Controversy for the chair of cmho

सीएमएचओ कुर्सी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। गुरुवार को सीएमएचओ कार्यालय में पूर्व से पदस्थापित डॉ राजेश शर्मा और राज्य सरकार द्वारा हाल की पदस्थापित किए डॉ. कांतिलाल पलात, दोनों एक साथ बैठे। एक ही कार्यालय में एक पद पर दो अधिकारियों के होने से कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई।डॉ.शर्मा का कहना है कि सीएमएचओ पद को लेकर उनका स्टे वैकेंट नहीं हुआ है। ऐसे में कानूनन सीएमएचओ वो ही है। वहीं डॉ. कांतिलाल पलात का कहना है कि जिस आधार पर इन्होंने स्टे लिया था, उसे राज्य सरकार ने संशोधन कर पूरा कर दिया है। पद खाली था तभी तो राज्य सरकार ने उनको पदस्थापित किया है। ऐसे में सीएमएचओ तो वो ही है।

डॉ. पलात सुबह जल्दी आकर बैठ गए तो बाद में आए राजेश शर्मा बगल में दूसरी कुर्सी लगाकर बैठ गए

बुधवार शाम करीब 6 बजे पलात को सीएमएचओ प्रमोट करने के आदेश जारी हुए थे। तत्काल प्रभाव से ज्वाइनिंग देने के आदेश थे। डॉ. पलात ने बुधवार देर शाम को ही सीएमएचओ कुर्सी संभाल ली थी। गुरुवार सुबह करीब 9 बजे ही डॉ. पलात कार्यालय पहुंच गए और कुर्सी पर बैठ गए। डॉ. राजेश कलेक्ट्रेट में एक मीटिंग अटेंड करने के बाद करीब 11.30 बजे सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे।दोनों के बीच बंद कमरे में कुछ वार्तालाप भी हुआ। इसके बाद डॉ. राजेश ने कर्मचारी से दूसरी कुर्सी मंगाई और उसे डॉ. पलात के बगल से लगाते हुए बैठ गए।

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मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंसी के लिए जरुरी है एक वर्ष की सेवा

जयपुर (राज.) अक्टूबर 2019

जनवरी 2019 से पूर्व में मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजीडेंसी करने हेतु मिनिमम एक साल की सेवा की बाध्यता थी लेकिन जनवरी में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विशेषज्ञ चिकित्सकों को राहत दी थी कि कभी भी सीनियर रेजीडेंसी हेतु एनओसी के लिए आवेदन कर सकते हैं, इसके बाद अत्यधिक संख्या में चिकित्सक एनओसी के लिए आवेदन करने लगे, चूँकि चिकित्सा शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की मिनिमम अहर्ता एक साल की सीनियर रेजीडेंसी है |

चिकित्सा शिक्षा विभाग में सेवा देना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुकाबले आसान है और इसे ज्यादा प्रोफेशनल माना जाता रहा है, इसी कारण चिकित्सकों का रुझान एक साल की सीनियर रेजीडेंसी की तरफ बढ़ने लगा और वे एनओसी के लिए भाग दौड़ करने लगे, बताया जाता है कि जल्दी और पुख्ता एनओसी दिलवाने के रैकेट भी विभाग में पनप गए थे, चिकित्सा विभाग चाहता है कि सेवारत चिकित्सक विभाग से यूँही पलायन न करें, कुछ सेवा तो दें, इसीलिये एक साल तक की सेवा करने के नियम को वापस लाया गया है, इससे सेवारत चिकित्सकों को एक साल सेवा देनी होगी जिससे ग्रामीण जनता को अधिक विशेषज्ञ सेवाएँ मिलेंगी 🙂

आदेश संलग्न है –

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मध्यप्रदेश : सरकारी अस्पताल खुलेंगे ‘एकल पारी’ में, आएगा ‘राईट टू हैल्थ’

मध्यप्रदेश : 30 मई 2019

मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सुदृढ़ बनाने के लिए विशेषज्ञों की सीधी भर्ती करने के निर्देश दिए और उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य लोगों का अधिकार हो इसके लिए “राइट टू हेल्थ” की दिशा में विचार करें। सीएम ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री तुलसी सिलावट उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ये दिए निर्देश –

मरीजों की, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों की सुविधा देखते हुए सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के देखने का समय 9 से 4 निर्धारित किया जाना चाहिए।

— मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल परिसर में निजी भागीदारी में डायग्नोस्टिक सेंटर स्थापित किए जाए।

— चिकित्सा शिक्षा और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। इसे लेकर सीएम ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड (CSR) अधिक से अधिक प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में आए इस दिशा में विशेष प्रयास करने को कहा।

