Services started in AIIMS, bilaspur

10.08.2022
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कोठीपुरा की 25 ओपीडी एम्स अस्पताल भवन में शुरू हो गई हैं। इससे पहले आयुष भवन में ओपीडी चलाई जा रही थीं। आईपीडी शुरू करने का कार्य प्रगति पर है। सारी प्रक्रिया एक माह में पूरी की जाएगी। सितंबर में पीएम मोदी इसका शुभारंभ करेंगे। आयुष ब्लॉक से एम्स अस्पताल में ओपीडी शिफ्ट करने के बाद फिर से पंजीकरण करवाने के लिए टोकन सिस्टम शुरू हो गया है। टोकन के यूएचआईडी नंबर से लंबे समय तक अस्पताल में मरीज का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी जारी रहेगी। पंजीकरण के लिए ओपीडी भवन में आठ काउंटर लगाए हैं। मरीज को केवल अपना विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान नंबर (यूएचआईडी) याद रखना होगा। आईपीडी भवन भी तैयार है।सभी वार्ड में बिस्तर लग गए हैं। ऑब्जर्वेशन, स्पेशल वार्ड तैयार हैं। आपात भवन की दूसरी मंजिल में आठ ऑपरेशन थियेटर बनाए गए हैं। सभी उपकरण स्थापित कर दिए हैं। अस्पताल में 256 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन लगाई गई है। इसकी विशेषता यह है कि इसकी क्षमता 256 स्लाइस प्रति सेकंड है। स्कैनर से मिलने वाली इमेज थ्री डी होगी। चंद मिनटों में यह पूरे शरीर को स्कैन करेगी। इस तकनीक की मदद से वेस्कुलर डिजिज की पहचान आसान होती है। एक्सरे मशीन स्थापित कर दी गई है। एमआरआई मशीन लगाई जा रही है। आईपीडी में शुरू में मरीजों को करीब 150 बिस्तरों की सुविधा मिलेगी। अभी से आईपीडी में प्रशिक्षु चिकित्सकों की तैनाती शुरू कर दी गई है। इसमें स्पेशल वार्ड से लेकर सामान्य वार्ड तक के बिस्तर शामिल हैं।

लैब का कार्य प्रगति पर
एम्स अस्पताल में मुख्य लैब का कार्य प्रगति पर है। बहरहाल, अस्पताल में टेस्ट के लिए सैंपल 75 नंबर कमरे में एकत्रित किए जा रहे हैं। बिलिंग काउंटर 7, 8 और 9 हैं। एक्सरे की सुविधा और यूएसजी आयुष ब्लॉक में ही चलाए जा रहे हैं।

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Sesonal diseases in rajasthan

10.08.2022
राजस्थान में बारिश के साथ मौसमी बीमारियों का दौर शुरू हो गया है। जयपुर समेत राज्य के सभी हॉस्पिटल की ओपीडी में इन दिनों वायरल फीवर के केस तेजी से बढ़ रहे है। राजस्थान के सबसे बड़े हॉस्पिटल एसएमएस में इन दिनों ओपीडी में मरीजों की संख्या 9 हजार के पार पहुंच गई है। वायरल फीवर, खांसी-बुखार, जुकाम के अलावा डेंगू-मलेरिया के केस भी सामने आ रहे है। मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट राजस्थान के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में पूरे राज्य में 88 केस डेंगू के डिटेक्ट हुए है, जिसमें से 2 मरीजों की मौत हो गई।जयपुर एसएमएस के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और यूनिट हेड डॉ. पुनीत सक्सेना की माने तो अभी वायरल फीवर, सामान्य बुखार, खांसी-झुकाम के केस बढ़ रहे है। इनमें कई कुछ केस डेंगू-मलेरिया के भी, लेकिन अभी ये बहुत कम है। उन्होंने बताया कि लोगों को भीड़-भाड़ वाले एरिया में मास्क लगाकर जाना चाहिए, जिससे लोग संक्रमित बीमारियों से बचने में तो मदद मिलेगी, कोरोना से भी खुद को बचाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि जैसे बारिश का दौर धीमा पड़ेगा मच्छर बढ़ेंगे और फिर डेंगू-मलेरिया व चिकनगुनिया के केस भी बढ़ने लगेंगे।

