Reduce newborn mortality in patna

राज्य सरकार प्रदेश में आपात प्रसूति, प्रसूति सेवा और नवजात शिशुओं की देखरेख की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है। इसके लिए एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) की स्वास्थ्य सेवा में सुधार की कवायद तेज कर दी गई है। एफआरयू को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।चिकित्सकों को छह माह का सीईएमओएनसी (कॉम्प्रेहेंसिव इमरजेंसी ओबेस्टेट्रिक एंड न्यूबॉर्न केयर) और एलएसएएस (लाइव सेविंग एनेसेस्थेसिया स्किल्स) का प्रशिक्षण दिया जाएगा।स्थाई और संविदा पर बहाल चिकित्सक प्रशिक्षण ले सकते हैं। चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण के बाद एफआरयू में पांच साल तक कार्य करना अनिवार्य होगा। इसके लिए उनको बांड भरना होगा। प्रशिक्षण लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त निर्धारित है।स्थाई और संविदा पर बहाल चिकित्सकों को मिलेगा मौका

मरीजों की जान बचाने में मिलेगी मदद
राज्य स्वास्थ्य समिति के अनुसार, राज्य सरकार प्रदेश में मातृत्व और शिशु मृत्यु दर को कम करने को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। इसके लिए एफआरयू की चिकित्सकीय व्यवस्था को बेहतर करने के साथ-साथ चिकित्सकों को आपात प्रसव, प्रसव सेवाओं और नवजात की देखभाल और गंभीर स्थिति में मरीजों की जान बचाने को लेकर लाइफ सेविंग एनेस्थेसिया कौशल आदि का

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