— राष्ट्रीय स्वास्थ्य सूचकांकों के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिए लक्ष्य और समय आधारित रणनीति बनाएं ।

— मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल कर परिणाम आधारित योजनाएं बनाएं ।

— निजी नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ।

— डॉक्टर अस्पतालों में उपलब्ध हों और विशेषज्ञों की सेवाएं मरीजों को मिले ।

— स्वस्थ्य मध्यप्रदेश के लिए जरूरी है कि स्वास्थ्य सुविधाओं और व्यवस्थाओं का हर स्तर पर उन्नयन कर उन्हें बेहतर बनाएं।
बैठक में मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण श्रीमती पल्लवी जैन गोविल, सचिव श्री राजीव दुबे एवं आयुक्त स्वास्थ्य श्री नीतेश व्यास उपस्थित थे।

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सैकड़ों चिकित्सक बेरोजगार, नहीं निकलेगी कोई भर्ती

राजस्थान में एक जमाना था जब हजार चिकित्सकों कि भर्ती परीक्षा होती तो पांच सौ चिकित्सक परीक्षा देने आते थे, फिर पदस्थापन के बाद करीब चार सौ लोग उस जगह पर जाने का मन बनाते थे, जगह पर जाने के बाद वहां के हालातों से जूझने के बाद करीब सौ लोग भाग खड़े होते थे और तीन सौ चिकित्सक ही सेवा देते थे, उस समय पैसा भी कम मिलता था, समय के साथ सेलरी बढ़ी जो कि आज के दिन नियुक्ति के प्रथम माह में 56100/- है, प्रोबेशन भी एक साल का है उसके बाद स्थाई हो जाने पर सेलरी काफी बढ़ जाती है, साथ ही सेवारत चिकित्सकों को सेवाकाल के अनुसार उच्च शिक्षा (पीजी) में नीट परीक्षा के प्राप्तांकों पर 10-20-30% बोनस अंकों की व्यवस्था भी है, यानी नौकरी अच्छी है |

पिछले कुछ सालों में इसी कारण भर्तियों में भीड़ बढ़ गयी और चयन मुश्किल होने लगा, पदस्थापन में भी दिक्कतें आने लगी, आज के दिन राजस्थान में हालात ये हैं कि चिकित्सा अधिकारीयों के स्वीकृत पद 6200 हैं और प्रदेश में कार्यरत चिकित्सा अधिकारीयों की संख्या 7500 है, ये अतिरिक्त चिकित्सक UTB (Urgent Temporary Basis) वाले हैं, देखें तो हालात ये हैं कि आगामी कई वर्षों तक राजस्थान सरकार को चिकित्सा अधिकारीयों की कोई भी भर्ती नहीं निकालनी है |

बहुत से नए चिकित्सक MBBS करने के उपरांत इंतजार कर रहे हैं कि कब सरकारी सेवा की राह खुले और वे सेवा में आवें लेकिन राह कठिन है |

विकल्प –

  1. स्वीकृत चिकित्सा अधिकारीयों के पद 6200 से बढाकर 10000 किये जावें एवं भर्ती निकाली जावे |
  2. करीब 1500 चिकित्सा अधिकारीयों की पदोन्नति वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के पद पर होनी करीब एक साल से बकाया है, अगर इनकी पदोन्नति हो जाए तो ये MO के 1500 पद खाली हो जायेंगे और भर्ती की राह खुलेगी, लेकिन सरकार पदोन्नति करने में असफल रही है, कारण पता नहीं |
  3. UTB पर कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी ज्वाइन की जा सकती है लेकिन वो रिक्त पदों पर ज्वाइन करवाते हैं, जिनकी संख्या भी काफी कम है |

देखना दिलचस्प रहेगा कि कम चिकित्सकों का रोना रोने वाली सरकार हजारों बेरोजगार चिकित्सकों को कैसे रोजगार देती है और प्रदेश कि ग्रामीण जनता को चिकित्सा व्यवस्थाएं मुहैया करवाती है |

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Certificate Course – Post MBBS

One year Certificate Courses for in-Service Medical Officers (MBBS)
In reference to this Directorate Order No. Gazetted/DPC/C.Coursel 2014/972 dated 18-11-2014 and 1071 dated 06-01-2015, 267 selected in­ service doctors have been sent to Government Medical Colleges of the State on training for One year Certificate Course in, 10 Specialities.
As directed, applications are re-invited for the remaining vacant seats (List attached) with following relaxations in eligibility criteria:-
1. Minimum service rendered after regular selection is decreased from 5
years previously to 4 years after relaxation.
2. Minimum remaining service is decreased from 10 years previously to 8
years after relaxation.
3. Selected candidates shall furnish a bond of Rupees 25 Lacs for 8 years
mandatory Government Service after completion of course.