Diseases spreading in rainy season

डाॅक्टर बोले- जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर, उन पर संक्रमण का ज्यादा असरइन दिनों मौसम और तापमान में लगातार बदलाव बच्चों की सेहत को बीमार कर रहा है। बरसात के इस मौमस में बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार की शिकायत बढ़ गई है। रोजाना बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इन दिनों सरकारी अस्पताल के ओपीडी में जितने मरीज रहे हैं, उनमें करीब आधे मरीज बच्चे हैं। बरसात में ज्यादातर बच्चे सर्दी, खांसी, बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। पेट खराब, जुकाम, खांसी, बुखार और गला खराब का मुख्य कारण वायरल संक्रमण है।सामान्यतः बैक्टीरिया और वायरस द्वारा शरीर में होने वाले संक्रमण पर प्रतिरक्षा पद्धति द्वारा नियंत्रण रखा जाता है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता अगर कम हो तो जीवाणु तेजी से पनपते हैं और बीमारियां फैलाते हैं।बारिश के इस मौसम में वायरल के साथ ही पेट संबंधी स्वास्थ्य समस्या भी लोगों को शिकार बना रही है। अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों को उल्टी, दस्त, बुखार व सर्दी जुकाम की शिकायत ज्यादा सामने आ रही हैं। जबकि कुछ को सिर दर्द, पेट दर्द व वायरल बुखार की शिकायत भी हो रही है। जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र राणा ने बताया कि बारिश का दौर शुरू होने के बाद से बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या के मामले बढ़े हैं।ओपीडी में हर दिन मौसमी बीमारियों के शिकार बच्चे पहुंच रहे हैं। मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ ही वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ जाता है। इस समय मौसम में कई तरह के बदलाव होते हैं। मिनटों में बदल जाता है। लिहाजा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में वायरस जल्दी चपेट में ले लेता है। बीते एक सप्ताह से लगातार मौसम बदल रहा है। कभी बारिश तो कभी धूप तो फिर उमस लोगों को बेचैन कर रही है।

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CMHO, bhopal issued health advisory

26.07.2022
केरल के बाद दिल्ली में भी मंकीपॉक्स का मरीज मिलने के बाद सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी ने शहर के अस्पताल अधीक्षकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। साथ ही लोगों से भी घरों में साफ-सफाई रखने और सावधानी बरतने को कहा है। बताया गया है कि मंकीपॉक्स से संक्रमित रोगी को बुखार, रेश और लिम्फ नोड्स में सूजन पाई जाती है। मंकीपॉक्स के लक्षण 2 से 4 सप्ताह में खत्म हो जाते हैं। गंभीर मामलों में मृत्युदर 1 से 10 प्रतिशत है।मंकीपॉक्स का वायरस जानवराें से इंसान में और इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। वायरस कटी स्किन, आंख, नाक और मुंह के माध्यम से शरीर में जाता है। संक्रमित जानवराें के काटने, खरोंचने, शरीर के तरल पदार्थ, घाव और संक्रमित बिस्तर से मनुष्य में यह वायरस जा सकता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर चकत्ते दिखते हैं। संदिग्ध मरीजाें के सैंपल जांच के लिए एनआईवी लैब पुणे भेजे जा

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Kidney patients increased in Raipur

18.07.2022
एम्स में जुलाई 2020 से जून 2021 तक जहां 2039 नए मरीज सामने आए थे, वहीं जुलाई 2021 से जून 2022 तक इसकी संख्या बढ़कर 4889 हो गई। अगर फॉलोअप के मरीजों को जोड़ा जाए तो क्रमश: यह 4502 से बढ़कर 10635 हो गए हैं। एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में रोजाना किडनी से संबंधित 70 से 80 मरीज पंजीकृत होते हैं, जिसमें 10 से 15 नए मरीज होते हैं। ये ऐसे मरीज होते हैं जो पहली बार किडनी की समस्या लेकर या किसी अन्य हॉस्पिटल से रेफर होकर एम्स पहुंचते हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय राठौर बताते हैं, लगभग सभी आयु वर्ग में किडनी संबंधित बीमारियां देखने मिल रही है।डॉ. राठौर बताते हैं, जन्मजात विकृत या बीमारी के कारण नवजातों एवं शिशुओं में किडनी की समस्या देखी जा रही है। किडनी में इन्फेक्शन और ऑटो इम्यून बीमारियों जैसे एसएलई, मेम्ब्रेंनस नेफ्रोपैथी के कारण और बदलते जीवन शैली के कारण भी इसके मरीज बढ़े हैं। हाइपर टेंशन (बीपी), शुगर, गुर्दे के रोग भी मुख्य कारण है। कुछ अज्ञात कारणों से भी इसके मरीज बढ़े हैं, जैसे सुपेबेड़ा और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।

