Reduce newborn mortality in patna

राज्य सरकार प्रदेश में आपात प्रसूति, प्रसूति सेवा और नवजात शिशुओं की देखरेख की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है। इसके लिए एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) की स्वास्थ्य सेवा में सुधार की कवायद तेज कर दी गई है। एफआरयू को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।चिकित्सकों को छह माह का सीईएमओएनसी (कॉम्प्रेहेंसिव इमरजेंसी ओबेस्टेट्रिक एंड न्यूबॉर्न केयर) और एलएसएएस (लाइव सेविंग एनेसेस्थेसिया स्किल्स) का प्रशिक्षण दिया जाएगा।स्थाई और संविदा पर बहाल चिकित्सक प्रशिक्षण ले सकते हैं। चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण के बाद एफआरयू में पांच साल तक कार्य करना अनिवार्य होगा। इसके लिए उनको बांड भरना होगा। प्रशिक्षण लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त निर्धारित है।स्थाई और संविदा पर बहाल चिकित्सकों को मिलेगा मौका

मरीजों की जान बचाने में मिलेगी मदद
राज्य स्वास्थ्य समिति के अनुसार, राज्य सरकार प्रदेश में मातृत्व और शिशु मृत्यु दर को कम करने को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। इसके लिए एफआरयू की चिकित्सकीय व्यवस्था को बेहतर करने के साथ-साथ चिकित्सकों को आपात प्रसव, प्रसव सेवाओं और नवजात की देखभाल और गंभीर स्थिति में मरीजों की जान बचाने को लेकर लाइफ सेविंग एनेस्थेसिया कौशल आदि का

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Corona positive mother give birth normal child in bilaspur

09.07.2022
मातृशिशु अस्पताल में प्रसव पीड़ा से पहुंची महिला का कोरोना टेस्ट हुआ तो वो पॉजिटिव निकली। स्टॉफ ने पीपीई किट पहनकर उसकी नार्मल डिलीवरी कराई। मां पॉजिटिव होने के बाद भी शिशु निगेटिव है। दोनो को जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों ने मां और बच्चे दोनों को स्वस्थ बताया है।गनियारी निवासी कल्याणी साहू 32 वर्षी शु₹वार की सुबह प्रसव पीड़ा के साथ मातृशिशु अस्पताल पहुंची। दर्द अधिक होने के कारण पर्ची काउंटर में ही लेट गई। आनन-फानन स्टाफ द्वारा वार्ड के बिस्तर में भर्ती किया गया। एमएलसी केस होने के कारण तुरंत एंटीजन किट से उसकी कोरोना जांच हुई।प्रसूता का रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकला। इसके बाद महिला को आपरेशन थियेटर ले गए इस दौरान दर्द और बढ़ने लगा तब स्टॉफ ने पीपीई किट पहनकर प्रसुता का नॉर्मल डिलीवरी कराई। डिलीवरी के बाद नवजात की कोरोना टेस्ट किया गया तब निगेटीव निकला। जच्चा और बच्चा को मातृशिशु अस्पताल से दोनो को जिला अस्पताल के कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया है। मरीज के साथ उसके एक परिजन को भी कोविड वार्ड में रहने के लिए प्राइवेट वार्ड दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ है।

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क्या है जीका वायरस ? कैसे बचें ? क्या हैं सावधानियां ?

जयपुर में अक्टूबर, नवम्बर में 159 जीका वायरस के केस डिटेक्ट हुए हैं, यह राजस्थान का पहला जीका आउटब्रेक* है ।

जुलाई में मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ एंड फेमिली वेलफेयर ने संसद को बताया था की तीन केस अहमदाबाद में डिटेक्ट हुए थे और एक केस मिला था तमिलनाडु में ।

जीका वायरस ‘एडीज’ मच्छर से फैलता है और यह वही है जिससे डेंगू तथा चिकनगुनिया फैलता है, इसलिए इस मच्छर को पनपने से रोक कर इन तीनों बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। यह मच्छर मुख्यतया दिन में (रौशनी में) काटता है । शारीरिक संबंध बनाने और खून चढ़ाने से भी इसके फैलने की संभावना रहती है।
बीमारी के लक्षण – हल्का बुखार, लाल दाने, आँखों का आना, जॉइंट पेन, थकान, सरदर्द आदि । जीका में कई बार लक्षण नहीं दिखते हैं। बीमारी बढ़ने पर न्यूरोलॉजिकल और ऑर्गन फैलियर हो सकते हैं। ये लक्षण दो से सात दिन रहते हैं ।

