Doctors give a new life

जैसलमेर के खुहड़ी गांव के मेघसिंह को सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। अब वो इन डॉक्टरों को धन्यवाद देते नहीं थक रहा है। दरअसल, मेघ सिंह के साथ 17 जुलाई को एक बड़ा हादसा हुआ। रात को अपनी बाइक पर खेत में जाते समय खेत की कंटीली तारबंदी से उसका गला कट गया। परिजन उसे तुरंत जवाहिर अस्पताल लाए, जहां युवा सर्जन डॉ. सत्ताराम और उनकी टीम ने अलसुबह मरीज की हालत को देखते हुए ऑपरेशन किया। करीब 3 घंटे चले ऑपरेशन से मेघ सिंह को नई जिंदगी मिल गई। आज वो बिलकुल ठीक हो गया है और सरकारी अस्पताल को धन्यवाद देते नहीं थक रहा है।मेघसिंह का कहना है कि जैसलमेर का जवाहिर अस्पताल रेफर अस्पताल के नाम से फेमस है। यहां हर मरीज को गंभीर अवस्था में रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। अब इस अस्पताल में डॉक्टरों ने जटिल से जटिल ऑपरेशन खुद करके मरीजों और यहां के लोगों में एक भरोसा पैदा किया है कि सरकारी अस्पताल अब लोगों को नई जिंदगी देने लगे हैं।
डॉक्टर बोले, काफी क्रिटिकल कंडीशन थी
जवाहिर अस्पताल के डॉ. सत्ता राम का कहना है कि मेघ सिंह बहुत ही क्रिटिकल कंडीशन में हमारे पास आया था। उसकी गर्दन की सब मांसपेशिया कट चुकी थी। इसके साथ ही उसकी सांस की नली में पंचर था। थायराइड ग्रंथि में भी डेमेज था और क्रिकोइड कार्टिलेज भी फेक्चर थी। ऐसे में अगर उसको तुरंत इलाज नहीं मिलता तो उसकी जान जा सकती थी। लकवा मार सकता था या जिंदगी भर बेड पर ही बिताता। इतनी गंभीर स्थिति देखते हुए हमने खुद मेघ सिंह का ऑपरेशन करने की ठान ली।

3 घंटे तक चला ऑपरेशन
अस्पताल की टीम में हरीश जांगीड़, झाबरमल, लक्ष्मीनारायण ने सुबह 4 बजे ऑपरेशन शुरू किया और लगातार 3 घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचा ली। उन्होंने बताया कि अब मरीज बिलकुल ठीक है। चल फिर रहा है बोल रहा है। डॉ. सत्ताराम ने कहा कि लोगों को अब सरकारी अस्पताल में सारी सुविधा मिल रही है और वो भी एक दम नि:शुल्क। अब रेफर अस्पताल के नाम से फेमस जवाहिर में अब हाइटेक ऑपरेशन की सुविधा मिलने और निशुल्क मिलने से लोगों का सरकारी अस्पताल की तरफ दुबारा रुझान बढ़ने लगा है।

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Vadodara,s gov.hospital returning the lost amile of children

18.07.2022
जन्म के समय से ही कटे हुए होंठ के साथ जन्मे बच्चों की खोई हुई मुस्कान लौटाने का काम वडोदरा का सरकारी सर सयाजीराव जनरल (एसएसजी) अस्पताल कर रहा है। यहां हर साल औसतन कटे होंठ व तालू की खामी वाले 60 बच्चों की प्लास्टिक सर्जरी की जाती है। सर्जरी नि:शुल्क होती है।गुजरात ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से भी लोग अपने बच्चों की खोई मुस्कान लौटाने के लिए इस अस्पताल में पहुंचते हैं। करीब 20 फीसदी मरीजों ऐसे आते हैं जिनकी यह समस्या पहले की गई सर्जरी के चलते बढ़ी होती है। चिकित्सकों का कहना है कि यूं तो गर्भवती महिला की सोनोग्राफी में ही गर्भस्थ शिशु के परीक्षण के दौरान होंठ व तालू की खामी पकड़ में आ जाती है। जिससे लोगों को गर्भवती महिला की सोनोग्राफी अनिवार्य रूप से करानी चाहिए। फिर भी किसी कारणवश यह पकड़ में नहीं आने की स्थिति में इस प्रकार की जन्मजात खामी के साथ बच्चे जन्म लेते हैं, जिनके होंठ व तालू जन्म से ही कटे होते हैं। यदि कोई बच्चा ऐसा जन्म लेता भी है तो जन्म के एक साल के भीतर उसकी सर्जरी कराने पर उसके बेहतर परिणाम मिलते हैं।कटे होंठ होने से बालक के चेहरे की खूबसूरती बिगड़ती है। ऐसे होठ की सर्जरी बच्चे की 6 महीने की आयु तक कराने पर उत्तम परिणाम मिलता है। फटे तालू से बच्चे के बोलने में तकलीफ होती है, ऐसी सर्जरी जन्म के 1 वर्ष में कराने पर उत्तम परिणाम मिलते हैं। देरी करने पर बच्चे की आवाज का विकास हो जाता है उसके बाद यह सर्जरी कराने पर बोलने में खामी करने की संभावना रहती है। इच्छित परिणाम भी नहीं मिलते।

आनुवांशिकता बड़ी वजह

राजस्थान के बीकानेर के मूल के डॉ. शैलेष के. सोनी ने बताया कि माता या पिता में ऐसी खामी होने पर बच्चा ऐसी खामी के साथ जन्म लेता है। पहला बच्चा ऐसी खामी के साथ जन्म लेता है तो दूसरे बच्चे को भी ऐसी तकलीफ हो सकती है। आनुवांशिक कारण इसकी प्रमुख वजह है। गर्भस्थ शिशु की सोनोग्राफी से इसे जल्द पकड़ा जा सकता है।

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