बच्चों में उल्टी-दस्त की शिकायतें आने लगी
मौसम की इस बीमारी से बच्चे भी तेजी से चपेट में आ रहे है। जयपुर के जेके लॉन हॉस्पिटल में अब ओपीडी में भीड़ बढ़ने लगी है। इसमें ज्यादातर मामले सामान्य बुखार और खांसी-जुकाम के अलावा उल्टी-दस्त के भी मरीज है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर और जेके लॉन रेयर डिजीज सेंटर में नियुक्त डॉ. प्रियांशु माथुर की माने तो इन दिनों कुछ बच्चों के हाथ-पैर में दाने की भी शिकायतें देखने को मिल रही है। हालांकि ये सभी अभी सामान्य वायरल वाले ही केस है, इनमें कोई नया वायरल का केस सामने नहीं आया है।

प्रतापगढ़ जिले में दो गुने हुए डेंगू के मरीज
राजस्थान में जिलेवार स्थिति देखे तो प्रतापगढ़ जिले में डेंगू तेजी से बढ़ रहा है। 27 जुलाई तक प्रतापगढ़ में डेंगू के प्रतापगढ़ 25 केस सामने आए थे, जो 5 अगस्त तक बढ़कर 61 हो गए। वहीं अलवर में पिछले एक सप्ताह में 2 डेंगू के केस डिटेक्ट हुए है और दो ही मौत हुई है। प्रतापगढ़, अलवर के अलावा डेंगू प्रभावित जिलाें में कोटा, दौसा, करौली, भरतपुर और जयपुर भी है।

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Ayushman scheme failed in punjab

स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है क्योंकि निजी अस्पतालों ने उनके लिए पहले ही अपने दरवाजे बंद कर लिए थे और अब सरकारी अस्पतालों में ‘आरोग्य मित्रों’ ने भी उनकी सहायता करना बंद कर दिया है।आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की सहायता के लिए सरकारी अस्पतालों में तैनात 150 ‘आरोग्य मित्र’ ने अपनी सेवाएं देना बंद कर दिया क्योंकि उन्हें पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। वे वहां योजना के लाभार्थियों की मदद करने के लिए थे ताकि उन्हें आसानी से इलाज मिल सके।उनके विरोध के परिणामस्वरूप, आयुष्मान भारत मुख मंत्री सेहत बीमा योजना योजना राज्य भर के सभी सरकारी अस्पतालों में ठप हो गई है। यह योजना कार्ड धारकों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य उपचार सुनिश्चित करती है।अफसोस की बात है कि सरकार द्वारा बकाया राशि की प्रतिपूर्ति करने में विफल रहने के बाद, निजी सूचीबद्ध अस्पतालों ने स्वास्थ्य योजना के पात्र लाभार्थियों के लिए पहले ही अपने दरवाजे बंद कर लिए थे।जून से वेतन नहीं मिलने वाले आरोग्य मित्रों ने मंगलवार से लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड की प्रोसेसिंग बंद कर दी है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने दावा किया कि आउटसोर्सिंग एजेंसी – एमडी इंडिया – को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से धन नहीं मिला है, जो राज्य में योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है।आरोग्य मित्रों में से एक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारे पास हड़ताल पर जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था क्योंकि हम बिना वेतन के हैं। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और एमडी इंडिया को भुगतान करना चाहिए।

इंडोर मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित

योजना के तहत विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों को इलाज के लिए जारी नहीं रख पाने के कारण उन्हें मझधार में छोड़ दिया गया है। साथ ही, जिन रोगियों को छुट्टी की आवश्यकता होती है, वे आगे नहीं बढ़ सकते क्योंकि उन्हें आरोग्य मित्र से मंजूरी की आवश्यकता होती है जिन्होंने काम करना बंद कर दिया है।मानसा की लाभार्थी रोगी चरणजीत कौर के एक परिजन भूपिंदर सिंह ने कहा, “हमारा मरीज गवर्नमेंट राजिंद्र अस्पताल में भर्ती है और बहुत गंभीर है। हमें इलाज करवाना है। हालांकि, आरोग्य मित्र ने कार्ड को प्रोसेस करने से मना कर दिया है। हम महंगे लैब टेस्ट का खर्च नहीं उठा सकते।

