fear of monkeypox in indore

भारत में दस्तक दे चुके मंकीपॉक्स को लेकर लोग डरे हुए हैं। भय का अंदाजा इंदौर के इस केस से लगाया जा सकता है। बुधवार को एक महिला मंकीपॉक्स जैसे लक्षण होने पर निजी क्लिनिक पहुंची। वो डरी-सहमी बोली कि मुझे मंकीपॉक्स जैसे लक्षण हैं। महिला की यह बात सुन हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग तक इसका मैसेज पहुंचाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम महिला के घर पहुंची। सैंपल लेने के बाद उसे आइसोलेट कर दिया गया है। सैंपल नागपुर या जयपुर लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक महिला आइसोलेशन में रहेगी।इधर, CMHO डॉ. बी.एस. सेत्या का कहना है कि इंदौर में मंकीपॉक्स का एक भी कन्फर्म केस नहीं आया है। वे खुद महिला से मिलकर आए हैं। मंकीपॉक्स की बात निराधार है। 55 साल की महिला डायबिटीज की मरीज है। उसे ऐसा रिएक्शन होता रहता है। इसके पहले भी अप्रैल महीने में रिएक्शन हुआ था। उसके परिवार से मिलकर चर्चा भी की है। निजी क्लिनिक में पहुंचने के बाद सभी को लग रहा था कि महिला में मंकीपॉक्स के लक्षण है। महिला भी लक्षण को लेकर डरी हुई है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।

क्या है मंकीपॉक्स?

यह बीमारी मंकीपॉक्स नाम के वायरस की वजह से होती है। मंकीपॉक्स भी स्मॉलपॉक्स (चेचक) परिवार के वायरसों का ही हिस्सा है। हालांकि, इसके लक्षण स्मॉलपॉक्स की तरह गंभीर नहीं, बल्कि हल्के होते हैं। मंकीपॉक्स बहुत कम मामलों में ही घातक होता है। यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि इसका चिकनपॉक्स से लेना-देना नहीं है।

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negative reports of monkeypox

राजस्थान में मिले मंकीपॉक्स के दोनों संदिग्धों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। दोनों संदिग्धों को सोमवार को जयपुर के आरयूएचएस में बने मंकीपॉक्स आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। अतिरिक्त निदेशक (स्वास्थ्य) रविप्रकाश शर्मा ने बताया कि मंकीपॉक्स के दोनों मामलों में रिपोर्ट नेगेटिव आई है।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज की सीनियर प्रोफेसर ने कहा कि जिन मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव है, उनमें से एक भरतपुर का रहने वाला है। हालांकि, उसकी प्रोफाइल के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है। दूसरा युवक किशनगढ़ (अजमेर) का रहने वाला है। दोनों मरीजों के सैंपल सोमवार को एसएमएस मेडिकल कॉलेज की लैब में भेजे गए थे। यहां सैंपल नेगेटिव मिलने के बाद भी उन्हें पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भेजे जाएगा।सिम्प्टम्स देखकर किया था एडमिट भरतपुर के युवक को संदिग्ध मानते हुए सोमवार सुबह आरयूएचएस में भर्ती किया गया था। इसे हल्का बुखार होने के साथ ही शरीर पर कुछ ही दाने थे। वहीं, बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले किशनगढ़ के 20 साल के युवक को रविवार देर रात एडमिट किया था। उसे बुखार होने के साथ शरीर पर जगह-जगह दाने हो रहे थे। इसे देखते हुए किशनगढ़ में डॉक्टरों ने इसे संदिग्ध मानते हुए जयपुर रेफर कर दिया।

तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
जिन लोगों के बुखार, गर्दन में गांठे, पूरी बॉडी पर चिकनपॉक्स जैसे दाने की समस्या आ वह तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। डॉ. शर्मा ने बताया कि इस केस में मरीज के प्राइवेट पार्ट और मल द्वार के आसपास एनोजेनाइटल पेन होता है।उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मंकीपॉक्स के लक्षण 6 से 13 दिन के अंदर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि कई बार 5 से 21 दिन का समय भी ले सकता है। संक्रमित होने पर अगले 5 दिन के अंदर बुखार, सिरदर्द, थकान और पीठ में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं।

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Death of Monkeypox infected in kerala