साल केस नए मरीज

1/7/2019 से 30/6/2020 5753 2800

1/7/2020 से 30/6/2021 4502 2039

1/7/2021 से 30/6/2022 10635 4889

अगस्त अंत तक शुरू हो सकता है किडनी ट्रांसप्लांट

स्टाफ की व्यवस्था के साथ ही इसके लिए जगह चयनित हो चुका है। मशीनों को इन्स्टाल भी किया जा रहा है। ये अतिविशिष्ट प्रकार की सर्जरी होगी, जिसमें नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थिसिया और अन्य विभागों के सर्जन मिलकर पूरा करेंगे।

एम्स में किडनी रोगी के मरीज पिछले साल की तुलना में दोगुने हुए हैं, लेकिन इसके पीछे मुख्य कारण एम्स में रेफर केसेस का आना और एम्स के प्रति लोगों की जागरुकता है। यहां किडनी से संबंधित सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज हो रहा है।

डॉ. विनय राठौर, एचओडी नेफ्रोलॉजी विभाग, एम्स

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Kidney transplant to another body success in delhi gangaram hospital

13.07.2022
नई दिल्ली. दिल्ली में सर गंगाराम हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने ऑटो-किडनी ट्रांसप्लांट में कामयाबी हासिल की है। इस सर्जरी में 29 वर्षीय रोगी की एक किडनी को निकालकर दूसरी तरफ स्थापित कर उसे सामान्य रूप से सक्रिय किया गया है। रोगी को किडनी स्टोन की शिकायत थी। इसकी पंजाब के एक निजी अस्पताल में सर्जरी की गई थी। दुर्भाग्यवश सर्जरी के दौरान 25-26 सेमी पेशाब की नली पथरी के साथ बाहर निकल गई थी। ऐसी स्थिति में किडनी से ब्लैडर का संपर्क टूट गया, जिससे पेशाब के पेट में इकट्ठा होने का खतरा था।

ट्रांसप्लांट के बाद मरीज हुआ स्वस्थ

पंजाब से केस जब सर गंगाराम अस्पताल पहुंचा तो यहां डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती जल्द के जल्द नई ट्यूब के माध्यम से किडनी और पेशाब की थैली को जोड़ना था, जिससे अपशिष्टों को पेट में जमा होने से रोका जा सके। डॉक्टरों की टीम ने ‘ऑटो-किडनी ट्रांसप्लांट’ प्रक्रिया कर सफल ऑपरेशन किया। अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है।

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Facilities are not available in district hospital,gwalior