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Fire at Jabalpur hospital

10.08.2022
जबलपुर के न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल के शिशु वॉर्ड के करीब आग लग गई। हालांकि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन एक बार फिर मध्यप्रदेश में फायर एनओसी और फायर सेफ्टी को लेकर बहस तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में 40 बच्चे भर्ती थे, जब उसके करीब शॉर्ट सर्किट हुआ. जिसके चलते वार्ड में धुआं फैल गया और लाइट चली गई।गौरतलब है कि पिछले डेढ़ साल में प्रदेश के छह अस्पतालों में आगजनी से 23 लोगों की मौत हुई है। बता दें कि अस्पताल खोलने या नवीनीकरण के लिए 12 दस्तावेज मांगे जाते हैं। इसमें 11 तो जरूरी हैं लेकिन फायर एनओसी नहीं। सिर्फ फायर एनओसी के लिए आवेदन की पावती के आधार पर पिछले 2 साल में राज्य में 200 से ज्यादा नए अस्पतालों को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि सरकार की तरफ से अकेले जबलपुर में फायर एनओसी नहीं होने तथा अन्य कमियां पाये जाने पर अब तक 24 अस्पतालों के पंजीयन निरस्त किये जा चुके हैं।नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने पूरे मामले पर कहा है कि फायर एनओसी नगर निगम देता है फिर हेल्थ डिपार्टमेंट लाइसेंस देता है। फायर एनओसी का पालन संबंधित लोगों ने किया है या नहीं ये देखना चाहिये, ये दोनों तरफ से लापरवाही होती है। इसलिये इस तरह की घटना होती है। इसमें सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है।

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Corona infection in Alwar

08.08.2022
जिले में काेराेना संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है। शनिवार काे अकबरपुर सीएचसी का डाॅक्टर और सीआईएसएफ सेंटर अनंतपुरा के जवान सहित 89 नए पाॅजिटिव मिले। 24 घंटे में पिछले 3 महीने में काेराेना पाॅजिटिव मरीजाें की यह सबसे बड़ी संख्या है।चिकित्सा विभाग के अनुसार बहराेड़ ब्लाॅक में सर्वाधिक 29, अलवर शहर व तिजारा में 8-8, मालाखेड़ा, लक्ष्मणगढ़ व रामगढ़ में 7-7, काेटकासिम, भिवाड़ी, राजगढ़ व नीमराना में 4-4, रैणी में 3, खेड़ली में 2, शाहजहांपुर व मुंडावर में 1-1 पाॅजिटिव मिले हैं।जिले में अब एक्टिव केस बढ़कर करीब 225 हाे गए हैं। चिकित्सा विभाग के अनुसार अलवर शहर में पुलिस लाइन, कालाकुआं, जाट काॅलाेनी दाे साै फुट राेड, लाजपत नगर, नाथकी बगीची, मालाखेड़ा में सीरावास, अहमदपुर, पलखड़ी, कालीखाेल, काेटकासिम, भाेजराजका की ढाणी, मकडावा, जमालपुर, बहराेड़, बर्डाेद, अजमेरीपुर, ढिस, कांकरा, नांगल खाेडिया, डूमराेली, गाेलावास, भिटेडा, रामगढ़, सैंथली,मिलकपुर,अकलीमपुर, लक्ष्मणगढ़ में बड़ाैदामेव, दीनार, बसई सैदावत, कफनवाड़ा,हिगाेटा, सैमला खुर्द, तिलवाड़, राजगढ़ में शिंभूबास, राजपुरबड़ा, टहला, खेड़ली में हाजीपुर, मेठाना, रैणी में पाटन, बीलेटा व माेराेदकलां, नीमराना में चाैबारा, सक्तपुरा,शाहजहांपुर में जाैनायचा कलां, मुंडावर में भीखावास, तिजारा ब्लाॅक में काराेली, खिजूरीवास, करनकुंज, नंदरामपुर, निंबाहेडी, शाहबाद, टपूकड़ा व गंधाेला चाैपानकी, भिवाड़ी में भिवाड़ी गांव व मिलकपुर में पाॅजिटिव केस मिले हैं। एक सीकरी भरतपुर और एक काेटपूतली का केस पाॅजिटिव मिला है।