भारत में मंकीपॉक्स के अब तक 5 केस दर्ज हो चुके हैं। कर्नाटक की हेल्थ मिनिस्टर वीना जॉर्ज ने कंफर्म कर दिया है कि केरल में मंकीपॉक्स से एक मौत हो गई है। मृतक की उम्र 22 साल थी, वो UAE से अपने घर लौटा था। UAE से निकलने के एक दिन पहले ही उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।
मंकीपॉक्स को अब तक लोग सीरियस नहीं ले रहे हैं। देश में हुई पहली मौत के बाद इसको लेकर किस तरह सचेत होने की जरूरत है। मंकीपॉक्स से मौत की कितनी संभावना है ये सब जानेंगे डॉ. प्रभाकर तिवारी, इन्फॉर्मेशन एक्सपर्ट्स, CMHO भोपाल और डॉ. आर वी एस भल्ला, डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस अस्पताल से।

मंकीपॉक्स से बचाव के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की ये हैं 8 गाइडलाइन

सभी हेल्थ सेंटर्स ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखें, जिनके शरीर पर दाने दिखते हैं।
उन पर नजर रखें, जिन्होंने पिछले 21 दिनों में मंकीपॉक्स सस्पेक्टेड देशों की यात्रा की हो।
संदिग्ध केस को हेल्थकेयर फैसिलिटी में आइसोलेट किया जाएगा, जब तक मरीज के शरीर में दानों से पपड़ी नहीं उधड़ जाती।
मंकीपॉक्स संदिग्ध मरीजों के फ्लूइड या खून का सैंपल NIV पुणे में टेस्ट के लिए भेजा जाएगा।
अगर कोई पॉजिटिव केस पाया जाता है, तो फौरन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की जाएगी।
विदेश से आने वाले यात्रियों को ऐसे लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए, जो स्किन की बीमारी से पीड़ित हों।
यात्रियों को चूहे, गिलहरी, बंदर सहित जिंदा और मरे हुए जंगली जानवरों के संपर्क में भी नहीं आना चाहिए।
अफ्रीकी जंगली जानवरों से बनाए गए प्रोडक्ट्स जैसे- क्रीम, लोशन और पाउडर का इस्तेमाल करने से बचें।
WHO पहले से कहता आ रहा है कि समलैंगिक पुरुषों में मंकीपॉक्स के संक्रमण की ज्यादा संभावना है। या जिस पुरुष का संबंध दूसरे पुरुष से रहता है उन्हें मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है। इस बात को लेकर LGBTQ कम्यूनिटी में हलचल थी। अब WHO ने नई हेल्थ एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा है कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मंकीपॉक्स का खतरा केवल पुरुषों के साथ यौन संबंध यानी सेक्स करने वाले पुरुषों तक ही सीमित नहीं है। कोई भी व्यक्ति, जो किसी संक्रमित व्यक्ति के कॉन्टैक्ट में है, उसे मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है।

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Monkeypox in rajasthan

02.08.2022

राजस्थान में मंकी पॉक्स के दो संदिग्ध केस सामने आए हैं। दोनों को जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। उनके शरीर पर दाने नजर आ रहे हैं। एक अजमेर के किशनगढ़ और दूसरा भरतपुर जिले का रहने वाला है। सोमवार को भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आज आएगी।RUHS के अधीक्षक डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि एक 20 साल का युवक किशनगढ़ से रविवार देर रात रेफर होकर आया था। वह बेंगलुरु में पढ़ाई करता है। उसे बुखार आने व शरीर पर दाने दिखने के बाद संदिग्ध मानते हुए जयपुर रेफर किया गया। सतर्कता बरतते हुए मरीज को आइसोलेट किया है। उसके सैंपल मंकी पॉक्स की जांच के लिए SMS मेडिकल कॉलेज भिजवाए है। मरीज की अभी कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया रिपोर्ट आने के बाद ही कंफर्म होगा कि मंकी पॉक्स का वायरस है या चिकन पॉक्स। ऐसे में हमने सामान्य ट्रीटमेंट शुरू कर दिया है।RUHS से मिली रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य युवक भी सोमवार सुबह भर्ती हुआ है, जो भरतपुर का रहने वाला है। इसके हल्का बुखार होने के साथ ही शरीर पर कुछ ही दाने थे। संदिग्ध मानते हुए भर्ती किया गया है। डॉक्टर की मानें तो दोनों युवकों की तबीयत स्थिर है।