13.07.2022
स्वास्थ्य सेवाओं का हाल देखने के लिए मंगलवार को आयुक्त स्वास्थ्य सुदाम पी. खांडे और एनएचएम की संचालक प्रियंका दास जिला अस्पताल पहुंचीं। इन अधिकारियों के आने की सूचना सुबह मिलते ही जिला अस्पताल में साफ-सफाई की गई। जिससे कोई कमी न रह जाए। अस्पताल में अधिकारियों के आते ही डॉक्टरों ने मरीजों को छोड़कर जोरदार स्वागत में बुके और मालाओं से लाद दिया।इसके बाद इन अधिकारियों को वहीं ले जाया गया, जहां पर व्यवस्थाएं ठीक मिलीं, लेकिन उसके बाद भी आयुक्त के सामने कमियां छिप न सकीं। आयुक्त के सामने गैलरी में मरीज गर्मी में बेहाल थे। इन मरीजों को देखकर आयुक्त ने पूछ ही लिया कि इनको गैलरी में क्यों लेटा रखा है। वहीं सीटी स्कैन कक्ष में जब बारिकी से मरीजों से लेने वाला पेमेंट के साथ जांच किस तरह से की जा रही है, इसके बारे में पूछा गया। इसके बारे में वहां तैनात कर्मचारी नहीं बता पाया तो सीटी स्कैन के प्रभारी को घर से बुलाया गया। दोनों ही अधिकारियों ने चालीस मिनट तक डॉक्टर का इंतजार सीटी स्कैन कक्ष में ही किया।उसके बाद इंचार्ज डॉक्टर सुनील शर्मा घर से आए और उन्होंने बंद कमरे में दोनों अधिकारियों से कह दिया कि मुझे कोई लिखित में सीटी स्कैन के प्रभारी का चार्ज नहीं मिला है। मुझे तो ड्यूटी के साथ यह देखना पड़ रहा।

पर्चे पर डॉक्टर का नाम और सील होना चाहिए
सीटी स्कैन कक्ष में जब मरीजों के पर्चे एनएचएम की संचालक प्रियंका दास ने देखे तो उन पर्चो पर डॉक्टर का नाम तो दूर उनकी सील तक नहीं थी। जिस पर उन्होंने वहां तैनात कर्मचारी से पूछा कि किस डॉक्टर ने सीटी स्कैन के लिए लिखा है। इस पर वह जबाव नहीं दे सकीं। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. राजेश शर्मा से प्रियंका दास ने कहा कि आगे से डॉक्टर का नाम और सील पर्चे पर जरूर होना चाहिए।

डायलिसिस के लिए फोन लगाकर बुलाओ मरीज

एनएचएम की संचालक को डायलिसिस के बारे में बताया गया कि आज एक ही मरीज की हुई है। इस पर उन्होंने सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा से कहा कि अगर यहां पर अगर मरीज कम हैं तो फोन करके दूसरी जगह से मरीजों को बुलाओ।

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Indore becomes tb free

09.08.2022
स्वच्छता में नंबर-1 इंदौर ने अब देश का पहला टीबी फ्री जिला बनने पर काम शुरू कर दिया है। करीब नौ महीने की इस प्रक्रिया में इंदौर नगर निगम सीमा के साथ ही जिले के 613 गांवों में जांच होगी। प्रमाणीकृत किया जाएगा और फिर एक साथ इसकी घोषणा होगी। केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी फ्री करने के लिए संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) चला रखा है, जिसे लेकर केंद्र सरकार की टीम इंदौर पहुंची और स्वास्थ्य सुविधाएं देखी।इंदौर को आईएसओ 9000/2015 का सर्टिफिकेट भी दिया। कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया जिले में टीबी के 2764 मरीज हैं और रिकवरी रेट 90.53% है, इसलिए इंदौर को टीबी फ्री करने में बहुत ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। कई गांव वैसे भी टीबी मुक्त हैं। इसमें इंदौर ने अभियान को लेकर जिन 12 बिंदुओं पर काम करने की प्लानिंग की है, उस पर चर्चा हुई।तय हुआ कि एक-एक गांव का पूरा सर्वे होगा। इसमें टीबी विभाग के साथ आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और अन्य विभागों की भी मदद ली जाएगी। सिंह ने बताया कि इंदौर में अभी टीबी का रिकवरी रेट 90.53 प्रतिशत है।

मंदिर, मस्जिद, बस्तियों, स्कूल-कॉलेज में सर्वे
जिला क्षय अधिकारी डॉ. राहुल श्रीवास्तव ने बताया टीम ने पूरा डॉक्यूमेंट तैयार कर लिया है। प्रमुख धार्मिक स्थलों, आंगनवाड़ी में सर्वे और टीबी मरीज व परिवारों की जांच, टीबी फ्री गांव, मजदूर चौक, रैनबसेरा कैंप, हाई रिस्क पेशेंट और कुपोषित बच्चों की जांच की जाएगी।

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First knee transplant successful in Neemkathana

