black earning clerk suspended

06.08.2022

काली कमाई का सौदागर चिकित्सा शिक्षा विभाग का क्लर्क हीरो केशवानी को सस्पेंड कर दिया गया है। उसके खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच भी शुरू हो गई है। वे पिछले 20 साल से चिकित्सा शिक्षा विभाग में पदस्थ था।बता दें कि ईओडब्ल्यू (Eow) की कार्रवाई से बचने क्लर्क हीरो केशवानी ने फिनाइल पी लिया था। वहीं ईओडब्ल्यू (Eow) टीम की जांच में परिवार के लोग सहयोग नहीं कर रहे है। ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में अब तक दो बैंक खाते मिले है। हीरो केशवानी गोल्ड और महंगे सूट पहनने का शौकीन है बड़ी-बड़ी पार्टियों में अधिकारियों की तरह पहुंचता हीरो था। ऑफिस और पार्टियों में बदल-बदल कर कार का उपयोग करता था।

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Raid on the house of clerk

04.08.2022

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य विभाग (health department) के क्लर्क हीरो केसवानी के घर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) का छापा पड़ा है. बताया जा रहा है कि इस क्लर्क के घर से अस्सी लाख की रकम नगद मिली है. छापे के बाद 54 वर्षीय हीरो केसवानी ने फिनायल पी लिया. उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.क्लर्क हीरो केसवानी सतपुड़ा भवन में पदस्थ है. आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर EOW ने कोर्ट से ऑर्डर लेने के बाद उसके घर पर छापा मारा है. अब तक की जांच में टीम को अस्सी लाख का कैश और प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले हैं. कारवाई अभी जारी है.वरिष्ठ लिपिक हीरो केसवानी का घर भोपाल के उपनगरीय क्षेत्र बैरागढ़ में है. इसी घर में आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापा मारा गया. छापे की कार्रवाई से बचने के लिए लिपिक ने घर में रखा फिनाइल पी लिया जिसके बाद उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां उसका इलाज चल रहा है.भोपाल ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक राजेश मिश्रा ने समाचार एजेंसी भाषा को बताया, ‘‘आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर वरिष्ठ लिपिक हीरो केसवानी के आवास पर छापा मारा गया है.” उन्होंने कहा कि छापे की कार्रवाई फिलहाल जारी है इसलिए कुल कितनी संपत्ति का खुलासा हुआ है इसका मूल्यांकन कार्रवाई समाप्त होने के बाद किया जा सकेगा.उन्होंने बताया कि सुबह केसवानी ने छापे के कार्रवाई का विरोध करते हुए दल के सदस्यों के साथ हाथापाई की और बाद में घर में रखा फिनाइल जैसा द्रव पी लिया. इसके बाद उल्टी होने पर उसे शासकीय हमीदिया अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है.राजेश मिश्रा ने कहा कि शुरुआती तौर जांच में लिपिक के घर से कुल चार करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति होने का अनुमान है. ईओडब्ल्यू अधिकारी ने कहा कि केसवानी का एक पेंटहाउस वाला आवासीय घर और उसमें महंगा सजावटी सामान भी पाया गया. इस मकान की कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये है.अधिकारी ने कहा कि लाखों की राशि केसवानी के परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा पाई गई और अधिकांश संपत्ति उसने अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी. उसकी पत्नी एक गृहिणी है और उसके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है.

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Perfect use of ayushman’s incentive in hospital by doctors

29.07.2022
सरकारी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना की इंसेंटिव राशि के बंटवारे को लेकर मचे बवाल के बीच मेडिसिन विभाग के 12 डॉक्टरों ने कहा है कि कई जांचें, कई तरह की सुविधाएं अस्पताल में नहीं है। इस राशि से अस्पताल को अपग्रेड करना चाहिए।मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. वीपी पांडे, डॉ. शिवशंकर शर्मा, डॉ. संजय दुबे, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. महेंद्र चौरसिया, डॉ. भूपेंद्र सिंह चौहान, डॉ. प्रणय बाजपेयी, डॉ. पुनीत गोयल, डॉ. अंकित मेश्राम सहित 12 डॉक्टरों का कहना है कि इस राशि से अस्पताल को अपग्रेड करना चाहिए।अस्पताल में आज तक खुद का सीटी-एमआरआई जांच सेंटर स्थापित नहीं हो पाया है। थोड़े-थोड़े दिन में सोडियम, पोटेशियम की जांच से इनकार कर दिया जाता है। थायराइड की जांच नहीं हो पा रही है। पूछने पर बताया जाता है कि किट खत्म हो गई। क्रिएटिनिन, एबीजी जैसी सामान्य जांचें भी कई बार नहीं हो पाती हैं। मरीजों को बाहर भेजना पड़ रहा है।