6वीं मंजिल पर बना है वार्ड
जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में प्रशासन ने ओमिक्रॉन वाले मरीजों की तर्ज पर मंकी पॉक्स के संदिग्ध अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया है। यह हॉस्पिटल की छठवीं मंजिल पर है। इस मंजिल पर वार्ड के अलावा कुछ प्राइवेट रूम भी हैं। इन्हीं जगहों पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।

कोरोना की तरह हवा में नहीं फैलता ये संक्रमण
जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमन शर्मा की मानें तो ये संक्रमण कोरोना की तरह हवा में नहीं फैलता। उन लोगों को खास बचने की जरूरत है जो विदेश से यात्रा करके आए हैं। उन्होंने बताया कि वे लोग ज्यादा सतर्क रहे, जो अफ्रीकी देशों से यहां आ रहे हैं। जिन लोगों के बुखार, गर्दन में गांठे, पूरी बॉडी पर चिकन पॉक्स जैसे दाने की समस्या आ रही है तो वह तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।डॉ. शर्मा ने बताया कि इस केस में मरीज के प्राइवेट पार्ट और मल द्वार के आसपास एनोजेनाइटल पेन होता है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मंकी पॉक्स के लक्षण 6 से 13 दिन के अंदर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि कई बार 5 से 21 दिन का समय भी ले सकता है। संक्रमित होने पर अगले 5 दिन के अंदर बुखार, सिरदर्द, थकान और पीठ में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं।

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Monkeypox reports available in 24 hours

देश-दुनिया में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के बाद अब राजस्थान में भी सतर्कता बढ़ा दी है। इसके लिए जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में इस बीमारी की जांच के लिए लैब शुरू कर दी है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल डॉ. राजीव बगरहट्टा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लोगों को इस बीमारी से अवेयर करने के लिए कैंपेन चलाने का निर्णय किया।डॉ. बगरहट्‌टा ने बताया कि राज्य सरकार ने मंकीपॉक्स के बारे में पहले ही गाइडलाइन जारी कर दी है। हम अपने स्तर पर अब लोगों को जागरूक करने का काम करेंगे। वहीं हमने अपने यहां इस वायरस की जांच की फैसेलिटी भी शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि अगर जयपुर में कोई केस मंकीपॉक्स का आता है तो उसके लिए RUHS में अलग से डेडिकेटेड वार्ड बना रखा है, जहां मरीज को भर्ती किया जा सकेगा।आपको बता दें कि देश में अब तक मंकीपॉक्स के 4 केस सामने आ चुके हैं। इनमें से 3 मरीज केरल में और 1 दिल्ली में मिला है। अब तक 4 संदिग्ध केस भी सामने आ चुके हैं। सभी के सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे भिजवाए गए है, हालांकि, अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है।
*अब पुणे नहीं भेजने पड़ेंगे सैंपल
डॉ. बगरहट्‌टा ने बताया कि अब लैब खुलने के बाद हमे यहां कलेक्ट किए जाने वाले सैंपल को जांच के लिए पुणे की लैब में नहीं भेजने पड़ेंगे। हमने मेडिकल कॉलेज में ही इसकी व्यवस्था शुरू कर दी है। सैंपल कलेक्शन का काम एसएमएस मेडिकल कॉलेज में ही है। उन्होंने बताया कि जयपुर के अलावा अन्य दूसरे बड़े शहरों में भी सैंपल कलेक्शन सेंटर खोले जाएंगे, इसके लिए हेल्थ डिपार्टमेंट को पत्र लिखेंगे, ताकि सैंपल जांच के लिए जयपुर भेजे जा सके।

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Monkeypox in Ghaziabad-Noida

28.07.2022
गाजियाबाद में मंकीपॉक्स के दो संदिग्ध केस मिले हैं। एक मरीज दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में भर्ती हुआ है। दूसरा मरीज गाजियाबाद के MMG हॉस्पिटल में पहुंचा है। ग्रेटर नोएडा की 47 वर्षीय महिला अध्यापक भी वहां के जिला अस्पताल में भर्ती हुई हैं। उनके मुंह और पूरे शरीर पर लाल रंग के दाने हैं। तीनों के सैंपल जांच के लिए पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी यानी NIV में भेज दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने तक तीनों संदिग्ध मरीज डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे।