08.07.2022

घुटने के दर्द से पीड़ित उपखंड क्षेत्र के लोगों के लिए राहत भरी खबर राजकीय कपिल जिला अस्पताल से आई है। यहां पहली बार एक वृद्ध के घुटने का सफल प्रत्यारोपण किया गया। प्रत्यारोपण के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहा है। सर्जरी करने वाली टीम में ऑर्थोपेडिक विभाग के डॉ.अरविंद जांगिड़, डॉ. योगेश शर्मा, डॉ.सत्यवीर, नर्सिंग स्टाफ के सुरेश यादव, गौरी शंकर, गरीबनाथ व अन्य शामिल थे। जिला अस्पताल की स्थानीय टीम ने ही सफल घुटना प्रत्यारोपण किया है।

दो दिन बाद चलने लगा मरीज

नीम का थाना के छावनी निवासी गुलाबचंद सैनी (65) पिछले पांच सालों से घुटने के दर्द से पीड़ित थे। कई जगह इलाज कराने के बाद सैनी राजकीय कपिल जिला अस्पताल के आर्थो सर्जन अरविंद जांगिड़ के संपर्क में आए। जिला अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग ने परीक्षण के बाद दवा शुरु की और घुटने के प्रत्यारोपण की जरूरत बताई। मरीज की सहमति के बाद बाएं घुटने का ऑपरेशन किया गया। इसके दो दिन बाद मरीज को चलाया गया। अभी मरीज के दाएं पैर की सर्जरी होनी बाकी है।

करीब दो लाख रुपए का इलाज हुआ फ्री में

आर्थोपेडिक डॉ. जांगिड़ ने बताया कि मरीज के घुटने का प्रत्यारोपण चिरंजीवी योजना के अंतर्गत किया गया है। जिससे लाभान्वित मरीज के घुटने के प्रत्यारोपण में ना के बराबर खर्चा आया है। निजी अस्पताल में घुटना प्रत्यारोपण के लिए डेढ़ से दो लाख रुपए का खर्च आता है। मरीज प्रत्यारोपण से पूर्व चल फिर नही पा रहा था। मरीज अब पूर्ण रूप से स्वस्थ है।इस सर्जरी में करीब दो घंटे का समय लगा।

जरूरतमंद लोगों की समस्या होगी दूर

ऑर्थोपेडिक डॉ. सत्यवीर ने बताया कि नीम का थाना क्षेत्र में घुटने के दर्द से पीड़ित गरीब और मध्यमवर्गीय जरूरतमंद को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब वह समस्या दूर हो जाएगी।

कंप्यूटराइज्ड एसिस्टेड सर्जरी से किया गया प्रत्यारोपण

आर्थोपेडिक डॉ. योगेश शर्मा ने बताया कि आर्थो एलाइन की सहायता से कंप्यूटराइज्ड एसिस्टेड सर्जरी के दौरान एकदम सटीक कोणों पर हड्डी को काटकर उसके चारों तरफ ऊतकों को सुरक्षित किया जाता है। घुटने के इंपलांट की आयु भी इसी बात पर निर्भर करती है कि इंपलांट को कितनी अच्छी तरह से प्रत्यारोपित किया गया है।

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Chief Minister Nitish Kumar gave a big gift to Bihar

08.07.2022
बिहार ने स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के क्षेत्र में गुरुवार को एक बड़ी छलांग लगाई। राज्‍य में मरीजों के लिए एंबुलेंस मिलने में अब देरी नहीं होगी। केवल एक फोन काल पर किसी भी शहर में 20 मिनट और गांव में 35 मिनट के अंदर एंबुलेंस सेवा मिलने का दावा स्‍वाथ्‍य विभाग की ओर से किया गया है। जरूरत के मुताबिक मरीजों को एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की सेवा भी उपलब्‍ध कराई जाएगी। दरअसल, मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को 501 एडवांस और बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