इस रोग की पहचान के लिए होने वाली जाँचों में रक्त, मूत्र या लार संबंधी परीक्षण शामिल हैं, जो बीमार व्यक्ति में इस वायरस के आरएनए के होने का पता लगाने के लिए की जाती हैं। कोई वैक्सीन और ख़ास उपचार नहीं है, बुखार की दवा लेनी है, खूब फ्लूड लेना है ।

जीका का वायरस जानलेवा नहीं है, इसलिए इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है, हालांकि गर्भवती महिलाओं में पहली तिमाही में बच्चे के लिए यह वायरस खतरनाक साबित हो सकता है क्यूंकि यह रोग गर्भवती माँ से गर्भस्थ शिशु में जा सकता है (वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन) और शिशु के सिर के अपूर्ण विकास (Microcephaly#) की वजह बन सकता है। जीका वायरस के लिए टेस्ट की सुविधा जयपुर के एसएमएस के अलावा झालावाड़, बीकानेर, जोधपुर तथा कोटा में भी उपलब्ध है। (Reverse transcription (RT)-PCR of acute-phase serum samples is the test of choice.)
जिस इलाके में जीका आउटब्रेक हुआ है, वहां के आसपास के प्राइवेट अस्पतालों को भी बुखार के मरीजों और गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच करते हुए समयबद्ध सुचना विभाग को देने के निर्देश दिए गए ।

मच्छरों द्वारा काटे जाने से बचना महत्वपूर्ण है, इनमें मच्छर भगाने वाले उपाय अमल में लाना, कपड़ों से शरीर का अधिकतम भाग ढँककर रखना, मच्छरदानी का प्रयोग, मच्छर पुनर्जनन रोकने हेतु साफ़ तथा ठहरे पानी को हटाना जैसी बातें शामिल होती हैं, सभी घरों में कूलर अथवा टंकियों में पानी भरने के कारण मच्छरों के लार्वा पनप सकते हैं अतः अपने अपने घरों की सफाई जिम्मेदारीपूर्वक करते हुए जीका की रोकथाम में आप मदद कर सकते हैं ।

जीका वायरस

खोज – 1947 में युगांडा के जीका फोरेस्ट में येलो फीवर का शोध कर रहे पूर्वी अफ्रीकी विषाणु अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक, रीसस मकाक (एक प्रकार का लंगूर) को पिंजरे में रख कर अपना शोध कर रहे थे, उस बंदर को बुखार हो जाता है और उसमें जीका वायरस पाया जाता है |
पहला आउटब्रेक – 2007 में माइक्रोनेशिया में (185 केस) जिसे पहले डेंगू या चिकनगुनिया समझा जा रहा था, फिर 2015 में ब्राजील में आउटब्रेक हुआ |

  • आउटब्रेक – किसी भी जगह पर अचानक, अनुमान से ज्यादा किसी बीमारी के मरीजों का मिलना |
  • # Microcephaly – When the Zika virus strikes unborn babies, it reduces the (more…)

PMMVY Pradhan Mantri Matritva Vandana Yojana

Maternity Benefits Under Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana
 

            The maternity benefits under Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY) are available to all Pregnant Women & Lactating Mothers (PW&LM) except those in regular employment with the Central Government or State Government or Public Sector Undertaking or those who are in receipt of similar benefits under any law for the time being in force, for first living child of the family as normally, the first pregnancy of a woman exposes her to new kind of challenges and stress factors. The objectives of the scheme are: (i) providing partial compensation for the wage loss in terms of cash incentives so that the woman can take adequate rest before and after delivery of the first living child; and (ii) the cash incentives provided would lead to improved health seeking behaviour amongst the Pregnant Women and Lactating Mothers (PW&LM).

However, to address the problem of malnutrition and morbidity among children, the Anganwadi Services Scheme, which is universal, is available to all PW&LM including the second pregnancy. Further, in order to address the malnutrition and morbidity during pregnancies a number of interventions are provided to the pregnant women viz. universal screening of pregnant women for Anaemia and Iron and Folic Acid (IFA) supplementation, Calcium supplementation in pregnancy, Deworming in pregnancy, Weight gain monitoring and Counselling on nutrition, family planning and prevention of diseases.

The Government of India has approved Pan-India implementation of PMMVY in all districts of the country w.e.f. 01.01.2017 under which the eligible beneficiaries gets Rs. 5,000/- under PMMVY and the remaining cash incentive as per approved norms (+1000 for urban) towards Maternity Benefit under Janani Suraksha Yojana (JSY) after institutional delivery so that on an average, a woman gets Rs. 6000/-.