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Fraud in the name of booster dose

18.07.2022
स्लॉट बुक कराने के नाम पर मांग रहे ओटीपी, जिसे बताते ही बैंक खाते से निकल जाते हैं रुपए,. केंद्र सरकार की ओर से 2 दिन पहले पूरे देश में कोविड-19 की बूस्टर डोज फ्री करने के बाद ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले सक्रिय हो गए हैं। बूस्टर डोज लगाने के नाम पर लोगों के मोबाइल पर ओटीपी भेजकर बैंक खाते से पैसे उड़ाए जा रहे हैं। दो दिन में ही कई शहरों में आधे दर्जन से अधिक ऐसे मामले दर्ज हो चुके हैं। पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों को बूस्टर डोज के नाम पर फ्रॉड से सावधान रहने की हिदायत दी है। दरअसल बूस्टर डोज केंद्र ने फ्री की है। इसके चलते हर कोई सबसे पहले डोज लगाना चाहता है। कॉलर व्यक्ति से पूछता है कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन बूस्टर लेने में रुचि है या नहीं। डोज के लिए दिनांक व समय बताकर पुष्टि के लिए मोबाइल में भेजा ओटीपी पूछता है। जल्दबाजी में व्यक्ति पूरा मैसेज पढ़े बगैर केवल ओटीपी बताकर अपना नुकसान कर बैठते हैं।

सरकार फोन पर नहीं करती बुकिंग
सरकार फोन कॉल के जरिए वैक्सीन स्लॉट बुक नहीं करती है।

अगर आप कोविड-19 वैक्सीन के लिए स्लॉट बुक करवाना चाहते हैं तो cowin. gov. in पर जा सकते हैं।

इसके अलावा मोबाइल एप्लिकेशन है।

स्लॉट बुक करने में सक्षम नहीं हैं तब भी आप सरकारी पहचान पत्र के साथ किसी भी टीकाकरण केंद्र में जाकर अपना स्लॉट बुक करवाकर हाथों हाथ बूस्टर डोज लगवा सकते हैं।

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4.5 crore claimed from ayushman scheme on the basis of fake patient in bhopal

13.07.2022
आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों द्वारा किया जा रहा एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। शहर के डीआईजी बंगला क्षेत्र में स्थित गुरुआशीष अस्पताल ने फर्जी मरीजों के आधार पर आयुष्मान योजना से करीब 4.5 करोड़ का क्लेम ले लिया। यह वे मरीज थे जो अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए। पिछले महीने योजना का संचालन करने वाली स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) की तरफ से चिकित्सकों की टीम भेजकर प्रदेश भर के कुछ अस्पतालों की जांच की गई थी। इसमें यह अस्पताल भी शामिल था। मंगलवार को एसएचए ने अस्पताल पर धोखाधड़ी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई। इसके साथ ही सीएमएचओ द्वारा अस्पताल को नोटिस जारी कर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की प्रक्रिया की जाएगी।
सिर्फ सात अस्पतालों ने दिया जवाब

आयुष्मान भारत योजना के सीईओ अनुराग चौधरी ने बताया कि एसएचए ने गड़बड़ी करने वाले प्रदेश के सभी 28 अस्पतालों को 15 जून को नोटिस जारी किया था। इनमें अभी तक सिर्फ सात अस्पतालों ने ही जवाब दिया है। सभी का जवाब आने के बाद योजना से निलंबित कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

एक और अस्पताल पर भी हो चुकी है कार्रवाई

महीने भर पहले वैष्णव अस्पताल में भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। इस पर एफआइआर के बाद अस्पताल के संचालक डा. विवेक परिहार को गिरफ्तार किया गया था। यह गड़बड़ी उजागर होने के बाद ही प्रदेश के विभिन्न जिलों के 47 निजी चिकित्सालयों की जांच चिकित्सकों के 20 दल बनाकर की गई थी। इनमें 28 अस्पतालों में गड़बड़ी मिली थी। बड़ी बात यह है कि इनमें भोपाल के 15 अस्पताल शामिल हैं।
मरीजों के नाम पर बनाए फेंटम बिल