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Covid-19 in gujarat

06.08.2022

प्रदेश में शुक्रवार को कोरोना के चलते तीन लोगों की मौत हो गई। इस संक्रमण के 847 नए मरीज भी सामने आए हैं। एक्टिव मरीजो में से 22 वेंटिलेटर पर हैं।राज्य में शुक्रवार को पूरे हुए 24 घंटे में अहमदाबाद, गांधीनगर एवं मोरबी जिले में एक-एक मरीज ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही अब तक कोरोना संक्रमण के चलते 10975 लोगों की जान चली गई। हाल में कुल एक्टिव केस 5992 हैं, इनमें से 22 की हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर पर हैं।सबसे अधिक 315 नए मामले अहमदाबाद जिले के (शहर के 305) हैं। वडोदरा जिले में 140 में से 106 शहर के हैं। मेहसाणा जिले में 98, राजकोट में 83, सूरत में 66, गांधीनगर एवं कच्छ में 32-32, अमरेली में 31, बनासकांठा में 19, भरुच एवं नवसारी में 15-15, भावनगर जिले में 14, जामनगर में 13, साबरकांठा में 12, वलसाड में 11, पोरबंदर में 10, आणंद में आठ, सुरेन्द्रनगर में सात, अरवल्ली एवं मोरबी में छह-छह, पाटण में पांच, खेड़ा, महिसागर एवं तापी में चार-चार, गिरसोमनाथ, जूनागढ़ एवं पंचमहाल जिले में दो-दो मरीज हैं। चौबसी घंटे में प्रदेश में 1198 मरीज कोरोना से मुक्त हुए हैं।

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Ayushman scheme stopped in punjab

पंजाब में आयुष्मान भारत योजना का दिवाला निकल गया है. इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजाब सरकार सात महीने का बकाया 16 करोड़ पीजीआई चंडीगढ़ को नहीं दे सका. इस वजह से पीजीआई चंडीगढ़ ने पंजाब के मरीजों का इलाज बंद कर दिया है. पीजीआई पंजाब के 1200 से 1400 मरीजों का इस योजना के तहत इलाज करता है. द ट्रिब्यून के मुताबिक पंजाब के स्वास्थ्य सचिव अजय शर्मा ने कहा कि पीजीआई को एक हफ्ते में इसका भुगतान कर दिया जाएगा. अजय शर्मा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार का 300 करोड़ रुपये बकाया है. मामला वित्त विभाग के पास है और उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।

इन अस्पतालों का है बकाया
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर 32 ने इस साल मार्च से पंजाब के मरीजों का इलाज 2.3 करोड़ रुपये बकाया होने के बाद रोक दिया था. पंजाब सरकार पर इस योजना के तहत जीएमसीएच सेक्टर 32, जीएमएसएच सेक्टर 16 और चंडीगढ़ के निजी अस्पतालों का तीन करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. आयुष्मान भारत सेहत बीमा योजना 20 अगस्त, 2019 को शुरू की गई थी. इस योजना को पंजाब की कम से कम 65 प्रतिशत आबादी को वित्तीय सहायता को तहत स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान किया जाता है. यह प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये का पात्रता-आधारित स्वास्थ्य बीमा कवर है.