534 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की भी मिलेगी सेवा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार पहला राज्य है, जिसने प्रत्येक प्रखंड में एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पुरानी हो चुकी 652 सरकारी एंबुलेंस को बदल दिया गया। इनके स्थान पर एक हजार नई एंबुलेंस खरीदने का फैसला सरकार ने लिया था। इनमें से 534 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस प्रत्येक प्रखंड के लिए सरकार ने व्‍यवस्‍था की है। इन सभी एंबुलेंस में मरीजों की जान बचाने के लिए अत्‍याधुनिक उपकरण मौजूद रहेंगे।इन एंबुलेंस में आक्सीजन सुविधा के साथ वेंटिलेटर, डिफिब्रीलेटर सह कार्डियक मानिटर, सेंट्रल वेन कैथेडर्स की सुविधा रहेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की एंबुलेंस एक प्रकार से एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस चलंत गहन चिकित्सा कक्ष की तरह कार्य करती है। शेष 466 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस हैं, जो आक्सीजन युक्त हैं। इनका उपयोग सामान्य रोगियों के लिए किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य एंबुलेंस की आपूर्ति होते ही सभी जिलों को उपलब्ध करा दी जाएगी। एंबुलेंस लोकार्पण कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, स्वास्थ्य के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त परामर्शी मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, सेंथिल कुमार और संजय सिंह मौजूद रहे।

102 पर काल करने से मिलती है एंबुलेंस

स्वास्थ्य विभाग की पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में 35 मिनट के अंदर एवं शहरी क्षेत्रों में 20 मिनट के अंदर मरीजों तक एंबुलेंस पहुंच जाएगी। योजना सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती माताओं, बीमार शिशु, गंभीर रूप से बीमार मरीजों एवं दुर्घटनाग्रस्त मरीजों की जीवन रक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें इलाज की सुविधा वाले अस्पतालों में ले जाने में मददगार साबित होने की है। अभी 102 एंबुलेंस सेवा के तहत कुल 1107 एंबुलेंस विभिन्न जिलों में चल रही हैं। इसमें 1022 बुनियादी जीवन रक्षक एंबुलेंस (बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस) एवं 85 उन्नत जीवन रक्षक एंबुलेंस (एडवांस लाईफ सपोर्ट एंबुलेंस) हैं।इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के अनुसार एक लाख की आबादी पर एक बुनियादी जीवन रक्षक एंबुलेंस एवं पांच लाख की आबादी पर एक उन्नत जीवन रक्षक एंबुलेंस का प्रविधान है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोविड आपातकालीन स्वास्थ्य प्रणाली तैयारी पैकेज -2 के तहत एक हजार एंबुलेंस को 102 एंबुलेंस सेवा के बेड़े में शामिल करने एवं इस पूरी परियोजना के लागू होने के बाद राज्य के 86 हजार की आबादी पर एक बुनियादी जीवन रक्षक एंबुलेंस तथा 2.17 लाख की आबादी पर एक उन्नत जीवन रक्षक एंबुलेंस उपलब्ध होगी। यह इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड से काफी बेहतर है।

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Covid in raipur

07.07.2022
प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या में अब तेजी से बढ़ोतरी शुरू हो गई है। बुधवार को भिलाई के शहरी स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) छावनी के 3 डाक्टरों सहित 11 पैरामेडिकल स्टाफ नर्स कोरोना से संक्रमित मिले हैं। दुर्ग जिले में तीसरी लहर के बाद पहली बार बुधवार को एक ही दिन में 220 कोरोना मरीज मिले हैं। पिछले हफ्ते से दुर्ग में 30-35 के आसपास संक्रमित मिल रहे थे। अब एक मुश्त इतने केस के साथ एक ही अस्पताल में 11 संक्रमित मिलने से स्वास्थ्य विभाग के अफसर दुर्ग जिले को लेकर हैरान हो गए हैं।नए मरीजों को मिलाकर अब राज्य में सक्रिय यानी इलाजरत मरीजों की संख्या 1 हजार 50 के पार चली गई है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार पिछले 10 दिनों से रोज औसतन 100 से ज्यादा मरीज निकल रहे हैं। मंगलवार को 165 मरीज मिले थे। बुधवार को 150 से ज्यादा मरीज मिले हैं। अफसरों का कहना है कि पिछले तीन दिनों के दौरान रोज 100 की औसत से मरीज स्वस्थ्य भी हुए हैं।