अस्पताल ने बीते कुछ महीनों में ऐसे मरीजों के क्लेम प्रस्तुत किए जो अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए। अस्पताल द्वारा इन क्लेम को फेंटम बिल नाम दिया गया था। जांच के बाद सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन ने कुल 1655 फर्जी मरीजों के फर्जी दस्तावेज जमा कर आयुष्मान योजना से 45195565 रुपए का क्लेम ले लिया। एसएचए ने इसे धोखाधड़ी मानते हुए अस्पताल संचालक डॉ. संदीप दुबे पर एफआईआर दर्ज कराई गई।

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Money invest in the name of software in gov.hospital ,Bhopal

13.07.2022
शहर के सरकारी अस्पताल मुफ्त की कोई भी चीज पसंद नहीं करते। यही वजह है कि अस्पतालों का कामकाज निर्धारित करने के लिए केन्द्र के मुफ्त के पोर्टल का उपयोग नहीं करना चाहते। शहर के सरकारी अस्पतालों ने मरीजों की सुविधा का हवाला देकर खुद के सॉफ्टवेयर के नाम पर करीब 6 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। हमीदिया से लेकर एम्स और अन्य सरकारी अस्पतालों ने राशि तो खर्च कर दी, लेकिन अपने स्तर पर जो पोर्टल तैयार कराए वे फिलहाल तो काम नहीं कर रहे।

हमीदिया अस्पताल: खर्च किए 2.5 करोड़ रुपए:
हमीदिया में तीन साल पहले हेल्थ इंफॉर्मेशन एंड मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया था। दावे हुए थे कि पूरे काम ऑनलाइन होंगे। यही नहीं इस सॉफ्टवेयर को सरकारी एजेंसी 25 लाख में तैयार कर रही थी, लेकिन प्रबंधन ने निजी एजेंसी को 2.5 करोड़ रुपए दे दिए। इसके बावजूद अब तक सॉफ्टवेयर तैयार नहीं है।

एम्स:फर्जीवाड़ा ऐसा कि हो गई जांच
एम्स भोपाल में भी सॉफ्टवेयर के निर्माण के दौरान फर्जीवाड़ा हुआ। एम्स प्रबंधन ने अपने सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए सरकारी एजेंसी को 86 लाख रुपए जारी किए, लेकिन चार साल तक सॉफ्टवेयर का निर्माण नहीं हो पाया। इसके बाद एम्स मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने निजी एजेंसी को सॉफ्टवेयर का ठेका दे दिया।

अन्य अस्पतालों में भी खुद के सॉफ्टवेयर फेल:
जेपी अस्पताल में भी सॉफ्टवेयर तैयार किए गए। उस दौरान यह प्रचारित किया गया कि प्रदेश का पहला अस्पताल जहां मिलेगी कतारों से आजादी, लेकिन स्थिति अब भी वैसी ही है। वहीं गैस राहत विभाग के सभी अस्पतालों और बीएमएचआरसी में भी सॉफ्टवेयर तैयार किए गए, जो अब तक अधूरे ही हैं।

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Fraud in jodhpur to get job in aiims

05.07.2022
एक युवक ने एम्स में नौकरी लगाने के नाम पर दो लोगों से 62 हजार रुपए लिए और 39 हजार लौटा 23 हजार रुपए हड़प लिए। युवक ने एम्स अस्पताल के ठेकेदारों से जान-पहचान बताकर उनको वहां लगाने का झांसा दिया। आरोपी ने पीड़ित को बताया कि हर महीने 30 हजार वेतन के अलावा महीने में 6 छुटि्टयां भी मिलेंगी। इससे वह उसकी बातों में आ गया और उसने और एक महिला ने उसे नौकरी के नाम पर 62 हजार रुपए दे दिए।बासनी पुलिस के अनुसार सूर्यनगरी कॉलोनी बासनी प्रथम चरण के रहने वाले दुखनदास पुत्र किशनदास ने रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि वह मजदूरी करता है। उसकी मुलाकात बासनी स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत सुनील भाटी से हुई। उसने एम्स अस्पताल में नौकरी लगाने की बात की।दुखनदास ने अपने और मित्र की नौकरी लगवाने के लिए सुनील को गत 1 जून को 62 हजार रुपए दिए। फिर काफी दिनों तक नौकरी नहीं लगने पर आरोपी से रुपए मांगे। इस पर सुनील ने परिवादी को 39 हजार रुपए लौटा दिए, मगर 23 हजार रुपए नहीं लौटाए। पीड़ित ने बासनी थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया।

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कितनी सेलरी बढ़ेगी DACP में प्रमोशन के बाद ? चौंक जायेंगे आप जानकर !