पूरे शरीर पर लाल रंग के दाने
गाजियाबाद के जिला सर्विलांस अधिकारी डॉक्टर आरके गुप्ता ने बताया, “28 वर्षीय युवक अर्थला का रहने वाला है और साहिबाबाद क्षेत्र की एक कंपनी में जॉब करता है। मंगलवार को वह MMG हॉस्पिटल की ओपीडी में आया। उसके शरीर पर कई जगह लाल रंग के दाने थे, जैसे मंकीपॉक्स में होते हैं। इसे मंकीपॉक्स का संदिग्ध मरीज मानते हुए सैंपल लिया गया है। इस सैंपल को जांच के लिए NIV भेजा गया है।”

लोकनायक में डॉक्टरों की निगरानी में मरीज
गाजियाबाद का दूसरा संदिग्ध मरीज दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में मंगलवार को भर्ती हुआ है। यह मरीज अस्पताल की इमरजेंसी में बुखार और त्वचा पर दाने के लक्षण के साथ आया था। फिलहाल उसको आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। प्राथमिक जानकारी यह भी सामने आई है कि उक्त संदिग्ध मरीज 20 दिन पहले ही मुंबई से लौटा है। वह दो महीने पहले पेरिस भी गया था।

नोएडा में मंकीपॉक्स का कंट्रोल रूम बनाया गया
नोएडा के सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में मंकीपॉक्स को लेकर कंट्रोल रूम बना दिया गया है। यहां के नोडल अधिकारी डॉक्टर जीके मिश्रा से 9675322617 और सहायक दिनेश गौड़ से 9899965203 से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों को भर्ती करने के लिए जिला अस्पताल में 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी बना दिया गया है।

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Monkeypox in kerala

देश में मंकीपॉक्स के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। केरल, दिल्ली में इसके केस मिल चुके हैं। अब बिहार में भी एक संदिग्ध केस मिला है। इसके चलते इन राज्यों में एयरपोर्ट्स पर कड़ी जांच की जा रही है। वहीं उत्तर प्रदेश में भी सरकार मंकीपॉक्स को लेकर तैयारी में है।

दिल्ली में संदिग्धों के लिए अस्पताल तैयार
दिल्ली में विदेश से आने वालों की जांच की में अगर मंकीपॉक्स के लक्षण मिले तो उन्हें लोक नायक जय प्रकाश (LNJP) अस्पताल भेजा जाएगा। यह फैसला दिल्ली में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आने के बाद सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने किया है। दिल्ली सरकार ने जिला अधिकारियों को मंकीपॉक्स को लेकर कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए हैं।
20 लोगों की टीम तैयार की गई है
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तेज बुखार, पीठ दर्द और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण वाले यात्रियों को LNJP अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भेजा जाएगा। मरीजों को देखने के लिए 20 लोगों की टीम तैयार की गई है।इसके अलावा संदिग्ध मरीजों के सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे जाएंगे। जबकि जिला प्रशासन परिवार के सदस्यों को क्वारंटाइन करेगा और ऐसे संदिग्ध मरीजों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग भी होगी।

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Advisory regarding monkeypox

26.07.2022
कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ कि मंकीपॉक्स के संक्रमण की चिंता सताने लगी है। मंकीपॉक्स का एक मरीज दिल्ली में चिह्नित होने के बाद सतर्कता बरतने और लक्षण मिलने पर सैंपल लेकर जांच की व्यवस्था करने का निर्देश जारी किया गया है। केंद्र से मिली गाइडलाइन को सभी चिकित्सा प्रभारियों को भेजा गया है।निर्देश दिया है कि मंगलवार को सभी चिकित्सक, आशा और एएनएम को मंकीपॉक्स के लक्षणों के बारे में ठीक से बताएं। एनएम या आशा को किसी मरीज में लक्षण मिले तो वह तुरंत इसकी सूचना दे।सिविल सर्जन डॉ. केके राय ने बताया कि संभावित मरीज मिलने पर तुरंत जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। गाइडलाइन के अनुसार मरीज का सैंपल लेकर जांच के लिए एनआईवी पुणे भेजना होगा। वैसे यहां अभी एक भी मरीज नहीं मिला है। मंकीपॉक्स का सोर्स चूहा या गिलहरी को माना जाता है।

कैसे होता है संक्रमण :