 

Child care leave Rajasthan CCL

चाइल्ड केयर लीव
तीन स्थितियों में ली जा सकती है – बच्चे की देखभाल अथवा परीक्षा अथवा बीमारी में, यानि बच्चे की परीक्षा और बीमारी ही होना आवश्यक नहीं है बल्कि सामान्य पालन हेतु भी छुट्टी मिलती है 🙂
1- राजस्थान सेवा नियम 1951 में नया नियम *103 C चाइल्ड केअर लीव* जोड़ा गया।
2- एक महिला कर्मिक को उसके पूरे सेवाकाल में सबसे बड़े दो बच्चों के पालन पोषण व जरूरत के समय देखभाल यथा बीमार होने, परीक्षा इत्यादि के लिए अधिकतम *2 वर्ष जो कि 730 दिन* के लिए ये, अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत की जा सकेगी।
3- तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।
4- चाइल्ड का तात्पर्य उसकी *आयु 18 वर्ष से कम हो*। *40%* या उससे अधिक विकलांगता की स्थिति में *22 वर्ष* तक चाइल्ड माना जायेगा।
5- यह *सवैतनिक अवकाश* होगा।  अवकाश प्रस्थान से पूर्व जो वेतन आहरित किया जा रहा है वो इस अवकाश काल में देय होगा।
6- इसे अन्य किसी भी देय अवकाश के साथ लिया जा सकेगा।
7- इस अवकाश के लिए आवेदन राज्य सरकार द्वारा जारी *अनुमोदित प्रारूप* में स्वीकृती हेतु समयानुरूप आवेदन करना होगा।
8- चाइल्ड केयर लीव अधिकार नही है। किसी भी स्थिति में महिला कार्मिक बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति के अवकाश पर प्रस्थान नहीं कर सकेगी।
9- किसी भी स्थिति में अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रही महिला कार्मिक को यह अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायेगा अगर बाद में इस अवकाश हेतु आवेदन किया है तो।
10- *पहले लिए जा चुके अवकाश* और वर्तमान में धारित अवकाश को किसी भी सूरत में चाइल्ड केयर लीव में *परिवर्तित नही* किया जा सकेगा।
11- इस अवकाश को अन्य अवकाश लेखो में से नहीं घटाया जा सकेगा।  राज्य सरकार द्वारा निर्धारित फॉर्म में इन अवकाशों को संधारित किया जाएगा। तथा ये फॉर्म सेवा पुस्तिका में चिपकाया जाएगा।
12- सक्षम अधिकारी आवेदित अवकाश को स्वीकृत करने से *मना भी कर सकता* अगर राज कार्य प्रभावित होते होते हों अथवा विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति नहीं हो पा रही हों।
13-  *एक कलेंडर वर्ष में तीन बार से अधिक ये अवकाश नहीं लिया जा सकेगा।* एक स्पेल जो कि एक कैलेंडर वर्ष में शुरू हुआ और अगले कैलेंडर वर्ष में खत्म हो है तो ऐसी स्थिति में उसे, जिस कलेंडर वर्ष में अवकाश शुरू हुआ है उसमें गिना जाएगा।
14- सामान्यता *प्रोबेशनर्स को यह अवकाश देय नही होगा*।यद्धपी फिर भी विशेष परिस्थितियों कोई ये अवकाश लेता है तो उसका प्रोबेशन अवकाश अवधि के बराबर आगे बढ़ाया जाएगा।
15- यह अवकाश उपार्जित अवकाश की भांति ही ट्रीट होगा। तथा उसी प्रकार स्वीकृत किया जा सकेगा।
16- इस अवकाश के प्रारम्भ अथवा अंत में आने वाले रविवार, सार्वजनिक अवकाश घटाए जायेंगे।
17- दिव्यांग चाइल्ड के लिए ये अवकाश लेने पर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही स्वीकृत किया जा सकेगा।
18- चाइल्ड के बीमार होने पर व बाहर रहने की स्थिति में डॉक्टर के प्रमाण के आधार पर ये अवकाश लिया जा सकेगा।
19- चाइल्ड की परीक्षा होने पर लिया जा सकेगा। यदि चाइल्ड होस्टल में रहता है तो महिला कार्मिक को यह तथ्य प्रस्तुत करना होगा कि होस्टल में आपकी केअर की जरूरत कैसे है। इसका प्रमाण प्रस्तुत करने पर ही हॉस्टलर्स चाइल्ड के लिए ये अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।।
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2. Clarification

Maternal Death Review and Verbal Autopsy