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Pledge for improve health service

05.08.2022
स्वास्थ्य एक ऐसी आवश्यकता है जो हर मनुष्य के जीवन में प्राणवायु के समान मूल्यवान है. यही वजह है कि मध्यप्रदेश में भी स्वास्थ्य सेवा प्रदाय तंत्र को पिछले लगभग दो दशक में सुदृढ़ बनाया गया है. एक बार स्वास्थ्य सेवा प्रदाय तंत्र की आधारभूत संरचना स्थापित कर लेने के बाद इसके सम्यक्, सुचारू और निर्बाध संचालन की आवश्यकता होती है।देश की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में मध्यप्रदेश सरकार ने इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य सेवाओं में सम्पूर्ण सुधार का संकल्प लिया है. नाम दिया है सम्पूर्ण कायाकल्प अभियान. इस अभियान में प्रदेश सरकार अपनी स्वास्थ्य संस्थाओं एवं सेवाओं को दुरुस्त बनाते हुए उनमें आवश्यक विस्तार भी करेगी. न सिर्फ़ नागरिकों के लिए शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं का वातावरण बदला जाएगा बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों, चिकित्सा उपकरणों और अधोसंरचना के माध्यम से श्रेष्ठ स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएंगी.अभियान में प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थाओं की अधोसंरचना का विकास एवं भवन रख-रखाव का कार्य समय-सीमा में किये जाने का संकल्प है. चिकित्सा उपकरण और अस्पताल के फर्नीचर की उपलब्धता, स्वास्थ्य संस्थाओं में जाँच -परीक्षण सेवाओं एवं दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, डायलिसिस एवं कैंसर की नई उपचार सेवाओं का विकास, ब्लड बैंक एवं ब्लड स्टोरेज का सुदृढ़ीकरण, विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिये टेली मेडिसिन सेवाओं का विस्तार, रोगियों के लिए हितग्राहीमूलक सेवाओं का विकास, खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला की स्थापना और स्वास्थ्य सेवाओं में जन-भागीदारी को बढ़ावा देने जैसे कार्यों को मिशन मोड में कार्य किया जाएगा।वर्तमान में प्रदेश में 52 जिला चिकित्सालय, 119 सिविल अस्पताल, 356 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 1,266 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 10 हजार 287 उप स्वास्थ्य केंद्र का एक सशक्त नेटवर्क है. इन्हीं के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ केंद्र एवं प्रदेश शासन की स्वास्‍थ्‍य से जुड़ी विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाता है. अभियान के अंतर्गत स्वास्‍थ्‍य संस्थाओं के निर्माण तथा उन्नयन कार्यों और नवीन सेवाओं एवं उपकरणों की पूर्ति के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का बजट बढ़ाया गया है. पिछले वर्ष की तुलना में लगभग चार गुना की बढ़ोत्तरी करते हुए इस वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर कुल 43486.83 लाख किया गया है. इस राशि में से विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं के अधोसंरचना विकास कुल 14639.69 लाख रुपए की राशि व्यय की जाएगी.सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों के समय की बचत के लिए भी राज्य सरकार गम्भीर है. मरीज़ों और उनके परिजनों की सहायता के लिए Help Desk/ सहायता केंद्र की स्थापना भी की जा रही है. इसके अलावा अस्पताल में प्रतीक्षा का समय कम करने के लिये Queue Management System एवं BMI Scanning मशीन की स्थापना भी की जाएगी।प्रदेश में सीटी स्क़ेन, सोनोग्राफ़ी, डिजिटल एवं कंप्यूटराइज्ड एक्स-रे मशीनों जैसे अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं. पैथालोज़ी जांच सेवाओं के अंतर्गत ज़िला चिकित्सालयों में हीमेटोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, हॉर्मोनल जांच, कैंसर मार्कर आदि जैसी उन्नत जांचों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा चुकी है. हब एंड स्पोक मॉडल से सी.बी.सी., किड्नी और लिवर फंक्शन टेस्ट, मधुमेह जांच, सीरम कोलेस्ट्राल आदि जैसी अत्याधुनिक जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. साथ ही एबीजी मशीन, ईटीओ स्टर्लायजर, एनेस्थेसीआ वर्क स्टेशन, हाइड्रोलिक ओ टी टेबल, ओपीडी किट (स्टेथॉस्कोप, डिजिटल थर्मामीटर, पर्क्यूशन हैमर, एलईडी टॉर्च, मेजरिंग टेप, ओटोस्काप, ट्यूनिंग फोर्क) एवं बीएमआई मशीन जैसे अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं. अस्पताल में मरीज़ों के लिए फ़र्नीचर,चादर, तकियों, गद्दे तथा उनके कवर भी अब नए होंगे.डायलिसिस की सुविधा पाने के लिए प्रतीक्षा न करना पड़े, इसके लिए चरणबद्ध ढंग से सुविधा का विस्तार किया जा रहा है. अब जिला चिकित्सालयों में न्यूनतम 05 डायलिसिस मशीन उपलब्ध कराई जायेंगी तथा इन्हें विश्व स्तरीय मापदंड के अनुरूप विकसित किया जायेगा. साथ ही राज्‍य स्‍तरीय डायलिसिस नेटवर्क के द्वारा रोगियों को फोन के माध्यम से अपॉइन्ट्मेन्ट मिल सकेगा. वर्तमान में प्रदेश में 194 डायलिसिस मशीन उपलब्ध हैं तथा 102 नई मशीन क्रय की जा रही हैं.