रायपुर में सबसे ज्यादा 238 एक्टिव केस
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार रायपुर में सबसे ज्यादा 238 मरीजों का इलाज चल रहा है। अलबत्ता नारायणपुर, गरियाबंद और सुकमा ऐसे जिले में हैं, जहां कोरोना का एक भी केस नहीं है। रायपुर के बाद दुर्ग दूसरे नंबर पर है। यहां 146 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। बिलासपुर 103 सक्रिय मरीजों के साथ तीसरे नंबर पर।राजनांदगांव में 86 और बलौदाबाजार में 78 संक्रमित हैं। सरगुजा में 58 और बेमेतरा में 51 केस हैं। बाकी जिलों में 50 से कम मरीज हैं। इसके अलावा सूरजपुर में 34 और कबीरधाम में 32 कोरोना संक्रमित हैं। कोंडागांव व बीजापुर में 1-1 व बीजापुर में 3 मरीज हैं।

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Rare disease entry in udaipur

05.07.2022
दुनिया में कई प्रकार की दुर्लभ और जानलेवा बीमारियां पाई जाती हैं, जिनका इलाज लाखों रुपये में होता है। ऐसी ही एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी उदयपुर के बाल चिकित्सालय में एक बच्चे में पाई गई है, जिसका नाम है गोचर. यही नहीं, ऐसी ही सात अलग-अलग बीमारियां 18 बच्चों में डिटेक्ट की गई हैं।बड़ी बात यह है कि इन बीमारियों का उदयपुर के बाल चिकित्सालय में बिल्कुल फ्री इलाज किया जा रहा है।

गोचर बीमारी के मिले 5 मरीज
रविंद्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल लाखन पोसवाल ने बताया कि बाल चिकित्सालय में दो साल में 120 संदिग्ध बच्चों में से 18 बच्चे सात दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित मिले हैं। इनमें से दुनिया के दुर्लभतम रोग गोचर्स के पांच मरीज भी हैं. मरीज को हर महीने 1.25 लाख रुपये का एक इंजेक्शन लगाना जरूरी है, जो ताउम्र लगता है। ऐसे में आम आदमी यह खर्च उठाने के दायरे से कोसों दूर है, लेकिन राहत की बात यह है कि ये इंजेक्शन बाल चिकित्सालय में निशुल्क लगाए जा रहे हैं।
प्रिसिंपल पोसवाल ने आगे बताया कि औसत 350 की ओपीडी वाले बाल चिकित्सालय में दो साल के दौरान नवजात से लेकर 18 साल तक की उम्र वाले 120 बच्चों की गहन जांच की थी, जिनकी शारीरिक-मानसिक गतिविधियां स्थितियां संदिग्ध थीं। इन्हीं में से 18 बच्चे दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं।

यह होती है गोचर बीमारी
उन्होंने बताया कि ग्लूको सेरिब्रोसाइडेज एंजाइम की कमी से बच्चों में गोचर की बीमारी होती है। इसकी वजह से घातक वसायुक्त तत्व शरीर में जमा हो जाते हैं, जो लीवर, हृदय तथा हड्डियों को प्रभावित करते हैं. इससे शरीर के आंतरिक ऑर्गन बढ़ जाते हैं, ग्रोथ कम हो जाती है. जैसे पेट बढ़ जाता है, लंबाई नहीं बढ़ती, सांस में तकलीफ के साथ ही अन्य तकलीफ होने लगती है। ऐसे में मरीज को वेला ग्रुप ग्लुकारस और इमी ग्लुकारस की दवाई दी जाती है।

18 बच्चों में यह 7 बीमारियां डिटेक्ट हुई
बाल चिकित्सालय के 18 बच्चों में गोचर्स, अमिनोएसिडोपैथीज, म्यूकोपोलिसिकेराइटोसिस, बायोटिनिडेज डेफिसिएंसी, गैलेक्टोसिमिया, ऑर्गेनिक एसिडेमिया, फैटी एसिड ऑक्सीडेशन

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