज़माने से ही बेबाक और दबंग स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, ये जयपुर के सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस हैं |

हम सब अधिकारियों और कर्मचारियों के हक की लड़ाई है ये कोई व्यक्तिगत दुश्मनी या बैर नही है ।हमारी लड़ाई राज से है अधिकारी और राज के प्रितिनिधि से है अतः इसे कोई व्यक्तिगत न ले।
जब पुलिस में वेतन महीने की अंतिम तारीख को मिल जाता है तो हमको क्यों नही क्या राज्य को हमारी जरूरत का पता नही है
हम भी आपातकालीन सेवा में है तो हमको सुविधा भी तो हो ,ओर कुछ नही तो वेतन तो समय पर मिले।
अगर सरकार के पास पैसा नही है तो फिर पुलिस और सेक्रेतिरेट में ओर मंत्रालयों में वेतन समय पर क्यों।
ऐसा नियम क्यों नही की जिलाधिकारी का वेतन जिले में प्रत्येक कर्मचारी का वेतन मिलने के बाद मिलेगा। ये ही मांग हैं कि वेतन समय पर मिले।
एकता सदा विजेयता। जय हिंद जय संगठन।।।।।।।।।सभी से सहयोग की आशा में।।।।

आपका
डॉ धनंजय मीणा 

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8700 ग्रेड पे की कैपिंग वाले हड़ताली समझौते का पोस्टमार्टम

सरकार और चिकित्सकों के बीच हुए समझौते की हकीकत

वर्ष 2011 दिसम्बर में हुई एतिहासिक हड़ताल के बाद दवाब में आकर कांग्रेस सरकार ने कुछ समझौते किये जिन्हें लेकर चिकित्सक करीब सात वर्ष तक घूमते रहे लेकिन उनका पूर्ण किर्यांवन किया नहीं गया | इसी क्रम में फिर से चिकित्सक आक्रोशित हुए और वर्ष 2017 की अगस्त क्रांति और दिसम्बर की बड़ी हड़ताल के बाद तत्कालीन भाजपा सरकार ने फिर से समझौतों का पुलिंदा बाँध दिया, जिसके किर्यांवन के लिए चिकित्सक वापस से उसी हालात में हैं |

इसी बीच निदेशक जनस्वास्थ्य के एक आदेश (नीचे संलग्न है) से चिकित्सकों में शंका है कि 8700 ग्रेड पे की कैपिंग तो हट गयी थी तो यह लेटर कहाँ से आया ? यह तो समझौते की ध्वजियाँ उड़ रही हैं ? आप खुद समझौते और निदेशक के आदेश को दुबारा पढ़ें !

दिसम्बर 2017 समझौते के प्रथम बिंदु में ही डीएसीपी से संबंधित मुद्दे थे, जिसमें कहा गया था कि 18 वर्ष वाले तीसरे प्रमोशन (6-6-6) में कुल चिकित्सकों के 18% के बजाय सभी पात्र चिकित्सकों को डीएसीपी का लाभ दिलवाया* जायेगा |

* यहीं पेच है, समझौते में सरकार चालाकी बरत गयी, 18% की कैपिंग नहीं हटाई, बल्कि यह लिख दिया गया की शेष को भी वित्त विभाग से शिथिलन दिलवा देंगे |
* अपना कैडर करीब दस हजार चिकित्सकों का है यानि 18% के हिसाब से 1800 डॉक्टर ही 8700 ग्रेड में घुसे रह सकते हैं, अभी करीब 900 डॉक्टर इसमें घुसे हुए हैं, कुछ नए घुसेंगे और कुछ रिटायर होते रहेंगे, अगर देखा जाए तो अगले दस साल तो कोई दिक्कत नहीं आएगी लेकिन वर्ष 2005 के बाद भर्ती हुए चिकित्सक जब तीसरे प्रमोशन की उम्र तक पहुंचेंगे, उस वक़्त 8700 ग्रेड में 1800 लोग हो चुके होंगें और यह फुल हो चुका होगा, यानि बड़ी दिक्कत तभी आएगी (करीब वर्ष 2025 ) |