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Blood crisis in sms hospital,Jaipur

ब्लड बैंक खाली होने लगे हैं। निजी ब्लड बैंकों का बहुतायत में खुलना, ब्लड डोनेशन शिविरों में कई ब्लड बैंक को बुला लेना और ब्लड डोनेट नहीं करने सहित कई कारणों के चलते हालात इस स्थिति में पहुंच चुके हैं कि एसएमएस जैसे सरकारी ब्लड बैंक में एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप है ही नहीं। ओ-निगेटिव महज दो यूनिट, एबी-पॉजिटिव 09, ए-निगेटिव 10 और बी-निगेटिव केवल 09 यूनिट ही बचा है। ब्लड बैंक में यह स्टोर बुधवार दोपहर 12 बजे तक था। ये ब्लड ग्रुप इमरजेंसी के लिए बचा कर रखे हैं और कॉमन सर्जरी या जरूरतमंद को मना किया जा रहा था। ब्लड की कमी को लेकर विशेष रिपाेर्ट।डोनेशन-सप्लाई में 12 हजार यूनिट से अधिक का फर्कअकेले एसएमएस में डोनेट और सप्लाई में 12 हजार यूनिट तक का फर्क है। एक जनवरी से 31 जुलाई तक महज 26,394 यूनिट ब्लड डोनेट हुआ, जबकि 38,960 यूनिट सप्लाई किया गया। यह सप्लाई अधिक ऐसे हो सकी कि एक यूनिट ब्लड से तीन-चार कंपोनेंट बनते हैं।

डिमांड बढ़ने से बढ़ी चिंता
छोटे-छाेटे ब्लड बैंक खोलने की वजह से परेशानी हुई है। कोशिश कर रहे हैं कि सभी जगह से ब्लड यहां पहुंचे। निशुल्क ब्लड की भी डिमांड बढ़ने से चिंता बनी हुई है। -डॉ. अमित शर्मा, इंचार्ज, ब्लड बैंक, एसएमएस।

