महिला रेप विक्टिम की मेडिकल जांच नहीं कर सकते पुरुष चिकित्सक

09.09.2019

राजस्थान : महिला रेप विक्टिम की मेडिकल जांच कौन चिकित्सक करेगा और कौन नहीं, इसके लिए उहापोह की स्थिति बनी हुई थी | कई बार पीडितायें भी पुरुष चिकित्सकों से चिकित्सकीय परिक्षण करवाने में असहज महसूस करती थी | ऐसे में नागौर जिला अस्पताल के फोरेंसिक एक्सपर्ट, डॉ. महावीर चोयल ने इस विषय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से इस विषय में मार्गदर्शन माँगा तब विभाग ने यह निर्देश दिए हैं कि “महिला रेप विक्टिम्स की मेडिकल जांच केवल महिला चिकित्सकों द्वारा ही की जावे” |

डॉ. चोयल द्वारा माँगा गया मार्गदर्शन और विभाग के निर्देश संलग्न है |

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

21 साल बाद बदलेगा MBBS का सिलेबस, जानें मुख्य बदलाव

21 साल बाद मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने निर्धारित किया है की MBBS के सिलेबस को बदला जाए और इसमें कुछ महत्वपूर्ण अंगों का समावेश किया जावे, जैसे की डॉक्टर-मरीज सम्बन्ध, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक शिक्षा आदि |
बदले हुए सिलेबस को वर्ष 2019 से लागु किया जाना प्रस्तावित है |

मुख्य बदलाव –

एथिक्स (नैतिकता) – चिकित्सकीय नैतिकता, जानकारी गुप्त रखना, संवेदनशीलता

कम्युनिकेशन (वार्तालाप) – मरीजों और परिजनों से प्रभावी बातचीत, फसाद से बचना

मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) – तनाव, खीज, अवसाद के प्रभावित लोगों से समन्वय और इनकी पहचान, सलाह

पब्लिक हैल्थ (जन स्वास्थ्य) – ग्रामीण स्वास्थ्य, बचाव एवं सामाजिक स्वास्थ्य, संचारी-असंचारी रोग

ऑर्गन डोनेशन (अंगदान) – जानकारी और जनजागरूकता, भ्रामक जानकारियों की रोकथाम, फायदे

उपरोक्त सभी विषय नए हैं और इनका ज्ञान नए चिकित्सकों को होना अति आवश्यक है 🙂

Water crisis at SPMC Bikaner Hostel

21 May 2018

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज,बीकानेर के होस्टल में लगातार पानी की समस्या से जूझ रहे छात्रों को आखिरकार आंदोलन का सहारा लेना पड़ा और छात्र तौलिया और बाल्टी लेकर प्रिंसिपल ऑफिस पहुंच गए !

हॉस्टल्स की हालत बहुत नाजुक है देश के भावी डॉक्टर्स सुविधाओं के अभाव में जी रहे है ना उपयुक्त नहाने धोने के लिए पानी है और ना ही प्रशासन के द्वारा पीने के पानी की सुचारू व्यवस्था करवाई जा रही है ,छात्रों को खुद के दम पर ही पानी के कैंपर मंगवाने पड़ते है।

छात्रों में भयंकर रोष देखा गया है, हालाँकि आन्दोलन के बाद कॉलेज प्रशासन की आँखें खुली हैं !

अस्पताल में मेडिको लीगल कार्य करने की जिम्मेदारी है किस डॉक्टर की ?

Rajasthan State

किसी भी अस्पताल में अगर एक ही चिकित्सक कार्यरत है तो निश्चित रूप से सभी मेडिको-लीगल कार्य करना उसकी ही जिम्मेदारी होगा |
लेकिन अगर अस्पताल में एक से अधिक चिकित्सक कार्यरत हैं तो यह जिम्मेदारी कौन निभाएगा इसके लिए राज्य सरकार ने दिशा निर्देश तय किये हैं | हालाँकि अधिकतर अस्पतालों में रोटेशन से आपसी समझ से यह कार्य किया जाता है जो की सबसे बेहतरीन स्थिति है लेकिन कई बार कुछ कीड़ादायक स्थिति उत्पन्न हो जाने पर ये दिशा निर्देश लागू होते हैं |

कनिष्ठ विशेषज्ञ फोरेंसिक मेडिसिन (JS FM Male & Female)
चिकित्सा संस्थान प्रभारी*
वरिष्ठतम कनिष्ठ विशेषज्ञ (Senior most JS of any speciality)
कनिष्ठ विशेषज्ञ (Senior JS of any speciality)
वरिष्ठतम वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (Senior most SMO)
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (Senior SMO)
चिकित्सा अधिकारी (Senior most MO)
चिकित्सा अधिकारी (Senior MO)

# उपरोक्त लिस्ट में जिम्मेदारी ऊपर से नीचे तय होगी, सबसे ऊपर वाला मेडिको लीगल कार्य संपादित करेगा, ऊपर का पद रिक्त/अवकाश होने की स्थिति में स्वतः ही उसके जस्ट नीचे वाला वो कार्य संपादित करने का उत्तरदायी होगा |
* संस्थान प्रभारी अगर अन्य कार्य में व्यस्त हैं तो उन्हें बाई-पास किया जायेगा |

# महिला चिकित्सक से बोर्ड एवं रेप केसेज की स्थिति में ही मेडिको लीगल कार्य करवाया जाए |
# फोरेंसिक मेडिसिन की महिला विशेषज्ञ होने पर समस्त कार्य करने ही होंगें |