* मुद्दा 8700 की कैपिंग को हटवाने का था लेकिन समझौता कैपिंग ना हटवाकर एक्स्ट्रा लोगों को वित्त विभाग से परमिशन दिलवाकर उन्हें डीएसीपी दिलवाने का हुआ तो अब वित्त विभाग परमिशन दे, ना दे, किसको दे, क्या पता | बाकि राड़ 2025 में होगी जब 1801वां चिकित्सक 2025 में जाकर कहेगा की हमारा दिसम्बर 2017 में समझौता हुआ था, उसकी अनुपालना में मुझे वित्त विभाग से शिथिलता दिलवाकर 8700 ग्रेड में लो, तो राम जाने लेंगे की नहीं !

Guess the Apollo hospital bill of Jaylalithaa Tamilnadu CM ?

You will surprise to know the amount billed. It was 6.85 crores !

Hospital administration came in panic after leaking of this bill.

Details as follow –

Source – Internet

यात्रा और दैनिक भत्ते के लिए कैसे करें ऑनलाइन आवेदन ?

अगर किसी भी सरकारी कर्मचारी ने सरकारी कार्य हेतु यात्रा की है तो वो यात्रा किराए भत्ते और दैनिक खर्च भत्ते का हक़दार होता है |
राज्य सरकार ने अब व्यवस्था की है की उक्त भत्तों हेतु आवेदन ऑनलाइन किया जाए क्यूंकि पहले के ऑफलाइन आवेदनों में भयंकर धांधली और लेटलतीफी होती थी |
आवेदन का तरीका थोडा पेचीदा है लेकिन हमने बहुत ही सरल तरीके से समझाया है, इसे देखने के बाद आप कुछ ही मिनटों में आवेदन कर देंगें |
धन्यवाद.. हमारा विडियो देखें, लाइक करें 🙂

यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता क्या है ? कितना है ? जानने के लिए –

How to know Employee ID of Rajasthan state goverment employees

राजस्थान सरकार के प्रत्येक कार्मिक को एक एम्प्लोयी आईडी उसके सेवा ज्वाइन करते ही जारी की जाती है और उसी से उसकी सेलरी बनती है !

तो कार्मिक कैसे जाने की उसकी एम्प्लोयी आईडी क्या है ?
एसएसओ में लोगिन करें https://sso.rajasthan.gov.in/

राजकाज में जावें
उपर दायें कोने में एम्प्लोयी सर्च आइकन पर जावें
जिस एम्प्लोयी की आईडी/एसएसओ या मोबाइल नंबर खोजना चाहते हैं उसका ऑफिस/विभाग सलेक्ट करें
सभी डिपार्टमेंट में खोजना चाहते हैं तो All पर जावें
एम्प्लोयी का नाम डालें
सर्च करें

फोटो संलग्न :-

How to verify mobile number in Pay Manager (with photo)

www.paymanager2.raj.nic.in पर जाकर करके अपनी employee id और password डालकर login करें

सबसे ऊपर बांयी ओर employee corner पर क्लिक करें
उसके पश्चात सबसे आखिरी ऑप्शन employee detail verify पर क्लिक करें!

अबआपको आपका gpf number (pre 2004 employees only) ,mail id, mobile number ,PAN , Aadhaar number दिखाई देंगे!

फिर नंबर अपडेट करें, उसके बाद generate otp कर लें, मोबाइल पर आये OTP को डालकर Submit करें !

आपको वैरिफिकेशन successful का मैसेज आयेगा और वैरिफिकेशन पूरा हो जायेगा।

# 2004 के बाद वाले कार्मिक GPF नम्बर के स्थान पर जीरो लिख दें (0) !

पे मैनेजर पर आपका एम्प्लोयी आईडी और पासवर्ड क्या है ? कैसे जानें ?