कमी की बड़ी वजह ये

बिना किन्हीं प्लान के जिलेवार निजी छोटे-छोटे ब्लड बैंक खाेल दिए गए। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में ब्लड बंद हो गया।
ब्लड बैंक की ओर से प्रलोभन (हेलमेट व अन्य) दिया जाता है और आर्गेनाइजर को 50 प्रतिशत तक नि:शुल्क ब्लड देने के लिए कहा जाता है। नतीजतन शिविरों का ब्लड निजी बैंक में जाता है और वहां से बेचा जाता है।
मई-जून-जुलाई में स्कूल-कॉलेज की छुट्टियां होती हैं तो तुलनात्मक रूप से कम कैंप लगते हैं और ब्लड की कमी हो जाती है।
कोई भी कैंप लगाता है तो कई ब्लड बैंक को बुला लेता है, नतीजतन एक बैंक के हिस्से में 15-25 यूनिट ही ब्लड आता है।6 घंटे बाद प्लाज्मा और आरबीसी ही मिलते हैं किसी भी ब्लड का छह घंटे में ब्लड बैंक तक पहुंचना जरूरी होता है। ऐसा इसलिए कि समयावधि में पहुंचने से पीआरबीसी, एफएफपी, आरडीपी, एसडीपी, क्रायो, पेरसिपिटेट कंपोनेंट को काम में ले सकते हैं। छह घंटे बाद प्लाज्मा और आरबीसी ही मिलते हैं।इन मरीजों के लिए बड़ी जरूरत, इसलिए मांग बढ़ी थैलीसीमिया के सभी मरीजाें, कैंसर पेशेंट सहित कई बीमारियाें के लिए बिना डोनर के ब्लड दिया जाता है। एसएमएस में रोजाना थैलीसीमिया के 40 बच्चों को, कैंसर और छोटी बच्चियों को 10 से 12, एक्सीडेंट केसेज में 20-25 यूनिट ब्लड दिया जाता है।

एसएमएस में ये बचा है अलग-अलग ब्लड ग्रुप
ए-पॉजिटिव36
बी-पॉजिटिव48
ओ-पॉजिटिव57
एबी-पॉजिटिव09
ओ-निगेटिव02
एबी-निगेटिव00
बी-निगेटिव09
ए-निगेटिव10

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50 bed critical care unit

05.08.2022
अयोध्या। जिले में आगामी समय में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए लखनऊ, दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में ही 50 बेड के क्रिटिकल केयर यूनिट की स्थापना होगी।
निर्माण कार्यों व साजो-सज्जा के सामान पर करीब 23.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शासन ने मेडिकल कॉलेज से इसके निर्माण के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता का विवरण मांगा है, जिसका प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है।राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 से ही एमबीबीएस की कक्षाएं संचालित हैं। मौजूदा समय में यहां पर 300 बेड का अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर क्रियाशील है और 200 बेड का भवन निर्माणाधीन है।
जिसके भी शीघ्र ही हैंडओवर होने की उम्मीद है। इस अस्पताल को कोविड एल-2/एल-3 अस्पताल भी बनाया गया है। जहां आईसीयू, पीआईसीयू, एनआईसीयू, एचडीयू आदि भी बनाए गए हैं।जिसका जनपदवासियों समेत निकटवर्ती जिले के लोगों को भी लाभ मिल रहा है। फिर भी किडनी, लीवर, हृदय, न्यूरो, नेफ्रो, यूरो आदि के गंभीर मरीजों को हायर सेंटर ही रेफर करना पड़ता है।अब शासन की ओर से इससे निजात देने के लिए अस्पताल को एक और सौगात देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए इस अस्पताल में 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट की स्थापना की जाएगी।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक अपर्णा उपाध्याय द्वारा 28 जुलाई को जारी पत्र के अनुसार मेडिकल कॉलेज में इसके निर्माण के लिए आवश्यक भूमि का विवरण मांगा गया है।इस यूनिट का निर्माण प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) मिशन के तहत किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में 4750 वर्ग मीटर जगह की आवश्यकता बताई गई है।
इसके निर्माण कार्यों पर 16.63 करोड़ व उपकरण और साजो-सज्जा के सामान पर 7.12 करोड़ खर्च होंगे। समस्त निर्माण कार्य के लिए कार्यवाही एनएचएम स्तर से ही की जाएगी।
शासन की ओर से मेडिकल कॉलेज में 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट खोलने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 4750 वर्ग मीटर जगह की आवश्यकता बताई गई है। मेडिकल कॉलेज के पास इसके निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। जिसका विवरण तैयार करके शासन को भेजा जाएगा। इसके निर्माण से तमाम बीमारियों के गंभीर बीमारियों के मरीजों का इलाज मेडिकल कॉलेज में हो सकेगा।

डॉ. सत्यजीत वर्मा, प्राचार्य, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज

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