इंसान के बॉडी फ्लुइड या यौन संपर्क से एक-दूसरे को संक्रमण लग सकता है। इसके अलावा संक्रमित के कपड़े के इस्तेमाल से भी संक्रमण हो सकता है। लंबे समय तक पीड़ित व्यक्ति के साथ रहने पर भी संक्रमण हो सकता है।

मुख्य लक्षण :

सिविल सर्जन के मुताबिक मंकीपॉक्स के मुख्य लक्षणों में बुखार, सर्दी, सिरदर्द, गले में खरास, कफ, मांसपेशियों में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी, त्वचा में रैश, आंख में दर्द, चेस्ट पेन, पेशाब में कमी, बेहोशी जैसी स्थिति भी हो सकती है।

संक्रमण हो तो क्या करें :

संक्रमित मरीज को आइसोलेट कर देना चाहिए। मरीज मास्क पहने या मुंह-नाक कवर करे। तुरंत चिकित्सक से संपर्क करे। संक्रमित का बिस्तर, कपड़े, तौलिया को नहीं छुएं। हाथ साबुन से हाथ धोएं या सेनेटाइज करें।

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Vigilance regarding monkeypox

26.07.2022
दिल्ली में मंकी पाक्स के एक केस मिलने से यहां भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मूड पर है। विभाग ने शहर में संचालित सभी निजी अस्पतालों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विदेशों से यहां इलाज कराने आने वालों पर विशेष नजर रखें और यदि किसी में मंकी पॉक्स के लक्षण नजर आए ताे स्वास्थ्य विभाग को तत्काल जानकारी शेयर करें। स्वास्थ्य विभाग का यह भी कहना है कि इसका खतरा विदेशों से आने वालों पर है। ऐसे में शहरवासियों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। सिर्फ सतर्क रहने और सावधानी बरतने की जरूतर है।बता दें कि दिल्ली में 34 वर्षीय एक युवक में मंकी पॉक्स के लक्षण मिले हैं। उसका एलएनजेपी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उक्त युवक की कोई विदेश टूर की हिस्ट्री नहीं है। बल्कि वह कार से एक महीने पहले 25जून को हिमाचल प्रदेश गया था। वहां नारकंडा में रुकने के बाद 27 जून को दिल्ली वापस लाैटा था। डिप्टी सीएमओ डॉ. रामभगत का कहना है कि ऐहतियात के तौर पर मंकी पॉक्स मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाने की तैयारी है। हालांकि अभी फरीदाबाद में कोई मरीज नहीं मिला है। उनका कहना है कि यहां के निजी अस्पतालों में विदेशों से मरीज इलाज कराने आते हैं। ऐसे में सभी निजी अस्पतालों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मंकी पॉक्स को लेकर किसी को डरने की जरूरत नहीं है। यह कोरोना जैसे खतरनाक नहीं है। करीब 45 साल पहले लोगों को स्मॉल पॉक्स के टीके लगा करते थे। ऐसे में 45 साल से ऊपर वालों को कोई खतरा नहीं है।

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Monkey pox a global health emergency

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। बैठक में लंबी चर्चा के बाद WHO ने यह फैसला लिया है। मंकीपॉक्स अब तक 80 देशों में फैल चुका है। भारत में अब तक इस वायरस के 3 मामले सामने आए हैं।
उधर, अमेरिका में पहली बार दो बच्चों में यह संक्रमण पाया गया है। हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक एक बच्चा कैलिफोर्निया का है, वहीं दूसरा बच्चा नवजात है और अमेरिका का निवासी नहीं है।स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि दोनों बच्चों की हालत स्थिर है। इलाज के लिए उन्हें एंटीवायरल दवा टेकोविरिमैट दी गई है। CDC के अनुसार यह दवा 8 साल से छोटे बच्चों को दी जानी चाहिए क्योंकि उन्हें गंभीर संक्रमण का खतरा होता है।

दुनिया में मंकीपॉक्स के लगभग 17 हजार मामले
Monkeypoxmeter.com के डेटा के मुताबिक, भारत समेत 80 देशों में 16,886 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से यूरोप में सबसे ज्यादा 11,985 लोग मंकीपॉक्स की चपेट में आए हैं। वहीं, बीमारी से ग्रस्त टॉप 10 देशों में ब्रिटेन, स्पेन, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, पुर्तगाल, कनाडा, नीदरलैंड्स, इटली और बेल्जियम शामिल हैं। मंकीपॉक्स से इस साल तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

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