राज्य सरकार चिकित्सकों को Dynamic Assured Career Progression (DACP) के तहत समयबद्ध पदोन्नति देती हैं, छठे पे कमीशन में यह पदोन्नति 5400, 6600,7600 etc. pay grade के रूप में दी जाती थी लेकिन सातवें पे कमीशन में यह pay band levels के रूप में दी जाती है |
एक Government Doctor की DACP के बाद उसकी बेसिक पे कितनी हो जायेगी ? यह एक सामान्य सवाल है !
आप भी जानिये कि प्रमोशन बाद कितनी होगी बेसिक और कुछ वृद्धि क्या होगी ? हालाँकि छठे पे कमिशन के मुकाबले सातवें में प्रमोशन में ठेंगा ही मिलता है, जानकर चौंक जायेंगे आप |

DACP Promotion illustration ;

Suppose Basic Pay on 1 April 2018 is – 69000 /-

One bonus promotional increment – 69000 to 71100 /-
Pay Band level shifting from L-14 (5400) to L-16 (6600)

Basic pay shifting : Just NEXT to promotional Basic pay – Next to 71100 is 71400 /-
Basic after DACP – 71400 /-

Gains

Raised basic = 71400-69000 = 2400/-
Dearness Allowance (Approx. @10%) = 240/-
NPA (If availing @ 20%) = 480/-
HRA (If availing @ 8%) = 192 /-
Gross gain = 2400+240+480+192 = 3312 /-
Net gain (Deduct income tax @ 30%, NPS @ 10%) = 3312-40% = 1987 /- per month

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Clinics closed due to poor business

PETALING JAYA: As many as 500 clinics run by general practitioners (GPs) were estimated to have closed between 2014 and 2016 due to poor business.

And the Malaysian Medical Association (MMA) is worried that the situation may worsen.

Its president Dr Ravindran R. Naidu said a study involving 1,800 GPs revealed widespread concern over the financial sustainability of their clinics.

The findings from Study on the Health Economics of General Prac­titioners in Malaysia: Trends, Chal­len­ges and Moving Forward in 2016 revealed that the expenses for ma­­na­ging GP services had increased over the years due to changes in po­­licies as well as the involvement of the unregulated third party administrators (TPAs), said Dr Ravindran.

The findings showed almost 70% of clinics saw fewer than 30 patients a day, while the operating cost of a clinic in an urban area ranges from RM50,000 to RM60,000 a month.

“With the drop in number of patients and increasing cost, it will eventually lead to the natural death of the GP practice,” said Dr Ravin­dran, adding that prior to this, instances of clinics closing down were rare as they would typically be sold or passed on to others to run should the doctors retire or migrate.

Dr Ravindran argued that TPAs must take the main share of the blame as they had removed some patients from GPs.

“They negotiate with companies and take away patients from one cli­­nic and pass them to other cli­nics,” he said, adding that TPAs place restrictions on consultation fees, types of medication prescribed, while charging GPs a fee for every patient they see.

Contributory factors, said Dr Ravindran, include the overproduction of doctors and the introduction of the contract system for those in public service.

He said as the Government would only take 50% of the doctors after a four-year contract, the rest are likely to become GPs, thus saturating the sector even further.

The solution to this, argued Dr Ravindran, is that the Government has to cut down on the number of students studying medicine as there were 5,000 medical students graduating each year.

“The other alternative is to build more hospitals while all medical colleges should have their own hospitals,” he said.

The vice-president of the Medical Practitioners Coalition Association of Malaysia, Dr M. Raj Kumar, agrees that clinics seeing below 30 patients a day were unsustainable.

“A clinic needs at least 30 patients, depending on locality,” he said, adding that operating costs have skyrocketed in recent years such as the various licences needed for the practice, medicine costs that in­­crease every six months, the introduction of GST, and rise in wages for nurses and assistants.

“The poor economy is also for­cing the public to visit government clinics,” he said.

Read more at http://www.thestar.com.my/news/nation/2017/06/22/clinics-closed-due-to-poor-business-gps-seeing-fewer-patients-amid-rising-operating-costs/#04xjjQQEcJClKyLz.99